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	<title>Vitt ewam lekha vibhag Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग को 6 महीने बाद मिला स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:37:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda Basic Education Department gets permanent Finance and Accounts Officer after 6 months]]></category>
		<category><![CDATA[Vitt ewam lekha vibhag]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/gonda-basic-education-department-gets-permanent-finance-and-accounts-officer-after-6-months/">गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग को 6 महीने बाद मिला स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद</strong></p>
<p>गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से रिक्त चल रहे वित्त एवं लेखा अधिकारी (एफ़एओ) के पद पर आखिरकार स्थायी नियुक्ति हो गई है। मंगलवार को संजय चतुर्वेदी ने कार्यालय बेसिक शिक्षा में पहुंचकर विधिवत रूप से अपना पदभार ग्रहण किया। छह महीने से बिना नियमित वित्त एवं लेखाधिकारी के काम कर रहे विभाग में इस नियुक्ति को शिक्षकों व कर्मचारियों ने राहत की बड़ी खबर के रूप में लिया है। पदभार ग्रहण करते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्री चतुर्वेदी का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि अब विभागीय कार्यों में तेजी आएगी।</p>
<p>पदभार ग्रहण के बाद संजय चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि <strong>शिक्षकों को वेतन संबंधी परेशानियों का सामना अब नहीं करना पड़ेगा।</strong> उन्होंने कहा कि विभाग में लंबे समय से वेतन भुगतान की प्रक्रिया बाधित होने के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी, लेकिन अब समय से वेतन भेजना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे होंगे।</p>
<p>श्री चतुर्वेदी पहले भी गोंडा में वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर कार्य कर चुके हैं और अपने निडर व निष्पक्ष कार्यशैली के कारण जाने जाते हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उनके पिछले कार्यकाल में न केवल फाइलों का निस्तारण समय से हुआ, बल्कि वेतन भुगतान भी सुचारू रूप से चलता रहा। इसी कारण शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ में उनकी वापसी को लेकर सकारात्मक माहौल देखा गया।</p>
<p><strong>वेतन भुगतान में आ रही दिक्कतें होंगी समाप्त</strong><br />
गौरतलब है कि पिछले छह महीनों से विभाग में स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी न होने के कारण वेतन भुगतान संबंधी कई फाइलें लंबित पड़ी थीं। परिषदीय विद्यालयों के हजारों शिक्षकों के साथ-साथ अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों को भी वेतन न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ा था। इस दौरान शिक्षकों के संगठनों ने कई बार जिला प्रशासन से नियुक्ति करने की मांग उठाई थी। अब संजय चतुर्वेदी के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षकों में विश्वास जगा है कि वेतन भुगतान की पुरानी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।</p>
<p>संजय चतुर्वेदी ने कहा कि <strong>शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ही उनकी प्राथमिकता होगी।</strong> उन्होंने बताया कि विभागीय फाइलों के समय से निस्तारण के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे किसी भी कार्य में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी बिल, गलत भुगतान या किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य नियम और वित्तीय मानकों के अनुसार ही किए जाएंगे।</p>
<p><strong>शिक्षक संगठनों ने जताई उम्मीद</strong><br />
पदभार ग्रहण के दौरान प्राथमिक शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने संजय चतुर्वेदी का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग को एक अनुभवी और सख्त वित्त अधिकारी मिलना पूरे जिले के लिए सकारात्मक संकेत है। शिक्षक नेताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विभाग में पारदर्शिता बढ़ेगी और वेतन भुगतान, पेंशन, अवकाश नकदीकरण, चिकित्सीय प्रतिपूर्ति जैसी फाइलों का निस्तारण तेजी से होगा।</p>
<p>एक शिक्षक प्रतिनिधि ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अनेक शिक्षक वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। बैंक किश्तों से लेकर घरेलू खर्च तक प्रभावित हुए। अब नए वित्त अधिकारी के आने से यह उम्मीद बंधी है कि भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध होगी और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>विभाग में कार्यप्रणाली को सुधारने पर होगा जोर</strong><br />
संजय चतुर्वेदी ने बताया कि वे विभागीय कर्मचारियों के साथ बैठक करके कार्यप्रणाली को और सुव्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग कर फाइलों के निस्तारण में तेजी लाई जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर दिक्कत उत्पन्न न हो।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की कोई समस्या लंबित है, तो वह सीधे कार्यालय में आकर अपनी बात रख सकता है। प्रत्येक मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p>कुल मिलाकर, संजय चतुर्वेदी के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा का संचार महसूस किया जा रहा है। शिक्षकों, कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि उनकी कार्यशैली से न केवल वेतन भुगतान की समस्या दूर होगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता भी मजबूत होगी।</p>
