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	<title>Dgp Lucknow Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में थाना परिसर से बाइक चोरी: जनता की सुरक्षा पर उठे सवाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Oct 2024 02:19:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#viral]]></category>
		<category><![CDATA[Bike stolen from police station premises in Lucknow Police Commissionerate: Questions raised on public safety]]></category>
		<category><![CDATA[Dgp Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow police]]></category>
		<category><![CDATA[Today news]]></category>
		<category><![CDATA[Upgov]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 27 अक्टूबर। हाल ही में लखनऊ के चिनहट थाना में हुई एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bike-stolen-from-police-station-premises-in-lucknow-police-commissionerate-questions-raised-on-public-safety/">लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में थाना परिसर से बाइक चोरी: जनता की सुरक्षा पर उठे सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 27 अक्टूबर। हाल ही में लखनऊ के चिनहट थाना में हुई एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना परिसर से दो बाइकों की चोरी ने न केवल आम नागरिकों बल्कि खुद पुलिस विभाग के भीतर भी चिंता का माहौल बना दिया है। ये बाइकें अभियुक्तों से बरामद की गई थीं और कानूनन प्रक्रिया के तहत थाने में सुरक्षित रखी गई थीं। अब ये बाइकें चोरी हो गई हैं, और इस घटना ने पुलिस की क्षमता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।</p>
<p>इस तरह की घटनाएं पुलिस की सुरक्षा व्यवस्थाओं की सच्चाई को उजागर करती हैं। सवाल यह है कि जब पुलिस अपने थाने में खड़ी हुई बरामद वाहनों की रक्षा नहीं कर सकती है, तो वह आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी? इस समाचार में, हम घटना की पूरी पृष्ठभूमि, पुलिस की लापरवाही, और सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियों को विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, आम जनता की सुरक्षा पर इस घटना का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह भी जानेंगे।</p>
<p>घटना का विवरण</p>
<p>चिनहट थाना में यह घटना 22 अक्टूबर 2024 को हुई, जब दो बाइकें, जो पुलिस द्वारा जब्त की गई थीं, थाने के परिसर से गायब हो गईं। पुलिस के आदेश बुक मुंशी, हेड कांस्टेबल रजनीश तिवारी, जिनकी जिम्मेदारी मालखाने के संचालन की थी, ने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में बाइकें चोरी हो गईं। मालखाना मुंशी नरेंद्र सिंह के अस्वस्थ होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था, और उनके स्थान पर रजनीश तिवारी कार्यवाहक के रूप में कार्य कर रहे थे।</p>
<p>इन बाइकों में एक पैसन प्रो (UP41 W5949) और एक एचएफ डीलक्स (UP32 J9702) शामिल थी, जिन्हें पुलिस ने एक अभियुक्त के पास से बरामद किया था और कानूनी प्रक्रिया के तहत थाने में खड़ा किया गया था। लेकिन जब बाइक के मालिक अपनी बाइक की रिहाई के लिए पहुंचे, तो दोनों बाइकें परिसर में नहीं मिलीं। इसके बाद जांच में पता चला कि दोनों बाइकें चोरी हो चुकी थीं।</p>
<p><strong>पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल</strong></p>
<p>थाने के भीतर से बाइकों का चोरी होना, पुलिस विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आमतौर पर माना जाता है कि थाने में रखे गए वाहन और माल एक सुरक्षित जगह पर होते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की होती है। लेकिन इस घटना से यह साफ हो गया है कि थाने के परिसर में ही सुरक्षा की भारी कमी है। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है, जब पुलिस खुद अपने परिसर में सुरक्षित रखी गई चीजों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है।</p>
<p>क्या जनता पुलिस पर भरोसा कर पाएगी? जब थाने में रखे गए वाहन सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा कैसे संभव हो पाएगी? पुलिस से उम्मीद की जाती है कि वे आम लोगों की संपत्ति और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, लेकिन इस घटना से जनता का पुलिस पर भरोसा टूटने का खतरा है।</p>
<p><strong>पुलिस की लापरवाही या सुरक्षा में खामी?</strong></p>
