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	<title>उत्तर प्रदेश Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>मुठभेड़ में एक बदमाश घायल, दो गिरफ्तार; आभूषण, नकदी और हथियार बरामद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 01:24:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[cash and weapons recovered]]></category>
		<category><![CDATA[One criminal injured in encounter]]></category>
		<category><![CDATA[Police encounter]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा, 5 मई। जनपद गोंडा के थाना कर्नलगंज क्षेत्र में सर्राफा व्यापारी से हुई लूट की घटना का</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा, 5 मई। जनपद गोंडा के थाना कर्नलगंज क्षेत्र में सर्राफा व्यापारी से हुई लूट की घटना का पुलिस ने सफल अनावरण करते हुए दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटे गए सोने-चांदी के आभूषण, नकदी, अवैध असलहा, मोबाइल फोन और बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल बरामद की है।<br />
पुलिस अधीक्षक गोंडा विनीत जायसवाल के निर्देशन में थाना कर्नलगंज पुलिस और एसओजी/सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में इस वारदात का खुलासा हुआ। घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने पांच टीमों का गठन किया था, जिन्होंने तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की और उन्हें धर दबोचा।<br />
घटना 28 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 9 बजे की है। थाना कर्नलगंज क्षेत्र के सदर बाजार निवासी राजन सोनी अपने घर से पैशन प्रो मोटरसाइकिल से पिट्ठू बैग लेकर अपनी दुकान के लिए निकल रहे थे। वह सम्मयस्थान चौराहा नारायणपुर माझा जा रहे थे कि रास्ते में खाटू श्याम मंदिर मोड़ के आगे पुलिया के पास तीन अज्ञात मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने उन्हें रोक लिया।<br />
बदमाशों ने असलहा दिखाकर व्यापारी को धमकाया और उसके पास मौजूद बैग छीन लिया। बैग में सोने-चांदी के आभूषण और नकद धनराशि थी। विरोध करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए। पीड़ित द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।<br />
सूचना मिलते ही थाना कर्नलगंज पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी और सर्विलांस टीम समेत कुल पांच टीमों का गठन किया।<br />
इन टीमों ने घटना स्थल से लेकर लगभग 75 किलोमीटर के दायरे में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच की। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और मैनुअल इनपुट के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली।<br />
4 मई 2026 की देर रात पुलिस को सूचना मिली कि लूट की घटना में शामिल बदमाश खाटू श्याम मंदिर मोड़ के पास नारायणपुर माझा क्रॉसिंग के निकट मौजूद हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की।<br />
खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश बृजेश शुक्ला के पैर में गोली लग गई, जिससे वह घायल हो गया। वहीं उसका साथी अमर शुक्ला उर्फ नन्के मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ लिया।<br />
घायल बदमाश को पहले सीएचसी कर्नलगंज ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल गोंडा में भर्ती कराया गया।<br />
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में लूट का सामान बरामद किया है। इसमें सफेद धातु के आभूषण जैसे पायल, बिछिया, चैन और ब्रेसलेट शामिल हैं, जबकि पीली धातु में ओम लॉकेट, नथिया और कील बरामद हुई है। इसके अलावा ₹5200 नकद, एक एंड्रॉइड मोबाइल फोन और वादी का आर्मी कलर का बैग भी बरामद किया गया।<br />
साथ ही पुलिस ने एक 315 बोर का अवैध तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस भी बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की पल्सर मोटरसाइकिल भी पुलिस ने कब्जे में ले ली है।<br />
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे एक संगठित गिरोह के सदस्य हैं, जो रेकी कर लूट की घटनाओं को अंजाम देता है। गिरोह के अन्य सदस्य पहले संभावित शिकार और स्थान की जानकारी जुटाते हैं, जिसके बाद वारदात को अंजाम दिया जाता है।<br />
आरोपियों ने स्वीकार किया कि 28 अप्रैल को उन्होंने सर्राफा व्यापारी को निशाना बनाया था। इसके अलावा उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को बहराइच जिले के कैसरगंज थाना क्षेत्र में भी एक सर्राफा व्यापारी से लूट की घटना को अंजाम दिया था।<br />
गिरफ्तार बदमाश बृजेश शुक्ला का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल के हावड़ा थाना क्षेत्र में अपहरण से संबंधित मुकदमा दर्ज है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।<br />
पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है और किसी भी आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।<br />
उन्होंने बताया कि इस मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों को लगाया गया है। जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।<br />
इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े सर्राफा व्यापारी से लूट की घटना से स्थानीय व्यापारियों में भय का माहौल था, हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अब लोगों ने राहत की सांस ली है।<br />
घटना के खुलासे के बाद स्थानीय व्यापारियों ने पुलिस की सराहना की है। व्यापारियों का कहना है कि समय रहते पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ लिया, जिससे उनके बीच विश्वास कायम हुआ है।</p>
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		<item>
		<title>गोंडा में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पर मंडलायुक्त की सख्त नजर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:56:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Divisional Commissioner Keeps a Strict Watch on the Reality of Health Services in Gonda]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दुर्गा शक्ति नागपाल का बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में औचक निरीक्षण, खराब वेंटिलेटर तत्काल ठीक करने के निर्देश</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/divisional-commissioner-keeps-a-strict-watch-on-the-reality-of-health-services-in-gonda/">गोंडा में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पर मंडलायुक्त की सख्त नजर</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दुर्गा शक्ति नागपाल का बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में औचक निरीक्षण, खराब वेंटिलेटर तत्काल ठीक करने के निर्देश</strong></p>
<p>गोंडा, 28 अप्रैल 2026। दुर्गा शक्ति नागपाल ने मंगलवार को बाबू ईश्वर शरण अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को परखा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध इस प्रमुख अस्पताल में व्यवस्थाओं की स्थिति का बारीकी से अवलोकन करते हुए उन्होंने साफ-सफाई, उपकरणों की कार्यक्षमता, पेयजल, वार्ड प्रबंधन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई कमियां सामने आईं, जिस पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-8631 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1861" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-300x218.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-1024x744.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-768x558.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-1536x1116.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0022-2048x1489.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /><br />
निरीक्षण की शुरुआत आयुक्त ने इमरजेंसी वार्ड से की, जहां उन्होंने भर्ती मरीजों की स्थिति, डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं के संचालन का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि कुछ स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि अस्पताल के प्रत्येक हिस्से में स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी वार्ड वह स्थान है जहां मरीज गंभीर अवस्था में आते हैं, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।<br />
इसके बाद आयुक्त ने ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने मरीजों की लंबी कतारें, पंजीकरण प्रक्रिया और चिकित्सकों की उपस्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों को कम से कम समय में उपचार उपलब्ध कराया जाए और अनावश्यक देरी से बचा जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वृद्ध, दिव्यांग और महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था हो ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
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वार्डों के निरीक्षण के दौरान दुर्गा शक्ति नागपाल ने मरीजों के बेड, चादरों और सामान्य स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। कई बेडों पर बिछी चादरें गंदी और पुरानी पाई गईं, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रत्येक मरीज को साफ और नियमित रूप से बदली जाने वाली चादरें उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है।<br />
निरीक्षण के दौरान एक अहम मुद्दा अस्पताल में लगे वेंटिलेटर मशीनों की खराब स्थिति का सामने आया। आयुक्त ने पाया कि कई वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि सभी खराब वेंटिलेटर मशीनों को तत्काल ठीक कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जीवन रक्षक उपकरणों का खराब होना बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।<br />
उन्होंने कहा कि वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण मशीनें अस्पताल की रीढ़ होती हैं, खासकर गंभीर मरीजों के लिए। यदि ये उपकरण समय पर काम न करें तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए और एक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे किसी भी खराबी की जानकारी तुरंत मिल सके।<br />
