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	<title>called it shameful and condemnable Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>महाराष्ट्र की घटना पर मायावती ने जताई नाराजगी, घटना को बताया शर्मनाक और निंदनीय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Dec 2024 03:58:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[Bahujan samaj party]]></category>
		<category><![CDATA[BSP]]></category>
		<category><![CDATA[called it shameful and condemnable]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati expressed her displeasure over the incident in Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 12 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने महाराष्ट्र के परभणी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/mayawati-expressed-her-displeasure-over-the-incident-in-maharashtra-called-it-shameful-and-condemnable/">महाराष्ट्र की घटना पर मायावती ने जताई नाराजगी, घटना को बताया शर्मनाक और निंदनीय</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 12 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने महाराष्ट्र के परभणी में घटी एक संवेदनशील घटना को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस घटना में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और भारतीय संविधान का अपमान किया गया। मायावती ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे &#8220;अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक&#8221; करार दिया।</p>
<p>बसपा प्रमुख ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट &#8216;एक्स&#8217; (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह घटना न केवल बाबा साहेब का अपमान है, बल्कि भारतीय संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की बुनियादी मूल्यों पर भी हमला है। उन्होंने लिखा कि इस घटना से उनकी पार्टी गहरी चिंता और दुख महसूस कर रही है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-4424 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1768" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-300x207.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>मायावती ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि ऐसे जातिवादी और असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर दोषियों को दंडित नहीं किया गया, तो इससे राज्य में अशांति और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने सभी लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील भी की।</p>
<p>डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल दलित समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। संविधान के रचयिता के तौर पर उनकी भूमिका और समाज में समानता लाने के उनके प्रयासों ने उन्हें हर वर्ग के लोगों के दिलों में खास स्थान दिया है। उनकी प्रतिमा का अपमान न केवल दलित समुदाय के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरी चोट है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">कांग्रेस ने सदैव ही सनातन धर्म का अपमान किया है। जो हमारे लिए आस्था का विषय है वह उनके लिए राजनीति का विषय है। <a href="https://t.co/lgiJg2ryMt">pic.twitter.com/lgiJg2ryMt</a></p>
<p>&mdash; Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) <a href="https://twitter.com/pushkardhami/status/1858484165576200659?ref_src=twsrc%5Etfw">November 18, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>बसपा की चिंता और राजनीतिक प्रभाव</strong></p>
<p>मायावती के इस कड़े बयान ने बसपा के राजनीतिक रुख को और मजबूत किया है। बसपा ने हमेशा से ही अंबेडकरवादी विचारधारा को केंद्र में रखते हुए दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। इस घटना पर मायावती की तीखी प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।</p>
<p>इस मामले में बसपा का कड़ा रुख उनकी उस नीति का हिस्सा है, जो दलित समुदाय को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। मायावती का बयान दर्शाता है कि बसपा इस मामले को न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में राजनीतिक चर्चा का मुद्दा बनाएगी।</p>
<p>मायावती ने अपने बयान में कहा कि ऐसी घटनाएं केवल अराजक तत्वों की कायरता और संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने इस घटना को भारतीय समाज की सामाजिक समरसता और समानता के लिए बड़ा खतरा बताया।</p>
<p><strong>घटना का विश्लेषण और सामाजिक प्रभाव</strong></p>
<p>बाबा साहेब की प्रतिमा और संविधान का अपमान भारतीय समाज की सामाजिक संरचना पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह घटना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह जातिवादी मानसिकता और असमानता का एक प्रतीक भी है, जो भारतीय समाज में गहराई से व्याप्त है।</p>
<p>डॉ. अंबेडकर ने अपने जीवन में जिन मूल्यों की स्थापना की—समानता, सामाजिक न्याय, और समरसता—उन पर इस घटना ने चोट पहुंचाई है। बाबा साहेब की विचारधारा ने न केवल दलित समुदाय को सशक्त किया, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को भी मजबूत आधार प्रदान किया।</p>
<p><strong>दलित समुदाय और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>परभणी में घटी इस घटना के बाद महाराष्ट्र सहित पूरे देश में दलित समुदाय और अंबेडकरवादी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दलित समुदाय ने इस घटना को अपने सम्मान पर हमला माना है। कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने प्रदर्शन कर दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।</p>
<p>सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल एक व्यक्ति या समुदाय पर हमला नहीं होतीं, बल्कि यह समाज में व्याप्त गहरी असमानता और भेदभाव को भी उजागर करती हैं। उन्होंने इस घटना को एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया है।</p>
<p><strong>राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।</p>
<p>महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे जातिवादी और असामाजिक तत्वों को बढ़ावा क्यों मिल रहा है। कई राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव</strong></p>
<p>यह घटना न केवल महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। बसपा जैसी पार्टियां इसे आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बना सकती हैं। मायावती के बयान के बाद अन्य दलों से भी इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।</p>
<p>मायावती का यह बयान उनके दलित समर्थकों के बीच उनकी पकड़ को मजबूत करता है। उन्होंने इस घटना को राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति अपनाई है। इसके अलावा, उन्होंने बाबा साहेब की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया है।</p>
<p>महाराष्ट्र के परभणी में बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा और संविधान का अपमान केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में गहरे जातिवाद और असमानता की समस्या को उजागर करता है। मायावती का कड़ा रुख और उनकी मांग ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर ला दिया है।</p>
<p>डॉ. अंबेडकर के योगदान को सम्मान देना और उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाना हर नागरिक का कर्तव्य है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए न केवल सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है, बल्कि समाज को भी जागरूक और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। मायावती ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया है, वह न केवल दलित समुदाय, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश है।</p>
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