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	<title>#goodmorning Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>गोण्डा में धान खरीद की समीक्षा एवं गेहूँ खरीद की तैयारियों का जायजा: जिलाधिकारी ने दिए निर्देश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Mar 2025 13:06:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा, 07 मार्च 2025। जिलाधिकारी / सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, देवीपाटन सम्भाग, गोण्डा द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में मण्डलीय एवं</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा, 07 मार्च 2025। जिलाधिकारी / सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, देवीपाटन सम्भाग, गोण्डा द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में मण्डलीय एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वर्ष 2024-25 के अंतर्गत धान खरीद की समीक्षा की गई, साथ ही वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित गेहूँ खरीद की तैयारियों का भी व्यापक जायजा लिया गया। बैठक में देवीपाटन सम्भाग के जनपद गोण्डा, बलरामपुर, बहराइच एवं श्रावस्ती के क्रय केंद्रों की स्थिति पर विशेष चर्चा की गई।</p>
<p><strong>धान खरीद के आंकड़े और प्रेषण की स्थिति</strong></p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि सम्भाग में कुल 304 धान क्रय केंद्रों का संचालन किया गया, जिनके लिए 3,47,000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित था। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 114.40 प्रतिशत यानी 3,97,078.39 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। यह धान 47,566 किसानों से खरीदा गया, जिससे किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ मिला।</p>
<p>धान खरीद के पश्चात चावल मिलों को अनिवार्य प्रेषण की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से जारी है। कुल खरीदी गई धान की मात्रा 3,97,078.39 मीट्रिक टन में से 3,82,571.95 मीट्रिक टन (96.35 प्रतिशत) धान चावल मिलों को भेजा जा चुका है, जबकि मात्र 14,506.44 मीट्रिक टन धान अभी भी प्रेषण हेतु शेष है।</p>
<p>धान से चावल उत्पादन के बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) में प्रेषण किए जाने वाले चावल की मात्रा भी संतोषजनक रही। कुल देय सीएमआर (Custom Milled Rice) 2,68,702.95 मीट्रिक टन में से 2,49,938.26 मीट्रिक टन (93.02 प्रतिशत) चावल एफसीआई को प्रेषित किया जा चुका है, जबकि 18,764.69 मीट्रिक टन सीएमआर का प्रेषण अभी लंबित है।</p>
<p><strong>किसानों को भुगतान की स्थिति</strong></p>
<p>धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसानों के भुगतान को प्राथमिकता दी गई। बैठक में जानकारी दी गई कि कुल 3,97,078.39 मीट्रिक टन धान की खरीद के एवज में किसानों को कुल 92,122.19 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था। अब तक 91,790.94 लाख रुपये (99.64 प्रतिशत) की धनराशि किसानों के खातों में पीएफएमएस (Public Financial Management System) के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। शेष किसानों का भुगतान भी प्रक्रिया में है और इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन किसानों का भुगतान तकनीकी कारणों से रुका हुआ है, उन्हें तत्काल बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान कराया जाए। विशेष रूप से आधार सीडिंग, एनपीसीआई लिंकिंग, एवं क्रेडिट लिमिट जैसी समस्याओं का समाधान कर तीन दिवस के भीतर शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p><strong>रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ खरीद की तैयारियाँ</strong></p>
<p>बैठक में आगामी रबी विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत गेहूँ खरीद की तैयारियों का भी जायजा लिया गया। इस वर्ष गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 150 रुपये अधिक है। किसानों को इस मूल्य पर अधिकाधिक लाभ पहुँचाने के लिए गेहूँ क्रय केंद्रों की स्थापना एवं व्यवस्थाओं को समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p>इस वर्ष जनपद गोण्डा में खाद्यायुक्त कार्यालय द्वारा 118 गेहूँ क्रय केंद्रों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से 113 केंद्रों को अनुमोदन मिल चुका है। अन्य जनपदों में बलरामपुर में 68 निर्धारित क्रय केंद्रों में से 57, बहराइच में 172 निर्धारित केंद्रों में से 181 तथा श्रावस्ती में 47 निर्धारित केंद्रों में से सभी 47 गेहूँ क्रय केंद्रों का अनुमोदन किया जा चुका है। कुल मिलाकर देवीपाटन सम्भाग में 405 निर्धारित गेहूँ क्रय केंद्रों के सापेक्ष 398 केंद्रों को अनुमोदन प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>किसानों का पंजीकरण एवं सत्यापन की स्थिति</strong></p>
