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	<title>New delhi Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न जी20 देशों में सबसे ज्यादा टिकाऊ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Oct 2024 07:44:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[G20 countries]]></category>
		<category><![CDATA[Good food]]></category>
		<category><![CDATA[India's food consumption pattern is most sustainable among G20 countries]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 10 अक्टूबर। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की हाल ही में जारी &#8216;लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट&#8217; ने वैश्विक खाद्य उपभोग पैटर्न</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 10 अक्टूबर। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की हाल ही में जारी &#8216;लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट&#8217; ने वैश्विक खाद्य उपभोग पैटर्न पर प्रकाश डाला है और भारत को अपने टिकाऊ खाद्य उपभोग के लिए विशेष प्रशंसा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न न केवल टिकाऊ है, बल्कि अन्य देशों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि वैश्विक स्तर पर भारत के खाद्य उपभोग पैटर्न को अपनाया जाता है, तो पृथ्वी की जलवायु को कम से कम नुकसान पहुँचेगा और 2050 तक दुनिया की खाद्य उत्पादन आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की रिपोर्ट का सारांश</strong></p>
<p>डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की &#8216;लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट&#8217; के मुताबिक, भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न G20 देशों में सबसे अधिक टिकाऊ है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर सभी देश भारत के खाद्य उपभोग पैटर्न का पालन करते हैं, तो पृथ्वी पर जलवायु पर सबसे कम प्रभाव पड़ेगा। इसका तात्पर्य यह है कि खाद्य उत्पादन को समर्थन देने के लिए 2050 तक &#8216;एक पृथ्वी से भी कम&#8217; की आवश्यकता होगी, जो जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों के अनुरूप है। इसके विपरीत, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देश सबसे खराब स्थिति में हैं, जिन्हें टिकाऊ बेंचमार्क के अनुसार कई पृथ्वियों की आवश्यकता होगी।</p>
<p><strong>वैश्विक खाद्य उपभोग पैटर्न और उनके प्रभाव</strong></p>
<p>इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि अगर विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मौजूदा खाद्य उपभोग पैटर्न को जारी रखती हैं, तो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करने के 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को 263 प्रतिशत तक पार कर लिया जाएगा। इसका अर्थ यह होगा कि मानवता को अपनी भोजन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक से अधिक पृथ्वियों की आवश्यकता होगी। अर्जेंटीना का खाद्य उपभोग पैटर्न सबसे अधिक अस्थिर पाया गया, जिसके तहत इस देश को 7.4 पृथ्वियों की आवश्यकता होगी। इसी प्रकार, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 6.8 और 5.5 पृथ्वियों तक पहुंचता है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर खाद्य उपभोग पैटर्न में बदलाव की अत्यधिक आवश्यकता है।</p>
<p><strong>भारत का बाजरा मिशन और उसकी सफलता</strong></p>
<p>रिपोर्ट में भारत के बाजरा मिशन की विशेष रूप से सराहना की गई है। बाजरा, जिसे पोषक-अनाज भी कहा जाता है, न केवल पौष्टिक है बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी अधिक लचीला है। भारत ने बाजरा की खपत को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया है, जिससे इस प्राचीन अनाज का पुनरुत्थान हो रहा है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बाजरा जैसे जलवायु-अनुकूल अनाज के उपयोग से न केवल खाद्य उत्पादन के लिए आवश्यक भूमि की मात्रा में कमी आएगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभकारी होगा। चरागाह भूमि को अन्य उद्देश्यों जैसे प्रकृति बहाली और कार्बन पृथक्करण के लिए उपयोग किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत का स्थान</strong></p>
