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	<title>Ayukt devipatan mandal Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>बैंक कर्मचारियों की रिश्वतखोरी पर मंडलायुक्त का सख्त रुख — लोन स्वीकृति के नाम पर एक लाख दस हजार की मांग, डीएम को जांच के आदेश</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/commissioner-takes-a-tough-stand-on-bribery-by-bank-employees-demand-of-rs-1-lakh-10-thousand-in-the-name-of-loan-approval-orders-for-investigation-to-dm/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Apr 2025 11:45:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Ayukt devipatan mandal]]></category>
		<category><![CDATA[devipatan mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Divisional Commissioner takes a tough stand on bribery by bank employees - Demand of Rs. 1 lakh 10 thousand in the name of loan approval]]></category>
		<category><![CDATA[orders for investigation to DM]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देवीपाटन मंडल में जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रशासनिक हलचल तेज, दस दिन में जांच रिपोर्ट</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/commissioner-takes-a-tough-stand-on-bribery-by-bank-employees-demand-of-rs-1-lakh-10-thousand-in-the-name-of-loan-approval-orders-for-investigation-to-dm/">बैंक कर्मचारियों की रिश्वतखोरी पर मंडलायुक्त का सख्त रुख — लोन स्वीकृति के नाम पर एक लाख दस हजार की मांग, डीएम को जांच के आदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong><em>देवीपाटन मंडल में जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रशासनिक हलचल तेज, दस दिन में जांच रिपोर्ट मांगी</em></strong></p>
<p><strong>गोंडा, 8 अप्रैल। </strong>देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर उस समय हड़कंप मच गया जब क्लाउड किचन व्यवसाय शुरू करने की इच्छुक एक महिला उद्यमी द्वारा लोन स्वीकृत कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मंडलायुक्त को भेजी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की गोंडा शाखा के कर्मचारियों ने उनसे ₹1,10,000 की अवैध मांग की और जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया तो उनका ऋण आवेदन खारिज कर दिया गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने जिलाधिकारी गोंडा को त्वरित जांच के आदेश जारी किए हैं।</p>
<p>शिकायतकर्ता प्रीति पाठक, जो कि गोंडा के मालवीय नगर की निवासी हैं, ने यह शिकायत डाक के माध्यम से मंडलायुक्त कार्यालय को भेजी थी। उन्होंने लघु एवं सूक्ष्म उद्यम योजना (MSME स्कीम) के तहत क्लाउड किचन खोलने के लिए ऋण आवेदन किया था। शिकायत में प्रीति ने बताया कि जब वे लोन प्रक्रिया की जानकारी के लिए बैंक शाखा पहुंचीं, तो उन्हें बताया गया कि कागज पूरे हैं और योजना के तहत उन्हें लोन मिल सकता है, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी संकेत दिया गया कि बिना “प्रबंधकीय सहमति शुल्क” (एक लाख दस हजार रुपए) के लोन स्वीकृत नहीं किया जाएगा।</p>
<p>प्रीति पाठक का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार बैंक अधिकारियों से विनती की कि वे उनकी आर्थिक स्थिति को समझें और नियमों के अनुसार लोन स्वीकृत करें, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। अंततः उन्होंने साहस कर यह मामला मंडलायुक्त के संज्ञान में लाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि इस प्रकार भ्रष्टाचार का बोलबाला रहेगा तो सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी और जरूरतमंद उद्यमियों तक कभी नहीं पहुंच पाएंगी।</p>
<p>इस घटना ने न केवल बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने की प्रक्रिया किस हद तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने इसे अत्यंत संवेदनशील मामला मानते हुए जिलाधिकारी गोंडा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता के साथ निष्पक्ष वार्ता करते हुए मामले की गंभीरता से जांच की जाए और 10 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।</p>
<p>प्रशासन की ओर से जारी बयान में मंडलायुक्त ने कहा कि सरकार की योजनाएं जनता की भलाई के लिए हैं, न कि किसी भ्रष्ट कर्मचारी या अधिकारी की कमाई का जरिया। यदि कोई व्यक्ति लाभार्थियों से रिश्वत या सुविधा शुल्क की मांग करता है, तो यह न केवल अनैतिक है बल्कि आपराधिक भी। उन्होंने कहा कि इस तरह की शिकायतें शासन की मंशा को बाधित करती हैं, और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि बैंक कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हैं तो यह आमजन की आकांक्षाओं पर कुठाराघात है। लघु उद्यमिता जैसी योजनाओं का मूल उद्देश्य ही यही है कि बिना किसी सिफारिश, दबाव या घूस के जरूरतमंदों को स्वरोजगार का अवसर मिले। लेकिन यदि लोन स्वीकृति के नाम पर रिश्वत ली जाएगी तो इससे योजना की आत्मा ही समाप्त हो जाएगी।</p>
