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	<title>राष्ट्रीय Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>ऑपरेशन सिंदूर: आतंकी अड्डों पर भारत का सटीक प्रहार, मसूद अजहर के परिवार का खात्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 May 2025 10:55:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Operation sindoor]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सशस्त्र बलों की पराक्रम गाथा नई दिल्ली 7 मई। भारत ने 6 मई की दरमियानी</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सशस्त्र बलों की पराक्रम गाथा</strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली 7 मई। भारत ने 6 मई की दरमियानी रात को जब अपनी घड़ी की सुइयां 1:05 पर पहुंचीं, तब एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान का आगाज़ हुआ, जिसका नाम रखा गया—‘ऑपरेशन सिंदूर’। 25 मिनट की इस बिजली गति वाली कार्रवाई में भारतीय वायुसेना और विशेष बलों की सटीक योजना, साहस और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन पूरी दुनिया ने देखा। कुल 24 मिसाइलें दागकर नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया गया। इनमें से पांच पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में थे, जबकि चार पाकिस्तान की सीमा के भीतर थे। इस अभियान की खूबी यह रही कि इसमें एक भी पाकिस्तानी आम नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया कि इस हमले की नैतिक वैधता बरकरार रहे।</strong></p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर को नाम देने के पीछे एक गहरी रणनीतिक और सांस्कृतिक भावना है। सिंदूर भारतीय संस्कृति में विजय, बलिदान और शक्ति का प्रतीक है। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने न केवल अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की, बल्कि आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को भी सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। आतंकियों को प्रशिक्षित करने, उन्हें भारत में घुसपैठ के लिए तैयार करने और नागरिकों पर हमले के लिए भेजने वाले ठिकानों पर भारत की यह कड़ी कार्रवाई, आने वाले वर्षों की एक स्पष्ट दिशा तय करती है।</strong></p>
<p><strong>इस अभियान की सबसे मार्मिक बात यह रही कि इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य मारे गए। बहावलपुर में स्थित आतंकी अड्डे पर मिसाइल हमले से अजहर की बहन, बहनोई, भांजे, भतीजे, उनके बच्चे और उसकी मां सहित कई करीबी रिश्तेदार मारे गए। यही नहीं, अजहर के चार विश्वासपात्र सहयोगी भी इस ऑपरेशन में ढेर हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मसूद अजहर इस नुकसान से बेहद टूट गया और फूट-फूटकर रोया। यह वही मसूद है, जो भारत पर आतंकी हमलों की साजिश रचते हुए कभी थमता नहीं था।</strong></p>
<p><strong>इस हमले में एक और बड़ी सफलता भारत को तब मिली जब जैश का टॉप ऑपरेशनल कमांडर कारी मोहम्मद इकबाल मारा गया। इकबाल कोटली क्षेत्र के आतंकवादी कैंपों का कमांडर था और भारतीय सीमाओं पर कई हमलों की साजिश में उसका हाथ था। साथ ही, बिलाल आतंकी कैंप का मुखिया याकूब मुगल भी ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया, जिससे जैश और लश्कर दोनों को करारा झटका लगा।</strong></p>
<p><strong>आइए जानते हैं उन नौ आतंकी ठिकानों के बारे में, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त किया गया। पहला था सवाई नाला कैम्प, जो मुजफ्फराबाद, पीओके में स्थित था। यह लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख शिविर था और नियंत्रण रेखा से 30 किलोमीटर दूर था। यहां से 2024 में सोनगर्म, गुलमर्ग और 2025 में पहलगाम में हुए हमलों के आतंकी प्रशिक्षित होकर आए थे। यह शिविर 2000 से सक्रिय था और पाक सेना तथा आईएसआई की देखरेख में संचालित होता था।</strong></p>
<p><strong>दूसरा ठिकाना था मरकज सैयदना बिलाल कैम्प, जो जैश-ए-मोहम्मद का था। इस शिविर में घने जंगलों में जिंदा रहने की ट्रेनिंग दी जाती थी। हथियारों का भंडारण और विस्फोटकों की असेंबलिंग यहां होती थी। पाकिस्तानी सेना की स्पेशल फोर्सेज यहां आतंकियों को प्रशिक्षित करती थीं।</strong></p>
<p><strong>तीसरा आतंकी शिविर गुलपुर में था, जो कोटली (पीओके) में स्थित था। यह भी लश्कर-ए-तैयबा के अधीन था और यहां से राजौरी, पुंछ और रियासी जैसे इलाकों में घुसपैठ की जाती थी। 2023 और 2024 के हमलों के कई आतंकी इसी कैम्प से निकलकर भारत में दाखिल हुए थे।</strong></p>
<p><strong>चौथा था बरनाला कैम्प, भीमबेर (पीओके) में स्थित। यह नियंत्रण रेखा से मात्र 9 किलोमीटर दूर था और हथियारों व आईईडी का मुख्य भंडार था। एक साथ 100 से अधिक आतंकी इस शिविर में ठहर सकते थे। यह स्थान खासतौर पर लश्कर की घातक टुकड़ियों का प्रशिक्षण केंद्र था।</strong></p>