<p>इस मामले को लेकर यह प्रश्न भी उठता है कि यह घटना लापरवाही का परिणाम है या फिर सुरक्षा में खामी? पुलिस थाने में मौजूद संपत्ति और जब्त किए गए वाहनों की सुरक्षा का उचित प्रबंधन न होने के कारण इस प्रकार की घटनाएं घटित हो रही हैं।</p>
<p>कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि थाना परिसरों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और पर्याप्त सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन चिनहट थाना की घटना ने इस दावे पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है। घटना के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि बाइकों की चोरी कैसे और किसके द्वारा की गई, क्योंकि पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया है।</p>
<p><strong>आम आदमी के लिए खतरे की घंटी</strong></p>
<p>इस घटना ने आम नागरिकों के मन में गहरी चिंता उत्पन्न की है। जब पुलिस अपने परिसर में ही वाहनों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी? लखनऊ जैसे शहर में जहां अपराध की दर में इजाफा हो रहा है, वहां पुलिस की कार्यक्षमता पर इस तरह के घटनाक्रम से सवाल उठना लाजमी है।</p>
<p>इस घटना का प्रभाव यह हो सकता है कि आम नागरिक अपने सामान और वाहन की सुरक्षा के लिए पुलिस पर भरोसा करना बंद कर देंगे।</p>
<p>लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की यह घटना जनता की सुरक्षा पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। चिनहट थाने से दो बाइकें चोरी होने की घटना पुलिस विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा धब्बा है। पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वे आम नागरिकों की संपत्ति और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करें, लेकिन इस घटना ने पुलिस पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।</p>
<p>आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पुलिस अपने परिसर में खड़ी संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर सकती है, तो बाहर आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे करेगी? पुलिस को इस घटना से सबक लेना चाहिए और अपनी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न घटें।</p>
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		<item>
		<title>दबंगों का आतंक: विधान परिषद सदस्य के घर में घुसकर की मारपीट</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/terror-of-bullies-entered-the-house-of-legislative-council-member-and-beat-him-up/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Oct 2024 00:52:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Dgp Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Dm Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow police]]></category>
		<category><![CDATA[दबंगों का आतंक: विधान परिषद सदस्य के घर में घुसकर की मारपीट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जानलेवा हमले से पीड़ित सुनील कुमार घायल लखनऊ, 24 अक्टूबर। राजधानी लखनऊ के राजकीय गुलिस्ता कॉलोनी में एक</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>जानलेवा हमले से पीड़ित सुनील कुमार घायल</strong></p>
<p>लखनऊ, 24 अक्टूबर। राजधानी लखनऊ के राजकीय गुलिस्ता कॉलोनी में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ दबंगों ने विधान परिषद सदस्य रामचंद्र सिंह प्रधान के आवास पर घुसकर एक कर्मी के साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की कोशिश की। घटना का शिकार हुए सुनील कुमार ने बताया कि भीम वर्मा नामक व्यक्ति और उसके दो साथियों ने लोहे की रॉड से उस पर जानलेवा हमला किया। इस हमले में सुनील कुमार को कई गंभीर चोटें आईं। हमलावर घटना के बाद मौके से फरार हो गए।</p>
<p>घटना के संबंध में सुनील कुमार ने स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। सुनील कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह हमला पूर्व में हुई एक छोटी सी कहासुनी के बाद हुआ है। इस घटना से इलाके में भय और आतंक का माहौल बन गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की तलाश की जा रही है।</p>
<p><strong>घटना का विवरण</strong></p>
