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	<title>BSA Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>डिजिटल अटेंडेंस की शुरुआत के साथ 50 या 50 से कम छात्रों के नामांकन वाले परिषदीय विद्यालय होंगे मर्ज</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/with-the-introduction-of-digital-attendance-council-schools-with-enrollment-of-50-or-less-students-will-be-merged/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Nov 2024 23:49:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[BSA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों का नए सिरे से होगा आकलन: घटते नामांकन वाले विद्यालय होंगे मर्ज, जर्जर</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों का नए सिरे से होगा आकलन: </strong><strong>घटते नामांकन वाले विद्यालय होंगे मर्ज, जर्जर भवनों का जल्द होगा ध्वस्तीकरण</strong></p>
<p>लखनऊ 3 नवंबर। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में घटते नामांकन के कारण बच्चों की शिक्षा पर व्यापक असर हो रहा है। राज्य सरकार ने बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उन विद्यालयों का पास के बड़े विद्यालयों में संविलियन (मर्ज) कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां नामांकन 50 से कम है। इसके अतिरिक्त, जर्जर विद्यालय भवनों का एक महीने के भीतर ध्वस्तीकरण करने का निर्देश भी जारी किया गया है। इस नई नीति के तहत परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और एक सुरक्षित वातावरण का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p><strong>प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में संविलियन नीति का उद्देश्य</strong></p>
<p>प्रदेश के शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों की घटती संख्या से विद्यालय की उपयोगिता कम हो जाती है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जहां विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम हो जाती है, वहां शिक्षकों और संसाधनों की कमी और भी बढ़ जाती है। इस नीति के तहत 50 से कम नामांकन वाले विद्यालयों को पास के अन्य बड़े विद्यालयों में मर्ज किया जाएगा ताकि बच्चों को एक समृद्ध और प्रगतिशील शैक्षिक वातावरण मिल सके।</p>
<p>शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में इस समय कुल बच्चों की संख्या लगभग 1.49 करोड़ है, लेकिन छोटे-छोटे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति न्यूनतम रह गई है। प्रदेश के मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और बेसिक शिक्षा अधिकारियों की हाल ही में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी गई कि नामांकन घटने के कारण शिक्षा का स्तर गिरने का खतरा है और इसी को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने संविलियन योजना को प्राथमिकता दी है।</p>
<p><strong>जर्जर विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण</strong></p>
<p>प्रदेश में कई विद्यालय भवन ऐसे हैं, जो अत्यधिक जर्जर हो चुके हैं। शिक्षा विभाग के महानिदेशक कंचन वर्मा ने इस संदर्भ में जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे ऐसे भवनों का ध्वस्तीकरण सुनिश्चित करें, जहां सुरक्षा के लिहाज से भवन स्थायित्व की स्थिति में नहीं हैं। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि बच्चों को असुरक्षित भवनों में पढ़ाई के लिए न भेजा जाए और उन्हें किसी भी तरह के हादसे से बचाया जा सके।</p>
<p>ध्वस्तीकरण के साथ-साथ, विभाग यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि जिन विद्यालय भवनों की मरम्मत की आवश्यकता है, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाए। हालांकि, यदि विद्यालय में पर्याप्त संख्या में कक्षाएं सुरक्षित रूप से उपलब्ध हैं तो पुर्ननिर्माण का प्रस्ताव नहीं भेजा जाएगा। इसके बजाय, भवन के पुनर्विकास के लिए एक नई योजना बनाई जाएगी।</p>
<p><strong>हर जिले में बनेगी एक संयुक्त रिपोर्ट बुकलेट</strong></p>
<p>महानिदेशक कंचन वर्मा ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि 50 से कम नामांकन वाले विद्यालयों की एक संयुक्त रिपोर्ट बुकलेट तैयार करें। इस बुकलेट में प्रत्येक विद्यालय की संपूर्ण जानकारी होगी, जैसे कि विद्यालय की स्थिति, बच्चों की संख्या, भवन की संरचना, दूरी, सड़क और परिवहन सुविधाएं आदि। इसका उद्देश्य यह है कि इन विद्यालयों के संबंध में एक समग्र विश्लेषण किया जा सके और इसके आधार पर ही मर्ज करने का निर्णय लिया जा सके।</p>
<p>इस रिपोर्ट बुकलेट को 13-14 नवंबर को प्रस्तावित बेसिक शिक्षा अधिकारियों की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां परिषदीय विद्यालयों की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।</p>
<p><strong>संविलियन की प्राथमिकताएं और कार्ययोजना</strong></p>