<p><strong>पांचवां शिविर था अब्बास कैम्प, कोटली में, जो लश्कर और जैश दोनों का साझा अड्डा था। यहां फिदायीन दस्ते तैयार किए जाते थे। कारी जरार नामक खूंखार आतंकी अक्सर यहां आता था। पुंछ और राजौरी सेक्टर में घुसपैठ की अधिकांश घटनाओं की जड़ें इसी कैम्प से जुड़ी थीं।</strong></p>
<p><strong>पाकिस्तान की सीमा में जो चार आतंकी शिविर ध्वस्त किए गए, उनमें बहावलपुर स्थित आतंकी अड्डा सबसे प्रमुख था। यहीं पर मसूद अजहर के परिवार के सदस्य मारे गए। यह जैश का कमांड और कंट्रोल सेंटर था, जहां से पूरे भारत में हमलों की योजना बनाई जाती थी।</strong></p>
<p><strong>दूसरा शिविर पंजाब प्रांत में डेरा गाजी खान के पास स्थित था। यह लश्कर का गुप्त प्रशिक्षण केंद्र था, जहां महिलाओं को भी आत्मघाती दस्ते के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। इसमें बड़ी मात्रा में RDX और ड्रोन भी बरामद हुए।</strong></p>
<p><strong>तीसरा अड्डा कराची के बाहरी इलाके में था, जहां भारतीय नौसेना पर संभावित हमलों की साजिशें रची जाती थीं। समुद्र मार्ग से घुसपैठ की ट्रेनिंग दी जाती थी और यहां पाकिस्तानी नौसेना के कुछ गुप्त अफसरों की संलिप्तता के भी प्रमाण मिले हैं।</strong></p>
<p><strong>चौथा अड्डा खैबर पख्तूनख्वा में था। यह आतंकी कैंप अफगान सीमा के पास था और यहां जैश, तहरीक-ए-तालिबान और हक्कानी नेटवर्क का संयुक्त प्रशिक्षण केंद्र था। इस स्थान पर विदेशी आतंकियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया।</strong></p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने इजरायली और स्वदेशी तकनीकों का मिश्रण करते हुए बेहद परिष्कृत हथियारों का प्रयोग किया। हवा से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइलें, हर ऑपरेशनल टारगेट पर सटीक बैठीं। साथ ही, स्पाइस-2000 जैसी स्मार्ट बमों से दुश्मन के ठिकानों पर कहर बरपाया गया। भारतीय सेना ने ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके रियल टाइम लोकेशन को चिन्हित किया।</strong></p>
<p><strong>भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऑपरेशन के बाद स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई है। भारत की संप्रभुता पर हमला करने वालों को जवाब देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जायज़ है। दुनिया के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों ने भारत के इस कदम को आतंक के खिलाफ सशक्त पहल बताया।</strong></p>
<p><strong>पाकिस्तान ने शुरुआत में इस ऑपरेशन से इनकार किया, लेकिन बाद में मसूद अजहर के परिवार की मौत की पुष्टि के बाद उनकी कहानी बदल गई। वहां की सेना और सरकार के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं। विपक्षी दलों ने सरकार की विफलता पर सवाल उठाए और इसे देश की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता बताया।</strong></p>
<p><strong>पाकिस्तान के आम नागरिकों में भय और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया पर आतंक के खिलाफ भारत की कार्रवाई को समर्थन देते हुए अपने ही देश की नीतियों की आलोचना की। कई ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर कब तक पाकिस्तानी सरज़मीं आतंकी गतिविधियों की पनाहगाह बनी रहेगी।</strong></p>
<p><strong>भारत में इस अभियान को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल था। रक्षा विशेषज्ञों ने इसे 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक से भी कहीं अधिक सटीक और प्रभावी करार दिया। यह अभियान न केवल सैन्य सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता की घोषणा भी है।</strong></p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी स्तर तक जा सकता है। यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि उन देशों को भी गया जो आतंक को परोक्ष या अपरोक्ष समर्थन देते हैं। यह एक नई सुरक्षा नीति की नींव है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है—आतंक का जवाब अब केवल ‘बातचीत’ नहीं, ‘कार्रवाई’ होगी।</strong></p>
<p><strong>अंततः ऑपरेशन सिंदूर एक रणनीतिक, सैन्य और नैतिक जीत है। यह उस भारत का परिचय है जो अब अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सीमाओं से परे जाकर भी निर्णायक कदम उठाने से नहीं हिचकिचाता। यह विजय उन शहीदों को समर्पित है, जिन्होंने आतंक के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। ऑपरेशन सिंदूर, भारत की नई सैन्य चेतना की वह लाल रेखा है, जिसे पार करना अब किसी के लिए आसान नहीं होगा।</strong></p>
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		<title>वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर संसद की मुहर, समाज में व्यापक बदलाव की उम्मीद</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/parliament-approves-waqf-amendment-bill-2025-hopes-for-widespread-change-in-society/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 03:38:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[hopes for widespread change in society]]></category>