<p>गेहूँ खरीद प्रक्रिया में किसानों के पंजीकरण एवं सत्यापन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बैठक में बताया गया कि अब तक सम्भाग में कुल 18,499 किसानों ने गेहूँ विक्रय हेतु पंजीकरण कराया है, जिनमें से मात्र 2,222 किसानों का सत्यापन पूरा हो सका है।</p>
<p><strong>गोण्डा</strong>: 3,326 किसानों के पंजीकरण के सापेक्ष 387 किसानों का सत्यापन</p>
<p><strong>बलरामपुर</strong>: 643 किसानों के पंजीकरण के सापेक्ष 135 किसानों का सत्यापन</p>
<p><strong>बहराइच</strong>: 13,847 किसानों के पंजीकरण के सापेक्ष 1,562 किसानों का सत्यापन</p>
<p><strong>श्रावस्ती</strong>: 683 किसानों के पंजीकरण के सापेक्ष 138 किसानों का सत्यापन</p>
<p>शेष किसानों का सत्यापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) एवं अपर जिलाधिकारी (एडीएम) स्तर पर प्रक्रियाधीन है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सत्यापन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए ताकि किसानों को बिना किसी विलंब के गेहूँ विक्रय का अवसर मिले।</p>
<p><strong>गेहूँ खरीद के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ</strong></p>
<p>बैठक में गेहूँ खरीद को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। देवीपाटन सम्भाग के सभी जनपदों में गेहूँ खरीद हेतु कुल 5,533 पीपी बोरे (Polypropylene Bags) उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त अनुमोदित गेहूँ क्रय केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा भी की गई।</p>
<p>मण्डी सचिव को निर्देश दिए गए कि सभी गेहूँ क्रय केंद्रों पर तौल मशीन, नमी मापक यंत्र, इलेक्ट्रॉनिक तौल काँटे, छायायुक्त स्थल एवं पेयजल व्यवस्था आदि को समय से पहले सुनिश्चित कराया जाए।</p>
<p>इसके अलावा, अधिक से अधिक किसानों को गेहूँ विक्रय हेतु प्रोत्साहित करने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि गेहूँ खरीद प्रक्रिया की जानकारी किसानों तक पहुँचाई जाए और उनके पंजीकरण की संख्या में वृद्धि की जाए।</p>
<p><strong>बैठक के प्रमुख निर्देश एवं निष्कर्ष</strong></p>
<p><strong>1. धान खरीद के शेष स्टॉक का शीघ्र निस्तारण:</strong> अवशेष धान का शत-प्रतिशत प्रेषण एवं सीएमआर की आपूर्ति शीघ्र पूर्ण की जाए।</p>
<p><strong>2. किसानों के भुगतान में तेजी:</strong> लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण कर किसानों को तीन दिवस के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।</p>
<p><strong>3. गेहूँ खरीद केंद्रों की तैयारियाँ:</strong> सभी अनुमोदित गेहूँ क्रय केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएँ समय से पूर्व पूर्ण की जाएं।</p>
<p><strong>4. किसानों के पंजीकरण में वृद्धि:</strong> प्रचार-प्रसार बढ़ाकर अधिकाधिक किसानों को गेहूँ विक्रय हेतु पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए।</p>
<p><strong>5. सत्यापन प्रक्रिया में तेजी:</strong> पंजीकृत किसानों का सत्यापन शीघ्र पूरा कर गेहूँ खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाया जाए।</p>
<p>बैठक में सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, मण्डी सचिव, सहकारिता विभाग के अधिकारी, सम्बन्धित एसडीएम, एडीएम एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>डीएम नेहा शर्मा की संवेदनशीलता से पांच साल का संघर्ष समाप्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Dec 2024 08:48:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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		<category><![CDATA[#goodmorning]]></category>