<p>संविलियन नीति के तहत हर जिले में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पास के विद्यालय में बच्चों को सुविधाजनक और सुरक्षित पहुंच मिल सके। इसके लिए शिक्षा विभाग प्रत्येक ग्राम पंचायत में मानक विद्यालय की उपस्थिति की जांच कर रहा है। इसके साथ ही इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि किस विद्यालय को पास के अन्य विद्यालय में मर्ज किया जा सकता है।</p>
<p>संविलियन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें विद्यालय से दूसरे विद्यालय तक जाने की दूरी, परिवहन की उपलब्धता, नहर, नाला, सड़क या हाइवे आदि का ध्यान रखा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों के आने-जाने में कोई असुविधा न हो और उन्हें एक सुदृढ़ शिक्षा का वातावरण मिल सके।</p>
<p><strong>डिजिटल अटेंडेंस और अन्य सुविधाएं</strong></p>
<p>प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों की डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। महानिदेशक कंचन वर्मा ने शिक्षकों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अटेंडेंस प्रणाली को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों की उपस्थिति छोड़कर, छात्रों की उपस्थिति और मिड-डे मील के संबंध में डिजिटल पंजिका पर जानकारी अपडेट की जाएगी।</p>
<p>यह देखा गया है कि अभी केवल कुछ जिलों, जैसे कि प्रयागराज, कौशांबी, भदोही, अलीगढ़, हापुड़, और बुलंदशहर में ही इस दिशा में कदम उठाए गए हैं। अब सभी जिलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि डिजिटल पंजिका के माध्यम से सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इसका उद्देश्य यह है कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता बनी रहे और बच्चों को समय पर मिड-डे मील जैसी सुविधाएं प्राप्त हों।</p>
<p><strong>केंद्र और राज्य सरकार की अपेक्षाएं</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों को पूरी तरह से क्रियाशील और उपयोगी बनाया जाए। इसी क्रम में, केंद्र सरकार ने छोटे नामांकन वाले विद्यालयों का पास के अन्य बड़े विद्यालयों में मर्ज करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी बच्चे एक व्यवस्थित और सुविधाजनक शिक्षा व्यवस्था का लाभ उठा सकें।</p>
<p>प्रदेश सरकार ने केंद्र के निर्देशों का पालन करते हुए, राज्य में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने एक व्यापक योजना बनाई है, जिसमें बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, अध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।</p>
<p><strong>संविलियन से होने वाले लाभ</strong></p>
<p>सरकार का मानना है कि संविलियन प्रक्रिया से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा। छोटे विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होने के कारण, शिक्षण का स्तर प्रभावित होता है और संसाधनों की कमी भी महसूस होती है। जब इन छोटे विद्यालयों का मर्ज किया जाएगा, तो शिक्षकों और संसाधनों का उचित प्रबंधन हो सकेगा।</p>
<p>इस प्रक्रिया से सरकारी विद्यालयों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा का संचार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अतिरिक्त, अध्यापक भी एक बड़े समूह में पढ़ा सकेंगे जिससे उनकी शिक्षण गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।</p>
<p><strong>ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा</strong></p>
<p>इस योजना के तहत विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकतर ग्रामीण विद्यालयों में नामांकन संख्या में कमी देखी गई है, जिससे इन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर घटा है। संविलियन प्रक्रिया के माध्यम से इन विद्यालयों को एक व्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण में तब्दील किया जाएगा।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है, वहां स्कूलों का मर्ज करके यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को एक स्थिर और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण मिले। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण इलाकों में जर्जर भवनों को ध्वस्त करके बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है।</p>
<p><strong>संविलियन प्रक्रिया का दीर्घकालिक प्रभाव</strong></p>
<p>संविलियन की यह नीति केवल एक तात्कालिक कदम नहीं है बल्कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव भी होगा। इससे न केवल बच्चों को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार मिलेगा, बल्कि सरकारी संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा।</p>
<p>अधिकांश छोटे विद्यालयों में केवल एक या दो शिक्षक होते हैं, जिससे पढ़ाई का स्तर प्रभावित होता है। मर्ज प्रक्रिया से अब अधिक शिक्षकों की उपस्थिति संभव होगी और विद्यार्थियों को एक बेहतर वातावरण मिलेगा।</p>
