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	<title>#pmoindia Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>प्राइवेट गनर और राजनीति: सुरक्षा या शक्ति प्रदर्शन?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Feb 2025 03:06:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#pmoindia]]></category>
		<category><![CDATA[#uppolice]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[Private gunners and politics: Security or show of power?]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विजय कुमार  भारतीय राजनीति में शक्ति प्रदर्शन हमेशा से अहम रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/private-gunners-and-politics-security-or-show-of-power/">प्राइवेट गनर और राजनीति: सुरक्षा या शक्ति प्रदर्शन?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>विजय कुमार </strong></p>
<p>भारतीय राजनीति में शक्ति प्रदर्शन हमेशा से अहम रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह एक नया स्वरूप ले चुका है—निजी गनरों की मौजूदगी। पहले यह सिर्फ बड़े नेताओं तक सीमित था, लेकिन अब छोटे स्तर के नेता भी बिना चार-पांच निजी सुरक्षाकर्मियों के सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आते। सवाल यह उठता है कि यह सुरक्षा की जरूरत है या सिर्फ दबदबा दिखाने का तरीका?</p>
<p>इस रिपोर्ट में हम इस बढ़ते चलन की पड़ताल करेंगे—क्या निजी सुरक्षा सच में आवश्यक है, या यह महज राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का एक तरीका बन गया है?</p>
<p><strong>राजनीति और शक्ति प्रदर्शन का नया तरीका</strong></p>
<p>राजनीति में एक कहावत है—&#8221;जिसका जितना बड़ा काफिला, उसकी उतनी बड़ी ताकत!&#8221; यह बात सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हथियारबंद गार्ड भी शामिल हो गए हैं।</p>
<p>कई स्थानीय और क्षेत्रीय नेताओं को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे वे किसी हाई-प्रोफाइल पद पर हों। उनके साथ चलने वाले निजी सुरक्षा गार्ड, महंगी गाड़ियाँ और हूटर बजाते वाहन यह आभास कराते हैं कि वे बहुत प्रभावशाली व्यक्ति हैं। लेकिन क्या यह सब उनकी वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, या यह केवल एक भ्रमजाल है?</p>
<p><strong>सुरक्षा जरूरत या दिखावा?</strong></p>
<p>यह सत्य है कि कुछ नेताओं को वाकई खतरा होता है और उनकी सुरक्षा आवश्यक होती है। लेकिन हर छोटे नेता या स्वयंभू राजनेता के लिए निजी सुरक्षा अनिवार्य नहीं हो सकती।</p>
<p><strong>सुरक्षा का तर्क:</strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300;">1. वास्तविक खतरा:</span> </strong>कई नेता आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं या उनका विरोधी गुटों से टकराव होता रहता है। ऐसे में निजी सुरक्षा उनकी जरूरत हो सकती है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>2. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता:</strong> </span>चुनावी माहौल में कुछ नेताओं को हमलों या धमकियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>3. स्थानीय प्रभाव:</strong> </span>कई बार किसी क्षेत्र में किसी नेता की लोकप्रियता इतनी बढ़ जाती है कि उनके प्रशंसक और विरोधी दोनों सक्रिय हो जाते हैं, जिससे सुरक्षा की आवश्यकता महसूस की जाती है।</p>
<p><strong>शक्ति प्रदर्शन का तर्क:</strong></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>1. दबदबा बनाने का प्रयास:</strong> </span>जब कोई नेता निजी सुरक्षा गार्ड के साथ चलता है, तो वह जनता के बीच अलग तरह का प्रभाव बनाता है। इससे वह अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली दिखता है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>2. राजनीतिक ब्रांडिंग:</strong> </span>कुछ नेताओं के लिए यह उनकी छवि बनाने का हिस्सा होता है। जब वे सुरक्षा गार्डों के साथ चलते हैं, तो जनता उन्हें एक बड़े नेता के रूप में देखने लगती है।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">3. प्रतिद्वंद्वियों को संदेश:</span></strong> जब कोई नेता निजी सुरक्षा के साथ चलता है, तो यह उसके विरोधियों के लिए एक संदेश होता है कि वह कमजोर नहीं है और उसके पास साधन-संपन्नता है।</p>
