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	<title>BSA gonda Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>गोंडा में बेसिक शिक्षा विभाग को 6 महीने बाद मिला स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:37:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda Basic Education Department gets permanent Finance and Accounts Officer after 6 months]]></category>
		<category><![CDATA[Vitt ewam lekha vibhag]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संजय चतुर्वेदी ने संभाला पदभार, शिक्षकों की वेतन समस्या समाधान की उम्मीद</strong></p>
<p>गोंडा 12 दिसंबर। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से रिक्त चल रहे वित्त एवं लेखा अधिकारी (एफ़एओ) के पद पर आखिरकार स्थायी नियुक्ति हो गई है। मंगलवार को संजय चतुर्वेदी ने कार्यालय बेसिक शिक्षा में पहुंचकर विधिवत रूप से अपना पदभार ग्रहण किया। छह महीने से बिना नियमित वित्त एवं लेखाधिकारी के काम कर रहे विभाग में इस नियुक्ति को शिक्षकों व कर्मचारियों ने राहत की बड़ी खबर के रूप में लिया है। पदभार ग्रहण करते ही विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्री चतुर्वेदी का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि अब विभागीय कार्यों में तेजी आएगी।</p>
<p>पदभार ग्रहण के बाद संजय चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि <strong>शिक्षकों को वेतन संबंधी परेशानियों का सामना अब नहीं करना पड़ेगा।</strong> उन्होंने कहा कि विभाग में लंबे समय से वेतन भुगतान की प्रक्रिया बाधित होने के कारण शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी, लेकिन अब समय से वेतन भेजना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे होंगे।</p>
<p>श्री चतुर्वेदी पहले भी गोंडा में वित्त एवं लेखाधिकारी के पद पर कार्य कर चुके हैं और अपने निडर व निष्पक्ष कार्यशैली के कारण जाने जाते हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि उनके पिछले कार्यकाल में न केवल फाइलों का निस्तारण समय से हुआ, बल्कि वेतन भुगतान भी सुचारू रूप से चलता रहा। इसी कारण शिक्षकों और प्रशासनिक स्टाफ में उनकी वापसी को लेकर सकारात्मक माहौल देखा गया।</p>
<p><strong>वेतन भुगतान में आ रही दिक्कतें होंगी समाप्त</strong><br />
गौरतलब है कि पिछले छह महीनों से विभाग में स्थायी वित्त एवं लेखाधिकारी न होने के कारण वेतन भुगतान संबंधी कई फाइलें लंबित पड़ी थीं। परिषदीय विद्यालयों के हजारों शिक्षकों के साथ-साथ अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों को भी वेतन न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ा था। इस दौरान शिक्षकों के संगठनों ने कई बार जिला प्रशासन से नियुक्ति करने की मांग उठाई थी। अब संजय चतुर्वेदी के कार्यभार संभालने के बाद शिक्षकों में विश्वास जगा है कि वेतन भुगतान की पुरानी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी।</p>
<p>संजय चतुर्वेदी ने कहा कि <strong>शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई ही उनकी प्राथमिकता होगी।</strong> उन्होंने बताया कि विभागीय फाइलों के समय से निस्तारण के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे किसी भी कार्य में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी बिल, गलत भुगतान या किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी कार्य नियम और वित्तीय मानकों के अनुसार ही किए जाएंगे।</p>
<p><strong>शिक्षक संगठनों ने जताई उम्मीद</strong><br />
पदभार ग्रहण के दौरान प्राथमिक शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने संजय चतुर्वेदी का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग को एक अनुभवी और सख्त वित्त अधिकारी मिलना पूरे जिले के लिए सकारात्मक संकेत है। शिक्षक नेताओं ने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में विभाग में पारदर्शिता बढ़ेगी और वेतन भुगतान, पेंशन, अवकाश नकदीकरण, चिकित्सीय प्रतिपूर्ति जैसी फाइलों का निस्तारण तेजी से होगा।</p>
<p>एक शिक्षक प्रतिनिधि ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अनेक शिक्षक वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। बैंक किश्तों से लेकर घरेलू खर्च तक प्रभावित हुए। अब नए वित्त अधिकारी के आने से यह उम्मीद बंधी है कि भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध होगी और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>विभाग में कार्यप्रणाली को सुधारने पर होगा जोर</strong><br />
संजय चतुर्वेदी ने बताया कि वे विभागीय कर्मचारियों के साथ बैठक करके कार्यप्रणाली को और सुव्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग कर फाइलों के निस्तारण में तेजी लाई जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर दिक्कत उत्पन्न न हो।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की कोई समस्या लंबित है, तो वह सीधे कार्यालय में आकर अपनी बात रख सकता है। प्रत्येक मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।</p>
