दुर्गा शक्ति नागपाल का बाबू ईश्वर शरण अस्पताल में औचक निरीक्षण, खराब वेंटिलेटर तत्काल ठीक करने के निर्देश
गोंडा, 28 अप्रैल 2026। दुर्गा शक्ति नागपाल ने मंगलवार को बाबू ईश्वर शरण अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को परखा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध इस प्रमुख अस्पताल में व्यवस्थाओं की स्थिति का बारीकी से अवलोकन करते हुए उन्होंने साफ-सफाई, उपकरणों की कार्यक्षमता, पेयजल, वार्ड प्रबंधन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई कमियां सामने आईं, जिस पर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

निरीक्षण की शुरुआत आयुक्त ने इमरजेंसी वार्ड से की, जहां उन्होंने भर्ती मरीजों की स्थिति, डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं के संचालन का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि कुछ स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि अस्पताल के प्रत्येक हिस्से में स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी वार्ड वह स्थान है जहां मरीज गंभीर अवस्था में आते हैं, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके बाद आयुक्त ने ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने मरीजों की लंबी कतारें, पंजीकरण प्रक्रिया और चिकित्सकों की उपस्थिति की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों को कम से कम समय में उपचार उपलब्ध कराया जाए और अनावश्यक देरी से बचा जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वृद्ध, दिव्यांग और महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था हो ताकि उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।

वार्डों के निरीक्षण के दौरान दुर्गा शक्ति नागपाल ने मरीजों के बेड, चादरों और सामान्य स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। कई बेडों पर बिछी चादरें गंदी और पुरानी पाई गईं, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रत्येक मरीज को साफ और नियमित रूप से बदली जाने वाली चादरें उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है।
निरीक्षण के दौरान एक अहम मुद्दा अस्पताल में लगे वेंटिलेटर मशीनों की खराब स्थिति का सामने आया। आयुक्त ने पाया कि कई वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि सभी खराब वेंटिलेटर मशीनों को तत्काल ठीक कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जीवन रक्षक उपकरणों का खराब होना बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण मशीनें अस्पताल की रीढ़ होती हैं, खासकर गंभीर मरीजों के लिए। यदि ये उपकरण समय पर काम न करें तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए और एक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे किसी भी खराबी की जानकारी तुरंत मिल सके।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में लगे कूलरों की स्थिति भी आयुक्त के संज्ञान में आई। कई कूलर बंद पाए गए, जिससे गर्मी के मौसम में मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी हो रही थी। इस पर उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कूलरों को तत्काल क्रियाशील किया जाए और गर्मी से राहत के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पेयजल व्यवस्था को लेकर भी आयुक्त ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता की जांच की। कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था अपर्याप्त पाई गई, जिस पर उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों और तीमारदारों के लिए शुद्ध और पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह एक बुनियादी सुविधा है, जिसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों से भी बातचीत की। उन्होंने उनकी समस्याओं को सुना और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। कई मरीजों ने दवाओं की उपलब्धता, सफाई और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति को लेकर शिकायतें कीं। इस पर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का गंभीरता से निस्तारण किया जाए।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं बल्कि मरीजों के लिए उम्मीद की जगह होता है, इसलिए यहां की व्यवस्था मानवीय दृष्टिकोण से बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को यह समझना होगा कि उनकी जिम्मेदारी केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा है।
आयुक्त ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में निरीक्षण के दौरान इसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कहा कि वे एक कार्ययोजना बनाकर व्यवस्थाओं में सुधार लाएं और उसकी नियमित समीक्षा करें।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के रिकॉर्ड, दवा वितरण व्यवस्था और लैब सेवाओं की भी जांच की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी रिकॉर्ड अपडेट रखे जाएं और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
गोंडा के इस प्रमुख सरकारी अस्पताल में मंडलायुक्त का यह औचक निरीक्षण स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनेगा और व्यवस्थाओं में सुधार होगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वेंटिलेटर मशीनों की मरम्मत, साफ-सफाई में सुधार और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस निरीक्षण ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की सख्ती से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिलेगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
अंततः, यह निरीक्षण केवल कमियों को उजागर करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुधार की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में सामने आया है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इन निर्देशों को किस गंभीरता से लागू करता है और क्या वास्तव में मरीजों को राहत मिल पाती है या नहीं।
