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	<title>High court Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महाराजगंज में बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Oct 2024 14:17:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बहराइच]]></category>
		<category><![CDATA[Bahraich]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow Bench of High Court stays bulldozer action in Maharajganj]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बहराइच 20 अक्टूबर। जिले के महाराजगंज क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई के मुद्दे पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/lucknow-bench-of-high-court-stays-bulldozer-action-in-maharajganj/">हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने महाराजगंज में बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>बहराइच 20 अक्टूबर। जिले के महाराजगंज क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई के मुद्दे पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है, जिसके तहत स्थानीय निवासियों के घरों और दुकानों को अतिक्रमण बताते हुए ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह कार्रवाई पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) की ओर से शुरू की गई थी, और इसके तहत कई घरों और दुकानों पर नोटिस चस्पा किए गए थे।</p>
<p>हाईकोर्ट ने इस मामले में पीड़ितों को राहत देते हुए उन्हें पीडब्ल्यूडी के नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। साथ ही, कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से यह भी स्पष्टीकरण मांगा है कि जिस सड़क के किनारे बसे घरों और दुकानों पर अतिक्रमण का आरोप लगाकर नोटिस जारी किया गया है, वह सड़क शहरी है, ग्रामीण है या राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग की श्रेणी में आती है।</p>
<p><strong>कोर्ट की रोक और अगली सुनवाई</strong></p>
<p>हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब पीड़ित परिवारों के पास 15 दिन का समय है जिसमें वे पीडब्ल्यूडी के नोटिस का जवाब दे सकते हैं और अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले की अगली सुनवाई तय समय के बाद की जाएगी, जिसमें पीडब्ल्यूडी को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह मामला तब सामने आया जब पीडब्ल्यूडी ने बहराइच के महाराजगंज क्षेत्र में 23 घरों और दुकानों को अतिक्रमण बताकर उनके मालिकों को तीन दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि यदि तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो पीडब्ल्यूडी खुद कार्रवाई करेगा और अतिक्रमण को हटा देगा। इसके लिए बुलडोजर का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस मुद्दे पर एक और बड़ा कदम तब उठाया गया जब पीडब्ल्यूडी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई। इस याचिका में पीड़ितों ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि पीडब्ल्यूडी की यह कार्रवाई अवैध और अनुचित है, और इससे स्थानीय निवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से निवेदन किया है कि बुलडोजर कार्रवाई पर स्थायी रोक लगाई जाए और स्थानीय निवासियों को न्याय दिया जाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस याचिका में बहराइच हिंसा से जुड़े तीन आरोपियों और उनके रिश्तेदारों ने हिस्सा लिया है। इनमें से एक याचिकाकर्ता मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद की बेटी है। उनका दावा है कि यह कार्रवाई उनके खिलाफ राजनीतिक और प्रशासनिक दुश्मनी के तहत की जा रही है, और उनके परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के ही निशाना बनाया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महाराजगंज के लोगों में डर और तनाव</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस बीच, महाराजगंज के लोगों में पीडब्ल्यूडी की इस कार्रवाई के चलते भय और तनाव का माहौल बन गया है। जैसे ही स्थानीय निवासियों को नोटिस प्राप्त हुआ, उन्होंने अपनी दुकानों और घरों को खाली करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने खुद ही अपने घरों को आंशिक रूप से तोड़ना शुरू कर दिया, ताकि यदि बुलडोजर से कार्रवाई की जाए तो उनके मकानों की सामग्री, जैसे ईंट और सरिया, मलबे में न मिल जाए और वे इन सामग्रियों का पुनः उपयोग कर सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कई दुकानदारों और घर मालिकों ने अपनी संपत्तियों से सामान निकाल लिया और अपने घरों को आंशिक रूप से गिरा दिया। उनका मानना है कि बुलडोजर की कार्रवाई में उनके मकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया जाएगा और वे अपना घर और संपत्ति पूरी तरह से खो देंगे। लोगों के बीच यह भी डर है कि अगर कार्रवाई होती है, तो मकानों में लगे महंगे निर्माण सामग्री भी बर्बाद हो जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रशासन का पक्ष</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके घर और दुकानें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाए गए हैं। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि यह सड़क एक मुख्य मार्ग है और इसे चौड़ा करने के लिए अतिक्रमण हटाना आवश्यक है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस अतिक्रमण के कारण सड़क यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही थी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, &#8220;हमने तीन दिन का समय दिया है ताकि लोग अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम सरकारी आदेशों के तहत कार्रवाई करेंगे और अतिक्रमण को हटाएंगे।&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा इस कार्रवाई पर रोक के बाद पीडब्ल्यूडी को अपने अगले कदम पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से यह भी पूछा है कि क्या यह सड़क शहरी क्षेत्र की है या फिर ग्रामीण इलाके की, क्योंकि इसके आधार पर कार्रवाई की वैधता तय की जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पीड़ितों की अपील</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>नोटिस पाने वाले पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इस स्थान पर रह रहे हैं और उनके पास जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज भी मौजूद हैं। कई परिवारों का दावा है कि उन्होंने अपने घर और दुकानें कानूनी रूप से खरीदी हैं और उनका अतिक्रमण से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि पीडब्ल्यूडी की यह कार्रवाई अचानक और बिना पूर्व सूचना के की जा रही है, जिससे उन्हें अपने मकानों और दुकानों को बचाने का कोई मौका नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन को उनकी समस्या सुननी चाहिए और इस मामले का हल निकालना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एक स्थानीय निवासी ने कहा, &#8220;हम यहां कई सालों से रह रहे हैं और कभी किसी ने हमें यह नहीं बताया कि हमारा घर अतिक्रमण है। अब अचानक हमें यह नोटिस मिला और कहा जा रहा है कि हमारे मकान को गिरा दिया जाएगा। हम कहां जाएंगे? हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा?&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजनीतिक प्रतिक्रिया</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस पूरे मामले ने राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया है। विपक्षी दलों ने इस मामले में सरकार और प्रशासन की आलोचना की है और इसे गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के खिलाफ अन्याय बताया है। कई विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस कार्रवाई को तुरंत रोके और पीड़ितों को न्याय दिलाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुश्मनी के तहत की जा रही है और प्रशासन ने बिना उचित जांच-पड़ताल के ही बुलडोजर चलाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि गरीबों और निम्न वर्ग के लोगों के घरों को इस तरह से गिराना अत्याचार है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>निष्कर्ष</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश से फिलहाल बहराइच के महाराजगंज क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लग गई है। कोर्ट ने पीड़ितों को राहत देते हुए 15 दिन का समय दिया है ताकि वे पीडब्ल्यूडी के नोटिस का जवाब दे सकें। साथ ही कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी से जवाब मांगा है कि सड़क की स्थिति और श्रेणी स्पष्ट की जाए। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अब यह देखना बाकी है कि इस मामले का अंतिम फैसला क्या होता है और पीडब्ल्यूडी और पीड़ितों के बीच विवाद कैसे सुलझता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>चूहों द्वारा सबूत नष्ट: पुलिस व्यवस्था की खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/rats-destroy-evidence-high-court-makes-strong-comments-on-flaws-in-police-system/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Oct 2024 17:57:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Rats destroy evidence: High Court makes strong comments on flaws in police system]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हाईकोर्ट की गंभीर चिंता: &#8216;मालखानों&#8217; की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर पुलिस को निर्देश नई दिल्ली, 11 अक्टूबर।