<p>प्रदेश सरकार की यह नीति न केवल बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करेगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी एक नई दिशा प्रदान करेगी। नामांकन घटते विद्यालयों का पास के विद्यालयों में मर्ज और जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव है। इससे बच्चों को सुविधाजनक, सुरक्षित और गुणवत्ता युक्त शिक्षा का अवसर मिलेगा।</p>
<p>प्रदेश की इस नई शिक्षा नीति से यह स्पष्ट है कि सरकार बच्चों के भविष्य के प्रति संजीदा है और शिक्षा के हर क्षेत्र में सुधार के लिए तत्पर है।</p>
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		<title>गोंडा के कर्नलगंज क्षेत्र के विद्यालय में प्रधानाध्यापक की दबंगई: मासूम बच्चों की बेरहमी से पिटाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Oct 2024 06:36:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 24 अक्टूबर। शिक्षा का मंदिर, जहां बच्चों को ज्ञान की रोशनी मिलनी चाहिए, वह आज अत्याचार का</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 24 अक्टूबर। शिक्षा का मंदिर, जहां बच्चों को ज्ञान की रोशनी मिलनी चाहिए, वह आज अत्याचार का स्थल बन गया है। कर्नलगंज शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय रामपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक गजाधर सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह मासूम बच्चों की बेरहमी से डंडे से पिटाई करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने न केवल अभिभावकों को हिला दिया है, बल्कि पूरे गोंडा जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला बच्चों के साथ हिंसा और अभद्रता का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर शिक्षा के इन पवित्र स्थलों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित है या नहीं।</p>
<p><strong>घटना का विवरण</strong></p>
<p>प्रभारी प्रधानाध्यापक गजाधर सिंह पर आरोप है कि वह न केवल छोटे-छोटे मासूम बच्चों की नियमित रूप से पिटाई करते हैं, बल्कि उन्होंने विद्यालय परिसर के एक कमरे को भी कब्जे में कर रखा है, जहां वह विद्यालय के परिसर में ही रह रहे हैं। वायरल हो रहे वीडियो में गजाधर सिंह कई बार बच्चों पर क्रूरता करते हुए नजर आ रहे हैं, जो उनकी दमनकारी प्रवृत्ति और अनुचित व्यवहार को स्पष्ट करता है।</p>
<p><strong>पहला वीडियो: बच्चों की पंक्ति में खड़े मासूम की पिटाई</strong></p>
<p>पहले वायरल वीडियो में, जो कि कंपोजिट विद्यालय रामपुर के प्रांगण में शूट किया गया है, प्रधानाध्यापक गजाधर सिंह कई बच्चों की उपस्थिति में एक छोटे बच्चे की बेरहमी से पिटाई कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि वह बच्चा अपनी गलती के बारे में बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रधानाध्यापक उसकी बात सुनने की बजाय उस पर लगातार डंडे से वार कर रहे हैं। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर आने के बाद से अभिभावक और स्थानीय लोग गहरे आक्रोश में हैं।</p>
<p><strong>दूसरा वीडियो: बरामदे में बैठे बच्चे की पिटाई</strong></p>
<p>दूसरे वायरल वीडियो में गजाधर सिंह विद्यालय के बरामदे में बैठे एक अन्य बच्चे को डंडे से मारते नजर आते हैं। वीडियो से स्पष्ट होता है कि यह पिटाई किसी अनुशासनात्मक उद्देश्य के बजाय केवल दबंगई और क्रूरता का प्रदर्शन है। इस तरह की घटनाएं बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालती हैं और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती हैं।</p>
<p><strong>तीसरा वीडियो: सवाल न बता पाने पर बच्चों की पिटाई</strong></p>
<p>तीसरे वायरल वीडियो में गजाधर सिंह बच्चों की लाइन लगवाकर एक-एक से सवाल पूछ रहे हैं। जब कोई बच्चा सही उत्तर नहीं दे पाता, तो उसे डंडे से बेरहमी से मारा जाता है। यह घटना न केवल शिक्षा के मूल्यों का उल्लंघन है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ मानसिक और शारीरिक हिंसा की जा रही है।</p>
<p><strong>वायरल वीडियो के परिणाम</strong></p>
<p>जब से ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, गोंडा जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने तत्काल मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि दोषी पाए जाने पर प्रधानाध्यापक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>अभिभावकों और स्थानीय निवासियों का आक्रोश</strong></p>
<p>विद्यालय में इस तरह की घटनाओं के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। बच्चों के परिजन इस बात से नाखुश हैं कि जिस जगह पर उनके बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा मिलनी चाहिए, वहां वे हिंसा का शिकार हो रहे हैं।</p>
