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	<title>#cyberthana Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>भारत में बढ़ते साइबर हमले और सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा इकाई पर रैनसमवेयर हमले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Nov 2024 03:07:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 10 नवंबर। 2023 की एक महत्वपूर्ण घटना में भारत की एक प्रमुख रक्षा इकाई पर रैनसमवेयर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/increasing-cyber-attacks-and-security-challenges-in-india-ransomware-attack-on-defense-unit/">भारत में बढ़ते साइबर हमले और सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा इकाई पर रैनसमवेयर हमले</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 10 नवंबर। 2023 की एक महत्वपूर्ण घटना में भारत की एक प्रमुख रक्षा इकाई पर रैनसमवेयर हमला हुआ, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था में चिंता पैदा कर दी। हाल ही में जारी डीओपीटी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में हमलावरों ने रैनसमवेयर का इस्तेमाल कर सिस्टम को बाधित किया, जिससे रक्षा इकाई की महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुँच नहीं हो सकी। इस प्रकार के हमले में अक्सर हमलावर एक फिरौती राशि की माँग करते हैं और भुगतान होने तक सिस्टम को अनलॉक नहीं करते। यह घटना दिखाती है कि भारत के महत्वपूर्ण रक्षा एवं संवेदनशील संस्थान भी अब साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।</p>
<p>सिर्फ रक्षा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि नागरिक उपयोगकर्ताओं से जुड़ी जानकारियाँ भी साइबर हमलों की चपेट में आ चुकी हैं। CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम) की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 15 लाख से अधिक साइबर सुरक्षा घटनाएँ दर्ज की गईं, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में बहुत अधिक है। इनमें से प्रमुख घटनाओं में वेबसाइट घुसपैठ, मैलवेयर संक्रमण, फ़िशिंग हमले और डेटा उल्लंघन जैसे खतरे शामिल हैं। इन घटनाओं ने भारत में साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता को बढ़ा दिया है और ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता को उजागर किया है।</p>
<p><strong>रैनसमवेयर हमले की गहराई से जांच</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इस रैनसमवेयर हमले ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे उत्पन्न कर दिए। इस तरह के हमले में हमलावर पहले किसी महत्वपूर्ण सिस्टम में मैलवेयर प्रविष्ट कर देते हैं, जो उस सिस्टम को लॉक कर देता है। इसके बाद फिरौती की माँग की जाती है, जो अमूमन क्रिप्टोकरेंसी में होती है। इस प्रकार के हमलों से महत्वपूर्ण जानकारी न केवल लॉक हो जाती है बल्कि लीक भी हो सकती है।</p>
<p>हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि यह रक्षा इकाई कहाँ स्थित है या इससे कितनी जानकारी प्रभावित हुई। इसके बावजूद, यह घटना बताती है कि हमारे महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत जैसे विकासशील देशों पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>डीओएस और डीडीओएस हमले: इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने के प्रयास</strong></p>
<p>रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2023 में भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और हवाई अड्डों पर बड़े पैमाने पर डीडीओएस (डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस) हमले हुए। डीडीओएस हमले में कई कंप्यूटरों या अन्य डिवाइसेस के माध्यम से एक ही समय में एक वेबसाइट या सिस्टम पर इतने अनुरोध भेजे जाते हैं कि वह ठप हो जाता है और वैध उपयोगकर्ताओं को सेवा नहीं मिल पाती। हवाई अड्डों और अन्य महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमले भारत के साइबर सुरक्षा तंत्र में बड़ी कमी का संकेत हैं।</p>
<p><strong>ICMR डेटा उल्लंघन: नागरिकों की निजी जानकारी पर संकट</strong></p>
<p>2023 में, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के डेटा में बड़ा उल्लंघन पाया गया। अमेरिकी साइबर सुरक्षा एजेंसी रीसिक्योरिटी ने अक्टूबर में अलर्ट जारी किया था कि लगभग 81 करोड़ भारतीयों की आधार, पासपोर्ट, फोन नंबर और पते जैसी संवेदनशील जानकारी लीक हो चुकी थी। इस घटना से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य एवं अन्य संवेदनशील डेटा भी साइबर अपराधियों के निशाने पर है। ICMR डेटा उल्लंघन ने भारत में डेटा सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को उजागर किया, खासकर जब कि इस तरह के डेटा का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रबंधन में होता है।</p>
<p><strong>बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय हेराफेरी के मामले</strong></p>
