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	<title>kirti vardhan singh Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>गोण्डा में ‘वृक्ष उत्पादक मेला’ का भव्य आयोजन</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/vriksh-utpadak-mela-gonda/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Sep 2025 12:04:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
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		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
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		<category><![CDATA[Cm Yogi Adityanath]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[kirti vardhan singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>किसानों को मिला साझा मंच, वृक्ष आधारित खेती की ओर बढ़े कदम गोण्डा, 19 सितम्बर 2025। जिला पंचायत</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;" data-start="320" data-end="761"><span style="color: #993300;"><strong>किसानों को मिला साझा मंच, वृक्ष आधारित खेती की ओर बढ़े कदम</strong></span></p>
<p data-start="320" data-end="761"><strong data-start="320" data-end="348">गोण्डा, 19 सितम्बर 2025। </strong>जिला पंचायत सभागार, गोण्डा का प्रांगण शुक्रवार को किसानों, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति से खचाखच भरा हुआ था। अवसर था <strong data-start="488" data-end="512">“वृक्ष उत्पादक मेला”</strong> का, जिसका आयोजन पर्यावरण संरक्षण, वृक्ष आधारित खेती और किसानों की आय वृद्धि को ध्यान में रखते हुए किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता गोण्डा सांसद एवं भारत सरकार के <strong data-start="674" data-end="752">केंद्रीय राज्य मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा विदेश मंत्रालय</strong> ने की।</p>
<p data-start="763" data-end="976">यह मेला केवल गोण्डा तक सीमित नहीं रहा बल्कि आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान यहाँ पहुँचे। उन्होंने न केवल अपने अनुभव साझा किए, बल्कि वृक्ष आधारित कृषि को अपनाने की दिशा में नए संकल्प भी लिए।</p>
<h3 data-start="983" data-end="1037">कार्यक्रम की भव्यता और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी</h3>
<p data-start="1038" data-end="1324">कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मनकापुर विधायक <strong data-start="1090" data-end="1114">श्री रमापति शास्त्री</strong>, तरबगंज विधायक <strong data-start="1130" data-end="1159">श्री प्रेम नारायण पाण्डेय</strong>, करनैलगंज विधायक <strong data-start="1177" data-end="1194">श्री अजय सिंह</strong> और गोण्डा/बलरामपुर से विधान परिषद सदस्य <strong data-start="1235" data-end="1275">श्री अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह</strong> की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।</p>
<p data-start="1326" data-end="1590">जिलाधिकारी <strong data-start="1337" data-end="1364">श्रीमती प्रियंका निरंजन</strong> ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने विस्तार से बताया कि जिले में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कौन-कौन से प्रयास किए जा रहे हैं तथा भविष्य में किन योजनाओं को अमल में लाया जाएगा।</p>
<p data-start="1592" data-end="1732">भाजपा जिला महामंत्री <strong data-start="1613" data-end="1637">श्री जसवंत लाल सोनकर</strong> के साथ-साथ वन, कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई।</p>
<p data-start="1592" data-end="1732"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5372" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e.jpg" alt="" width="1280" height="784" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-300x184.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-1024x627.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.16_c6fc514e-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="1739" data-end="1776">विभागीय जानकारी और तकनीकी सहयोग</h3>
<p data-start="1777" data-end="2083">वन विभाग, कृषि विभाग और उद्यान विभाग ने मेले में अपने-अपने स्टॉल लगाए, जहाँ किसानों को नवीनतम तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने किसानों को यह बताया कि वृक्ष आधारित खेती को अपनाकर न केवल भूमि की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है, बल्कि लंबे समय तक स्थायी आमदनी भी सुनिश्चित की जा सकती है।</p>