		<category><![CDATA[Parliament approves Waqf Amendment Bill 2025]]></category>
		<category><![CDATA[Waqf Amendment Bill 2025]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>संसद से पास हुआ वक्फ संशोधन विधेयक: समावेशी विकास की नई पहल नई दिल्ली 4 अप्रैल। देश के</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संसद से पास हुआ वक्फ संशोधन विधेयक: समावेशी विकास की नई पहल</strong></p>
<p>नई दिल्ली 4 अप्रैल। देश के विधायी इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को अब संसद की दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—से मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक को लेकर देशभर में लंबे समय से चर्चाएं चल रही थीं। लोकसभा में पहले ही यह विधेयक पास हो चुका था, और अब राज्यसभा में भी यह विधेयक व्यापक बहस और लंबी चर्चा के बाद देर रात 2:32 बजे पारित हो गया। इस दौरान राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में कुल 280 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 232 सांसदों ने मत दिया। यह बिल खासकर अल्पसंख्यक समुदायों की संपत्तियों की पारदर्शी निगरानी, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने, रजिस्ट्री को डिजिटल करने, और ट्रांसपेरेंसी के नए मानदंड स्थापित करने का प्रयास किया गया है। वक्फ संपत्ति पर वर्षों से चल रहे विवादों, अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार के मामलों को देखते हुए इस संशोधन की मांग काफी समय से की जा रही थी।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया: “हर उस आवाज को अधिकार मिलेगा जो अब तक दबाई गई थी”</strong><br />
विधेयक के पास होने के कुछ ही समय बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसे उन्होंने एक “ऐतिहासिक क्षण” करार दिया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लिखा, <em>“वक्फ (संशोधन) विधेयक का संसद के दोनों सदनों से पारित होना सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास के लिए हमारे सामूहिक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण क्षण है।”</em> उन्होंने आगे कहा, <em>“यह विधेयक विशेष रूप से उन लोगों की सहायता करेगा जो लंबे समय से हाशिये पर थे और जिन्हें आवाज और अवसर दोनों से वंचित रखा गया था। अब वे समाज की मुख्यधारा में आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ सकेंगे।”</em> पीएम मोदी ने इस अवसर पर उन सभी सांसदों का आभार जताया जिन्होंने विधेयक पर चर्चा में भाग लिया और इसे मजबूती दी। उन्होंने संसदीय समिति के सदस्यों और सुझाव देने वाले आम नागरिकों के प्रति भी आभार प्रकट किया। पीएम के मुताबिक, “अब हम एक ऐसे युग की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हमारा संस्थागत ढांचा अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशील होगा। हम प्रत्येक नागरिक की गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”</p>
<p><strong>विधेयक के प्रावधान: क्या-क्या है बदलाव में शामिल?</strong><br />
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के तहत वक्फ संपत्तियों की निगरानी और प्रबंधन में कई अहम परिवर्तन प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब वक्फ संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग और यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर (UID) आधारित रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, ताकि संपत्तियों का कोई दुरुपयोग न हो। इसके अलावा वक्फ बोर्डों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए उन्हें समय-समय पर ऑडिट रिपोर्ट पेश करनी होगी। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों को वित्तीय पारदर्शिता बरतने के लिए नए मानदंडों के तहत लाया गया है। इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके सदुपयोग को सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे समाज के वंचित तबकों को अधिक लाभ मिल सकेगा।</p>
<p><strong>राज्यसभा में कैसे हुआ पास, और क्या रहा राजनीतिक समीकरण?</strong><br />
राज्यसभा में विधेयक पर करीब 12 घंटे से ज्यादा बहस चली, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने मत और आपत्तियाँ दर्ज कीं। चर्चा के बाद देर रात लगभग 2 बजे मतदान हुआ, जिसमें सत्ता पक्ष ने बहुमत जुटाकर विधेयक को पास करा लिया। प्रारंभिक आंकड़ों में कुछ विसंगतियाँ देखी गई थीं—जैसे एक जगह पर 28 के पक्ष और 95 के विपक्ष में वोट बताए गए, जो संभवतः टाइपो या अलग प्रस्ताव से जुड़े हों—परंतु विधायी कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 280 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। चर्चा के दौरान विपक्ष ने कुछ बिंदुओं पर चिंता जताई, जैसे कि वक्फ संपत्तियों के नियंत्रण को लेकर राजनीतिक हस्तक्षेप, अल्पसंख्यकों की असुरक्षा की भावना, और विधेयक के कुछ प्रावधानों की अस्पष्टता। हालांकि सरकार ने इन तमाम मुद्दों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि उनके हित में है, और इसका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है।</p>
