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	<title>Brijbhushan Sharan Singh Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>पूर्व WFI चीफ बृजभूषण शरण सिंह का पसका दौरा: विवादित बयान, अरविंद केजरीवाल पर हमला और मोहल्ला क्लीनिक मॉडल पर तंज</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/former-wfi-chief-brij-bhushan-sharan-singhs-visit-to-paska-controversial-statement-attack-on-arvind-kejriwal-and-taunt-on-mohalla-clinic-model/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jan 2025 11:39:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 20 जनवरी। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने परसपुर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-wfi-chief-brij-bhushan-sharan-singhs-visit-to-paska-controversial-statement-attack-on-arvind-kejriwal-and-taunt-on-mohalla-clinic-model/">पूर्व WFI चीफ बृजभूषण शरण सिंह का पसका दौरा: विवादित बयान, अरविंद केजरीवाल पर हमला और मोहल्ला क्लीनिक मॉडल पर तंज</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 20 जनवरी। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने परसपुर के पसका गांव में बने ग्राम पंचायत हॉल का उद्घाटन किया। इस मौके पर बृजभूषण ने अपने विवादित बयानों के जरिए एक बार फिर चर्चा बटोरी। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके नीतियों पर तीखा हमला बोला।</p>
<p><strong>उद्घाटन का अवसर और बृजभूषण का बयान</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह ने ग्राम पंचायत हॉल के उद्घाटन समारोह में भारी संख्या में स्थानीय लोगों और बीजेपी समर्थकों को संबोधित किया। उद्घाटन के बाद जब उनसे दिल्ली में हाल ही में अरविंद केजरीवाल पर हुए हमले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, &#8220;अगर इस मामले की सही तरीके से जांच हो तो पता चलेगा कि हमला करने वाला उन्हीं का आदमी होगा। अभी समय दीजिए, अरविंद केजरीवाल को दो-तीन बार और जूते पड़ेंगे।&#8221;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-4758 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/1000561569.jpg" alt="" width="1241" height="702" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/1000561569.jpg 1241w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/1000561569-300x170.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/1000561569-1024x579.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/1000561569-768x434.jpg 768w" sizes="(max-width: 1241px) 100vw, 1241px" /></p>
<p>इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बृजभूषण के इस बयान को विपक्ष ने न केवल आपत्तिजनक बताया, बल्कि बीजेपी की मानसिकता पर सवाल भी उठाए।</p>
<p><strong>केजरीवाल के मोहल्ला क्लीनिक और स्कूल मॉडल पर हमला</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह ने दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक और स्कूल मॉडल को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, &#8220;यह केवल हो-हल्ला और नौटंकी है। अरविंद केजरीवाल जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। उनकी योजनाओं में कोई ठोस आधार नहीं है।&#8221;</p>
<p>जब उनसे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, &#8220;मैं एक फकीर हूं और चौराहे पर खड़ा हूं। किस दिशा में जाना है, यह मुझे नहीं पता। आप मेरे सवालों के जवाब सांसदों और विधायकों से लीजिए।&#8221;</p>
<p><strong>केजरीवाल पर हमले का राजनीतिक पृष्ठभूमि</strong></p>
<p>हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर हमला किया था। हालांकि इस मामले की जांच अभी चल रही है, लेकिन बृजभूषण ने अपने बयान से मामले को और गरमा दिया है। उन्होंने इस घटना को केजरीवाल की राजनीतिक नौटंकी करार दिया और कहा कि यह सब सहानुभूति हासिल करने की एक साजिश हो सकती है।</p>
<p><strong>गोंडा और पसका में विकास का दावा</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह ने अपने भाषण में गोंडा और पसका के विकास पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिशों से गोंडा जिले को कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधार का श्रेय उन्होंने अपनी पार्टी और सरकार को दिया।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषण</p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के नेता ऐसे बयानों के जरिए अपने समर्थकों को सक्रिय करना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल पर हमला करने का उद्देश्य उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को रोकना हो सकता है।</p>
<p>दिल्ली का मोहल्ला क्लीनिक और शिक्षा मॉडल कई राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुका है। ऐसे में बीजेपी नेता इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अरविंद केजरीवाल के प्रभाव को कम किया जा सके।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह का परसपुर दौरा और उनके विवादित बयान एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। उनके बयानों से गोंडा की राजनीति गरमा गई है। हालांकि, जनता का ध्यान गोंडा के विकास और समस्याओं की ओर केंद्रित रहना चाहिए।</p>
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		<title>नंदनी नगर में सुर संग्राम चैंपियनशिप का भव्य समापन: पवन सिंह ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा, बृजभूषण शरण सिंह भावुक</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/grand-closing-ceremony-of-sur-sangram-championship-in-nandini-nagar-pawan-singh-graced-the-event-brij-bhushan-sharan-singh-got-emotional/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jan 2025 16:50:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Pawan singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 6 जनवरी। जिले के नंदनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में चार दिवसीय ग्रैंड फिनाले सुर संग्राम चैंपियनशिप का</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/grand-closing-ceremony-of-sur-sangram-championship-in-nandini-nagar-pawan-singh-graced-the-event-brij-bhushan-sharan-singh-got-emotional/">नंदनी नगर में सुर संग्राम चैंपियनशिप का भव्य समापन: पवन सिंह ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा, बृजभूषण शरण सिंह भावुक</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 6 जनवरी। जिले के नंदनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में चार दिवसीय ग्रैंड फिनाले सुर संग्राम चैंपियनशिप का आयोजन भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन की मेजबानी कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने की। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छुपी हुई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और उन्हें प्रोत्साहित करना था। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक और कलात्मक ऊर्जा का संचार किया।</p>
<p>फाइनल कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और गायक पवन सिंह ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। जैसे ही पवन सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उपस्थित दर्शकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने उनके स्वागत में तालियों की गूंज और उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पवन सिंह का पारंपरिक तरीके से माला पहनाकर स्वागत किया।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत पवन सिंह ने अपने भक्ति गीत &#8220;मिले जब राम सीता से&#8230;&#8221; से की। यह गीत सुनकर दर्शक भावविभोर हो गए। इसके बाद, जनता के विशेष अनुरोध पर उन्होंने एक लोकप्रिय भोजपुरी गीत भी प्रस्तुत किया, जिससे माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया। दर्शकों की तालियों और हर्षोल्लास ने यह साबित कर दिया कि पवन सिंह की आवाज और व्यक्तित्व का जादू हर दिल पर छा गया।</p>
