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	<title>Cmo gonda Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>आशा बहूओं का चमत्कार: प्राइवेट नर्सिंग होम संचालकों का करोड़ों का कारोबार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 Nov 2024 05:13:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 17 नवंबर। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का जो तंत्र बना है, वह सरकारी योजनाओं और नीतियों को</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 17 नवंबर। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का जो तंत्र बना है, वह सरकारी योजनाओं और नीतियों को कमजोर करते हुए गरीब और जरूरतमंदों को लूटने का एक साधन बन चुका है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने के लिए नियुक्त आशा बहुएं अब प्राइवेट नर्सिंग होम संचालकों के साथ मिलकर एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी हैं। यह नेटवर्क न केवल सरकारी योजनाओं को विफल कर रहा है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों का आर्थिक शोषण भी कर रहा है।</p>
<p><strong>आशा बहुओं की नियुक्ति और उनकी जिम्मेदारियां</strong></p>
<p>आशा बहुओं की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना था। उनके कामों में गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और मां-बच्चे की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करना शामिल है।</p>
<p>इन जिम्मेदारियों के साथ, आशा बहुओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर गर्भवती महिलाओं को लाना और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना होता है। लेकिन गोंडा के ग्रामीण इलाकों में स्थिति कुछ अलग है।</p>
<p><strong>वास्तविकता: जिम्मेदारियों से भटकाव</strong></p>
<p>आशा बहुएं अपने अधिकार क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण तो करती हैं, लेकिन यह प्रक्रिया सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहती। अक्सर वे मरीजों को प्राइवेट नर्सिंग होम तक ले जाती हैं, जहां बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीजों का आर्थिक शोषण किया जाता है।</p>
<p>इन मरीजों को रेफर करने का यह खेल कई बार उनकी सहमति के बिना होता है। आशा बहुओं की यह भूमिका सरकारी योजनाओं के उद्देश्यों के विपरीत है।</p>
<p><strong>रेफरल का खेल: प्राइवेट नर्सिंग होम का जाल</strong></p>
<p>गोंडा जिले के परसपुर और मनकापुर जैसे क्षेत्रों में प्राइवेट नर्सिंग होम तेजी से बढ़े हैं। सूत्रों के अनुसार, ये नर्सिंग होम आशा बहुओं को प्रति मरीज ₹10,000 तक का इंसेंटिव देते हैं। यह रकम मरीजों से वसूले गए भारी-भरकम बिलों से निकाल ली जाती है।</p>
<p>हाल ही में वायरल हुए चैट संदेशों ने इस पूरे तंत्र का पर्दाफाश किया। इन चैट्स में आशा बहुओं और अस्पताल संचालकों के बीच लेन-देन की बातचीत थी। यह चैट साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों से रेफरल के जरिए मरीजों को जानबूझकर प्राइवेट नर्सिंग होम भेजा जाता है।</p>
<p><strong>गोंडा महिला अस्पताल: रेफरल का केंद्र</strong></p>
<p>गोंडा महिला अस्पताल, जो जिले का मुख्य सरकारी अस्पताल है, इस रेफरल तंत्र का एक बड़ा केंद्र बन गया है। मरीजों और उनके परिवारों का आरोप है कि यहां के स्टाफ और डॉक्टर मरीजों को सरकारी अस्पताल में इलाज के बजाय प्राइवेट नर्सिंग होम जाने पर मजबूर करते हैं।</p>
<p><strong>दुर्व्यवहार की शिकायतें</strong></p>
<p>मरीजों के परिवारों ने शिकायत की है कि इलाज के नाम पर उन्हें अनावश्यक जांचें और दवाएं लेने को कहा जाता है। सरकारी अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्टाफ का व्यवहार मरीजों को प्राइवेट अस्पताल जाने के लिए बाध्य करता है।</p>
<p><strong>आशा बहुओं की ताकत और पंचायत पर प्रभाव</strong></p>
<p>आशा बहुएं गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी मानी जाती हैं। लेकिन अब वे पंचायत स्तर पर भी प्रभावशाली बन गई हैं। उनकी नियुक्ति ग्राम प्रधान के प्रस्ताव पर होती है, लेकिन कुछ मामलों में वे प्रधान से भी अधिक शक्तिशाली दिखती हैं।</p>
<p>आशा बहुओं ने प्राइवेट नर्सिंग होम संचालकों के साथ मिलकर एक ऐसा तंत्र खड़ा कर लिया है, जिससे वे मरीजों और उनके परिवारों को अपनी शर्तों पर संचालित कर सकती हैं।</p>