<p><strong>सामाजिक प्रभाव: अल्पसंख्यक समुदायों में उम्मीद और सतर्कता दोनों</strong><br />
विधेयक के पारित होने के बाद देशभर में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां एक ओर समाज के बुद्धिजीवी वर्ग, धार्मिक संस्थाएं और सामाजिक कार्यकर्ता इसे एक बड़ा सुधारात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ संगठनों ने यह चिंता भी जताई है कि इसका दुरुपयोग न हो। खासतौर पर वक्फ संपत्ति पर आश्रित संस्थानों को यह आशंका है कि कहीं सरकार की निगरानी बढ़ने से उनके कामकाज पर अनावश्यक दबाव न आए। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह विधेयक किसी प्रकार की राजनीतिक या धार्मिक संकीर्णता से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह एक निष्पक्ष और जवाबदेह प्रणाली की ओर कदम है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल संपत्ति विवादों को सुलझाने में मदद करेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी अल्पसंख्यकों के विकास को गति देगा।</p>
<p><strong>पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही की ओर भारत</strong><br />
वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का पारित होना एक व्यापक प्रशासनिक सुधार का संकेत है, जिससे भारत अब अधिक पारदर्शी और समावेशी तंत्र की ओर अग्रसर है। यह विधेयक न केवल एक वर्ग विशेष के लिए, बल्कि समग्र रूप से पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिद्ध करता है कि सरकार अब ‘न्याय की अंतिम पंक्ति’ तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। विधेयक का वास्तविक असर तब दिखाई देगा जब राज्यों में वक्फ बोर्ड इस कानून को ईमानदारी से लागू करेंगे, डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार होंगे, और अतिक्रमण से मुक्त संपत्तियों का सही उपयोग सामाजिक कल्याण के लिए होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ बोर्ड किस प्रकार इस कानून को जमीनी स्तर पर लागू करते हैं और समाज में कितना परिवर्तन आता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जताई गई प्रतिबद्धता को अब प्रशासनिक मशीनरी को साकार करना होगा।</p>
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		<title>पीएफ निकासी की प्रक्रिया में होने जा रहा है क्रांतिकारी बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 14:12:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[A revolutionary change is going to happen in the process of PF withdrawal]]></category>
		<category><![CDATA[Today]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 31 मार्च। अब तक पीएफ निकासी की प्रक्रिया में 10 दिन या उससे अधिक समय लग</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 31 मार्च। अब तक पीएफ निकासी की प्रक्रिया में 10 दिन या उससे अधिक समय लग जाता था, खासकर जब साप्ताहिक छुट्टियां और त्योहारों के कारण सरकारी कार्यालय बंद रहते थे। लेकिन अब ऑटो-क्लेम सुविधा के तहत यह समयसीमा घटाकर 3-4 दिन कर दी गई है। ईपीएफओ ने निकासी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए हैं, जिससे 95 प्रतिशत से अधिक दावों का स्वतः निपटान हो सकेगा। इससे कर्मचारियों को अपने स्वयं के धन को प्राप्त करने में होने वाली देरी से निजात मिलेगी। ईपीएफओ के मुताबिक, अब तक निकासी प्रक्रिया में 27 चरण होते थे, लेकिन इसे घटाकर 18 कर दिया गया है, और भविष्य में इसे केवल छह चरणों तक सीमित करने की योजना है। इससे ईपीएफओ की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी और सदस्यों को त्वरित लाभ मिलेगा।</p>
<h3>पीएफ निकासी में यूपीआई और एटीएम की सुविधा</h3>
<p>ईपीएफओ जल्द ही पीएफ निकासी के लिए यूपीआई और एटीएम की सुविधा शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे कर्मचारी अपने पीएफ खातों से सीधे धनराशि निकाल सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे वे अपने बैंक खातों से एटीएम या यूपीआई के माध्यम से पैसे निकालते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए उपयोगी होगी, जिन्हें किसी आपातकालीन स्थिति में तत्काल धन की आवश्यकता होती है। अब तक पीएफ निकासी के लिए एक जटिल प्रक्रिया का पालन करना पड़ता था, जिसमें दस्तावेज़ सत्यापन और कई स्तरों की स्वीकृति की आवश्यकता होती थी। लेकिन यूपीआई और एटीएम सुविधा से यह प्रक्रिया सरल और तेज़ हो जाएगी। ईपीएफओ के अनुसार, यह सुविधा मई-जून तक लागू होने की संभावना है और इससे लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।</p>