<p>भारत के टिकाऊ खाद्य उपभोग पैटर्न की सराहना करते हुए, रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर सभी देश भारत के पैटर्न को अपनाते हैं, तो केवल 0.84 पृथ्वी की आवश्यकता होगी। अन्य देशों की तुलना में यह आंकड़ा सबसे बेहतर है। उदाहरण के लिए, अर्जेंटीना को 7.4 पृथ्वियों की आवश्यकता होगी, ऑस्ट्रेलिया को 6.8, अमेरिका को 5.5, और ब्राज़ील को 5.2 पृथ्वियों की आवश्यकता होगी। भारत के बाद इंडोनेशिया (0.9 पृथ्वियों की आवश्यकता) और चीन (1.7) बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि भारत ने अपने खाद्य उपभोग पैटर्न को एक ऐसा रूप दिया है, जो अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक स्थायी है।</p>
<p><strong>जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव</strong></p>
<p>जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिक टिकाऊ आहार अपनाने से खाद्य उत्पादन के लिए आवश्यक भूमि की मात्रा कम हो जाएगी। पौधे-आधारित मांस विकल्प और उच्च पोषण मूल्य वाली शैवाल प्रजातियों को बढ़ावा देने से न केवल पर्यावरणीय नुकसान कम होगा बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा देगा। भारत का बाजरा मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल लोगों को पौष्टिक आहार प्रदान कर रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रख रहा है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें</strong></p>
<p>रिपोर्ट ने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशें भी प्रस्तुत की हैं। इसमें कहा गया है कि जलवायु-अनुकूल फसलों, पौधे-आधारित प्रोटीन स्रोतों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके खाद्य उत्पादन और उपभोग के तरीके 1.5 डिग्री सेल्सियस की वार्मिंग सीमा के अनुरूप हों। इसके लिए, नीतिगत परिवर्तन और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता होगी ताकि लोग अपने आहार में टिकाऊ विकल्पों को प्राथमिकता दें।</p>
<p>डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खाद्य उपभोग पैटर्न न केवल टिकाऊ है, बल्कि यह अन्य देशों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर टिकाऊ खाद्य प्रणालियों को अपनाने के लिए भारत के प्रयासों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। अगर बाकी दुनिया भारत के पैटर्न को अपनाती है, तो जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव होगा और पृथ्वी की संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस प्रकार, इस रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि जलवायु-अनुकूल आहार और टिकाऊ खाद्य उत्पादन पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट प्रयासों की आवश्यकता है।</p>
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		<title>किसी खास धर्म के लिए अलग कानून नहीं हो सकता, हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं- सुप्रीम कोर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Oct 2024 10:04:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Bulldozer Justice]]></category>
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		<category><![CDATA[we are a secular country- Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[बुलडोजर न्याय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8220;हम यह स्पष्ट करने जा रहे हैं कि सिर्फ इसलिए कि</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/there-cannot-be-a-separate-law-for-any-particular-religion-we-are-a-secular-country-supreme-court/">किसी खास धर्म के लिए अलग कानून नहीं हो सकता, हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं- सुप्रीम कोर्ट</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>बुलडोजर कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#8220;हम यह स्पष्ट करने जा रहे हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति आरोपी या दोषी है, उसे ध्वस्त नहीं किया जा सकता।&#8221;</p>
<p>नई दिल्ली 1 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति को सिर्फ इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता कि वह आरोपी या दोषी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को &#8216;बुलडोजर न्याय&#8217; पर अपना रुख दोहराया और कहा कि सिर्फ आरोप या जघन्य अपराध के लिए दोषी ठहराया जाना संपत्ति के ध्वस्तीकरण का आधार नहीं हो सकता।  हालांकि, जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि किसी खास धर्म के लिए अलग कानून नहीं हो सकता। पीठ ने कहा कि वह सार्वजनिक सड़कों, सरकारी जमीनों या जंगलों पर किसी भी अनधिकृत निर्माण को संरक्षण नहीं देगी। पीठ ने कहा, &#8220;हम यह सुनिश्चित करने का ध्यान रखेंगे कि हमारा आदेश किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने वालों की मदद न करे।&#8221; पीठ ने कहा, &#8220;अगर उल्लंघन करने वाली दो संरचनाएं हैं और सिर्फ एक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। यदि आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई आपराधिक मामला है, तो उसके लिए कुछ समाधान निकाला जाना चाहिए, कुछ न्यायिक निरीक्षण की आवश्यकता है।&#8221; शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके दिशा-निर्देश पूरे देश में और सभी समुदायों पर लागू होंगे। &#8220;हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं और अदालत द्वारा बनाए गए कोई भी दिशा-निर्देश सभी समुदायों पर लागू होंगे।</p>