<p>घटना का विवरण देते हुए सुनील कुमार ने बताया कि वह विधान परिषद सदस्य रामचंद्र सिंह प्रधान के घर पर खाना बनाने का काम करता है और उनका आवास लखनऊ के राजकीय गुलिस्ता कॉलोनी में स्थित है। 21 अक्टूबर 2024 को सुनील कुमार का भीम वर्मा नामक व्यक्ति से किसी बात पर विवाद हुआ था। उस वक्त मामला सामान्य झगड़े का था और दोनों पक्षों ने इसे नजरअंदाज कर दिया था।</p>
<p>हालांकि, अगले ही दिन 22 अक्टूबर को शाम करीब 4 बजे के आसपास भीम वर्मा अपने दो साथियों के साथ रामचंद्र सिंह प्रधान के आवास में घुस आया और लोहे की रॉड से सुनील कुमार पर हमला कर दिया। सुनील ने बताया कि हमले के दौरान उसके हाथ, पैर, सिर, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। जब सुनील ने शोर मचाया तो हमलावर तुरंत चार पहिया वाहन से भाग निकले।</p>
<p>सुनील कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि हमले के दौरान उसे ऐसा लगा कि उसकी जान खतरे में है। हमलावर बेहद आक्रामक थे और उनकी मंशा साफ थी कि वे उसे मारने के इरादे से आए थे। घटना के बाद घायल अवस्था में सुनील कुमार ने पुलिस को सूचना दी और अपने बचाव के लिए आवाज़ लगाई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू की है।</p>
<p>सुनील कुमार का कहना है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते किया गया है, लेकिन उसने इस बात को स्पष्ट किया कि वह भीम वर्मा को पहले से ठीक से नहीं जानता था और उनका पहले से कोई बड़ा विवाद भी नहीं था। एक मामूली कहासुनी के बाद इतनी बड़ी घटना होना चौंकाने वाली बात है, और इससे साफ होता है कि हमलावर दबंग प्रवृत्ति के लोग थे, जिनका उद्देश्य उसे गंभीर रूप से चोट पहुँचाना था।</p>
<p><strong>विधान परिषद सदस्य के आवास पर हुई घटना</strong></p>
<p>यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य के एक प्रमुख नेता के आवास पर घटी है। रामचंद्र सिंह प्रधान उत्तर प्रदेश विधान परिषद के एक प्रमुख सदस्य हैं, और उनके आवास पर दबंगों का इस प्रकार घुसकर हमला करना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि जब एक जनप्रतिनिधि के घर पर इस तरह की घटना हो सकती है, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है।</p>
<p>रामचंद्र सिंह प्रधान ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और पुलिस प्रशासन से हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, &#8220;यह घटना हमारे समाज में बढ़ती हुई हिंसा और असहिष्णुता का उदाहरण है। मैं पुलिस से अपील करता हूँ कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए।&#8221;</p>
<p><strong>स्थानीय पुलिस की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और सुनील कुमार की शिकायत पर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने सुनील के बयान के आधार पर भीम वर्मा और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद बताया कि यह हमला व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम प्रतीत होता है, लेकिन मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि हमले के पीछे की असली वजह पता चल सके।</p>
<p>पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा कर दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।</p>
<p>हमले के बाद सुनील कुमार को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी प्राथमिक चिकित्सा की गई। डॉक्टरों के अनुसार, सुनील की हालत गंभीर थी लेकिन अब उसकी स्थिति स्थिर है। सुनील के शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं, खासकर उसके सिर और पीठ पर। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सुनील ने समय रहते शोर नहीं मचाया होता, तो हमलावर उसे और भी गंभीर चोट पहुँचा सकते थे।</p>
<p>सुनील कुमार का इलाज जारी है और डॉक्टरों ने उसे कुछ दिनों के लिए आराम करने की सलाह दी है। इस बीच, उसके परिजनों ने भी घटना की कड़ी निंदा की है और पुलिस से हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><strong>समाज में बढ़ती हिंसा और अपराध</strong></p>
<p>यह घटना एक बार फिर समाज में बढ़ते हुए हिंसा और अपराध के स्तर को उजागर करती है। लखनऊ जैसे शहर में, जहाँ प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था मजबूत मानी जाती है, इस प्रकार की घटनाएँ समाज के लिए चिंता का विषय हैं। दबंगों द्वारा खुलेआम घर में घुसकर इस तरह की हिंसा करना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज में असुरक्षा की भावना को भी बढ़ाता है।</p>
