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	<title>India Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>अगर एक दशक में नहीं हुआ ये काम तो अमेरिका जैसे देश तय करेंगे भारत का राजनीतिक परिदृश्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Nov 2024 00:17:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, (विजय कुमार)। आज के दौर में, भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/if-this-work-is-not-done-in-a-decade-then-countries-like-america-will-decide-the-political-scenario-of-india/">अगर एक दशक में नहीं हुआ ये काम तो अमेरिका जैसे देश तय करेंगे भारत का राजनीतिक परिदृश्य</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, (विजय कुमार)। आज के दौर में, भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स केवल संवाद के साधन नहीं रह गए हैं। ये एक ऐसा माध्यम बन चुके हैं, जो सूचनाओं के प्रसारण, विचारों के आदान-प्रदान, और राय बनाने में गहरा प्रभाव डालता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, ट्विटर जैसे अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज भारत के डिजिटल स्पेस में छाए हुए हैं, जिनसे देश की संप्रभुता और लोकतंत्र के लिए कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यदि जल्द ही भारत अपने सोशल नेटवर्क और इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का निर्माण नहीं करता है, तो यह संभव है कि भविष्य में विदेशी शक्तियाँ हमारे चुनावी निर्णयों में हस्तक्षेप कर सकेंगी।</p>
<p>आइए देखें कि भारत के नागरिकों के जीवन पर सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का क्या प्रभाव पड़ता है, और यह भी कि भारतीय प्लेटफॉर्म्स का निर्माण क्यों जरूरी है।</p>
<p><strong>सोशल नेटवर्किंग और मैसेजिंग ऐप्स का प्रभाव: हर मोबाइल धारक से लेकर समाज तक</strong></p>
<p>भारत में लगभग हर एंड्रॉयड मोबाइल धारक किसी न किसी सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। चाहे वह व्हाट्सएप हो, फेसबुक हो, या इंस्टाग्राम, देश का हर कोना इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जहाँ अन्य तकनीकी सेवाओं की पहुंच सीमित है, वहाँ भी मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया ने एक नई क्रांति पैदा की है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत में मोबाइल और इंटरनेट की पहुंच व्यापक है और कम लागत पर उपलब्ध है।</p>
<p>सोशल नेटवर्किंग प्लेटफार्मों ने न केवल लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का एक साधन दिया है, बल्कि ये प्लेटफार्म अब हमारे समाज, राजनीति और व्यक्तिगत विचारों को भी आकार देने लगे हैं। उदाहरण के लिए, कोई भी नया विचार, नीति या राजनीतिक आंदोलन सोशल मीडिया के माध्यम से तुरंत जनता के बीच पहुँच सकता है। इससे लोगों के विचारों और प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव देखा जा सकता है।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया का राजनीतिक प्रभाव और चुनावी परिणामों पर इसका असर</strong></p>
<p>भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में चुनावों पर सोशल मीडिया का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। राजनीतिक पार्टियां इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग अपने प्रचार के लिए करती हैं, और इनमें फैले विचार और मुद्दे लोगों की राय को प्रभावित करते हैं। हालांकि, अगर ये प्लेटफॉर्म विदेशी नियंत्रण में हैं, तो इसमें एक बड़ी समस्या हो सकती है। हाल ही के वर्षों में विभिन्न देशों में यह देखा गया है कि चुनावी अभियानों में सोशल मीडिया का दुरुपयोग हो सकता है। अमेरिका, ब्राज़ील, और यूके जैसे देशों में यह देखा गया कि गलत सूचनाओं और दुष्प्रचार के माध्यम से चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।</p>
<p>भारत में भी यह आशंका है कि यदि सोशल नेटवर्किंग प्लेटफार्म विदेशी नियंत्रण में रहे तो भविष्य में चुनावी प्रक्रियाओं पर बाहरी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स की पहुँच अब केवल युवाओं तक ही सीमित नहीं है। गाँव और छोटे शहरों में भी लोग इन प्लेटफार्म्स का उपयोग करते हैं और इनके द्वारा प्रसारित जानकारी को सत्य मान लेते हैं। ऐसी स्थिति में, बाहरी ताकतों द्वारा प्रसारित कोई भी असत्य या भ्रामक जानकारी सीधे तौर पर जनता की राय और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।</p>
<p><strong>मेक इन इंडिया का महत्व और गुणवत्ता का प्रश्न</strong></p>
<p>भारत में &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; और &#8220;आत्मनिर्भर भारत&#8221; जैसे अभियानों का उद्देश्य देश में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का निर्माण करना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। लेकिन जब बात सोशल नेटवर्किंग और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स की आती है, तो &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; की असल चुनौती यह होती है कि हमें केवल एक प्लेटफॉर्म बनाना नहीं है बल्कि उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरा उतारना है। कई लोग इस अभियान का समर्थन करते हैं, परन्तु कुछ ऐसे लोग भी हैं जो गुणवत्ता की अनदेखी करते हैं और दोयम दर्जे के उत्पाद पेश करते हैं। इस स्थिति में यह जरूरी है कि &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; का असली मतलब केवल &#8216;भारत में बना हुआ&#8217; नहीं बल्कि &#8216;उच्च गुणवत्ता का और सुरक्षित&#8217; हो।</p>