<p><strong>कैसे बन गया यह एक नया ट्रेंड?</strong></p>
<p>पिछले एक दशक में राजनीतिक संस्कृति में बदलाव आया है। नेताओं की छवि केवल उनके कार्यों से नहीं, बल्कि उनके बाहरी प्रदर्शन से भी तय होने लगी है। यह बदलाव कई कारणों से हुआ है</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">1. सामाजिक मीडिया का प्रभाव:</span></strong></p>
<p>आज सोशल मीडिया पर नेता अपने प्रभावशाली होने का प्रदर्शन करते हैं। तस्वीरों और वीडियो में सुरक्षा गार्ड के साथ दिखने से वे अधिक प्रभावशाली प्रतीत होते हैं।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>2. सिनेमाई प्रभाव:</strong></span></p>
<p>फिल्मों और वेब सीरीज में बड़े गैंगस्टर और राजनेताओं को भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ दिखाया जाता है। यह जनता की मानसिकता में गहराई से बस गया है कि शक्तिशाली व्यक्ति की पहचान उसकी सुरक्षा व्यवस्था से होती है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>3. प्रतिस्पर्धा का दबाव:</strong></span></p>
<p>जब एक नेता सुरक्षा गार्डों के साथ चलता है, तो दूसरा भी वैसा ही करने की कोशिश करता है ताकि उसकी छवि कमजोर न पड़े। इस प्रतिस्पर्धा के चलते यह एक फैशन बन चुका है।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">4. जनता की मानसिकता:</span></strong></p>
<p>आम जनता भी किसी नेता की सुरक्षा व्यवस्था देखकर प्रभावित होती है। उन्हें लगता है कि यह नेता सच में बहुत महत्वपूर्ण है, वरना इतनी सुरक्षा की जरूरत क्यों पड़ती?</p>
<p><strong>राजनीतिक सुरक्षा का खर्च कौन उठाता है?</strong></p>
<p>यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि इन निजी गनरों का खर्च कौन उठाता है?</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>1. सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा:</strong> </span>कुछ नेताओं को सरकार द्वारा वाई, जेड या जेड+ सुरक्षा दी जाती है। इसमें सरकारी खर्च पर सशस्त्र बल उनकी सुरक्षा करते हैं।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>2. निजी सुरक्षा एजेंसियों से ली गई सुरक्षा:</strong></span> कई नेता निजी सुरक्षा एजेंसियों से गनर हायर करते हैं, जिनका मासिक वेतन लाखों रुपये तक हो सकता है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>3. स्थानीय समर्थकों द्वारा इंतजाम:</strong></span> कई बार नेताओं के समर्थक और व्यवसायी उनकी सुरक्षा का खर्च उठाते हैं, ताकि वे नेता के प्रभाव के दायरे में बने रहें।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>4. अपराध से जुड़े नेताओं की सुरक्षा:</strong> </span>कुछ अपराधी पृष्ठभूमि वाले नेता अपने गिरोह के सदस्यों को ही सुरक्षा गार्ड बना लेते हैं। ये गार्ड नाम मात्र की सुरक्षा देते हैं, लेकिन असल में वे उनके निजी हितों के रक्षक होते हैं।</p>
<p><strong>क्या यह कानूनी है?</strong></p>
<p>भारत में निजी सुरक्षा रखना अवैध नहीं है, लेकिन इसके लिए उचित लाइसेंस और अनुमति जरूरी होती है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>1. आर्म्स एक्ट, 1959:</strong></span></p>
<p>कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस के हथियार नहीं रख सकता। निजी सुरक्षा एजेंसियों को भी केवल लाइसेंसी हथियारों की अनुमति होती है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>2. प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2005:</strong></span></p>
<p>इस कानून के तहत निजी सुरक्षा एजेंसियों को सरकार से रजिस्ट्रेशन कराना होता है। बिना रजिस्ट्रेशन के निजी गार्ड रखना अवैध माना जाता है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>3. पुलिस की भूमिका:</strong></span></p>
<p>कई बार पुलिस यह जांचती है कि क्या कोई नेता अवैध तरीके से हथियारबंद सुरक्षाकर्मी रख रहा है? अगर हां, तो उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।</p>