<p>इस मामले की खास बात यह भी है कि शिकायतकर्ता महिला हैं, जो समाज में आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनना चाहती हैं। ऐसी महिलाओं के साथ यदि इस प्रकार का व्यवहार होता है, तो यह “नारी सशक्तिकरण” के प्रयासों पर भी चोट करता है। यह जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो, समयबद्ध हो और इसका नतीजा सार्वजनिक किया जाए, ताकि गोंडा जैसे छोटे शहरों की प्रतिभाशाली महिलाओं को यह संदेश जाए कि सिस्टम उनके साथ है और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं।</p>
<p>कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो यह मामला भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के अंतर्गत आता है — जैसे कि <strong>धारा 7 (लोक सेवकों द्वारा रिश्वत लेना), धारा 13 (भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत आपराधिक दुराचार)</strong>, आदि। यदि जांच में बैंक अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होती है, तो उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई अनिवार्य है। साथ ही बैंकिंग नियामक संस्थाओं — जैसे RBI और बैंक की सतर्कता शाखा — को भी इस मामले की जानकारी भेजी जानी चाहिए।</p>
<p>इस प्रकार की घटनाएं उन हजारों युवाओं और उद्यमियों का मनोबल तोड़ती हैं, जो बिना किसी राजनीतिक या आर्थिक रसूख के अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वे इस तरह की शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लें और पीड़ित को न्याय दें। यह देखना दिलचस्प होगा कि 10 दिनों के भीतर जिलाधिकारी किस प्रकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं, और क्या दोषियों को वास्तविक दंड मिल पाता है या नहीं। यदि जांच ठोस और निष्पक्ष हुई तो यह घटना एक नजीर बन सकती है — न केवल गोंडा में, बल्कि पूरे प्रदेश में।</p>
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		<title>मुकदमा दर्ज न होने पर आयुक्त ने डीआईजी को दिए गए कार्रवाई के निर्देश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jan 2025 12:51:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Ayukt devipatan mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Shashi bhushan lal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 13 जनवरी। गोण्डा जिले के सालपुर पाठक गांव के निवासी शिव कुमार मौर्य द्वारा उनके बेटे के</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 13 जनवरी। गोण्डा जिले के सालपुर पाठक गांव के निवासी शिव कुमार मौर्य द्वारा उनके बेटे के साथ हुए सड़क हादसे और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील से की गई शिकायत पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) देवीपाटन को मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।</p>
<p>शिकायत के अनुसार, 6 जनवरी 2025 को शिवकुमार मौर्य का पुत्र अमरेश मौर्य, जो कि हाईस्कूल का छात्र है, अपनी चाची का इलाज कराने के बाद मोटरसाइकिल से गोण्डा से सालपुर पाठक गांव लौट रहा था। इसी दौरान कटहाघाट-डेहरास मार्ग पर मुरावन पुरवा के पास एक तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी (नंबर यूपी 43 बीटी-0477) ने गलत साइड से आकर उसकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।</p>
<p>हादसा इतना भयानक था कि अमरेश मौर्य का दायां पैर दो हिस्सों में टूट गया। स्थानीय लोगों की मदद से अमरेश को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल इलाज शुरू किया। इस हादसे के बाद परिवार को न केवल मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा, बल्कि इलाज के भारी खर्च ने भी उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ दिया।</p>
<p>हादसे के बाद शिवकुमार मौर्य ने नगर कोतवाली में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से मांग की कि पिकअप गाड़ी के चालक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। हालांकि, पुलिस ने इस पर केवल पिकअप गाड़ी को थाने में लाकर खड़ा कर दिया, लेकिन न तो कोई प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की गई।</p>
<p>पुलिस की इस निष्क्रियता से आहत शिवकुमार ने मामले की शिकायत आयुक्त देवीपाटन मंडल शशि भूषण लाल सुशील से की। उन्होंने बताया कि उनके बेटे की हालत गंभीर है और पुलिस की लापरवाही ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>पीड़ित परिवार की शिकायत पर आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने तत्काल संज्ञान लिया और डीआईजी देवीपाटन मंडल को आदेश दिया कि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयुक्त ने कहा कि कानून का पालन करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में पुलिस की लापरवाही साबित होती है, तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>कटहाघाट-डेहरास मार्ग पर हुई इस दुर्घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि यह सड़क हादसा प्रशासन की लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी का नतीजा है।</p>
<p>मुरावन पुरवा के निवासी रमेश यादव ने बताया, “इस सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं। प्रशासन को पहले से ही यहां पर स्पीड ब्रेकर लगाने और ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।”</p>