<p>कुल मिलाकर, संजय चतुर्वेदी के कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा का संचार महसूस किया जा रहा है। शिक्षकों, कर्मचारियों और विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि उनकी कार्यशैली से न केवल वेतन भुगतान की समस्या दूर होगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता भी मजबूत होगी।</p>
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		<title>गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:10:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[gondabsa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-problem-of-teachers-salary-payments-in-gonda-is-expected-to-be-resolved-the-district-magistrate-has-issued-a-major-order/">गोंडा में शिक्षकों के वेतन भुगतान की समस्या दूर होने की उम्मीद, डीएम ने दिया बड़ा आदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 21 नवंबर। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन न मिलने की समस्या अब समाप्त होने की उम्मीद बन गई है। जनपद में वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) तथा जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता गिरीश चंद्र के अचानक चिकित्सा अवकाश पर चले जाने के कारण वेतन भुगतान की प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। इससे न केवल शिक्षकों बल्कि उनके परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का संकट उत्पन्न हो गया था। इस गंभीर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।</p>
<h4><strong>महीनेभर से वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानियाँ</strong></h4>
<p>गोंडा जिले में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, अनुदानित इंटर कॉलेजों के शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मियों का वेतन भुगतान हर माह वित्त एवं लेखा अधिकारी बेसिक के माध्यम से होता है। लेकिन गिरीश चंद्र के आकस्मिक अवकाश पर चले जाने से वेतन बिलों के निर्गमन व अनुमोदन की प्रक्रिया रुक गई थी। कई शिक्षकों ने बताया कि दीपावली बाद से लगातार भुगतान में देरी हो रही थी और नवंबर माह का पूरा वेतन अटक गया था। स्थिति यह थी कि बैंक ईएमआई, बच्चों की फीस, चिकित्सा व्यय और घर के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया था।</p>
<p>शिक्षक संगठनों ने भी प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था। उनका कहना था कि वेतन रुकने से शिक्षकीय व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है और कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो रहा है।</p>
<h4><strong>डीएम ने लिया संज्ञान, जारी किया आदेश</strong></h4>
<p>जिलाधिकारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से पूरा विवरण तलब किया और पाया कि वित्त एवं लेखा अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण व्यवस्था पूरी तरह ठप है। प्रशासन ने माना कि शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में एक व्यक्ति के अवकाश पर जाने भर से पूरे जिले के हजारों शिक्षकों की वित्तीय स्थिति नहीं बिगड़नी चाहिए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-5383 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="2100" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/11/Screenshot_20251121_173406_Drive-300x246.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>इसके बाद जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) रामचंद्र को आदेश जारी किए कि वे तत्काल प्रभाव से वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार संभालें और वेतन बिलों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू करवाएं। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया है कि लंबित वेतन बिलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक आर्थिक संकट न झेलना पड़े।</p>
<p>जिला विद्यालय निरीक्षक रामचंद्र वर्तमान में DIOS के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही उन्हें पूर्व में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का अतिरिक्त चार्ज भी दिया जा चुका है। अब उन्हें वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का प्रभार सौंपे जाने के बाद वे तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ एक साथ संभालेंगे।</p>
<p>हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय परिस्थितिजन्य है और सिर्फ वेतन भुगतान संबंधी अड़चन के समाधान के लिए अस्थायी रूप से यह व्यवस्था लागू की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय कामकाज में बाधा न आए और शिक्षकों का हित प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है और सक्षम स्तर से किसी की तैनाती के बाद यह आदेश होता ही समाप्त हो जाएगा</p>
