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	<title>Up police Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>आईजी साहब का फरमान और पुलिस हुई तनाव मुक्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Oct 2024 10:27:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[#uppolice]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda police]]></category>
		<category><![CDATA[Up police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>( हास्य व्यंग ) पुलिस का तनाव एक ऐसा विषय है जिसे लेकर अब तक कई जतन किए</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>( हास्य व्यंग )</strong></p>
<p>पुलिस का तनाव एक ऐसा विषय है जिसे लेकर अब तक कई जतन किए गए हैं, लेकिन इसका कोई ठोस निदान नहीं मिला। इसी संदर्भ में हमारे महान आईजी साहब को अचानक यह बोध हुआ कि पुलिस महकमे में तनाव का कारण कोई बाहरी तत्व नहीं, बल्कि खुद पुलिस के लोग ही हैं। आईजी साहब का मानना था कि यदि वह खुद तनाव में हैं, तो बाकी पुलिस वालों का क्या हाल होगा! और जब पूरा महकमा तनाव में होगा, तो काम कैसे होगा?</p>
<p>इसी तनाव के कारण शायद मातहत सही ढंग से काम नहीं कर रहे थे, इसलिए साहब ने सोचा कि पहले इस तनाव को दूर करना होगा। लेकिन समस्या यह थी कि पुलिस का तनाव किस चीज से दूर होगा, यह किसी को ठीक से पता नहीं था। वर्षों से 1861 के पुलिस रेगुलेशन का पालन करते हुए कोई यह नहीं समझ पाया था कि पुलिस आखिर तनाव में क्यों रहती है?</p>
<p>आईजी साहब के मन में अचानक विचार आया— योग। हां, योग से तनाव दूर किया जा सकता है। वह सुन चुके थे कि योग तनाव प्रबंधन का अचूक उपाय है। यही सोचकर उन्होंने तुरंत डीआईजी साहब को बुलाया। &#8220;पुलिस में तनाव प्रबंधन&#8221; पर चर्चा करते हुए दोनों अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि तनाव से मुक्ति के लिए योग ही एकमात्र उपाय है।</p>
<p><strong>योग के लिए आदेश जारी</strong></p>
<p>फिर क्या था, आदेश जारी हो गया कि अगले दिन रेंज के सभी एसपी और उनके मातहत पुलिस कर्मी पुलिस लाइन में सुबह 5 बजे योग करेंगे। थाना प्रभारियों को अपने-अपने थानों से पाँच-पाँच सबसे ज्यादा तनावग्रस्त पुलिसकर्मियों को लेकर आना था। आदेश के अनुसार, जो योग करने नहीं आया, उसे पुलिस लाइन में लाईन हाजिर कर दिया जाएगा। यानी, अगर आप तनाव में नहीं हो, तो इस आदेश के पालन के लिए पहले तनाव में आ जाओ!</p>
<p>एसपी साहबान को आदेश मिलते ही चिंता सताने लगी। &#8220;सुबह पाँच बजे उठना?&#8221; खुद ही एक कुम्भकर्णीय तनाव था। इसके बावजूद उन्होंने अपने जिले के थाना प्रभारियों को आदेश जारी कर दिया कि सभी पाँच बजे तक पुलिस लाइन में हाजिर हों।</p>
<p><strong>हेड मुहर्रिर की चिंता</strong></p>
<p>आदेश का पालन करने के लिए थाना प्रभारी अपने हेड मुहर्रिर को बुलाते हैं और कहते हैं, &#8220;देखो, कल पाँच-पाँच तनावग्रस्त लोग लेकर पुलिस लाइन जाना है। तैयार रहना!&#8221;</p>
<p>हेड मुहर्रिर पहले से ही पूरे दिन के काम के बाद तनाव में था। उसने अपने तनाव को कुछ सिपाहियों पर थोप दिया। उसने पाँच सिपाहियों का चयन किया, जो दिन भर थाने में मस्त रहते थे और बस अपनी मूंछों को घुमाकर ही नौकरी का सारा बोझ हल्का कर लेते थे। उन्हें रात में ही बता दिया गया कि कल सुबह पाँच बजे तनावमुक्त होना है।</p>
<p>लेकिन पांच में से तीन सिपाही रात की गश्त पर थे। उन्होंने हेड मुहर्रिर को नया तनाव दे दिया— &#8220;हम सुबह पाँच बजे कैसे पहुँचेंगे, अभी तो गश्त पर हैं?&#8221; हेड मुहर्रिर, जो पहले से ही बुरी तरह तनाव में था, उन पर भड़क गया— &#8220;मुझे कुछ नहीं पता! पाँच बजे तक अगर पुलिस लाइन में नहीं पहुँचे तो फिर हमेशा के लिए लाईन हाजिर हो जाओगे। आईजी साहब का आदेश है, समझे?&#8221;</p>
<p><strong>पुलिस कंट्रोल रूम की हलचल</strong></p>
<p>रात के आठ बजते-बजते वायरलेस पर संदेश गूंजने लगा, “कल सुबह पाँच बजे थाना प्रभारी और उनके साथ पाँच-पाँच सिपाही पुलिस लाइन में तनाव मुक्त होने के लिए आएंगे।” पुलिस महकमे में चारों ओर हलचल मच गई। जो लोग दिन भर के तनाव के बाद अब घर पर आराम से टीवी देख रहे थे, वे भी आदेश सुनकर चिंता में पड़ गए। अब थाना प्रभारी को कौन समझाए कि योग करने के लिए भी तनाव में होना पड़ेगा, नहीं तो योग का क्या फायदा?</p>