<p><strong>शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>गोंडा बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना है कि &#8220;हम बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति बेहद गंभीर हैं। इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और यदि गजाधर सिंह दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें तत्काल निलंबित किया जाएगा। साथ ही इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।&#8221;</p>
<p><strong>बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन</strong></p>
<p>यह घटना न केवल शिक्षा व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह बाल अधिकारों और सुरक्षा कानूनों के भी गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करती है। भारत में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई कड़े कानून बनाए गए हैं, जैसे कि बाल संरक्षण अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम। इन कानूनों के तहत किसी भी बच्चे के साथ हिंसा या दुर्व्यवहार को अपराध माना जाता है। लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इन कानूनों का सही ढंग से पालन हो रहा है?</p>
<p><strong>प्रधानाध्यापक का बचाव</strong></p>
<p>वहीं, प्रधानाध्यापक गजाधर सिंह का कहना है कि यह वीडियो एक साजिश के तहत बनाया गया है ताकि उनकी छवि को धूमिल किया जा सके। उन्होंने अपनी सफाई में कहा है कि वह बच्चों के अनुशासन और बेहतर भविष्य के लिए कठोर कदम उठा रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य बच्चों को नुकसान पहुंचाना नहीं था। हालांकि, वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही क्रूरता उनके दावों के विपरीत है, और यह देखना होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या निष्कर्ष निकाला जाता है।</p>
<p><strong>बच्चों की मानसिक स्थिति पर प्रभाव</strong></p>
<p>इस तरह की घटनाएं बच्चों के मानसिक विकास और उनके आत्मविश्वास पर गहरा असर डालती हैं। कई मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि विद्यालय में इस प्रकार की हिंसा बच्चों के अंदर भय और असुरक्षा का भाव पैदा करती है। इससे न केवल उनका शैक्षिक प्रदर्शन प्रभावित होता है, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बच्चों को सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि वे अपने शैक्षिक लक्ष्यों को हासिल कर सकें और उनका संपूर्ण विकास हो सके।</p>
<p><strong>सरकार और समाज की भूमिका</strong></p>
<p>इस घटना के बाद समाज में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे इस तरह की घटनाओं की गंभीरता से जांच करें और सुनिश्चित करें कि शिक्षा के इन मंदिरों में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।</p>
<p>कंपोजिट विद्यालय रामपुर की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है। बच्चों के साथ इस प्रकार की हिंसा न केवल उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यह समाज के समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी प्रस्तुत करती है कि हमें अपने बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को गंभीरता से लेना होगा। प्रधानाध्यापक गजाधर सिंह के खिलाफ जांच के परिणाम के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटना के पीछे की सच्चाई क्या है, लेकिन इतना निश्चित है कि इस घटना ने गोंडा जिले में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>अभी यह देखना बाकी है कि क्या इस घटना के बाद शिक्षा विभाग इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ भुला दिया जाएगा।</p>
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		<title>गोंडा: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रधानाचार्य पद पर अवैध कब्जा, तबादले के बाद भी कार्य जारी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/gonda-illegal-occupation-of-the-post-of-principal-in-district-education-and-training-institute-work-continues-even-after-transfer/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 07:00:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[Cm Yogi Adityanath]]></category>
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		<category><![CDATA[Yateendra kumar]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 14 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आ रही है,</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/gonda-illegal-occupation-of-the-post-of-principal-in-district-education-and-training-institute-work-continues-even-after-transfer/">गोंडा: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रधानाचार्य पद पर अवैध कब्जा, तबादले के बाद भी कार्य जारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 14 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जो राज्य के शिक्षा तंत्र में हो रही अनियमितताओं को उजागर करती है। गोंडा के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में प्रधानाचार्य पद पर अवैध रूप से कब्जा करने और तबादले के बाद भी कार्य जारी रखने का मामला सामने आया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>