<p><strong>क्या जनता इस प्रवृत्ति को पसंद करती है?</strong></p>
<p>जनता के बीच इस विषय पर मिश्रित राय देखने को मिलती है। कुछ लोग मानते हैं कि नेताओं को सुरक्षा की जरूरत होती है और गनर रखना उनकी मजबूरी है। कुछ लोग इसे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा मानते हैं और इसे अनावश्यक दिखावा कहते हैं। कई लोग यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या यह सरकारी धन का दुरुपयोग है, अगर सुरक्षा सरकारी खर्चे पर दी गई हो?</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>राजनीति में निजी गनर रखना अब एक सामान्य बात हो गई है। कुछ मामलों में यह जरूरी है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का तरीका बन चुका है।</p>
<p>समस्या यह नहीं है कि नेता अपनी सुरक्षा के लिए गनर रख रहे हैं, बल्कि समस्या यह है कि कई नेता इसे राजनीतिक ब्रांडिंग का जरिया बना रहे हैं। इससे जनता में गलत संदेश जाता है और राजनीति में दिखावे की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p>अंततः, यह जनता पर निर्भर करता है कि वह ऐसे नेताओं को किस नजर से देखती है—क्या वे सच में प्रभावशाली हैं, या केवल सुरक्षा के दिखावे से अपनी ताकत का भ्रम पैदा कर रहे हैं?</p>
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		<item>
		<title>217 फुल एनकाउंटर और 2799 हाफ एनकाउंटर से अपराधी या तो जेल में नहीं तो प्रदेश से बाहर वरना सीधा यमराज से मुलाकात</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/due-to-217-full-encounters-and-2799-half-encounters-the-criminals-are-either-in-jail-or-out-of-the-state-or-else-they-directly-meet-yamraj/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Dec 2024 17:29:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#pmoindia]]></category>
		<category><![CDATA[#uppolice]]></category>
		<category><![CDATA[Due to 217 full encounters and 2799 half encounters]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 31 दिसंबर। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/due-to-217-full-encounters-and-2799-half-encounters-the-criminals-are-either-in-jail-or-out-of-the-state-or-else-they-directly-meet-yamraj/">217 फुल एनकाउंटर और 2799 हाफ एनकाउंटर से अपराधी या तो जेल में नहीं तो प्रदेश से बाहर वरना सीधा यमराज से मुलाकात</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 31 दिसंबर। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जो अभियान चलाया है, उसने राज्य में कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। 20 मार्च, 2017 से 31 दिसंबर, 2024 तक के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि योगी आदित्यनाथ सरकार के तहत पुलिस की सक्रियता और प्रतिबद्धता ने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।</p>
<p><strong>अपराधियों के सफाए का रिकॉर्ड</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2017 से लेकर अब तक कुल 217 अपराधियों को मुठभेड़ों में मार गिराया है। यह आँकड़ा हर 11 दिन में एक अपराधी को समाप्त करने की दर दर्शाता है। इन मुठभेड़ों में 7,799 अपराधी घायल हुए हैं। पुलिस की कार्रवाई सिर्फ मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 19,955 वांछित अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया। सख्त गैंगस्टर अधिनियम के तहत 78,977 अपराधियों को जेल की हवा खानी पड़ी, जबकि 924 के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई।</p>
<p>पुलिस ने अपराधियों की संपत्तियों पर भी करारा प्रहार किया। गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुल 14,090.5 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया। इनमें से अधिकतर संपत्तियां माफियाओं और संगठित अपराध से जुड़े लोगों की थीं।</p>