<p>सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि किसी भी अपराध में शामिल होना या यहां तक ​​कि आपराधिक मामले में दोषसिद्धि भी विध्वंस करने का आधार नहीं हो सकती। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अधिकारियों द्वारा किए गए अधिकांश विध्वंस वास्तविक हैं और केवल 2 प्रतिशत ही विध्वंस न्याय का हिस्सा हो सकते हैं। मेहता ने शीर्ष अदालत से आगे कहा कि नोटिस दिया जाना चाहिए और विध्वंस अभियान से पहले दस दिन का समय दिया जाना चाहिए और परिसर पर नोटिस चिपकाना केवल तभी किया जाना चाहिए जब नोटिस नहीं दिया जा सका हो। इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों और उनके अधिकारियों को बिना उसकी मंजूरी के 1 अक्टूबर तक कोई भी विध्वंस कार्य न करने का निर्देश देते हुए &#8216;बुलडोजर न्याय&#8217; पर रोक लगा दी थी। साथ ही, न्यायालय ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को इस प्रथा का महिमामंडन करना या इस पर दिखावा करना बंद कर देना चाहिए। बुलडोजर को दंडात्मक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह संविधान के मूल्यों के खिलाफ है और इस पर न्यायिक निगरानी की जरूरत है। न्यायमूर्ति बी आर गवई और के वी विश्वनाथन ने कहा कि कार्यपालिका द्वारा इसके दुरुपयोग की आशंका है। जो न्यायाधीश के रूप में कार्य नहीं कर सकता &#8216;बुलडोजर न्याय&#8217; शब्द, जैसा कि जनता द्वारा संदर्भित किया जाता है, तत्काल न्याय तंत्र का एक रूप है जिसमें किसी अपराध के आरोपी व्यक्तियों के घरों, दुकानों या किसी भी परिसर को ध्वस्त करना शामिल है,</p>
<p>राजस्थान और मध्य प्रदेश के दो पीड़ित घर मालिकों ने अपने-अपने राज्यों द्वारा उनके घरों को ध्वस्त करने के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और तत्काल सुनवाई की मांग की। राजस्थान के मामले में, किराएदार के बेटे द्वारा किए गए कथित अपराध के कारण एक घर को ध्वस्त कर दिया गया था, जबकि मध्य प्रदेश में, एक संयुक्त परिवार के पैतृक घर को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया था।</p>
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		<title>भगवान तिरुपति भी हुए राजनीति के शिकार, एन चंद्रबाबू नायडू के बयान संवैधानिक नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Sep 2024 15:20:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Laddus Controversy]]></category>
		<category><![CDATA[N Chandrababu Naidu's]]></category>
		<category><![CDATA[New delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हम उम्मीद करते हैं कम से कम भगवान को तो राजनीति से दूर रखा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट नई</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/lord-tirupati-also-became-a-victim-of-politics-n-chandrababu-naidus-statement-is-not-constitutional/">भगवान तिरुपति भी हुए राजनीति के शिकार, एन चंद्रबाबू नायडू के बयान संवैधानिक नहीं</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">हम उम्मीद करते हैं कम से कम भगवान को तो राजनीति से दूर रखा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट</p>
<p>नई दिल्ली 30 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के इस दावे पर सवाल उठाया कि तिरुपति के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। कोर्ट ने इस दावे का सबूत मांगा और कहा कि मुख्यमंत्री ने 18 सितंबर को यह बयान दिया, जबकि एफआईआर 25 सितंबर को दर्ज की गई थी और विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन 26 सितंबर को किया गया था। तिरुपति के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं सहित कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र सरकार द्वारा अपने दावे के समर्थन में पेश की गई रिपोर्ट पर चिंता जताई।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा-  सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र सरकार को फटकार लगाई और घी में जानवरों की चर्बी होने का दावा करने वाली रिपोर्ट पर आशंका जताई। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा, &#8220;रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। यदि आपने पहले ही जांच के आदेश दे दिए थे, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी? रिपोर्ट जुलाई में आई, बयान सितंबर में आया।&#8221; उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रथम दृष्टया संकेत देती है कि तैयारी में मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। पीठ ने धार्मिक मामलों में कथित राजनीति की भागीदारी की आलोचना करते हुए कहा, &#8220;हमारा प्रथम दृष्टया मानना ​​है कि जब जांच चल रही थी, तो उच्च संवैधानिक पदाधिकारी द्वारा बिना किसी आधार के ऐसा बयान देना उचित नहीं था, जिससे जनता की भावनाएं आहत हो सकती हैं।&#8221; आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने पूछा कि जब जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके थे, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी। &#8220;लैब रिपोर्ट में कुछ अस्वीकरण हैं। यह स्पष्ट नहीं है, और यह प्रथम दृष्टया संकेत देता है कि यह अस्वीकृत घी था, जिसका परीक्षण किया गया था। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने पूछा कि यदि आपने स्वयं जांच का आदेश दिया है, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह निर्णय लेने में सहायता मांगी कि क्या राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी को जांच जारी रखनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए। न्यायालय ने कहा, &#8220;यह उचित होगा कि एसजी हमें यह निर्णय लेने में सहायता करें कि क्या पहले से नियुक्त एसआईटी को जांच जारी रखनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/lord-tirupati-also-became-a-victim-of-politics-n-chandrababu-naidus-statement-is-not-constitutional/">भगवान तिरुपति भी हुए राजनीति के शिकार, एन चंद्रबाबू नायडू के बयान संवैधानिक नहीं</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>लुटती रही जनता, सोते रहे जिम्मेदार, अब कब जागेगी सरकार</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/the-public-kept-getting-looted-the-responsible-kept-sleeping-now-when-will-the-government-wake-up/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 06:04:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साइबर अपराधों को रोकने में विफल रही एजेंसियां, दर्ज शिकायतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि नई दिल्ली, 27</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-public-kept-getting-looted-the-responsible-kept-sleeping-now-when-will-the-government-wake-up/">लुटती रही जनता, सोते रहे जिम्मेदार, अब कब जागेगी सरकार</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>साइबर अपराधों को रोकने में विफल रही एजेंसियां, दर्ज शिकायतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 27 सितंबर। अपनी आम जरूरत को काटकर बैंकों में अपनी बचत जमा करने वाले आम लोग जो अब बड़े पैमाने पर साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, इस साल अगर हम दर्ज शिकायतों की ही बात करें तो अब तक 6 महीने में ही केवल 61000 से ज्यादा साइबर शिकायतें दर्ज की गई हैं जो पिछले साल दर्ज की गई साइबर शिकायतों की तुलना में 11 प्रतिशत ज्यादा है। नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल ने जनवरी से जून के बीच 2023 में 55267 शिकायतें दर्ज की लेकिन इस साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 61525 तक पहुंच गया है। इस साल नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल द्वारा दर्ज किए गए साइबर अपराध में कई तरह की विविधताएं देखने को मिल रही है जो एजेंसियों को परेशान करने वाली है साइबरबुलिंग, स्टॉकिंग, सेक्सटिंग (2,926 शिकायतें), नकली प्रतिरूपण प्रोफ़ाइल (1,799), प्रोफ़ाइल हैकिंग (2,065), ई-वॉलेट धोखाधड़ी (938), प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (828), अनधिकृत डेटा उल्लंघन (680) और ऑनलाइन नौकरी धोखाधड़ी (324) शामिल हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-2723 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-284x300.jpg" alt="" width="284" height="300" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-284x300.jpg 284w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-971x1024.jpg 971w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-768x810.