		<category><![CDATA[Five years of struggle ended due to the sensitivity of DM Neha Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 23 दिसंबर। जिले में डीएम नेहा शर्मा की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से ग्राम बहलोलपुर की शिवकुमारी</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 23 दिसंबर। जिले में डीएम नेहा शर्मा की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से ग्राम बहलोलपुर की शिवकुमारी देवी का घर पांच साल बाद रोशन हो गया। यह घटना प्रशासनिक तत्परता और आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण है। शिवकुमारी देवी, जो 2019 से बिजली कनेक्शन की समस्या से जूझ रही थीं, अंततः जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से न्याय पाने में सफल रहीं।</p>
<p><strong>पांच वर्षों की लंबी लड़ाई</strong></p>
<p>शिवकुमारी देवी ने 17 जुलाई 2018 को एक किलोवाट बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिजली विभाग ने पास के विद्युत पोल से उनके घर तक तार खींचकर कनेक्शन जोड़ा और आपूर्ति शुरू की। लेकिन, स्थानीय विवाद के कारण यह प्रयास विफल हो गया। पड़ोस के एक परिवार ने उनके घर तक खींचे गए तारों को काट दिया और आपूर्ति ठप कर दी।</p>
<p>शिवकुमारी और उनके परिवार ने कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों से अपनी समस्या के समाधान की गुहार लगाई। लेकिन उनकी शिकायतें हर बार अनसुनी कर दी गईं। वर्षों तक अंधेरे में रहने के बावजूद उनकी उम्मीदें बनी रहीं।</p>
<p><strong>जिलाधिकारी की हस्तक्षेप से मिली राहत</strong></p>
<p>हाल ही में, यह मामला जिलाधिकारी नेहा शर्मा के संज्ञान में आया। डीएम ने तुरंत इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और बिजली विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिवकुमारी के घर तक बिजली कनेक्शन जल्द से जल्द बहाल किया जाए। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इस मामले में कोई देरी न हो और पीड़िता को न्याय मिले।</p>
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<p><strong>बिजली विभाग की त्वरित कार्रवाई</strong></p>
<p>डीएम के निर्देश के बाद, बिजली विभाग की टीम ने विवादित स्थल से हटकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिवकुमारी देवी के घर तक नई लाइन खींची और बिजली आपूर्ति शुरू कर दी। इस त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप, पांच साल से अंधेरे में रहने वाला शिवकुमारी का घर रोशनी से भर गया।</p>
<p><strong>पीड़ित परिवार का आभार</strong></p>
<p>शिवकुमारी देवी के पुत्र अवनीश तिवारी ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, &#8220;पांच साल से हम अंधेरे में जी रहे थे। कई बार अधिकारियों के पास गए, लेकिन किसी ने हमारी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। जिलाधिकारी ने हमारी बात सुनी और तुरंत मदद की। आज हमारा घर रोशनी से भर गया है। हम उनके आभारी हैं।&#8221;</p>
<p>अवनीश के अनुसार, डीएम नेहा शर्मा न केवल एक प्रशासनिक अधिकारी हैं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझने वाली संवेदनशील शख्सियत भी हैं। उनकी सक्रियता ने यह साबित कर दिया कि प्रशासन जब चाहे, तो आमजन की समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी हो सकता है।</p>
<p><strong>डीएम नेहा शर्मा का बयान</strong></p>
<p>डीएम नेहा शर्मा ने कहा, &#8220;प्रत्येक नागरिक को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना हमारा दायित्व है। बिजली जैसी आवश्यक सेवा से किसी को वंचित रखना अनुचित है। जैसे ही मामला मेरे संज्ञान में आया, मैंने संबंधित विभाग को तुरंत निर्देशित किया। इस तरह की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।&#8221;</p>
<p><strong>अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक उदाहरण</strong></p>
<p>डीएम नेहा शर्मा की त्वरित कार्रवाई ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक मिसाल पेश की है। यह घटना न केवल उनकी कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जब अधिकारी जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं, तो परिणाम कैसे सकारात्मक होते हैं।</p>
<p><strong>स्थानीय विवाद का अंत</strong></p>
<p>शिवकुमारी के मामले में स्थानीय विवाद भी एक बड़ी बाधा थी। पड़ोसियों द्वारा बार-बार तार काटने और आपूर्ति रोकने से समस्या बढ़ती रही। लेकिन जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद, विवाद समाप्त हो गया। बिजली विभाग ने नई लाइन खींचकर विवादित स्थल से हटकर समाधान निकाला।</p>