<p data-start="2085" data-end="2386">वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वृक्ष उत्पादन केवल लकड़ी या फल-फूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एक कारगर उपाय भी है। कृषि विभाग ने किसानों को यह बताया कि मिश्रित खेती और वृक्ष आधारित मॉडल से जोखिम कम होता है और बाजार में उत्पादों की विविधता बढ़ती है।</p>
<h3 data-start="2393" data-end="2428">प्रगतिशील किसानों की भागीदारी</h3>
<p data-start="2429" data-end="2765">इस मेले में गोण्डा और अन्य जनपदों से आए सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया। इनमें से कई किसान ऐसे थे, जिन्होंने वर्षों पहले वृक्ष आधारित खेती को अपनाकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। कार्यक्रम के दौरान इन किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे आम, अमरूद, सहजन, शीशम, पॉपलर और बांस जैसे वृक्षों ने उनकी आजीविका को नई दिशा दी।</p>
<p data-start="2767" data-end="2997">कुछ किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को स्थानीय स्तर पर वृक्ष उत्पादों की खरीद की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही प्रसंस्करण केंद्रों और मूल्य निर्धारण प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सके।</p>
<p data-start="2767" data-end="2997"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5373" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126.jpg" alt="" width="1280" height="725" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-300x170.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-1024x580.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.21_a0c4a126-768x435.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="3004" data-end="3037">प्रगतिशील किसानों का सम्मान</h3>
<p data-start="3038" data-end="3240">कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से में उन किसानों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली को अपनाकर न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया।</p>
<p data-start="3242" data-end="3409">सम्मानित किसानों को <strong data-start="3262" data-end="3293">प्रतीक चिन्ह और प्रमाण पत्र</strong> प्रदान किए गए। यह सम्मान उनके प्रयासों की पहचान मात्र नहीं थी, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी।</p>
<h3 data-start="3416" data-end="3462">सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री का संबोधन</h3>
<p data-start="3463" data-end="3943">मुख्य अतिथि एवं अध्यक्षता कर रहे <strong data-start="3496" data-end="3530">सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री</strong> ने अपने उद्बोधन में कहा कि वृक्ष उत्पादन केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में यदि किसान वृक्षारोपण को अपनी खेती का हिस्सा बनाते हैं तो यह न केवल धरती के लिए फायदेमंद होगा बल्कि उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।</p>
<p data-start="3945" data-end="4062">उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और प्रकृति संरक्षण की इस मुहिम में भागीदार बनें।</p>
<h3 data-start="4069" data-end="4092">स्टॉलों का अवलोकन</h3>
<p data-start="4093" data-end="4480">मेले के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर अधिकारियों और किसानों से जानकारी प्राप्त की। विभागीय योजनाओं की जानकारी और किसानों के सुझावों को सुनकर उन्होंने अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि किसानों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचाना और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>
<h3 data-start="4487" data-end="4524">कार्यक्रम के उद्देश्य और प्रभाव</h3>
<p data-start="4525" data-end="4724">“वृक्ष उत्पादक मेला” का मुख्य उद्देश्य किसानों को वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली के महत्व से अवगत कराना था। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि खेती केवल अनाज या पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।</p>
<p data-start="4726" data-end="4748">वृक्ष आधारित खेती से</p>
<ul data-start="4749" data-end="4955">
<li data-start="4749" data-end="4782">
<p data-start="4751" data-end="4782"><strong data-start="4751" data-end="4771">पर्यावरण संरक्षण</strong> होता है।</p>
</li>
<li data-start="4783" data-end="4832">
<p data-start="4785" data-end="4832"><strong data-start="4785" data-end="4802">जलवायु संतुलन</strong> बनाए रखने में मदद मिलती है।</p>
</li>
<li data-start="4833" data-end="4890">