<p><strong>अवैध नर्सिंग होम: गरीबों का शोषण</strong></p>
<p>गोंडा जिले में अवैध नर्सिंग होम कुकुरमुत्तों की तरह फैल गए हैं। ये अस्पताल न केवल स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करते हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों का भीषण शोषण भी करते हैं।</p>
<p><strong>खराब गुणवत्ता और अधिक शुल्क</strong></p>
<p>इन अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बेहद खराब है, लेकिन मरीजों से भारी शुल्क वसूला जाता है। आंकड़ों के अनुसार, इन नर्सिंग होम का फेलियर रेट 60% से अधिक है। इसके बावजूद मरीजों को यहां ले जाना जारी है।</p>
<p><strong>सरकारी योजनाएं: असलियत और असफलता</strong></p>
<p>राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी सरकारी योजनाएं गरीबों और वंचितों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से बनाई गई हैं।</p>
<p>लेकिन गोंडा जिले में इन योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। आशा बहुएं और नर्सिंग होम संचालकों का गठजोड़ इन योजनाओं के उद्देश्यों को विफल कर रहा है।</p>
<p><strong>समाधान और प्रशासन की जिम्मेदारी</strong></p>
<p>गोंडा जिले में स्वास्थ्य तंत्र को सुधारने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>1. रेफरल प्रणाली की जांच</strong></p>
<p>सरकारी अस्पतालों से किए जा रहे हर रेफरल केस की गहन जांच होनी चाहिए। रेफरल में शामिल डॉक्टरों और स्टाफ की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>2. आशा बहुओं की निगरानी</strong></p>
<p>आशा बहुओं के कार्यों की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। उनके बैंक खातों और मरीजों के साथ किए गए व्यवहार की भी जांच होनी चाहिए।</p>
<p><strong>3. अवैध नर्सिंग होम पर कार्रवाई</strong></p>
<p>जिले में चल रहे सभी अवैध नर्सिंग होम की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p><strong>4. सरकारी अस्पतालों में सुधार</strong></p>
<p>सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं, डॉक्टरों की संख्या और उपकरणों में सुधार किया जाना चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।</p>
<p><strong>5. जागरूकता अभियान</strong></p>
<p>गांवों में मरीजों और उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा जिले में आशा बहुओं और प्राइवेट नर्सिंग होम का गठजोड़ गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवा को एक महंगे व्यापार में बदल रहा है।</p>
<p>सरकार की योजनाओं और नीतियों का लाभ तब तक नहीं मिलेगा, जब तक इस भ्रष्ट तंत्र को खत्म नहीं किया जाएगा। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे मिलकर इस समस्या का समाधान करें और ग्रामीण इलाकों में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करें।</p>
<p>जब तक आशा बहुओं के तंत्र और प्राइवेट नर्सिंग होम के गठजोड़ पर रोक नहीं लगती, तब तक गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना एक सपना ही रहेगा।</p>
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		<title>गंभीर रूप से बीमार गर्भवती माताओं को अब नहीं जाना पड़ेगा लखनऊ, गोंडा मेडिकल कॉलेज में होगा इलाज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 07:47:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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		<category><![CDATA[Cms]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda medical college]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 5 नवंबर। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/seriously-ill-pregnant-mothers-will-no-longer-have-to-go-to-lucknow-treatment-will-be-done-at-gonda-medical-college/">गंभीर रूप से बीमार गर्भवती माताओं को अब नहीं जाना पड़ेगा लखनऊ, गोंडा मेडिकल कॉलेज में होगा इलाज</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 5 नवंबर। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। अब यहां स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी सेवा शुरू कर दी गई है, जिससे जिले की महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इस ओपीडी का उद्घाटन प्रधानाचार्य धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने द्वारा किया गया। इस कदम से स्थानीय महिलाओं, विशेषकर गर्भवती माताओं के लिए गोंडा में चिकित्सा का स्तर काफी हद तक उन्नत हो जाएगा, जो पहले केवल लखनऊ या फैजाबाद मेडिकल कॉलेजों में ही उपलब्ध होता था।</p>