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में लगे कूलरों की स्थिति भी आयुक्त के संज्ञान में आई। कई कूलर बंद पाए गए, जिससे गर्मी के मौसम में मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी हो रही थी। इस पर उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कूलरों को तत्काल क्रियाशील किया जाए और गर्मी से राहत के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।<br />
पेयजल व्यवस्था को लेकर भी आयुक्त ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता की जांच की। कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था अपर्याप्त पाई गई, जिस पर उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों और तीमारदारों के लिए शुद्ध और पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह एक बुनियादी सुविधा है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br />
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों से भी बातचीत की। उन्होंने उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। कई मरीजों ने दवाओं की उपलब्धता, सफाई और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति को लेकर शिकायतें कीं। इस पर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का गंभीरता से निस्तारण किया जाए।<br />
उन्होंने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं बल्कि मरीजों के लिए उम्मीद की जगह होता है, इसलिए यहां की व्यवस्था मानवीय दृष्टिकोण से बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को यह समझना होगा कि उनकी जिम्मेदारी केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा है।<br />
आयुक्त ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में निरीक्षण के दौरान इसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कहा कि वे एक कार्ययोजना बनाकर व्यवस्थाओं में सुधार लाएं और उसकी नियमित समीक्षा करें।<br />
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के रिकॉर्ड, दवा वितरण व्यवस्था और लैब सेवाओं की भी जांच की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी रिकॉर्ड अपडेट रखे जाएं और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।<br />
गोंडा के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में मंडलायुक्त का यह औचक निरीक्षण स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनेगा और व्यवस्थाओं में सुधार होगा।<br />
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वेंटिलेटर मशीनों की मरम्मत, साफ-सफाई में सुधार और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।<br />
इस निरीक्षण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिलेगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।<br />
अंततः, यह निरीक्षण केवल कमियों को उजागर करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुधार की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में सामने आया है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इन निर्देशों को किस गंभीरता से लागू करता है और क्या वास्तव में मरीजों को राहत मिल पाती है या नहीं।</p>
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		<title>यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले, दुर्गा शक्ति नागपाल बनीं देवीपाटन मंडल की आयुक्त</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/major-administrative-reshuffle-in-up-40-ias-officers-transferred-durga-shakti-nagpal-becomes-commissioner-of-devipatan-division/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 01:46:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Durga Shakti Nagpal becomes commissioner of Devipatan division]]></category>
		<category><![CDATA[Major administrative reshuffle in UP: 40 IAS officers transferred]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कई जिलों में बदले डीएम, शासन और निगमों में भी व्यापक बदलाव; विकास व कानून-व्यवस्था पर फोकस लखनऊ,</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/major-administrative-reshuffle-in-up-40-ias-officers-transferred-durga-shakti-nagpal-becomes-commissioner-of-devipatan-division/">यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले, दुर्गा शक्ति नागपाल बनीं देवीपाटन मंडल की आयुक्त</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कई जिलों में बदले डीएम, शासन और निगमों में भी व्यापक बदलाव; विकास व कानून-व्यवस्था पर फोकस</strong><br />
लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। जारी सूची के मुताबिक जिलों से लेकर शासन और निगमों तक व्यापक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इस फेरबदल में सबसे अहम नियुक्ति दुर्गा शक्ति नागपाल की मानी जा रही है, जिन्हें देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक कसावट, विकास कार्यों में तेजी और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।<br />
प्रदेश में लंबे समय बाद इतने बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। इस सूची में कई जिलाधिकारियों को हटाकर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, वहीं कुछ अधिकारियों को शासन स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार आगामी समय में प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहती है।<br />
तबादला सूची में सबसे ज्यादा चर्चा दुर्गा शक्ति नागपाल की नियुक्ति को लेकर है। वह अभी तक लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी के पद पर तैनात थीं। अब उन्हें देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है। यह मंडल गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जैसे जिलों को कवर करता है और विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-8620" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan.jpg" alt="" width="1080" height="1521" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan.jpg 1080w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan-213x300.jpg 213w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan-727x1024.jpg 727w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan-768x1082.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070521_Adobe-Scan-1024x1442.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /><br />
दुर्गा शक्ति नागपाल की छवि एक सख्त, ईमानदार और परिणाम देने वाली अधिकारी की रही है। अवैध खनन के खिलाफ उनकी कार्रवाई पहले भी सुर्खियों में रही थी। ऐसे में उनकी इस नई तैनाती को सरकार के मजबूत प्रशासनिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।<br />
सरकार ने कई जिलों में जिलाधिकारियों का तबादला किया है। उन्नाव के जिलाधिकारी गौरांग राठी को झांसी का नया डीएम बनाया गया है। वहीं सुल्तानपुर के डीएम कुमार हर्ष को बुलंदशहर भेजा गया है। बुलंदशहर में तैनात अधिकारी को अन्य जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-8621" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan.jpg" alt="" width="1073" height="1462" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan.jpg 1073w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan-220x300.jpg 220w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan-752x1024.jpg 752w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan-768x1046.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070526_Adobe-Scan-1024x1395.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1073px) 100vw, 1073px" /><br />
अमरोहा की जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स को फतेहपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। हमीरपुर के जिलाधिकारी घनश्याम मीणा को उन्नाव भेजा गया है। इसी तरह मैनपुरी, औरैया, आगरा, सहारनपुर, शामली, श्रावस्ती, रायबरेली और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में नए जिलाधिकारी तैनात किए गए हैं।<br />
इन बदलावों से साफ है कि सरकार जिलों के प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार समीक्षा कर रही है और जरूरत के अनुसार अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दे रही है।<br />
तबादला केवल जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। ऊर्जा, खाद्य एवं रसद, पर्यटन, अल्पसंख्यक कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, श्रम और माध्यमिक शिक्षा विभाग में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-8622" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan.jpg" alt="" width="1079" height="1289" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan.jpg 1079w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan-251x300.jpg 251w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan-857x1024.jpg 857w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan-768x917.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/04/Screenshot_20260420_070530_Adobe-Scan-1024x1223.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1079px) 100vw, 1079px" /><br />
अभिषेक गोयल को खाद्य एवं रसद विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है। वहीं ऊर्जा विभाग में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। कई अधिकारियों को विशेष सचिव, अपर मुख्य सचिव और निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है।<br />
प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और निगमों में भी व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। झांसी विकास प्राधिकरण, हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण समेत कई संस्थानों में नए उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।<br />
इसके अलावा उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में भी नए प्रबंध निदेशक नियुक्त किए गए हैं। इन नियुक्तियों को राज्य में बिजली व्यवस्था सुधारने और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।<br />
सरकार ने कई जिलों में मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के पद पर भी बदलाव किया है। अमेठी, झांसी, हापुड़, बदायूं और बहराइच में नए सीडीओ तैनात किए गए हैं। यह बदलाव ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से किए गए हैं।<br />