<p data-start="4835" data-end="4890">किसान को <strong data-start="4844" data-end="4869">अतिरिक्त और स्थायी आय</strong> का स्रोत मिलता है।</p>
</li>
<li data-start="4891" data-end="4955">
<p data-start="4893" data-end="4955">भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और कटाव की समस्या कम होती है।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-start="4962" data-end="4992">किसानों की प्रतिक्रियाएँ</h3>
<p data-start="4993" data-end="5174">मेले में शामिल कई किसानों ने कार्यक्रम को सराहनीय बताया। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें न केवल नई जानकारियाँ मिलती हैं बल्कि अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलता है।</p>
<p data-start="5176" data-end="5408">बहराइच से आए एक किसान ने कहा, <em data-start="5206" data-end="5406">“मैंने पाँच साल पहले सहजन और पॉपलर की खेती शुरू की थी। आज उससे मुझे सालाना लाखों की आमदनी हो रही है। इस मेले में आकर मुझे और तकनीकी जानकारी मिली है, जिसे अपनाकर मैं आगे अपनी खेती का विस्तार करूंगा।”</em></p>
<p data-start="5410" data-end="5550">वहीं गोंडा के ही एक किसान ने कहा कि सरकार को वृक्ष उत्पादों की स्थानीय खरीद प्रणाली विकसित करनी चाहिए, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।</p>
<p data-start="5410" data-end="5550"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-5374" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df.jpg" alt="" width="1280" height="680" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-300x159.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-1024x544.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/WhatsApp-Image-2025-09-19-at-12.39.36_bab5c4df-768x408.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<h3 data-start="5557" data-end="5577">भविष्य की दिशा</h3>
<p data-start="5578" data-end="5882">जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने अपने संबोधन में कहा कि जिले में वृक्ष आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही विभिन्न योजनाओं को इस प्रकार लागू किया जाएगा कि अधिक से अधिक किसान इससे लाभ उठा सकें।</p>
<p data-start="5884" data-end="6091">उन्होंने यह भी बताया कि जिले में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर तक समितियाँ गठित की जाएंगी। इससे किसानों को न केवल मार्गदर्शन मिलेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान भी संभव हो सकेगा।</p>
<p data-start="6113" data-end="6323">गोण्डा में आयोजित <strong data-start="6131" data-end="6155">“वृक्ष उत्पादक मेला”</strong> ने यह साबित कर दिया कि यदि किसानों को सही जानकारी, तकनीकी सहयोग और प्रोत्साहन मिले तो वे पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक उन्नति दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p data-start="6325" data-end="6487">यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि किसानों के लिए एक साझा मंच था, जहाँ उन्होंने अनुभव साझा किए, तकनीकी जानकारी प्राप्त की और भविष्य की राह तय की।</p>
<p data-start="6489" data-end="6692">मेले का समापन धन्यवाद ज्ञापन और प्रेरणादायक उद्बोधनों के साथ हुआ। इसमें किसानों ने यह संकल्प लिया कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करेंगे और पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाएंगे।</p>
<p data-start="6694" data-end="6780"><strong data-start="6694" data-end="6778">वृक्ष उत्पादक मेला किसानों के लिए आशा और प्रेरणा का नया स्रोत बनकर सामने आया है।</strong></p>
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			</item>
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		<title>उजाले के नाम पर अंधकार, नगर पालिका और क्षेत्र पंचायतों में करोड़ों की लूट</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/darkness-in-the-name-of-light-crores-of-rupees-looted-in-nagar-palika-and-area-panchayats/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Oct 2024 03:40:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[Bavan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda dm]]></category>
		<category><![CDATA[kirti vardhan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Manju singh]]></category>
