<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Mohfw Archives - Prabhat Bharat</title>
	<atom:link href="https://www.prabhatbharat.com/tag/mohfw/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.prabhatbharat.com/tag/mohfw/</link>
	<description>जड़ से जहाँ तक</description>
	<lastBuildDate>Mon, 28 Oct 2024 00:06:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0</generator>
	<item>
		<title>थर्ड पार्टी दवाएं बनवाने वाले नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोर सहित झोले में चलने वाले कंपनियों पर कार्यवाही की तैयारी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/preparations-are-being-made-to-take-action-against-companies-running-on-hoaxes-including-nursing-homes-and-medical-stores-which-manufacture-third-party-medicines/</link>
					<comments>https://www.prabhatbharat.com/preparations-are-being-made-to-take-action-against-companies-running-on-hoaxes-including-nursing-homes-and-medical-stores-which-manufacture-third-party-medicines/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Oct 2024 00:05:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Mohfw]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
		<category><![CDATA[Third party medicine]]></category>
		<category><![CDATA[थर्ड पार्टी मेडिसिन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.prabhatbharat.com/?p=3831</guid>

					<description><![CDATA[<p>प्रभात भारत की खबर का असर: उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों और दवा कंपनियों के गठजोड़ पर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/preparations-are-being-made-to-take-action-against-companies-running-on-hoaxes-including-nursing-homes-and-medical-stores-which-manufacture-third-party-medicines/">थर्ड पार्टी दवाएं बनवाने वाले नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोर सहित झोले में चलने वाले कंपनियों पर कार्यवाही की तैयारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>प्रभात भारत की खबर का असर: उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों और दवा कंपनियों के गठजोड़ पर कसी नकेल, थर्ड-पार्टी दवाएं बनवाने वाले नर्सिंग होम और &#8220;झोले में&#8221; चलने वाली दवा कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी</strong></p>
<p>लखनऊ 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों और दवा कंपनियों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रभात भारत ने इस गंभीर मुद्दे पर गहन पड़ताल और रिपोर्टिंग की थी, जिसमें यह खुलासा हुआ था कि प्रदेश में कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम अपने मेडिकल स्टोरों में खासतौर पर थर्ड-पार्टी निर्मित दवाएं बेच रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद सरकार ने इन अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर कड़ी निगरानी और जांच का आदेश दिया है। अब दीपावली के बाद शुरू होने वाले इस अभियान में इन नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोरों की औचक जांच की जाएगी, ताकि मरीजों को महंगी और मनचाही दवाओं के लिए मजबूर करने वाले इस गठजोड़ को समाप्त किया जा सके।</p>
<p><strong>प्रभात भारत की खबर से कैसे उठा यह मुद्दा?</strong></p>
<p>प्रभात भारत की विशेष रिपोर्ट ने निजी अस्पतालों और दवा कंपनियों के बीच चल रही सांठगांठ को उजागर किया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि कई नर्सिंग होम और अस्पताल अपने स्टोरों पर केवल वही दवाएं उपलब्ध कराते हैं जो खासतौर पर कुछ कंपनियों से थर्ड-पार्टी के माध्यम से बनवाई जाती हैं। इनमें से कई कंपनियां अवैध तरीके से, बिना उचित लाइसेंस के &#8220;झोले में&#8221; अपना काम कर रही हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मरीजों के पास दवा का कोई और विकल्प नहीं होता और उन्हें वही महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं जो अस्पताल में उपलब्ध होती हैं।</p>