<p><strong>आईजी साहब का सपना</strong></p>
<p>रात को आईजी साहब को थोड़ी झपकी लगी। उन्हें सपने में दिखा कि वे पुलिस लाइन में खड़े होकर पूरे महकमे को तनाव मुक्त कर रहे हैं। लेकिन अचानक उनकी नींद खुली। घड़ी देखी तो रात के बारह बज चुके थे। अचानक उन्हें एक और तनाव सताने लगा— “पुलिस वाले अगर रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर योग करने आ गए तो अखबार में क्या छपेगा?”</p>
<p>बस, फिर क्या था! उन्होंने तुरंत वायरलेस संदेश प्रसारित कर दिया, &#8220;सभी पुलिसकर्मी योग के लिए सफेद हॉफ टी-शर्ट, सफेद लोअर, सफेद मोजे और सफेद पीटी शू पहनकर आएंगे।&#8221;</p>
<p><strong>पुलिसकर्मियों के घरों में तनाव</strong></p>
<p>अब पुलिसकर्मियों के घरों में हड़कंप मच गया। रात के समय, जो सिपाही आराम से घर पर बैठे थे, अचानक अपनी पत्नियों पर चिल्लाने लगे— &#8220;तुमने मेरी सफेद पीटी किट का क्या किया? ट्रेनिंग के वक्त की किट कहां है?&#8221;</p>
<p>पत्नी बेचारी खुद तनाव में आ गई, क्योंकि उसने सफेद पीटी किट को घर के बर्तन खरीदने में इस्तेमाल कर लिया था। अब कहाँ से सफेद कपड़े ढूंढे? इधर पत्नियों का तनाव बच्चों पर निकला। पूरे जिले में तनाव फैल गया।</p>
<p>थाना प्रभारी अपने हेड मुहर्रिर से खीज़ रहे थे, डीएसपी साहब भी नाराज थे, और एसपी साहब वायरलेस पर अपना गुस्सा निकाल रहे थे। सभी को सुबह 5 बजे तनावमुक्त होना था, लेकिन तनाव इतना बढ़ चुका था कि अब यह सोचना मुश्किल हो गया था कि पुलिस सुबह तक योग करने के काबिल बचेगी भी या नहीं।</p>
<p><strong>अंतिम दृश्य: योग का दिन</strong></p>
<p>सुबह पाँच बजे पुलिस लाइन में पुलिसकर्मी एकत्रित हुए। कुछ ने सफेद टी-शर्ट और लोअर पहन लिए थे, लेकिन अधिकांश के कपड़े अभी भी रंग-बिरंगे थे। आईजी साहब और डीआईजी साहब के सामने पुलिसकर्मी योगासन करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आधे पुलिसकर्मी अभी भी इस सोच में थे कि योग करने के बाद तनावमुक्त होंगे या फिर और ज्यादा तनाव में आ जाएंगे!</p>
<p>सारा दृश्य हास्यास्पद था। जिन लोगों को तनावमुक्त होना था, वे अब तक तनाव के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुके थे। योग शुरू हुआ, लेकिन योग करते-करते कुछ पुलिसकर्मी सो गए, क्योंकि उन्हें पूरी रात तनाव में नींद ही नहीं आई थी।</p>
<p>आईजी साहब ने जब यह देखा तो उन्हें समझ में आ गया कि तनाव का असली कारण योग की कमी नहीं, बल्कि ओवरवर्क और गलत आदेशों का बोझ है। लेकिन साहब की बात कौन माने?</p>
<p>इस तरह पुलिस का तनाव मुक्ति शिविर खत्म हुआ, लेकिन पुलिसकर्मियों का तनाव कभी खत्म नहीं हुआ!</p>
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		<item>
		<title>नशे में डूबता गोंडा का भविष्य: पंजाब बनता उत्तर प्रदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Oct 2024 01:03:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda police]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda's future sinking in drugs: Punjab becoming Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Up police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, (विजय प्रताप पांडे) 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला, जो कभी अपने सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, (विजय प्रताप पांडे) 22 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला, जो कभी अपने सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के लिए जाना जाता था, आज नशे की चपेट में तेजी से फंसता जा रहा है। यह समस्या सिर्फ गोंडा तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में जड़ें जमा चुकी है। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नशे का कारोबार युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है। अगर इस पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो उत्तर प्रदेश जल्द ही पंजाब की तरह नशे की गंभीर समस्या से जूझेगा। यह चेतावनी सिर्फ एक कल्पना नहीं है, बल्कि वास्तविकता बनती जा रही है।</p>
<p><strong>नशे का बढ़ता कारोबार: एक गंभीर समस्या</strong></p>
