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	<title>Amit Shah Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>विधानसभा के पहले सत्र में ही मारपीट, 6 विधायक घायल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Nov 2024 00:19:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[जम्मू एंड कश्मीर]]></category>
		<category><![CDATA[Amit Shah]]></category>
		<category><![CDATA[Jammu kashmir]]></category>
		<category><![CDATA[Jammu kashmir assembly]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा और हाथापाई: विशेष दर्जा बहाली के मुद्दे पर गरमाया सदन, छह विधायक घायल जम्मू-कश्मीर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/violence-in-the-first-session-of-the-assembly-6-mlas-injured/">विधानसभा के पहले सत्र में ही मारपीट, 6 विधायक घायल</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा और हाथापाई: विशेष दर्जा बहाली के मुद्दे पर गरमाया सदन, छह विधायक घायल</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को हुए हंगामे और हाथापाई की घटना ने पूरे राज्य और देश का ध्यान आकर्षित किया है। विधानसभा के सत्र में जब विशेष राज्य के दर्जा बहाली के मुद्दे पर चर्चा चल रही थी, तब अचानक से माहौल गरम हो गया और स्थिति हाथापाई तक पहुँच गई। इस झड़प में छह विधायक घायल हुए, जिनमें से कुछ को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। इस घटना के बाद विधानसभा की गरिमा पर सवाल खड़े हुए हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं।</p>
<p><strong>जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जा बहाली का मुद्दा</strong></p>
<p>जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हमेशा से एक विवादित विषय रहा है। अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को विशेष स्वायत्तता दी गई थी, जिसे 2019 में केंद्र सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद से ही राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है, और इस मुद्दे ने नए सिरे से राजनीतिक ध्रुवीकरण को जन्म दिया है। विपक्षी दलों का मानना है कि अनुच्छेद 370 को हटाकर राज्य की स्वायत्तता और विशेष पहचान को समाप्त कर दिया गया है, जिससे राज्य के लोगों के अधिकारों और उनके संवैधानिक विशेषाधिकारों का हनन हुआ है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-3993 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/comp-12-37_1730955609.gif" alt="" width="500" height="375" /></p>
<p><strong>विधानसभा सत्र का उद्देश्य और विपक्ष का विरोध</strong></p>
<p>विधानसभा का यह सत्र विशेष राज्य के दर्जा बहाली के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। विपक्षी दलों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे इस मुद्दे पर सरकार से कड़ा सवाल करेंगे और अनुच्छेद 370 की पुनः बहाली की मांग करेंगे। सत्र की शुरुआत में ही विपक्षी विधायकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को उठाया और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर की पहचान को नुकसान पहुँचाया है और राज्य को दो हिस्सों में बाँटकर उसकी स्वायत्तता को समाप्त कर दिया है।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-3994 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-42.jpeg" alt="" width="766" height="400" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-42.jpeg 766w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-42-300x157.jpeg 300w" sizes="(max-width: 766px) 100vw, 766px" /></p>
<p><strong>सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तीखी होती गई। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 का हटाया जाना राज्य के विकास और आतंकवाद से मुक्ति के लिए आवश्यक कदम था। सत्ता पक्ष के अनुसार, इससे राज्य में शांति और विकास की नई लहर आई है और आतंकवाद पर लगाम लगाने में भी मदद मिली है। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना था कि यह कदम राज्य की जनता की भावनाओं के खिलाफ था और इससे राज्य की पहचान और संस्कृति को गहरा धक्का लगा है।</p>
<p><strong>हंगामा और हाथापाई में तब्दील हुआ विवाद</strong></p>
<p>विधानसभा में बहस के दौरान अचानक से माहौल और गरम हो गया। विपक्षी नेताओं के तीखे बयानों और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाओं ने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया। दोनों पक्षों के विधायक अपने-अपने विचारों को बलपूर्वक प्रस्तुत कर रहे थे, और अचानक यह बहस शारीरिक झड़प में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ विधायकों ने गुस्से में आकर एक-दूसरे को धक्का दिया, जिससे स्थिति हाथापाई तक पहुँच गई। इस दौरान विधानसभा में अफरा-तफरी मच गई, और सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।</p>
<p>इस हाथापाई में छह विधायक घायल हो गए। इनमें से कुछ की हालत गंभीर थी, जिन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। विधानसभा की यह घटना राज्य में चर्चा का मुख्य विषय बन गई और सोशल मीडिया पर भी इसकी जमकर चर्चा होने लगी। लोग इस घटना की निंदा करते हुए राजनीतिक दलों के जिम्मेदारियों पर सवाल उठा रहे हैं।</p>
<p><strong>विपक्षी नेताओं के आरोप और सरकार का बचाव</strong></p>
<p>इस घटना के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने सत्तारूढ़ दल पर लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि सरकार ने जानबूझकर बहस को इस तरह से बढ़ावा दिया ताकि विशेष दर्जा बहाली के मुद्दे को दरकिनार किया जा सके। विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह घटना सरकार की मंशा को दर्शाती है कि वह राज्य की जनता की आवाज को दबाना चाहती है और अनुच्छेद 370 पर कोई ठोस चर्चा नहीं करना चाहती।</p>
