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	<title>Priyanka niranjan Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:10:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/">गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन न मिलने की समस्या अब समाप्त होने की उम्मीद बन गई है। जनपद में वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) तथा जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता गिरीश चंद्र के अचानक चिकित्सा अवकाश पर चले जाने के कारण वेतन भुगतान की प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। इससे न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का संकट उत्पन्न हो गया था। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।</p>
<h4><strong>महीनेभर से वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानियाँ</strong></h4>
<p>गोंडा जिले में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, अनुदानित इंटर कॉलेजों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मियों का वेतन भुगतान हर माह वित्त एवं लेखा अधिकारी बेसिक के माध्यम से होता है। लेकिन गिरीश चंद्र के आकस्मिक अवकाश पर चले जाने से वेतन बिलों के निर्गमन व अनुमोदन की प्रक्रिया रुक गई थी। कई शिक्षकों ने बताया कि दीपावली बाद से लगातार भुगतान में देरी हो रही थी और नवंबर माह का पूरा वेतन अटक गया था। स्थिति यह थी कि बैंक ईएमआई, बच्चों की फीस, चिकित्सा व्यय और घर के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया था।</p>
<p>शिक्षक संगठनों ने भी प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था। उनका कहना था कि वेतन रुकने से शिक्षकीय व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है और कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो रहा है।</p>
<h4><strong>डीएम ने लिया संज्ञान, जारी किया आदेश</strong></h4>
<p>जिलाधिकारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से पूरा विवरण तलब किया और पाया कि वित्त एवं लेखा अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण व्यवस्था पूरी तरह ठप है। प्रशासन ने माना कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में एक व्यक्ति के अवकाश पर जाने भर से पूरे जिले के हजारों शिक्षकों की वित्तीय स्थिति नहीं बिगड़नी चाहिए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-5383 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="2100" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-300x246.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>इसके बाद जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को आदेश जारी किए कि वे तत्काल प्रभाव से वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार संभालें और वेतन बिलों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू करवाएं। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया है कि लंबित वेतन बिलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक आर्थिक संकट न झेलना पड़े।</p>
<p>जिला विद्यालय निरीक्षक रामचंद्र वर्तमान में DIOS के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही उन्हें पूर्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का अतिरिक्त चार्ज भी दिया जा चुका है। अब उन्हें वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का प्रभार सौंपे जाने के बाद वे तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ एक साथ संभालेंगे।</p>
<p>हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय परिस्थितिजन्य है और सिर्फ वेतन भुगतान संबंधी अड़चन के समाधान के लिए अस्थायी रूप से यह व्यवस्था लागू की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय कामकाज में बाधा न आए और शिक्षकों का हित प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है और सक्षम स्तर से किसी की तैनाती के बाद यह आदेश होता ही समाप्त हो जाएगा</p>
<h4><strong>वेतन भुगतान पर जल्द मिलेगी राहत</strong></h4>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, DIOS द्वारा प्रभार संभालते ही वेतन बिलों का सत्यापन, अनुमोदन और कोषागार को प्रेषण का काम शुरू कर दिया जाएगा। अनुमान है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर सभी शिक्षकों का लंबित वेतन उनके बैंक खातों में भेज दिया जाएगा।</p>
<p>कई शिक्षकों ने प्रशासनिक निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि इस आदेश से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। एक शिक्षक ने बताया कि वेतन न मिलने से घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। अब उम्मीद है कि जल्द ही भुगतान प्रक्रिया सामान्य हो जाएगी और विभागीय गतिविधियाँ भी सुचारु रूप से चलेंगी।</p>
<h4><strong>चिकित्सा अवकाश पर गए वित्तीय परामर्शदाता की भूमिका भी महत्वपूर्ण</strong></h4>
<p>गिरीश चंद्र, जो जिला पंचायत में वित्तीय परामर्शदाता के पद पर कार्यरत हैं, को ही पिछले वर्ष वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। वेतन भुगतान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि पूरा वित्तीय दायित्व उन्हीं के अधीन है।</p>
<p>लेकिन उनके स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते अवकाश लेने से विभाग के भीतर निर्णय प्रक्रिया रुक गई थी। यह पहली बार नहीं है जब किसी एक अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर वेतन भुगतान प्रभावित हुआ हो। यही कारण है कि प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर भी समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो।</p>
<h4><strong>आगे क्या?</strong></h4>
<p>सूत्रों के अनुसार, शासन जल्द ही वित्त और लेखा बेसिक अनुभाग में एक स्थायी अधिकारी की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। जिले में शिक्षा विभाग का दायरा बड़ा है और हजारों कर्मचारियों की वित्तीय जिम्मेदारी एक अधिकारी पर निर्भर है। इसलिए अधिक मजबूत व्यवस्थागत विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल, DIOS के प्रभार संभालते ही शिक्षकों और कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिनों में वेतन बिलों के स्वीकृत होते ही भुगतान प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। जिले के कई अध्यापक संगठनों ने भी प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा है कि समय रहते हस्तक्षेप से बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।</p>