<p>फाइनल कार्यक्रम में अयोध्या से आए संतों द्वारा प्रस्तुत किए गए भक्ति गीतों ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को भावुक कर दिया। कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भी क्षण आया जब भक्ति गीत सुनते-सुनते उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, &#8220;यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जो छुपी हुई प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन प्रदान करता है।&#8221;</p>
<p>चार दिवसीय इस प्रतियोगिता में गोंडा, बस्ती, अयोध्या, लखनऊ समेत कई जिलों के 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन फाइनल राउंड का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया गया। भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने विजयी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने प्रतिभागियों की मेहनत और कला की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा कलाकारों को अपने हुनर को निखारने का अवसर मिलता है।</p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, &#8220;यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को निखारने का मंच है। हर साल यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और इसमें प्रदेश के कई जिलों के लोग शामिल होते हैं। यहां किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी कला दिखाने का समान अवसर दिया जाता है। विजेताओं को सम्मानित कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।&#8221;</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने जब भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह से बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना पर सवाल पूछा, तो बृजभूषण शरण सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा, &#8220;यह उनका व्यक्तिगत मामला है। पवन सिंह बहुत अच्छे इंसान हैं और वह कुछ भी कर सकते हैं। हो सकता है कि वह चुनाव लड़ें।&#8221; उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पवन सिंह ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया है।</p>
<p>इस आयोजन ने न केवल गोंडा जिले बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी खास पहचान बनाई है। यह प्रतियोगिता न केवल कलाकारों को मंच प्रदान करती है, बल्कि दर्शकों को कला, संस्कृति और मनोरंजन का अद्भुत अनुभव भी कराती है। प्रतिभागियों के बीच जोश और प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने लायक था। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बृजभूषण शरण सिंह और उनकी टीम को दर्शकों और प्रतिभागियों की ओर से प्रशंसा मिली।</p>
<p>चार दिनों तक चले इस आयोजन ने न केवल गोंडा जिले की सांस्कृतिक छवि को मजबूत किया, बल्कि समाज में छुपी हुई प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें प्रोत्साहन देने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भविष्य में इस तरह के आयोजनों की निरंतरता प्रतिभागियों और दर्शकों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।</p>
<p>ग्रैंड फिनाले सुर संग्राम चैंपियनशिप ने यह साबित कर दिया कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में गोंडा जैसे शहर भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। पवन सिंह की उपस्थिति और बृजभूषण शरण सिंह की भावुकता ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।</p>
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		<item>
		<title>साक्षी मलिक किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी- बीजेपी नेता</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/sakshi-malik-sold-her-integrity-order-to-sell-her-book-mla/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 09:24:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Sakshi Malik sold her integrity in order to sell her book: MLA]]></category>
		<category><![CDATA[साक्षी मलिक किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी- विधायक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच तनाव बढ़ा, विवादों के घेरे में आई पहलवानों की राजनीति, पूर्व</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/sakshi-malik-sold-her-integrity-order-to-sell-her-book-mla/">साक्षी मलिक किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी- बीजेपी नेता</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच तनाव बढ़ा, विवादों के घेरे में आई पहलवानों की राजनीति, पूर्व सांसद बृजभूषण के चुप रहने से मिल रही राहत </strong></p>
<p>नई दिल्ली 23 अक्टूबर। भारत के खेल जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब ओलंपियन साक्षी मलिक ने पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता और कुश्ती चैंपियन बबीता फोगट पर गंभीर आरोप लगाए। साक्षी ने कहा कि बबीता ने विरोध को अपने निजी एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया और वह खुद को भारतीय कुश्ती संघ (WFI) की अध्यक्ष बनाना चाहती थीं। यह आरोप साक्षी मलिक की हाल ही में रिलीज हुई आत्मकथा विटनेस के संदर्भ में सामने आया है, जिसमें उन्होंने कई विवादास्पद बातें कही हैं।</p>
<p>इस आरोप के जवाब में बबीता फोगट ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि साक्षी मलिक ने किताब बेचने के लिए अपनी ईमानदारी बेच दी है। यह बयान दोनों के बीच पहले से चले आ रहे विवाद को और अधिक गहरा करता है, जिसमें बबीता के परिवार के सदस्यों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।</p>
<p><strong>साक्षी मलिक के आरोप: बबीता पर एजेंडा चलाने का आरोप</strong></p>
<p>विरोध प्रदर्शन के दौरान साक्षी मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि बबीता फोगट ने डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बनने के उद्देश्य से विरोध का समर्थन किया। मलिक ने खुलासा किया कि बबीता ने पहले पहलवानों से संपर्क किया और उन्हें बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन इसका उद्देश्य केवल उनका अपना राजनीतिक फायदा था।</p>
<p>साक्षी ने अपनी आत्मकथा में इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लिखा, &#8220;बबीता फोगट ने डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष पद की लालसा में यह कदम उठाया था। उनका एजेंडा विरोध प्रदर्शन का समर्थन करना नहीं बल्कि खुद को WFI की अध्यक्षता के लिए तैयार करना था।&#8221; साक्षी का यह बयान कई हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर खेल और राजनीति से जुड़े लोगों के बीच।</p>
<p><strong>बबीता फोगट की प्रतिक्रिया: &#8220;किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी&#8221;</strong></p>
<p>साक्षी मलिक के इस आरोप पर बबीता फोगट ने ट्विटर पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने सीधे तौर पर साक्षी पर निशाना साधते हुए कहा, &#8220;किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दिया गया है।&#8221; बबीता ने यह भी लिखा कि &#8220;अपने किरदार से चमको, उधार की रोशनी कब तक टिकेगी?&#8221; यह प्रतिक्रिया न केवल साक्षी के आरोपों का खंडन करती है, बल्कि उनके चरित्र पर भी सवाल उठाती है।</p>
<p>बबीता ने यह भी कहा, &#8220;किसी को विधानसभा की सीटें मिलीं, किसी को पद मिले बहन, तुम्हें कुछ नहीं मिला, मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूं।&#8221; उनका यह बयान साक्षी के करियर और उनके संघर्षों की ओर इशारा करता है, लेकिन साथ ही साथ यह भी दिखाता है कि दोनों के बीच दरार कितनी गहरी हो गई है।</p>