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1457x1536.jpg 1457w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1942x2048.jpg 1942w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1024x1080.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-24x24.jpg 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424.jpg 1962w" sizes="(max-width: 284px) 100vw, 284px" /></p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने बात करते हुए बताया कि यह जो साइबर क्राइम करने वाले लोग हैं यह कमजोर लोगों के डर और इच्छाओं का फायदा उठाते हैं अभी हाल में दर्ज की गई घटनाओं में ऐसी डिजिटल गिरफ्तारियों के मामले सामने आए हैं जहां अपराधियों ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में लोगों से कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी है और उससे जुड़े कूरियर से अवैध पदार्थ जप्त किए जाने का झूठा बहाना बनाकर पैसे देने के लिए मजबूर किया है इन मामलों में साइबर अपराधी डर और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं जो व्यक्ति को सोचने में असमर्थ बना देता है और उन्हें अपराधियों की मांगों का पालन करने के लिए मजबूर कर देता है।<br />
इसी तरह साइबर अपराधी लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए भ्रामक रणनीति अपनाते हैं कि वह धोखाधड़ी वाली निवेश योजना के माध्यम से आपकी संपत्ति में काफी वृद्धि कर सकते हैं पीड़ितों को अक्सर अधिक रिटर्न के वादों से लुभाया जाता है जिससे वह फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन में निवेश कर देते हैं। विश्वास हासिल करने के लिए साइबर अपराधी शुरू में छोटे-छोटे लाभ प्रदान कर सकते हैं जिससे प्रेरित होकर व्यक्ति बड़ा निवेश करता है और अंत में वह बड़ी रकम लेकर गायब हो जाते हैं।</p>
<p>इन साइबर अपराधियों के शिकार होने से खुद को बचाने का सबसे प्रभावशील तरीका उनके काम करने के तरीके को अच्छी तरह समझना है,  ऐसी घटनाओं को रोकने में जागरूकता अहम भूमिका निभाती है साइबर अपराध की तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करके व्यक्ति खुद को वित्तीय नुकसान से बचा सकता है। लोगों को फंड ट्रांसफर करने और दूसरों के साथ ओटीपी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।</p>
<p>साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के बारे में पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उनके ठिकानों में अभी भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ है यह जालसाज देश भर के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं लेकिन प्राथमिक हॉटस्पॉट पहले जैसे ही हैं। उनकी गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा नूंह (हरियाणा) जामताड़ा और सिंहभूमि (झारखंड) से आता है। साइबर जालसाजी बहुस्तरीय संचार और तकनीकी रणनीतियों का उपयोग करते हैं जिससे इन साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें पकड़ना कठिन हो जाता है वह अपनी पहचान और ठिकानों को छुपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का उपयोग करते हैं। इनके पास उनके निर्देशन में काम करने वाले व्यक्तियों का एक बड़ा नेटवर्क होता है जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं कुछ बैंक खाता उपलब्ध कराते हैं कुछ फंड को क्रिप्टो करेंसी में बदलने की सुविधा प्रदान करते हैं जबकि और लोग अवैध आय को निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं।<br />
इन सभी के मुखिया की गुमनामी सुनिश्चित करने के लिए यह सभी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से काम करते हैं जिससे मुखिया के पकड़े जाने की चुनौती कम हो जाती है साइबर अपराध की पीड़ित या तो 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल पर कर सकते हैं वह नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन भी जा सकते हैं</p>
<p style="text-align: center;"><strong>प्रभात भारत कथन </strong></p>
<p><strong>अधिक से अधिक लोग मोबाइल फोन और कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं यह तो तय है कि साइबर अपराध बढ़ेगा समय की मांग है कि अधिक से अधिक सावधानी बरती जाए खासकर रूपयों के लेनदेन से जुड़े मामले में इससे पहले भी यह हम लोग बता चुके हैं और फिर से यह बताना जरूरी है कि अपने पासवर्ड आसान न बनाएं और ओटीपी नंबर कभी भी किसी के भी साथ साझा ना करें</strong></p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-public-kept-getting-looted-the-responsible-kept-sleeping-now-when-will-the-government-wake-up/">लुटती रही जनता, सोते रहे जिम्मेदार, अब कब जागेगी सरकार</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<item>