<p>गोंडा के DIET संस्थान में प्रधानाचार्य पद पर बलरामपुर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से हिफ्जुर्रहमान का 30 जून को तबादला हुआ था। तबादले के बाद यह उम्मीद थी कि वह अपना नया कार्यभार संभालेंगे, लेकिन मामला तब जटिल हो गया जब 20 सितंबर को उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव यतींद्र कुमार द्वारा एक आदेश जारी किया गया, जिसमें हिफ्जुर्रहमान का तबादला निरस्त करते हुए उन्हें उपनिदेशक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के पद पर भेजने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद, हिफ्जुर्रहमान ने गोंडा के DIET संस्थान में अपने पद पर कब्जा बनाए रखा है और अवैध रूप से अपने कार्यों को जारी रखा है।</p>
<p><strong>तबादले की प्रक्रिया और आदेश की अनदेखी: नियमों की अवहेलना</strong></p>
<p>तबादले की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर उनकी सेवाओं के लिए भेजा जाता है। यह प्रक्रिया राज्य के अधिकारियों द्वारा पारदर्शिता और नियमों के तहत की जाती है। लेकिन गोंडा में सामने आए इस मामले में तबादले के आदेश की स्पष्ट अवहेलना की गई है। हिफ्जुर्रहमान का 30 जून को बलरामपुर के DIET से गोंडा DIET में स्थानांतरण हुआ था, और उनके आने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि वह अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करेंगे। लेकिन जब 20 सितंबर को विशेष सचिव यतींद्र कुमार ने एक आदेश जारी कर उनका तबादला निरस्त करते हुए उन्हें उपनिदेशक मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के पद पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया, तो यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें गोंडा में और सेवाएं नहीं देनी थी।</p>
<figure id="attachment_3279" aria-describedby="caption-attachment-3279" style="width: 1080px" class="wp-caption aligncenter"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-3279 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office.jpg" alt="" width="1080" height="1249" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office.jpg 1080w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office-259x300.jpg 259w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office-885x1024.jpg 885w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office-768x888.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120144_Microsoft-365-Office-1024x1184.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /><figcaption id="caption-attachment-3279" class="wp-caption-text"><strong>निरस्त किया गया ट्रांसफर आदेश</strong></figcaption></figure>
<p>यह आदेश प्रशासनिक स्तर पर उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अंतर्गत आता है और इसका पालन करना प्रत्येक सरकारी अधिकारी का कर्तव्य होता है। लेकिन हिफ्जुर्रहमान द्वारा इस आदेश को नज़रअंदाज़ किया गया और उन्होंने गोंडा में अपने पद पर अवैध रूप से काम करना जारी रखा। यह कार्य न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि यह प्रशासनिक असमानता और अनुशासनहीनता का एक स्पष्ट उदाहरण है। इससे सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।</p>
<p><strong>गोंडा में हिफ्जुर्रहमान का कब्जा: अवैध कार्यवाही या शक्ति का दुरुपयोग?</strong></p>
<p>इस मामले में सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि हिफ्जुर्रहमान ने तबादला निरस्त होने के बाद भी गोंडा DIET में प्रधानाचार्य पद पर कब्जा बनाए रखा है। यह प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग और अनैतिक कार्य का एक स्पष्ट उदाहरण है। एक सरकारी अधिकारी के रूप में, यह उनका कर्तव्य था कि वह विशेष सचिव द्वारा जारी किए गए आदेश का पालन करते और अपना स्थानांतरण करते। लेकिन उन्होंने इस आदेश की अवहेलना की और अपने पद पर बने रहने का रास्ता चुना, जो न केवल गलत है बल्कि अवैध भी है।</p>
<figure id="attachment_3280" aria-describedby="caption-attachment-3280" style="width: 883px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" class="wp-image-3280 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120453_WhatsApp.jpg" alt="" width="883" height="1325" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120453_WhatsApp.jpg 883w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120453_WhatsApp-200x300.jpg 200w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120453_WhatsApp-682x1024.jpg 682w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241014_120453_WhatsApp-768x1152.jpg 768w" sizes="(max-width: 883px) 100vw, 883px" /><figcaption id="caption-attachment-3280" class="wp-caption-text"><strong>महोदय का 9 अक्टूबर का आदेश</strong></figcaption></figure>