<p><strong>महावीर फोगट का बयान: &#8220;साक्षी कांग्रेस की भाषा बोल रही है&#8221;</strong></p>
<p>इस विवाद में बबीता के पिता और प्रसिद्ध कुश्ती कोच महावीर फोगट भी कूद पड़े। महावीर फोगट ने साक्षी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि साक्षी मलिक अब कांग्रेस की भाषा बोल रही हैं। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि साक्षी के आरोपों के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं।</p>
<p>महावीर फोगट ने कहा, &#8220;बबीता ने हमेशा खिलाड़ियों के समझौतों की वकालत की है और उसने भी विरोध का समर्थन किया था।&#8221; उन्होंने दावा किया कि साक्षी का यह बयान कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा के कहने पर दिया गया है। महावीर ने यह भी आरोप लगाया कि साक्षी कांग्रेस के इशारे पर भाजपा और उसके नेताओं को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं।</p>
<p><strong>विनेश फोगट का जवाब: &#8220;हर कहानी के तीन पहलू होते हैं&#8221;</strong></p>
<p>इस बीच, साक्षी मलिक के बयान के बाद विनेश फोगट ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साक्षी का नाम लिए बिना कहा, &#8220;हर कहानी के तीन पहलू होते हैं – आपकी, उनकी और सच्चाई की।&#8221; विनेश का यह बयान दोनों पहलवानों के बीच उभरते विवाद की ओर इशारा करता है, जिसमें कोई स्पष्ट रूप से गलत या सही नहीं दिख रहा है।</p>
<p>विनेश ने यह भी कहा कि अगर साथी एथलीटों के लिए खड़ा होना लालच है, तो वह इस लालच को सकारात्मक रूप में देखती हैं। उन्होंने कहा, &#8220;अगर यह लालच है जो हमें ओलंपिक में देश के लिए पदक लाने के लिए प्रेरित करता है, तो यह लालच हमारी आखिरी सांस तक हमारे साथ रहेगा।&#8221;</p>
<p>विनेश के इस बयान से साफ है कि वह साक्षी के आरोपों को सीधे तौर पर खारिज कर रही हैं, लेकिन साथ ही साथ वह इस विवाद को और अधिक गहराने से बचने का प्रयास भी कर रही हैं।</p>
<p><strong>साक्षी का एशियाई खेलों के ट्रायल पर दावा</strong></p>
<p>विवाद तब और गहरा गया जब साक्षी मलिक ने अपने संस्मरण में दावा किया कि विनेश फोगट और बजरंग पुनिया ने 2023 एशियाई खेलों के लिए ट्रायल से छूट ली थी। साक्षी का कहना था कि यह छूट पहलवानों के आंदोलन को कमजोर कर सकती है, और इससे बृज भूषण के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को धक्का लगा।</p>
<p>यह आरोप खेल जगत में बड़ा मुद्दा बन गया, क्योंकि ट्रायल से छूट लेना और विरोध प्रदर्शन करना दोनों ही पहलवानों की नैतिकता और उनके खेल करियर के लिए महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इस मुद्दे ने विवाद को और अधिक तीखा कर दिया और कई लोगों के मन में सवाल खड़े किए कि क्या विरोध प्रदर्शन सच में खिलाड़ियों के हित में था या इसके पीछे कोई अन्य मकसद था।</p>
<p><strong>खेल और राजनीति का संगम</strong></p>
<p>यह विवाद न केवल खेल के मैदान पर उभर रहा है बल्कि राजनीति में भी गहरी जड़ें जमा चुका है। साक्षी मलिक और बबीता फोगट दोनों ही भारतीय कुश्ती का अहम हिस्सा रही हैं, लेकिन अब राजनीति में उनके कदम बढ़ने से उनके बीच दरारें साफ नजर आ रही हैं।</p>
<p>साक्षी जहां एक ओलंपियन और महिला पहलवानों की आवाज के रूप में उभरी हैं, वहीं बबीता फोगट भाजपा की नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। यह विवाद यह दिखाता है कि भारतीय खेल जगत में अब राजनीति का भी गहरा प्रभाव है और यह केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया है।</p>
<p><strong>आगे की राह</strong></p>
<p>यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का अंत कैसे होता है। क्या साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच सुलह होगी, या फिर यह विवाद और गहरा जाएगा? क्या यह विवाद भारतीय कुश्ती को और अधिक नुकसान पहुंचाएगा, या फिर इसे एक नए सिरे से खड़ा करने में मदद करेगा?</p>
<p>इन सभी सवालों का जवाब आने वाले समय में मिल सकता है, लेकिन एक बात तो तय है कि इस विवाद ने भारतीय खेल और राजनीति में हलचल मचा दी है। साक्षी मलिक और बबीता फोगट दोनों ही भारत के महान पहलवान हैं, लेकिन अब यह विवाद उनकी छवि को कैसे प्रभावित करेगा, यह समय ही बताएगा।</p>
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		<title>जो &#8216;मौसम वाले पक्षी&#8217; थे, वे अब डाल बदलकर कहीं और दाना चुगने की फिराक में हैं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Oct 2024 16:18:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Those 'seasonal birds' are now changing branches and looking for food elsewhere]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली (विजय प्रताप पांडे)। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जीवन एक सजीव उदाहरण है कि किस</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली (विजय प्रताप पांडे)। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जीवन एक सजीव उदाहरण है कि किस प्रकार राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्षों में उलझे हुए व्यक्ति का प्रभाव समय के साथ बढ़ता जाता है। भारतीय राजनीति में कई घटनाएं हास्यास्पद और असाधारण लग सकती हैं, लेकिन उनका सामाजिक, राजनीतिक, और क्षेत्रीय प्रभाव बहुत गहरा होता है। बृजभूषण शरण सिंह का नाम जब भी सामने आता है, वह विवादों और चर्चाओं का केंद्र बना रहता है।</p>
<p><strong>शुरुआती जीवन और राजघराने से अदावत</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें उनके पारिवारिक और राजनीतिक संघर्षों पर नजर डालनी होगी। यह कहानी केवल उनके राजनीतिक जीवन की नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत संघर्षों की भी है। जब वह अपने ही घर को जलाने के आरोप में फंसे थे, आरोप था कि उन्होंने खुद अपने घर में आग लगाई, जो कि एक अजीब और हास्यास्पद आरोप लगता है। लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी और उनके परिवार की राजघरानों से पुरानी अदावत ने इस घटना को और पेचीदा बना दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-3504 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery.jpg" alt="" width="1937" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery.jpg 1937w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery-300x167.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery-1024x571.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery-768x428.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213654_Gallery-1536x856.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1937px) 100vw, 1937px" /></p>
<p>गोंडा क्षेत्र में, जहां बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक प्रभाव प्रमुख रहा है, उनके परिवार और स्थानीय राजघरानों के बीच का संघर्ष दशकों पुराना है। स्थानीय राजनीति और सामाजिक ढांचे में इस संघर्ष का सीधा प्रभाव देखने को मिलता है। राजघराने से अदावत ने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में मजबूती दी, और वे धीरे-धीरे अपने समर्थकों और विरोधियों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गए।</p>
<p><strong>राजनीतिक उत्थान और भाजपा में बढ़ता प्रभाव</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक करियर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में कदम रखा, तब से उनका राजनीतिक प्रभाव गोंडा और आसपास के जनपदों में तेजी से बढ़ा। हालांकि उनके ऊपर लगे आरोपों और अदालती मुकदमों के कारण उनका राजनीतिक सफर हमेशा आसान नहीं रहा, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ को कमजोर नहीं किया जा सका।</p>