<p><strong>ओपीडी सेवा का महत्व</strong></p>
<p>स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी सेवा शुरू होने से गोंडा में रहने वाले लोगों को काफी राहत मिली है। यह सेवा विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि गंभीर स्थितियों में अक्सर मरीजों को रेफर कर दिया जाता था, जिसके बाद उन्हें लखनऊ या फैजाबाद जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था। गर्भावस्था के दौरान कई प्रकार की जटिलताएँ होती हैं, जिनका इलाज समय पर होना जरूरी है। ऐसे में इस नई ओपीडी से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी आपात स्थिति में मरीज को तुरंत इलाज मिल सके और उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।</p>
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<p><strong>स्थानीय समुदाय पर सकारात्मक प्रभाव</strong></p>
<p>गोंडा मेडिकल कॉलेज में इस नई सेवा के शुरू होने से जिले के साथ ही आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी लाभान्वित होंगे। जिले के ज्यादातर गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को प्रसव या अन्य जटिलताओं में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अब इस नई सुविधा से उन्हें समय पर और उचित इलाज मिल सकेगा। इसके साथ ही, गोंडा के लोगों को दूसरे शहरों में जाने के खर्च और समय की बचत भी होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान लंबे सफर से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>भविष्य की योजनाएँ</strong></p>
<p>धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने उद्घाटन समारोह के दौरान बताया कि वर्तमान में सिर्फ ओपीडी सेवा शुरू की गई है, लेकिन भविष्य में वार्ड और छोटे ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यह अपेक्षा की जा रही है कि गोंडा मेडिकल कॉलेज जल्द ही एक पूर्ण स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के रूप में विकसित होगा। इसके तहत छोटे ऑपरेशनों के लिए उपकरणों और अन्य मेडिकल सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।</p>
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<p><strong>गर्भवती माताओं के इलाज में सुधार की दिशा</strong></p>
<p>गर्भवती महिलाओं को गंभीर स्थिति में रेफर करना एक बड़ी समस्या रही है। कई बार समय पर इलाज न मिलने की वजह से उनकी जान को भी खतरा रहता है। लखनऊ या फैजाबाद जैसे दूर के मेडिकल कॉलेजों में जाने के दौरान मरीजों को लंबे सफर से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ सकती है। इस नई ओपीडी सेवा से इन समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की मौजूदगी से गंभीर केस भी तुरंत संभाले जा सकेंगे, जिससे मरीजों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की ओर कदम</strong></p>
<p>गोंडा में इस नई सेवा का शुरू होना इस बात का संकेत है कि स्थानीय प्रशासन स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने के प्रति गंभीर है। यह स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल गोंडा बल्कि आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा। इस पहल से यह संदेश मिलता है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी संस्थान भी गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस ओपीडी सेवा के साथ गोंडा मेडिकल कॉलेज में अन्य चिकित्सा सुविधाओं का भी विस्तार होना अपेक्षित है, जिससे यह संस्थान एक आदर्श चिकित्सा केंद्र के रूप में उभर सकेगा।</p>
<p><strong>ओपीडी का महत्व एवं संभावित लाभ</strong></p>
<p>गोंडा मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी के शुरू होने से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा, जो पहले केवल बड़े शहरों में ही उपलब्ध था। इस कदम से न केवल महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होगा बल्कि उन्हें समय पर चिकित्सा सेवा मिलने के साथ ही उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।</p>
<p><strong>ओपीडी सेवा का विस्तृत स्वरूप</strong></p>
