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	<title>Supreme Court Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>कांग्रेस का पलटवार: मोदी सरकार पर जॉर्ज सोरोस को आर्थिक मदद देने का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Dec 2024 17:53:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress's counter-attack: Modi government accused of giving financial help to George Soros]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Supriya srinet]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 दिसंबर। कांग्रेस ने भाजपा और मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया है</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/congresss-counter-attack-modi-government-accused-of-giving-financial-help-to-george-soros/">कांग्रेस का पलटवार: मोदी सरकार पर जॉर्ज सोरोस को आर्थिक मदद देने का आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 दिसंबर। कांग्रेस ने भाजपा और मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि वे जॉर्ज सोरोस के नाम पर जनता को गुमराह कर रही हैं, जबकि हकीकत में मोदी सरकार खुद सोरोस को आर्थिक मदद दे रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने खुलासा किया कि भारत सरकार ने पिछले आठ वर्षों में संयुक्त राष्ट्र लोकतंत्र कोष (यूएन डेमोक्रेसी फंड) को नौ लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है, जिसका पैसा सीधे सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन तक पहुंचता है।</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार और भाजपा, अडानी को बचाने के लिए सोरोस के नाम पर नाटक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सोरोस के प्रोजेक्ट भारत में पहली बार 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए थे। उस समय ये प्रोजेक्ट छात्रवृत्तियां और फेलोशिप जैसे कार्यों तक सीमित थे। लेकिन 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद, इन प्रोजेक्ट्स का विस्तार हुआ और उन्होंने छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स में निवेश करना शुरू किया।</p>
<p>श्रीनेत ने बताया कि सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड के दो प्रमुख निवेशक सोंग और एस्पाडा हैं, जिन्होंने 90 मिलियन डॉलर छोटे उद्योगों, किसानों और स्टार्टअप्स में लगाए। इनमें से अधिकांश पैसा निओ ग्रोथ और कैपिटल फ्लोट जैसी कंपनियों को गया। उन्होंने कहा कि कैपिटल फ्लोट के संस्थापक गौरव हिंदुजा और शशांक ऋष्यशृंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं और अक्सर उनके साथ मंच साझा करते हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी दावा किया कि शशांक की शादी भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल वीरेन शाह की पोती प्रिया शाह से हुई थी। इस शादी में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस रिश्ते को और स्पष्ट किया।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, &#8220;अगर जॉर्ज सोरोस भारत विरोधी गतिविधियां कर रहा है, तो मोदी सरकार उसका धंधा भारत में क्यों बंद नहीं कर रही? क्यों यूएन डेमोक्रेसी फंड को पैसे दिए जा रहे हैं, और क्यों सोरोस के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका से मांग नहीं की जा रही?&#8221;</p>
<p><strong>भाजपा पर कांग्रेस का कड़ा प्रहार: &#8220;फेक न्यूज और दोहरे मापदंड की राजनीति&#8221;</strong></p>
<p>श्रीनेत ने भाजपा के उस आरोप का भी कड़ा जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस विदेशी मीडिया का सहारा लेती है। उन्होंने इसे भाजपा का &#8220;दोहरे मापदंड की राजनीति&#8221; बताते हुए कहा कि जब विदेशी मीडिया मोदी सरकार की तारीफ करता है, तो भाजपा इसे पूरे गर्व के साथ साझा करती है। लेकिन जैसे ही वही मीडिया सरकार की आलोचना करता है, उसे विदेशी साजिश का हिस्सा बताया जाता है।</p>
<p>सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा द्वारा फ्रेंच मीडिया कंपनी मीडियापार्ट का हवाला देने को भी फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि मीडियापार्ट ने खुद इस बात का खंडन किया है कि उसने जॉर्ज सोरोस को लेकर कोई रिपोर्ट प्रकाशित की थी। श्रीनेत ने पूछा कि अगर मीडियापार्ट भाजपा के लिए इतना विश्वसनीय है, तो राफेल डील को लेकर उसके खुलासे के समय भाजपा ने इसे झूठ क्यों बताया था?</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने ओसीसीआरपी (ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) को भारत विरोधी बताया, जबकि यही संस्था अडानी के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का खुलासा कर चुकी है। श्रीनेत ने कहा कि भाजपा इन गंभीर आरोपों की जांच करवाने के बजाय अडानी को बचाने में जुटी हुई है।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ फेक न्यूज का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि अडानी पर लगे धोखाधड़ी, हेराफेरी और रिश्वत जैसे गंभीर आरोपों पर मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए है। &#8220;सरकार को अडानी के खिलाफ जांच शुरू करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह अडानी के पक्ष में काम कर रही है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं के पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध सोरोस द्वारा पोषित फंड्स के साथ जुड़े हुए हैं। नरेंद्र मोदी द्वारा ऐसे व्यक्तियों के साथ मंच साझा करना इस बात का प्रमाण है।</p>
<p>श्रीनेत ने कहा, &#8220;यह स्पष्ट है कि भाजपा अडानी को बचाने के लिए सोरोस के नाम पर स्वांग रच रही है। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि सोरोस के पैसे से पोषित कंपनियों और व्यक्तियों से भाजपा का रिश्ता क्या है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने अंत में कहा कि भाजपा को फेक न्यूज और जनहित के मुद्दों को भटकाने की राजनीति छोड़कर देश में पारदर्शिता और ईमानदारी से शासन करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।</p>
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		<title>भगवान तिरुपति भी हुए राजनीति के शिकार, एन चंद्रबाबू नायडू के बयान संवैधानिक नहीं</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/lord-tirupati-also-became-a-victim-of-politics-n-chandrababu-naidus-statement-is-not-constitutional/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Sep 2024 15:20:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Laddus Controversy]]></category>
