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	<title>Mohan bhagwat Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>मोहन भागवत का बड़ा बयान: नई विवादास्पद बहसें अस्वीकार्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Dec 2024 16:53:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[Mohan bhagwat]]></category>
		<category><![CDATA[Rss]]></category>
		<category><![CDATA[RSS chief Mohan Bhagwat's big statement: New controversial debate is unacceptable]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पुणे, 20 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में आयोजित &#8220;विश्वगुरु भारत&#8221; विषयक व्याख्यान</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">पुणे, 20 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में आयोजित &#8220;विश्वगुरु भारत&#8221; विषयक व्याख्यान श्रृंखला में अपने संबोधन के दौरान एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक बयान दिया। उन्होंने हिंदू नेताओं द्वारा धार्मिक स्थलों को लेकर उठाए जा रहे नए विवादों की निंदा करते हुए कहा कि राम मंदिर जैसे मुद्दे आस्था और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े हुए थे, लेकिन वर्तमान में खड़े किए जा रहे विवाद भारतीय समाज के लिए हानिकारक हैं।</p>
<p>भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि &#8220;राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आवश्यकता थी, जिसे हिंदू समाज ने एकजुट होकर पूरा किया। लेकिन अब नए विवाद खड़ा करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे देश की एकता और सामाजिक समरसता को खतरा है।&#8221;</p>
<p><strong>धार्मिक स्थलों पर उठे विवाद</strong></p>
<p>भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद और राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर विवाद उठ रहे हैं। इन विवादों ने समाज में बहस और मतभेद को बढ़ावा दिया है। भागवत ने इस पृष्ठभूमि में कहा कि भारत को विविधता में एकता का उदाहरण बनना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;भारत दुनिया के लिए एक ऐसा आदर्श प्रस्तुत कर सकता है, जो यह सिखाए कि विभिन्न धर्म और विचारधाराएं कैसे साथ रह सकती हैं। लेकिन इसके लिए हमें नफरत और कट्टरता को दूर करना होगा।&#8221;</p>
<p><strong>समाज में तनाव कम करने का उपाय: भारतीय संस्कृति</strong></p>
<p>भागवत ने भारतीय संस्कृति की ओर लौटने को वर्तमान समस्याओं का समाधान बताया। उन्होंने कहा, &#8220;हमारी प्राचीन संस्कृति हमें यह सिखाती है कि सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। अतिवाद, आक्रामकता और दूसरों के धार्मिक विश्वासों का अपमान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, &#8220;जो लोग समाज में दरार डालने का प्रयास कर रहे हैं, वे भारतीय सभ्यता और उसके मूल्यों के खिलाफ काम कर रहे हैं।&#8221;</p>
<p><strong>बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की अवधारणा खारिज</strong></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने समाज में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की धारणाओं को खारिज करते हुए कहा कि &#8220;यह देश सभी का है। यहां हर व्यक्ति को अपनी पूजा पद्धति का पालन करने का अधिकार है।&#8221;</p>
<p>भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि &#8220;हमें पुरानी गलतियों से सीखना चाहिए और समाज में समावेशिता को बढ़ावा देना चाहिए। यह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी आवश्यक है।&#8221;</p>
<p><strong>समाज पर संभावित प्रभाव</strong></p>
<p>भागवत का यह बयान केवल वर्तमान विवादों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को समावेशिता और शांति की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। उनका यह संदेश भारतीय समाज के लिए एक नई सोच प्रस्तुत करता है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है।</p>
<p><strong>अतिवाद और आक्रामकता के खिलाफ सख्त रुख</strong></p>
<p>भागवत ने अतिवाद और आक्रामकता पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, &#8220;जो लोग दूसरों के धार्मिक विश्वासों का अपमान करते हैं या बल प्रयोग का सहारा लेते हैं, वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ हैं।&#8221;</p>
<p>उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भारतीय सभ्यता के मूल्यों को अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करें।</p>
<p>&#8220;<strong>विश्वगुरु&#8221; बनने की दिशा में भारत</strong></p>
<p>भागवत ने भारत को &#8220;विश्वगुरु&#8221; बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि &#8220;भारत को दुनिया को यह सिखाना चाहिए कि कैसे विविधता में एकता कायम रखी जा सकती है। हमें समावेशिता और सहिष्णुता का अभ्यास करके समाज में शांति और स्थिरता लाने की कोशिश करनी चाहिए।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि &#8220;भारत को अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना होगा। यही हमारी ताकत है और यही हमें वैश्विक स्तर पर अलग बनाती है।&#8221;</p>
<p><strong>नई पीढ़ी के लिए सबक</strong></p>