<p>सत्ता पक्ष ने इस आरोप का खंडन किया और कहा कि विपक्ष ने असंसदीय व्यवहार किया है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने कहा कि विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुँचाने का काम विपक्ष ने किया है और उन्होंने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया। सत्ता पक्ष का कहना था कि अनुच्छेद 370 का हटाया जाना राज्य की भलाई के लिए है और इसके परिणामस्वरूप राज्य में शांति और विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>घटना का व्यापक प्रभाव</strong></p>
<p>यह घटना जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़े विवाद को जन्म दे सकती है। राज्य के विशेष दर्जा बहाली का मुद्दा अभी भी राज्य की जनता के लिए एक भावनात्मक विषय है और इस घटना ने उस पर एक नई बहस को जन्म दिया है। इस घटना के बाद से राज्य में राजनीतिक माहौल और भी गरम हो गया है, और विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ दल के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है।</p>
<p>यह घटना राज्य की जनता के लिए भी चिंताजनक है। कई लोग इस घटना को राजनीति में गिरते मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति अनादर के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की निंदा की है और विधायकों से जिम्मेदारी भरे व्यवहार की उम्मीद की है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></p>
<p>राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न सिर्फ जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि किस तरह से लोकतांत्रिक संस्थाओं में गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक दलों को इस तरह की घटनाओं से सबक लेना चाहिए और अपनी बहसों को मर्यादित तरीके से करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से जनता का विश्वास राजनीति और नेताओं से उठ सकता है और यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कई संभावनाएँ बन रही हैं। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रचार करेंगे। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि वे विकास और सुरक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ाते रहेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि विशेष राज्य के दर्जा बहाली का मुद्दा राज्य की राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ता है।</p>
<p>विधानसभा में हुई यह घटना एक गंभीर घटना है और यह स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है। इस घटना ने न केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह से मुद्दों का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से किया जाना चाहिए।</p>
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		<title>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना प्रसंस्करण में क्रांति ला रहा है- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Oct 2024 18:13:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Amit Shah]]></category>
		<category><![CDATA[Bhartiya Janta party]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सिविल सेवकों को उभरते शासन मानकों को पूरा</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सिविल सेवकों को उभरते शासन मानकों को पूरा करने और तकनीकी प्रगति के साथ अपडेट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों को नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीकों का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह संदेश नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में &#8220;कर्मयोगी सप्ताह&#8221; के अवसर पर दिया, जो राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह के रूप में मनाया गया।</p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 2020 में शुरू किए गए &#8220;मिशन कर्मयोगी&#8221; की प्रगति पर भी चर्चा की। यह मिशन सिविल सेवाओं की क्षमता को बढ़ाने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का उद्देश्य रखता है। इसके साथ ही, उन्होंने सिविल सेवकों से स्टार्टअप्स, शोध संगठनों और युवा दिमागों से इनपुट मांगकर नवाचार को अपनाने का आग्रह किया।</p>
<p>यह लेख प्रधानमंत्री के इस महत्वपूर्ण संदेश का विस्तार से विश्लेषण करेगा, जिसमें सिविल सेवाओं में तकनीकी प्रगति, एआई का प्रभाव, नवाचार की आवश्यकता और भारत के विकास में सिविल सेवकों की भूमिका पर गहराई से चर्चा की जाएगी।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-3511 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/7388309-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1764" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/7388309-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/7388309-300x207.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>तकनीकी प्रगति और सिविल सेवाओं में सुधार</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सेवकों से कहा कि उन्हें तकनीकी विकास से अद्यतित रहना होगा ताकि वे शासन के उभरते मानकों को पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ने न केवल सूचना प्रसंस्करण में क्रांति लाई है, बल्कि नागरिकों को सशक्त बनाने और सरकारों को अधिक जवाबदेह बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना प्रसंस्करण में क्रांति ला रहा है, नागरिकों को सशक्त बना रहा है और सरकारों को जवाबदेह बना रहा है।&#8221; यह कथन दर्शाता है कि सरकार डिजिटल युग के महत्व को समझ रही है और इसे प्रशासनिक सुधारों में शामिल कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उन्नत तकनीकी उपकरण सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी, तेज और कुशल बनाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे इन तकनीकी प्रगति के साथ स्वयं को अद्यतन रखें और इस प्रकार की प्रगति को अपने कार्यों में शामिल करें। उनका मानना है कि इस तकनीकी उन्नति के साथ सिविल सेवक बेहतर ढंग से नागरिकों की आवश्यकताओं का समाधान कर पाएंगे और शासन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बना सकेंगे।</p>