<p><strong>बिजली विभाग की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>बिजली विभाग के अधिकारियों ने भी डीएम के निर्देश पर तुरंत कार्रवाई करते हुए यह सुनिश्चित किया कि समस्या का समाधान प्रभावी और स्थायी रूप से हो। विभाग ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों को प्राथमिकता के साथ हल किया जाएगा।</p>
<p><strong>घटना का व्यापक प्रभाव</strong></p>
<p>यह घटना गोंडा जिले में प्रशासनिक प्रणाली की प्रभावशीलता और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही को उजागर करती है। शिवकुमारी देवी का मामला उन सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p><strong>जिलाधिकारी ने बढ़ाया प्रशासन पर विश्वास</strong></p>
<p>जिलाधिकारी नेहा शर्मा की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने न केवल शिवकुमारी देवी के जीवन को बदला, बल्कि यह भी साबित किया कि प्रशासनिक मशीनरी में अभी भी बदलाव लाने की क्षमता है। ऐसे प्रयास जनता का विश्वास बढ़ाने में मददगार होते हैं।</p>
<p>इस घटना के बाद, डीएम ने यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई है कि जिले में बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने बिजली विभाग को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की निगरानी की जाए और जनता को राहत दी जाए।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा की जिलाधिकारी नेहा शर्मा की सक्रियता और संवेदनशीलता ने एक बार फिर यह साबित किया कि जब प्रशासन जनता के साथ खड़ा होता है, तो बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। पांच वर्षों तक बिजली के लिए संघर्ष करने वाली शिवकुमारी देवी के घर रोशनी पहुंचाने का यह मामला प्रशासनिक कर्तव्यनिष्ठा और जनसेवा का आदर्श उदाहरण बन गया है।</p>
<p>इस घटना ने न केवल शिवकुमारी देवी के जीवन को बदला, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जब जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाती है, तो प्रशासनिक व्यवस्था समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा का यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।</p>
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		<title>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/rss-chief-mohan-bhagwat-rising-cases-of-radicalism-in-the-country-a-worrying-trend/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 01:07:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[RSS chief Mohan Bhagwat: Rising cases of radicalism in the country a worrying trend]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: &#8220;हमें बांग्लादेश में हुई हिंसा से सबक लेना चाहिए&#8221; नई दिल्ली 13 अक्टूबर। हाल</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rss-chief-mohan-bhagwat-rising-cases-of-radicalism-in-the-country-a-worrying-trend/">आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: &#8220;हमें बांग्लादेश में हुई हिंसा से सबक लेना चाहिए&#8221;</strong></p>
<p>नई दिल्ली 13 अक्टूबर। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने समाज और राष्ट्र को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने बांग्लादेश में हो रही हिंसात्मक घटनाओं की ओर संकेत करते हुए इसे देश और समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया। भागवत ने अपने विचारों में समाज के सजग होने और अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को बाहरी चुनौतियों और खतरे के प्रति सतर्क रहना चाहिए और जब तक प्रशासनिक सहायता नहीं आती, तब तक अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।</p>
<p><strong>हिंसा का संदर्भ और उसका समाज पर असर</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का ज़िक्र किया और कहा कि इन घटनाओं से हमें सावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करती हैं, और इसका सीधा असर समाज पर पड़ता है। प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह ऐसी घटनाओं को रोके, दोषियों को गिरफ्तार करे और उन्हें उचित दंड दे, लेकिन जब तक प्रशासन अपनी कार्रवाई नहीं करता, तब तक समाज को खुद ही अपनी और अपनी संपत्ति की सुरक्षा करनी होगी। भागवत के अनुसार, समाज को हर समय सजग और संगठित रहना चाहिए ताकि इस प्रकार की घटनाओं से निपटा जा सके।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;ऐसी घटनाओं को रोकना और दोषियों को तुरंत नियंत्रित करना और उन्हें दंडित करना प्रशासन का काम है। लेकिन जब तक वे नहीं आ जाते, तब तक समाज को खुद की और अपनी संपत्ति की रक्षा करनी होगी और अपने प्रियजनों की जान की भी रक्षा करनी होगी।&#8221;</p>