		<title>सन फार्मास्युटिकल्स, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, एल्केम हेल्थ साइंस के दवाओं के नमूने हुए फेल, कंपनी ने झाड़ा पल्ला</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/samples-of-medicines-of-sun-pharmaceuticals-glenmark-pharmaceuticals-alkem-health-science-failed-the-company-washed-its-hands-off/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 01:51:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 सितंबर। उच्च रक्तचा,  गैस और अपच जैसे सामान्य परेशानियों के लिए बाजार में बेची जाने</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 सितंबर। उच्च रक्तचा,  गैस और अपच जैसे सामान्य परेशानियों के लिए बाजार में बेची जाने वाली 50 से अधिक दावों को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने अभी अपने हाल के सर्वेक्षण में मानक गुणवत्ता के विपरीत पाया है नई दावों और समय-समय पर परीक्षणों के अनुमोदन के लिए जिम्मेदार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने अलर्ट जारी किया है जिसमें बताया गया है कि ऐसी दवाई बाजार में खुलेआम बेची जा रही हैं सीडीएससीओ के द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले ही महीने विभिन्न कंपनियों द्वारा निर्मित 50 से अधिक दावों के कुछ बैच मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए हैं इसमें प्रमुख कंपनियों द्वारा बेची जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं उदाहरण के लिए <strong>सन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित पल्मोसिल (सिल्डेनाफिल इंजेक्शन)</strong> का एक विशिष्ट बैच मानक गुणवत्ता का नहीं पाया गया। हालांकि, कंपनी ने सीडीएससीओ को दिए अपने जवाब में दावा किया कि उत्पाद का दूषित बैच उसके द्वारा निर्मित नहीं किया गया था इसी कंपनी द्वारा निर्मित <strong>पेंटोसिड</strong> का एक खास बैच, जो आमतौर पर एसिड रिफ्लक्स और अपच के लिए इस्तेमाल किया जाता है, भी नकली पाया गया। <strong>ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स</strong> द्वारा निर्मित ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दो दवाओं के मिश्रण <strong>टेल्मा एच (टेल्मिसर्टन 40mg और हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड 12.5mg टैबलेट आईपी)</strong> का एक खास बैच गैर-मानक पाया गया। ग्लेनमार्क ने भी दावा किया कि वह खास बैच उसके द्वारा नहीं बनाया गया था। एक अन्य प्रमुख दवा कंपनी <strong>एल्केम हेल्थ साइंस</strong> द्वारा निर्मित <strong>एमोक्सिसिलिन और पोटेशियम क्लैवुलैनेट टैबलेट आईपी (क्लैवम 625)</strong> का भी एक बैच मानकों पर खरा नहीं उतरा। सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, &#8220;किसी दवा के किसी खास बैच के मानकों पर खरा न उतरने का मतलब यह नहीं है कि उस नाम से बेची जा रही सभी दवाएँ घटिया हैं। साथ ही, गुणवत्ता संबंधी मुद्दों की समय-समय पर निगरानी की जाती है और अक्सर किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या को रोकने के लिए तुरंत समाधान किया जाता है।&#8221; दवा नियामक निकाय नियमित आधार पर नमूनाकरण और परीक्षण करते हैं ताकि अधिकारियों को अच्छे विनिर्माण (जीएमपी) के संभावित उल्लंघन के बारे में पता लगाया जा सके और उन्हें सचेत किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि वांछित मानकों में कमी वाले नमूनों की संख्या में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार दबाव बनाए रखना जारी रखती है, इसलिए विनिर्माण प्रक्रिया में सुधार होता है और कोई उल्लंघन नहीं होता है।</p>
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		<item>
		<title>न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Sep 2024 01:32:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
		<category><![CDATA[New delhi]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/">न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती कार्यवाही के वीडियो के उपयोग और अपलोडिंग पर रोक लगाते हुए एक अंतरिम आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8211; फेसबुक, एक्स और यूट्यूब को निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा ऐसे वीडियो अपलोड करने की अनुमति नहीं देने और पहले अपलोड किए गए वीडियो को हटाने का निर्देश दिया। यह आदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद की विवादास्पद टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें बेंगलुरु में एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को पाकिस्तान के रूप में संदर्भित किया गया था और एक