<p>नशे का कारोबार गोंडा और आस-पास के इलाकों में तेजी से पैर पसार रहा है। नशा बेचने वालों ने अब दवाइयों से लेकर महंगे ड्रग्स तक की पहुंच आम लोगों और खासकर युवाओं तक बना ली है। पहले खांसी की कुछ दवाएं, जो आसानी से मेडिकल स्टोर्स पर मिलती थीं, युवाओं द्वारा नशे के रूप में इस्तेमाल की जाती थीं। इन दवाओं का सेवन करने वाले ज्यादातर 15 से 25 साल तक के युवा होते थे, जिन्हें खुलकर शराब या अन्य नशे का सेवन करने में झिझक महसूस होती थी। ये दवाएं मेडिकल स्टोर्स पर बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के मिल जाती हैं, और इसका दुरुपयोग नशे के लिए किया जाता है।</p>
<p>लेकिन अब यह समस्या खांसी की दवाओं तक सीमित नहीं रह गई है। सफेद पाउडर जैसा दिखने वाला एक नशीला पदार्थ, जिसे ड्रग्स के नाम से जाना जाता है, तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह नशा ज्यादा खतरनाक और महंगा होता है, लेकिन युवा इसे किसी भी तरह से हासिल कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गोंडा के डुमरियाडीह, तरबगंज, कर्नलगंज, कटरा बाजार, मसकनवा और खोडारे जैसे क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर हो चुकी है। भले ही कुछ जगहों के नाम गलत हों, लेकिन नशे की महामारी की चपेट में इन इलाकों के युवा तेजी से फंस रहे हैं।</p>
<p><strong>नशे के असर से जूझते युवा</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए नशा एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जो युवा पढ़ाई और खेल-कूद में अपना समय लगाते थे, वे अब नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। गोंडा और आस-पास के इलाकों में स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। इस नशे की लत में फंसने वाले युवा शुरुआत में खांसी की दवाओं का सेवन करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें और अधिक शक्तिशाली नशीले पदार्थों की आदत लग जाती है।</p>
<p>आंकड़ों की मानें तो, पिछले कुछ सालों में नशे के कारण युवा वर्ग में अपराध की घटनाएं भी बढ़ी हैं। चोरी, डकैती, घरेलू हिंसा और सड़क दुर्घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। नशे के प्रभाव में आए हुए युवा अक्सर अपने परिवारों के खिलाफ हिंसा करते हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ रहा है। समाज में तेजी से बिखराव दिखने लगा है, जहां परिवार के लोग अपने बच्चों को संभालने में नाकाम हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पुलिस की भूमिका: ढीलापन या भ्रष्टाचार?</strong></p>
<p>नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। कई बार स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस इस मुद्दे पर सख्ती से कदम नहीं उठा रही है। यहां तक कि यह भी सुनने में आता है कि कुछ मामलों में पुलिसकर्मी खुद भी इन नशा तस्करों से मिले हुए हैं। &#8220;<strong>साहब तो अपने हैं, कुछ नहीं होगा, मामला सैटल्ड है,</strong>&#8221; जैसी बातें आम हो चुकी हैं।</p>
<p>यह एक गंभीर संकेत है कि कानून का पालन करवाने वाली संस्थाएं भी अगर इस काम में लिप्त हो जाती हैं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस को नशे के ठिकानों की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। यह स्थिति नशे के कारोबारियों को और अधिक प्रोत्साहित करती है।</p>
<p><strong>नशे के खिलाफ सख्त कदम की आवश्यकता</strong></p>
<p>हालांकि, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। कई नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है और उनके गिरोहों को ध्वस्त करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। लेकिन यह कदम पर्याप्त नहीं है। पूरे राज्य में पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी होगी और नशे के ठिकानों को ढूंढकर नष्ट करना होगा। साथ ही, मेडिकल स्टोर्स पर भी सख्त निगरानी की जानी चाहिए ताकि खांसी की दवाओं का दुरुपयोग न हो सके।</p>