<p><strong>डराने या लड़ाई भड़काने का इरादा नहीं</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य डराने या किसी प्रकार की लड़ाई भड़काने का नहीं है, बल्कि वे समाज को जागरूक और सतर्क करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम सभी एक कठिन स्थिति का सामना कर रहे हैं, जिसमें समाज की सजगता और आपसी सहयोग की आवश्यकता है। देश की एकता, खुशी, शांति और मजबूती के लिए सभी नागरिकों को अपना योगदान देना चाहिए, विशेषकर हिंदू समाज की जिम्मेदारी अधिक है। भागवत ने कहा, &#8220;हम सभी ऐसी स्थिति का अनुभव कर रहे हैं। देश को एकजुट, खुशहाल, शांतिपूर्ण और मजबूत बनाना सभी की जिम्मेदारी है। हिंदू समाज की जिम्मेदारी अधिक है।&#8221;</p>
<p><strong>बांग्लादेश में हिंदू उत्पीड़न का मुद्दा</strong></p>
<p>आरएसएस प्रमुख ने बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के उत्पीड़न का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक बन चुके हैं और उन्हें भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। भागवत ने भारतीय सरकार और विश्वभर के हिंदू समुदाय से अपील की कि वे बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार हो रहे हिंदुओं की मदद करें।</p>
<p>उनका मानना है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को संरक्षण की आवश्यकता है और इसके लिए भारत समेत पूरे विश्व के हिंदुओं को आगे आना चाहिए। भागवत ने इस बात पर बल दिया कि हमें बांग्लादेश में हो रहे हिंदू विरोधी हिंसा से सबक लेना चाहिए और समाज को अपने स्तर पर भी संगठित होकर काम करना चाहिए।</p>
<p><strong>कट्टरता और हिंसा में वृद्धि</strong></p>
<p>भागवत ने देश में कट्टरता के बढ़ते मामलों का ज़िक्र करते हुए इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति बताया। उन्होंने कहा कि बिना किसी कारण के कट्टरता को बढ़ावा देने वाली घटनाओं में अचानक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे समाज में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।</p>
<p>हालांकि उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंसा का सहारा लेना, किसी विशेष समुदाय पर हमला करना या भय पैदा करने की कोशिश करना गुंडागर्दी है और इसका कोई औचित्य नहीं है। भागवत ने यह भी कहा कि हिंसा का विरोध करने और अपने विचार व्यक्त करने के लोकतांत्रिक तरीके हैं, जिन्हें अपनाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक मार्क्सवाद और &#8220;वोकिज्म&#8221; का ख़तरा</strong></p>
<p>भागवत ने अपने वक्तव्य में सांस्कृतिक मार्क्सवाद और &#8220;वोकिज्म&#8221; जैसे विषयों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि आजकल इन विषयों पर बहुत चर्चा हो रही है, और इनकी विचारधाराएं समाज की सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, &#8220;डीप स्टेट&#8221;, &#8220;वोकिज्म&#8221; और &#8220;सांस्कृतिक मार्क्सवाद&#8221; आजकल चर्चा के विषय हैं। वास्तव में, वे सभी सांस्कृतिक परंपराओं के घोषित दुश्मन हैं।&#8221;</p>
<p>भागवत ने कहा कि ये विचारधाराएं समाज के मूल्यों, परंपराओं और पुण्य माने जाने वाले सिद्धांतों का विनाश करना चाहती हैं। ऐसे में समाज को इनके खिलाफ सजग होना चाहिए और इनके दुष्प्रभाव से बचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सकारात्मक आख्यान बनाने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते खतरे</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि इन विचारधाराओं का प्रभाव शैक्षणिक संस्थानों पर भी पड़ रहा है, जहां इन विकृत विचारों को छात्रों के बीच फैलाया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि शैक्षणिक संस्थान समाज को जागरूक और शिक्षित करने का स्थान होना चाहिए, लेकिन कुछ तत्व इन संस्थानों का उपयोग अपने राजनीतिक और वैचारिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।</p>