<p>ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण यह है कि अपराधी खुद को कानून से ऊपर समझते हैं और उन्हें यह भरोसा होता है कि वे बच निकलेंगे। लेकिन समाज में बढ़ती हुई हिंसा और अपराध पर लगाम लगाना अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते भी लोग कानून की परवाह किए बिना इस हद तक जा सकते हैं।</p>
<p><strong>कानून व्यवस्था पर सवाल</strong></p>
<p>यह घटना लखनऊ की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस प्रकार से एक दबंग व्यक्ति ने विधान परिषद सदस्य के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया, वह स्पष्ट करता है कि अपराधी अब किसी से नहीं डरते। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक प्रमुख नेता के घर पर इस प्रकार की घटना हो सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?</p>
<p>घटना के बाद इलाके में रहने वाले लोग डरे हुए हैं और उन्होंने पुलिस प्रशासन से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे अब अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और ऐसी घटनाएँ उनके जीवन में असुरक्षा की भावना को और बढ़ा रही हैं।</p>
<p><strong>राजनीतिक प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>इस घटना के बाद राज्य के राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि के घर पर इस प्रकार की घटना हो सकती है, तो आम जनता कितनी असुरक्षित है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। दलों ने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए ताकि कानून व्यवस्था बहाल हो सके।</p>
<p>लखनऊ में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दबंग प्रवृत्ति के लोग समाज में आतंक फैलाने से पीछे नहीं हटते। एक जनप्रतिनिधि के घर में घुसकर जानलेवा हमला करना यह दिखाता है कि अपराधी अब कानून और प्रशासन से नहीं डरते। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि यदि कानून व्यवस्था को सख्त नहीं किया गया, तो इस प्रकार की घटनाओं में और भी वृद्धि हो सकती</p>
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		<title>पूर्व विशेष सचिव हरि प्रसाद सिंह से एक करोड़ की ठगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 00:35:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Dgp Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow]]></category>
		<category><![CDATA[Lucknow police]]></category>
		<category><![CDATA[Police Commissioner]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक करोड़ की ठगी, शराब लाइसेंस जलने के नाम पर की ठगी लखनऊ, 23 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश शासन</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-special-secretary-hari-prasad-singh-was-duped-of-rs-1-crore/">पूर्व विशेष सचिव हरि प्रसाद सिंह से एक करोड़ की ठगी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एक करोड़ की ठगी, शराब लाइसेंस जलने के नाम पर की ठगी</strong></p>
<p>लखनऊ, 23 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व विशेष सचिव, हरि प्रसाद सिंह, सेवानिवृत्त होने के बाद एक बड़े धोखाधड़ी का शिकार हो गए। उनके साथ राकेश शर्मा नामक व्यक्ति ने करीब एक करोड़ रुपये की ठगी की। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस पूरी घटना ने लखनऊ के प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में सनसनी फैला दी है।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह, जो वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश शासन से सेवानिवृत्त हुए थे, लखनऊ के गोमती नगर में निवास करते हैं। उनका दावा है कि 2 मई 2024 को गोमती नगर के पत्रकारपुरम क्षेत्र में उनकी राकेश शर्मा नामक व्यक्ति से मुलाकात हुई। राकेश शर्मा ने खुद को पूर्व पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि वह उन्हें पहले से जानता है। उसने हरि प्रसाद सिंह से परिचय करते हुए कहा कि वह लखनऊ में शराब के बड़े कारोबारी हैं और उसकी 84 शराब की दुकाने हैं। उसने दावा किया कि उसका आबकारी विभाग में अच्छा-खासा प्रभाव है और वह हरि प्रसाद सिंह के लिए भी शराब की दुकानों का लाइसेंस दिलवा सकता है।</p>