<p>उदाहरण के लिए, हाल ही में लॉन्च हुए कुछ भारतीय ऐप्स जैसे कि कू (Koo) और सांदेस को पर्याप्त समर्थन तो मिला है, लेकिन उनकी उपयोगिता और फीचर्स में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। यदि ये ऐप्स और प्लेटफॉर्म विदेशी प्लेटफार्म्स का उचित विकल्प बनना चाहते हैं, तो उन्हें वैश्विक मानकों के हिसाब से बनाना आवश्यक है।</p>
<p><strong>एफडीआई और डेटा सुरक्षा: एक अन्य चुनौती</strong></p>
<p>भारत में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) बढ़ने के कारण विदेशी टेक कंपनियों का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है। यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे रोजगार और तकनीकी ज्ञान की उपलब्धता में वृद्धि होती है। लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर समस्या यह भी है कि इन विदेशी कंपनियों के पास भारतीय उपभोक्ताओं का डेटा होता है, जिसे वे अपने हिसाब से उपयोग कर सकती हैं।</p>
<p>डेटा सुरक्षा के इस मुद्दे के कारण यह आवश्यक हो गया है कि भारत में ऐसे सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म्स का निर्माण किया जाए, जिनके डेटा स्टोरेज और गोपनीयता नीतियाँ पूरी तरह से भारतीय कानूनों के तहत संचालित हों। यह देश की संप्रभुता और जनता की गोपनीयता की रक्षा के लिए आवश्यक है। यदि भारत के पास अपने प्लेटफार्म होंगे, तो न केवल हमारा डेटा सुरक्षित रहेगा बल्कि बाहरी नियंत्रण का खतरा भी कम होगा।</p>
<p><strong>भारतीय सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म का निर्माण क्यों अनिवार्य है?</strong></p>
<p>भारत में डिजिटल स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित सोशल नेटवर्क प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप का निर्माण आवश्यक है। इससे देश के नागरिकों के पास अपनी स्वतंत्रता और गोपनीयता की रक्षा का साधन होगा।</p>
<p>वर्तमान में, भारतीय टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के पास पर्याप्त कौशल और संसाधन हैं, लेकिन उनका सही दिशा में उपयोग करने की आवश्यकता है। सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर एक ठोस नीति बनानी चाहिए, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स को विकास के लिए आर्थिक सहायता और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की जा सके।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष &#8220;एक आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम&#8221;</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>भारत के पास डिजिटल आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का यह एक सुनहरा अवसर है। इसके लिए आवश्यक है कि हम गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल सोशल नेटवर्किंग और मैसेजिंग प्लेटफार्म्स का निर्माण करें, जो विदेशी प्लेटफार्म्स का वास्तविक विकल्प बन सकें।</p>
<p>इस दिशा में सरकार को भी ऐसी नीतियाँ लागू करनी होंगी जो भारतीय कंपनियों को प्रोत्साहित करें और विदेशी कंपनियों के डेटा संग्रहण और उपयोग पर कड़ी निगरानी रखें।</p>
<p>यदि भारत इस लक्ष्य को हासिल करता है, तो यह न केवल देश के आर्थिक और राजनीतिक हितों की रक्षा करेगा बल्कि भारतीय समाज और लोकतंत्र के स्वतंत्रता की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा।</p>
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		<title>हमें ऐसा डिजिटल समाज बनाना है, जहां लाभ सभी को मिले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 02:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
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		<category><![CDATA[We have to create a digital society where everyone can benefit from technology - Prime Minister Narendra Modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत ने डिजिटल युग को आगे बढ़ाया: वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन में नई ऊँचाइयाँ नई दिल्ली, 16 अक्टूबर।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/create-digital-society-narendra-modi/">हमें ऐसा डिजिटल समाज बनाना है, जहां लाभ सभी को मिले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>भारत ने डिजिटल युग को आगे बढ़ाया: वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन में नई ऊँचाइयाँ</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 16 अक्टूबर। भारत की राजधानी नई दिल्ली ने अक्टूबर 2024 में दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार शिखर सम्मेलनों में से एक की मेजबानी की। यह सम्मेलन न केवल डिजिटल समावेश और तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम था, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति की दिशा में किए गए प्रयासों की भी एक अहम झलक पेश करता है। यह आयोजन 15 से 24 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 30 से अधिक देशों के प्रमुख नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और दूरसंचार विशेषज्ञ एक साथ आए हैं। इसका उद्देश्य था, वैश्विक स्तर पर डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना, नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करना और डिजिटल समावेश को साकार करना।