<h4><strong>वेतन भुगतान पर जल्द मिलेगी राहत</strong></h4>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, DIOS द्वारा प्रभार संभालते ही वेतन बिलों का सत्यापन, अनुमोदन और कोषागार को प्रेषण का काम शुरू कर दिया जाएगा। अनुमान है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर सभी शिक्षकों का लंबित वेतन उनके बैंक खातों में भेज दिया जाएगा।</p>
<p>कई शिक्षकों ने प्रशासनिक निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि इस आदेश से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। एक शिक्षक ने बताया कि वेतन न मिलने से घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। अब उम्मीद है कि जल्द ही भुगतान प्रक्रिया सामान्य हो जाएगी और विभागीय गतिविधियाँ भी सुचारु रूप से चलेंगी।</p>
<h4><strong>चिकित्सा अवकाश पर गए वित्तीय परामर्शदाता की भूमिका भी महत्वपूर्ण</strong></h4>
<p>गिरीश चंद्र, जो जिला पंचायत में वित्तीय परामर्शदाता के पद पर कार्यरत हैं, को ही पिछले वर्ष वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। वेतन भुगतान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि पूरा वित्तीय दायित्व उन्हीं के अधीन है।</p>
<p>लेकिन उनके स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते अवकाश लेने से विभाग के भीतर निर्णय प्रक्रिया रुक गई थी। यह पहली बार नहीं है जब किसी एक अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर वेतन भुगतान प्रभावित हुआ हो। यही कारण है कि प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर भी समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न उत्पन्न हो।</p>
<h4><strong>आगे क्या?</strong></h4>
<p>सूत्रों के अनुसार, शासन जल्द ही वित्त और लेखा बेसिक अनुभाग में एक स्थायी अधिकारी की तैनाती की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। जिले में शिक्षा विभाग का दायरा बड़ा है और हजारों कर्मचारियों की वित्तीय जिम्मेदारी एक अधिकारी पर निर्भर है। इसलिए अधिक मजबूत व्यवस्थागत विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल, DIOS के प्रभार संभालते ही शिक्षकों और कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एक-दो दिनों में वेतन बिलों के स्वीकृत होते ही भुगतान प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। जिले के कई अध्यापक संगठनों ने भी प्रशासन को धन्यवाद देते हुए कहा है कि समय रहते हस्तक्षेप से बड़ी परेशानी दूर हो सकती है।</p>
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		<title>बेसिक शिक्षा विभाग में कौन है शिक्षा माफिया, फर्जीवाड़े का पर्दाफाश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Dec 2024 12:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
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		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
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		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
		<category><![CDATA[Who is the education mafia in the basic education department]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आखिर कौन है इस भ्रष्टाचार का जनक, शिक्षा का माफिया गोंडा 30 दिसंबर। बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/who-is-the-education-mafia-in-the-basic-education-department-fraud-exposed/">बेसिक शिक्षा विभाग में कौन है शिक्षा माफिया, फर्जीवाड़े का पर्दाफाश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>आखिर कौन है इस भ्रष्टाचार का जनक, शिक्षा का माफिया</strong></p>
<p>गोंडा 30 दिसंबर। बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का जो खेल खेला गया है, उसने पूरे शिक्षा तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। अनुदानित विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति से लेकर अनुदान प्राप्त करने तक, हर स्तर पर फर्जीवाड़े के प्रमाण सामने आ रहे हैं। गोंडा के एक मामले ने इस पूरे सिस्टम की सच्चाई को उजागर कर दिया है।</p>
<p><strong>फर्जी नियुक्तियों का खुलासा</strong></p>
<p>गोंडा के एक स्थानीय अखबार के एक अंक को जाली तरीके से छापकर अधिकारियों को गुमराह किया गया। वजह थी एक ऐसे विज्ञापन की प्रतिपूर्ति करना, जो कभी प्रकाशित ही नहीं हुआ। इस फर्जीवाड़े का मकसद था, अनुदानित विद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों को वैध ठहराना।</p>