<p>गोंडा और उसके आसपास के जनपदों में, लोग यह कहने से बचते हैं कि भाजपा में उनकी नहीं चलती। गोंडा में भी शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो यह कहे कि बृजभूषण शरण सिंह का प्रभाव कम हो गया है। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र के लोगों में सुगबुगाहट जरूर पैदा कर दी है।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-3505 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery.jpg" alt="" width="1885" height="1080" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery.jpg 1885w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery-300x172.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery-1024x587.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery-768x440.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241019_213622_Gallery-1536x880.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1885px) 100vw, 1885px" /></p>
<p><strong>ताजा घटनाक्रम और राजनीतिक मौसम</strong></p>
<p>हाल के समय में बृजभूषण शरण सिंह के पूर्वांचल दौरे ने उनके समर्थकों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। उनकी सभाओं में जुटने वाली भीड़ और उनके समर्थकों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि उनका राजनीतिक करियर अभी समाप्त नहीं हुआ है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वे अभी भी एक मजबूत राजनीतिक ताकत बने हुए हैं।</p>
<p>बूढ़े बुजुर्गों का मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह एक बरगद के पेड़ की तरह हैं, जिसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। यह पेड़ इतनी आसानी से नहीं डिगेगा। छोटी-मोटी आंधियां उनके राजनीतिक कद को हिला नहीं सकतीं। उनके समर्थक भी इस बात से सहमत हैं कि सिंह का राजनीतिक जीवन अभी और लंबा चलने वाला है।</p>
<p><strong>विरोधी पक्ष और राजनीतिक बगावत</strong></p>
<p>जहां एक ओर बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक परिदृश्य में कुछ बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। कुछ ऐसे नेता और समर्थक जो पहले बृजभूषण शरण सिंह के साथ थे, अब दूसरे पक्ष में चले गए हैं। राजनीति में यह बदलाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि क्षेत्रीय राजनीति में हर कोई अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>जो &#8216;मौसम वाले पक्षी&#8217; थे, वे अब डाल बदल चुके हैं और किसी अन्य नेता के साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह राजनीतिक स्वार्थ और अवसरवादिता का संकेत है, जो भारतीय राजनीति का एक अभिन्न हिस्सा है। फिलहाल, इससे बृजभूषण शरण सिंह को कोई विशेष फर्क पड़ता हुआ नहीं दिख रहा है।</p>
<p><strong>वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य</strong></p>
<p>अगर हम वर्तमान समय की बात करें, तो बृजभूषण शरण सिंह का परिवार और उनका राजनीतिक प्रभाव केवल गोंडा तक सीमित नहीं है। उनके परिवार के सदस्यों ने भी राजनीति में कदम रखा है और अब उनमें से एक करण भूषण सिंह जो अपने पिता के उत्तराधिकारी बने हैं और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं वहीं उनके बड़े पुत्र प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधायक हैं इस बार उनका दूसरा कार्यकाल है  वे एक परिवार की तरह राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय हैं। ।</p>
<p>भाजपा में भी बृजभूषण शरण सिंह की पकड़ को कम आंकना एक बड़ी गलती हो सकती है। गोंडा और आसपास के क्षेत्र में उनका प्रभाव अभी भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था। भाजपा में उनकी स्थिति मजबूत है और पार्टी के अन्य नेताओं को भी यह मानना पड़ता है कि सिंह का राजनीतिक जीवन अब भी प्रभावी है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जीवन और राजनीतिक सफर एक जटिल और आकर्षक कहानी है। वह एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने न केवल राजनीतिक संघर्षों का सामना किया है, बल्कि अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक संघर्षों को भी सार्वजनिक रूप से झेला है। उनके ऊपर लगे आरोप और विवाद उनके राजनीतिक करियर के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं, लेकिन उनका क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्रभाव अब भी मजबूत बना हुआ है।</p>
<p>उनके समर्थक उन्हें एक बरगद के पेड़ की तरह मानते हैं, जो हर तरह की आंधियों का सामना करने में सक्षम है। भविष्य में क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक जीवन अभी खत्म होने वाला नहीं है। उनकी राजनीतिक यात्रा और प्रभाव आने वाले समय में भी भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण रहेगा।</p>
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		<title>उजाले के नाम पर अंधकार, नगर पालिका और क्षेत्र पंचायतों में करोड़ों की लूट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Oct 2024 03:40:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[#dmgonda]]></category>
		<category><![CDATA[Bavan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda dm]]></category>
		<category><![CDATA[kirti vardhan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Manju singh]]></category>
		<category><![CDATA[Prateek bhushan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Prem narayan pandey]]></category>
		<category><![CDATA[Vinay diwedi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 18 अक्टूबर। जनपद में उजाला लाने की कवायद, जो कि आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 18 अक्टूबर। जनपद में उजाला लाने की कवायद, जो कि आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई थी, अब एक बड़े भ्रष्टाचार की कहानी बन गई है। सरकार की ओर से जारी की गई हाई मास्क लाइट योजना को अधिकारियों और ठेकेदारों ने भ्रष्टाचार और बंदरबांट का जरिया बना लिया। इस योजना के तहत नगर पालिका, नगर पंचायत, और क्षेत्र पंचायत निधियों से जारी की गई भारी धनराशि का उपयोग बड़े पैमाने पर घोटाले के लिए किया गया।</p>
<p>जनपद की गलियों, चौराहों, और सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाली हाई मास्क लाइट्स की आड़ में करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है। लाइट्स और पोल्स की गुणवत्ता से लेकर उनकी कीमत तक, हर कदम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जिन लाइट्स की कीमतें लाखों में होनी चाहिए थीं, वे घटिया गुणवत्ता की सस्ती लाइट्स से बदली जा रही हैं, और बाकी पैसा अधिकारियों, ठेकेदारों, और स्थानीय नेताओं की जेबों में जा रहा है।</p>
<p><strong>हाई मास्क लाइट योजना: उद्देश्य और योजना का कार्यान्वयन</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में हाई मास्क लाइट्स लगाने की योजना का उद्देश्य गाँवों, कस्बों, और शहरों की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को रात के समय रोशन करना था। इन लाइट्स के माध्यम से न केवल सुरक्षा सुनिश्चित की जानी थी, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार ने इस परियोजना के लिए नगर पालिका, नगर पंचायत, और क्षेत्र पंचायत निधियों से भारी मात्रा में धनराशि जारी की थी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर स्थान पर उजाला हो।</p>
<p>लेकिन यह योजना कागजों पर जितनी प्रभावी दिख रही थी, जमीनी हकीकत में इसका कार्यान्वयन उतना ही दयनीय साबित हुआ। लाइट्स की कीमतों और गुणवत्ता में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई, और जो धनराशि इन लाइट्स को लगाने के लिए आवंटित की गई थी, उसका एक बड़ा हिस्सा भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबों में चला गया।</p>
<p><strong>घटिया लाइट्स और पोल्स की आपूर्ति: मानकों से समझौता</strong></p>
<p>इस योजना के तहत, जनपद में कई स्थानों पर हाई मास्क लाइट्स और उनके पोल्स लगाए गए। इन लाइट्स को सरकारी मानकों के अनुसार टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए था। लेकिन वास्तविकता में, जो लाइट्स लगाई गईं, वे घटिया गुणवत्ता की थीं।</p>
<p><strong>मानकों से समझौता कैसे किया गया?</strong></p>