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्घाटन भाषण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत की डिजिटल प्रगति और दूरसंचार क्षेत्र में देश की उभरती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अपने भाषण में कहा, &#8220;भारत 2025 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है, और इस प्रक्रिया में दूरसंचार क्षेत्र रीढ़ की हड्डी साबित होगा।&#8221; उन्होंने आगे यह भी उल्लेख किया कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जिससे आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक बन चुका है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत के डिजिटल परिवर्तन ने केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति के पास सुलभ और किफायती इंटरनेट हो। यह सम्मेलन उन वैश्विक सहयोगों को और मजबूत करेगा जो हमें इस लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>डिजिटल युग का नेतृत्व: 5जी और उससे आगे</strong></p>
<p>सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण 5जी और उससे आगे की तकनीकों पर केंद्रित था। 5जी नेटवर्क की तैनाती पर विशेषज्ञों की गहन चर्चा हुई, जिसमें यह विचार सामने आया कि भारत जल्द ही वैश्विक 5जी नवाचार का एक केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 5जी के तेजी से रोलआउट के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिल सके। उन्होंने कहा, &#8220;5जी के माध्यम से हम न केवल अपनी कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योगों में भी क्रांति लाएंगे।&#8221;</p>
<p>यह स्पष्ट है कि 5जी नेटवर्क के व्यापक उपयोग से स्मार्ट शहरों का विकास, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का व्यापक प्रसार, और स्वचालित उद्योगों का उभरना संभव होगा। इस संदर्भ में, मोदी सरकार ने फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के विस्तार और टावरों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की योजनाओं की भी घोषणा की, जिससे पूरे भारत में 5जी कनेक्टिविटी संभव हो सके।</p>
<p><strong>डिजिटल समावेश: ग्रामीण भारत तक इंटरनेट की पहुंच</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है डिजिटल समावेश, खासकर उन दूरदराज के क्षेत्रों में जहां पहले तक इंटरनेट की पहुंच सीमित थी। इस सम्मेलन में विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने इस पर चर्चा की कि किस तरह डिजिटल समावेश को और अधिक बढ़ावा दिया जा सकता है ताकि ग्रामीण और वंचित समुदायों को भी सस्ती और सुलभ इंटरनेट सेवाएँ प्राप्त हो सकें।</p>
<p>भारत सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ योजना ने अब तक 2 लाख से अधिक गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचा दी है। इस योजना के तहत अनेक पहलों को लागू किया गया है, जैसे ‘भारतनेट’, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच को सुनिश्चित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में कहा, &#8220;डिजिटल समावेश का मतलब है कि हर नागरिक को समान अवसर मिले, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से हो। इंटरनेट की शक्ति ने हमें यह अवसर प्रदान किया है कि हम सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक असमानताओं को कम कर सकें।&#8221;</p>
<p><strong>साइबर सुरक्षा की अहमियत</strong></p>
<p>जब डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो साइबर सुरक्षा की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। इस सम्मेलन में साइबर सुरक्षा पर भी गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा के लिए भारत ने कई मजबूत कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हमारे लिए नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।&#8221; भारत की सरकार ने इसके लिए अनेक नियम और नीतियाँ बनाई हैं, जिससे ऑनलाइन खतरों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p>विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि हर स्तर पर साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसमें उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग, साइबर हमलों से बचाव के लिए जागरूकता अभियानों का आयोजन, और साइबर सुरक्षा अनुसंधान को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p><strong>वैश्विक सहयोग और साझेदारी</strong></p>
<p>सम्मेलन में वैश्विक सहयोग की महत्ता पर भी जोर दिया गया। 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्राप्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में कहा, &#8220;डिजिटल परिवर्तन कोई अकेला राष्ट्र नहीं कर सकता। हमें एक वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें सभी देश एक साथ मिलकर काम करें।&#8221; उन्होंने ज्ञान साझाकरण और संयुक्त अनुसंधान पहलों की जरूरत पर जोर दिया, जिससे दुनिया के सभी हिस्सों में डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार हो सके।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल दृष्टिकोण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल युग को अपनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से सरकार ने देश के हर कोने में डिजिटल सेवाओं को पहुंचाने का काम किया है। वित्तीय लेन-देन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक, सभी क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति आई है। भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही है, जिसने डिजिटल भुगतान को आसान और सुलभ बनाया है।</p>