<p>गोंडा मेडिकल कॉलेज में नई ओपीडी सेवा का आरंभ होने से इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को व्यापक लाभ मिलेगा। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में कई आवश्यक सेवाएं शामिल की गई हैं, जैसे गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल देखभाल, प्रसव संबंधी समस्याओं की पहचान, और शुरुआती स्तर पर जटिलताओं के इलाज की सुविधा। इससे न केवल गर्भवती महिलाओं को बेहतर देखभाल मिलेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति समय पर मॉनिटर की जा सके।</p>
<p>गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई प्रकार की मेडिकल सहायता की आवश्यकता होती है, जैसे पोषण संबंधी सलाह, ब्लड प्रेशर और शुगर का नियमित परीक्षण, और आवश्यक विटामिन व दवाओं की जानकारी। अब गोंडा मेडिकल कॉलेज में इन सभी सेवाओं का समुचित इंतजाम किया गया है, जिससे महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संबंधी सहायता मिल सकेगी।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की भूमिका और प्रशिक्षण</strong></p>
<p>ओपीडी के उद्घाटन के साथ ही मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी तैयार की गई है, जो गर्भवती महिलाओं की जाँच और इलाज में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। इससे पहले जिले के कई अस्पतालों में प्रसूति रोग विशेषज्ञों की कमी थी, जिसके चलते गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर करना पड़ता था। धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने के अनुसार, अब इस ओपीडी में अनुभवी डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है, जो गंभीर मामलों का भी सफलतापूर्वक प्रबंधन कर सकते हैं। इन डॉक्टरों के साथ-साथ सहायक स्टाफ को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।</p>
<p>विशेषज्ञों की मौजूदगी से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि प्रसूति से जुड़ी हर तरह की जटिलताएँ तुरंत संभाली जा सकें। इन डॉक्टरों का प्रशिक्षण और उनके द्वारा मरीजों को दी जाने वाली सेवा गोंडा में स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।</p>
<p><strong>वित्तीय लाभ और सुविधा</strong></p>
<p>गर्भवती माताओं के लिए लखनऊ या फैजाबाद के बड़े अस्पतालों में इलाज कराना आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण था। यात्रा और इलाज के खर्च के कारण कई परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता था। अब गोंडा में ही मेडिकल कॉलेज में प्रसूति से संबंधित इलाज उपलब्ध होने से इन खर्चों में कमी आएगी। यह सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी, जो लंबे सफर और खर्चों के कारण उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते थे।</p>
<p>इस नई सेवा से अब गोंडा के मरीजों को न केवल बेहतरीन इलाज मिलेगा बल्कि वे अपने शहर में ही रहकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे न केवल पैसे की बचत होगी, बल्कि वे मानसिक रूप से भी तनावमुक्त रहेंगे कि उन्हें अपने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>मातृ मृत्यु दर में कमी का प्रयास</strong></p>
<p>भारत में मातृ मृत्यु दर एक प्रमुख चिंता का विषय है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। गर्भवती माताओं के लिए समय पर इलाज न मिलने से उनकी जान को खतरा बना रहता है। गोंडा मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी सेवा का आरंभ इस दिशा में एक सार्थक पहल है। इसके माध्यम से समय पर इलाज और जटिलताओं की पहचान हो सकेगी, जिससे मातृ मृत्यु दर में भी कमी लाई जा सकती है।</p>
<p>उदाहरण के तौर पर, गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप या शुगर जैसी समस्याओं का समय पर निदान होने से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है, जो कई बार जटिलताओं का कारण बनती हैं। इस ओपीडी में नियमित रूप से जांच कर इन समस्याओं पर काबू पाया जा सकेगा।</p>
<p><strong>समाज पर सकारात्मक प्रभाव</strong></p>
<p>गोंडा के मेडिकल कॉलेज में इस नई सुविधा का आरंभ केवल एक चिकित्सा सेवा नहीं है, बल्कि यह समाज पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी। इससे स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, और महिलाएँ अपनी सेहत को लेकर अधिक सचेत होंगी। गर्भवती महिलाओं के इलाज के साथ-साथ उनका संपूर्ण स्वास्थ्य भी ओपीडी में मॉनिटर किया जाएगा, जिससे उनकी संपूर्ण सेहत में सुधार होगा।</p>