		<category><![CDATA[Prateek bhushan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Prem narayan pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Vinay diwedi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 18 अक्टूबर। जनपद में उजाला लाने की कवायद, जो कि आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 18 अक्टूबर। जनपद में उजाला लाने की कवायद, जो कि आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई थी, अब एक बड़े भ्रष्टाचार की कहानी बन गई है। सरकार की ओर से जारी की गई हाई मास्क लाइट योजना को अधिकारियों और ठेकेदारों ने भ्रष्टाचार और बंदरबांट का जरिया बना लिया। इस योजना के तहत नगर पालिका, नगर पंचायत, और क्षेत्र पंचायत निधियों से जारी की गई भारी धनराशि का उपयोग बड़े पैमाने पर घोटाले के लिए किया गया।</p>
<p>जनपद की गलियों, चौराहों, और सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाली हाई मास्क लाइट्स की आड़ में करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है। लाइट्स और पोल्स की गुणवत्ता से लेकर उनकी कीमत तक, हर कदम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जिन लाइट्स की कीमतें लाखों में होनी चाहिए थीं, वे घटिया गुणवत्ता की सस्ती लाइट्स से बदली जा रही हैं, और बाकी पैसा अधिकारियों, ठेकेदारों, और स्थानीय नेताओं की जेबों में जा रहा है।</p>
<p><strong>हाई मास्क लाइट योजना: उद्देश्य और योजना का कार्यान्वयन</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में हाई मास्क लाइट्स लगाने की योजना का उद्देश्य गाँवों, कस्बों, और शहरों की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को रात के समय रोशन करना था। इन लाइट्स के माध्यम से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित की जानी थी, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार ने इस परियोजना के लिए नगर पालिका, नगर पंचायत, और क्षेत्र पंचायत निधियों से भारी मात्रा में धनराशि जारी की थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर स्थान पर उजाला हो।</p>
<p>लेकिन यह योजना कागजों पर जितनी प्रभावी दिख रही थी, जमीनी हकीकत में इसका कार्यान्वयन उतना ही दयनीय साबित हुआ। लाइट्स की कीमतों और गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई, और जो धनराशि इन लाइट्स को लगाने के लिए आवंटित की गई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में चला गया।</p>
<p><strong>घटिया लाइट्स और पोल्स की आपूर्ति: मानकों से समझौता</strong></p>
<p>इस योजना के तहत, जनपद में कई स्थानों पर हाई मास्क लाइट्स और उनके पोल्स लगाए गए। इन लाइट्स को सरकारी मानकों के अनुसार टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए था। लेकिन वास्तविकता में, जो लाइट्स लगाई गईं, वे घटिया गुणवत्ता की थीं।</p>
<p><strong>मानकों से समझौता कैसे किया गया?</strong></p>
<p>लाइट्स की कीमतों में हेरफेर: योजना के अनुसार, एक हाई मास्क लाइट की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये होनी चाहिए थी। उन्नत चौराहों और सार्वजनिक स्थानों के लिए, 3.3 लाख रुपये तक की कीमत वाली लाइट्स का प्रावधान था। लेकिन जो लाइट्स वास्तव में लगाई गईं, उनकी कीमतें मात्र 55,000 रुपये से लेकर 1.2 लाख रुपये तक ही थीं। इसका मतलब है कि हर लाइट पर हजारों से लाखों रुपये की हेराफेरी की गई।</p>
<p>पोल्स की गुणवत्ता में गिरावट: पोल्स, जो लाइट्स को सहारा देने के लिए बनाए गए थे, उनकी भी गुणवत्ता घटिया थी। कई स्थानों पर पोल्स कुछ ही महीनों में जंग खाकर टूटने लगे, और कुछ तो गिर भी गए। यह साबित करता है कि पोल्स में इस्तेमाल की गई सामग्री भी मानकों के अनुरूप नहीं थी।</p>
<p><strong>पैसे का बंदरबांट: कैसे किया गया घोटाला?</strong></p>
<p>इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई स्तरों पर भ्रष्टाचार किया गया। नगर पालिका और पंचायतों के अधिकारी, ठेकेदार, और स्थानीय नेता सभी इसमें शामिल थे।</p>
<p><strong>अधिकारियों और ठेकेदारों का गठजोड़</strong></p>
<p>टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर: सबसे पहले, लाइट्स और पोल्स की आपूर्ति के लिए निकाले गए टेंडर में हेरफेर किया गया। अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर उन कंपनियों को टेंडर दिए, जो या तो निम्न गुणवत्ता का सामान सप्लाई करती थीं या फिर घोटाले में शामिल थीं।</p>
<p><strong>कृत्रिम कीमतें:</strong> जिन लाइट्स की वास्तविक कीमत लाखों में होनी चाहिए थी, उन्हें कागजों पर इतना बढ़ाकर दिखाया गया कि सरकार से अधिक धनराशि ली जा सके। लेकिन असल में घटिया गुणवत्ता की सस्ती लाइट्स और पोल्स खरीदे गए।</p>
<p><strong>कीमतों में भारी गड़बड़ी</strong></p>
<p><strong>1.5 लाख रुपये की लाइट 55,000 रुपये में:</strong> उदाहरण के तौर पर, जो लाइट्स 1.5 लाख रुपये की  थीं, उन्हें वास्तविक मूल्य मात्र 55,000 रुपये था, और बाकी का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बंदरबांट हो गया।</p>