<p>रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के निर्देश पर सीबीआई ने यूको बैंक में आईएमपीएस (तत्काल भुगतान सेवा) धोखाधड़ी की जांच शुरू की। इसमें पाया गया कि कई बैंकों में रिवर्स ट्रांजेक्शन के माध्यम से 820 करोड़ रुपये का हेरफेर किया गया। वित्तीय हेराफेरी के मामले में यह घटना एक प्रमुख उदाहरण है कि कैसे तकनीकी घोटालों के जरिए बैंकिंग क्षेत्र में अपराध हो सकते हैं।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, सीबीआई ने कई क्रिप्टो माइनिंग घोटालों का भी पर्दाफाश किया है, जिनमें भारतीय नागरिकों से 100 करोड़ रुपये ठगे गए। क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से हो रही इस तरह की धोखाधड़ी ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है, जो अब क्रिप्टोकरेंसी के नियमन की दिशा में कड़े कदम उठाने की योजना बना रही हैं।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय साझेदारी से साइबर अपराधों का सामना</strong></p>
<p>भारत के भीतर हो रहे साइबर अपराध अब केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सीबीआई ने इस वर्ष अमेरिकी एफबीआई, कैनेडियन रॉयल माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी), और सिंगापुर पुलिस के साथ साझेदारी की, ताकि भारत में साइबर अपराधियों के खिलाफ एक संयुक्त कार्रवाई की जा सके। एक प्रमुख घटना में एफबीआई से मिली जानकारी के आधार पर, 2 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ, जो कि अमेरिकी नागरिकों को लक्षित फर्जी टेक सपोर्ट कॉल सेंटर से संबंधित था।</p>
<p>हालांकि कनाडा के साथ भारत के राजनयिक संबंध हाल के दिनों में तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आरसीएमपी के सहयोग से सीबीआई ने दिल्ली में एक कॉल सेंटर का खुलासा किया, जिसने कनाडा के नागरिकों को ठगा था। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से जुड़े एक और मामले में, एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक की बिटकॉइन धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, जिसमें भारतीय नागरिकों का भी नुकसान हुआ।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय सुरक्षा में बदलाव: साइबर सुरक्षा ढांचे में सुधार</strong></p>
<p>सितंबर 2023 में कैबिनेट सचिवालय ने एक बड़ा बदलाव किया, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को साइबर सुरक्षा के लिए समग्र समन्वय का जिम्मा सौंपा गया। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को &#8220;दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा&#8221; के लिए और गृह मंत्रालय को साइबर अपराधों से संबंधित मामलों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया। इन बदलावों से उम्मीद की जा रही है कि भारत का साइबर सुरक्षा ढांचा और मजबूत होगा और इस तरह के बड़े हमलों को समय रहते रोका जा सकेगा।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>भारत की साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ अब एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकों की डेटा गोपनीयता, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा, और अन्य महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर सभी इन हमलों के निशाने पर हैं। इस समय देश में ऐसी ठोस रणनीतियों की आवश्यकता है जो साइबर हमलों के खिलाफ न केवल सुरक्षा को बढ़ावा दें बल्कि नागरिकों और महत्वपूर्ण संस्थानों के डेटा को भी सुरक्षित रखें।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नए साइबर सुरक्षा ढांचे से भारत इन चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपट सकता है। इसके अलावा, भारत में साइबर सुरक्षा के प्रति जन जागरूकता और तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाना भी आवश्यक है ताकि भविष्य में साइबर अपराधों को कम किया जा सके और देश की साइबर सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।</p>
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		<title>लुटती रही जनता, सोते रहे जिम्मेदार, अब कब जागेगी सरकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 06:04:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साइबर अपराधों को रोकने में विफल रही एजेंसियां, दर्ज शिकायतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि नई दिल्ली, 27</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>साइबर अपराधों को रोकने में विफल रही एजेंसियां, दर्ज शिकायतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 27 सितंबर। अपनी आम जरूरत को काटकर बैंकों में अपनी बचत जमा करने वाले आम लोग जो अब बड़े पैमाने पर साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, इस साल अगर हम दर्ज शिकायतों की ही बात करें तो अब तक 6 महीने में ही केवल 61000 से ज्यादा साइबर शिकायतें दर्ज की गई हैं जो पिछले साल दर्ज की गई साइबर शिकायतों की तुलना में 11 प्रतिशत ज्यादा है। नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल ने जनवरी से जून के बीच 2023 में 55267 शिकायतें दर्ज की लेकिन इस साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 61525 तक पहुंच गया है। इस साल नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल द्वारा दर्ज किए गए साइबर अपराध में कई तरह की विविधताएं देखने को मिल रही है जो एजेंसियों को परेशान करने वाली है साइबरबुलिंग, स्टॉकिंग, सेक्सटिंग (2,926 शिकायतें), नकली प्रतिरूपण प्रोफ़ाइल (1,799), प्रोफ़ाइल हैकिंग (2,065), ई-वॉलेट धोखाधड़ी (938), प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (828), अनधिकृत डेटा उल्लंघन (680) और ऑनलाइन नौकरी धोखाधड़ी (324) शामिल हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-2723 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-284x300.jpg" alt="" width="284" height="300" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-284x300.jpg 284w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-971x1024.jpg 971w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-768x810.