<p>इस समय जरूरत है कि उत्तर प्रदेश की सरकार, पुलिस और स्थानीय समाज एकजुट होकर नशे के खिलाफ अभियान छेड़ें। इसके लिए न केवल नशा बेचने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, बल्कि नशे के शिकार हो चुके युवाओं के पुनर्वास के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए विशेष शिविरों का आयोजन, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन और परिवारों को शिक्षित करने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>पंजाब का उदाहरण: उत्तर प्रदेश के लिए एक चेतावनी</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश को पंजाब से सबक लेना चाहिए। पंजाब में नशे की लत ने एक पूरी पीढ़ी को तबाह कर दिया। वहां के ग्रामीण इलाकों में युवाओं ने ड्रग्स की वजह से अपने करियर और जीवन को बर्बाद कर दिया। अगर उत्तर प्रदेश ने अभी भी नशे के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी और राज्य को पंजाब जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>पंजाब में नशे की समस्या का एक बड़ा कारण यह था कि सरकार और पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। उत्तर प्रदेश को इस गलती को नहीं दोहराना चाहिए। यहां समय रहते कड़े कानूनों का पालन करवाया जाना चाहिए और नशे के कारोबार को पूरी तरह से खत्म करने के लिए समाज और पुलिस को एकजुट होकर काम करना चाहिए।</p>
<p><strong>समाज की भूमिका: जिम्मेदारी और जागरूकता</strong></p>
<p>नशे के खिलाफ लड़ाई में समाज की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। जब तक समाज के लोग इस समस्या के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक इसका समाधान संभव नहीं है। गोंडा और अन्य जिलों के परिवारों को अपने बच्चों पर ध्यान देना होगा, उन्हें सही दिशा दिखानी होगी और नशे से दूर रखने के लिए उन्हें सही शिक्षा देनी होगी।</p>
<p>इसके अलावा, स्कूल और कॉलेजों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। शिक्षकों और प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नशे का असर उनके छात्रों पर न पड़े। समाज के हर वर्ग को नशे के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा, तभी इस गंभीर समस्या से निपटा जा सकता है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में नशे की समस्या तेजी से फैल रही है। अगर इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो राज्य को पंजाब जैसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। सरकार, पुलिस और समाज को मिलकर इस लड़ाई में कड़ा रुख अपनाना होगा। केवल सख्त कानून और जागरूकता अभियान ही उत्तर प्रदेश को नशे की चपेट में आने से बचा सकते हैं।</p>
<p>अब समय आ गया है कि सभी पक्ष एकजुट होकर नशे के खिलाफ निर्णायक कदम उठाएं, ताकि उत्तर प्रदेश का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बदमाशों ने घर में घुसकर शिक्षक समेत पूरे परिवार की बेरहमी से हत्या</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/the-miscreants-entered-the-house-and-brutally-murdered-the-entire-family-including-the-teacher/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Oct 2024 15:22:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Amethi]]></category>
		<category><![CDATA[Up police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेठी, 3 अक्टूबर। अमेठी के शिवरतनगंज थाना क्षेत्र के भवानी नगर चौराहे पर स्थित एक किराए के मकान</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेठी, 3 अक्टूबर। अमेठी के शिवरतनगंज थाना क्षेत्र के भवानी नगर चौराहे पर स्थित एक किराए के मकान में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी है। मंगलवार रात को अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर एक शिक्षक, उनकी पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हृदय विदारक घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोगों में गहरे सदमे और भय का माहौल है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल और जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की गई।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, मृतक शिक्षक अपने परिवार के साथ भवानी नगर चौराहे के पास एक किराए के मकान में रहते थे। सिंहपुर ब्लॉक के पनहौना प्रथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन मंगलवार रात को अचानक उनके घर पर कुछ अज्ञात बदमाशों ने हमला कर दिया। बदमाशों ने घर में घुसते ही अंधाधुध गोलियां चला दीं, जिसमें शिक्षक, उनकी पत्नी और उनके दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।<br />