<p>लाइट्स की कीमतों में हेरफेर: योजना के अनुसार, एक हाई मास्क लाइट की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये होनी चाहिए थी। उन्नत चौराहों और सार्वजनिक स्थानों के लिए, 3.3 लाख रुपये तक की कीमत वाली लाइट्स का प्रावधान था। लेकिन जो लाइट्स वास्तव में लगाई गईं, उनकी कीमतें मात्र 55,000 रुपये से लेकर 1.2 लाख रुपये तक ही थीं। इसका मतलब है कि हर लाइट पर हजारों से लाखों रुपये की हेराफेरी की गई।</p>
<p>पोल्स की गुणवत्ता में गिरावट: पोल्स, जो लाइट्स को सहारा देने के लिए बनाए गए थे, उनकी भी गुणवत्ता घटिया थी। कई स्थानों पर पोल्स कुछ ही महीनों में जंग खाकर टूटने लगे, और कुछ तो गिर भी गए। यह साबित करता है कि पोल्स में इस्तेमाल की गई सामग्री भी मानकों के अनुरूप नहीं थी।</p>
<p><strong>पैसे का बंदरबांट: कैसे किया गया घोटाला?</strong></p>
<p>इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई स्तरों पर भ्रष्टाचार किया गया। नगर पालिका और पंचायतों के अधिकारी, ठेकेदार, और स्थानीय नेता सभी इसमें शामिल थे।</p>
<p><strong>अधिकारियों और ठेकेदारों का गठजोड़</strong></p>
<p>टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर: सबसे पहले, लाइट्स और पोल्स की आपूर्ति के लिए निकाले गए टेंडर में हेरफेर किया गया। अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर उन कंपनियों को टेंडर दिए, जो या तो निम्न गुणवत्ता का सामान सप्लाई करती थीं या फिर घोटाले में शामिल थीं।</p>
<p><strong>कृत्रिम कीमतें:</strong> जिन लाइट्स की वास्तविक कीमत लाखों में होनी चाहिए थी, उन्हें कागजों पर इतना बढ़ाकर दिखाया गया कि सरकार से अधिक धनराशि ली जा सके। लेकिन असल में घटिया गुणवत्ता की सस्ती लाइट्स और पोल्स खरीदे गए।</p>
<p><strong>कीमतों में भारी गड़बड़ी</strong></p>
<p><strong>1.5 लाख रुपये की लाइट 55,000 रुपये में:</strong> उदाहरण के तौर पर, जो लाइट्स 1.5 लाख रुपये की  थीं, उन्हें वास्तविक मूल्य मात्र 55,000 रुपये था, और बाकी का पैसा अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बंदरबांट हो गया।</p>
<p><strong>3.3 लाख रुपये की लाइट 1.2 लाख रुपये में:</strong> उच्च गुणवत्ता की लाइट्स की जगह सस्ती लाइट्स लगाकर 2.1 लाख रुपये प्रति लाइट का घोटाला किया गया।</p>
<p><strong>मानक विहीन सामग्री का इस्तेमाल</strong></p>
<p>लाइट्स और पोल्स की गुणवत्ता में जानबूझकर समझौता किया गया। जिन पोल्स को कई सालों तक टिकने के लिए बनाया जाना चाहिए था, वे कुछ ही महीनों में जंग खाकर खराब होने लगे लाइट्स में इस्तेमाल की गई बैटरियां और बल्ब भी खराब गुणवत्ता के थे, जिससे वे जल्दी जल गए और बंद हो गए।</p>
<p><strong>जनता की नाराजगी और असुविधा</strong></p>
<p>इस घोटाले का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ा। जो लोग इन लाइट्स के जरिए बेहतर रोशनी और सुरक्षा की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें अंधेरे में धकेल दिया गया।</p>
<p><strong>स्थानीय निवासियों की शिकायतें:</strong></p>
<p>एक स्थानीय दुकानदार का कहना है, &#8220;जब ये लाइट्स लगीं, तो हमें लगा कि अब रात में व्यापार करना आसान हो जाएगा। लेकिन कुछ ही महीनों में लाइट्स बंद हो गईं, और अब हमें फिर से अंधेरे में काम करना पड़ता है। एक अन्य निवासी ने कहा, &#8220;हमें बताया गया था कि ये लाइट्स कई सालों तक चलेंगी, लेकिन अब हमें लग रहा है कि यह सब केवल पैसे की लूट के लिए किया गया था।&#8221;</p>
<p><strong>शिकायतों पर प्रशासन की अनदेखी</strong></p>
<p>जब लाइट्स और पोल्स जल्दी खराब होने लगे, तो जनता ने नगर पालिका और प्रशासन के पास शिकायतें कीं। लेकिन इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।</p>
<p><strong>प्रशासन की प्रतिक्रिया:</strong></p>
<p>नगर पालिका और पंचायत अधिकारियों ने शिकायतों को नजरअंदाज किया और कहा कि लाइट्स की मरम्मत की जाएगी, लेकिन मरम्मत के नाम पर फिर से वही भ्रष्टाचार किया गया प्रशासन ने लाइट्स की खराब गुणवत्ता पर कोई जांच नहीं की और जनता की समस्याओं को दरकिनार कर दिया।</p>
<p><strong>जांच का अभाव: क्यों नहीं हो रही है जांच?</strong></p>
<p>यह घोटाला उजागर होने के बावजूद, सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस जांच नहीं की गई है।</p>
<p><strong>क्या कहता है प्रशासन?</strong></p>
<p>जब भी इस घोटाले के बारे में क्षेत्र पंचायत के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल किया जाता है, तो अधिकारियों की ओर से गोलमोल जवाब दिए जाते हैं। ऐसा लगता है कि इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई न हो सके। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि नगर पालिका और पंचायत के कई अधिकारी और ठेकेदार इस घोटाले में शामिल हैं, और उनकी प्रशासनिक पहुँच इतनी मजबूत है कि किसी भी प्रकार की जांच को आसानी से दबा दिया जाता है।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम: क्या हो सकते हैं समाधान?</strong></p>
<p>यह घोटाला न केवल गोण्डा जनपद, बल्कि पूरे राज्य में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका प्रमाण है। ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>संभव समाधान:</strong></p>
<p><span style="color: #993300;">पारदर्शिता लाना:</span> योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता जरूरी है। टेंडर प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जनता को भी पता चले कि कौन सा ठेकेदार काम कर रहा है और उस काम की गुणवत्ता कैसी है।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>स्वतंत्र जांच आयोग:</strong> </span>इस प्रकार के घोटालों की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जिसमें जनता और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">कड़ी सजा</span>:</strong> जो भी अधिकारी, ठेकेदार, या नेता इस घोटाले में शामिल पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p>गोण्डा जनपद में हाई मास्क लाइट योजना का घोटाला उजाले के नाम पर ठेकेदारों की और अधिकारियों की अंधी कमाई का जरिया मात्र रह गया है। प्रदेश में हाई मास्क लाइट योजना का घोटाला भ्रष्टाचार का एक और जीता-जागता उदाहरण है। जनता के पैसों का दुरुपयोग करके कुछ खास लोग अपनी जेबें भर रहे हैं, जबकि जिनके लिए यह योजना बनाई गई वह अभी भी अंधेरे में है।</p>
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		<item>
		<title>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का परिवार उनके समर्थक जनप्रतिनिधि दिशा की बैठक से रहे दूर</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/former-mp-brij-bhushan-sharan-singhs-family-stayed-away-from-his-supporter-dishas-meeting/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Oct 2024 08:26:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[@gondadm]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Disha]]></category>
		<category><![CDATA[Former MP Brij Bhushan Sharan Singh's family stayed away from his supporter Disha's meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Latest alerts]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 17 अक्टूबर। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार के इर्द-गिर्द हालिया घटनाओं ने उत्तर प्रदेश</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-mp-brij-bhushan-sharan-singhs-family-stayed-away-from-his-supporter-dishas-meeting/">पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का परिवार उनके समर्थक जनप्रतिनिधि दिशा की बैठक से रहे दूर</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">गोंडा 17 अक्टूबर। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार के इर्द-गिर्द हालिया घटनाओं ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ लाया है। हाल ही में हुई दिशा (जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति) की बैठक में बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के सदस्यों और उनके समर्थकों ने भाग नहीं लिया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। यह घटना पूर्व सांसद के परिवार और उनके समर्थकों के बीच पनप रही नाराजगी की ओर इशारा करती है, खासकर तब, जब कैसरगंज के सांसद करण भूषण सिंह को दिशा के अध्यक्ष पद से हटाया गया है। इस नाराजगी ने बैठक से परिवार और समर्थकों की अनुपस्थिति को और भी प्रमुख बना दिया है।</p>