<p>अध्यापक नियुक्तियों में ऐसा गड़बड़झाला हुआ कि कई जगह इंटरमीडिएट फेल लोग भी शिक्षक बन गए। इन अध्यापकों ने न केवल विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी दांव पर लगा दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-4610 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1015" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-300x119.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-1024x406.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-768x304.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-1536x609.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241230_181043_PixelLab-2048x812.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>निगरानी में कमी और विभागीय लापरवाही</strong></p>
<p>अगर इन विद्यालयों की सख्ती से निगरानी हो, तो सैकड़ों फर्जी नियुक्तियां सामने आ सकती हैं। जांच के नाम पर मात्र औपचारिकताएं पूरी की गईं। हाईकोर्ट में सही पैरवी न होने के कारण फर्जी नियुक्तियां वैध हो गईं।</p>
<p><strong>प्रबंधन और शिक्षा माफिया का गठजोड़</strong></p>
<p>कई अनुदानित विद्यालयों के प्रबंधकों को पता ही नहीं कि उनके विद्यालय में प्राइमरी अनुभाग है या नहीं। प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों का दावा है कि उनके विद्यालय में कक्षा 1 से 5 की कक्षाएं कभी संचालित ही नहीं हुईं।</p>
<p>एक प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया, “<strong>जब से मैं इस विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुआ हूं तब से लेकर आज तक प्राइमरी अनुभाग की कोई कक्षाएं नहीं देखी। यहां तक कि हमने कभी प्राइमरी मान्यता के लिए आवेदन भी नहीं किया।”</strong></p>
<p>ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वह कौन सा शिक्षा माफिया है जिसने फर्जीवाड़ा कर हाईकोर्ट में प्राइमरी अनुदान के लिए आवेदन किया?</p>
<p style="text-align: center;"><strong> विभागीय भ्रष्टाचार और 200 करोड़ का घोटाला</strong></p>
<p><strong>फर्जीवाड़े का तंत्र</strong></p>
<p>शिक्षा विभाग में ऐसे माफिया सक्रिय हैं, जो फर्जी दस्तावेज बनाकर अनुदान के करोड़ों रुपये हड़प रहे हैं। ये माफिया न केवल अधिकारियों को गुमराह करते हैं, बल्कि उन्हें अपने इशारों पर चलाते भी हैं।</p>
<p><strong>शपथ पत्रों का खेल</strong></p>
<p>हाईकोर्ट में फर्जी शपथ पत्र देकर यह दावा किया गया कि कक्षाएं नियमित चल रही हैं। प्रधानाचार्य, प्रबंधक और शिक्षा माफिया ने एक कैंपस को दिखाकर प्राइमरी अनुभाग के लिए भी अनुदान प्राप्त कर लिया।</p>
<p><strong>वित्त एवं लेखा विभाग की भूमिका</strong></p>
<p>वित्त एवं लेखा विभाग ने बिना सत्यापन के वेतन राशि जारी कर दी। जब भी किसी अधिकारी ने विरोध किया, उन्हें ट्रांसफर करवा दिया गया।</p>
<p><strong>200 करोड़ का घोटाला</strong></p>
<p>2011 से लेकर अब तक फर्जी कागजातों के आधार पर करीब 200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने अपनी आंखें मूंदे रखीं।</p>
<p><strong>शिक्षा तंत्र की साख पर सवाल</strong></p>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग का यह मामला भ्रष्टाचार की गहराई को दिखाता है। यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। अगर इस पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल बच्चों का भविष्य अंधकारमय होगा, बल्कि पूरा शिक्षा तंत्र भ्रष्टाचार के दलदल में डूब जाएगा।</p>
<p><strong>जांच की मांग</strong></p>
<p>सरकार को चाहिए कि वह इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषियों को कठोर दंड दे। साथ ही, फर्जी नियुक्तियों और अनुदान की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।</p>
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		<title>मृतक आश्रित कोटे में भर्ती हुए अनुचर को अध्यापक बनाकर 80 लाख से अधिक का फर्जी भुगतान, विभाग में मचा हड़कंप</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/fake-payment-of-more-than-80-lakhs-made-by-making-a-peon-recruited-under-deceased-dependent-quota-a-teacher-uproar-in-the-department/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Dec 2024 15:13:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 7 दिसंबर। जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां परिषदीय विद्यालय में मृतक आश्रित</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 7 दिसंबर। जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां परिषदीय विद्यालय में मृतक आश्रित कोटे के तहत अनुचर के पद पर नियुक्त एक व्यक्ति को फर्जी आदेशों के माध्यम से अध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इस फर्जीवाड़े के जरिए उसेउस80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया। यह मामला बेसिक शिक्षा विभाग में भारी अनियमितताओं की ओर इशारा करता है, जहां न सिर्फ फर्जी आदेशों के आधार पर नियुक्ति दी गई, बल्कि विभाग द्वारा इसे वर्षों तक अनदेखा किया गया।</p>
<p><strong>मामले का खुलासा</strong></p>