महिला वकील के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। उनकी टिप्पणी का वीडियो क्लिप वायरल हो गया था। न्यायाधीश की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए, पांच न्यायाधीशों वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने शुक्रवार को हाई कोर्ट से रिपोर्ट मांगी और चेतावनी दी कि &#8220;हम पर नजर रखी जा रही है&#8221;, सीजेआई ने न्यायाधीशों से संयम से काम लेने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखने और उन्हें सार्वजनिक उपहास से बचाने में मदद करने के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करेगा। जस्टिस श्रीशानंद ने शनिवार को कोर्ट में अपनी टिप्पणी पर खेद जताया था। हालाँकि, न्यायमूर्ति चंदनगौदर ने अपने अंतरिम आदेश में बताया कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को रोकना दुरुपयोग को रोकने का समाधान नहीं था, जैसा कि याचिकाकर्ता, बेंगलुरु के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने तर्क दिया था।  एसोसिएशन ने दावा किया कि शरारती तत्व नियमों का उल्लंघन करते हुए शरारती एजेंडे के साथ अदालती कार्यवाही के लाइव-स्ट्रीम किए गए वीडियो को संपादित कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि इन क्लिपों तक पहुंचने वाले लोगों को उचित कानूनी ज्ञान के बिना आंशिक रूप से देखने के बाद अदालती कार्यवाही और न्यायपालिका के बारे में गलत राय बनाने के लिए गुमराह किया गया था।</p>
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		<title>क्या विदेशी स्रोतों से भी लिये गये हैं राजनैतिक चंदे, इक्कीस मार्च को होगा खुलासा</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/have-political-donations-been-taken-from-foreign-sources-also-will-be-revealed-on-21st-march/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Mar 2024 16:11:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
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		<category><![CDATA[चुनावी चंदा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अम्बिकेश्वर पाण्डेय। भारत में सर्वोच्च न्यायालय के संविधान पीठ ने एक बार फिर साबित किया है कि वह</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/have-political-donations-been-taken-from-foreign-sources-also-will-be-revealed-on-21st-march/">क्या विदेशी स्रोतों से भी लिये गये हैं राजनैतिक चंदे, इक्कीस मार्च को होगा खुलासा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>अम्बिकेश्वर पाण्डेय। भारत में सर्वोच्च न्यायालय के संविधान पीठ ने एक बार फिर साबित किया है कि वह हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने और सुरक्षित रखने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। चुनावी बांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आये निर्णय और दिखाई गई सख्ती से भारत की जनता में जो पढ़ी लिखी है उसमें न्यायालय के प्रति एक विश्वास जगह है कि न्यायालय ही हैं जो अब राजनैतिक चंदे और मनी लैंडिंग अधिनियम की संभावनाओं को खत्म कर सकता है<br />
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए राजनैतिक चंदों की डिटेल से एक बात तो साबित हो गई है कि भारत में विदेशी स्रोतों से राजनैतिक चंदे भी लिए गए जिनकी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम उन्नीस सौ इक्यावन में सख्त रूप से मनाही है</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2495" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-300x163.jpeg" alt="" width="300" height="163" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-300x163.jpeg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-1024x556.jpeg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-768x417.jpeg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-1536x833.jpeg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/images-4-2048x1111.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>भारतीय लोकतंत्र में राजनैतिक पार्टियों के पास अपनी अपनी समस्या हैं राजनेताओ की माने तो एक लोकसभा क्षेत्र में 20 लाख मतदाता हो सकते हैं। लोकसभा का क्षेत्रफल भी काफी बडा होता है। राजनैतिक पार्टियों और उम्मीदवारों को हर मतदाता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का सहारा लेना पड़ता है और जब से तकनीक का विकास हुआ सबसे माध्यम भी अलग-अलग इस तरीके से बढ गए जो कॉफी महंगे भी होते हैं। आधुनिक युग में अब जब तकनीक का विकास हो चुका है तो नए नए तरीके प्रचार के उपलब्ध हो गए लेकिन वह सभी काफी खर्चीले भी है। अब तो एक नया ट्रेंड चल गया है। चुनाव में जीतने की संभावनाओं पता करने के लिए राजनैतिक दल अब प्राइवेट फर्मों से प्रमुख समस्याओं पर अध्ययन और सर्वे कराने लगे हैं जिससे उनको क्षेत्र की मुख्य समस्या का पता चल जाता है।</p>