<p><strong>सरकारी प्रयासों का एक हिस्सा</strong></p>
<p>गोंडा मेडिकल कॉलेज में प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी शुरू होना सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इस पहल से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में और भी कई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा</p>
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		<title>होप स्कैनिंग सेंटर की गलत रिपोर्ट और डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की जान खतरे में</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/wrong-report-of-hope-scanning-center-and-negligence-of-doctors-put-the-childs-life-in-danger/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Oct 2024 02:05:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 24 अक्टूबर। कहला तेन्दुआ गाँव के निवासी महेश कुमार मिश्रा के बेटे, शक्ति मिश्रा की जान पर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/wrong-report-of-hope-scanning-center-and-negligence-of-doctors-put-the-childs-life-in-danger/">होप स्कैनिंग सेंटर की गलत रिपोर्ट और डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चे की जान खतरे में</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 24 अक्टूबर। कहला तेन्दुआ गाँव के निवासी महेश कुमार मिश्रा के बेटे, शक्ति मिश्रा की जान पर उस समय खतरा मंडराने लगा जब उसे एक गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर इलाज किया गया। यह लापरवाही गोण्डा के एक प्रतिष्ठित मेडिकल सेंटर, होप स्कैनिंग सेंटर की ओर से की गई, जहां से उसे किसी और व्यक्ति की रिपोर्ट दी गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया, जिससे बच्चे की हालत और गंभीर हो गई। मामला तब और उलझ गया जब रिपोर्ट में दिखाए गए मरीज की उम्र और बीमारी भी शक्ति मिश्रा से मेल नहीं खाती थी। इस घटना ने न केवल परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ दिया, बल्कि बच्चे की जान पर भी बन आई।</p>
<p><strong>प्रारंभिक लक्षण और गलत इलाज की शुरुआत</strong></p>
<p>शक्ति मिश्रा की तबीयत 9 फरवरी 2024 को अचानक खराब हो गई। उसे पेट में असहनीय दर्द हो रहा था। महेश कुमार मिश्रा अपने बेटे को लेकर गोण्डा के एससीपीएम हॉस्पिटल गए, जहां डॉक्टर ओएन पांडेय ने प्रारंभिक जांच के बाद दवा दी और उसे घर भेज दिया। लेकिन कुछ ही दिनों बाद, 12 फरवरी को फिर से शक्ति को भयंकर दर्द होने लगा। इस बार डॉक्टर क्षितिज शरण, जो गैस्ट्रोलॉजी के विशेषज्ञ हैं, ने उन्हें एमआरसीपी (Magnetic Resonance Cholangiopancreatography) की रिपोर्ट लाने का निर्देश दिया।</p>
<p>परिवार होप स्कैनिंग सेंटर गया, जहां शक्ति की जांच कराई गई। अगले दिन, 13 फरवरी को, रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टर क्षितिज शरण ने रिपोर्ट देखकर कहा कि शक्ति मिश्रा को पैंक्रियाज (अग्न्याशय) की गंभीर समस्या है। उन्होंने बताया कि उसके पैंक्रियाज की नली में रुकावट है, जिसके कारण दवा लंबी अवधि तक चलानी पड़ेगी। डॉक्टर की सलाह पर शक्ति को 15 फरवरी को डिस्चार्ज कर दिया गया और उसे दवा जारी रखने के लिए कहा गया।</p>
<p><strong>दूसरी राय और हालात का बिगड़ना</strong></p>
<p>हालांकि, शक्ति को कोई विशेष आराम नहीं मिला। 18 फरवरी की रात को, दर्द फिर से बढ़ गया। परिवार उसे बहराइच के माही ग्लोबल हॉस्पिटल ले गया, जहां डॉक्टर मोहम्मद आवेश ने इलाज किया। थोड़े समय के लिए स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन 25 फरवरी को फिर से शक्ति की हालत गंभीर हो गई। इस बार परिवार उसे गोण्डा और बहराइच के अस्पतालों में इलाज कराने की बजाय लखनऊ के चौधरी गैस्ट्रो सेंटर में डॉक्टर ए.के. चौधरी को दिखाने ले गया।</p>
<p>लखनऊ में डॉक्टरों को होप स्कैनिंग सेंटर की रिपोर्ट दिखाई गई, और उसी के आधार पर इलाज शुरू हुआ। लेकिन रिपोर्ट की गलतियों के कारण बच्चे को राहत नहीं मिली। इसके बाद, डॉक्टर सुधाकर पांडेय के यहां दिखाया गया, जिन्होंने 4 मार्च तक दवा दी, लेकिन तब तक भी शक्ति को कोई खास फायदा नहीं हुआ। इसी दौरान डॉक्टरों ने दूसरी बार भी गलत रिपोर्ट पर इलाज किया और बच्चा लगातार दर्द से जूझता रहा।</p>