<p><strong>इनामी अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में कई बड़े इनामी अपराधियों का खात्मा किया है। इनमें पाँच-पाँच लाख रुपये के इनामी दो अपराधी, ढाई लाख रुपये के चार, दो लाख रुपये के दो, डेढ़ लाख रुपये के छह, और एक लाख रुपये के 27 अपराधी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 75 हजार रुपये के इनामी कई अन्य अपराधियों को भी मार गिराया गया।</p>
<p><strong>पुलिसकर्मियों की शहादत और घायल होने के मामले</strong></p>
<p>राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने बड़ी कीमत चुकाई है। मुठभेड़ों और अन्य अभियानों के दौरान 17 पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। वहीं, 1,644 अधिकारी घायल हुए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए हर संभव बलिदान दिया।</p>
<p><strong>विशिष्ट मामले और पुलिस की सक्रियता</strong></p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पुलिस का अभियान निरंतर जारी है। हाल ही में, मोहम्मद जाहिद नामक अपराधी, जो आरपीएफ कांस्टेबल जावेद खान और प्रमोद कुमार की हत्या के मामले में वांछित था, को दिलदार नगर में एसटीएफ और गाजीपुर पुलिस के संयुक्त अभियान में मार गिराया गया। जाहिद ट्रेन में शराब तस्करी से जुड़े एक मामले में भी वांछित था।</p>
<p>इसके अलावा, पंजाब पुलिस और पीलीभीत पुलिस ने संयुक्त अभियान में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के तीन आतंकवादियों को मार गिराया। इन आतंकवादियों की पहचान प्रताप सिंह उर्फ जसप्रीत सिंह, वीरेंद्र उर्फ रवि और गुरविंदर सिंह के रूप में हुई। ये आतंकवादी 18 दिसंबर, 2024 को गुरदासपुर में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमले में शामिल थे। पुलिस ने इनके पास से दो एकेएम-47 राइफल, दो ग्लॉक पिस्तौल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और एक अपंजीकृत मोटरसाइकिल बरामद की।</p>
<p><strong>संगठित अपराध और साइबर अपराध पर प्रहार</strong></p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि 2024 में एटीएस ने 124 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया, जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन और आईएसआईएस से जुड़े लोग शामिल थे। इनमें पाकिस्तान स्थित आईएसआई के तीन सदस्य भी थे।</p>
<p>साइबर अपराधों पर भी एसटीएफ ने शिकंजा कसा। 2024 में 769 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 74 साइबर अपराधी शामिल थे। इन अपराधियों पर डिजिटल फ्रॉड, हैकिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों में शामिल होने का आरोप था।</p>
<p><strong>प्रमुख अभियान और गिरफ्तारियां</strong></p>
<p>पुलिस के विशेष अभियानों में चिनहट, लखनऊ के बैंक डकैती से जुड़े एक आरोपी सोविंद कुमार बिंद और गाजीपुर जिले में सनी दयाल को मुठभेड़ों के दौरान मार गिराया गया। इन अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पुलिस संगठित अपराध के हर स्तर पर काम कर रही है।</p>
<p><strong>पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रभाव</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति का सकारात्मक प्रभाव पूरे राज्य में देखा जा सकता है। अपराध दर में गिरावट, संगठित अपराधियों पर कार्रवाई, और माफियाओं की कमर तोड़ने वाली रणनीतियों ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था के मामले में देश में एक उदाहरण बन सके।</p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा, &#8220;यह अभियान केवल स्पेशल टास्क फोर्स तक सीमित नहीं है। जिलों और कमिश्नरेट पुलिस भी समान रूप से सक्रिय हैं। हर अपराधी को न्याय के कटघरे में लाने का हमारा प्रयास जारी रहेगा।&#8221;</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपने साहसिक और योजनाबद्ध अभियानों के जरिए अपराध और अपराधियों के खिलाफ एक नई मिसाल कायम की है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य को अपराधमुक्त बनाने के इस मिशन में पुलिस ने ना केवल अपराधियों का सफाया किया बल्कि आम जनता का भरोसा भी जीता। प्रशांत कुमार जैसे नेतृत्वकर्ताओं की अगुवाई में उत्तर प्रदेश पुलिस राज्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।</p>