<p><strong>बैठक में अनुपस्थिति की चर्चा</strong></p>
<p>दिशा की बैठक, जिसका उद्देश्य जिले के विकास कार्यों की निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करना होता है, बहराइच जिले में आयोजित की गई थी। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने की, जो कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, जिस बात ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा वह यह थी कि बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के सदस्यों,  10 से ऊपर ब्लाक प्रमुख और उनके प्रमुख समर्थकों ने इस बैठक से पूरी तरह किनारा कर लिया।</p>
<p>कैसरगंज के वर्तमान सांसद करण भूषण सिंह, जो कि दिशा के पूर्व अध्यक्ष थे, उनके समर्थकों की यह नाराजगी तब सामने आई जब उन्हें दिशा के अध्यक्ष पद से हटाया गया। इसी नाराजगी के चलते बैठक में उनका या उनके परिवार के किसी सदस्य का उपस्थित न होना एक स्पष्ट संकेत है कि पार्टी और नेतृत्व के बीच असंतोष गहरा रहा है। सांसद करण भूषण सिंह और विधायक प्रतीक भूषण सिंह की अनुपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के भीतर वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को लेकर असहमति और असंतोष की भावना बढ़ रही है।</p>
<p><strong>नाराजगी की वजहें</strong></p>
<p>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से क्षेत्र में बना हुआ है। चाहे वह विधानसभा हो या लोकसभा, उनका परिवार और समर्थक हमेशा राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह, जो कई बार सांसद रह चुके हैं, का क्षेत्र में गहरा पकड़ और जनाधार है। उनके बेटे करण भूषण सिंह को दिशा के अध्यक्ष पद से हटाया जाना उनके समर्थकों के लिए एक बड़ा धक्का था, और यही वजह बनी कि बैठक से किनारा किया गया।</p>
<p>इससे पहले बृजभूषण शरण सिंह और उनका परिवार कई बार विवादों में रहा है, लेकिन उनका राजनीतिक वर्चस्व कभी कम नहीं हुआ। उनके समर्थक हमेशा उनके पक्ष में खड़े रहे हैं, चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हो। लेकिन इस बार दिशा की बैठक में उनकी अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह साफ संकेत है कि उनके समर्थकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p><strong>बैठक में अन्य प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति</strong></p>
<p>दिशा की बैठक में बृजभूषण शरण सिंह के परिवार और समर्थकों की अनुपस्थिति ने जितना ध्यान खींचा, उतना ही महत्वपूर्ण था अन्य प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति। बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के अलावा, कई अन्य प्रमुख विधायक और सांसद भी उपस्थित थे। इनमें कर्नलगंज से विधायक अजय सिंह, गौरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रभात वर्मा, तरबगंज विधानसभा क्षेत्र से प्रेम नारायण पांडे, मनकापुर के विधायक रमापति शास्त्री, और मेहनौन विधानसभा क्षेत्र से विधायक विनय द्विवेदी शामिल थे।</p>
<p>इन नेताओं की उपस्थिति ने इस बात को भी रेखांकित किया कि विकास कार्यों पर चर्चा और उनकी निगरानी के लिए दिशा की बैठक कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, बृजभूषण शरण सिंह के परिवार की अनुपस्थिति ने इस बैठक की राजनीतिक महत्ता को और बढ़ा दिया। इससे यह साफ हो गया है कि जिले के राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और बृजभूषण शरण सिंह के परिवार का इस बदले हुए समीकरण में क्या स्थान होगा, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा।</p>
<p><strong>समर्थकों में असंतोष और नेतृत्व का संकट</strong></p>
<p>बैठक में अनुपस्थिति केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि एक बड़े असंतोष की ओर इशारा करती है। यह असंतोष सीधे तौर पर बृजभूषण शरण सिंह के परिवार और समर्थकों के बीच नेतृत्व के संकट से जुड़ा हुआ है। खासकर जब सांसद करण भूषण सिंह को दिशा के अध्यक्ष पद से हटाया गया, तब से ही समर्थकों के बीच असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी, जो अब साफ तौर पर दिखाई दे रही है।</p>
<p>इस नेतृत्व के संकट की वजह से समर्थकों के बीच एक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उनका मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह का परिवार अब भी क्षेत्र में अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन उनके विरोधियों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए उनकी पकड़ कमजोर करने की कोशिश की है। समर्थकों को लगता है कि अगर स्थिति को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो भविष्य में इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>भविष्य की राजनीति पर असर</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह के परिवार और समर्थकों की यह नाराजगी केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रहने वाली। इससे आने वाले समय में जिले की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। दिशा की बैठक में उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है कि क्या बृजभूषण शरण सिंह का परिवार अब भी क्षेत्र में अपना पुराना वर्चस्व बनाए रख पाएगा, या फिर उनके विरोधी इस मौके का फायदा उठाकर उनकी राजनीतिक पकड़ को कमजोर कर देंगे।</p>
<p>इस बैठक में अनुपस्थिति के बाद यह भी संभावना है कि आने वाले चुनावों में बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके समर्थकों का यह असंतोष अगर दूर नहीं किया गया, तो इसका असर गोंडा और आसपास के जनपदों में भारतीय जनता पार्टी पर पड़ना तय है।</p>
<p>समर्थकों की नाराजगी के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि बृजभूषण शरण सिंह और उनके परिवार आने वाले दिनों में क्या कदम उठाते हैं। यह घटना संकेत देती है कि परिवार और समर्थकों की नेतृत्व के बीच संवादहीनता बढ़ रही है, और यह स्थिति आने वाले समय में उन्हें राजनीतिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।</p>
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		<title>हुड्डा ने तैयार किया था लड़कियों को- बृजभूषण शरण सिंह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 08:33:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Latest news]]></category>
		<category><![CDATA[Vinesh fogat]]></category>
		<category><![CDATA[Wrestling]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, हुड्डा पर साधा निशाना गोंडा 16 अक्टूबर: भारतीय कुश्ती महासंघ</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान, हुड्डा पर साधा निशाना</strong></p>
<p>गोंडा 16 अक्टूबर: भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर से राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने इस बयान में उन्होंने दावा किया कि हुड्डा ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा था, लेकिन अंततः हनुमान जी ने उन्हें बचा लिया। बृजभूषण का यह बयान उन विवादों से भी जुड़ा है, जिनमें वे पिछले कुछ समय से घिरे हुए हैं।</p>
<p><strong>बृजभूषण का बड़ा दावा: षड्यंत्र और हार की कहानी</strong></p>
<p>गोंडा में एक सभा को संबोधित करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, &#8220;दो साल हो गए, और मैं एक राज की बात बताना चाहता हूं। जिसने भी मेरे खिलाफ षड्यंत्र किया, उसका सत्यानाश हो गया। हुड्डा का भी सत्यानाश हो गया। सुबह 10 बजे तक वह मुख्यमंत्री बन रहे थे, और दोपहर 12 बजे तक पता चला कि वह हार गए।&#8221;</p>