<p>एक अन्य स्थानीय निवासी राजेश सिंह ने कहा, “हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की उम्मीद में पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। यह बेहद दुखद है कि प्रशासनिक अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।</p>
<p>अमरेश मौर्य के परिवार ने बताया कि वे इस हादसे के बाद से लगातार आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। अमरेश की मां ने कहा, “हमने अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर बड़े सपने देखे थे, लेकिन इस हादसे ने सबकुछ बदल दिया है। डॉक्टरों ने कहा है कि उसके पूरी तरह ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं। इलाज के लिए हमें अपनी जमा-पूंजी भी खर्च करनी पड़ रही है।”</p>
<p>शिवकुमार मौर्य ने कहा, “हम केवल यह चाहते हैं कि दोषी चालक को सजा मिले और प्रशासन हमें न्याय दिलाए। पुलिस की निष्क्रियता से हम बहुत आहत हैं। आयुक्त के हस्तक्षेप से हमें उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा।”</p>
<p>आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद डीआईजी देवीपाटन मंडल ने मामले की जांच शुरू कर दी है। डीआईजी ने कहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दोषी चालक और पुलिस की ओर से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>गोण्डा जिले में सड़क हादसों की बढ़ती घटनाओं ने एक बार फिर यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, खराब सड़कें और यातायात नियमों का पालन न करना सड़क हादसों के मुख्य कारण हैं।</p>
<p>कटहाघाट-डेहरास मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और यातायात संकेतकों की कमी के कारण यह क्षेत्र हादसों का गढ़ बनता जा रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से इन मुद्दों को उठाते आ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>अमरेश मौर्य के परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पिकअप गाड़ी के चालक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस की ओर से हुई लापरवाही की जांच की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कटहाघाट-डेहरास मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और यातायात संकेतक लगाए जाएं। सड़क हादसों को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं।</p>
<p>इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। जब पीड़ित परिवार को अपनी शिकायत पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्हें न्याय की उम्मीद में आयुक्त का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p>अमरेश मौर्य के साथ हुई इस दुर्घटना ने न केवल उनके परिवार को गहरे दर्द में डाला है, बल्कि प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया है। आयुक्त के हस्तक्षेप और डीआईजी को दिए गए निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि पीड़ित परिवार को न्याय कब तक और किस तरह मिलता है।</p>
<p>यह घटना यह भी दर्शाती है कि सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार और प्रशासन को अधिक सक्रिय होने की जरूरत है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं लगातार होती रहेंगी और पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकते रहेंगे।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/the-commissioner-gave-instructions-to-the-dig-to-take-action-when-the-case-was-not-registered/">मुकदमा दर्ज न होने पर आयुक्त ने डीआईजी को दिए गए कार्रवाई के निर्देश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>बाढ़ खंड द्वारा कागजों में कराये कार्यों में अनियमितता की शिकायत, मंडलायुक्त ने गठित की जांच कमेटी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/complaint-of-irregularities-in-the-work-done-on-paper-by-the-flood-section-divisional-commissioner-constituted-an-investigation-committee/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 11:45:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[Ayukt devipatan mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Complaint of irregularities in the work done on paper by the flood section]]></category>
		<category><![CDATA[Divisional Commissioner constituted an investigation committee]]></category>
		<category><![CDATA[Shashi bhushan lal]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; गोण्डा, 27 दिसंबर। देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील ने गोण्डा जिले में बाढ़ कार्य</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/complaint-of-irregularities-in-the-work-done-on-paper-by-the-flood-section-divisional-commissioner-constituted-an-investigation-committee/">बाढ़ खंड द्वारा कागजों में कराये कार्यों में अनियमितता की शिकायत, मंडलायुक्त ने गठित की जांच कमेटी</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>गोण्डा, 27 दिसंबर। देवीपाटन मंडल के कमिश्नर शशि भूषण लाल सुशील ने गोण्डा जिले में बाढ़ कार्य खंड के तहत हुए निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के आधार पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।</p>