<p><strong>निजी अस्पतालों में फार्मासिस्ट की कमी</strong></p>
<p>प्रभात भारत की रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि प्रदेश के कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम अपने मेडिकल स्टोर पर बिना लाइसेंसधारी फार्मासिस्ट के ही दवाएं बेच रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में प्रशिक्षित न होने के बावजूद अन्य कर्मचारी दवाएं बेच रहे हैं। अब इस मामले पर सरकार ने ध्यान देते हुए औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे इन मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण करें और कड़ी कार्रवाई करें।</p>
<p><strong>सरकार का आदेश: क्या होगी औचक जांच में प्राथमिकताएं?</strong></p>
<p><strong>1. फार्मासिस्ट की उपस्थिति:</strong> सभी मेडिकल स्टोरों में लाइसेंसधारी फार्मासिस्ट की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। अगर कहीं बिना फार्मासिस्ट के दवाएं बेची जा रही हैं, तो संबंधित स्टोर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>2. थर्ड-पार्टी दवाओं का भंडारण:</strong> निजी अस्पतालों में थर्ड-पार्टी दवाओं के भंडारण की मात्रा की जांच होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ये दवाएं अन्य मेडिकल स्टोरों पर भी उपलब्ध हों, ताकि मरीजों के पास विकल्प मौजूद रहें।</p>
<p><strong>3. दवाओं का निर्धारित मूल्य पर विक्रय:</strong> सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेडिकल स्टोरों पर बेची जा रही दवाएं निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर न बेची जाएं।</p>
<p><strong>4. झोले में चलने वाली कंपनियों पर निगरानी:</strong> बिना लाइसेंस के काम कर रही और झोले में संचालित हो रही दवा कंपनियों पर भी सख्ती की जाएगी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-3832 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2.jpeg" alt="" width="553" height="555" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2.jpeg 553w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2-300x300.jpeg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2-150x150.jpeg 150w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2-24x24.jpeg 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2-48x48.jpeg 48w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-43-2-96x96.jpeg 96w" sizes="(max-width: 553px) 100vw, 553px" /></p>
<p><strong>70 हजार थोक और 1.15 लाख फुटकर विक्रेताओं पर निगरानी बढ़ी</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में 70 हजार थोक और 1.15 लाख फुटकर दवा विक्रेता हैं, जिनमें से कई निजी अस्पतालों से जुड़े हैं। अब इन पर निगरानी के साथ, इन विक्रेताओं से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी मेडिकल स्टोरों पर केवल उचित लाइसेंसधारी और गुणवत्तापूर्ण दवाएं ही बेची जाएं। प्रभात भारत की रिपोर्ट ने इन विक्रेताओं पर ध्यान केंद्रित किया, और खुलासा किया कि कैसे कुछ विक्रेताओं द्वारा थर्ड-पार्टी निर्मित दवाओं का भंडारण और वितरण किया जा रहा है।</p>
<p><strong>गरीब और सामान्य वर्ग को राहत: दवाओं के विकल्प मिलेंगे</strong></p>
<p>सरकार के इस कदम से गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रभात भारत की रिपोर्ट के अनुसार, निजी अस्पतालों द्वारा थर्ड-पार्टी और महंगी ब्रांडेड दवाओं की अनिवार्यता ने मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ाया है। अब औचक जांच और सख्त निगरानी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मरीजों को अधिक विकल्प मिलें और वे मनचाही दवाओं के लिए बाध्य न हों।</p>
<p><strong>प्रभात भारत की रिपोर्ट का प्रभाव: सरकारी अधिकारियों की सक्रियता</strong></p>
<p>प्रभात भारत द्वारा की गई इस रिपोर्ट के कारण शासन और प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता बढ़ी, और तत्काल औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए। रेखा एस. चौहान, अपर आयुक्त प्रशासन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि औषधि निरीक्षकों को इस मामले में सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है, और अस्पतालों में मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखी जाएगी।</p>