<p>मोदी ने इस अवसर पर कहा, &#8220;डिजिटल परिवर्तन केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, यह सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। हमने जो कदम उठाए हैं, वे न केवल भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण पेश करते हैं।&#8221;</p>
<p>भारत में डिजिटल युग का उदय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की डिजिटल क्रांति के प्रयासों ने इस वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बना दिया है। इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत ने दूरसंचार और डिजिटल विकास में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों ने न केवल देश की तकनीकी और आर्थिक क्षमताओं को उभारा है, बल्कि समाज के हर वर्ग को डिजिटल समावेश के माध्यम से सशक्त बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।</p>
<p>भारत अब वैश्विक स्तर पर एक डिजिटल पावरहाउस के रूप में उभर रहा है, जहाँ दूरसंचार क्षेत्र में नवाचार, सुरक्षा और समावेश को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के सबसे आगे बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करेगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/create-digital-society-narendra-modi/">हमें ऐसा डिजिटल समाज बनाना है, जहां लाभ सभी को मिले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकाला, फूड सेफ्टी टीम ने किया निरीक्षण</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/there-was-a-stir-in-atal-residential-school-due-to-worms-found-in-the-food-of-the-students-food-safety-team-did-the-inspection/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2024 03:29:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा, 09 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित अटल</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/there-was-a-stir-in-atal-residential-school-due-to-worms-found-in-the-food-of-the-students-food-safety-team-did-the-inspection/">अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकाला, फूड सेफ्टी टीम ने किया निरीक्षण</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा, 09 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित अटल आवासीय विद्यालय, मनकापुर में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकलने की घटना से विद्यालय में हड़कंप मच गया। यह घटना उस वक्त सामने आई जब छात्रों को नाश्ते में छोले परोसे जा रहे थे और उनमें से एक छात्र ने छोले में कीड़ा पाया। इस घटना के बाद छात्रों और उनके परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया।</p>
<p>रविवार की सुबह, मनकापुर के अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों को नाश्ते में छोले परोसे जा रहे थे। उसी दौरान एक छात्र ने अपने छोले में कीड़ा देखा, जिससे विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। छात्र ने तुरंत यह जानकारी अपने सहपाठियों और स्कूल के मेस इंचार्ज को दी। अन्य छात्रों ने भी खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की। कई छात्रों ने बताया कि वे छोले में कीड़ा देखने से पहले ही भोजन कर चुके थे। यह सुनकर मेस इंचार्ज ने तुरंत बचा हुआ खाना फिंकवा दिया।</p>
<p>घटना की जानकारी जैसे ही विद्यालय के प्रभारी प्रिंसिपल को मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए नाश्ते में परोसे गए छोले को फिंकवाने का आदेश दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि छोले में कीड़ा पाया गया था, और इसकी जानकारी मिलते ही सारे छोले को नष्ट करवा दिया गया।</p>
<p>इस घटना के बाद कुछ छात्रों के परिजन विद्यालय में पहुंचे और उन्होंने विद्यालय प्रशासन से भोजन की गुणवत्ता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। परिजनों का आरोप था कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पहले से ही खराब गुणवत्ता का होता है। बच्चों ने शिकायत की कि उनके दूध में पानी की मात्रा अधिक होती है और खाने की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं होती।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-3050 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery.jpg" alt="" width="1864" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery.jpg 1864w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-300x174.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-1024x593.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-768x445.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-1536x890.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1864px) 100vw, 1864px" /></p>
<p>एक छात्र ने बताया, &#8220;हमने छोले में कीड़ा पाया, इसलिए हममें से कुछ ने खाना नहीं खाया। लेकिन कई बच्चे पहले ही खाना खा चुके थे, और जब हमने मेस इंचार्ज को बताया, तब जाकर खाना फिंकवाया गया।&#8221; बच्चों ने यह भी बताया कि दूध में पानी मिलाने की शिकायत वे कई बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।</p>