<h3>ईपीएफओ सदस्यों को कैसे होगा फायदा?</h3>
<p>ईपीएफओ के इस कदम से संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को तत्काल नकदी उपलब्ध हो सकेगी। ऑटो-क्लेम प्रणाली के तहत अधिकांश दावों का निपटान बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, कागजी कार्यवाही में भी भारी कमी आई है, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक जटिलताओं से बचाया जा सकेगा। अब कर्मचारियों को केवल आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे, और उनकी निकासी का निपटान स्वतः हो जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय श्रम बाजार के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल कर्मचारियों को लाभ होगा, बल्कि ईपीएफओ की प्रशासनिक दक्षता भी बढ़ेगी। वर्तमान में, ईपीएफओ प्रतिवर्ष लाखों पीएफ दावों का निपटान करता है, और इस प्रक्रिया को तेज करने से लाखों कर्मचारियों की वित्तीय जरूरतें समय पर पूरी हो सकेंगी।</p>
<h3>कब से मिलेगा यह लाभ?</h3>
<p>कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) की मंजूरी मिलते ही यह सुविधा लागू हो जाएगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। श्रम सचिव सुमिता डावरा के अनुसार, मंत्रालय ने राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है और सदस्य इस वर्ष मई या जून के अंत तक यूपीआई और एटीएम के माध्यम से पीएफ राशि निकाल सकेंगे। इससे न केवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, बल्कि भविष्य में यह सुविधा सरकारी कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और बैंकों के सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाताधारकों के लिए भी शुरू की जा सकती है।</p>
<h3>श्रमिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल</h3>
<p>ईपीएफओ का यह कदम भारत के श्रमिक कल्याण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि लाखों कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब तक, कर्मचारियों को अपने स्वयं के धन को निकालने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस नई प्रणाली के लागू होने से वे आसानी से अपनी जमा राशि का उपयोग कर सकेंगे। यह बदलाव भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी गति देगा और ईपीएफओ को अधिक कुशल और पारदर्शी संगठन बनाने में मदद करेगा।</p>
<p>ईपीएफओ द्वारा उठाए गए ये कदम देश के संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत हैं। अब वे अपने भविष्य निधि को तेज़ी से और बिना किसी जटिल प्रक्रिया के निकाल सकेंगे, जिससे उनकी वित्तीय जरूरतें पूरी हो सकेंगी। यह पहल न केवल श्रमिकों के जीवन को आसान बनाएगी, बल्कि भारत के सामाजिक सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत करेगी।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/a-revolutionary-change-is-going-to-happen-in-the-process-of-pf-withdrawal/">पीएफ निकासी की प्रक्रिया में होने जा रहा है क्रांतिकारी बदलाव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<item>
		<title>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया पशु संरक्षण केंद्र ‘वनतारा’ का उद्घाटन</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/prime-minister-narendra-modi-inaugurated-the-animal-conservation-center-vantara/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Mar 2025 11:12:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Prime Minister Narendra Modi inaugurated the animal conservation center 'Vantara']]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त वनतारा बनेगा वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक केंद्र जामनगर, 4 मार्च 2025। भारत के वन्यजीव</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/prime-minister-narendra-modi-inaugurated-the-animal-conservation-center-vantara/">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया पशु संरक्षण केंद्र ‘वनतारा’ का उद्घाटन</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त वनतारा बनेगा वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक केंद्र</strong></p>