<p>बृजभूषण ने अपने बयान में साफ तौर पर इशारा किया कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे, जिसमें उनके ऊपर आरोप लगाने के लिए कुछ लड़कियों को तैयार किया गया था। उन्होंने कहा, &#8220;हनुमान जी ने मुझे बचाया। हुड्डा ही सबसे बड़ा षड्यंत्रकारी था। लड़कियों को इसी में तैयार किया गया था और कहा गया था कि आओ, नेताजी के ऊपर आरोप लगाओ</p>
<p><iframe loading="lazy"  id="_ytid_40409"  width="640" height="360"  data-origwidth="640" data-origheight="360" src="https://www.youtube.com/embed/vJndNPgwVm8?enablejsapi=1&#038;rel=1&#038;disablekb=0&#038;autoplay=0&#038;cc_load_policy=0&#038;cc_lang_pref=&#038;iv_load_policy=1&#038;loop=0&#038;fs=1&#038;playsinline=0&#038;autohide=2&#038;theme=dark&#038;color=red&#038;controls=1&#038;" class="__youtube_prefs__  epyt-is-override  no-lazyload" title="YouTube player"  allow="fullscreen; accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen data-no-lazy="1" data-skipgform_ajax_framebjll=""></iframe></p>
<p><strong>हुड्डा पर लगाए गंभीर आरोप</strong></p>
<p>भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, बृजभूषण शरण सिंह के इस गंभीर आरोपों के बाद फिर से विवादों में घिर सकते हैं। बृजभूषण ने यह दावा किया कि हुड्डा ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने में प्रमुख भूमिका निभाई थी और उनके राजनीतिक करियर को धूमिल करने की कोशिश की थी।</p>
<p>यह बयान बृजभूषण द्वारा उस समय दिया गया जब वे अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह आरोप लगाया कि हुड्डा ने कुछ लड़कियों को उनके खिलाफ उकसाया और उन्हें आरोप लगाने के लिए प्रेरित किया। बृजभूषण ने अपने इस बयान में कई बार कहा कि यह सब एक सोची-समझी साजिश थी, जिसे हनुमान जी के आशीर्वाद से उन्होंने विफल कर दिया।</p>
<p><strong>हनुमान जी का उल्लेख: धार्मिक और प्रतीकात्मक संदर्भ</strong></p>
<p>अपने बयान में बृजभूषण शरण सिंह ने बार-बार हनुमान जी का उल्लेख किया और कहा कि हनुमान जी ने उन्हें इस षड्यंत्र से बचाया। यह बयान न केवल राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व भी है। बृजभूषण, जो हनुमान जी के प्रति गहरी आस्था रखते हैं, उन्होंने इसे एक धार्मिक हस्तक्षेप के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे उन्हें इस राजनीतिक षड्यंत्र से बचाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;हनुमान जी ने मुझे बचाया। यह उनके आशीर्वाद का परिणाम है कि मैं इस षड्यंत्र से बाहर निकल पाया।&#8221;</p>
<p>इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी धार्मिक आस्था को अपने राजनीतिक बयान के साथ जोड़ते हुए इसे एक आध्यात्मिक संदर्भ में पेश किया है। उन्होंने अपने समर्थकों के सामने इसे एक बड़े चमत्कार के रूप में बताया, जिससे वे बचे और हुड्डा जैसे षड्यंत्रकारियों का अंत हुआ।</p>
<p><strong>राजनीतिक समीकरण और विवाद</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान के बाद हरियाणा और राष्ट्रीय राजनीति में एक नई हलचल शुरू हो गई है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, उन पर बृजभूषण द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों से कांग्रेस पार्टी की साख पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। हुड्डा, जो हरियाणा की राजनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाते रहे हैं, अब इन आरोपों का जवाब कैसे देते हैं, यह देखने वाली बात होगी।</p>
<p>बृजभूषण का यह बयान उस समय आया है जब भारतीय राजनीति में कई बड़े बदलाव और चुनावी तैयारियां हो रही हैं। ऐसे में यह बयान राजनीतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। बृजभूषण ने यह दावा किया कि हुड्डा ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।</p>
<p><strong>बृजभूषण शरण सिंह: विवादों से जुड़े नेता</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह, जो भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत पकड़ रखते हैं, वे लंबे समय से विवादों से घिरे हुए हैं। उनका राजनीतिक सफर एक ओर जहां उन्हें भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित करता है, वहीं दूसरी ओर कई विवादों में उनका नाम भी शामिल होता रहा है।</p>
<p>हाल के वर्षों में बृजभूषण पर कई आरोप लगे, जिनमें से कुछ यौन उत्पीड़न के भी थे। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह उनके खिलाफ एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र है। उनके समर्थकों का भी मानना है कि बृजभूषण के खिलाफ जो आरोप लगाए गए थे, वे सब राजनीतिक साजिश के तहत लगाए गए थे।</p>
<p><strong>हुड्डा का राजनीतिक करियर और बृजभूषण के आरोप</strong></p>
<p>भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाते हैं, का राजनीतिक करियर भी लंबे और सफल रहा है। लेकिन बृजभूषण के इस बयान के बाद हुड्डा के राजनीतिक करियर पर सवाल उठ सकते हैं।</p>
<p>बृजभूषण ने हुड्डा पर सीधे तौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि हुड्डा ने उनके खिलाफ लड़कियों को उकसाया और उन्हें आरोप लगाने के लिए प्रेरित किया। यह आरोप न केवल हुड्डा की छवि को धूमिल कर सकता है, बल्कि कांग्रेस पार्टी के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी कई चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है। उन्होंने न केवल भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि इसे धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ में भी पेश किया है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है। अब देखना होगा कि हुड्डा और कांग्रेस पार्टी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है, और इस विवाद का राजनीतिक परिणाम क्या होता है।</p>
<p>बृजभूषण शरण सिंह, जो अपने विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं, इस बार भी उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया है, जो आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।</p>
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		<title>गोंडा गन्ना समिति चुनाव विवाद: भाजपा में दो फाड़</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Oct 2024 16:18:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
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		<category><![CDATA[Gonda Sugarcane Committee Election Dispute: BJP divided into two]]></category>
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		<category><![CDATA[गोंडा गन्ना समिति चुनाव विवाद: भाजपा में दो फाड़]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा गन्ना समिति चुनाव विवाद: भाजपा में दो फाड़, जातिगत संतुलन बिगड़ने पर विधायक प्रतीक भूषण सिंह व</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/gonda-sugarcane-committee-election-dispute-bjp-divided-into-two/">गोंडा गन्ना समिति चुनाव विवाद: भाजपा में दो फाड़</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>गोंडा गन्ना समिति चुनाव विवाद: भाजपा में दो फाड़, जातिगत संतुलन बिगड़ने पर विधायक प्रतीक भूषण सिंह व उनके समर्थकों में गुस्सा</strong></p>
<p>गोण्डा 15 अक्टूबर। जनपद में गन्ना विकास समिति के अध्यक्ष पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर गंभीर असंतोष और विरोधाभास सामने आ रहा है। इस विवाद का प्रमुख कारण समिति के अध्यक्ष पद के लिए घोषित किए गए प्रत्याशी पर आपत्ति जताते हुए भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह द्वारा प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखा गया है। इसके साथ ही, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के साथ हो रही अनदेखी ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है, जिससे पार्टी के अंदर के मतभेद स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ रहे हैं।</p>