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ कई थानों की पुलिस फोर्स घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी है। पुलिस के साथ-साथ फॉरेंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंची है, जो सबूत जुटाने का काम कर रही है। फिलहाल इस दर्दनाक घटना के पीछे के कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस हर संभावित एंगल से जांच कर रही है।</p>
<p style="text-align: center;"><strong><span style="color: #993300;">एसपी अनूप सिंह घटनास्थल पर पहंचे</span></strong></p>
<p>घटना की गंभीरता को देखते हुए अमेठी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनूप सिं तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मामले की गहराई से जांच की जाए और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। एसपी अनूप सिंह ने स्थानीय निवासियों से भी बातचीत<br />
की और उनसे घटना के संबंध में कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने का अनुरोध किया। एसपी ने बताया कि इस जघन्य हत्याकांड की जांच के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं और सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है और इलाके में सघन तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली जाएगी और दोषियों को पकड़<br />
लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align: center;">
<strong><span style="color: #993300;">इलाके में फैला डर और शोक</span></strong></p>
<p>इस बर्बर घटना के बाद पूरे इलाके में गहरा शोक और डर का माहौल है। भवानी नगर और आसपास के गांवों लोग इस घटना से स्तब्ध हैं और परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मृतक शिक्षक बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी से उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी। उनके साथ इस तरह की घटना होने से सभी लोग बेहद आहत हैं। शिक्षक के पड़ोसी और उनके सहकर्मियों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शिक्षक और उनके परिवार का किसी के साथ कोई विवाद नहीं था और वे एक साधारण जीवन जी रहे थे। ऐसे में इस तरह की घटना से पूरेक्षेत्र में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई है।</p>
<p style="text-align: center;"><strong><span style="color: #993300;">मौत के कारणों की जांच और आशंका</span></strong></p>
<p>पुलिस इस हत्याकांड के पीछे के संभावित कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हत्या के पीछे कोई व्यक्तिगत रंजिश या संपत्ति विवाद हो सकता है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या शिक्षक के किसी से कोई पुराने विवाद थे या हाल में किसी से कोई झगड़ा हुआ था। साथ ही, पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है ताकि बदमाशों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही हत्या के पीछे के वास्तविक कारणों का पता चल जाएगा और दोषियों को कानून के हवाले किया जाएगा। पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है कि इस घटना को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके और दोषियों को गिरफ्तार किया जा सके।</p>
<p style="text-align: center;">
<strong><span style="color: #993300;">पोस्टमार्टम और आगे की कार्रवाई</span></strong></p>
<p>पुलिस ने मृतक शिक्षक उनकी पत्नी और बच्चों &#8216;के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हमले में किस तरह की गोलियों का इस्तेमाल किया गया और कितनी नजदीक से गोली चलाई गई। इसके साथ ही,पुलिस ने घटनास्थल से अन्य सुराग भी जुटाने शुरू कर दिए हैं, जो इस मामले को सुलझाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align: center;"><span style="color: #993300;"><strong>परिवार और स्थानीय लोगों की न्याय की मांग</strong></span></p>
<p>इस जघन्य हत्याकांड के बाद स्थानीय लोग और मृतक शिक्षक के रिश्तेदार न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। शिक्षक के सहकर्मी और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इस मामले की गहन जांच कराने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपील की है। अमेठी की इस दुखद घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन पर इस समय भारी दबाव है कि वह इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाए और दोषियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू करे।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-miscreants-entered-the-house-and-brutally-murdered-the-entire-family-including-the-teacher/">बदमाशों ने घर में घुसकर शिक्षक समेत पूरे परिवार की बेरहमी से हत्या</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>गोंडा में पुलिस हिरासत में युवक की मौत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Sep 2022 15:34:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[a]]></category>