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1457x1536.jpg 1457w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1942x2048.jpg 1942w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-1024x1080.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424-24x24.jpg 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/09/PSX_20240927_083424.jpg 1962w" sizes="(max-width: 284px) 100vw, 284px" /></p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने बात करते हुए बताया कि यह जो साइबर क्राइम करने वाले लोग हैं यह कमजोर लोगों के डर और इच्छाओं का फायदा उठाते हैं अभी हाल में दर्ज की गई घटनाओं में ऐसी डिजिटल गिरफ्तारियों के मामले सामने आए हैं जहां अपराधियों ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में लोगों से कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी दी है और उससे जुड़े कूरियर से अवैध पदार्थ जप्त किए जाने का झूठा बहाना बनाकर पैसे देने के लिए मजबूर किया है इन मामलों में साइबर अपराधी डर और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं जो व्यक्ति को सोचने में असमर्थ बना देता है और उन्हें अपराधियों की मांगों का पालन करने के लिए मजबूर कर देता है।<br />
इसी तरह साइबर अपराधी लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए भ्रामक रणनीति अपनाते हैं कि वह धोखाधड़ी वाली निवेश योजना के माध्यम से आपकी संपत्ति में काफी वृद्धि कर सकते हैं पीड़ितों को अक्सर अधिक रिटर्न के वादों से लुभाया जाता है जिससे वह फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन में निवेश कर देते हैं। विश्वास हासिल करने के लिए साइबर अपराधी शुरू में छोटे-छोटे लाभ प्रदान कर सकते हैं जिससे प्रेरित होकर व्यक्ति बड़ा निवेश करता है और अंत में वह बड़ी रकम लेकर गायब हो जाते हैं।</p>
<p>इन साइबर अपराधियों के शिकार होने से खुद को बचाने का सबसे प्रभावशील तरीका उनके काम करने के तरीके को अच्छी तरह समझना है,  ऐसी घटनाओं को रोकने में जागरूकता अहम भूमिका निभाती है साइबर अपराध की तकनीक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करके व्यक्ति खुद को वित्तीय नुकसान से बचा सकता है। लोगों को फंड ट्रांसफर करने और दूसरों के साथ ओटीपी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।</p>
<p>साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के बारे में पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उनके ठिकानों में अभी भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ है यह जालसाज देश भर के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं लेकिन प्राथमिक हॉटस्पॉट पहले जैसे ही हैं। उनकी गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा नूंह (हरियाणा) जामताड़ा और सिंहभूमि (झारखंड) से आता है। साइबर जालसाजी बहुस्तरीय संचार और तकनीकी रणनीतियों का उपयोग करते हैं जिससे इन साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें पकड़ना कठिन हो जाता है वह अपनी पहचान और ठिकानों को छुपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का उपयोग करते हैं। इनके पास उनके निर्देशन में काम करने वाले व्यक्तियों का एक बड़ा नेटवर्क होता है जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं कुछ बैंक खाता उपलब्ध कराते हैं कुछ फंड को क्रिप्टो करेंसी में बदलने की सुविधा प्रदान करते हैं जबकि और लोग अवैध आय को निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं।<br />
इन सभी के मुखिया की गुमनामी सुनिश्चित करने के लिए यह सभी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से काम करते हैं जिससे मुखिया के पकड़े जाने की चुनौती कम हो जाती है साइबर अपराध की पीड़ित या तो 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल पर कर सकते हैं वह नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन भी जा सकते हैं</p>
<p style="text-align: center;"><strong>प्रभात भारत कथन </strong></p>
<p><strong>अधिक से अधिक लोग मोबाइल फोन और कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं यह तो तय है कि साइबर अपराध बढ़ेगा समय की मांग है कि अधिक से अधिक सावधानी बरती जाए खासकर रूपयों के लेनदेन से जुड़े मामले में इससे पहले भी यह हम लोग बता चुके हैं और फिर से यह बताना जरूरी है कि अपने पासवर्ड आसान न बनाएं और ओटीपी नंबर कभी भी किसी के भी साथ साझा ना करें</strong></p>
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