<p>जानकारी के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे के तहत एक व्यक्ति की नियुक्ति अनुचर के पद पर की गई थी। लेकिन कुछ समय बाद, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे अध्यापक के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया। संबंधित आदेशों को शासनादेश बताया जा रहा था, जबकि अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ऐसा कोई शासनादेश अस्तित्व में ही नहीं है।</p>
<p><strong>फर्जी आदेश कैसे बना आधार</strong></p>
<p>इस मामले में सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि जिस मूल आदेश का हवाला देकर व्यक्ति को अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया, वह पूरी तरह फर्जी पाया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि यह आदेश कहीं भी विभागीय या शासन के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। इसके बावजूद, व्यक्ति को अध्यापक पद पर बैठाकर उसे संबंधित पद का वेतन दिया गया।</p>
<p><strong>80 लाख से अधिक का भुगतान और हिस्सेदारी का सवाल</strong></p>
<p>मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक अनुचर को बिना किसी वैध प्रक्रिया के अध्यापक पद पर बैठाने और उसे 80 लाख रुपए से अधिक का भुगतान करने की अनुमति किसने दी। सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। यह भी संदेह है कि इस राशि में अधिकारियों की हिस्सेदारी तय की गई हो।</p>
<p><strong>कानूनी और प्रशासनिक नियमों की धज्जियां</strong></p>
<p>शिक्षा विभाग में हुई इस गड़बड़ी ने प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त व्यक्ति को उसके मूल पद पर ही कार्य करना होता है। यदि किसी भी प्रकार का पदोन्नति या पद परिवर्तन करना हो, तो इसके लिए उच्च स्तर से आदेश जारी करना आवश्यक है। लेकिन इस मामले में, न तो किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी ली गई और न ही शासन स्तर से कोई आदेश जारी हुआ।</p>
<p><strong>विभाग की भूमिका संदिग्ध</strong></p>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग की भूमिका इस मामले में संदेह के घेरे में है। इतने लंबे समय तक फर्जी आदेश के आधार पर भुगतान होते रहने के बावजूद किसी भी अधिकारी ने इस पर सवाल नहीं उठाया। क्या विभाग जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज करता रहा? या फिर इसमें विभाग के अधिकारियों की सीधी भागीदारी थी?</p>
<p><strong>जांच में हुआ बड़ा खुलासा</strong></p>
<p>मामला उजागर होने के बाद, बेसिक शिक्षा विभाग ने आंतरिक जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि आदेश पूरी तरह फर्जी थे और इसे विभागीय रिकॉर्ड में दिखाने के लिए हेरफेर किया गया था। जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि संबंधित व्यक्ति को अनुचर पद से सीधे अध्यापक पद पर बैठाना पूरी तरह से नियम विरुद्ध था।</p>
<p><strong>आर्थिक नुकसान और कानूनी कार्रवाई</strong></p>
<p>इस घोटाले से न सिर्फ सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि शिक्षा विभाग की साख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वर्तमान में विभाग ने संबंधित व्यक्ति की सेवा समाप्त करने और भुगतान की रिकवरी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण</strong></p>
<p>गोंडा में सामने आया यह मामला भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण है, जहां विभागीय मिलीभगत से न सिर्फ सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया, बल्कि जनसेवा की भावना को भी आघात पहुंचाया गया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे सरकारी तंत्र में कुछ अधिकारी अपने स्वार्थ के लिए व्यवस्था का दुरुपयोग कर सकते हैं।</p>
<p><strong>क्या विभाग पर होगी कार्रवाई?</strong></p>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घोटाले के बाद शिक्षा विभाग में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाएगा? या फिर मामले को दबाने की कोशिश होगी?</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा में सामने आया यह मामला सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की एक झलक प्रस्तुत करता है। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। यदि इस मामले में दोषियों को सख्त सजा नहीं दी गई, तो यह भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने का काम करेगा। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस घोटाले में शामिल लोगों को कब और कैसे न्याय के दायरे में लाया जाएगा।</p>
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		<title>गोंडा के इस विभाग में योगी का आदेश अब क्यों नहीं चलता भले (कविता)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 Nov 2024 03:39:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[हास्य व्यंग]]></category>
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		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
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		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा की धरती से आई खबर है अनोखी, जहां नियमों की टूटती डोर है ढीली-ढाली सी। मुख्यमंत्री योगी</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा की धरती से आई खबर है अनोखी,</p>