<p>भागवत का यह बयान युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि &#8220;युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर समाज में बदलाव लाना चाहिए। हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले।&#8221;</p>
<p><strong>भारत एक नई दिशा की ओर</strong></p>
<p>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान भारतीय समाज के लिए एक नई दिशा का संकेत है। यह बयान धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेदों को खत्म करने और समाज में समावेशिता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है।</p>
<p>भागवत का संदेश केवल हिंदू नेताओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विवादास्पद मुद्दों से बचना और समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना ही भारत को &#8220;विश्वगुरु&#8221; बना सकता है।</p>
<p>यह बयान न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका बड़ा प्रभाव हो सकता है। अगर समाज इस संदेश को अपनाता है, तो यह भारत को एक ऐसे आदर्श समाज में बदल सकता है, जो विविधता में एकता का सही उदाहरण पेश कर सके।</p>
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		<title>संभल और अजमेर: क्या मोहन भागवत का संदेश भुला दिया गया है?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Dec 2024 14:35:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Mohan bhagwat]]></category>
		<category><![CDATA[Sambhal and Ajmer: Has Mohan Bhagwat's message been forgotten?]]></category>
		<category><![CDATA[मोहन भागवत]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(विजय कुमार) नई दिल्ली, 1 दिसंबर। जून 2022 में, जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संघ</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/sambhal-and-ajmer-has-mohan-bhagwats-message-been-forgotten/">संभल और अजमेर: क्या मोहन भागवत का संदेश भुला दिया गया है?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(विजय कुमार) नई दिल्ली, 1 दिसंबर। जून 2022 में, जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संघ पदाधिकारियों को संबोधित किया, तो उनका एक बयान विशेष रूप से चर्चा का विषय बना। उन्होंने कहा, &#8220;हर दिन कोई नया मुद्दा नहीं उठाना चाहिए। झगड़े क्यों बढ़ाए जाएं? हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों खोजा जाए?&#8221; यह बयान ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद के बीच आया था और इसे संघ के रुख में बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया। लेकिन आज, ढाई साल बाद, यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके इस संदेश को भुला दिया गया है। हाल की घटनाएँ, जैसे संभल में हुई हिंसा और अजमेर में दरगाह को लेकर नया विवाद, इस दिशा में चिंताएँ बढ़ा रही हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-4267 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/images-34.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/images-34.jpeg 739w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/images-34-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p>पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल में हाल ही में हुई हिंसा ने देश को हिलाकर रख दिया। मामला तब शुरू हुआ जब एक ट्रायल कोर्ट ने शाही मस्जिद पर सर्वेक्षण की अनुमति दी। इस विवाद का मूल यह दावा है कि मस्जिद भगवान कल्कि के एक मंदिर के खंडहरों पर बनाई गई थी। अदालत के आदेश के बाद भड़की हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई। अजमेर में विश्व प्रसिद्ध दरगाह शरीफ को संकट मोचन महादेव मंदिर बताने का दावा, और इस पर एक स्थानीय अदालत द्वारा संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाना, स्थिति को और जटिल बना देता है।</p>
<p>इन विवादों ने न केवल धार्मिक समुदायों के बीच तनाव बढ़ाया है, बल्कि कानून, राजनीति, और समाज की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जैसे नेताओं ने खुले तौर पर इन दावों का समर्थन करते हुए कहा है कि &#8220;हिंदुओं को सच जानने का अधिकार है,&#8221; जबकि संघ का शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मोहन भागवत, ने इस तरह की घटनाओं को शांत करने की बात की है। यह विरोधाभासी रुख दिखाता है कि हिंदू दक्षिणपंथ के भीतर भी इन मुद्दों पर एकरूपता नहीं है।</p>
<p>1991 में बनाए गए पूजा स्थल अधिनियम के तहत स्पष्ट किया गया था कि 15 अगस्त, 1947 के बाद किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को नहीं बदला जा सकता। इस अधिनियम का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को लेकर किसी भी नए विवाद को रोकना था। 2019 के अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम को भारतीय धर्मनिरपेक्षता की रक्षा का एक महत्वपूर्ण साधन बताया। लेकिन 2023 में ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अदालत ने मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी, जिससे इस अधिनियम की व्याख्या को लेकर असमंजस पैदा हुआ।</p>
<p>ज्ञानवापी मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम यह नहीं रोकता कि 15 अगस्त, 1947 को किसी धार्मिक स्थल का वास्तविक स्वरूप क्या था। इस टिप्पणी के बाद निचली अदालतों में कई नई याचिकाएँ दायर की गईं, जिनमें धार्मिक स्थलों को लेकर विवादित दावे किए गए। संभल और अजमेर में हुए घटनाक्रम इसी कड़ी का हिस्सा हैं।</p>