<p>जामनगर, 4 मार्च 2025। भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को एक नई ऊंचाई प्रदान करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के जामनगर में 3,000 एकड़ में फैले अत्याधुनिक पशु संरक्षण केंद्र ‘वनतारा’ का भव्य उद्घाटन किया। यह केंद्र न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में वन्यजीवों के संरक्षण, पुनर्वास और चिकित्सा सुविधाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<p>वनतारा की स्थापना उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की पहल पर की गई है, जो वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं। इस परियोजना को दुनिया के सबसे बड़े निजी वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों में से एक माना जा रहा है, जहां वन्यजीवों को न केवल प्राकृतिक माहौल मिलेगा, बल्कि उनके संरक्षण और उपचार की विश्वस्तरीय सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।</p>
<p><strong>शंख ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच भव्य उद्घाटन</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वनतारा पहुंचे, तो अंबानी परिवार और वनतारा के अधिकारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। शंख ध्वनियों, मंत्रोच्चार और लोक कलाकारों के मनमोहक गायन-वादन के बीच प्रधानमंत्री ने रिबन काटकर इस महत्वपूर्ण केंद्र का उद्घाटन किया।</p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वनतारा परिसर में बने मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और फिर पूरे केंद्र का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने वनतारा में उपलब्ध सुविधाओं को नजदीक से देखा और वन्यजीवों की देखभाल के प्रति अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना की।</p>
<p><strong>वनतारा: भारत का सबसे बड़ा पशु संरक्षण केंद्र</strong></p>
<p>वनतारा केंद्र 3,000 एकड़ में फैला हुआ है और इसे विभिन्न प्राकृतिक आवासों के आधार पर डिज़ाइन किया गया है। यह एक ऐसा अनूठा प्रयास है, जो भारत में वन्यजीवों की रक्षा और उनके पुनर्वास के लिए क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।</p>
<p><strong>वनतारा में प्रमुख केंद्र:</strong></p>
<p><strong>किंगडम ऑफ लॉयन:</strong> एशियाई शेरों के लिए एक विशेष क्षेत्र, जहां उन्हें प्राकृतिक आवास के अनुरूप रखा गया है।</p>
<p><strong>किंगडम ऑफ रेप्टाइल्स:</strong> इस क्षेत्र में दुर्लभ और संकटग्रस्त सरीसृपों को संरक्षित किया गया है।</p>
<p><strong>किंगडम ऑफ सील:</strong> समुद्री जीवों के संरक्षण के लिए एक विशेष केंद्र।</p>
<p><strong>चीता ब्रीडिंग सेंटर:</strong> विलुप्तप्राय चीतों के संरक्षण और प्रजनन के लिए यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p><strong>गजनगरी:</strong> हाथियों के लिए 1,000 एकड़ में फैला यह क्षेत्र विशेष रूप से बीमार और घायल हाथियों के पुनर्वास के लिए बनाया गया है।</p>
<p>वनतारा में हाथियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल भी स्थापित किया गया है, जहां अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां हाथियों के लिए विशेष तालाब और जकूजी भी बनाई गई है, जिससे उन्हें प्राकृतिक माहौल मिल सके।</p>
<p><strong>अत्याधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल: वन्यजीवों के लिए वरदान</strong></p>
<p>वनतारा में उपलब्ध एक और अत्याधुनिक सुविधा है मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जो वन्यजीवों की चिकित्सा के लिए विश्वस्तरीय तकनीक से लैस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अस्पताल का दौरा किया और वहां मौजूद चिकित्सा सुविधाओं को करीब से देखा।</p>
<p><strong>वनतारा हॉस्पिटल में उपलब्ध विशेष चिकित्सा सेवाएं:</strong></p>
<ul>
<li>डायग्नोस्टिक सूट में सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी की सुविधा</li>
<li>वन्यजीवों के लिए आईसीयू और अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर</li>
<li>नवजात वन्यजीवों के लिए विशेष नर्सरी</li>
<li>दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विशेष पुनर्वास केंद्र</li>
</ul>
<p>प्रधानमंत्री ने इन सुविधाओं को देखकर संतोष व्यक्त किया और कहा कि यह केंद्र न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति लाने का काम करेगा।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी का वन्यजीवों के प्रति प्रेम: शावकों को पिलाया दूध</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वनतारा में शेर, बाघ, सफेद शेर, दुर्लभ क्लाउडेड तेंदुआ और एक सींग वाले गैंडे के शावकों को अपने हाथों से दूध पिलाया। प्रधानमंत्री की यह पहल वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है।</p>
<p>उन्होंने वनतारा के कर्मचारियों और चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा, &#8220;आप सभी जो कार्य कर रहे हैं, वह मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है। वनतारा वन्यजीवों के संरक्षण और देखभाल में दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा।&#8221;</p>
<p><strong>वनतारा: संकटग्रस्त प्रजातियों का नया घर</strong></p>