<p>राकेश शर्मा ने हरि प्रसाद सिंह का विश्वास जीतने के लिए कहा कि उसने कई बड़े अधिकारियों, आईएएस और आईपीएस अफसरों के रिश्तेदारों को भी दुकानें दिलवाई हैं। उसने पुलिस और कोर्ट में अपनी पकड़ का भी दावा किया और यह भी कहा कि वह अपने संपर्कों के माध्यम से किसी के भी खिलाफ फर्जी मुकदमों की बाढ़ ला सकता है।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह को यह लगा कि राकेश शर्मा सही कह रहा है और उन्होंने उसके साथ काम करने का मन बना लिया। इसके बाद राकेश शर्मा ने उन्हें शाहनजफ रोड और वृंदावन योजना में तीन शराब की दुकानों के लाइसेंस दिलाने का वादा किया।</p>
<p>राकेश शर्मा की बातों में आकर हरि प्रसाद सिंह ने उसे चेक और नकद रूप में बड़ी राशि दी। दिनांक 5 मई 2024 से 30 सितंबर 2024 के बीच हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा को 22,62,000 रुपये चेक के माध्यम से और 75,50,000 रुपये नकद दिए। कुल मिलाकर, उन्होंने लगभग एक करोड़ रुपये राकेश शर्मा को दिए, यह विश्वास करते हुए कि उन्हें जल्द ही शराब की दुकानों के लाइसेंस मिल जाएंगे।</p>
<p>राकेश शर्मा ने हरि प्रसाद सिंह को विश्वास दिलाने के लिए उन्हें कुछ कागजात भी दिखाए, जिनमें से तीन लाइसेंस की फोटोकॉपी शामिल थी। हालांकि, जब हरि प्रसाद सिंह ने इन दस्तावेजों की सच्चाई का पता लगाया, तो यह सामने आया कि ये फर्जी थे और उन पर दी गई जानकारी पूरी तरह गलत थी।</p>
<p>जब हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा से अपने पैसे वापस मांगने का प्रयास किया, तो उसने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। राकेश शर्मा ने उन्हें और उनके परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। यही नहीं, उसने पुलिस और कोर्ट में अपनी मजबूत पकड़ का हवाला देते हुए कहा कि वह उन्हें जेल भिजवा सकता है।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह के अनुसार, राकेश शर्मा ने न केवल उनकी दी हुई चेक का दुरुपयोग किया, बल्कि उनके स्टाम्प पेपर पर भी हस्ताक्षर करवाए थे, जिनका वह गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहा था। राकेश शर्मा ने पहले से कई अधिकारियों और अधिवक्ताओं को भी इसी तरह से ठगा था, और इस मामले में भी उसने उसी रणनीति का इस्तेमाल किया।</p>
<p>29 सितंबर 2024 को हरि प्रसाद सिंह ने इस धोखाधड़ी के बारे में थाना वजीरगंज, लखनऊ में जाकर राकेश शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उन्होंने IGRS (Integrated Grievance Redressal System) के माध्यम से भी शिकायत की।</p>
<p>10 अक्टूबर 2024 को उन्होंने पुनः शिकायत दर्ज करवाई, और इसके बाद विवेचक ने उन्हें यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आवेदन देने की सलाह दी। हरि प्रसाद सिंह ने इस मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि राकेश शर्मा और उसकी पत्नी शकुंतला शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और धमकी देने के आरोप में कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह की शिकायत से यह भी स्पष्ट हुआ कि राकेश शर्मा पहले से ही कई अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ इस तरह की ठगी कर चुका है। उसने लोगों को पहले काम दिलाने का वादा किया और बाद में उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया।</p>
<p>राकेश शर्मा का दावा था कि उसके पुलिस और आबकारी विभाग में गहरे संबंध हैं और वह कानून के गलत इस्तेमाल से लोगों को धमकाता था। उसका यह भी कहना था कि उसने कई वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदारों को शराब की दुकानें दिलवाई हैं, जिससे उसकी पकड़ और मजबूत हो गई थी।</p>
<p>इस घटना ने लखनऊ के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। हरि प्रसाद सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस प्रकार की ठगी का मामला यह दर्शाता है कि राकेश शर्मा जैसे लोग किस तरह से प्रशासनिक और कानूनी प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह की शिकायत के आधार पर, यह उम्मीद की जा रही है कि पुलिस जल्द ही इस मामले की गहन जांच करेगी और राकेश शर्मा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करेगी।</p>
<p>वहीं, इस घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनता के बीच भी इस प्रकार की ठगी के प्रति सतर्कता बढ़ गई है। हरि प्रसाद सिंह ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों से अपील की है कि राकेश शर्मा जैसे अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह द्वारा राकेश शर्मा के खिलाफ की गई शिकायत ने यह साबित कर दिया है कि कैसे बड़े और प्रभावशाली लोग भी ठगी का शिकार हो सकते हैं। इस मामले में एक करोड़ रुपये की ठगी, फर्जी लाइसेंस और धमकियों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।</p>