सीडीओ स्तर पर हुए ये बदलाव खास तौर पर मनरेगा, ग्रामीण आवास योजना और अन्य विकास योजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।<br />
इन तबादलों का सीधा असर जिलों के कामकाज पर देखने को मिलेगा। नए जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में प्राथमिकताओं के आधार पर काम शुरू करेंगे। कई जिलों में विकास कार्यों की गति तेज होने की उम्मीद है, वहीं कुछ जगहों पर कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ सकती है।<br />
जहां प्रशासनिक ढिलाई की शिकायतें रही हैं, वहां नए अधिकारियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।<br />
उत्तर प्रदेश सरकार का यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह विकास और सुशासन के एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है।<br />
दुर्गा शक्ति नागपाल की देवीपाटन मंडल में नियुक्ति इस सूची की सबसे अहम कड़ी है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र के प्रशासनिक और विकासात्मक ढांचे को नई दिशा दे सकती है।<br />
अब देखना होगा कि नए अधिकारी अपने-अपने पदों पर किस तरह काम करते हैं और सरकार की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/major-administrative-reshuffle-in-up-40-ias-officers-transferred-durga-shakti-nagpal-becomes-commissioner-of-devipatan-division/">यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले, दुर्गा शक्ति नागपाल बनीं देवीपाटन मंडल की आयुक्त</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की राम कथा में समाज, संस्कृति और चेतना का गहन विमर्श</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/in-the-ram-katha-discourse-delivered-by-mahamrityunjay-peethadheeshwar-swami-pranava-puri-ji-maharaj-there-is-a-profound-society-culture-and-consciousness/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 04:31:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[राम कथा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा (विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक रिपोर्ट)। राम कथा केवल अतीत की कथा नहीं है, बल्कि वह वर्तमान और भविष्य का</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/in-the-ram-katha-discourse-delivered-by-mahamrityunjay-peethadheeshwar-swami-pranava-puri-ji-maharaj-there-is-a-profound-society-culture-and-consciousness/">महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की राम कथा में समाज, संस्कृति और चेतना का गहन विमर्श</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोंडा (विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक रिपोर्ट)। </strong>राम कथा केवल अतीत की कथा नहीं है, बल्कि वह वर्तमान और भविष्य का दर्पण है। यही भाव महामृत्युंजय पीठाधीश्वर <strong>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज</strong> द्वारा सुनाई गई राम कथा में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। कथा के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से यह बताया कि किस प्रकार इतिहास, धर्म, समाज और सत्ता के बीच एक सतत संघर्ष चलता रहा है और आज भी चल रहा है। यह कथा भक्ति से कहीं आगे बढ़कर <strong>विचार, चेतना और सांस्कृतिक आत्मरक्षा</strong> का आह्वान बन गई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5399 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1708" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-300x200.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-1024x683.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-768x512.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-1536x1025.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0326-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<h3><strong>कुबेर का निष्कासन और लंका पर अधिकार: सत्ता की पहली सीढ़ी</strong></h3>
<p>कथा का आरंभ उस प्रसंग से हुआ जब रावण ने <strong>कुबेर को लंका से बाहर कर दिया</strong>। स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि कुबेर केवल धन के देवता नहीं हैं, बल्कि वे <strong>संतुलन, मर्यादा और धर्मपूर्ण समृद्धि</strong> के प्रतीक हैं। जब रावण ने कुबेर को लंका से बाहर किया, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि <strong>धर्म से अलग होकर शक्ति के दुरुपयोग</strong> की शुरुआत थी।</p>
<p>महाराज जी ने गोस्वामी तुलसीदास के संदर्भ में कहा कि लंका कोई साधारण नगर नहीं थी। उसका नाम आते ही उसकी दुर्गमता, वैभव और अभेद्यता का बोध होता है। लंका को इतनी सुदृढ़ बनाया गया था कि वहां तक पहुंचना सामान्य व्यक्ति के लिए असंभव था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5401 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0314-scaled.jpg" alt="" width="1708" height="2560" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0314-scaled.jpg 1708w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0314-200x300.jpg 200w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0314-683x1024.jpg 683w" sizes="auto, (max-width: 1708px) 100vw, 1708px" /></p>
<h3><strong>पहले कब्ज़ा, फिर मूल्यांकन: रावण की मानसिकता</strong></h3>
<p>राम कथा में महाराज जी ने रावण की मानसिकता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रावण ने पहले लंका पर <strong>कब्ज़ा किया</strong>, उसके बाद यह विचार किया कि यह स्थान उसके रहने योग्य है या नहीं।</p>
<p>उन्होंने इसे आज की भाषा में समझाते हुए कहा कि सज्जन व्यक्ति किसी स्थान पर रहने से पहले यह देखता है कि वहां—</p>
<ul>
<li>समाज कैसा है</li>
<li>सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं हैं या नहीं</li>
<li>संस्कार और सुरक्षा का वातावरण है या नहीं</li>
</ul>
<p>जबकि दुर्जन व्यक्ति यह देखता है कि वह स्थान कितना दुर्गम है, वहां कानून और समाज की पहुंच कितनी कम है। लंका चारों ओर समुद्र और खाइयों से घिरी हुई थी। महाराज जी ने कहा कि इससे बेहतर स्थान रावण के लिए हो ही नहीं सकता था, क्योंकि वहां कोई आसानी से प्रवेश नहीं कर सकता था।</p>
<h3><strong>लोकेशन का सिद्धांत: प्रबंधन से धर्म तक</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कथा के दौरान प्रबंधन (मैनेजमेंट) के सिद्धांतों को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी संपत्ति की कीमत तीन बातों से तय होती है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है <strong>लोकेशन</strong>।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में खेत लेना और मुंबई में 500 वर्ग फीट का घर लेना—दोनों की कीमत लोकेशन से तय होती है। इसी प्रकार समाज और सत्ता में भी लोकेशन का महत्व है।</p>
<p>रावण ने लंका को अपनी राजधानी इसलिए बनाया क्योंकि वह जानता था कि यह स्थान उसे बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखेगा।</p>
<h3><strong>लंका से आदेश और सनातन धर्म पर प्रहार</strong></h3>
<p>कथा में यह भी बताया गया कि लंका को राजधानी बनाने के बाद रावण ने अपने दलबल सहित राक्षसों को आदेश दिया कि वे जाकर <strong>सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ने</strong> का कार्य करें।</p>
<p>महाराज जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी को अपना तंत्र चलाना है, तो सबसे पहले उसे सनातन धर्म को कमजोर करना होगा, क्योंकि सनातन धर्म व्यक्ति को प्रश्न करने, विवेक रखने और सत्य के साथ खड़े होने की शक्ति देता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए—</p>
<ul>
<li>गौशालाओं में आग लगाई गई</li>
<li>संतों और महापुरुषों के आश्रम उजाड़े गए</li>
<li>मंदिरों को तोड़ा गया</li>
<li>तपस्या, साधना और स्त्री शक्ति के प्रतीकों को समाप्त करने का प्रयास किया गया</li>
</ul>
<h3><strong>इतिहास से वर्तमान तक: वही मानसिकता, वही षड्यंत्र</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि यह केवल पौराणिक कथा नहीं है। यही मानसिकता इतिहास में मुगल काल से लेकर औपनिवेशिक दौर तक दिखाई देती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चाहे मुगल हों या ईसाई मिशनरी, दोनों ही कालखंडों में मंदिरों, शिक्षा केंद्रों और सनातन परंपराओं पर प्रहार हुआ। उद्देश्य एक ही था—<strong>श्रद्धा को तोड़ना, विचारों पर कब्ज़ा करना</strong>।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5402 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1708" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-300x200.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-1024x683.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-768x512.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-1536x1025.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0364-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<h3><strong>विचारों पर कब्ज़ा: सबसे खतरनाक हथियार</strong></h3>
<p>कथा का केंद्रीय संदेश यही था कि भूमि पर कब्ज़ा अस्थायी होता है, लेकिन <strong>विचारों पर कब्ज़ा स्थायी गुलामी</strong> पैदा करता है।</p>
<p>महाराज जी ने कहा कि आज यदि बच्चों की शिक्षा, भाषा, संस्कृति और आदर्श बदल दिए जाएं, तो आने वाली पीढ़ी स्वतः अपनी जड़ों से कट जाएगी।</p>
<p>उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए कहा कि एक समय था जब बच्चों से कविता सुनाने को कहा जाता था तो वे भारतीय संस्कृति से जुड़ी बातें सुनाते थे। फिर ऐसा दौर आया जब “Twinkle Twinkle Little Star” ही ज्ञान का प्रतीक बन गया।</p>
<h3><strong>परिवर्तन की आहट: लौटते संस्कार</strong></h3>
<p>हालांकि महाराज जी ने यह भी कहा कि अब धीरे-धीरे परिवर्तन दिखाई दे रहा है। आज जब संत-महात्मा किसी घर में जाते हैं और माता-पिता बच्चों से भजन या मंत्र सुनाने को कहते हैं, तो यह संकेत है कि समाज फिर से अपनी ओर लौट रहा है।</p>
<p>चाहे बच्चा टूटी-फूटी हनुमान चालीसा ही क्यों न सुना पाए, या गायत्री मंत्र ही क्यों न पढ़े—यह बदलाव महत्वपूर्ण है।</p>
