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	<title>BRICS summit 2024 Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिखा दबदबा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Oct 2024 00:26:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[#Narendramodi]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS summit 2024]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
		<category><![CDATA[Prime Minister Narendra Modi's dominance seen in BRICS summit]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 24 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रूस यात्रा के दौरान आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 24 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रूस यात्रा के दौरान आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियों और संभावनाओं की एक श्रृंखला को सामने रखा। पीएम मोदी ने दो दिवसीय इस यात्रा में ब्रिक्स देशों के नेताओं से मुलाकात की, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत अन्य विश्व नेता शामिल थे। इस यात्रा के दौरान न केवल अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर जोर दिया गया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, गाजा युद्ध और ब्रिक्स देशों के आपसी सहयोग की संभावनाओं पर भी गहन चर्चा की गई।</p>
<p>यह शिखर सम्मेलन रूस के कजान शहर में आयोजित हुआ, जिसमें रूस ने ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता की। यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि इसमें विश्व के प्रमुख मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई और कई निर्णय लिए गए। आइए, इस यात्रा और शिखर सम्मेलन के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी का शिखर सम्मेलन में योगदान</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेते हुए दो महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए ब्रिक्स देशों के आपसी सहयोग को और सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे मंचों पर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करके नए समाधान खोजे जा सकते हैं, जो वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए जरूरी हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस यात्रा के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनकी रूस यात्रा अत्यंत उपयोगी रही, और कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उन्हें विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने और विभिन्‍न विश्व नेताओं से मिलने का अवसर मिला। पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और वहाँ के नागरिकों का आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारतीय अर्थव्यवस्था की सराहना</strong></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और भारत की आर्थिक वृद्धि की खुलकर सराहना की। पुतिन ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अन्य ब्रिक्स देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा, &#8220;भारत की आर्थिक वृद्धि दर ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीतियों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो उच्च आर्थिक विकास दर को हासिल करना संभव है। भारत इसमें सफल रहा है, और यह अन्य देशों के लिए एक उदाहरण है।&#8221;</p>
<p>पुतिन ने भारत की 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर की भी तारीफ की और पीएम मोदी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का यह तेज विकास दर दर्शाता है कि देश ने अपनी आर्थिक नीतियों को कुशलतापूर्वक लागू किया है। पुतिन की यह टिप्पणी वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक ताकत को दर्शाती है, और यह संकेत देती है कि भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और भी मजबूत किया जा सकता है।</p>
<p><strong>शी जिनपिंग की गाजा और यूक्रेन पर चिंता</strong></p>
<p>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान गाजा और यूक्रेन संकट पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने जोर देकर कहा कि गाजा में युद्धविराम और हिंसा को जल्द से जल्द रोकना आवश्यक है, क्योंकि क्षेत्र की बिगड़ती मानवीय स्थिति क्षेत्रीय शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि हमें गाजा के मुद्दे का समाधान निकालने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि फलस्तीन का मुद्दा केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक मुद्दा बन गया है। इसका समाधान व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यूक्रेन संकट का भी जिक्र किया, जो अब भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने शांति के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए चीन और ब्राजील द्वारा शुरू किए गए &#8216;शांति मित्रों&#8217; के समूह का उल्लेख किया, जो वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए काम कर रहा है।</p>
<p><strong>वैश्विक साउथ और ब्रिक्स का विस्तार</strong></p>
<p>इस शिखर सम्मेलन के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू ब्रिक्स समूह का विस्तार था। शी जिनपिंग ने घोषणा की कि ब्रिक्स में कई अन्य देशों को साझीदार बनने का निमंत्रण दिया गया है। उन्होंने इस विस्तार को ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक बड़ा अवसर बताया और कहा कि ब्रिक्स का विस्तार न केवल समूह की शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों को भी साथ लेकर चलने में मदद करेगा।</p>
<p>इस कदम से ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग और भी मजबूत होगा, और वैश्विक आर्थिक संतुलन में एक नया अध्याय शुरू होगा। ब्रिक्स देशों का उद्देश्य वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज को और सशक्त बनाना है, और इस विस्तार से ब्रिक्स की भूमिका वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।</p>
<p><strong>रूस-भारत संबंधों में मजबूती</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की यह रूस यात्रा रूस-भारत संबंधों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को और गहरा किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और रूस के बीच कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और बढ़ाने की आवश्यकता है।</p>
<p>भारत और रूस के बीच पहले से ही ऊर्जा, रक्षा, और व्यापार जैसे क्षेत्रों में गहरे संबंध हैं, लेकिन इस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने और भी नई संभावनाओं की तलाश की। पुतिन और मोदी ने दोनों देशों के बीच व्यापार को और बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने पर चर्चा की। खासकर ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया।</p>
<p><strong>गाजा युद्ध पर विश्व की चिंता</strong></p>
<p>गाजा में जारी युद्ध और क्षेत्रीय संघर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक प्रमुख चर्चा का विषय रहा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए जोर दिया कि गाजा में तुरंत युद्धविराम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, और यदि जल्द से जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो यह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।</p>