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		<title>सिंचाई और लोक निर्माण विभाग में टेंडर का खुला खेल फर्रुखाबादी ( हास्य व्यंग)</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/open-game-of-tenders-in-irrigation-and-public-works-department-farrukhabadi-comic-satire/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Dec 2024 03:37:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[#pmoindia]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[Open game of tenders in irrigation and public works department Farrukhabadi (Comic satire)]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आजकल सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग में काम पाना है टेंडर डालना है तो योग्यता भी होनी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/open-game-of-tenders-in-irrigation-and-public-works-department-farrukhabadi-comic-satire/">सिंचाई और लोक निर्माण विभाग में टेंडर का खुला खेल फर्रुखाबादी ( हास्य व्यंग)</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आजकल सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग में काम पाना है टेंडर डालना है तो योग्यता भी होनी चाहिए अब योग्यता क्या है वह जानने के लिए आपको नीचे पढ़ना पड़ेगा</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ठेका लेना है तो योग्यता ये जान लो,</p>
<p>किसी जनप्रतिनिधि का आदमी पहचान लो।</p>
<p>सिंचाई और लोक निर्माण के काम में,</p>
<p>सिर्फ मैनेजमेंट से ही नाम कमाओ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यहां टेंडर नियमों से नहीं चलता,</p>
<p>हर ठेके में मैनेजमेंट पलता।</p>
<p>बीस लोग, बीस फर्मों का जाल,</p>
<p>हर नाम पर खेलते गजब का खेल।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पत्नी, बेटे, भाई का सहारा,</p>
<p>गर्लफ्रेंड और सालों ने भी थामा प्याला।</p>
<p>फर्में बनती हैं परिवार के नाम,</p>
<p>हर ठेका होता उन्हीं के नाम।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कागजों में सब कुछ सही दिखाते,</p>
<p>सच के रास्ते को खूब दबाते।</p>
<p>जो ईमानदार हो, वह ठोकर खाए,</p>
<p>और मैनेजमेंट वाला मौज मनाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बाबा ने कहा था, ई-टेंडरिंग आएगी,</p>
<p>पारदर्शिता से हर योजना सजेगी।</p>
<p>पर यहां तो खुला खेल फर्रुखाबादी है,</p>
<p>भ्रष्टाचार की नई इबारत लिखी जाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हर टेंडर होता पहले ही तय,</p>
<p>जनता के सपनों पर चलती भय।</p>
<p>कागजों पर ही पारदर्शिता का नाम,</p>
<p>असल में होता बस भ्रष्टाचार का काम।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सिस्टम पर सवाल कौन उठाए?</p>
<p>जब हर गुनाह पर पर्दा डाले जाए।</p>
<p>सच और ईमान बस शब्द रह गए,</p>
<p>खुला खेल देख सब सह गए।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>शेयर बाजार और जमीन में निवेश के नाम पर 30 लाख की ठगी, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/fraud-of-rs-30-lakh-in-the-name-of-investment-in-stock-market-and-land-victim-pleaded-for-justice/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Dec 2024 03:22:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 9 दिसंबर। इटियाथोक क्षेत्र में एक बड़े धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक परिवार से</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 9 दिसंबर। इटियाथोक क्षेत्र में एक बड़े धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक परिवार से 30 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई। यह घटना हरैया झूमन गांव के निवासी अश्वनी जायसवाल के परिवार के साथ हुई, जिसमें उनके भाई विनय जायसवाल को भी चपेट में लिया गया। अश्वनी ने विपक्षी शुभम पाल और उनके परिवार पर संगठित ठगी का गंभीर आरोप लगाया है।</p>