<p>जहां नियमों की टूटती डोर है ढीली-ढाली सी।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी का फरमान है सख्त,</p>
<p>पर बेसिक शिक्षा विभाग का रवैया ढीला और भ्रष्ट।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मानव संपदा पोर्टल पर होनी थी फीडिंग अनिवार्य,</p>
<p>पर हाई कोर्ट से मिली राहत, दिखी विभाग की चालाकी हर बार।</p>
<p>वेतन रुकेगा बिना डेटा फीड के, था आदेश यह स्पष्ट,</p>
<p>फीड हुए विद्यालयों का डेटा हो गया गायब, ये है भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि स्पष्ट।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रबंधक और अधिकारियों का गठजोड़ हुआ गहरा,</p>
<p>जैसे नियम-कानून को कुचलने का हो नया पहरा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की इस अनियमितता पर लोग कहने लगे,</p>
<p>&#8220;गोंडा में योगी का आदेश अब क्यों नहीं चलता भले?&#8221;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अंधेरे में डूबा शिक्षा का यह विभाग,</p>
<p>जगमगाता है भ्रष्टाचार का अड्डा हर भाग में</p>
<p>योगी का कानून, सख्त और निर्भीक,</p>
<p>पर गोंडा में उसका बल दिखता कमजोर और फीका।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अब उम्मीद करें कि न्याय का तराजू झुकेगा नहीं,</p>
<p>और भ्रष्टाचार का यह खेल आगे टिकेगा नहीं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>मुख्य विकास अधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का किया औचक निरीक्षण, कई विषयों पर सुधार के दिए निर्देश</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/chief-development-officer-did-a-surprise-inspection-of-basic-education-officers-office-gave-instructions-for-improvement-on-many-subjects/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Oct 2024 11:48:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Cdo]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Development Officer did a surprise inspection of Basic Education Officer's office]]></category>
		<category><![CDATA[gave instructions for improvement on many subjects]]></category>
		<category><![CDATA[Latest alerts]]></category>
		<category><![CDATA[Latest news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्य विकास अधिकारी महोदया का जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय का निरीक्षण: पत्रावलियों के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/chief-development-officer-did-a-surprise-inspection-of-basic-education-officers-office-gave-instructions-for-improvement-on-many-subjects/">मुख्य विकास अधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का किया औचक निरीक्षण, कई विषयों पर सुधार के दिए निर्देश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>मुख्य विकास अधिकारी महोदया का जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय का निरीक्षण: पत्रावलियों के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर दिए कड़े निर्देश</strong></p>
<p>गोण्डा, 08 अक्टूबर। आज मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) महोदया ने जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय पंतनगर का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण अपराह्न 2:00 बजे शुरू हुआ, जिसमें कार्यालय की व्यवस्थाओं, पत्रावलियों के रखरखाव और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (डीबीईओ) और अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।</p>
<p>इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाना और वहां की समग्र व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना था। सीडीओ महोदया ने इस मौके पर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिनका पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को तत्पर रहने का आदेश दिया गया।</p>
<p><strong>निरीक्षण के मुख्य बिंदु</strong></p>
<p><strong>1. पत्रावलियों के रखरखाव पर विशेष जोर</strong></p>
<p>निरीक्षण के दौरान सबसे पहले पत्रावलियों के रखरखाव पर जोर दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी महोदया ने पत्रावलियों की स्थिति देखकर असंतोष व्यक्त किया और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी दस्तावेजों को सही तरीके से व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यालय की पत्रावलियां किसी भी समय निरीक्षण के लिए तैयार होनी चाहिए, ताकि कोई भी जानकारी तुरंत उपलब्ध करवाई जा सके। इसके लिए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि सभी पत्रावलियों का उचित तरीके से रिकॉर्ड रखा जाए और दस्तावेजों की श्रेणीबद्ध तरीके से फाइलिंग की जाए।</p>