<p>गाजा का मुद्दा इस शिखर सम्मेलन में प्रमुखता से उठाया गया, और ब्रिक्स देशों ने इस संकट के समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। फलस्तीन और इजराइल के बीच चल रहे इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व को प्रभावित किया है, बल्कि इसकी गूंज वैश्विक मंच पर भी सुनाई दे रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में यह बात स्पष्ट की गई कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान ही क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित कर सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम</strong></p>
<p>16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों की नींव रखी। इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग को और भी मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी ब्रिक्स देशों ने एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता को स्वीकार किया। आर्थिक सहयोग, व्यापार, तकनीकी साझेदारी, और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।</p>
<p>इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता के लिए आपसी सहयोग अनिवार्य है। सम्मेलन के दौरान यह भी तय किया गया कि ब्रिक्स समूह में अन्य देशों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे इस समूह की वैश्विक भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा और 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने भारत की वैश्विक स्थिति को और भी मजबूत किया है। इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न विश्व नेताओं से मुलाकात की और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ ने भारत के आर्थिक विकास की वैश्विक पहचान को और भी सशक्त किया है।</p>
<p>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने न केवल ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक नई दिशा भी दिखाई। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य में ब्रिक्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, और यह शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।</p>
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		<title>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024: प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका और भारत का बढ़ता महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Oct 2024 17:05:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS summit 2024]]></category>
		<category><![CDATA[BRICS Summit 2024: Prime Minister Modi's role and India's growing importance]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 22 अक्टूबर। 2024 में रूस के कज़ान शहर में आयोजित 16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीतिक</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/brics-summit-2024-prime-minister-modis-role-and-indias-growing-importance/">ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024: प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका और भारत का बढ़ता महत्व</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 22 अक्टूबर। 2024 में रूस के कज़ान शहर में आयोजित 16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता, बहुपक्षीय सहयोग, और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। ऐसे समय में जब दुनिया विभिन्न मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है—जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-हमास संघर्ष, और जलवायु संकट—ब्रिक्स जैसे संगठन की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस शिखर सम्मेलन में भागीदारी से भारत की वैश्विक कूटनीति को नया आयाम मिल रहा है। भारत न केवल आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से एक उभरती हुई शक्ति है, बल्कि ब्रिक्स के भीतर उसकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि कैसे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 में पीएम मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण है और भारत किस प्रकार वैश्विक सहयोग और स्थिरता के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ा रहा है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-3596 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1509" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-300x177.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-1024x603.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-768x453.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-1536x905.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395622-2048x1207.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>ब्रिक्स का उदय और भारत की भूमिका</strong></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>ब्रिक्स का विकास: एक पृष्ठभूमि</strong></span></p>
<p>ब्रिक्स का गठन 2006 में हुआ था और यह संगठन उन देशों का समूह है जो तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद से, ब्रिक्स का दायरा और महत्व और अधिक बढ़ गया है। ब्रिक्स का गठन ऐसे समय में हुआ जब दुनिया की पारंपरिक शक्तियों—जैसे अमेरिका और यूरोप—के आर्थिक प्रभुत्व के मुकाबले नए विकल्प उभर रहे थे।</p>
<p>भारत ने ब्रिक्स की स्थापना के बाद से ही इसमें सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके सदस्य देशों में भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति लगातार मज़बूत होती जा रही है। ब्रिक्स का उद्देश्य न केवल वैश्विक विकास में साझेदारी को बढ़ावा देना है, बल्कि एक न्यायसंगत वैश्विक शासन प्रणाली की स्थापना करना है जो विकासशील देशों के हितों की रक्षा करे।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">भारत की ब्रिक्स में भूमिका</span></strong></p>
<p>भारत ब्रिक्स का एक प्रमुख सदस्य है, जो इस संगठन के उद्देश्यों के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। ब्रिक्स के मंच के जरिए भारत ने आर्थिक और राजनीतिक कूटनीति को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया है। वैश्विक स्तर पर भारत की उभरती स्थिति को देखते हुए, इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p>भारत के दृष्टिकोण से ब्रिक्स का महत्व इस बात में निहित है कि यह संगठन पश्चिमी देशों के प्रभाव से स्वतंत्र एक वैकल्पिक मंच प्रदान करता है। भारत ने अपने विकास और आर्थिक सहयोग के लिए ब्रिक्स को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति और नेतृत्व ने भारत की भूमिका को और भी सशक्त किया है, और यह बात इस शिखर सम्मेलन में साफ़ दिखाई दे रही है।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-3597 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623.jpg" alt="" width="1962" height="1500" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623.jpg 1962w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623-300x229.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623-1024x783.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623-768x587.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395623-1536x1174.jpg 1536w" sizes="(max-width: 1962px) 100vw, 1962px" /></p>