<p><strong>मिशन कर्मयोगी: सिविल सेवा का सशक्तिकरण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने 2020 में शुरू किए गए &#8220;मिशन कर्मयोगी&#8221; का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सिविल सेवकों को सशक्त बनाना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना है। मिशन कर्मयोगी एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें सिविल सेवकों को उनकी क्षमताओं को निखारने और तकनीकी, सामाजिक और व्यावसायिक कौशलों को सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।</p>
<p>इस मिशन के अंतर्गत सिविल सेवकों को एक विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म iGoT (Integrated Government Online Training) पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस मंच के माध्यम से सिविल सेवकों को अपने कौशल को लगातार नवीनीकृत करने और उन्हें तकनीकी दृष्टिकोण से उन्नत बनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक 40 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी इस प्लेटफॉर्म के 1,400 से अधिक पाठ्यक्रमों में नामांकित हो चुके हैं, और 1.5 करोड़ से अधिक पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस पहल की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और इसे भारत सरकार की डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, &#8220;मिशन कर्मयोगी के माध्यम से हमारा लक्ष्य ऐसे मानव संसाधनों को विकसित करना है जो भारत के विकास को गति देंगे।&#8221;</p>
<p><strong>नवाचार और स्टार्टअप्स से सीखने की आवश्यकता</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सिविल सेवकों से यह भी आग्रह किया कि वे नवाचार को अपनाने के लिए स्टार्टअप्स, शोध संगठनों और युवा दिमागों से इनपुट मांगें। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के विचार और नवाचारों को सिविल सेवाओं में शामिल करना अत्यधिक आवश्यक है, ताकि शासन में नई सोच और दृष्टिकोण को अपनाया जा सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सिविल सेवकों से आग्रह किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, और अन्य उन्नत तकनीकों का उपयोग करें ताकि उनके कामकाज में अधिक दक्षता आ सके। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स और नवाचारियों से जुड़े रहना सिविल सेवाओं को अधिक सक्षम और आधुनिक बना सकता है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा, &#8220;सिविल सेवकों को नवाचार को अपनाने की जरूरत है। उन्हें स्टार्टअप्स, शोध संगठनों और युवा दिमागों से इनपुट मांगकर नए तरीकों को अपनाना चाहिए।&#8221;</p>
<p><strong>नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने सिविल सेवाओं में नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी नीतियों और योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि सिविल सेवकों को शासन के एक ऐसे मॉडल को अपनाना चाहिए, जिसमें नागरिकों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण नागरिकों की समस्याओं के प्रति सिविल सेवाओं की संवेदनशीलता को बढ़ाने और उनकी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने पर बल देता है। उनका मानना है कि एक नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली न केवल भारतीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करेगी, बल्कि देश की प्रगति को भी गति देगी।</p>
<p><strong>एआई और आकांक्षी भारत का भविष्य</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और &#8220;आकांक्षी भारत&#8221; के दोहरे पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग केवल तकनीकी सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव सामाजिक और आर्थिक सुधारों पर भी पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एआई का सही और संतुलित उपयोग न केवल सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक तेज और सटीक बनाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि भारत अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;भारत के लिए एआई एक चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। हमें इन दोनों को संतुलित करना होगा ताकि हम एआई की पूरी क्षमता का उपयोग कर सकें और इसे राष्ट्रीय प्रगति में शामिल कर सकें।&#8221; उनका यह बयान दर्शाता है कि एआई को केवल एक तकनीकी उपकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में समझा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>2047 तक विकसित भारत का दृष्टिकोण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में 2047 तक &#8220;विकसित भारत&#8221; के अपने दृष्टिकोण को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए सिविल सेवाओं में नवाचार, तकनीकी प्रगति और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं और नीतियां इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बनाई जा रही हैं, और सिविल सेवकों की भूमिका इसमें अत्यधिक महत्वपूर्ण है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;2047 तक विकसित भारत का हमारा सपना तभी साकार हो सकता है, जब सिविल सेवक अपनी जिम्मेदारियों को समझें और नई तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाएं।&#8221;</p>