<p>वनतारा केंद्र में एशियाई शेर, हिम तेंदुआ, सफेद शेर, गोल्डन टाइगर, क्लाउडेड तेंदुआ और एक सींग वाले गैंडे जैसे संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है।</p>
<p><strong>वनतारा में संरक्षित कुछ प्रमुख वन्यजीव:</strong></p>
<p><strong>1. एशियाई शेर:</strong> विलुप्ति के कगार पर पहुंचे इन शेरों को यहां विशेष संरक्षण दिया जा रहा है।</p>
<p><strong>2. सफेद शेर:</strong> इनकी दुर्लभता को ध्यान में रखते हुए वनतारा में इनका विशेष प्रजनन कार्यक्रम चलाया जा रहा है।</p>
<p><strong>3. गोल्डन टाइगर:</strong> दुर्लभ प्रजाति का यह टाइगर दुनिया में बहुत कम संख्या में बचा है, जिसे यहां संरक्षित किया गया है।</p>
<p><strong>4. हिम तेंदुआ:</strong> अत्यधिक ठंडे इलाकों में पाए जाने वाले इस दुर्लभ जीव को भी वनतारा में विशेष देखभाल मिल रही है।</p>
<p><strong>5. एक सींग वाला गैंडा:</strong> विलुप्ति की कगार पर पहुंचे इन गैंडों के संरक्षण के लिए विशेष पहल की गई है।</p>
<p><strong>वनतारा: वन्यजीव पर्यटन और शोध केंद्र</strong></p>
<p>वनतारा न केवल एक संरक्षण केंद्र है बल्कि यह वन्यजीव पर्यटन और शोध के लिए भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां पर्यटकों को वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका मिलेगा, वहीं वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी दुर्लभ प्रजातियों पर अध्ययन कर सकेंगे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि वनतारा भविष्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: ‘प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाएं’</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कहा, &#8220;हमारी धरती पर मौजूद हर जीव का संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। भारत प्राचीन काल से प्रकृति पूजक रहा है, और वनतारा इस परंपरा को आधुनिक रूप में आगे बढ़ा रहा है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने अंबानी परिवार, विशेष रूप से अनंत अंबानी को इस पहल के लिए बधाई दी और कहा कि वनतारा भारत को विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगा।</p>
<p><strong>वनतारा से बदलेगी वन्यजीव संरक्षण की तस्वीर</strong></p>
<p>वनतारा भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक नया अध्याय जोड़ेगा। यह केंद्र वन्यजीवों के संरक्षण, पुनर्वास और चिकित्सा के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक मॉडल बनेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे ने वनतारा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और भारत को वन्यजीव संरक्षण में एक अग्रणी देश बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>69,000 सहायक शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/69000-assistant-teacher-recruitment-reservation-scam-case-important-hearing-in-supreme-court-today/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Mar 2025 03:19:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[000 assistant teacher recruitment reservation scam case]]></category>
		<category><![CDATA[000 assistant teacher recruitment reservation scam case: Important hearing in Supreme Court today]]></category>
		<category><![CDATA[69]]></category>
		<category><![CDATA[assistant teacher recruitment reservation scam case: Important hearing in Supreme Court today]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश सरकार के आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर नई दिल्ली, 4 मार्च।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/69000-assistant-teacher-recruitment-reservation-scam-case-important-hearing-in-supreme-court-today/">69,000 सहायक शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>उत्तर प्रदेश सरकार के आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 4 मार्च। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई कोर्ट नंबर 14 में सीरियल नंबर 19 पर सूचीबद्ध है।</p>
<p>आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे वर्ष 2020 से कोर्ट में याची बनकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप है कि उसने आरक्षण नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) के अभ्यर्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018 में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर हजारों अभ्यर्थियों ने अदालत का रुख किया। भर्ती में 19,000 से अधिक सीटों पर आरक्षण घोटाले की बात सामने आई, जिसमें OBC और SC अभ्यर्थियों को निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से काफी कम सीटें दी गईं।</p>
<p><strong>आरक्षण नियमों का उल्लंघन</strong></p>
<p>1. OBC वर्ग को 27% के बजाय केवल 3.86% आरक्षण दिया गया।</p>