<h3><strong>वसुधैव कुटुंबकम् बनाम वैचारिक आक्रमण</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो <strong>वसुधैव कुटुंबकम्</strong> की भावना सिखाता है। हम सबको देवालय की तरह देखते हैं, सबके मार्ग का सम्मान करते हैं।</p>
<p>लेकिन इसी उदारता का दुरुपयोग कर सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह था कि राम को नष्ट कर दो, गौशालाओं को समाप्त कर दो, संतों की तपस्या को खत्म कर दो, ताकि आने वाली पीढ़ी यह पहचान ही न सके कि सनातन धर्म क्या था।</p>
<p>कथा के दौरान महाराज जी ने यह भी कहा कि कई बार जो लोग भगवान, कथा और धर्म की बात करते थे, उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर प्रताड़ित किया जाता था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह विषय राजनीतिक जरूर है, लेकिन जनता इसे देख और समझ रही है। जब धर्म की बात करने वालों को अपराधी बना दिया जाता था, तो समाज में अधर्म को बढ़ावा मिलता है। लेकिन अब समय बदल गया है अब अधर्मी मिटाए जा रहे हैं</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5403 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1708" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-300x200.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-1024x683.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-768x512.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-1536x1025.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251216-WA0308-2048x1366.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<h3><strong>माता-पिता, गुरु और साधु की उपेक्षा</strong></h3>
<p>गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए महाराज जी ने कहा कि जब समाज में माता-पिता की सेवा नहीं होती, गुरु का सम्मान नहीं रहता और साधु-संतों की बातों को अनदेखा किया जाता है, तब निशाचर प्रवृत्ति वाले लोग बढ़ते हैं।</p>
<p>चोरी, लंपटता और छल को चतुराई समझा जाने लगता है। यही अधर्म का प्रसार है।</p>
<h3><strong>राम कथा का निष्कर्ष: चेतना और जागरण</strong></h3>
<p>इस राम कथा का निष्कर्ष किसी के विरुद्ध घृणा नहीं, बल्कि <strong>चेतना, आत्मचिंतन और जागरण</strong> है। स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने स्पष्ट किया कि यह कथा किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा और समाज के आत्मबल को जगाने के लिए है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि विचार सुरक्षित हैं, तो धर्म सुरक्षित है। यदि धर्म सुरक्षित है, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सुरक्षित रहेंगे।</p>
<p>महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की यह राम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक <strong>वैचारिक चेतावनी और सांस्कृतिक घोषणापत्र</strong> बनकर सामने आई। लंका और रावण के प्रतीकों के माध्यम से यह कथा आज के समाज को यह संदेश देती है कि सबसे बड़ी लड़ाई तलवारों से नहीं, बल्कि <strong>विचारों और संस्कारों</strong> से लड़ी जाती है।</p>
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		<title>गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग को 6 महीने बाद मिला स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/gonda-basic-education-department-gets-permanent-finance-and-accounts-officer-after-6-months/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:37:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda Basic Education Department gets permanent Finance and Accounts Officer after 6 months]]></category>
		<category><![CDATA[Vitt ewam lekha vibhag]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/gonda-basic-education-department-gets-permanent-finance-and-accounts-officer-after-6-months/">गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग को 6 महीने बाद मिला स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद</strong></p>
<p>गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से रिक्त चल रहे वित्त एवं लेखा अधिकारी (एफ़एओ) के पद पर आखिरकार स्थायी नियुक्ति हो गई है। मंगलवार को संजय चतुर्वेदी ने कार्यालय बेसिक शिक्षा में पहुंचकर विधिवत रूप से अपना पदभार ग्रहण किया। छह महीने से बिना नियमित वित्त एवं लेखाधिकारी के काम कर रहे विभाग में इस नियुक्ति को शिक्षकों व कर्मचारियों ने राहत की बड़ी खबर के रूप में लिया है। पदभार ग्रहण करते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्री चतुर्वेदी का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि अब विभागीय कार्यों में तेजी आएगी।</p>
<p>पदभार ग्रहण के बाद संजय चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि <strong>शिक्षकों को वेतन संबंधी परेशानियों का सामना अब नहीं करना पड़ेगा।</strong> उन्होंने कहा कि विभाग में लंबे समय से वेतन भुगतान की प्रक्रिया बाधित होने के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी, लेकिन अब समय से वेतन भेजना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे होंगे।</p>
<p>श्री चतुर्वेदी पहले भी गोंडा में वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर कार्य कर चुके हैं और अपने निडर व निष्पक्ष कार्यशैली के कारण जाने जाते हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उनके पिछले कार्यकाल में न केवल फाइलों का निस्तारण समय से हुआ, बल्कि वेतन भुगतान भी सुचारू रूप से चलता रहा। इसी कारण शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ में उनकी वापसी को लेकर सकारात्मक माहौल देखा गया।</p>
<p><strong>वेतन भुगतान में आ रही दिक्कतें होंगी समाप्त</strong><br />
गौरतलब है कि पिछले छह महीनों से विभाग में स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी न होने के कारण वेतन भुगतान संबंधी कई फाइलें लंबित पड़ी थीं। परिषदीय विद्यालयों के हजारों शिक्षकों के साथ-साथ अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों को भी वेतन न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ा था। इस दौरान शिक्षकों के संगठनों ने कई बार जिला प्रशासन से नियुक्ति करने की मांग उठाई थी। अब संजय चतुर्वेदी के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षकों में विश्वास जगा है कि वेतन भुगतान की पुरानी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।</p>
<p>संजय चतुर्वेदी ने कहा कि <strong>शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ही उनकी प्राथमिकता होगी।</strong> उन्होंने बताया कि विभागीय फाइलों के समय से निस्तारण के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे किसी भी कार्य में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी बिल, गलत भुगतान या किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य नियम और वित्तीय मानकों के अनुसार ही किए जाएंगे।</p>
<p><strong>शिक्षक संगठनों ने जताई उम्मीद</strong><br />
पदभार ग्रहण के दौरान प्राथमिक शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने संजय चतुर्वेदी का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग को एक अनुभवी और सख्त वित्त अधिकारी मिलना पूरे जिले के लिए सकारात्मक संकेत है। शिक्षक नेताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विभाग में पारदर्शिता बढ़ेगी और वेतन भुगतान, पेंशन, अवकाश नकदीकरण, चिकित्सीय प्रतिपूर्ति जैसी फाइलों का निस्तारण तेजी से होगा।</p>
<p>एक शिक्षक प्रतिनिधि ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अनेक शिक्षक वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। बैंक किश्तों से लेकर घरेलू खर्च तक प्रभावित हुए। अब नए वित्त अधिकारी के आने से यह उम्मीद बंधी है कि भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध होगी और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>विभाग में कार्यप्रणाली को सुधारने पर होगा जोर</strong><br />
संजय चतुर्वेदी ने बताया कि वे विभागीय कर्मचारियों के साथ बैठक करके कार्यप्रणाली को और सुव्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग कर फाइलों के निस्तारण में तेजी लाई जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर दिक्कत उत्पन्न न हो।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की कोई समस्या लंबित है, तो वह सीधे कार्यालय में आकर अपनी बात रख सकता है। प्रत्येक मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p>कुल मिलाकर, संजय चतुर्वेदी के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा का संचार महसूस किया जा रहा है। शिक्षकों, कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि उनकी कार्यशैली से न केवल वेतन भुगतान की समस्या दूर होगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता भी मजबूत होगी।</p>
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		<title>गोंडा में फिर स्थाई वित्त एवं लेखा अधिकारी की तैनाती, संजय चतुर्वेदी को मिली अहम जिम्मेदारी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/a-permanent-finance-and-accounts-officer-has-been-appointed-again-in-gonda-sanjay-chaturvedi-has-been-given-this-important-responsibility/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 09:13:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[A permanent Finance and Accounts Officer has been appointed again in Gonda; Sanjay Chaturvedi has been given this important responsibility.]]></category>
		<category><![CDATA[Ao besic]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विभाग में लंबे समय बाद स्थिरता, कई विभागों में भी हुए वित्तीय अधिकारियों के तबादले व अतिरिक्त प्रभार</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/a-permanent-finance-and-accounts-officer-has-been-appointed-again-in-gonda-sanjay-chaturvedi-has-been-given-this-important-responsibility/">गोंडा में फिर स्थाई वित्त एवं लेखा अधिकारी की तैनाती, संजय चतुर्वेदी को मिली अहम जिम्मेदारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>विभाग में लंबे समय बाद स्थिरता, कई विभागों में भी हुए वित्तीय अधिकारियों के तबादले व अतिरिक्त प्रभार</strong></p>