<p><strong>जिलाधिकारी की त्वरित प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>इस पूरे मामले की जानकारी जैसे ही जिलाधिकारी गोंडा, नेहा शर्मा को मिली, उन्होंने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। जिलाधिकारी ने विद्यालय में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लिया और गोंडा से फूड सेफ्टी टीम को तुरंत विद्यालय भेजा। उन्होंने विद्यालय प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए कि इस मामले की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।</p>
<p>जिलाधिकारी ने कहा, &#8220;बच्चों के भोजन में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। हमने फूड सेफ्टी टीम को विद्यालय भेजा है और खाद्य सामग्री के नमूने लिए जा रहे हैं। विद्यालय में साफ-सफाई की भी जांच की जाएगी और सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।&#8221;</p>
<p><strong>फूड सेफ्टी टीम की जांच</strong></p>
<p>जिलाधिकारी के आदेश पर फूड सेफ्टी टीम ने तुरंत विद्यालय का दौरा किया। टीम ने विद्यालय के मेस का निरीक्षण किया और सफाई व्यवस्था पर निर्देश दिए। टीम ने सोया बड़ी, दाल और सब्जी के सैंपल भी लिए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके। फूड सेफ्टी टीम के एक अधिकारी ने बताया कि मौके पर तत्काल कुछ संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन सावधानी के तौर पर सभी खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।</p>
<p>फूड सेफ्टी अधिकारी ने कहा, &#8220;हमने विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता की जांच की और सफाई व्यवस्था के बारे में निर्देश दिए। हालांकि मौके पर कोई अन्य संदिग्ध वस्तु नहीं पाई गई, लेकिन हमने कुछ खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट जल्द ही उपलब्ध होगी। इसके अलावा, हम अब विद्यालय पर कड़ी निगरानी रखेंगे और नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे।&#8221;</p>
<p>इस घटना के बाद प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि विद्यालय में खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे और छात्रों को पोषक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।</p>
<p>विद्यालय में अब नियमित रूप से फूड सेफ्टी टीम के दौरे होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों को साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक भोजन परोसा जा रहा है। इसके अलावा, विद्यालय प्रशासन से कहा गया है कि वे मेस की सफाई और खाद्य सामग्री की जांच पर विशेष ध्यान दें और किसी भी तरह की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकलने की यह घटना प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों के भोजन में लापरवाही न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा और देखभाल के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है।</p>
<p>जिलाधिकारी नेहा शर्मा की त्वरित कार्रवाई और फूड सेफ्टी टीम के निरीक्षण से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और सफाई व्यवस्था को लेकर और भी सख्ती बरती जानी चाहिए। छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कि इस घटना के बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सफल होंगे, और छात्रों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
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		<title>सुयस की घर वापसी से परिवार में उल्लास का माहौल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Mar 2022 18:36:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>करनैलगंज, गोण्डा। शनिवार को नगर के गांधीनगर निवासी डाक्टर रमेश कुमार को जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पर यूक्रेन में करीब एक हफ्ते से फंसे डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे बेटे सुयस के विमान के लैंड करने की खबर मिली तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। नगर के तमाम लोग व रिश्तेदार सुयस की सकुशल घर वापसी पर शुभकामनाएं देते नजर आये।सुयश के वापस लौटने पर करनैलगंजके उप ज़िलाधिकारी, तहसीलदार एवं अन्य प्रसाशनिक अधिकारियों ने रास्ते में ही सुयश का फूल मालाओं से स्वागत किया पिता डाक्टर रमेश गुप्ता ने बताया कि युद्ध की दहशत तो पहले से ही थी। मगर विगत एक सप्ताह से हालात बद से बदतर हो गये थे। जिस फ्लैट में सुयस रहते थे उसी के सामने बंकर बनाया गया था। इनका फ्लैट क्यू सिटी से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर था। जैसे ही खतरे का आभास होता और सायरन बजता सभी बंकर में चले जाते। ऐसे में नींद भी ठीक से नहीं ले पा रहा था। 4 मार्च को जब सुयस को रोमानिया वार्डर पर लाया गया तो वापसी की उम्मीद जगी। सेलसिया हवाई अडडे से दिल्ली के लिये उड़ान भरने के बाद सुबह 4 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान ने लैंड किया। जहां से सरकार द्वारा वाहन उपलब्ध कराया गया। जिसमें करीब आधा दर्जन छात्रों को उनके घर छोड़ते हुए घर वापसी हो रही है। सुयस की मां ने बताया कि अब मेरा बेटा दहशत के माहौल से निकल चुका है। अब वह अपने वतन की आजाद धरती पर सांस ले पा रहा है।</p>
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