<p><strong>असलियत का खुलासा: गलत रिपोर्ट का पता चलना</strong></p>
<p>स्थिति तब और खराब हो गई जब 12 मार्च 2024 को शक्ति मिश्रा को देवी शिव हॉस्पिटल में डॉक्टर संजय श्रीवास्तव को दिखाया गया। डॉक्टर संजय श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें डॉक्टर देवनन्दन चौधरी से सलाह लेनी चाहिए। इस बार पीजीआई लखनऊ के डॉक्टर रजनीश सिंह ने रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ा और कहा कि यह रिपोर्ट शक्ति मिश्रा की नहीं बल्कि राममिलन गोस्वामी नामक 62 वर्षीय व्यक्ति की है। रिपोर्ट में मरीज की उम्र, बीमारी, और अन्य जानकारी पूरी तरह से शक्ति मिश्रा से मेल नहीं खाती थी।</p>
<p>डॉक्टर रजनीश सिंह ने रिपोर्ट के आधार पर परिवार को सचेत किया कि अब तक जो भी इलाज हुआ है, वह गलत रिपोर्ट पर आधारित था और शक्ति की तबीयत खराब होती जा रही थी। उन्होंने परिवार से कहा कि असली रिपोर्ट के आधार पर सही इलाज शुरू किया जाए। इस खुलासे ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया। इतने समय से शक्ति की तबीयत खराब होती जा रही थी, और यह सब एक गलत रिपोर्ट के कारण हो रहा था।</p>
<p><strong>होप स्कैनिंग सेंटर की लापरवाही</strong></p>
<p>महेश कुमार मिश्रा ने जब इस गंभीर लापरवाही की शिकायत होप स्कैनिंग सेंटर से की, तो उन्होंने पहले तो टाल-मटोल किया। बाद में 2 मार्च 2024 को सेंटर ने एक नई रिपोर्ट दी, लेकिन वह भी गलत थी और राममिलन गोस्वामी की ही थी। सेंटर ने किसी भी तरह की गलती मानने से इंकार कर दिया और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।</p>
<p>महेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 15 लाख रुपये से ज्यादा सिर्फ गलत दवाइयों पर खर्च किए और उनका बेटा अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया है। सेंटर की गलती के कारण शक्ति की जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। इस तरह की लापरवाही एक जीवन के साथ खिलवाड़ करने के समान है।</p>
<p><strong>चिकित्सा जगत में ऐसी लापरवाहियों की व्यापकता</strong></p>
<p>यह घटना केवल एक अकेला मामला नहीं है, बल्कि ऐसी लापरवाहियों की कई घटनाएं सामने आती रहती हैं। मेडिकल सेंटर और डॉक्टरों की जिम्मेदारी होती है कि वे मरीजों को सही रिपोर्ट और इलाज उपलब्ध कराएं। लेकिन कई बार जांच सेंटर और डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। इस मामले में, होप स्कैनिंग सेंटर की ओर से की गई लापरवाही ने परिवार को मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से तोड़ दिया है।</p>
<p>मेडिकल जांच रिपोर्ट में गलती, और फिर डॉक्टरों द्वारा बिना सही जांच के इलाज शुरू करना, यह सब एक बड़े प्रश्नचिह्न को जन्म देता है कि क्या हमारा चिकित्सा जगत इतनी बड़ी लापरवाही बर्दाश्त कर सकता है? अगर इस मामले में सही समय पर सच्चाई सामने नहीं आती, तो शक्ति की जान भी जा सकती थी।</p>
<p><strong>कानूनी कार्यवाही और प्रशासन की भूमिका</strong></p>
<p>महेश कुमार मिश्रा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कोतवाली नगर, गोण्डा थाने में एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी पत्र लिखकर इस लापरवाही की शिकायत की, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। फिर महेश कुमार ने न्यायालय की शरण ली और अब न्यायालय के आदेश पर नगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर ली गई है उनका कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए और होप स्कैनिंग सेंटर की इस घोर लापरवाही के लिए कड़ी सजा होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने इस तरह के मेडिकल सेंटरों की जांच और उन पर सख्त कार्यवाही की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और मरीज की जान खतरे में न पड़े।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>होप स्कैनिंग सेंटर की गलत रिपोर्ट और डॉक्टरों की लापरवाही से एक मासूम बच्चे की जान खतरे में पड़ गई। यह घटना हमारे चिकित्सा तंत्र में फैली लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी को उजागर करती है। अगर सही समय पर मामले की जांच नहीं होती, तो शक्ति मिश्रा की जान जा सकती थी। इस घटना ने न केवल परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि हमारे चिकित्सा तंत्र की गंभीर खामियों को भी उजागर किया है।</p>
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