<p>गोंडा, 11 दिसंबर। बेसिक शिक्षा विभाग में कई महीनों से वित्त एवं लेखा अधिकारी के स्थाई अभाव से जूझ रहे गोंडा जिले को आखिरकार स्थिरता मिल गई है। शासन ने एक बार फिर अनुभवी अधिकारी <strong>संजय चतुर्वेदी</strong> पर भरोसा जताते हुए उन्हें <strong>गोंडा का वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक शिक्षा) के साथ अतिरिक्त प्रभार</strong> सौंप दिया है। इससे जनपद के वित्तीय कार्यों में गति आने की संभावना प्रबल हो गई है।</p>
<p>संजय चतुर्वेदी पहले भी गोंडा में वित्त एवं लेखा अधिकारी के पद पर तैनात रह चुके हैं। उस दौरान उनकी कार्यशैली तेज, निर्णय क्षमता मजबूत और निडर व्यवहार को लेकर विभागीय कर्मचारियों से लेकर उच्चाधिकारियों तक उनकी छवि एक प्रभावशाली अधिकारी की रही है। माना जाता है कि वे फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखते और लंबित देयों, भुगतान, पोषण वाटिका, भवन निर्माण, वेतन-मान्यता जैसे मुद्दों को त्वरित निस्तारण की नीति पर काम करते हैं। उनकी वापसी से जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में काम की गति बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, जिले में गत महीनों में वित्तीय विषयों से जुड़ी कई फाइलें लंबित होने के कारण विद्यालयों और शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। विद्यालयों के अनुदान, मरम्मत, उपकरण क्रय, बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री की खरीद और शिक्षक वेतन भुगतान जैसी प्रक्रियाएँ धीमी पड़ गई थीं। ऐसे में संजय चतुर्वेदी जैसे अनुभवी अधिकारी की वापसी विभाग में नई ऊर्जा का संचार करेगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5393 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251211_142710_Drive.jpg" alt="" width="981" height="1353" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251211_142710_Drive.jpg 981w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251211_142710_Drive-218x300.jpg 218w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251211_142710_Drive-742x1024.jpg 742w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_20251211_142710_Drive-768x1059.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 981px) 100vw, 981px" /></p>
<h3><strong>राज्य स्तर पर भी कई अहम वित्तीय पदों पर नियुक्तियाँ व प्रभार</strong></h3>
<p>केवल गोंडा ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार ने प्रदेश भर के कई महत्वपूर्ण विभागों में वित्तीय अनुशासन और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर वित्त एवं लेखा अधिकारियों, वित्त नियंत्रकों और परामर्शदाताओं की तैनातियाँ और अतिरिक्त प्रभार सौंपे हैं। नीचे प्रमुख नियुक्तियाँ—</p>
<ul>
<li><strong>बृज बिहारी कुशवाहा</strong> को <strong>राष्ट्रीय आयुष मिशन</strong> के लिए <strong>वित्तीय परामर्शदाता</strong> नियुक्त किया गया है। मिशन से जुड़े वित्तीय नियंत्रण और योजनाओं के सुचारु संचालन में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।</li>
<li><strong>पवन कुमार द्विवेदी</strong> को <strong>वित्त नियंत्रक, उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम</strong> का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है। निगम की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने में यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।</li>
<li><strong>संतोष कुमार</strong> को <strong>मुख्य लेखा अधिकारी एवं वरिष्ठ परामर्शदाता, उत्तर प्रदेश वन निगम</strong> बनाया गया है। वन निगम की आय-व्यय प्रणाली एवं प्रोजेक्ट फंडिंग व्यवस्था में सुधार की दिशा में उनसे उम्मीदें जताई जा रही हैं।</li>
<li><strong>मालिनी सिंह</strong> को <strong>वित्त नियंत्रक, आयुक्त कार्यालय, कानपुर</strong> में जिम्मेदारी दी गई है। कानपुर मंडल के वित्तीय पुनर्गठन में उनकी भूमिका प्रमुख होगी।</li>
<li><strong>विपिन कुमार वर्मा</strong> को <strong>वित्त नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज हरदोई</strong> नियुक्त किया गया है। मेडिकल कॉलेजों में बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है।</li>
<li><strong>दुर्गेश त्रिपाठी</strong> को <strong>वित्त नियंत्रक, भूमि सुधार निगम</strong> का कार्यभार सौंपा गया है।</li>
<li><strong>विजय कुमार चौहान</strong> को <strong>वित्त नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज एटा</strong> नियुक्त किया गया है।</li>
<li><strong>दिलीप कुमार गुप्ता</strong> को <strong>भू-तत्व एवं खनिज विभाग</strong> में महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।</li>
<li><strong>प्राची वर्मा विक्रम</strong> को <strong>लेखा अधिकारी, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, प्रयागराज</strong> का अतिरिक्त प्रभार मिला है।</li>
</ul>
<p>इन नियुक्तियों से प्रदेश सरकार की मंशा स्पष्ट होती है कि वह वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और दक्षता को प्राथमिकता देना चाहती है। विशेषकर ऐसे समय में जब प्रदेश की कई योजनाओं, मिशनों और परियोजनाओं में समयबद्ध कार्यान्वयन और सटीक वित्तीय मॉनिटरिंग की आवश्यकता बढ़ गई है।</p>
<h3><strong>गोंडा में शिक्षा विभाग के लिए राहत</strong></h3>
<p>गोंडा जिले में शिक्षण सामग्री वितरण, ग्रांट खर्च, निर्माण कार्यों के भुगतान और शिक्षकों-कर्मचारियों के एरियर व वेतन से जुड़ी समस्याएँ लंबे समय से चर्चा में थीं। संजय चतुर्वेदी के फिर से पदभार संभालने के बाद इन मुद्दों के समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं। विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उनके पिछले कार्यकाल में जैसे ही कोई वित्तीय प्रस्ताव आता था, उसका शीघ्र विश्लेषण कर निस्तारण कराया जाता था।</p>
<p>जिले के कई विद्यालय प्रबंधकों ने भी उम्मीद जताई है कि लंबित भुगतान और अनुदानों की प्रक्रिया अब पहले की तरह गति पकड़ेगी, जिससे शैक्षणिक गतिविधियाँ सुचारु होंगी।</p>
<h3><strong>शासन की मंशा—तेज, पारदर्शी और जवाबदेह वित्तीय प्रणाली</strong></h3>
<p>राज्य स्तर पर हुई इन व्यापक तैनातियों से शासन का संदेश स्पष्ट है कि वित्तीय ढांचा मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जताया जा रहा है। निर्विवाद, निष्पक्ष और समयबद्ध वित्तीय प्रबंधन किसी भी योजना की सफलता की आधारशिला होता है, और हालिया निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम है।</p>
<p>गोंडा के संदर्भ में यह तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जिला लगातार प्रशासनिक दृष्टि से सक्रिय रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर अलग-अलग योजनाओं के लिए आने वाले फंड के पारदर्शी उपयोग और समय पर वितरण में वित्त एवं लेखा अधिकारी प्रमुख भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>संजय चतुर्वेदी की गोंडा में वापसी से न केवल विभाग के भीतर एक सकारात्मक संदेश गया है, बल्कि जिले में शिक्षा से संबंधित कार्यों में सुधार की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/a-permanent-finance-and-accounts-officer-has-been-appointed-again-in-gonda-sanjay-chaturvedi-has-been-given-this-important-responsibility/">गोंडा में फिर स्थाई वित्त एवं लेखा अधिकारी की तैनाती, संजय चतुर्वेदी को मिली अहम जिम्मेदारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:10:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[gondabsa]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka niranjan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/">गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन न मिलने की समस्या अब समाप्त होने की उम्मीद बन गई है। जनपद में वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) तथा जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता गिरीश चंद्र के अचानक चिकित्सा अवकाश पर चले जाने के कारण वेतन भुगतान की प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। इससे न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का संकट उत्पन्न हो गया था। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।</p>
<h4><strong>महीनेभर से वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानियाँ</strong></h4>
<p>गोंडा जिले में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, अनुदानित इंटर कॉलेजों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मियों का वेतन भुगतान हर माह वित्त एवं लेखा अधिकारी बेसिक के माध्यम से होता है। लेकिन गिरीश चंद्र के आकस्मिक अवकाश पर चले जाने से वेतन बिलों के निर्गमन व अनुमोदन की प्रक्रिया रुक गई थी। कई शिक्षकों ने बताया कि दीपावली बाद से लगातार भुगतान में देरी हो रही थी और नवंबर माह का पूरा वेतन अटक गया था। स्थिति यह थी कि बैंक ईएमआई, बच्चों की फीस, चिकित्सा व्यय और घर के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया था।</p>
<p>शिक्षक संगठनों ने भी प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था। उनका कहना था कि वेतन रुकने से शिक्षकीय व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है और कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो रहा है।</p>
<h4><strong>डीएम ने लिया संज्ञान, जारी किया आदेश</strong></h4>
<p>जिलाधिकारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से पूरा विवरण तलब किया और पाया कि वित्त एवं लेखा अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण व्यवस्था पूरी तरह ठप है। प्रशासन ने माना कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में एक व्यक्ति के अवकाश पर जाने भर से पूरे जिले के हजारों शिक्षकों की वित्तीय स्थिति नहीं बिगड़नी चाहिए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-5383 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="2100" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-300x246.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>इसके बाद जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को आदेश जारी किए कि वे तत्काल प्रभाव से वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार संभालें और वेतन बिलों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू करवाएं। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया है कि लंबित वेतन बिलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक आर्थिक संकट न झेलना पड़े।</p>