<p>इन घटनाओं ने अदालतों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या न्यायपालिका को ऐसे सर्वेक्षणों की अनुमति देनी चाहिए, जो सामाजिक अस्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं? धार्मिक विवादों पर अदालत के आदेश सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं, खासकर जब विवादित स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन जाते हैं।</p>
<p>राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मुद्दा जटिल है। भाजपा और आरएसएस के बीच वैचारिक विरोधाभास स्पष्ट है। जबकि केंद्रीय नेतृत्व &#8220;नए भारत&#8221; के विकास और एकता की बात करता है, जमीनी स्तर पर धार्मिक विवाद बढ़ते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &#8220;सबका साथ, सबका विकास&#8221; के नारे पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि धार्मिक विवाद सामाजिक विकास और निवेश को प्रभावित कर रहे हैं।</p>
<p>आरएसएस के भीतर भी गहरे मतभेद दिखाई देते हैं। मोहन भागवत धार्मिक स्थलों पर विवाद न बढ़ाने की अपील करते हैं, लेकिन संघ के कुछ सहायक संगठन इस अपील के विपरीत काम कर रहे हैं। यह सवाल उठता है कि क्या संघ का नेतृत्व जमीनी स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं पर प्रभावी नियंत्रण रख पा रहा है।</p>
<p>धार्मिक विवादों का सबसे बड़ा प्रभाव समाज पर पड़ता है। हिंदू-मुस्लिम संबंधों में बढ़ती दरार, धार्मिक हिंसा, और क्षेत्रीय विकास में बाधा जैसी समस्याएँ इन विवादों से उत्पन्न होती हैं। देश की वैश्विक छवि भी प्रभावित होती है, क्योंकि भारत को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के रूप में देखा जाता है।</p>
<p>इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सबसे पहले, अदालतों को इस प्रकार के विवादों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश देने चाहिए। न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके आदेश सामाजिक समरसता को भंग न करें। सरकार को पूजा स्थल अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए और विवादों को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद से परे, देश को अपने अतीत से सबक लेकर भविष्य की ओर देखना चाहिए। यह समय है कि समाज, सरकार, और न्यायपालिका सभी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि धार्मिक विवाद भारत की एकता और विकास को बाधित न करें। मोहन भागवत का 2022 का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उसे केवल समझने की नहीं, बल्कि उस पर अमल करने की जरूरत है।</p>
<p>भारत को आगे बढ़ना होगा। मंदिर-मस्जिद विवादों में उलझने के बजाय एक ऐसा राष्ट्र बनाना होगा, जहाँ विकास, शांति, और सामाजिक समरसता सर्वोपरि हों। यही नया भारत होगा, जिसका सपना प्रधानमंत्री मोदी और हर भारतीय ने देखा है।</p>
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		<title>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 01:07:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[#goodmorning]]></category>
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		<category><![CDATA[Mohan bhagwat]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: &#8220;हमें बांग्लादेश में हुई हिंसा से सबक लेना चाहिए&#8221; नई दिल्ली 13 अक्टूबर। हाल</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rss-chief-mohan-bhagwat-rising-cases-of-radicalism-in-the-country-a-worrying-trend/">आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: &#8220;हमें बांग्लादेश में हुई हिंसा से सबक लेना चाहिए&#8221;</strong></p>
<p>नई दिल्ली 13 अक्टूबर। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने समाज और राष्ट्र को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने बांग्लादेश में हो रही हिंसात्मक घटनाओं की ओर संकेत करते हुए इसे देश और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया। भागवत ने अपने विचारों में समाज के सजग होने और अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को बाहरी चुनौतियों और खतरे के प्रति सतर्क रहना चाहिए और जब तक प्रशासनिक सहायता नहीं आती, तब तक अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।</p>
<p><strong>हिंसा का संदर्भ और उसका समाज पर असर</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का ज़िक्र किया और कहा कि इन घटनाओं से हमें सावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करती हैं, और इसका सीधा असर समाज पर पड़ता है। प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह ऐसी घटनाओं को रोके, दोषियों को गिरफ्तार करे और उन्हें उचित दंड दे, लेकिन जब तक प्रशासन अपनी कार्रवाई नहीं करता, तब तक समाज को खुद ही अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा करनी होगी। भागवत के अनुसार, समाज को हर समय सजग और संगठित रहना चाहिए ताकि इस प्रकार की घटनाओं से निपटा जा सके।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;ऐसी घटनाओं को रोकना और दोषियों को तुरंत नियंत्रित करना और उन्हें दंडित करना प्रशासन का काम है। लेकिन जब तक वे नहीं आ जाते, तब तक समाज को खुद की और अपनी संपत्ति की रक्षा करनी होगी और अपने प्रियजनों की जान की भी रक्षा करनी होगी।&#8221;</p>