<p><strong>3.3 लाख रुपये की लाइट 1.2 लाख रुपये में:</strong> उच्च गुणवत्ता की लाइट्स की जगह सस्ती लाइट्स लगाकर 2.1 लाख रुपये प्रति लाइट का घोटाला किया गया।</p>
<p><strong>मानक विहीन सामग्री का इस्तेमाल</strong></p>
<p>लाइट्स और पोल्स की गुणवत्ता में जानबूझकर समझौता किया गया। जिन पोल्स को कई सालों तक टिकने के लिए बनाया जाना चाहिए था, वे कुछ ही महीनों में जंग खाकर खराब होने लगे लाइट्स में इस्तेमाल की गई बैटरियां और बल्ब भी खराब गुणवत्ता के थे, जिससे वे जल्दी जल गए और बंद हो गए।</p>
<p><strong>जनता की नाराजगी और असुविधा</strong></p>
<p>इस घोटाले का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ा। जो लोग इन लाइट्स के जरिए बेहतर रोशनी और सुरक्षा की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अंधेरे में धकेल दिया गया।</p>
<p><strong>स्थानीय निवासियों की शिकायतें:</strong></p>
<p>एक स्थानीय दुकानदार का कहना है, &#8220;जब ये लाइट्स लगीं, तो हमें लगा कि अब रात में व्यापार करना आसान हो जाएगा। लेकिन कुछ ही महीनों में लाइट्स बंद हो गईं, और अब हमें फिर से अंधेरे में काम करना पड़ता है। एक अन्य निवासी ने कहा, &#8220;हमें बताया गया था कि ये लाइट्स कई सालों तक चलेंगी, लेकिन अब हमें लग रहा है कि यह सब केवल पैसे की लूट के लिए किया गया था।&#8221;</p>
<p><strong>शिकायतों पर प्रशासन की अनदेखी</strong></p>
<p>जब लाइट्स और पोल्स जल्दी खराब होने लगे, तो जनता ने नगर पालिका और प्रशासन के पास शिकायतें कीं। लेकिन इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।</p>
<p><strong>प्रशासन की प्रतिक्रिया:</strong></p>
<p>नगर पालिका और पंचायत अधिकारियों ने शिकायतों को नजरअंदाज किया और कहा कि लाइट्स की मरम्मत की जाएगी, लेकिन मरम्मत के नाम पर फिर से वही भ्रष्टाचार किया गया प्रशासन ने लाइट्स की खराब गुणवत्ता पर कोई जांच नहीं की और जनता की समस्याओं को दरकिनार कर दिया।</p>
<p><strong>जांच का अभाव: क्यों नहीं हो रही है जांच?</strong></p>
<p>यह घोटाला उजागर होने के बावजूद, सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस जांच नहीं की गई है।</p>
<p><strong>क्या कहता है प्रशासन?</strong></p>
<p>जब भी इस घोटाले के बारे में क्षेत्र पंचायत के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया जाता है, तो अधिकारियों की ओर से गोलमोल जवाब दिए जाते हैं। ऐसा लगता है कि इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई न हो सके। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि नगर पालिका और पंचायत के कई अधिकारी और ठेकेदार इस घोटाले में शामिल हैं, और उनकी प्रशासनिक पहुँच इतनी मजबूत है कि किसी भी प्रकार की जांच को आसानी से दबा दिया जाता है।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम: क्या हो सकते हैं समाधान?</strong></p>
<p>यह घोटाला न केवल गोण्डा जनपद, बल्कि पूरे राज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका प्रमाण है। ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>संभव समाधान:</strong></p>
<p><span style="color: #993300;">पारदर्शिता लाना:</span> योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता जरूरी है। टेंडर प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता को भी पता चले कि कौन सा ठेकेदार काम कर रहा है और उस काम की गुणवत्ता कैसी है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>स्वतंत्र जांच आयोग:</strong> </span>इस प्रकार के घोटालों की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें जनता और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">कड़ी सजा</span>:</strong> जो भी अधिकारी, ठेकेदार, या नेता इस घोटाले में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p>गोण्डा जनपद में हाई मास्क लाइट योजना का घोटाला उजाले के नाम पर ठेकेदारों की और अधिकारियों की अंधी कमाई का जरिया मात्र रह गया है। प्रदेश में हाई मास्क लाइट योजना का घोटाला भ्रष्टाचार का एक और जीता-जागता उदाहरण है। जनता के पैसों का दुरुपयोग करके कुछ खास लोग अपनी जेबें भर रहे हैं, जबकि जिनके लिए यह योजना बनाई गई वह अभी भी अंधेरे में है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/darkness-in-the-name-of-light-crores-of-rupees-looted-in-nagar-palika-and-area-panchayats/">उजाले के नाम पर अंधकार, नगर पालिका और क्षेत्र पंचायतों में करोड़ों की लूट</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के हस्तक्षेप से 40 दिन बाद घर पहुंच शव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 04:46:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[Due to the intervention of Minister of State for External Affairs Kirti Vardhan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda latest news]]></category>