<p>जिला विद्यालय निरीक्षक रामचंद्र वर्तमान में DIOS के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही उन्हें पूर्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का अतिरिक्त चार्ज भी दिया जा चुका है। अब उन्हें वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का प्रभार सौंपे जाने के बाद वे तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ एक साथ संभालेंगे।</p>
<p>हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय परिस्थितिजन्य है और सिर्फ वेतन भुगतान संबंधी अड़चन के समाधान के लिए अस्थायी रूप से यह व्यवस्था लागू की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय कामकाज में बाधा न आए और शिक्षकों का हित प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है और सक्षम स्तर से किसी की तैनाती के बाद यह आदेश होता ही समाप्त हो जाएगा</p>
<h4><strong>वेतन भुगतान पर जल्द मिलेगी राहत</strong></h4>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, DIOS द्वारा प्रभार संभालते ही वेतन बिलों का सत्यापन, अनुमोदन और कोषागार को प्रेषण का काम शुरू कर दिया जाएगा। अनुमान है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर सभी शिक्षकों का लंबित वेतन उनके बैंक खातों में भेज दिया जाएगा।</p>
<p>कई शिक्षकों ने प्रशासनिक निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि इस आदेश से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। एक शिक्षक ने बताया कि वेतन न मिलने से घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। अब उम्मीद है कि जल्द ही भुगतान प्रक्रिया सामान्य हो जाएगी और विभागीय गतिविधियाँ भी सुचारु रूप से चलेंगी।</p>
<h4><strong>चिकित्सा अवकाश पर गए वित्तीय परामर्शदाता की भूमिका भी महत्वपूर्ण</strong></h4>
<p>गिरीश चंद्र, जो जिला पंचायत में वित्तीय परामर्शदाता के पद पर कार्यरत हैं, को ही पिछले वर्ष वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। वेतन भुगतान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि पूरा वित्तीय दायित्व उन्हीं के अधीन है।</p>
<p>लेकिन उनके स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते अवकाश लेने से विभाग के भीतर निर्णय प्रक्रिया रुक गई थी। यह पहली बार नहीं है जब किसी एक अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर वेतन भुगतान प्रभावित हुआ हो। यही कारण है कि प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर भी समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो।</p>
<h4><strong>आगे क्या?</strong></h4>
<p>सूत्रों के अनुसार, शासन जल्द ही वित्त और लेखा बेसिक अनुभाग में एक स्थायी अधिकारी की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। जिले में शिक्षा विभाग का दायरा बड़ा है और हजारों कर्मचारियों की वित्तीय जिम्मेदारी एक अधिकारी पर निर्भर है। इसलिए अधिक मजबूत व्यवस्थागत विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल, DIOS के प्रभार संभालते ही शिक्षकों और कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिनों में वेतन बिलों के स्वीकृत होते ही भुगतान प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। जिले के कई अध्यापक संगठनों ने भी प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा है कि समय रहते हस्तक्षेप से बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/">गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>प्रशासन का उद्देश्य पारदर्शी, विश्वसनीय एवं सुव्यवस्थित निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करना— प्रियंका निरंजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 09:41:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka niranjan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा, 21 नवम्बर 2025। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने जिले</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोंडा, 21 नवम्बर 2025। </strong>विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने जिले भर के निर्वाचन कार्यों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि एसआईआर (SIR) फॉर्म के वितरण तथा उनके शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने अभी तक कार्य में ढिलाई बरती है या तय समयसीमा का अनुपालन नहीं किया है, उनकी पहचान कर तत्काल विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में पाया कि जिले की कुछ तहसीलों, विकास खंडों और संबंधित इकाइयों में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा के बावजूद एसआईआर फॉर्म के वितरण तथा डिजिटाइजेशन की प्रगति संतोषजनक नहीं है। इस स्थिति पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निर्वाचन कार्य किसी अन्य विभागीय कार्य की तरह सामान्य नहीं होते। यह लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती और पारदर्शिता से सीधे जुड़े कार्य हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही अस्वीकार्य है।</p>
<p>उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर पात्र मतदाता तक एसआईआर फॉर्म समय पर पहुँचे तथा प्राप्त सभी फॉर्म बिना त्रुटि और विलंब के डिजिटाइज किए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि यह कार्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यदि इस स्तर पर चूक होती है तो इसका सीधा असर निर्वाचन की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों पर पड़ता है।</p>
<p>जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दौरान सभी बीएलओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मजिस्ट्रेट और तहसील स्तरीय अधिकारी प्रचार-प्रसार, फॉर्म वितरण, संग्रहण और डिजिटाइजेशन की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाएं। उन्होंने कहा कि यह समय चुनावी तैयारियों का आधार है और किसी भी प्रकार की शिथिलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आत्मा को प्रभावित करती है।</p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने अब तक गति नहीं बढ़ाई है, वे या तो अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं या फिर गंभीरता को समझ नहीं पा रहे। दोनों ही परिस्थितियों में ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाही निश्चित है। उन्होंने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम और संबंधित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि लापरवाह कर्मचारियों की सूची तत्काल प्रस्तुत करें ताकि उन पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करता, तो उससे पूरे निर्वाचन कार्य की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाएगा।</p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने साफ किया कि एसआईआर फॉर्म के वितरण में देरी या डिजिटाइजेशन में चूक सीधे-सीधे मतदाता सूची के अद्यतन को प्रभावित करती है। इससे नए मतदाताओं के नाम जुड़ने में बाधा आती है और पुराने मतदाताओं के नामों में संशोधन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और यदि कोई कर्मचारी लापरवाही करता पाया जाए, तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच, निलंबन, वेतन रोकने से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करें और प्रत्येक बीएलओ के कार्य की निगरानी सुनिश्चित करें। सभी विकासखंडों, नगर निकायों और निर्वाचन से जुड़े विभागों को आदेश दिया गया कि वे तय समयसीमा के भीतर फॉर्म का वितरण और डिजिटाइजेशन पूरा करें।</p>
<p>जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया टीम वर्क और बेहतर समन्वय पर आधारित होती है। इसलिए सभी अधिकारी एक-दूसरे के साथ समन्वय के साथ काम करें। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि बिना समीक्षा के टीम को आगे बढ़ाने वाली प्रणाली सफल नहीं हो सकती। नियमित समीक्षा और निगरानी ही गुणवत्ता सुनिश्चित करती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने-अपने स्तर पर समीक्षा बैठकों का आयोजन करें और आख्या जिला निर्वाचन कार्यालय को भेजें।</p>
<p>श्रेमती प्रियंका निरंजन ने यह भी कहा कि पारदर्शी, विश्वसनीय और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। किसी भी जिले का चुनाव तभी व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकता है जब मतदाता सूची पूरी तरह से शुद्ध और अद्यतन हो। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का मूल उद्देश्य यही है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटे नहीं और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल बीएलओ की नहीं, बल्कि पूरी चुनावी मशीनरी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी एसआईआर फॉर्म का वितरण समय से हो और डिजिटल एंट्री गुणवत्तापूर्ण की जाए।</p>
<p>बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने यह दोहराया कि प्रशासन का लक्ष्य पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी, विश्वसनीय, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाना है। उन्होंने सभी अधिकारियों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि यदि समयसीमा के भीतर सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे हो जाते हैं, तो मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया न केवल सफल होगी बल्कि आगामी चुनाव भी सुचारू रूप से संपन्न होंगे।</p>
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		<title>गोण्डा में ‘वृक्ष उत्पादक मेला’ का भव्य आयोजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Sep 2025 12:04:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[#Narendramodi]]></category>
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		<category><![CDATA[Cm Yogi Adityanath]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[kirti vardhan singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किसानों को मिला साझा मंच, वृक्ष आधारित खेती की ओर बढ़े कदम गोण्डा, 19 सितम्बर 2025। जिला पंचायत</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/vriksh-utpadak-mela-gonda/">गोण्डा में ‘वृक्ष उत्पादक मेला’ का भव्य आयोजन</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;" data-start="320" data-end="761"><span style="color: #993300;"><strong>किसानों को मिला साझा मंच, वृक्ष आधारित खेती की ओर बढ़े कदम</strong></span></p>