<p><strong>डराने या लड़ाई भड़काने का इरादा नहीं</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य डराने या किसी प्रकार की लड़ाई भड़काने का नहीं है, बल्कि वे समाज को जागरूक और सतर्क करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम सभी एक कठिन स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिसमें समाज की सजगता और आपसी सहयोग की आवश्यकता है। देश की एकता, खुशी, शांति और मजबूती के लिए सभी नागरिकों को अपना योगदान देना चाहिए, विशेषकर हिंदू समाज की जिम्मेदारी अधिक है। भागवत ने कहा, &#8220;हम सभी ऐसी स्थिति का अनुभव कर रहे हैं। देश को एकजुट, खुशहाल, शांतिपूर्ण और मजबूत बनाना सभी की जिम्मेदारी है। हिंदू समाज की जिम्मेदारी अधिक है।&#8221;</p>
<p><strong>बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न का मुद्दा</strong></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के उत्पीड़न का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक बन चुके हैं और उन्हें भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। भागवत ने भारतीय सरकार और विश्वभर के हिंदू समुदाय से अपील की कि वे बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार हो रहे हिंदुओं की मदद करें।</p>
<p>उनका मानना है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को संरक्षण की आवश्यकता है और इसके लिए भारत समेत पूरे विश्व के हिंदुओं को आगे आना चाहिए। भागवत ने इस बात पर बल दिया कि हमें बांग्लादेश में हो रहे हिंदू विरोधी हिंसा से सबक लेना चाहिए और समाज को अपने स्तर पर भी संगठित होकर काम करना चाहिए।</p>
<p><strong>कट्टरता और हिंसा में वृद्धि</strong></p>
<p>भागवत ने देश में कट्टरता के बढ़ते मामलों का ज़िक्र करते हुए इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति बताया। उन्होंने कहा कि बिना किसी कारण के कट्टरता को बढ़ावा देने वाली घटनाओं में अचानक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे समाज में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।</p>
<p>हालांकि उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंसा का सहारा लेना, किसी विशेष समुदाय पर हमला करना या भय पैदा करने की कोशिश करना गुंडागर्दी है और इसका कोई औचित्य नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि हिंसा का विरोध करने और अपने विचार व्यक्त करने के लोकतांत्रिक तरीके हैं, जिन्हें अपनाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक मार्क्सवाद और &#8220;वोकिज्म&#8221; का ख़तरा</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में सांस्कृतिक मार्क्सवाद और &#8220;वोकिज्म&#8221; जैसे विषयों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि आजकल इन विषयों पर बहुत चर्चा हो रही है, और इनकी विचारधाराएं समाज की सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, &#8220;डीप स्टेट&#8221;, &#8220;वोकिज्म&#8221; और &#8220;सांस्कृतिक मार्क्सवाद&#8221; आजकल चर्चा के विषय हैं। वास्तव में, वे सभी सांस्कृतिक परंपराओं के घोषित दुश्मन हैं।&#8221;</p>
<p>भागवत ने कहा कि ये विचारधाराएं समाज के मूल्यों, परंपराओं और पुण्य माने जाने वाले सिद्धांतों का विनाश करना चाहती हैं। ऐसे में समाज को इनके खिलाफ सजग होना चाहिए और इनके दुष्प्रभाव से बचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सकारात्मक आख्यान बनाने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते खतरे</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि इन विचारधाराओं का प्रभाव शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ रहा है, जहां इन विकृत विचारों को छात्रों के बीच फैलाया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि शैक्षणिक संस्थान समाज को जागरूक और शिक्षित करने का स्थान होना चाहिए, लेकिन कुछ तत्व इन संस्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक और वैचारिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।</p>
<p>भागवत ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में पनप रही इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए हमें सजग होना चाहिए और समाज को इन विकृत विचारधाराओं से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विचारों ने समाज और राष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर एक गहरा विचार-विमर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों से लेकर देश में कट्टरता और सांस्कृतिक विनाश की ओर बढ़ती प्रवृत्तियों पर खुलकर अपने विचार रखे। भागवत ने अपने वक्तव्य में समाज को जागरूक, संगठित और सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा का सहारा लेने के बजाय समाज को लोकतांत्रिक और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात को सामने रखना चाहिए।</p>
<p>भागवत का संदेश स्पष्ट है कि समाज को अपने मूल्यों और परंपराओं की रक्षा के लिए सजग रहना चाहिए और इन विकृत विचारधाराओं से लड़ने के लिए संगठित होना चाहिए। उन्होंने देश को एकजुट, शांतिपूर्ण और मजबूत बनाने की दिशा में सभी नागरिकों से जिम्मेदारी लेने की अपील की, विशेष रूप से हिंदू समाज से।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rss-chief-mohan-bhagwat-rising-cases-of-radicalism-in-the-country-a-worrying-trend/">आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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