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		<title>प्रशासन का उद्देश्य पारदर्शी, विश्वसनीय एवं सुव्यवस्थित निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करना— प्रियंका निरंजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 09:41:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka niranjan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा, 21 नवम्बर 2025। विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने जिले</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-administration-aims-to-ensure-a-transparent-reliable-and-well-organized-election-process-said-priyanka-niranjan/">प्रशासन का उद्देश्य पारदर्शी, विश्वसनीय एवं सुव्यवस्थित निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करना— प्रियंका निरंजन</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोंडा, 21 नवम्बर 2025। </strong>विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने जिले भर के निर्वाचन कार्यों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि एसआईआर (SIR) फॉर्म के वितरण तथा उनके शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने अभी तक कार्य में ढिलाई बरती है या तय समयसीमा का अनुपालन नहीं किया है, उनकी पहचान कर तत्काल विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में पाया कि जिले की कुछ तहसीलों, विकास खंडों और संबंधित इकाइयों में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयसीमा के बावजूद एसआईआर फॉर्म के वितरण तथा डिजिटाइजेशन की प्रगति संतोषजनक नहीं है। इस स्थिति पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निर्वाचन कार्य किसी अन्य विभागीय कार्य की तरह सामान्य नहीं होते। यह लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती और पारदर्शिता से सीधे जुड़े कार्य हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही अस्वीकार्य है।</p>
<p>उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर पात्र मतदाता तक एसआईआर फॉर्म समय पर पहुँचे तथा प्राप्त सभी फॉर्म बिना त्रुटि और विलंब के डिजिटाइज किए जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि यह कार्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यदि इस स्तर पर चूक होती है तो इसका सीधा असर निर्वाचन की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों पर पड़ता है।</p>
<p>जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के दौरान सभी बीएलओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मजिस्ट्रेट और तहसील स्तरीय अधिकारी प्रचार-प्रसार, फॉर्म वितरण, संग्रहण और डिजिटाइजेशन की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाएं। उन्होंने कहा कि यह समय चुनावी तैयारियों का आधार है और किसी भी प्रकार की शिथिलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आत्मा को प्रभावित करती है।</p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने अब तक गति नहीं बढ़ाई है, वे या तो अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं या फिर गंभीरता को समझ नहीं पा रहे। दोनों ही परिस्थितियों में ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाही निश्चित है। उन्होंने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम और संबंधित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि लापरवाह कर्मचारियों की सूची तत्काल प्रस्तुत करें ताकि उन पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करता, तो उससे पूरे निर्वाचन कार्य की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। ऐसे किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाएगा।</p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने साफ किया कि एसआईआर फॉर्म के वितरण में देरी या डिजिटाइजेशन में चूक सीधे-सीधे मतदाता सूची के अद्यतन को प्रभावित करती है। इससे नए मतदाताओं के नाम जुड़ने में बाधा आती है और पुराने मतदाताओं के नामों में संशोधन की प्रक्रिया प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और यदि कोई कर्मचारी लापरवाही करता पाया जाए, तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच, निलंबन, वेतन रोकने से लेकर एफआईआर तक की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करें और प्रत्येक बीएलओ के कार्य की निगरानी सुनिश्चित करें। सभी विकासखंडों, नगर निकायों और निर्वाचन से जुड़े विभागों को आदेश दिया गया कि वे तय समयसीमा के भीतर फॉर्म का वितरण और डिजिटाइजेशन पूरा करें।</p>
<p>जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया टीम वर्क और बेहतर समन्वय पर आधारित होती है। इसलिए सभी अधिकारी एक-दूसरे के साथ समन्वय के साथ काम करें। उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि बिना समीक्षा के टीम को आगे बढ़ाने वाली प्रणाली सफल नहीं हो सकती। नियमित समीक्षा और निगरानी ही गुणवत्ता सुनिश्चित करती है, इसलिए सभी अधिकारी अपने-अपने स्तर पर समीक्षा बैठकों का आयोजन करें और आख्या जिला निर्वाचन कार्यालय को भेजें।</p>
<p>श्रेमती प्रियंका निरंजन ने यह भी कहा कि पारदर्शी, विश्वसनीय और त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। किसी भी जिले का चुनाव तभी व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकता है जब मतदाता सूची पूरी तरह से शुद्ध और अद्यतन हो। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का मूल उद्देश्य यही है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटे नहीं और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल बीएलओ की नहीं, बल्कि पूरी चुनावी मशीनरी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी एसआईआर फॉर्म का वितरण समय से हो और डिजिटल एंट्री गुणवत्तापूर्ण की जाए।</p>
<p>बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने यह दोहराया कि प्रशासन का लक्ष्य पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी, विश्वसनीय, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बनाना है। उन्होंने सभी अधिकारियों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि यदि समयसीमा के भीतर सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे हो जाते हैं, तो मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया न केवल सफल होगी बल्कि आगामी चुनाव भी सुचारू रूप से संपन्न होंगे।</p>
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