<p>हिफ्जुर्रहमान का इस तरह से पद पर कब्जा करना एक गंभीर मामला है, क्योंकि इससे सरकारी संस्थानों की साख पर असर पड़ता है। यह मामला यह भी दिखाता है कि किस तरह से कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हैं और प्रशासनिक आदेशों को नजरअंदाज करते हैं। यह स्थिति न केवल गोंडा के DIET संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</p>
<p><strong>शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव: संस्थानों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह</strong></p>
<p>जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) एक महत्वपूर्ण संस्थान होता है, जहां पर शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा सुधार के कार्य किए जाते हैं। इस संस्थान का उद्देश्य गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रणाली को सुनिश्चित करना है, ताकि छात्रों को बेहतरीन शिक्षा मिल सके और शिक्षक भी अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभा सकें। लेकिन जब इस तरह के अनियमितता और पद पर अवैध कब्जे के मामले सामने आते हैं, तो यह संस्थान की साख और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।</p>
<p>हिफ्जुर्रहमान के अवैध रूप से पद पर बने रहने से गोंडा के DIET संस्थान में अनुशासनहीनता और अस्थिरता का माहौल बन गया है। जब एक उच्च अधिकारी खुद सरकारी नियमों का पालन नहीं करता, तो इसका सीधा प्रभाव संस्थान के कर्मचारियों और शिक्षकों पर भी पड़ता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक असमानता को दर्शाती है, बल्कि शिक्षा के स्तर को भी प्रभावित करती है।</p>
<p><strong>प्रशासनिक कार्रवाई की मांग: न्याय की उम्मीद</strong></p>
<p>इस मामले के सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या हिफ्जुर्रहमान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी या नहीं। सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने और अवैध रूप से पद पर बने रहने के मामले में कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>विशेष सचिव द्वारा तबादला निरस्त करने के आदेश को न मानना न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह कार्यक्षमता और अनुशासनहीनता का भी परिचायक है। इस मामले में हिफ्जुर्रहमान के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि गोंडा DIET संस्थान में पुनः सामान्य कार्यप्रणाली बहाल हो सके।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका</strong></p>
<p>इस पूरे प्रकरण में स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सवाल उठता है कि जब एक अधिकारी सरकारी आदेशों का उल्लंघन करता है, तो इसके खिलाफ क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है, या फिर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है? शिक्षा विभाग को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी आदेशों का सही तरीके से पालन हो।</p>
<p>स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की निष्क्रियता से इस तरह के मामले और बढ़ सकते हैं। यदि इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह एक उदाहरण बन सकता है, जिससे भविष्य में अन्य अधिकारी भी सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने का साहस कर सकते हैं।</p>
<p><strong>शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन की आवश्यकता: निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग</strong></p>
<p>शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण पहलू होते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। जब शिक्षा संस्थानों में ही अनुशासनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही होती है, तो यह समाज के सभी वर्गों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।</p>
<p>गोंडा DIET संस्थान में हिफ्जुर्रहमान द्वारा किए गए इस अवैध कब्जे के मामले ने शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन की आवश्यकता को और अधिक उजागर किया है। शिक्षा विभाग और प्रशासन को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे।</p>
<p><strong>शिक्षा तंत्र में सुधार की आवश्यकता</strong></p>
<p>गोंडा DIET संस्थान में हिफ्जुर्रहमान द्वारा किए गए अवैध कब्जे का मामला शिक्षा तंत्र में हो रही अनियमितताओं का एक उदाहरण है। यह मामला यह दर्शाता है कि जब तक शिक्षा तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक इस तरह की अनियमितताएं सामने आती रहेंगी।</p>