<p><strong>गन्ना समिति अध्यक्ष पद पर विधायक प्रतीक भूषण सिंह की आपत्ति</strong></p>
<p>गोंडा सदर विधानसभा के विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने गन्ना समिति के अध्यक्ष पद के लिए घोषित किए गए प्रत्याशी पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी के जिला संगठन ने बिना कोर कमेटी की सहमति के ही प्रत्याशी का चयन कर लिया है। प्रतीक भूषण सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि गोंडा विधानसभा क्षेत्र के बजाय मनकापुर क्षेत्र से प्रत्याशी चुना गया, जबकि गोंडा गन्ना समिति के अधिकांश गांव उनके विधानसभा क्षेत्र में आते हैं।</p>
<p>विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार का चयन जातिगत समन्वय को दरकिनार करते हुए किया गया है, जो पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की है कि अध्यक्ष पद का प्रत्याशी ब्राह्मण समाज से होना चाहिए और गोंडा सदर विधानसभा क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।</p>
<figure id="attachment_3356" aria-describedby="caption-attachment-3356" style="width: 990px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-3356 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241015-WA0031-1.jpg" alt="" width="990" height="1434" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241015-WA0031-1.jpg 990w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241015-WA0031-1-207x300.jpg 207w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241015-WA0031-1-707x1024.jpg 707w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/IMG-20241015-WA0031-1-768x1112.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 990px) 100vw, 990px" /><figcaption id="caption-attachment-3356" class="wp-caption-text"><strong>विधायक प्रतीक भूषण सिंह द्वारा प्रदेश महामंत्री को लिखा गया पत्र</strong></figcaption></figure>
<p><strong>जातिगत समन्वय की अनदेखी: ब्राह्मण समाज की नाराजगी</strong></p>
<p>इस विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गोंडा जिले में ब्राह्मण समाज के साथ हो रहे जातिगत असंतुलन के चलते भाजपा के अंदर गहरी नाराजगी पनप रही है। देवीपाटन मंडल में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा की जा रही है, और गन्ना समितियों के चुनाव में भी यही परिदृश्य देखने को मिल रहा है। कर्नलगंज गन्ना समिति में समाजवादी पार्टी के नेता को निर्विरोध निर्वाचन का मौका दिया गया, जबकि भाजपा ने कोई प्रत्याशी ही नहीं उतारा। इससे ब्राह्मण समाज के लोगों के बीच यह भावना फैल रही है कि पार्टी उनकी उपेक्षा कर रही है।</p>
<p><strong>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के साथ हो रही अनदेखी</strong></p>
<p>गोंडा में भाजपा के भीतर असंतोष का एक और महत्वपूर्ण कारण पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के साथ हो रही अनदेखी है। बृजभूषण शरण सिंह का परिवार पार्टी की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। पहले कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह को दिशा का अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें हटाकर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह को अध्यक्ष पद सौंप दिया गया और करण भूषण सिंह को उपाध्यक्ष बना दिया गया।</p>
<p>इस बदलाव से बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों के बीच गहरा असंतोष है। सवाल उठाया जा रहा है कि अगर करण भूषण सिंह को उपाध्यक्ष ही बनाना था, तो उन्हें पहले अध्यक्ष क्यों बनाया गया? इस निर्णय को लेकर बृजभूषण शरण सिंह के समर्थक नाराज हैं और इसे उनके परिवार की राजनीतिक अनदेखी के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p><strong>गन्ना समिति चुनाव: अंदरूनी राजनीति और संभावित परिणाम</strong></p>
<p>गोंडा गन्ना समिति के चुनाव को लेकर चल रहे विवाद ने भाजपा के अंदर गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इस तरह के फैसले, जिसमें संगठन की सहमति के बिना प्रत्याशी का चयन किया जाता है, न केवल पार्टी के अंदर असंतोष को बढ़ावा देते हैं बल्कि आगामी चुनावों में भी इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p>विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि इस प्रकार के निर्णयों से पार्टी के उम्मीदवारों को भविष्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में नुकसान हो सकता है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि गन्ना समिति के अध्यक्ष पद के लिए ऐसा प्रत्याशी चुना जा सके, जो ब्राह्मण समाज का हो और पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हो।</p>
<p><strong>भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के समक्ष चुनौती</strong></p>
<p>भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के सामने इस समय एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। गोंडा गन्ना समिति चुनाव से उठे इस विवाद ने पार्टी के अंदर जातिगत संतुलन और नेतृत्व के चयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थक पार्टी नेतृत्व से उनके परिवार के साथ हो रही अनदेखी पर जवाब मांग रहे हैं।</p>
<p>पार्टी के प्रदेश महामंत्री को लिखे गए पत्र के जरिए प्रतीक भूषण सिंह ने साफ कर दिया है कि वह इस निर्णय से खुश नहीं हैं और इसे बदलने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p><strong>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों का गुस्सा</strong></p>
<p>पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों के बीच यह भावना भी गहराती जा रही है कि पार्टी नेतृत्व उनके परिवार के साथ उचित सम्मान नहीं कर रहा है। खासकर कैसरगंज से मौजूद सांसद करण भूषण सिंह के मामले में, जब उन्हें पहले अध्यक्ष बनाया गया और फिर उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया गया, तो यह निर्णय कई समर्थकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ। इस फैसले को लेकर बृजभूषण शरण सिंह और करण भूषण सिंह के समर्थकों के बीच नाराजगी व्याप्त है, और उनका मानना है कि यह परिवार की राजनीतिक हैसियत को कमजोर करने का प्रयास है।</p>
<p><strong>भविष्य की राजनीति और संभावित असर</strong></p>
<p>भाजपा के लिए गोंडा गन्ना समिति चुनाव का असर पार्टी की आंतरिक राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। अगर पार्टी नेतृत्व ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो इससे न केवल ब्राह्मण समाज के साथ पार्टी के संबंधों पर असर पड़ेगा, बल्कि बृजभूषण शरण सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के बीच भी असंतोष बढ़ सकता है।</p>
<p>आने वाले समय में, अगर भाजपा ने गोंडा और देवीपाटन मंडल में जातिगत संतुलन और आंतरिक राजनीति के इन मुद्दों को नहीं सुलझाया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है। पार्टी के लिए यह जरूरी है कि वह संगठन के भीतर जातिगत संतुलन को बनाए रखे और अपने वरिष्ठ नेताओं और उनके परिवारों के साथ हो रहे मतभेदों को समय पर सुलझाए।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>गोंडा गन्ना समिति चुनाव का विवाद और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार के साथ हो रही अनदेखी ने भाजपा के भीतर आंतरिक संघर्ष को उजागर कर दिया है। जातिगत संतुलन बिगड़ने और संगठन में पारदर्शिता की कमी के आरोप ने पार्टी के अंदर असंतोष को बढ़ावा दिया है। अगर पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को समय पर सुलझाया नहीं, तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है।</p>
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