<p>प्राथी अश्वनी जायसवाल के अनुसार, शुभम पाल, जो दुखहरणनाथ मंदिर के पीछे, आशीर्वाद कॉलोनी में निवास करता है, ने शेयर बाजार और जमीन में निवेश के नाम पर उन्हें और उनके भाई को बिजनेस पार्टनर बनने के लिए प्रलोभित किया। इस प्रक्रिया में शुभम ने अगस्त 2023 से फरवरी 2024 तक करीब 30 लाख रुपये निवेश के लिए प्राप्त किए।</p>
<p><strong>ठगी की शुरुआत कैसे हुई:</strong></p>
<p>अश्वनी ने बताया कि शुरुआत में शुभम ने उन्हें कुछ लाभ दिया ताकि उनका विश्वास जीत सके। शुभम ने यह दर्शाया कि यह निवेश बेहद फायदेमंद है और उनके पैसे सुरक्षित हैं। धीरे-धीरे शुभम ने इस भरोसे का फायदा उठाकर बड़ी रकम अपने कब्जे में कर ली।</p>
<p><strong>धोखाधड़ी का पता लगने पर पीड़ित की परेशानी:</strong></p>
<p>जब अश्वनी और उनके भाई को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने शुभम से अपने पैसे लौटाने की मांग की। शुभम ने पहले तो पैसे लौटाने का आश्वासन दिया और समय मांगा। लेकिन धीरे-धीरे वह बहाने बनाने लगा और अंततः पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>धमकी और डर का माहौल:</strong></p>
<p>अश्वनी का कहना है कि जब उन्होंने बार-बार पैसे लौटाने का दबाव बनाया, तो शुभम ने उन्हें धमकी दी। उसने कहा कि बार-बार पैसे मांगने पर वह उन्हें जान से मरवा देगा। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब अश्वनी को यह पता चला कि शुभम इस तरह की ठगी पहले भी कर चुका है।</p>
<p><strong>1.5 करोड़ की संगठित ठगी, परिवार और सहयोगी भी शामिल</strong></p>
<p>अश्वनी जायसवाल की शिकायत के आधार पर यह सामने आया कि शुभम पाल ने इसी तरह अन्य लोगों से भी ठगी की है। उन्होंने बताया कि शुभम ने अब तक लगभग 1.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। ठगी से प्राप्त धन का उपयोग शुभम ने अपनी संपत्ति बढ़ाने में किया।</p>
<p><strong>संपत्तियों का ब्योरा:</strong></p>
<p>अश्वनी के अनुसार, शुभम ने ठगी से 50 लाख रुपये की जमीन खरीदी और 1 करोड़ 20 लाख रुपये अपने डीमैट खाते में जमा किए हैं। यह साबित करता है कि शुभम ने इस ठगी को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया।</p>
<p><strong>परिवार और सहयोगियों की भूमिका:</strong></p>
<p>अश्वनी ने यह भी आरोप लगाया है कि शुभम के परिवार के सदस्य और उसके एक मित्र भी इस साजिश में शामिल हैं। इनमें उसकी मां रीता पाल, पिता सुरेंद्र पाल, चाचा वीरेंद्र पाल और मित्र चंदन कश्यप शामिल हैं। चंदन कश्यप का वर्तमान पता लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय चौराहा, बस स्टेशन रोड, गोण्डा है।</p>
<p><strong>ठगी का पेशेवर तरीका:</strong></p>
<p>अश्वनी का कहना है कि शुभम और उसके सहयोगियों ने पेशेवर तरीके से ठगी को अंजाम दिया। शुरुआत में लाभ दिखाकर और निवेश का आकर्षक प्रस्ताव देकर लोगों का विश्वास जीतना, और फिर धीरे-धीरे रकम हड़पना उनकी रणनीति का हिस्सा था।</p>
<p><strong>पीड़ित की न्याय की मांग:</strong></p>
<p>अश्वनी ने गोण्डा पुलिस प्रशासन से अपील की है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने मांग की है कि शुभम और उसके परिवार से उनकी रकम वापस दिलवाई जाए और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। वहीं पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर प्राथमिक की दर्ज कर ली है।</p>
<p><strong>प्रशासन और कानून व्यवस्था पर सवाल:</strong></p>
<p>इस घटना ने न केवल गोण्डा जिले बल्कि पूरे क्षेत्र में ठगी के बढ़ते मामलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे धोखाधड़ी मामलों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे।</p>
<p><strong>प्रशासन की जिम्मेदारी:</strong></p>
<p>पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करें। निवेशकों को जागरूक करना और ठगी से बचाने के उपाय करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>अश्वनी जायसवाल का मामला ठगी के बढ़ते नेटवर्क और संगठित अपराध की गंभीरता को उजागर करता है। प्रशासन से अपेक्षा है कि इस मामले में न्याय दिलाने के लिए तेज और ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।</p>
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