<p><strong>प्रभात भारत की रिपोर्ट ने सरकार और शासन की आँखें खोलीं</strong></p>
<p>प्रभात भारत ने अपने साहसिक और निष्पक्ष रिपोर्टिंग से सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचा। इस रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने जिस तरह से सख्ती दिखाई है, वह न केवल मीडिया की ताकत को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दे जनता की समस्याओं के समाधान में सहायक हो सकते हैं। अब इस रिपोर्ट के चलते प्रदेश के निजी अस्पतालों और दवा विक्रेताओं की कार्यप्रणाली पर सरकार का शिकंजा कस गया है।</p>
<p>लोग मानते हैं कि प्रभात भारत की रिपोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा में सुधार की दिशा में बड़ा योगदान दिया है। इस कदम से न केवल मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं में पारदर्शिता भी आएगी। अब दीपावली के बाद होने वाली औचक जांचों के दौरान निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली पर नजर रखी जाएगी और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित दामों पर ही दवाएं बेचें। प्रभात भारत का यह प्रयास न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।</p>
<p>इस तरह की निष्पक्ष रिपोर्टिंग से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आएगा। प्रभात भारत ने इस मामले को उठाकर यह साबित कर दिया कि पत्रकारिता समाज में बदलाव का एक सशक्त माध्यम हो सकती है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/preparations-are-being-made-to-take-action-against-companies-running-on-hoaxes-including-nursing-homes-and-medical-stores-which-manufacture-third-party-medicines/">थर्ड पार्टी दवाएं बनवाने वाले नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोर सहित झोले में चलने वाले कंपनियों पर कार्यवाही की तैयारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.prabhatbharat.com/preparations-are-being-made-to-take-action-against-companies-running-on-hoaxes-including-nursing-homes-and-medical-stores-which-manufacture-third-party-medicines/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दवाओं में मिलावट: टेलकम पाउडर या सिर्फ चाक, भारत की फर्मा छवि पर खतरा</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/adulteration-in-medicines-talcum-powder-or-just-chalk-threat-to-indias-pharma-image/</link>
					<comments>https://www.prabhatbharat.com/adulteration-in-medicines-talcum-powder-or-just-chalk-threat-to-indias-pharma-image/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Oct 2024 16:03:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[Adulteration in medicines: Talcum powder or just chalk]]></category>
		<category><![CDATA[Central drug standards control organisation]]></category>
		<category><![CDATA[Drug mafiya]]></category>
		<category><![CDATA[Fake medicines]]></category>
		<category><![CDATA[Latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Ministry of health and family welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Mohfw]]></category>
		<category><![CDATA[threat to India's pharma image]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.prabhatbharat.com/?p=2960</guid>

					<description><![CDATA[<p>भारत में नकली दवाओं का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर खतरा नई दिल्ली 7 अक्टूबर (विजय प्रताप</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/adulteration-in-medicines-talcum-powder-or-just-chalk-threat-to-indias-pharma-image/">दवाओं में मिलावट: टेलकम पाउडर या सिर्फ चाक, भारत की फर्मा छवि पर खतरा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><span style="color: #800000;"><strong>भारत में नकली दवाओं का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर खतरा</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली 7 अक्टूबर (विजय प्रताप पाण्डेय)। भारत में नकली और घटिया दवाओं का संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है, और यह सवाल उठता है कि क्या बाजार में उपलब्ध दवाएं सचमुच असरदार हैं। भारत का दवा बाजार लगभग 25 बिलियन डॉलर का है, और इस विशाल बाजार का एक बड़ा हिस्सा नकली या मिलावटी दवाओं से भरा हो सकता है। कुछ अनुमान बताते हैं कि 20% से ज्यादा दवाएं या तो नकली हो सकती हैं या उनमें आवश्यक सक्रिय तत्वों की कमी हो सकती है। हालांकि सरकारी एजेंसियों का दावा है कि यह संख्या 5% से कम है, लेकिन हालिया जांच और मामलों ने इस मुद्दे को गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया है।</p>
<p>नकली दवाओं की समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है; यह एक वैश्विक मुद्दा है। लेकिन भारत, जो 200 से अधिक देशों को दवाओं की आपूर्ति करता है, इस संकट से अधिक प्रभावित हो सकता है। भारत की सस्ती दवाओं का दुनिया भर में बहुत बड़ा बाजार है, खासकर विकासशील देशों में। इसलिए, जब इस तरह की दवाएं मानक गुणवत्ता से कम पाई जाती हैं, तो इसका असर केवल देश के भीतर तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ता है।</p>
<p>हालिया जाँच में यह पता चला है कि कई बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों की दवाएं, जिन पर करोड़ों लोग भरोसा करते हैं, गुणवत्ताहीन साबित हो रही हैं। एक चौंकाने वाले खुलासे में, 50 से अधिक प्रमुख दवा ब्रांड्स केंद्र और राज्य सरकार की जांच के दायरे में आए, जहां यह पाया गया कि ये दवाएं विघटन परीक्षण या प्रयोगशाला परीक्षणों में विफल रहीं। इन परीक्षणों से यह पता चलता है कि दवाओं में सक्रिय अवयव पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं, जिससे वे बेअसर हो सकती हैं। मरीज, जो इन दवाओं पर निर्भर रहते हैं, उनके लिए यह गंभीर खतरा है क्योंकि ये दवाएं उनका इलाज करने में असफल हो सकती हैं या उनकी स्थिति और खराब कर सकती हैं।</p>
<p>जिन दवाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें टोरेंट फार्मा की कैल्शियम सप्लीमेंट शेल्कल, एल्केम की एंटीबायोटिक क्लैवम, सन फार्मा की हृदय रोग की दवा पैन-डी, और ग्लेनमार्क की एंटी-हाइपरटेंसिव दवा टेल्मा एच शामिल हैं। ये सभी दवाएं अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी हैं और करोड़ों की बिक्री करती हैं। उदाहरण के तौर पर, टोरेंट के शेल्कल की बिक्री 352 करोड़ रुपये से अधिक की थी, जबकि पैन-डी और क्लैवम की बिक्री क्रमश: 400 करोड़ और 430 करोड़ रुपये से अधिक की रही।</p>
<p>यह केवल छोटे निर्माताओं की बात नहीं है; बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड्स भी इस संकट की चपेट में हैं। इसका अर्थ यह है कि नकली दवाओं का खतरा हर स्तर पर मौजूद है।</p>
<p>नकली और मिलावटी दवाओं की समस्या केवल कंपनियों की लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकारी एजेंसियों और नियामकों की विफलता भी इसका एक बड़ा कारण है। केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाला केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) हर महीने मानक गुणवत्ता से कम (NSQ) दवाओं की सूची जारी करता है, लेकिन अक्सर यह सूची स्थानीय या छोटे निर्माताओं पर ही केंद्रित होती है। इस बार, जब बड़े ब्रांड्स की दवाएं इस सूची में शामिल हुईं, तो यह एक बड़ा हंगामा खड़ा कर गया।</p>
<p>नियामक एजेंसियों की विफलता का एक और उदाहरण नागपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा पकड़ा गया नकली दवाओं का रैकेट है। इस रैकेट के तहत सरकारी अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाएं सप्लाई की जा रही थीं, जिनमें केवल टैल्कम पाउडर और स्टार्च पाया गया। यह रैकेट देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और हवाला चैनलों के जरिए पैसे भेजे जाते थे। जाँच में आगे पता चला कि इस घोटाले का केंद्र हरिद्वार में स्थित पशु चिकित्सा दवाओं का एक निर्माता था। यह सब स्पष्ट रूप से दिखाता है कि नकली दवाओं की समस्या कितनी गहरी और व्यापक है।</p>