<p><strong>2. पटल सहायकों की पहचान के लिए नाम पट्टिका लगाने के निर्देश</strong></p>
<p>सीडीओ महोदया ने पाया कि कार्यालय के अधिकांश पटल सहायकों के सामने नाम पट्टिका नहीं लगी हुई थी, जिससे किसी भी कर्मचारी की पहचान करने में दिक्कत हो रही थी। इस पर उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी पटल सहायकों के नाम की पट्टिकाएं उनके डेस्क पर स्पष्ट रूप से लगाई जाएं, ताकि किसी भी आगंतुक या अधिकारी को यह जानने में सुविधा हो कि कौन सा कर्मचारी किस कार्य के लिए जिम्मेदार है। यह कदम कार्य की पारदर्शिता बढ़ाने और कार्यालय में जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>3. अनुभाग बोर्ड लगाने के निर्देश</strong></p>
<p>निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि कई कक्षों के सामने अनुभाग बोर्ड नहीं लगे थे। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा था कि कौन-सा कक्ष किस अनुभाग का है। इस समस्या को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी कक्षों के सामने अनुभाग बोर्ड लगाए जाएं, ताकि कार्यालय में आने वाले किसी भी व्यक्ति को सही विभाग और कक्ष की पहचान करने में कोई कठिनाई न हो। उन्होंने कहा कि इससे कार्यालय के कार्यप्रवाह में सुधार होगा और समय की भी बचत होगी।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-3007 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0037.jpg" alt="" width="1280" height="591" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0037.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0037-300x139.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0037-1024x473.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241008-WA0037-768x355.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>4. स्वच्छता और साफ-सफाई की व्यवस्था पर निर्देश</strong></p>
<p>निरीक्षण के दौरान सीडीओ महोदया ने कार्यालय परिसर में साफ-सफाई की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने साफ-सफाई की कमी पर चिंता व्यक्त की और इसे प्राथमिकता से सुधारने के निर्देश दिए। सीडीओ महोदया ने कहा कि कार्यालय में साफ-सफाई का सही प्रबंधन होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि एक स्वस्थ और सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार किया जा सके। इसके लिए उन्होंने कार्यालय में नियमित साफ-सफाई और परिसर की उचित देखरेख के लिए एक टीम गठित करने के निर्देश दिए।</p>
<p>साफ-सफाई से संबंधित निर्देशों में यह भी शामिल था कि कार्यालय परिसर के भीतर कूड़े के ढेरों को हटाया जाए और नियमित अंतराल पर सफाईकर्मियों द्वारा पूरी जगह की साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, कार्यालय के अंदर और बाहर की दीवारों को साफ रखने और फर्श पर किसी भी प्रकार की गंदगी या धूल जमा न होने देने के निर्देश दिए गए।</p>
<p><strong>5. अनुशासन और कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश</strong></p>
<p>निरीक्षण के दौरान सीडीओ महोदया ने यह भी देखा कि कुछ कर्मचारियों में कार्य के प्रति अनुशासन की कमी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। समय पर उपस्थिति, सही समय पर कार्यों का निष्पादन, और प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p>सीडीओ महोदया ने यह भी कहा कि कार्यालय में कार्य के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी और सभी कर्मचारियों को अपने कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा। इसके लिए उन्होंने डीबीईओ को सख्त निर्देश दिए कि कार्य की नियमित समीक्षा की जाए और सभी कर्मचारियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाए।</p>
<p><strong>6. जनता से जुड़ी शिकायतों के समाधान पर विशेष ध्यान</strong></p>
<p>निरीक्षण के दौरान यह भी निर्देश दिया गया कि जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय में जनता से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता दी जाए। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी व्यक्ति की शिकायत लंबित न रहे और उसका शीघ्र समाधान हो। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यालय में आए किसी भी व्यक्ति के साथ सहयोगपूर्ण व्यवहार किया जाए और उसकी समस्याओं को त्वरित रूप से सुना और हल किया जाए।</p>
<p><strong>7. कार्यालय की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड रखने के निर्देश</strong></p>
<p>मुख्य विकास अधिकारी महोदया ने पारंपरिक पत्रावलियों के अलावा डिजिटल रिकॉर्ड रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल करना आवश्यक है, ताकि दस्तावेजों की सुरक्षा और पहुंच में सुधार हो। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि जितनी जल्दी हो सके, कार्यालय के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पत्रावलियों का डिजिटल रूप से संधारण किया जाए। इससे न केवल काम की गति तेज होगी, बल्कि भविष्य में निरीक्षण और जांच के दौरान जानकारी प्राप्त करने में भी सहूलियत होगी।</p>