<p><strong>16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: प्रमुख मुद्दे और चुनौतियां</strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300;">बहुपक्षीय सहयोग और शांति की दिशा में कदम</span></strong></p>
<p>2024 का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक अस्थिरता के एक जटिल परिदृश्य में हो रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध, इज़राइल-हमास संघर्ष, और दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इस शिखर सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे हैं। ब्रिक्स सदस्य देश इन संकटों से निपटने के लिए एकजुट हो रहे हैं और बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता को समझ रहे हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में शांति और संवाद की महत्ता पर जोर दिया। उनका कहना था कि सभी समस्याओं का समाधान केवल शांतिपूर्ण वार्ता और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से ही हो सकता है। मोदी के इस दृष्टिकोण को ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया।</p>
<p><strong><span style="color: #993300;">जलवायु परिवर्तन और सतत विकास</span></strong></p>
<p>इस शिखर सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जलवायु परिवर्तन है। भारत, जो जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है, इस बार भी सतत विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि &#8220;हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।&#8221;</p>
<p>ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें प्रमुख रूप से स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, और हरित तकनीकी नवाचार शामिल हैं। मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि जलवायु संकट का सामना करने के लिए विकासशील देशों को तकनीकी और वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है, और ब्रिक्स इसे प्रदान करने में सक्षम है।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-3598 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395628-scaled.jpg" alt="" width="2375" height="2560" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395628-scaled.jpg 2375w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/1000395628-278x300.jpg 278w" sizes="(max-width: 2375px) 100vw, 2375px" /></p>
<p><strong>भारत-चीन संबंध: एक नया अध्याय?</strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300;">पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक</span></strong></p>
<p>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित वार्ता को लेकर विश्व भर में उत्सुकता है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव लंबे समय से जारी है, और यह बैठक दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। हाल ही में भारत और चीन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त को फिर से शुरू करने का फैसला किया है, जो दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का संकेत है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने पर जोर दे रहे हैं। उनका दृष्टिकोण यह है कि सीमा विवाद के बावजूद, भारत और चीन को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>भारत-चीन आर्थिक सहयोग</strong></span></p>
<p>भले ही भारत और चीन के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है, लेकिन आर्थिक सहयोग का दायरा बढ़ता जा रहा है। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक सशक्त करने के लिए इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय वार्ताएं होंगी। पीएम मोदी ने चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है, जिसमें विशेष रूप से व्यापार संतुलन को ठीक करने और निवेश के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p><strong>ब्रिक्स का विस्तार और पीएम मोदी का दृष्टिकोण</strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300;">नए सदस्यों का समावेश</span></strong></p>
<p>2023 में आयोजित जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने अपने विस्तार की घोषणा की, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। इससे ब्रिक्स का स्वरूप और भी व्यापक हो गया है और यह एक वैश्विक संगठन के रूप में उभर रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के विस्तार का स्वागत किया और कहा कि &#8220;नए सदस्य हमारे संगठन को और भी मज़बूत बनाएंगे और वैश्विक शासन में सुधार की दिशा में एक नया आयाम जोड़ेंगे।&#8221; मोदी का दृष्टिकोण यह है कि ब्रिक्स के नए सदस्य वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़ को और अधिक सशक्त बनाएंगे, और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करेंगे।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>बहुपक्षीय सहयोग की नई दिशा</strong></span></p>
<p>ब्रिक्स का यह विस्तार बहुपक्षीय सहयोग के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स को एक मंच के रूप में देखना चाहिए जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक शासन में सुधार की दिशा में काम करे। उन्होंने यह भी कहा कि &#8220;ब्रिक्स केवल एक आर्थिक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जो शांति, सुरक्षा, और सतत विकास के लिए काम करता है।&#8221;</p>
<p><strong>पीएम मोदी और ब्रिक्स का भविष्य</strong></p>
<p><strong><span style="color: #993300;">भारत की दीर्घकालिक रणनीति</span></strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिक्स में भूमिका केवल वर्तमान शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। भारत का लक्ष्य है कि वह ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक विकासशील देशों के साथ अपने संबंधों को और सशक्त करे और वैश्विक शासन में सुधार की दिशा में काम करे।</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>तकनीकी और डिजिटल समावेशन</strong></span></p>
<p>पीएम मोदी ने डिजिटल समावेशन और तकनीकी नवाचार को ब्रिक्स की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। भारत ने डिजिटल तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, और मोदी ने इसे ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच साझा करने का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के माध्यम से विकासशील देशों के बीच आर्थिक असमानता को कम किया जा सकता है।</p>
<p>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2024 वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका इसमें अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मोदी ने ब्रिक्स को वैश्विक शांति, स्थिरता, और सतत विकास का एक प्रमुख मंच बनाने की दिशा में जो कदम उठाए हैं, वे भारत की वैश्विक भूमिका को और अधिक मज़बूत करेंगे।</p>
<p>भारत की दीर्घकालिक कूटनीति और आर्थिक रणनीति ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक विकासशील देशों के साथ साझेदारी को बढ़ाने पर केंद्रित है, और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।</p>
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