</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>हाईकोर्ट की गंभीर चिंता: &#8216;मालखानों&#8217; की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर पुलिस को निर्देश</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों के मालखानों की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इन मालखानों में अभियोजन पक्ष के लिए जब्त किए गए साक्ष्यों को संग्रहीत किया जाता है, जिनका ठीक प्रकार से रखरखाव न होने की वजह से कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो रहे हैं। हाल ही में एक घटना में, विजय नगर पुलिस थाने में जमा किए गए विसरा के नमूने चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए, जिसके बाद पुलिस यह रिपोर्ट नहीं प्राप्त कर सकी कि नमूने में किसी भी तरह के रासायनिक या जैविक परिवर्तन हुए हैं या नहीं। इस घटना ने न्यायालय को चौंका दिया और पुलिस मालखानों की सुरक्षा एवं व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।</p>
<p><strong>हाईकोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया: साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश</strong></p>
<p>यह मामला तब प्रकाश में आया जब विजय नगर पुलिस ने अदालत में यह बयान दिया कि एक गैर इरादतन हत्या के मामले से संबंधित विसरा रखने के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के डिब्बे बारिश के दौरान चूहों द्वारा क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस घटना के चलते पुलिस किसी भी तरह की हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट प्राप्त करने में असमर्थ रही। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी बताया कि 28 अन्य नमूने भी चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए थे। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि यह घटना पुलिस की लापरवाही को उजागर करती है और मालखानों में रखे गए महत्वपूर्ण सबूतों की सुरक्षा में गंभीर खामियां हैं।</p>
<p><strong>मालखानों की दयनीय स्थिति पर कोर्ट की चिंता</strong></p>
<p>जस्टिस अभ्यंकर की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि &#8220;इस न्यायालय का यह विचार है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान जब्त सामग्री की सुरक्षा के लिए सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखना चाहिए था।&#8221; उन्होंने यह भी जोड़ा कि, &#8220;भले ही चूहों द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए सबूतों को अब बचाया नहीं जा सकता, लेकिन यह घटना राज्य के पुलिस थानों में सबूतों के रखरखाव की दयनीय स्थिति को उजागर करती है।&#8221; विशेष रूप से इंदौर के विजय नगर पुलिस स्टेशन, जो शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख पुलिस थानों में से एक है, वहां भी ऐसी घटनाएं हुईं, जो दर्शाती हैं कि राज्य के अन्य छोटे पुलिस थानों की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।</p>
<p><strong>मालखानों के रखरखाव की जरूरत: हाईकोर्ट ने दी सख्त हिदायतें</strong></p>
<p>हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी पुलिस थानों के मालखानों की स्थिति की जाँच करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जस्टिस अभ्यंकर ने कहा कि, &#8220;इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सभी पुलिस थानों के मालखानों की समय-समय पर जांच और उन्हें ठीक से अपडेट रखना आवश्यक है।&#8221; इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य भर के सभी पुलिस थानों में एक वेब लिंक उपलब्ध कराया जाए, जहां मालखाने की नवीनतम सूची और उनकी स्थिति को हर महीने अपडेट किया जाए। इस कदम से पुलिस अधिकारी मालखानों के रखरखाव के प्रति सतर्क रहेंगे और सबूतों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे।</p>
<p><strong>सबूत नष्ट होने पर शुरू की गई विभागीय जांच</strong></p>
<p>विजय नगर पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पूर्व अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच इस बात का पता लगाएगी कि आखिरकार मालखानों में इस तरह की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई और किसकी लापरवाही से चूहे सबूत नष्ट कर पाए। पुलिस ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, खासकर मालखानों से सामान को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने के दौरान।</p>
<p><strong>मालखानों का महत्व: साक्ष्यों की सुरक्षा क्यों है महत्वपूर्ण?</strong></p>