<p>जांच की जद में आने वाले कार्यों में एल्गिन ब्रिज चरसढ़ी तटबंध और सकरौर भिखारीपुर रिंग बांध के निर्माण और उन्नयन शामिल हैं। ऐली परसौली निवासी शिकायतकर्ता ओम प्रकाश सिंह ने 6 दिसंबर 2024 को इन परियोजनाओं में ठेकेदारों और अभियंताओं द्वारा सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से अब तक इन परियोजनाओं में फर्जी अनुबंध बनाकर और फर्जी भूमि अधिग्रहण के जरिए भारी वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। कमिश्नर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिसमें लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभियंत्रण अभियंता, और प्राविधिक संपरीक्षा विभाग के प्राविधिक परीक्षक को शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>गंभीर आरोप और फर्जीवाड़े का विवरण</strong></p>
<p>शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एल्गिन ब्रिज और सकरौर रिंग बांध परियोजनाओं में एक ही कार्य को अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दर्शाकर फर्जी भुगतान किए गए। तटबंधों के निर्माण और उन्नयन के लिए बनाई गई परियोजनाओं में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी अनुबंध और भुगतान की साजिश रची गई।</p>
<p>शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में भी अनियमितता बरती गई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और कागजों के आधार पर सरकारी धन की बंदरबांट की गई। यह अनियमितताएं न केवल भ्रष्टाचार का संकेत देती हैं, बल्कि सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की ओर भी इशारा करती हैं।</p>
<p><strong>कमिश्नर की सख्त कार्रवाई और जांच के निर्देश</strong></p>
<p>मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने इन आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए कमेटी को निर्देश दिया है कि वे गहराई से जांच करें और हर पहलू का विश्लेषण कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा, “सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”</p>
<p>कमेटी को सभी संबंधित दस्तावेज, रिकॉर्ड, और निर्माण कार्यों की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए पूर्ण अधिकार दिए गए हैं। इसके अलावा, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और स्थानीय ग्रामीणों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जाएंगे।</p>
<p><strong>बाढ़ कार्यों में भ्रष्टाचार से सरकारी योजनाओं पर सवाल</strong></p>
<p>गोण्डा जिले में एल्गिन ब्रिज चरसढ़ी तटबंध और सकरौर रिंग बांध जैसी परियोजनाएं बाढ़ नियंत्रण और ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>शिकायतकर्ता का कहना है कि इन परियोजनाओं में ठेकेदारों और अभियंताओं ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अनुबंध किए और भुगतान उठाए। यह आरोप सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं। अगर यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट होगा कि किस तरह कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जनहित की योजनाओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।</p>
<p><strong>जांच प्रक्रिया और कमेटी की भूमिका</strong></p>
<p>कमेटी में शामिल लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, और प्राविधिक संपरीक्षा विभाग के विशेषज्ञ जांच के हर पहलू की बारीकी से समीक्षा करेंगे। भूमि अधिग्रहण से लेकर अनुबंधों की प्रक्रिया और भुगतान के रिकॉर्ड तक, हर पहलू की जांच की जाएगी।</p>
<p>कमेटी के सदस्यों को निर्देश दिया गया है कि वे न केवल वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण करें, बल्कि कार्यस्थलों पर जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और स्थिति का भी आकलन करें। इस प्रक्रिया में ठेकेदारों और संबंधित अभियंताओं के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का संदेश</strong></p>
<p>कमिश्नर द्वारा जांच कमेटी के गठन और सख्त निर्देशों को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर दोषी पाए जाते हैं, तो न केवल उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया का भी सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>सरकारी धन के दुरुपयोग की ऐसी घटनाएं न केवल प्रशासन की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। इस जांच के जरिए न केवल दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद है, बल्कि अन्य विभागों को भी ईमानदारी और पारदर्शिता का संदेश जाएगा।</p>
<p><strong>जांच की समयसीमा और अपेक्षाएं</strong></p>
<p>कमिश्नर ने जांच को 15 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। यह अपेक्षा की जा रही है कि जांच रिपोर्ट में सभी तथ्यों का खुलासा होगा और दोषियों को चिन्हित किया जाएगा। जनता को उम्मीद है कि यह कदम सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने में सहायक होगा।</p>
<p>इस मामले की जांच से प्राप्त निष्कर्ष न केवल गोण्डा जिले के प्रशासनिक तंत्र पर प्रभाव डालेंगे, बल्कि अन्य जिलों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक मिसाल पेश करेंगे।</p>
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