एक करोड़ की ठगी, शराब लाइसेंस जलने के नाम पर की ठगी
लखनऊ, 23 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व विशेष सचिव, हरि प्रसाद सिंह, सेवानिवृत्त होने के बाद एक बड़े धोखाधड़ी का शिकार हो गए। उनके साथ राकेश शर्मा नामक व्यक्ति ने करीब एक करोड़ रुपये की ठगी की। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस पूरी घटना ने लखनऊ के प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में सनसनी फैला दी है।
हरि प्रसाद सिंह, जो वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश शासन से सेवानिवृत्त हुए थे, लखनऊ के गोमती नगर में निवास करते हैं। उनका दावा है कि 2 मई 2024 को गोमती नगर के पत्रकारपुरम क्षेत्र में उनकी राकेश शर्मा नामक व्यक्ति से मुलाकात हुई। राकेश शर्मा ने खुद को पूर्व पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि वह उन्हें पहले से जानता है। उसने हरि प्रसाद सिंह से परिचय करते हुए कहा कि वह लखनऊ में शराब के बड़े कारोबारी हैं और उसकी 84 शराब की दुकाने हैं। उसने दावा किया कि उसका आबकारी विभाग में अच्छा-खासा प्रभाव है और वह हरि प्रसाद सिंह के लिए भी शराब की दुकानों का लाइसेंस दिलवा सकता है।
राकेश शर्मा ने हरि प्रसाद सिंह का विश्वास जीतने के लिए कहा कि उसने कई बड़े अधिकारियों, आईएएस और आईपीएस अफसरों के रिश्तेदारों को भी दुकानें दिलवाई हैं। उसने पुलिस और कोर्ट में अपनी पकड़ का भी दावा किया और यह भी कहा कि वह अपने संपर्कों के माध्यम से किसी के भी खिलाफ फर्जी मुकदमों की बाढ़ ला सकता है।
हरि प्रसाद सिंह को यह लगा कि राकेश शर्मा सही कह रहा है और उन्होंने उसके साथ काम करने का मन बना लिया। इसके बाद राकेश शर्मा ने उन्हें शाहनजफ रोड और वृंदावन योजना में तीन शराब की दुकानों के लाइसेंस दिलाने का वादा किया।
राकेश शर्मा की बातों में आकर हरि प्रसाद सिंह ने उसे चेक और नकद रूप में बड़ी राशि दी। दिनांक 5 मई 2024 से 30 सितंबर 2024 के बीच हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा को 22,62,000 रुपये चेक के माध्यम से और 75,50,000 रुपये नकद दिए। कुल मिलाकर, उन्होंने लगभग एक करोड़ रुपये राकेश शर्मा को दिए, यह विश्वास करते हुए कि उन्हें जल्द ही शराब की दुकानों के लाइसेंस मिल जाएंगे।
राकेश शर्मा ने हरि प्रसाद सिंह को विश्वास दिलाने के लिए उन्हें कुछ कागजात भी दिखाए, जिनमें से तीन लाइसेंस की फोटोकॉपी शामिल थी। हालांकि, जब हरि प्रसाद सिंह ने इन दस्तावेजों की सच्चाई का पता लगाया, तो यह सामने आया कि ये फर्जी थे और उन पर दी गई जानकारी पूरी तरह गलत थी।
जब हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा से अपने पैसे वापस मांगने का प्रयास किया, तो उसने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। राकेश शर्मा ने उन्हें और उनके परिवार को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी। यही नहीं, उसने पुलिस और कोर्ट में अपनी मजबूत पकड़ का हवाला देते हुए कहा कि वह उन्हें जेल भिजवा सकता है।
हरि प्रसाद सिंह के अनुसार, राकेश शर्मा ने न केवल उनकी दी हुई चेक का दुरुपयोग किया, बल्कि उनके स्टाम्प पेपर पर भी हस्ताक्षर करवाए थे, जिनका वह गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहा था। राकेश शर्मा ने पहले से कई अधिकारियों और अधिवक्ताओं को भी इसी तरह से ठगा था, और इस मामले में भी उसने उसी रणनीति का इस्तेमाल किया।
29 सितंबर 2024 को हरि प्रसाद सिंह ने इस धोखाधड़ी के बारे में थाना वजीरगंज, लखनऊ में जाकर राकेश शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उन्होंने IGRS (Integrated Grievance Redressal System) के माध्यम से भी शिकायत की।
10 अक्टूबर 2024 को उन्होंने पुनः शिकायत दर्ज करवाई, और इसके बाद विवेचक ने उन्हें यूपी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आवेदन देने की सलाह दी। हरि प्रसाद सिंह ने इस मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि राकेश शर्मा और उसकी पत्नी शकुंतला शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और धमकी देने के आरोप में कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
हरि प्रसाद सिंह की शिकायत से यह भी स्पष्ट हुआ कि राकेश शर्मा पहले से ही कई अधिकारियों और अधिवक्ताओं के साथ इस तरह की ठगी कर चुका है। उसने लोगों को पहले काम दिलाने का वादा किया और बाद में उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया।
राकेश शर्मा का दावा था कि उसके पुलिस और आबकारी विभाग में गहरे संबंध हैं और वह कानून के गलत इस्तेमाल से लोगों को धमकाता था। उसका यह भी कहना था कि उसने कई वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदारों को शराब की दुकानें दिलवाई हैं, जिससे उसकी पकड़ और मजबूत हो गई थी।
इस घटना ने लखनऊ के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। हरि प्रसाद सिंह जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस प्रकार की ठगी का मामला यह दर्शाता है कि राकेश शर्मा जैसे लोग किस तरह से प्रशासनिक और कानूनी प्रणाली का दुरुपयोग कर रहे हैं।
हरि प्रसाद सिंह की शिकायत के आधार पर, यह उम्मीद की जा रही है कि पुलिस जल्द ही इस मामले की गहन जांच करेगी और राकेश शर्मा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करेगी।
वहीं, इस घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनता के बीच भी इस प्रकार की ठगी के प्रति सतर्कता बढ़ गई है। हरि प्रसाद सिंह ने प्रशासन और कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों से अपील की है कि राकेश शर्मा जैसे अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
हरि प्रसाद सिंह द्वारा राकेश शर्मा के खिलाफ की गई शिकायत ने यह साबित कर दिया है कि कैसे बड़े और प्रभावशाली लोग भी ठगी का शिकार हो सकते हैं। इस मामले में एक करोड़ रुपये की ठगी, फर्जी लाइसेंस और धमकियों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
हरि प्रसाद सिंह ने राकेश शर्मा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही उन्हें न्याय मिलेगा। प्रशासन और कानून-व्यवस्था के अधिकारियों से भी यही अपेक्षा है कि वे इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
