कई जिलों में बदले डीएम, शासन और निगमों में भी व्यापक बदलाव; विकास व कानून-व्यवस्था पर फोकस
लखनऊ, ब्यूरो। उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। जारी सूची के मुताबिक जिलों से लेकर शासन और निगमों तक व्यापक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इस फेरबदल में सबसे अहम नियुक्ति दुर्गा शक्ति नागपाल की मानी जा रही है, जिन्हें देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक कसावट, विकास कार्यों में तेजी और कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रदेश में लंबे समय बाद इतने बड़े पैमाने पर आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। इस सूची में कई जिलाधिकारियों को हटाकर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, वहीं कुछ अधिकारियों को शासन स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार आगामी समय में प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहती है।
तबादला सूची में सबसे ज्यादा चर्चा दुर्गा शक्ति नागपाल की नियुक्ति को लेकर है। वह अभी तक लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी के पद पर तैनात थीं। अब उन्हें देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है। यह मंडल गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जैसे जिलों को कवर करता है और विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुर्गा शक्ति नागपाल की छवि एक सख्त, ईमानदार और परिणाम देने वाली अधिकारी की रही है। अवैध खनन के खिलाफ उनकी कार्रवाई पहले भी सुर्खियों में रही थी। ऐसे में उनकी इस नई तैनाती को सरकार के मजबूत प्रशासनिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार ने कई जिलों में जिलाधिकारियों का तबादला किया है। उन्नाव के जिलाधिकारी गौरांग राठी को झांसी का नया डीएम बनाया गया है। वहीं सुल्तानपुर के डीएम कुमार हर्ष को बुलंदशहर भेजा गया है। बुलंदशहर में तैनात अधिकारी को अन्य जिम्मेदारी दी गई है।

अमरोहा की जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स को फतेहपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। हमीरपुर के जिलाधिकारी घनश्याम मीणा को उन्नाव भेजा गया है। इसी तरह मैनपुरी, औरैया, आगरा, सहारनपुर, शामली, श्रावस्ती, रायबरेली और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में नए जिलाधिकारी तैनात किए गए हैं।
इन बदलावों से साफ है कि सरकार जिलों के प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार समीक्षा कर रही है और जरूरत के अनुसार अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दे रही है।
तबादला केवल जिलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। ऊर्जा, खाद्य एवं रसद, पर्यटन, अल्पसंख्यक कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार, श्रम और माध्यमिक शिक्षा विभाग में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

अभिषेक गोयल को खाद्य एवं रसद विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है। वहीं ऊर्जा विभाग में भी बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। कई अधिकारियों को विशेष सचिव, अपर मुख्य सचिव और निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है।
प्रदेश के विकास प्राधिकरणों और निगमों में भी व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। झांसी विकास प्राधिकरण, हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण समेत कई संस्थानों में नए उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में भी नए प्रबंध निदेशक नियुक्त किए गए हैं। इन नियुक्तियों को राज्य में बिजली व्यवस्था सुधारने और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार ने कई जिलों में मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के पद पर भी बदलाव किया है। अमेठी, झांसी, हापुड़, बदायूं और बहराइच में नए सीडीओ तैनात किए गए हैं। यह बदलाव ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से किए गए हैं।
सीडीओ स्तर पर हुए ये बदलाव खास तौर पर मनरेगा, ग्रामीण आवास योजना और अन्य विकास योजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन तबादलों का सीधा असर जिलों के कामकाज पर देखने को मिलेगा। नए जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में प्राथमिकताओं के आधार पर काम शुरू करेंगे। कई जिलों में विकास कार्यों की गति तेज होने की उम्मीद है, वहीं कुछ जगहों पर कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ सकती है।
जहां प्रशासनिक ढिलाई की शिकायतें रही हैं, वहां नए अधिकारियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह विकास और सुशासन के एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है।
दुर्गा शक्ति नागपाल की देवीपाटन मंडल में नियुक्ति इस सूची की सबसे अहम कड़ी है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र के प्रशासनिक और विकासात्मक ढांचे को नई दिशा दे सकती है।
अब देखना होगा कि नए अधिकारी अपने-अपने पदों पर किस तरह काम करते हैं और सरकार की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरते हैं।