		<category><![CDATA[kirti vardhan singh]]></category>
		<category><![CDATA[the body reached home after 40 days]]></category>
		<category><![CDATA[कीर्ति वर्धन सिंह]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सऊदी अरब में दर्दनाक हत्या: गोंडा के मोहम्मद शकील का शव 40 दिन बाद घर पहुंचा, चार मासूम</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/due-to-the-intervention-of-minister-of-state-for-external-affairs-kirti-vardhan-singh-the-body-reached-home-after-40-days/">विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के हस्तक्षेप से 40 दिन बाद घर पहुंच शव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सऊदी अरब में दर्दनाक हत्या: गोंडा के मोहम्मद शकील का शव 40 दिन बाद घर पहुंचा, चार मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया</strong></p>
<p>गोंडा, 14 अक्टूबर। सऊदी अरब में हुए एक दिल दहला देने वाले हत्या के मामले में गोंडा जिले के डमरती विसेन गांव के रहने वाले मोहम्मद शकील का शव आखिरकार 40 दिनों बाद भारत पहुंचा। इस हृदय विदारक घटना से शकील के परिवार और पूरे गांव में शोक का माहौल है। शकील, जो सऊदी अरब में बकरी चराने का काम करते थे, उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह उर्फ राजा भैया के हस्तक्षेप के बाद ही यह मुमकिन हो पाया कि शकील का शव भारत लाया जा सके। शकील की चार मासूम बेटियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है, और उनकी पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।</p>
<p><strong>हत्या का दर्दनाक मामला: सऊदी अरब में बर्बरता</strong></p>
<p>मोहम्मद शकील, जो उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी थे, अपने परिवार के बेहतर भविष्य की तलाश में सऊदी अरब गए थे। वहां वह बकरी चराने का काम करते थे। सऊदी में काम करने के दौरान उनके साथ रहने वाले युवक अरबाज और उसके साथियों ने शकील की हत्या कर दी। बताया गया कि उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसके चलते उनकी मौके पर ही मौत हो गई।</p>
<p>पहले शकील के परिवार को सूचना दी गई थी कि उनकी मौत एक दुर्घटना के कारण हुई है, जहां बताया गया कि शकील की मौत गिरने से हो गई। लेकिन जब मामले की सच्चाई सामने आई, तो परिवार को पता चला कि यह एक सुनियोजित हत्या थी।</p>
<p><strong>केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री के हस्तक्षेप से हुआ शव का भारत आगमन</strong></p>
<p>शकील का शव सऊदी अरब से भारत लाने में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवार पहले से ही अपनी इस त्रासदी से टूट चुका था और ऊपर से शव को वापस लाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी हो गई थी।</p>
<p>केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह उर्फ राजा भैया ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया। उन्होंने सऊदी प्रशासन से संपर्क किया और शव को भारत लाने की प्रक्रिया को तेज किया। उनके हस्तक्षेप के बाद ही शव को भारत लाया जा सका, जिससे शकील के परिवार को उनका अंतिम संस्कार करने का मौका मिला।</p>
<p><strong>गांव में शोक का माहौल</strong></p>
<p>जब शकील का शव 40 दिन बाद गांव पहुंचा, तो पूरे डमरती विसेन गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शकील का परिवार इस घटना से पूरी तरह टूट चुका है। शकील की चार बेटियां हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 12, 9, 7 और 5 वर्ष है। अब उनके सिर से पिता का साया उठ गया है। बेटियों के भविष्य को लेकर परिवार चिंतित है, क्योंकि शकील ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी पत्नी और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।</p>
<p>शव के गांव पहुंचते ही, लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांववालों ने शकील के परिवार को सांत्वना दी, लेकिन इस अप्रत्याशित घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। परिवार ने रात को शव का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कर दिया।</p>
<p><strong>परिजनों का संघर्ष: न्याय और मदद की मांग</strong></p>
<p>शकील के परिवार ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री और भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। शकील के बहनोई निजामुद्दीन ने बताया, &#8220;हम भारत सरकार और गोंडा जिला प्रशासन के आभारी हैं, जिन्होंने हमारी मदद की। विशेष रूप से विदेश राज्य मंत्री ने मामले में हस्तक्षेप कर शव को भारत लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।&#8221;</p>