<p>हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही उन्हें न्याय मिलेगा। प्रशासन और कानून-व्यवस्था के अधिकारियों से भी यही अपेक्षा है कि वे इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।</p>
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		<title>त्योहारों को लेकर पुलिस विभाग ने किया बड़ा निर्णय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Oct 2024 16:29:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#uppolice]]></category>
		<category><![CDATA[Dgp Lucknow]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पुलिस कर्मियों के अवकाश पर एक माह की रोक, सुरक्षा कारणों से लिया गया बड़ा फैसला लखनऊ 5</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>पुलिस कर्मियों के अवकाश पर एक माह की रोक, सुरक्षा कारणों से लिया गया बड़ा फैसला</p>
<p>लखनऊ 5 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिसकर्मियों के अवकाश पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह रोक 08 अक्तूबर 2024 से 08 नवंबर 2024 तक लागू रहेगी, जिसके तहत किसी भी पुलिसकर्मी को छुट्टी नहीं दी जाएगी। यह कदम राज्य में त्योहारों के मौसम, आगामी चुनावों, और अन्य संवेदनशील घटनाओं के मद्देनजर उठाया गया है।</p>
<p>इस अवधि के दौरान राज्य में नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, और अन्य प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। साथ ही, आगामी चुनावी गतिविधियों के कारण भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। सरकार और पुलिस प्रशासन ने यह फैसला लिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना या कानून व्यवस्था के उल्लंघन को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।</p>
<p>पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय द्वारा जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी पुलिसकर्मियों को आगामी एक महीने तक चौबीसों घंटे उपलब्ध रहना होगा। किसी भी तरह के आकस्मिक अवकाश, चाहे वह पारिवारिक हो या व्यक्तिगत, को स्वीकृति नहीं दी जाएगी, सिवाय आपातकालीन और अत्यधिक महत्वपूर्ण परिस्थितियों के। इस दौरान सभी पुलिस थानों और चौकियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>प्रदेश सरकार का मानना है कि त्योहारों और चुनावों के दौरान राज्य की कानून व्यवस्था को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि बड़े सार्वजनिक समारोहों में अराजकता और हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं, जिसे रोकने के लिए पुलिस बल की पूर्ण उपस्थिति अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रमुख स्थानों पर आतंकवादी गतिविधियों की आशंका को ध्यान में रखते हुए भी यह फैसला लिया गया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। विशेष रूप से भीड़-भाड़ वाले इलाकों जैसे धार्मिक स्थलों, बाजारों, और मेला क्षेत्रों में पुलिस की चौकसी बढ़ाई जाएगी। राज्य के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी अवांछनीय तत्व को राज्य में प्रवेश करने से रोका जा सके।</p>
<p>इस आदेश पर पुलिसकर्मियों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ पुलिसकर्मियों का मानना है कि यह निर्णय सही समय पर लिया गया है, क्योंकि यह राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। वहीं, कुछ कर्मी, जो पहले से ही अवकाश की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह निराशाजनक है। हालांकि, प्रशासन ने कहा है कि एक महीने के बाद पुलिसकर्मियों को उनके लंबित अवकाश स्वीकृत कर दिए जाएंगे, ताकि वे अपने पारिवारिक और व्यक्तिगत कार्यों को पूरा कर सकें।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग का यह निर्णय राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। आगामी त्योहारों और चुनावों के मद्देनजर यह कदम न केवल पुलिस बल की उपस्थिति सुनिश्चित करेगा, बल्कि किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए भी तैयार करेगा। हालांकि, यह निर्णय पुलिस कर्मियों के व्यक्तिगत जीवन पर असर डाल सकता है, लेकिन राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसे आवश्यक माना जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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