		<category><![CDATA[Akhilesh yadav]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Cm Yogi Adityanath]]></category>
		<category><![CDATA[Up police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा एक बार फिर से पुलिस उत्पीड़न का बड़ा प्रकरण गोंडा से सामने आया है जहाँ बीते दिनों</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा एक बार फिर से पुलिस उत्पीड़न का बड़ा प्रकरण गोंडा से सामने आया है जहाँ बीते दिनों नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक हत्या के खुलासे के लिए आज एक युवक को पुलिस और एसओजी ने उठाया था और पूँछ तांछ  के लिए युवक को थाने पर ले गई जहां  पूंछतांछ के दौरान ही युवक की हालत खराब हो गई. जिसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया जहाँ डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया जिसके बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया आनन फानन में पुलिस विभाग के उच्चाधिकारी अस्पताल पहुंचे है और अन्य विधिक कार्यवाही में जुटे हुए है आइये आपको बताते है आखिर पूरा मामला है क्या</p>
<p><a href="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/09/IMG_5070.mov">IMG_5070</a></p>
<p>9 सितम्बर को नवाबगंज के रहने वाले राजेश चौहान की हत्या हो गई जिसकी पूंछतांछ के लिए आज कुछ लोगो को उठाया गया था जिनमे देव नारायण यादव भी था परिजनों के अनुसार पुलिस घर से ले गई थी और बताया था की पूंछतांछ के लिए लिए जा रहे है और पुलिस और एसओजी ने जबरदस्ती अपराध कबूल करवाने के लिए उसकी पीट पीट कर हत्या कर दी अब परिजन अस्पताल में पहुंचे है और अपने जीवित बेटे की मांग कर रहे है</p>
<p>भाजपा सरकार में इस तरह से पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत कई सवाल उठा रही है और परिजन अब न्याय मांग रहे हैं</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>बच्चों को पढ़ने के लिए दिए थे मोबाइल, खातों से उड़ गए लाखों रुपए आखिर कैसे?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Aug 2021 13:54:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[क्राइम]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[Education Minister]]></category>
		<category><![CDATA[Up police]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा (अतुल यादव)। मां बाप के मेहनत की कमाई बच्चों ने खेल खेलकर उड़ाई जी हां आजकल कई</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>गोंडा (अतुल यादव)। मां बाप के मेहनत की कमाई बच्चों ने खेल खेलकर उड़ाई जी हां आजकल कई ऐसे गेम आ गए हैं जिनके कारण से नाबालिग नासमझ और कई ऐसे हैं जिनकी उम्र तो 12 वर्ष से भी कम है ऐसे बच्चे गेम को खेल कर अपने माता-पिता के लाखों रुपए खर्च कर दे रहे हैं जिनकी भनक भी उनके माता-पिता को नहीं लग पाती है और जब बैंक जाते हैं पैसे निकालने तो पता चलता है कि उनकी मेहनत की कमाई तो सारी गायब हो चुकी है पहले उन्हें अंदेशा होता है कि उनके बैंक अकाउंट को हैक कर सारा पैसा निकाला गया होगा जिसके बाद पुलिस शिकायत होती है और पुलिस जांच के बाद पता चलता है कि उन्हीं के बेटे का यह कमाल है वह बेटा जिसके भविष्य के लिए उन्होंने उस पैसे को बचाया था अब शिकायत पुलिस के पास है तो पुलिस ने भी सभी ट्रांजैक्शन की जांच की तो पता चला कि फ्री फायर गेम में गोंडा के 10 से 18 साल के उम्र के कई बच्चों ने डायमंड के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर दिए हैं</p></blockquote>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-343 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159.jpg" alt="" width="2400" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159.jpg 2400w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159-300x135.