<p>भागवत ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में पनप रही इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए हमें सजग होना चाहिए और समाज को इन विकृत विचारधाराओं से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विचारों ने समाज और राष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर एक गहरा विचार-विमर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों से लेकर देश में कट्टरता और सांस्कृतिक विनाश की ओर बढ़ती प्रवृत्तियों पर खुलकर अपने विचार रखे। भागवत ने अपने वक्तव्य में समाज को जागरूक, संगठित और सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा का सहारा लेने के बजाय समाज को लोकतांत्रिक और कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात को सामने रखना चाहिए।</p>
<p>भागवत का संदेश स्पष्ट है कि समाज को अपने मूल्यों और परंपराओं की रक्षा के लिए सजग रहना चाहिए और इन विकृत विचारधाराओं से लड़ने के लिए संगठित होना चाहिए। उन्होंने देश को एकजुट, शांतिपूर्ण और मजबूत बनाने की दिशा में सभी नागरिकों से जिम्मेदारी लेने की अपील की, विशेष रूप से हिंदू समाज से।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/rss-chief-mohan-bhagwat-rising-cases-of-radicalism-in-the-country-a-worrying-trend/">आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत: देश में कट्टरता के बढ़ते मामले एक चिंताजनक प्रवृत्ति</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकाला, फूड सेफ्टी टीम ने किया निरीक्षण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2024 03:29:14 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[There was a stir in Atal Residential School due to worms found in the food of the students]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा, 09 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित अटल</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/there-was-a-stir-in-atal-residential-school-due-to-worms-found-in-the-food-of-the-students-food-safety-team-did-the-inspection/">अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकाला, फूड सेफ्टी टीम ने किया निरीक्षण</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा, 09 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित अटल आवासीय विद्यालय, मनकापुर में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकलने की घटना से विद्यालय में हड़कंप मच गया। यह घटना उस वक्त सामने आई जब छात्रों को नाश्ते में छोले परोसे जा रहे थे और उनमें से एक छात्र ने छोले में कीड़ा पाया। इस घटना के बाद छात्रों और उनके परिजनों में आक्रोश व्याप्त हो गया।</p>
<p>रविवार की सुबह, मनकापुर के अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों को नाश्ते में छोले परोसे जा रहे थे। उसी दौरान एक छात्र ने अपने छोले में कीड़ा देखा, जिससे विद्यालय में अफरा-तफरी मच गई। छात्र ने तुरंत यह जानकारी अपने सहपाठियों और स्कूल के मेस इंचार्ज को दी। अन्य छात्रों ने भी खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए शिकायत की। कई छात्रों ने बताया कि वे छोले में कीड़ा देखने से पहले ही भोजन कर चुके थे। यह सुनकर मेस इंचार्ज ने तुरंत बचा हुआ खाना फिंकवा दिया।</p>
<p>घटना की जानकारी जैसे ही विद्यालय के प्रभारी प्रिंसिपल को मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए नाश्ते में परोसे गए छोले को फिंकवाने का आदेश दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि छोले में कीड़ा पाया गया था, और इसकी जानकारी मिलते ही सारे छोले को नष्ट करवा दिया गया।</p>
<p>इस घटना के बाद कुछ छात्रों के परिजन विद्यालय में पहुंचे और उन्होंने विद्यालय प्रशासन से भोजन की गुणवत्ता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। परिजनों का आरोप था कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पहले से ही खराब गुणवत्ता का होता है। बच्चों ने शिकायत की कि उनके दूध में पानी की मात्रा अधिक होती है और खाने की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं होती।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-3050 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery.jpg" alt="" width="1864" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery.jpg 1864w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-300x174.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-1024x593.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-768x445.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241009_085453_Gallery-1536x890.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1864px) 100vw, 1864px" /></p>