<p data-start="320" data-end="761"><strong data-start="320" data-end="348">गोण्डा, 19 सितम्बर 2025। </strong>जिला पंचायत सभागार, गोण्डा का प्रांगण शुक्रवार को किसानों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति से खचाखच भरा हुआ था। अवसर था <strong data-start="488" data-end="512">“वृक्ष उत्पादक मेला”</strong> का, जिसका आयोजन पर्यावरण संरक्षण, वृक्ष आधारित खेती और किसानों की आय वृद्धि को ध्यान में रखते हुए किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता गोण्डा सांसद एवं भारत सरकार के <strong data-start="674" data-end="752">केंद्रीय राज्य मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विदेश मंत्रालय</strong> ने की।</p>
<p data-start="763" data-end="976">यह मेला केवल गोण्डा तक सीमित नहीं रहा बल्कि आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान यहाँ पहुँचे। उन्होंने न केवल अपने अनुभव साझा किए, बल्कि वृक्ष आधारित कृषि को अपनाने की दिशा में नए संकल्प भी लिए।</p>
<h3 data-start="983" data-end="1037">कार्यक्रम की भव्यता और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी</h3>
<p data-start="1038" data-end="1324">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मनकापुर विधायक <strong data-start="1090" data-end="1114">श्री रमापति शास्त्री</strong>, तरबगंज विधायक <strong data-start="1130" data-end="1159">श्री प्रेम नारायण पाण्डेय</strong>, करनैलगंज विधायक <strong data-start="1177" data-end="1194">श्री अजय सिंह</strong> और गोण्डा/बलरामपुर से विधान परिषद सदस्य <strong data-start="1235" data-end="1275">श्री अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह</strong> की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।</p>
<p data-start="1326" data-end="1590">जिलाधिकारी <strong data-start="1337" data-end="1364">श्रीमती प्रियंका निरंजन</strong> ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने विस्तार से बताया कि जिले में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कौन-कौन से प्रयास किए जा रहे हैं तथा भविष्य में किन योजनाओं को अमल में लाया जाएगा।</p>
<p data-start="1592" data-end="1732">भाजपा जिला महामंत्री <strong data-start="1613" data-end="1637">श्री जसवंत लाल सोनकर</strong> के साथ-साथ वन, कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।</p>
<p data-start="1592" data-end="1732"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5372" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e.jpg" alt="" width="1280" height="784" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-300x184.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-1024x627.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-768x470.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="1739" data-end="1776">विभागीय जानकारी और तकनीकी सहयोग</h3>
<p data-start="1777" data-end="2083">वन विभाग, कृषि विभाग और उद्यान विभाग ने मेले में अपने-अपने स्टॉल लगाए, जहाँ किसानों को नवीनतम तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों को यह बताया कि वृक्ष आधारित खेती को अपनाकर न केवल भूमि की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, बल्कि लंबे समय तक स्थायी आमदनी भी सुनिश्चित की जा सकती है।</p>
<p data-start="2085" data-end="2386">वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वृक्ष उत्पादन केवल लकड़ी या फल-फूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एक कारगर उपाय भी है। कृषि विभाग ने किसानों को यह बताया कि मिश्रित खेती और वृक्ष आधारित मॉडल से जोखिम कम होता है और बाजार में उत्पादों की विविधता बढ़ती है।</p>
<h3 data-start="2393" data-end="2428">प्रगतिशील किसानों की भागीदारी</h3>
<p data-start="2429" data-end="2765">इस मेले में गोण्डा और अन्य जनपदों से आए सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। इनमें से कई किसान ऐसे थे, जिन्होंने वर्षों पहले वृक्ष आधारित खेती को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। कार्यक्रम के दौरान इन किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे आम, अमरूद, सहजन, शीशम, पॉपलर और बांस जैसे वृक्षों ने उनकी आजीविका को नई दिशा दी।</p>
<p data-start="2767" data-end="2997">कुछ किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को स्थानीय स्तर पर वृक्ष उत्पादों की खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही प्रसंस्करण केंद्रों और मूल्य निर्धारण प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सके।</p>
<p data-start="2767" data-end="2997"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5373" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126.jpg" alt="" width="1280" height="725" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-300x170.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-1024x580.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-768x435.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="3004" data-end="3037">प्रगतिशील किसानों का सम्मान</h3>
<p data-start="3038" data-end="3240">कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से में उन किसानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली को अपनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया।</p>
<p data-start="3242" data-end="3409">सम्मानित किसानों को <strong data-start="3262" data-end="3293">प्रतीक चिन्ह और प्रमाण पत्र</strong> प्रदान किए गए। यह सम्मान उनके प्रयासों की पहचान मात्र नहीं थी, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी।</p>
<h3 data-start="3416" data-end="3462">सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री का संबोधन</h3>
<p data-start="3463" data-end="3943">मुख्य अतिथि एवं अध्यक्षता कर रहे <strong data-start="3496" data-end="3530">सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री</strong> ने अपने उद्बोधन में कहा कि वृक्ष उत्पादन केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में यदि किसान वृक्षारोपण को अपनी खेती का हिस्सा बनाते हैं तो यह न केवल धरती के लिए फायदेमंद होगा बल्कि उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।</p>
<p data-start="3945" data-end="4062">उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और प्रकृति संरक्षण की इस मुहिम में भागीदार बनें।</p>
<h3 data-start="4069" data-end="4092">स्टॉलों का अवलोकन</h3>
<p data-start="4093" data-end="4480">मेले के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर अधिकारियों और किसानों से जानकारी प्राप्त की। विभागीय योजनाओं की जानकारी और किसानों के सुझावों को सुनकर उन्होंने अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचाना और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>
<h3 data-start="4487" data-end="4524">कार्यक्रम के उद्देश्य और प्रभाव</h3>
<p data-start="4525" data-end="4724">“वृक्ष उत्पादक मेला” का मुख्य उद्देश्य किसानों को वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली के महत्व से अवगत कराना था। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि खेती केवल अनाज या पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।</p>
<p data-start="4726" data-end="4748">वृक्ष आधारित खेती से</p>
<ul data-start="4749" data-end="4955">
<li data-start="4749" data-end="4782">
<p data-start="4751" data-end="4782"><strong data-start="4751" data-end="4771">पर्यावरण संरक्षण</strong> होता है।</p>
</li>
<li data-start="4783" data-end="4832">
<p data-start="4785" data-end="4832"><strong data-start="4785" data-end="4802">जलवायु संतुलन</strong> बनाए रखने में मदद मिलती है।</p>
</li>
<li data-start="4833" data-end="4890">
<p data-start="4835" data-end="4890">किसान को <strong data-start="4844" data-end="4869">अतिरिक्त और स्थायी आय</strong> का स्रोत मिलता है।</p>
</li>
<li data-start="4891" data-end="4955">
<p data-start="4893" data-end="4955">भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और कटाव की समस्या कम होती है।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="4962" data-end="4992">किसानों की प्रतिक्रियाएँ</h3>
<p data-start="4993" data-end="5174">मेले में शामिल कई किसानों ने कार्यक्रम को सराहनीय बताया। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें न केवल नई जानकारियाँ मिलती हैं बल्कि अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलता है।</p>
<p data-start="5176" data-end="5408">बहराइच से आए एक किसान ने कहा, <em data-start="5206" data-end="5406">“मैंने पाँच साल पहले सहजन और पॉपलर की खेती शुरू की थी। आज उससे मुझे सालाना लाखों की आमदनी हो रही है। इस मेले में आकर मुझे और तकनीकी जानकारी मिली है, जिसे अपनाकर मैं आगे अपनी खेती का विस्तार करूंगा।”</em></p>
<p data-start="5410" data-end="5550">वहीं गोंडा के ही एक किसान ने कहा कि सरकार को वृक्ष उत्पादों की स्थानीय खरीद प्रणाली विकसित करनी चाहिए, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।</p>
<p data-start="5410" data-end="5550"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5374" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df.jpg" alt="" width="1280" height="680" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-300x159.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-1024x544.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-768x408.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="5557" data-end="5577">भविष्य की दिशा</h3>