<p>सरकार और प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और शिक्षा तंत्र में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। हिफ्जुर्रहमान के खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी आदेशों का पालन हर स्थिति में हो और शिक्षा संस्थानों में अनुशासन बना रहे।</p>
<p>अगर इस मामले को सही तरीके से नहीं सुलझाया गया, तो इसका नकारात्मक प्रभाव न केवल गोंडा के DIET संस्थान पर पड़ेगा, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी इसका असर होगा। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा, ताकि शिक्षा प्रणाली में सुधार हो सके और छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/gonda-illegal-occupation-of-the-post-of-principal-in-district-education-and-training-institute-work-continues-even-after-transfer/">गोंडा: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रधानाचार्य पद पर अवैध कब्जा, तबादले के बाद भी कार्य जारी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में प्राइवेट व्यक्तियों के सहारे होता है काम सौंप दी जाती है गोपनीय फाइल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Oct 2022 09:02:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[BSA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने वाले अधिकारी और बाबू ही हैं और यही अधिकारी और बाबू अपने आर्थिक लाभ को साधने और खुद ना फसने के लिए बाहर के लोगों को कार्यालय में स्थान दे देते हैं और इन्हीं के सहारे सारे लेनदेन और काम निपटाते हैं</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2124" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1536x864.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004.jpg 1599w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>हम बात कर रहे हैं गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय कि यहां पर पटल पर आपको बाबू के अलावा उनके दलाल काम करते हुए मिलेंगे चाहे वह उनका कंप्यूटर चलाना हो या फाइलें बनाना आज प्रभात भारत की टीम ने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय का जायजा लिया जहां पर अरुण शुक्ला नाम के बाबू के स्थान पर सनी सिंह काम करता हुआ मिला, गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा विभाग में आपको बिना किसी योग्यता और कोई परीक्षा पास के ही नौकरी मिल जाती है बस आपकी सिफारिश और जुगाड़ होना चाहिए ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-2123 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-169x300.jpg" alt="" width="169" height="300" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-169x300.jpg 169w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-576x1024.jpg 576w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-768x1366.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-864x1536.jpg 864w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008.jpg 899w" sizes="auto, (max-width: 169px) 100vw, 169px" /></p>
<p>गोंडा के लेखाकार विभाग में तैनात बाबू अरुण शुक्ला अपने चहेते एक प्राइवेट आदमी से अपना पूरा काम करवा रहे हैं और कंप्यूटर का सारा काम एक बाहरी व्यक्ति सनी सिंह नाम का करता है बस केवल अरुण कुमार शुक्ला मौज काटते हैं आज जब प्रभात भारत की टीम की टीम ने इसका रियलिटी चेक किया तो अरुण शुक्ला के ऑफिस में कंप्यूटर पर बैठा सनी सिंह का नाम का आदमी काम कर रहा था जब प्रभात भारत की टीम ने पूछा उन्होंने साफ कहा कि मैं यहाँ कार्यरत नहीं हूं मैं केवल कंप्यूटर का काम देखता हूं इतने में बाबू अरुण शुक्ला पहुंचे कहा कि मैं अपने काम के लिए नहीं बुलाता हूं कंप्यूटर का काम रहता है इसीलिए बुला लेता हूं कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर और कुछ कामों के लिए बुलाता हूं लेकिन बात तो यह है कि अरुण शुक्ला अपने काम करवाने के लिए बाहरी व्यक्ति को फाइलों के साथ कंप्यूटर का सारा डाटा भी शेयर करते हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोपनीयता की चीजों को ऐसे किसी बाहरी व्यक्ति को सौंपा जा सकता है फिलहाल प्रभात भारत की टीम पहुंचने के बाद बाहरी व्यक्ति सनी सिंह वहां से भागता ही नजर आया</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2125" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-1536x864.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011.jpg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>फिलहाल पूरे मामले पर जब लेखा अधिकारी के पास प्रभात भारत की टीम पहुंची तो उन्होंने तो कैमरे पर कुछ नहीं बोला और यह कहा कि हम चार्ज पर है हम कोई भी बात नहीं बोल सकते और वहां से अपने चेंबर से भाग खड़े हुए अब सवाल इस बात का उठता है कि जब लेखाधिकारी ही अपने कार्यालय में हो रही खामियों के बारे में नहीं बताएंगे तो आखिर इस के बारे में कौन बताएगा और कौन कार्रवाई करेगा यह बड़ा सवाल है।</p>
