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	<title>Decisive initiative towards transparency in old age pension: Strict warning and timely instructions from District Magistrate Neha Sharma Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>वृद्धावस्था पेंशन में पारदर्शिता की ओर निर्णायक पहल: जिलाधिकारी नेहा शर्मा की सख्त चेतावनी और समयबद्ध निर्देश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Apr 2025 10:54:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा, 21 अप्रैल। जनपद गोण्डा में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जिलाधिकारी नेहा</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोण्डा, 21 अप्रैल। </strong>जनपद गोण्डा में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने एक ठोस और समयबद्ध अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वृद्धावस्था पेंशन योजना के समस्त लाभार्थियों का सघन भौतिक सत्यापन 15 मई 2025 तक हर हाल में पूर्ण कराया जाए। यह निर्देश समस्त खंड विकास अधिकारियों और अधिशासी अधिकारियों (नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत) को भेजा गया है। उनका यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि केवल वास्तविक पात्र व्यक्तियों को ही पेंशन का लाभ प्राप्त हो और मृतक अथवा अपात्रों को मिलने वाली पेंशन राशि पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। यह अभियान प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p><strong>वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सत्यापन की आवश्यकता</strong><br />
जिलाधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान सत्यापन कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 से पूर्व इसीलिए किया जा रहा है ताकि नई भुगतान प्रक्रिया में कोई अव्यवस्था न उत्पन्न हो। पूर्व वर्षों में कई बार यह पाया गया कि मृतक लाभार्थियों के नाम पर पेंशन जारी होती रही, जिसके कारण सरकारी खजाने पर अनावश्यक भार पड़ा। कई अपात्र व्यक्ति भी पेंशन का लाभ वर्षों से ले रहे थे, जिससे योजना की मूल भावना प्रभावित हो रही थी। अब यह सत्यापन कार्य सुनिश्चित करेगा कि न केवल अपात्रों को योजना से बाहर किया जाए, बल्कि ऐसे वृद्धजन जिन्हें अब तक योजना से वंचित रखा गया था, उन्हें भी समुचित रूप से शामिल किया जा सके।</p>
<p><strong>भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी और विधि</strong><br />
सत्यापन कार्य के लिए अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे सूची में दर्ज प्रत्येक लाभार्थी से भौतिक रूप से संपर्क करें, उनका आधार कार्ड, राशन कार्ड, फोटोयुक्त पहचान पत्र और बैंक खाता विवरण देखकर उनकी जीवितता और पात्रता की पुष्टि करें। सत्यापन सूची में मृतक पाए गए व्यक्तियों के नाम के सामने स्पष्ट रूप से “मृतक” लिखना अनिवार्य किया गया है। इसी तरह जो व्यक्ति किसी अन्य योजना में पहले से लाभान्वित हैं, उनकी दोहरी पात्रता की भी जांच की जानी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या कागजी खानापूर्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<p><strong>ई-केवाईसी और आधार सीडिंग पर प्रशासन का फोकस</strong><br />
वृद्धावस्था पेंशन योजना की त्रुटिरहित और डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए जिलाधिकारी ने लाभार्थियों के ई-केवाईसी और आधार सीडिंग को अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि कई लाभार्थियों के आधार बैंक खातों से जुड़े नहीं हैं और न ही उनका ई-केवाईसी पूर्ण हुआ है, जिससे तकनीकी अड़चनें आ रही हैं। अब सत्यापन के दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक लाभार्थी का आधार बैंक खाते से लिंक हो और एनपीसीआई पोर्टल पर अपडेट हो, जिससे पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में पारदर्शी ढंग से पहुंच सके।</p>
<p><strong>सतही सत्यापन पर होगी कड़ी कार्रवाई</strong><br />
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी कर्मचारी द्वारा बिना उचित जांच के किसी जीवित व्यक्ति को मृतक घोषित किया गया, या किसी पात्र वृद्ध को अपात्र करार दिया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि “यह केवल कागज भरने की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उन बुजुर्गों के जीवन से जुड़ा सवाल है जो इस योजना पर निर्भर हैं। कोई भी कर्मचारी यदि जिम्मेदारी से कार्य नहीं करता है तो उसकी जवाबदेही तय की जाएगी।” सत्यापन रिपोर्ट की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी और उसकी प्रामाणिकता को सुनिश्चित करने के लिए रेंडम ऑडिट भी किया जाएगा।</p>
<p><strong>‘जीरो पावर्टी’ अभियान से जोड़ा गया सत्यापन कार्य</strong><br />
सत्यापन अभियान को जिले में चल रहे ‘जीरो पावर्टी’ अभियान के साथ भी समेकित किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि जो वृद्धजन अभी तक योजना से वंचित हैं, उन्हें भी इस अभियान के दौरान सूचीबद्ध किया जाए। चिन्हित निर्धनतम परिवारों में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों को इस योजना से जोड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन भरवाए जा रहे हैं, जिनका मौके पर सत्यापन एवं अनुमोदन उसी समय किया जाएगा। इस पहल से ऐसे हजारों बुजुर्गों को लाभ मिलेगा जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन जी रहे हैं, लेकिन पेंशन योजना से अब तक अछूते हैं।</p>
<p><strong>निर्धारित समयसारिणी और जवाबदेही</strong><br />
प्रशासन ने इस अभियान के लिए स्पष्ट समयसारिणी जारी की है, जिसके अनुसार 10 मई तक सभी फील्ड कर्मचारी सत्यापन कार्य पूर्ण कर लेंगे, 15 मई तक समेकित रिपोर्ट जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी जाएगी और 25 मई तक मृतक/अपात्र लाभार्थियों की पेंशन रोके जाने की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। यह सुनियोजित ढांचा इस बात की गारंटी है कि न केवल कार्य समय से पूर्ण होगा, बल्कि इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने हेतु वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड निरीक्षण का कार्य भी सौंपा गया है।</p>
<p><strong>सामाजिक सुरक्षा में नए मानदंड स्थापित करने की दिशा में पहल</strong><br />
इस पहल से जिले में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन में नए मानदंड स्थापित होंगे। वृद्धावस्था पेंशन योजना समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—वृद्धजनों—के लिए संबल है। यदि यह योजना अपात्रों के कब्जे में चली जाए, तो वास्तविक लाभार्थी इससे वंचित रह जाते हैं। जिलाधिकारी नेहा शर्मा का यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि योजना की मूल भावना बरकरार रहे और एक भी पात्र वृद्ध इस सुविधा से वंचित न रहे।</p>
<p><strong>सामाजिक संगठनों और आमजन का सहयोग भी अपेक्षित</strong><br />
जिलाधिकारी ने समाज के जागरूक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से भी अपील की है कि वे इस अभियान में प्रशासन का सहयोग करें। यदि किसी मोहल्ले, गाँव या वार्ड में कोई पात्र वृद्धजन योजना से वंचित हैं या कोई मृतक व्यक्ति अभी भी पेंशन सूची में दर्ज है, तो इसकी सूचना संबंधित खंड विकास अधिकारी या अधिशासी अधिकारी को दें। यह जन-सहभागिता इस अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p><strong>शासन, प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी</strong><br />
वृद्धावस्था पेंशन योजना में पारदर्शिता और पात्रता सुनिश्चित करने की यह पहल केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता और प्रशासन की जवाबदेही का प्रमाण है। यदि इस तरह के प्रयास लगातार होते रहे, तो जनपद गोंडा न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा द्वारा शुरू की गई यह प्रक्रिया न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगी, बल्कि जनता का विश्वास भी प्रशासनिक व्यवस्था पर और मजबूत करेगी।</p>
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