<p><strong>अगले निरीक्षण में अपेक्षित सुधार</strong></p>
<p>निरीक्षण के अंत में सीडीओ महोदया ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि उपरोक्त सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगले निरीक्षण में वे इन सभी सुधारों का जायजा लेंगी और यह देखा जाएगा कि कितने निर्देशों का पालन हुआ है। उन्होंने डीबीईओ से अपेक्षा की कि इन सभी सुधारात्मक कदमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके और जनता को बेहतर सेवाएं प्राप्त हो सकें।</p>
<p style="text-align: center;"><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>मुख्य विकास अधिकारी महोदया का जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय का निरीक्षण यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस निरीक्षण से न केवल कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद है, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों में जवाबदेही और जिम्मेदारी का भी एहसास होगा। सीडीओ महोदया द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कार्यालय के सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा, जिससे गोण्डा जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
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			</item>
		<item>
		<title>वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में प्राइवेट व्यक्तियों के सहारे होता है काम सौंप दी जाती है गोपनीय फाइल</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/bsa_office_vitt_ewam_lekha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Oct 2022 09:02:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[BSA]]></category>
		<category><![CDATA[BSA gonda]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने वाले अधिकारी और बाबू ही हैं और यही अधिकारी और बाबू अपने आर्थिक लाभ को साधने और खुद ना फसने के लिए बाहर के लोगों को कार्यालय में स्थान दे देते हैं और इन्हीं के सहारे सारे लेनदेन और काम निपटाते हैं</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2124" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1536x864.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004.jpg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>हम बात कर रहे हैं गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय कि यहां पर पटल पर आपको बाबू के अलावा उनके दलाल काम करते हुए मिलेंगे चाहे वह उनका कंप्यूटर चलाना हो या फाइलें बनाना आज प्रभात भारत की टीम ने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय का जायजा लिया जहां पर अरुण शुक्ला नाम के बाबू के स्थान पर सनी सिंह काम करता हुआ मिला, गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा विभाग में आपको बिना किसी योग्यता और कोई परीक्षा पास के ही नौकरी मिल जाती है बस आपकी सिफारिश और जुगाड़ होना चाहिए ।</p>
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<p>गोंडा के लेखाकार विभाग में तैनात बाबू अरुण शुक्ला अपने चहेते एक प्राइवेट आदमी से अपना पूरा काम करवा रहे हैं और कंप्यूटर का सारा काम एक बाहरी व्यक्ति सनी सिंह नाम का करता है बस केवल अरुण कुमार शुक्ला मौज काटते हैं आज जब प्रभात भारत की टीम की टीम ने इसका रियलिटी चेक किया तो अरुण शुक्ला के ऑफिस में कंप्यूटर पर बैठा सनी सिंह का नाम का आदमी काम कर रहा था जब प्रभात भारत की टीम ने पूछा उन्होंने साफ कहा कि मैं यहाँ कार्यरत नहीं हूं मैं केवल कंप्यूटर का काम देखता हूं इतने में बाबू अरुण शुक्ला पहुंचे कहा कि मैं अपने काम के लिए नहीं बुलाता हूं कंप्यूटर का काम रहता है इसीलिए बुला लेता हूं कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर और कुछ कामों के लिए बुलाता हूं लेकिन बात तो यह है कि अरुण शुक्ला अपने काम करवाने के लिए बाहरी व्यक्ति को फाइलों के साथ कंप्यूटर का सारा डाटा भी शेयर करते हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोपनीयता की चीजों को ऐसे किसी बाहरी व्यक्ति को सौंपा जा सकता है फिलहाल प्रभात भारत की टीम पहुंचने के बाद बाहरी व्यक्ति सनी सिंह वहां से भागता ही नजर आया</p>
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<p>फिलहाल पूरे मामले पर जब लेखा अधिकारी के पास प्रभात भारत की टीम पहुंची तो उन्होंने तो कैमरे पर कुछ नहीं बोला और यह कहा कि हम चार्ज पर है हम कोई भी बात नहीं बोल सकते और वहां से अपने चेंबर से भाग खड़े हुए अब सवाल इस बात का उठता है कि जब लेखाधिकारी ही अपने कार्यालय में हो रही खामियों के बारे में नहीं बताएंगे तो आखिर इस के बारे में कौन बताएगा और कौन कार्रवाई करेगा यह बड़ा सवाल है।</p>
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