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		<title>गोंडा में भ्रष्टाचार की जड़ शिक्षा विभाग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Dec 2021 05:14:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 15 दिसम्बर, (संजय शुक्ला)। बड़ी खबर गोंडा के शिक्षा विभाग से है जहाँ अनुदानित विद्यालयों में फर्जी</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id=":su" class="Ar Au Ao">
<div id=":sq" class="Am Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" contenteditable="true" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true">
<p>गोंडा 15 दिसम्बर, (संजय शुक्ला)। बड़ी खबर गोंडा के शिक्षा विभाग से है जहाँ अनुदानित विद्यालयों में फर्जी नियुक्ति करने के लिए एक नहीं दो दो फर्जी अखबार ही छाप डाले गए और वो भी 2014 के, विज्ञापन 2014 के अखबार में छपा गया क्योंकि नियुक्ति 2014 से करनी थी।</p>
<div>गोंडा में माध्यमिक शिक्षा विभाग हो या बेसिक शिक्षा विभाग हो दोनों में बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्तियां की गई माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुदानित कई स्कूलों में कई अध्यापकों को उनकी सेवा से बर्खास्त भी कर  दिया गया है तो बेसिक शिक्षा विभाग में एसआईटी जाँच भी चल रही है तो कई अध्यापक है कोर्ट की कृपा से भी नौकरी कर रहे है। एक बार फिर से अनुदानित विद्यालयों में  बैक डेट में नियुक्ति कराने  का प्रयास शुरू हो गया है जिसके लिए बैक डेट में दो अखबारों का विज्ञापन भी लगाया गया है जो फर्जी है जिसकी पुष्टि खुद अखबार प्रकाशित करने वाला संस्थान ही कर रहा है</div>
<div>इस पूरे मामले की शिकायत समाजसेवी जन सूचना अधिकार ऐक्टिविस्ट मनोज पांडेय ने कमिश्नर से कर जाँच  और कार्यवाही की मांग की है।</div>
</div>
</div>
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			</item>
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		<title>लचर पैरबी से गोंडा डीएम के आदेश पर स्टे, घोटाले बाजों की बल्ले बल्ले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Dec 2021 02:40:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 8 दिसंबर (अतुल यादव)। एक बार फिर से सरकारी विभागों की न्यायालय में लचर पैरवी के चलते</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/ghotalebajo-ki-balle-balle/">लचर पैरबी से गोंडा डीएम के आदेश पर स्टे, घोटाले बाजों की बल्ले बल्ले</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 8 दिसंबर (अतुल यादव)। एक बार फिर से सरकारी विभागों की न्यायालय में लचर पैरवी के चलते भ्रष्टाचार कि आरोपी फर्म को उच्च न्यायालय से रिलीफ मिल गई है और जिलाधिकारी द्वारा काली सूची में डाले जाने के आदेश पर स्टे मिल चुका है पहली बार नहीं है जब अधिकारियों और घोटाले बाजों की मिलीभगत से घोटाले बाज कार्यवाही की जद में आकर भी बाहर निकल गए हो</p>
<p>हम बात कर रहे हैं बेसिक शिक्षा विभाग गोंडा  द्वारा संचालित कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में घटिया क्वालिटी के सामानों की आपूर्ति के अलावा उच्चतम विक्रय मूल्य से भी अधिक दर पर सामानों की आपूर्ति के आरोप लगे थे और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जांच में यह भी पाया गया था जिसके बाद जनपद गोंडा की दो फर्म जिन्होंने आपूर्ति का काम किया था मेसर्स अविनाश चंद्र मिश्रा और मेसर्स सिंह कैटरर्स एंड सप्लायर को काली सूची में डाल दिया गया था जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने स्टे दे दिया है और विभाग को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है अगला सुनवाई का दिनांक 20 दिसंबर नियत किया गया है</p>
<p>सूत्रों की मानें तो इस पूरी सप्लाई में जनपद स्तरीय अधिकारियों से लेकर कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में कार्य कर रहे कर्मचारियों तक की मिलीभगत थी आपूर्तिकर्ता फन से बड़े पैमाने पर कमीशन लिया जाता था और बिना सप्लाई ही पेमेंट कर दिया जाता था मिलीभगत तो यहां तक थी की बाजार दर से अधिक पर दिए गए दर को एक नहीं दो नहीं तीन तीन अधिकारियों ने अनुमोदित किया था अब अनुमोदित दर पर 2 साल से सप्लाई हो रही थी और किसी भी अधिकारी एक बार फिर से इन सामानों की बाजार दर पता करना उचित नहीं समझा और 2 साल पुराने मूल्य पर सामानों की सप्लाई होती रही</p>
<p>अब एक बार फिर से 20 तारीख तक विभाग द्वारा दाखिल जवाब से पता चलेगा विभागीय अधिकारी इस पूरे घोटाले में कितना सम्मिलित हैं और अधिकारियों ने कितना कितना कमीशन लिया है</p>
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