<p>मालखाने पुलिस थानों के उन स्थानों को कहा जाता है, जहां जांच के दौरान जब्त किए गए साक्ष्यों को रखा जाता है। यह सबूत अपराध की जांच और अभियोजन में अहम भूमिका निभाते हैं। इन सबूतों के आधार पर ही अदालत में आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध किए जाते हैं या उसे दोषमुक्त किया जाता है। इसलिए, मालखानों का उचित रखरखाव और उसमें रखे गए साक्ष्यों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p>यदि मालखानों में रखे गए साक्ष्यों का ठीक से रखरखाव नहीं किया जाता है, तो वे नष्ट हो सकते हैं या उनमें परिवर्तन हो सकते हैं, जिससे जांच और अभियोजन दोनों ही प्रभावित होते हैं। इस मामले में, चूहों द्वारा विसरा के नमूनों को नष्ट किया जाना न केवल एक लापरवाही का मामला है, बल्कि यह अभियोजन के पूरे ढांचे को कमजोर कर सकता है।</p>
<p><strong>विजय नगर पुलिस थाने में घटना: क्या हुआ था?</strong></p>
<p>विजय नगर पुलिस ने एक गैर इरादतन हत्या के मामले की जांच के दौरान मृतक का विसरा जब्त किया था। विसरा को एक प्लास्टिक के डिब्बे में रखकर मालखाने में सुरक्षित रखा गया था। लेकिन बारिश के दौरान चूहों ने डिब्बे को काट दिया और विसरा के नमूने को नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट प्राप्त करने में विफल रही, जो इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता था।</p>
<p>इसके अलावा, पुलिस ने यह भी बताया कि इस घटना में कुल 28 नमूने चूहों द्वारा नष्ट कर दिए गए थे। इन नमूनों में विभिन्न प्रकार के सबूत शामिल थे, जो कई मामलों में अभियोजन के लिए आवश्यक थे। इस घटना ने पुलिस थानों के मालखानों में रखे गए साक्ष्यों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>चूहों का प्रकोप और मालखानों की संरचना की खामियां</strong></p>
<p>यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि पुलिस थानों के मालखानों की संरचना में गंभीर खामियां हैं। मालखानों का ठीक से रखरखाव न होना, वहां की सफाई व्यवस्था का अभाव और सुरक्षा मानकों का पालन न करना, ऐसे कारण हैं जिनके चलते चूहे जैसे जीव आसानी से वहां घुसपैठ कर सकते हैं और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं।</p>
<p>विजय नगर पुलिस स्टेशन, जो इंदौर के सबसे व्यस्त पुलिस थानों में से एक है, वहां भी इस तरह की घटना होना दर्शाता है कि राज्य के अन्य छोटे पुलिस थानों में मालखानों की स्थिति और भी दयनीय हो सकती है। मालखानों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए पुलिस को ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।</p>
<p><strong>न्यायालय का निर्देश: राज्यभर के मालखानों की जांच का आदेश</strong></p>
<p>इस घटना के बाद न्यायालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि राज्य के सभी पुलिस थानों के मालखानों की जांच की जाए। न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि मालखानों में रखे गए साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, मालखानों की स्थिति की नियमित रूप से जांच हो और उनकी स्थिति को अपडेट किया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<p><strong>मालखानों की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक कदम</strong></p>
<p>मालखानों की स्थिति सुधारने के लिए पुलिस को कई आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है। सबसे पहले, मालखानों की संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि वहां चूहों या अन्य जीवों का प्रवेश न हो सके। इसके अलावा, मालखानों की नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए और वहां रखे गए साक्ष्यों की स्थिति का समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए।</p>
<p>पुलिस को साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल करना चाहिए। उदाहरण के लिए, साक्ष्यों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड और ट्रैक किया जा सकता है, ताकि किसी भी प्रकार के नुकसान की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। मालखानों में साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार के स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो नमी, तापमान और अन्य बाहरी कारकों से साक्ष्यों को सुरक्षित रख सकें।</p>
<p><strong>साक्ष्यों की सुरक्षा पर जोर</strong></p>
<p>मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह निर्णय राज्य के पुलिस थानों में साक्ष्यों की सुरक्षा और मालखानों के रखरखाव के महत्व को दर्शाता है। साक्ष्य किसी भी मामले की नींव होते हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस और न्यायिक प्रणाली के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>यह घटना पुलिस की लापरवाही और मालखानों की खराब स्थिति को उजागर करती है, जिसे सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rats-destroy-evidence-high-court-makes-strong-comments-on-flaws-in-police-system/">चूहों द्वारा सबूत नष्ट: पुलिस व्यवस्था की खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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			</item>