<p>यहां तक कि कौन सा उम्मीदवार जीत रहा है इसका भी एक आइडिया मिल जाता है। इन सर्वे कार्यों में भी राजनैतिक दल बडा व्यय करते हैं अब जब सर्वे से उनको मुख्य समस्या का पता चल जाता है तो अगर उनकी सरकार है तो वे उस समस्या के संबंध में सरकार से आदेश पास करा लेते हैं और अगर वह विपक्ष में तो उसी समस्या का उस मतदाता के सामने निदान करने का वादा करते हैं। इस परिस्थिति में व्यय बढता ही चला जाता है।</p>
<p>अभी चुनाव आयोग की नियमों को देखें तो जो उम्मीदवार होता है उसके खर्च की तो सीमा है लेकिन पार्टी के खर्च की कोई सीमा नहीं है ऐसे में राजनैतिक चंदे की जरूरत पडती है क्योंकि बिना चुनावी चंदे के लड़ना और जीतना असंभव सा लगता है। बीते 5 वर्षों में राजनीतिक दलों को ₹160 अरब का राजनैतिक चंदा मिला है। इन चंदों को लेने में न ही कानून का पालन किया किया गया और न ही आम मतदाता के अधिकारों को सुरक्षित किया गया है अब ऐसे में जब सरकार ऐसे कॉरपोरेट घरानों से ऐसे ऐसे चंदे ले रही हो जो खुद उनके द्वारा बनाये गये कानूनों के विपरीत हो। तो मतदाताओं विश्वास लडखाडा सा जाता है।</p>
<p>अब 21 तारीख को फिर से एसबीआई को पूरा डिटेल भारतीय चुनाव आयोग को देना अब देखने वाली बात यह होगी कि 21तारीख को इसके बाद और आगे क्या खुलासा होता है<br />
<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_bodytext_240318_212734_341.sdocx--></p>
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		<title>आफताब ने नार्को में भी माना, श्रद्धा को बेरहमी से मारा</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/shradha_murder_update/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Dec 2022 01:00:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[श्रद्धा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। आफताब ने नार्को परीक्षण के दौरान भी श्रद्धा की बेरहमी से हत्या करने की</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id="divheading" class="headline"><b>नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। </b>आफताब ने नार्को परीक्षण के दौरान भी श्रद्धा की बेरहमी से हत्या करने की बात कबूल की है। उसने बताया कि श्रद्धा के शव के टुकड़े करने के लिए कई हथियारों का इस्तेमाल किया। उसने हथियार, श्रद्धा के कपड़े और मोबाइल कहां फेंके इसकी भी जानकारी दी। इससे पहले आफताब ने पॉलीग्राफ टेस्ट में श्रद्धा की हत्या का जुर्म कबूला था।</div>
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<p>एफएसएल के अधिकारी संजीव गुप्ता ने बताया कि नार्को परीक्षण और पॉलीग्राफ जांच के दौरान आफताब ने जो भी जवाब दिए, इसकी रिपोर्ट जल्द ही पुलिस से साझा की जाएगी। इसके बाद जांच टीम तय करेंगी कि उन्हें तफ्तीश में आगे क्या करना है। दरअसल कई बार इन दोनों परीक्षणों के बाद जांच टीम ब्रेन मैपिंग टेस्ट से भी आरोपी को गुजारना चाहती है। इस केस में क्या होता है, यह रिपोर्ट आने के बाद तय होगा।</p>
<p><b>पोस्ट नार्को परीक्षण दो-तीन दिन बाद होगा </b></p>
<p>नार्को के बाद एक पोस्ट परीक्षण भी किया जाता है। लिहाजा अब आफताब को डॉक्टर्स की राय के मुताबिक 2-3 दिन बाद पोस्ट नार्को परीक्षण के लिए एफएसएल लैब लाया जाएगा। इसमें उसकी काउंसलिंग होगी। उसके द्वारा दिए गए सवालों के जवाब के बारे में भी उसे जानकारी दी जाएगी, ताकि उसे देखकर यह पता लगाया जा सके कि वह कितना सहज है।</p>
</div>
<p><strong><span class="sub_article_head">हत्या के सबूतों से जुड़े सवाल पर ज्यादा जोर</span></strong></p>
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<p>आफताब के नार्को परीक्षण के लिए पुलिस अफसरों ने मनोवैज्ञानिकों की एक टीम के साथ सवालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की थी। जिन सवालों पर पुलिस का ज्यादा जोर था, वो सवाल सीधे सबूतों से जुड़े हैं। जैसे श्रद्धा के टुकड़े या हड्डियां कहां-कहां हो सकती हैं? उसने कहां फेंके? श्रद्धा का मोबाइल और कपड़े कहां है? हत्या क्यों और किस दिन की। उसे कैसे मारा? वारदात के समय श्रद्धा के और खुद के पहने कपड़े उसने कहां छुपाए? इसके अलावा शव के टुकडे कैसे किए? उसके लिए हथियार कहां से खरीदे? टुकड़ों को घर में कितने वक्त तक रखा? टुकड़ों को कहां-कहां ठिकाने लगाया? और हथियार कहां फेंके</p>
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