		<category><![CDATA[N Chandrababu Naidu's]]></category>
		<category><![CDATA[New delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Prasad controversy]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हम उम्मीद करते हैं कम से कम भगवान को तो राजनीति से दूर रखा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट नई</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/lord-tirupati-also-became-a-victim-of-politics-n-chandrababu-naidus-statement-is-not-constitutional/">भगवान तिरुपति भी हुए राजनीति के शिकार, एन चंद्रबाबू नायडू के बयान संवैधानिक नहीं</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;">हम उम्मीद करते हैं कम से कम भगवान को तो राजनीति से दूर रखा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट</p>
<p>नई दिल्ली 30 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के इस दावे पर सवाल उठाया कि तिरुपति के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। कोर्ट ने इस दावे का सबूत मांगा और कहा कि मुख्यमंत्री ने 18 सितंबर को यह बयान दिया, जबकि एफआईआर 25 सितंबर को दर्ज की गई थी और विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन 26 सितंबर को किया गया था। तिरुपति के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं सहित कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र सरकार द्वारा अपने दावे के समर्थन में पेश की गई रिपोर्ट पर चिंता जताई।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा-  सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र सरकार को फटकार लगाई और घी में जानवरों की चर्बी होने का दावा करने वाली रिपोर्ट पर आशंका जताई। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा, &#8220;रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। यदि आपने पहले ही जांच के आदेश दे दिए थे, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी? रिपोर्ट जुलाई में आई, बयान सितंबर में आया।&#8221; उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रथम दृष्टया संकेत देती है कि तैयारी में मिलावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। पीठ ने धार्मिक मामलों में कथित राजनीति की भागीदारी की आलोचना करते हुए कहा, &#8220;हमारा प्रथम दृष्टया मानना ​​है कि जब जांच चल रही थी, तो उच्च संवैधानिक पदाधिकारी द्वारा बिना किसी आधार के ऐसा बयान देना उचित नहीं था, जिससे जनता की भावनाएं आहत हो सकती हैं।&#8221; आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने पूछा कि जब जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके थे, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी। &#8220;लैब रिपोर्ट में कुछ अस्वीकरण हैं। यह स्पष्ट नहीं है, और यह प्रथम दृष्टया संकेत देता है कि यह अस्वीकृत घी था, जिसका परीक्षण किया गया था। न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने पूछा कि यदि आपने स्वयं जांच का आदेश दिया है, तो प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी।</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह निर्णय लेने में सहायता मांगी कि क्या राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी को जांच जारी रखनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए। न्यायालय ने कहा, &#8220;यह उचित होगा कि एसजी हमें यह निर्णय लेने में सहायता करें कि क्या पहले से नियुक्त एसआईटी को जांच जारी रखनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए।</p>
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		<title>न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Sep 2024 01:32:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
		<category><![CDATA[New delhi]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Trendings]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/">न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती कार्यवाही के वीडियो के उपयोग और अपलोडिंग पर रोक लगाते हुए एक अंतरिम आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8211; फेसबुक, एक्स और यूट्यूब को निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा ऐसे वीडियो अपलोड करने की अनुमति नहीं देने और पहले अपलोड किए गए वीडियो को हटाने का निर्देश दिया। यह आदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद की विवादास्पद टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें बेंगलुरु में एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को पाकिस्तान के रूप में संदर्भित किया गया था और एक महिला वकील के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। उनकी टिप्पणी का वीडियो क्लिप वायरल हो गया था। न्यायाधीश की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए, पांच न्यायाधीशों वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने शुक्रवार को हाई कोर्ट से रिपोर्ट मांगी और चेतावनी दी कि &#8220;हम पर नजर रखी जा रही है&#8221;, सीजेआई ने न्यायाधीशों से संयम से काम लेने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखने और उन्हें सार्वजनिक उपहास से बचाने में मदद करने के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करेगा। जस्टिस श्रीशानंद ने शनिवार को कोर्ट में अपनी टिप्पणी पर खेद जताया था। हालाँकि, न्यायमूर्ति चंदनगौदर ने अपने अंतरिम आदेश में बताया कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को रोकना दुरुपयोग को रोकने का समाधान नहीं था, जैसा कि याचिकाकर्ता, बेंगलुरु के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने तर्क दिया था।  एसोसिएशन ने दावा किया कि शरारती तत्व नियमों का उल्लंघन करते हुए शरारती एजेंडे के साथ अदालती कार्यवाही के लाइव-स्ट्रीम किए गए वीडियो को संपादित कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि इन क्लिपों तक पहुंचने वाले लोगों को उचित कानूनी ज्ञान के बिना आंशिक रूप से देखने के बाद अदालती कार्यवाही और न्यायपालिका के बारे में गलत राय बनाने के लिए गुमराह किया गया था।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/">न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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