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159-1024x461.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159-768x346.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159-1536x691.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191159-2048x922.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2400px) 100vw, 2400px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इन बच्चों मैं एक की उम्र 12 वर्ष से नीचे है और एक 14 साल के हैं जिन उम्र में इनके हाथ में किताब होनी चाहिए थी उस उम्र में लॉकडाउन की बदौलत हाथों में मोबाइल है अभिभावकों ने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए मोबाइल दिए नेट कनेक्शन भी दिए लेकिन अब बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं या क्या कर रहे हैं इसकी निगरानी ना कर पाने के कारण आज छोटे बच्चे एक बड़े मकड़जाल में फंसते चले जा रहे हैं और इस मकड़जाल का नाम है फ्री फायर इन दोनों बच्चों ने क्रमश: ₹7000 और ₹90000 फ्री फायर गेम में अपने माता-पिता को बिना बताए उनके खून पसीने की कमाई को उड़ा दिया और इस गेम में उन्होंने खरीदा भी क्या आपको बता दें कि इस गेम में दिखाए जा रहे अभिनय कर रहे कार्टून के कपड़े के लिए उनके हथियार के लिए डायमंड देने पड़ते हैं और इन डायमंड को बच्चे या खेलने वाले पैसे से खरीदते हैं अपने माता-पिता के यूपीआई और गूगल पर के पासवर्ड जानकर इन बच्चों ने इस गेम में पेमेंट कर दिया अब जब स्कूल खुलने वाले हैं तो कॉपी किताब और एडमिशन फीस की जरूरत पड़ने लगी माताजी जब बैंक गई तब पता चला कि उनके खाते से तो रुपए ही उड़ गए हैं साइबर क्राइम का अंदेशा पाकर पुलिस में शिकायत की पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि उन्हीं के मोबाइल के आईपी ऐड्रेस से फ्री फायर नाम के गेम में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं बच्चों का कहना है कि उन्हें अपने दोस्तों और अन्य लोगों से इस गेम के बारे में पता चला था जिसके बाद उन्होंने यह गेम खेलना शुरू किया और डायमंड एवं कपड़े खरीदने में पूरे पैसे खर्च कर दिए पहले मुझे नहीं पता था कि यह इतना खराब गेम है अब मैंने सभी गेम अपने मोबाइल से डिलीट कर दिए हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-344 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123.jpg" alt="" width="2400" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123.jpg 2400w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123-300x135.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123-1024x461.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123-768x346.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123-1536x691.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/08/Screenshot_20210809-191123-2048x922.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2400px) 100vw, 2400px" /></p>
<p>गोंडा के पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा ने भी इन बच्चों से बात की उन्हें समझाया और उनके साथ उनके परिजनों को भी बैठाकर काउंसलिंग की पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा ने जी मीडिया से बात करते हुए बताया कि दोनों बच्चों के अभिभावकों ने पुलिस से साइबर क्राइम के संबंध में प्रथम दृष्टया शिकायत की थी जिसके बाद हमने जांच की और पाया कि उसी आईपी एड्रेस पर और उसी मोबाइल से पैसे एक गेम जिसका नाम फ्री फायर है मैं ट्रांसफर किए गए हैं जिसके बाद हमने उनके अभिभावकों को बुलाया है और उनके साथ बैठकर काउंसलिंग की है क्योंकि प्रदेश के अन्य स्थानों पर ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनमें बच्चों ने पैसे खर्च करने के बाद आत्महत्या कर ली है तो ऐसे में हम लोगों सतर्क कर रहे हैं कि वह अपने बच्चों पर निगरानी रखें और अपने बैंकिंग संबंधी पासवर्ड और अन्य उपकरण को बच्चों से दूर रखें बाकी हम जागरूकता के लिए वृहद रूप से अभियान चलाएंगे कि बच्चे इस गेम से दूर रहे।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/game-fraud/">बच्चों को पढ़ने के लिए दिए थे मोबाइल, खातों से उड़ गए लाखों रुपए आखिर कैसे?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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