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		<title>न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Sep 2024 01:32:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
		<category><![CDATA[New delhi]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Trendings]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/judge-called-pakistan-a-muslim-dominated-area-expressed-regret-after-taking-cognizance-of-supreme-court/">न्यायाधीश ने मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को बताया पाकिस्तान, सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद जताया खेद</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 25 सितंबर। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव-स्ट्रीम की गई अदालती कार्यवाही के वीडियो के उपयोग और अपलोडिंग पर रोक लगाते हुए एक अंतरिम आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8211; फेसबुक, एक्स और यूट्यूब को निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा ऐसे वीडियो अपलोड करने की अनुमति नहीं देने और पहले अपलोड किए गए वीडियो को हटाने का निर्देश दिया। यह आदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद की विवादास्पद टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें बेंगलुरु में एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र को पाकिस्तान के रूप में संदर्भित किया गया था और एक महिला वकील के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। उनकी टिप्पणी का वीडियो क्लिप वायरल हो गया था। न्यायाधीश की टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए, पांच न्यायाधीशों वाली सुप्रीम कोर्ट पीठ ने शुक्रवार को हाई कोर्ट से रिपोर्ट मांगी और चेतावनी दी कि &#8220;हम पर नजर रखी जा रही है&#8221;, सीजेआई ने न्यायाधीशों से संयम से काम लेने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखने और उन्हें सार्वजनिक उपहास से बचाने में मदद करने के लिए दिशानिर्देश बनाने पर विचार करेगा। जस्टिस श्रीशानंद ने शनिवार को कोर्ट में अपनी टिप्पणी पर खेद जताया था। हालाँकि, न्यायमूर्ति चंदनगौदर ने अपने अंतरिम आदेश में बताया कि अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग को रोकना दुरुपयोग को रोकने का समाधान नहीं था, जैसा कि याचिकाकर्ता, बेंगलुरु के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने तर्क दिया था।  एसोसिएशन ने दावा किया कि शरारती तत्व नियमों का उल्लंघन करते हुए शरारती एजेंडे के साथ अदालती कार्यवाही के लाइव-स्ट्रीम किए गए वीडियो को संपादित कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि इन क्लिपों तक पहुंचने वाले लोगों को उचित कानूनी ज्ञान के बिना आंशिक रूप से देखने के बाद अदालती कार्यवाही और न्यायपालिका के बारे में गलत राय बनाने के लिए गुमराह किया गया था।</p>
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		<title>हाई कोर्ट ने दिया सुझाव गाय घोषित हो राष्ट्रीय पशु</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Sep 2021 14:42:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Cow]]></category>
		<category><![CDATA[High court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>प्रयागराज (अतुल यादव) 1 सितंबर। उत्तर प्रदेश में गायों की हालत को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rashtriya-pashu/">हाई कोर्ट ने दिया सुझाव गाय घोषित हो राष्ट्रीय पशु</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रयागराज (अतुल यादव) 1 सितंबर। उत्तर प्रदेश में गायों की हालत को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है और केंद्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-455" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2021/09/images-5-300x220.jpeg" alt="" width="300" height="220" /></p>
<p>हाईकोर्ट ने एक प्रकरण में सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को संसद में बिल लाकर गायों को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने का सुझाव दिया है अपने निर्णय के दौरान हाईकोर्ट ने कहा है कि जब गायों का कल्याण होगा तभी देश का कल्याण होगा गाय भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है गाय को लेकर संसद जो भी कानून बनाए उसका सख्ती से पालन हो और उस पर सख्ती से अमल भी कराया जाए कॉउ स्लॉटर एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई करते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच ने  यह टिप्पणी की है</p>
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