<p data-start="5578" data-end="5882">जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने अपने संबोधन में कहा कि जिले में वृक्ष आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही विभिन्न योजनाओं को इस प्रकार लागू किया जाएगा कि अधिक से अधिक किसान इससे लाभ उठा सकें।</p>
<p data-start="5884" data-end="6091">उन्होंने यह भी बताया कि जिले में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर तक समितियाँ गठित की जाएंगी। इससे किसानों को न केवल मार्गदर्शन मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान भी संभव हो सकेगा।</p>
<p data-start="6113" data-end="6323">गोण्डा में आयोजित <strong data-start="6131" data-end="6155">“वृक्ष उत्पादक मेला”</strong> ने यह साबित कर दिया कि यदि किसानों को सही जानकारी, तकनीकी सहयोग और प्रोत्साहन मिले तो वे पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक उन्नति दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p data-start="6325" data-end="6487">यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि किसानों के लिए एक साझा मंच था, जहाँ उन्होंने अनुभव साझा किए, तकनीकी जानकारी प्राप्त की और भविष्य की राह तय की।</p>
<p data-start="6489" data-end="6692">मेले का समापन धन्यवाद ज्ञापन और प्रेरणादायक उद्बोधनों के साथ हुआ। इसमें किसानों ने यह संकल्प लिया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करेंगे और पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाएंगे।</p>
<p data-start="6694" data-end="6780"><strong data-start="6694" data-end="6778">वृक्ष उत्पादक मेला किसानों के लिए आशा और प्रेरणा का नया स्रोत बनकर सामने आया है।</strong></p>
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		<title>चोरी और अफवाहों पर अंकुश के लिए बन रही ग्राम व मोहल्ला सुरक्षा समितियाँ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Sep 2025 11:44:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#gondapolice]]></category>
		<category><![CDATA[Cm Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा, 19 सितम्बर। जनपद में लगातार मिल रही चोरी की शिकायतों और फैल रही अफवाहों पर अंकुश लगाने</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="263" data-end="700"><strong data-start="263" data-end="286">गोण्डा, 19 सितम्बर। </strong>जनपद में लगातार मिल रही चोरी की शिकायतों और फैल रही अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए गोण्डा पुलिस ने सामुदायिक सहभागिता पर आधारित एक नई पहल शुरू की है। पुलिस अधीक्षक गोण्डा <strong data-start="459" data-end="481">श्री विनीत जायसवाल</strong> के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी एवं पश्चिमी के पर्यवेक्षण तथा सभी क्षेत्रीय अधिकारियों के नेतृत्व में जनपद के प्रत्येक गाँव और मजरों में <strong data-start="625" data-end="676">ग्राम सुरक्षा समितियाँ/मोहल्ला सुरक्षा समितियाँ</strong> गठित कराई जा रही हैं।</p>
<h3 data-start="702" data-end="734">पुलिस-जन सहयोग का नया मॉडल</h3>
<p data-start="735" data-end="1148">पुलिस अधीक्षक श्री जायसवाल का कहना है कि इन समितियों का उद्देश्य केवल गश्त करना या सूचना देना नहीं है, बल्कि गाँवों और मोहल्लों में पुलिस और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत करना भी है। उन्होंने बताया कि समितियों के सदस्य स्थानीय स्तर पर पुलिस को गाँव की गतिविधियों की जानकारी देंगे। किसी भी प्रकार की अफवाह फैलने की स्थिति में यह समिति समय रहते सच और झूठ का फर्क बताकर हालात को बिगड़ने से रोकने में मदद करेगी।</p>
<p data-start="1150" data-end="1322">रात्रि गश्त में समितियों की भागीदारी से चोरी और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। इससे न केवल अपराधों की रोकथाम होगी बल्कि ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।</p>
<h3 data-start="1324" data-end="1345">अब तक का आंकड़ा</h3>
<p data-start="1346" data-end="1512">अब तक जनपद के 17 थाना क्षेत्रों में <strong data-start="1382" data-end="1407">1128 सुरक्षा समितियों</strong> का गठन किया जा चुका है। यह समितियाँ <strong data-start="1444" data-end="1459">1731 गाँवों</strong> में सक्रिय की गई हैं। थाना-वार विवरण इस प्रकार है–</p>
<ul data-start="1513" data-end="1818">
<li data-start="1513" data-end="1533">
<p data-start="1515" data-end="1533">कोतवाली नगर – 42</p>
</li>
<li data-start="1534" data-end="1557">
<p data-start="1536" data-end="1557">कोतवाली देहात – 164</p>
</li>
<li data-start="1558" data-end="1575">
<p data-start="1560" data-end="1575">खरगूपुर – 108</p>
</li>
<li data-start="1576" data-end="1593">
<p data-start="1578" data-end="1593">इटियाथोक – 34</p>
</li>
<li data-start="1594" data-end="1610">
<p data-start="1596" data-end="1610">धानेपुर – 86</p>
</li>
<li data-start="1611" data-end="1627">
<p data-start="1613" data-end="1627">मोतीगंज – 79</p>
</li>
<li data-start="1628" data-end="1644">
<p data-start="1630" data-end="1644">मनकापुर – 21</p>
</li>
<li data-start="1645" data-end="1661">
<p data-start="1647" data-end="1661">खोड़ारे – 44</p>
</li>
<li data-start="1662" data-end="1676">
<p data-start="1664" data-end="1676">छपिया – 31</p>
</li>
<li data-start="1677" data-end="1692">
<p data-start="1679" data-end="1692">तरबगंज – 65</p>
</li>
<li data-start="1693" data-end="1709">
<p data-start="1695" data-end="1709">नवाबगंज – 33</p>
</li>
<li data-start="1710" data-end="1726">
<p data-start="1712" data-end="1726">वजीरगंज – 87</p>
</li>
<li data-start="1727" data-end="1747">
<p data-start="1729" data-end="1747">उमरीबेगमगंज – 45</p>
</li>
<li data-start="1748" data-end="1765">
<p data-start="1750" data-end="1765">कर्नलगंज – 92</p>
</li>
<li data-start="1766" data-end="1781">
<p data-start="1768" data-end="1781">परसपुर – 72</p>
</li>
<li data-start="1782" data-end="1798">
<p data-start="1784" data-end="1798">कौड़िया – 65</p>
</li>
<li data-start="1799" data-end="1818">
<p data-start="1801" data-end="1818">कटरा बाजार – 60</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="1820" data-end="1850">समितियों की मुख्य भूमिका</h3>
<p data-start="1851" data-end="2023">ग्राम एवं मोहल्ला सुरक्षा समितियों की जिम्मेदारी केवल सूचना देना ही नहीं बल्कि गाँव की सामाजिक एकजुटता को भी मजबूत करना है। इन समितियों की जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित होंगी–</p>
<ol data-start="2024" data-end="2600">
<li data-start="2024" data-end="2114">
<p data-start="2027" data-end="2114"><strong data-start="2027" data-end="2055">चोरी की घटनाओं की रोकथाम</strong> – संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुँचाना।</p>
</li>
<li data-start="2115" data-end="2230">
<p data-start="2118" data-end="2230"><strong data-start="2118" data-end="2158">बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर नियंत्रण</strong> – रात्रि के समय ड्रोन संचालन की सूचना देकर सुरक्षा जोखिमों से निपटना।</p>
</li>
<li data-start="2231" data-end="2319">
<p data-start="2234" data-end="2319"><strong data-start="2234" data-end="2253">अफवाहों का खंडन</strong> – किसी भी अफवाह को फैलने से रोकना और समय रहते उसका निवारण करना।</p>
</li>
<li data-start="2320" data-end="2408">
<p data-start="2323" data-end="2408"><strong data-start="2323" data-end="2352">स्थानीय विवादों का समाधान</strong> – आपसी झगड़ों को पुलिस-जन सहयोग से सुलझाने का प्रयास।</p>
</li>
<li data-start="2409" data-end="2504">
<p data-start="2412" data-end="2504"><strong data-start="2412" data-end="2434">सामुदायिक सहभागिता</strong> – अपराध नियंत्रण और शांति व्यवस्था में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी।</p>
</li>
<li data-start="2505" data-end="2600">
<p data-start="2508" data-end="2600"><strong data-start="2508" data-end="2538">मित्रवत पुलिसिंग को बढ़ावा</strong> – आमजन और पुलिस के बीच सीधे संवाद और भरोसे का रिश्ता बनाना।</p>
</li>
</ol>
<h3 data-start="2602" data-end="2629">जनता को क्या लाभ होगा</h3>
<p data-start="2630" data-end="2877">इस पहल से गाँवों में शांति-सुरक्षा का माहौल बनेगा। चोरी जैसी घटनाएँ घटेंगी और झूठी अफवाहों पर रोक लगेगी। ग्रामीणों को पुलिस तक पहुँचने के लिए किसी औपचारिकता की ज़रूरत नहीं रहेगी, बल्कि सुरक्षा समिति के सदस्य ही उनकी आवाज़ बनकर तुरंत सूचना देंगे।</p>
<p data-start="2879" data-end="3080">इसके अलावा रात्रि गश्त में समितियों की मौजूदगी से गाँव वालों को सुरक्षा का अहसास होगा। सामुदायिक भागीदारी से विवाद बढ़ने से पहले ही निपटा लिए जाएंगे, जिससे मुकदमों और अनावश्यक झगड़ों की संख्या घटेगी।गोण्डा पुलिस की यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग का एक नया मॉडल साबित हो सकती है। जिस तरह पहले मोहल्ला समितियों ने शहरों में अपराध नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई थी, उसी तरह गाँवों में ग्राम सुरक्षा समितियाँ पुलिस की “आँख और कान” बन सकती हैं।</p>
<p data-start="3341" data-end="3531">पुलिस अधीक्षक श्री विनीत जायसवाल का कहना है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और व्यापक बनाया जाएगा तथा हर समिति को जागरूकता और जिम्मेदारी से जोड़ने के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जाएँगी। जनपद गोण्डा में शुरू हुआ यह अभियान केवल चोरी और अफवाहों को रोकने का प्रयास नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने का जरिया भी है। जब गाँव का हर नागरिक अपराध नियंत्रण का साझेदार बनेगा, तभी पुलिसिंग का असली उद्देश्य—शांति, सौहार्द और सुरक्षित समाज—पूरी तरह से साकार हो सकेगा।</p>
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