<p>यह समझना जरूरी है कि नकली और मानक गुणवत्ता से कम (NSQ) दवाओं के बीच अंतर होता है। नकली दवाएं जानबूझकर बनाई जाती हैं और बाजार में वितरित की जाती हैं। इन्हें सामान्यतः बिना लाइसेंस वाले निर्माता बनाते हैं, जो लोकप्रिय ब्रांड्स की पैकेजिंग की नकल करके उन्हें बेचते हैं। दूसरी तरफ, NSQ दवाएं वो होती हैं, जो किसी कारणवश मानक गुणवत्ता के परीक्षणों में विफल रहती हैं। यह संभव है कि ये दवाएं अनुचित भंडारण या निर्माण प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण गुणवत्ताहीन हो जाती हैं।</p>
<p>फार्मा सप्लाई चेन के लिए डिजिटल समाधान प्रदान करने वाली हेजकी टेक के पार्टनर वरुण विसवाडिया कहते हैं कि अगर दवाओं को उनकी अनुशंसित सीमा से बाहर (बहुत गर्म या बहुत ठंडा) तापमान पर रखा जाता है, तो उनके सक्रिय तत्व नष्ट हो सकते हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ता है, क्योंकि वे सही इलाज नहीं पा पाते।</p>
<p>भारत दुनिया भर में सस्ती और प्रभावी दवाओं के आपूर्तिकर्ता के रूप में जाना जाता है। भारत में निर्मित दवाएं अफ्रीका, एशिया, और यहां तक कि अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में भी पहुंचती हैं। लेकिन नकली और घटिया दवाओं की समस्या इस छवि को धूमिल कर रही है। भारतीय फार्मास्युटिकल एलायंस (IPA) ने नकली और NSQ दवाओं को लेकर मीडिया में आई रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इन रिपोर्टों से भारतीय दवा उद्योग की छवि को गहरा नुकसान हुआ है और इसे ठीक करने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे।</p>
<p>फर्मा से जुड़े लोगों का कहना है कि फार्मा उद्योग की सप्लाई चेन में सेंधमारी की समस्या है और नकली दवाओं का खतरा बढ़ रहा है। लेकिन साथ ही, उन्होंने मीडिया पर तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि NSQ दवाओं को नकली दवाओं के साथ जोड़ने से जनता में गलत धारणा पैदा हो रही है।</p>
<p style="text-align: center;"><strong><span style="color: #800000;">डॉक्टरों और अस्पतालों की चुप्पी क्यों?</span></strong></p>
<p>एक बड़ा सवाल यह है कि जब इन दवाओं से मरीजों को कोई फायदा नहीं हो रहा था, तो डॉक्टरों और अस्पतालों ने इसकी रिपोर्ट क्यों नहीं की? भारत में फार्माकोविजिलेंस प्रणाली, जिसका काम है दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों को रिकॉर्ड करना, स्पष्ट रूप से विफल रही है। डॉक्टरों और अस्पतालों ने नकली या घटिया दवाओं से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग नहीं की, जबकि उन्हें इसका प्रभाव दिखाई देना चाहिए था।</p>
<p>सरकार और नियामकों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि दवाओं की गुणवत्ता पर सख्ती से नजर रखी जाए। अगस्त 2023 में भारत के औषधि महानियंत्रक ने आदेश जारी किया था कि शीर्ष 300 ब्रांड्स को नकली दवाओं की संभावना को कम करने के लिए अपने ब्रांड्स पर बारकोड या क्यूआर कोड छापने होंगे। इससे नकली दवाओं की पहचान और उन्हें बाजार में आने से रोकने में मदद मिलेगी।</p>
<p>इसके अलावा, तापमान की निगरानी के लिए फार्मेसियों और रिटेल स्टोर्स पर सख्त मानदंड लागू किए जाने चाहिए। भारत में केमिस्ट बहुत असंगठित हैं और तापमान की अनदेखी के कारण दवाएं अक्सर प्रभावहीन हो जाती हैं। इसलिए, दवाओं को सही तापमान पर रखने के लिए निगरानी और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सख्त करने की जरूरत है।</p>
<p>भारत में नकली दवाओं की समस्या गंभीर है, लेकिन यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में भी नकली दवाओं का एक बड़ा बाजार है। हाल ही में मोटापा घटाने वाली दवाओं के नकली संस्करण अमेरिकी बाजार में पाए गए, जिनका इस्तेमाल लाखों लोग कर रहे थे। नकली दवाओं की यह वैश्विक समस्या है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की जरूरत है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/adulteration-in-medicines-talcum-powder-or-just-chalk-threat-to-indias-pharma-image/">दवाओं में मिलावट: टेलकम पाउडर या सिर्फ चाक, भारत की फर्मा छवि पर खतरा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.prabhatbharat.com/adulteration-in-medicines-talcum-powder-or-just-chalk-threat-to-indias-pharma-image/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