<p><strong>विभागों के भीतर सहयोग और फीडबैक तंत्र</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सिविल सेवा संस्थानों में फीडबैक तंत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों को अपने विभागों के भीतर और विभिन्न सरकारी संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के कामकाज को और अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के लिए यह जरूरी है कि विभागों के बीच फीडबैक तंत्र को मजबूत किया जाए।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;फीडबैक तंत्र को मजबूत करना और विभागों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि सरकार की नीतियां और योजनाएं अधिक प्रभावी तरीके से लागू की जा सकें।&#8221;</p>
<p><strong>मिशन कर्मयोगी: एक व्यापक पहल</strong></p>
<p>मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा सुधारों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख पहल है। यह मिशन सिविल सेवाओं को तकनीकी दृष्टि से सशक्त बनाता है, उन्हें भारतीय मूल्यों के साथ जोड़ता है, और उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण के साथ तैयार करता है।</p>
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		<title>नहीं कटेगा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट,  अगर आया संकट तो पत्नी या बेटे को मिलेगा टिकट, आज जारी हो सकती है दूसरी लिस्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Mar 2024 04:05:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 11 मार्च। लोकसभा चुनाव को लेकर अब काउंटडाउन शुरू हो चुका है। चारों तरफ सरगर्मियां तेज</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bjp_second_list_loksabha/">नहीं कटेगा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट,  अगर आया संकट तो पत्नी या बेटे को मिलेगा टिकट, आज जारी हो सकती है दूसरी लिस्ट</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 11 मार्च। लोकसभा चुनाव को लेकर अब काउंटडाउन शुरू हो चुका है। चारों तरफ सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनैतिक पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है अभी बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है और अब चर्चा है कि दूसरी लिस्ट भी कन्फर्म हो चुकी है और आज देर शाम तक भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में एक जरूरी बैठक होने वाली है जिसमें उत्तर प्रदेश की बची हुई 23 सीटों सहित तमाम ऐसे लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लग सकती है जहां पर अभी तक घोषणा नहीं की गई है।<br />
ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि आज की इस मीटिंग में उन सभी उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए जाएंगे जहां पर अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं। ऐसा भी माना जा रहा है कि इस बार कई ऐसे बड़े चेहरों की दावेदारी पर तलवार लटक रही है जो अभी तक कहीं ना कहीं पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे या उन्होंने अब तक पार्टी लाइन से अलग हटकर बयानबाजी की है। सूत्रों की मानें तो 13 मार्च के अंदर ही चुनाव आयोग चुनाव की तिथि की घोषणा कर सकता है जिससे आदर्श चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में सभी राजनैतिक दल युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं।</p>
<p><strong>आज देर शाम बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होगी।</strong></p>
<p>आज भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में एक अहम बैठक आयोजित होने वाली है। इस मीटिंग में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट पर अंतिम मंथन किया जा सकता है। ऐसा बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आज देर शाम 7 बजे भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक होनी तय है। यूपी की 23 सीटों सहित तमाम बची हुई सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए जाएंगे सूत्रों की अगर माने तो इस खास मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहेंगे।</p>
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<p><strong>बृजभूषण शरण सिंह का नहीं कटेगा टिकट अगर आया संकट तो पत्नी या बेटे को मिलेगा टिकट</strong></p>
<p>पार्टी में मौजूद सूत्रों की माने तो अब पार्टी 23 सीटों पर मंथन कर रही है। इस बीच कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृज भूषण शरण सिंह के नाम पर हर जगह चर्चा हो रही है वहीं देवरिया बलिया गाजीपुर मेरठ गाजियाबाद रायबरेली की लोकसभा सीट पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी प्रक्रिया जारी है। बीजेपी आज नई दिल्ली में बैठक करने वाली है। बैठक के बाद बीजेपी दूसरी लिस्ट जारी कर सकती है। पार्टी के अंदर मौजूद सूत्रों की मानें तो पहले तो बृज भूषण शरण सिंह का टिकट किसी भी कीमत पर नहीं कटेगा और अगर उनके टिकट पर संकट आता है तो उनकी पत्नी केतकी सिंह या उनके बेटे प्रतीक भूषण सिंह को टिकट मिल सकता है। पार्टी में चर्चा इस बात की भी है कि भारतीय जनता पार्टी अपने कई सीटों पर विजयी प्रत्याशी भी बदल सकती है। इसमें रायबरेली पीलीभीत और सुल्तानपुर जैसी शामिल हैं। सुल्तानपुर और पीलीभीत में बीजेपी की तरफ से प्रत्याशियों का चयन इस बात पर निर्भर करेगा कि जो वर्तमान सांसद हैं मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी को लेकर पार्टी क्या फैसला करती है वहीं देवरिया से रमापति राम त्रिपाठी का टिकट कट सकता है</p>
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