<p>परिवार अब न्याय की मांग कर रहा है। उन्होंने अपील की है कि सऊदी अरब में शकील के हत्यारे अरबाज और उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। शकील के परिजनों का कहना है कि वे उम्मीद करते हैं कि विदेश मंत्री और भारतीय सरकार सऊदी हुकूमत से इस मामले में उचित कार्रवाई करवाएंगे, ताकि दोषियों को सजा मिल सके।</p>
<p><strong>शकील की जिंदगी: बेहतर भविष्य की तलाश में गए थे विदेश</strong></p>
<p>मोहम्मद शकील का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। अपने परिवार का पेट पालने और बेहतर जीवन जीने के लिए वे सऊदी अरब गए थे। अपने गांव में रोजगार की संभावनाएं सीमित थीं, जिसके चलते उन्होंने विदेश जाकर काम करने का फैसला किया। सऊदी अरब में काम करने से जो भी आमदनी होती, उससे वे अपने परिवार का खर्च चलाते थे और अपनी बेटियों की पढ़ाई-लिखाई का इंतजाम कर रहे थे।</p>
<p>शकील की मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि उनके गांव के लोगों को भी गहरा आघात पहुंचाया है। उनका जीवन एक साधारण आदमी का था, जो अपनी मेहनत से परिवार को बेहतर भविष्य देने की कोशिश कर रहा था। लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी को इस तरह समाप्त कर दिया कि उनका परिवार अब अनिश्चितताओं में घिर गया है।</p>
<p><strong>विदेश में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा का सवाल</strong></p>
<p>यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन लाखों भारतीय कामगारों की स्थिति पर भी सवाल उठाता है, जो विदेशों में रोजगार की तलाश में जाते हैं। सऊदी अरब जैसे देशों में भारतीय कामगार बड़ी संख्या में हैं, और उनमें से कई वहां कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं।</p>
<p>शकील की हत्या ने इन प्रवासी कामगारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार द्वारा विदेश में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।</p>
<p><strong>भारतीय प्रशासन की भूमिका और उम्मीदें</strong></p>
<p>शकील के परिवार और गांववालों को इस बात की उम्मीद है कि भारतीय प्रशासन सऊदी प्रशासन से इस मामले में न्याय दिलवाने की पूरी कोशिश करेगा। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया जटिल हो सकती है, लेकिन परिवार की यह मांग है कि भारत सरकार इस मुद्दे को सऊदी सरकार के समक्ष जोरदार ढंग से उठाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग करे।</p>
<p>सऊदी अरब में न्याय प्राप्त करने के लिए वहां की कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है, और इसमें भारतीय अधिकारियों को पूरी सक्रियता दिखानी होगी। शकील के परिवार को इस बात की उम्मीद है कि उनकी मदद के लिए भारत सरकार और विदेश मंत्री इस मामले में पूरी सक्रियता से काम करेंगे।</p>
<p><strong>शकील के परिवार की आर्थिक स्थिति: भविष्य की अनिश्चितता</strong></p>
<p>शकील के निधन के बाद अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और भी अनिश्चित हो गई है। वे अपने परिवार के लिए एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी चार बेटियां, जो अभी बहुत छोटी हैं, उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।</p>
<p>शकील की पत्नी अब अकेले अपने परिवार को संभालने की स्थिति में नहीं हैं, और उन्हें मदद की सख्त जरूरत है। गांव के लोग और स्थानीय प्रशासन ने परिवार को सांत्वना दी है, लेकिन आर्थिक मदद के बिना इस परिवार का गुजारा मुश्किल हो सकता है।</p>
<p>शकील के परिवार को अब सरकार और समाज की ओर से आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, ताकि उनकी बेटियों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित हो सके।</p>
<p>मोहम्मद शकील की हत्या न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गहरी त्रासदी है। एक व्यक्ति जो अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गया था, उसकी हत्या ने उसके परिवार को अनिश्चितताओं के दलदल में धकेल दिया है।</p>
<p>इस घटना ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों की सुरक्षा के सवालों को भी उठाया है और यह आवश्यक बना दिया है कि सरकार इन कामगारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।</p>
<p>शकील के परिवार की मांग है कि उनके हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भारतीय प्रशासन सऊदी प्रशासन के साथ मिलकर इस मामले में न्याय दिलाने के लिए प्रयास करे। इसके साथ ही, शकील के परिवार को आर्थिक मदद की भी सख्त जरूरत है, ताकि उनकी बेटियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।</p>