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		<title>मृतक आश्रित कोटे में भर्ती हुए अनुचर को अध्यापक बनाकर 80 लाख से अधिक का फर्जी भुगतान, विभाग में मचा हड़कंप</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/fake-payment-of-more-than-80-lakhs-made-by-making-a-peon-recruited-under-deceased-dependent-quota-a-teacher-uproar-in-the-department/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Dec 2024 15:13:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 7 दिसंबर। जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां परिषदीय विद्यालय में मृतक आश्रित</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/fake-payment-of-more-than-80-lakhs-made-by-making-a-peon-recruited-under-deceased-dependent-quota-a-teacher-uproar-in-the-department/">मृतक आश्रित कोटे में भर्ती हुए अनुचर को अध्यापक बनाकर 80 लाख से अधिक का फर्जी भुगतान, विभाग में मचा हड़कंप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 7 दिसंबर। जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां परिषदीय विद्यालय में मृतक आश्रित कोटे के तहत अनुचर के पद पर नियुक्त एक व्यक्ति को फर्जी आदेशों के माध्यम से अध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए उसेउस80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया। यह मामला बेसिक शिक्षा विभाग में भारी अनियमितताओं की ओर इशारा करता है, जहां न सिर्फ फर्जी आदेशों के आधार पर नियुक्ति दी गई, बल्कि विभाग द्वारा इसे वर्षों तक अनदेखा किया गया।</p>
<p><strong>मामले का खुलासा</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे के तहत एक व्यक्ति की नियुक्ति अनुचर के पद पर की गई थी। लेकिन कुछ समय बाद, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे अध्यापक के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया। संबंधित आदेशों को शासनादेश बताया जा रहा था, जबकि अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ऐसा कोई शासनादेश अस्तित्व में ही नहीं है।</p>
<p><strong>फर्जी आदेश कैसे बना आधार</strong></p>
<p>इस मामले में सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि जिस मूल आदेश का हवाला देकर व्यक्ति को अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया, वह पूरी तरह फर्जी पाया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि यह आदेश कहीं भी विभागीय या शासन के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। इसके बावजूद, व्यक्ति को अध्यापक पद पर बैठाकर उसे संबंधित पद का वेतन दिया गया।</p>
<p><strong>80 लाख से अधिक का भुगतान और हिस्सेदारी का सवाल</strong></p>
<p>मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक अनुचर को बिना किसी वैध प्रक्रिया के अध्यापक पद पर बैठाने और उसे 80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करने की अनुमति किसने दी। सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। यह भी संदेह है कि इस राशि में अधिकारियों की हिस्सेदारी तय की गई हो।</p>
<p><strong>कानूनी और प्रशासनिक नियमों की धज्जियां</strong></p>
<p>शिक्षा विभाग में हुई इस गड़बड़ी ने प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त व्यक्ति को उसके मूल पद पर ही कार्य करना होता है। यदि किसी भी प्रकार का पदोन्नति या पद परिवर्तन करना हो, तो इसके लिए उच्च स्तर से आदेश जारी करना आवश्यक है। लेकिन इस मामले में, न तो किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी ली गई और न ही शासन स्तर से कोई आदेश जारी हुआ।</p>
<p><strong>विभाग की भूमिका संदिग्ध</strong></p>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग की भूमिका इस मामले में संदेह के घेरे में है। इतने लंबे समय तक फर्जी आदेश के आधार पर भुगतान होते रहने के बावजूद किसी भी अधिकारी ने इस पर सवाल नहीं उठाया। क्या विभाग जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज करता रहा? या फिर इसमें विभाग के अधिकारियों की सीधी भागीदारी थी?</p>
<p><strong>जांच में हुआ बड़ा खुलासा</strong></p>
<p>मामला उजागर होने के बाद, बेसिक शिक्षा विभाग ने आंतरिक जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आदेश पूरी तरह फर्जी थे और इसे विभागीय रिकॉर्ड में दिखाने के लिए हेरफेर किया गया था। जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि संबंधित व्यक्ति को अनुचर पद से सीधे अध्यापक पद पर बैठाना पूरी तरह से नियम विरुद्ध था।</p>
<p><strong>आर्थिक नुकसान और कानूनी कार्रवाई</strong></p>
<p>इस घोटाले से न सिर्फ सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि शिक्षा विभाग की साख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वर्तमान में विभाग ने संबंधित व्यक्ति की सेवा समाप्त करने और भुगतान की रिकवरी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण</strong></p>
<p>गोंडा में सामने आया यह मामला भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण है, जहां विभागीय मिलीभगत से न सिर्फ सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया, बल्कि जनसेवा की भावना को भी आघात पहुंचाया गया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे सरकारी तंत्र में कुछ अधिकारी अपने स्वार्थ के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग कर सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या विभाग पर होगी कार्रवाई?</strong></p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घोटाले के बाद शिक्षा विभाग में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाएगा? या फिर मामले को दबाने की कोशिश होगी?</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा में सामने आया यह मामला सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की एक झलक प्रस्तुत करता है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। यदि इस मामले में दोषियों को सख्त सजा नहीं दी गई, तो यह भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने का काम करेगा। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस घोटाले में शामिल लोगों को कब और कैसे न्याय के दायरे में लाया जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/fake-payment-of-more-than-80-lakhs-made-by-making-a-peon-recruited-under-deceased-dependent-quota-a-teacher-uproar-in-the-department/">मृतक आश्रित कोटे में भर्ती हुए अनुचर को अध्यापक बनाकर 80 लाख से अधिक का फर्जी भुगतान, विभाग में मचा हड़कंप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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