<p>एक छात्र ने बताया, &#8220;हमने छोले में कीड़ा पाया, इसलिए हममें से कुछ ने खाना नहीं खाया। लेकिन कई बच्चे पहले ही खाना खा चुके थे, और जब हमने मेस इंचार्ज को बताया, तब जाकर खाना फिंकवाया गया।&#8221; बच्चों ने यह भी बताया कि दूध में पानी मिलाने की शिकायत वे कई बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।</p>
<p><strong>जिलाधिकारी की त्वरित प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>इस पूरे मामले की जानकारी जैसे ही जिलाधिकारी गोंडा, नेहा शर्मा को मिली, उन्होंने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। जिलाधिकारी ने विद्यालय में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लिया और गोंडा से फूड सेफ्टी टीम को तुरंत विद्यालय भेजा। उन्होंने विद्यालय प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए कि इस मामले की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।</p>
<p>जिलाधिकारी ने कहा, &#8220;बच्चों के भोजन में इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। हमने फूड सेफ्टी टीम को विद्यालय भेजा है और खाद्य सामग्री के नमूने लिए जा रहे हैं। विद्यालय में साफ-सफाई की भी जांच की जाएगी और सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।&#8221;</p>
<p><strong>फूड सेफ्टी टीम की जांच</strong></p>
<p>जिलाधिकारी के आदेश पर फूड सेफ्टी टीम ने तुरंत विद्यालय का दौरा किया। टीम ने विद्यालय के मेस का निरीक्षण किया और सफाई व्यवस्था पर निर्देश दिए। टीम ने सोया बड़ी, दाल और सब्जी के सैंपल भी लिए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके। फूड सेफ्टी टीम के एक अधिकारी ने बताया कि मौके पर तत्काल कुछ संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन सावधानी के तौर पर सभी खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।</p>
<p>फूड सेफ्टी अधिकारी ने कहा, &#8220;हमने विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता की जांच की और सफाई व्यवस्था के बारे में निर्देश दिए। हालांकि मौके पर कोई अन्य संदिग्ध वस्तु नहीं पाई गई, लेकिन हमने कुछ खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट जल्द ही उपलब्ध होगी। इसके अलावा, हम अब विद्यालय पर कड़ी निगरानी रखेंगे और नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे।&#8221;</p>
<p>इस घटना के बाद प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि विद्यालय में खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने विद्यालय प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे और छात्रों को पोषक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।</p>
<p>विद्यालय में अब नियमित रूप से फूड सेफ्टी टीम के दौरे होंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों को साफ-सुथरा और स्वास्थ्यवर्धक भोजन परोसा जा रहा है। इसके अलावा, विद्यालय प्रशासन से कहा गया है कि वे मेस की सफाई और खाद्य सामग्री की जांच पर विशेष ध्यान दें और किसी भी तरह की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>अटल आवासीय विद्यालय में छात्रों के भोजन में कीड़ा निकलने की यह घटना प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों के भोजन में लापरवाही न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा और देखभाल के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है।</p>
<p>जिलाधिकारी नेहा शर्मा की त्वरित कार्रवाई और फूड सेफ्टी टीम के निरीक्षण से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और सफाई व्यवस्था को लेकर और भी सख्ती बरती जानी चाहिए। छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कि इस घटना के बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सफल होंगे, और छात्रों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
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