<p>इस त्रासदी ने हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि विदेशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासी किस तरह की मुश्किलों का सामना करते हैं और सरकार को उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए और अधिक सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है।</p>
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		<title>राजशाही बनाम प्रजातंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Oct 2022 04:41:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा । आज हम विश्लेषण कर रहे है गोण्डा के दो राजनैतिक घरानों की जिनके दरवाजे के चौखट</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा । आज हम विश्लेषण कर रहे है गोण्डा के दो राजनैतिक घरानों की जिनके दरवाजे के चौखट से ही अब गोण्डा की राजनीति शुरू होती है एक घराना राजशाही से जुड़ा है तो दूसरा घराना प्रजा के बीच से निकलकर अपना स्थान बनाया है। हम बात कर रहे है अभी भी स्टेट माने जाने वाले मनकापुर व अब राजनीति की राजधानी माने जाने वाले तरबगंज तहसील के विश्नोहरपुर गांव में जन्मे और अब भारतीय कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2131" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664985975043-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664985975043-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664985975043-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664985975043-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664985975043.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>हम शुरुआत करते हैं राजा आनंद सिंह के घराने से जहां राजा आनंद सिंह कई बार विधायक मंत्री और सांसद राह चुके है तो उनके बेटे कुँवर कीर्तिवर्धन सिंह अभी भारतीय जनता पार्टी से गोण्डा के सांसद है कुंवर साहब जनता से अभी भी कुंवर की ही तरह से मिलते हैं और जनता भी प्रजा की ही तरह से कुंवर को सम्मान देती है सांसद होने के बाद भी जनता को अपनी प्रजा मानकर ही व्यवहार करते हैं एक दूरी जो एक राजपरिवार और प्रजा के बीच होनी चाहिए वह इन्होंने अपने कर्मचारियों के माध्यम से व्यवस्थित कर रखा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-2130 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_20221006_094528-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_20221006_094528-225x300.jpg 225w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG_20221006_094528.jpg 720w" sizes="auto, (max-width: 225px) 100vw, 225px" /><br />
अब हम बात करेंगे कैसरगंज सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह की, प्रजा के बीच से निकलकर अपना स्थान बनाया, कई बार के सांसद रह चुके है और इनकी पत्नी केतकी सिंह जी भी एक बार सांसद रही है इनके पुत्र प्रतीक भूषण सिंह 2017 और 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोण्डा सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-2132 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986465771-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986465771-300x200.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986465771-1024x683.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986465771-768x512.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986465771.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>जनता के बीच से निकले और जगह बनाने वाले बृजभूषण शरण सिंह और इनके पूरे परिवार को जो जानते है वो इन्हें अभिभावक की तरह से मानते हैं मतदाताओं के अतिरिक्त हर परेशान, लाचार के साथ उनके सुख और दुख में खड़े रहते है और उन सभी को अपने सुख में शामिल भी करते है</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-2133 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986393264-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986393264-300x200.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986393264-1024x683.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986393264-768x512.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/FB_IMG_1664986393264.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>शोशल मीडिया में वायरल हुई कुछ तश्वीरों और धरातल पर मौजूद स्थिति की समीक्षा यह है ऐसा मानना है कि राजशाही जाने के बाद सभी राजा अपनी ताकत और अपने धन को बचाने के लिये राजनीति में उतरे, आजादी तक तक राजा या जमीरदार वही थे जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार की थी और उनका साथ दिया था भारत का वह समय खत्म हो चुका है जब के लोग राजा को और उनके परिवार को भगवान मानते थे अब लोकतंत्र है अब जुड़ने का समय है वरना टूटना तय है</p>
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