<p>2. SC वर्ग को 21% के स्थान पर केवल 16.2% आरक्षण मिला।</p>
<p>3. भर्ती प्रक्रिया में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का उल्लंघन किया गया।</p>
<p>4. ST वर्ग के आरक्षण को भी सही तरीके से लागू नहीं किया गया।</p>
<p><strong>लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला</strong></p>
<p>इस मामले में लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को बड़ा फैसला सुनाते हुए 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की पूरी चयन सूची को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि आरक्षण प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिससे OBC और SC वर्ग के अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार ने आरक्षण नीति के पालन में लापरवाही बरती और इससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसकी सुनवाई आज हो रही है।</p>
<p><strong>अभ्यर्थियों की मांग: याची लाभ देकर जल्द करें निस्तारण</strong></p>
<p>आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ (Litigant Benefit) का प्रस्ताव पेश करके मामले का शीघ्र निस्तारण करे।</p>
<p>अभ्यर्थियों का कहना है कि वे चार वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।</p>
<p><strong>क्या होता है याची लाभ?</strong></p>
<p>याची लाभ का मतलब होता है कि कोर्ट में मामला दायर करने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए और उनके पक्ष में फैसला आने पर उन्हें पहले नियुक्ति दी जाए। अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ का प्रस्ताव रखती है, तो इससे हजारों पीड़ित अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>सरकार की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट का रुख</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी और आरक्षण नीति में कोई अनियमितता नहीं हुई। सरकार का यह भी तर्क है कि अगर चयन सूची पूरी तरह रद्द कर दी गई, तो इससे भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी।</p>
<p>हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि अगर सरकार ने आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया है, तो उसे जवाबदेही लेनी होगी।</p>
<p><strong>69,000 शिक्षक भर्ती परीक्षा का इतिहास</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती का यह मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा है।</p>
<p>1. 2018 – उत्तर प्रदेश सरकार ने 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की घोषणा की।</p>
<p>2. 2019 – भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई और परीक्षा आयोजित की गई।</p>
<p>3. 2020 – परिणाम घोषित हुए, जिसके बाद आरक्षण घोटाले का आरोप लगा और मामला कोर्ट में गया।</p>
<p>4. 2021-2023 – हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चलती रही।</p>
<p>5. 2024 – लखनऊ हाईकोर्ट ने चयन सूची रद्द की और सरकार को दोबारा प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।</p>
<p>6. 4 मार्च 2025 – सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही है।</p>
<p><strong>आरक्षण घोटाले से प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति</strong></p>
<p>आरक्षण घोटाले के शिकार अभ्यर्थियों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। वे पिछले चार वर्षों से नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिल पा रहा। कई अभ्यर्थियों की आयुसीमा समाप्त हो रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।</p>
<p><strong>पीड़ित अभ्यर्थियों की मांगें</strong></p>
<p>1. सरकार सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ का प्रस्ताव पेश करे, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके।</p>
<p>2. आरक्षण नीति का सही से पालन करते हुए नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।</p>
<p>3. सरकार हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करे और सभी पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू करे।</p>
<p>4. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा निर्णायक</strong></p>
<p>69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले का मामला सिर्फ अभ्यर्थियों की नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान के मूल्यों की रक्षा से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले में अन्य सरकारी भर्तियों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा।</p>
<p>अगर कोर्ट ने सरकार को याची लाभ देने का आदेश दिया, तो हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और उन्हें उनका हक मिलेगा। वहीं, अगर सरकार की दलीलें कमजोर साबित होती हैं, तो भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करना पड़ सकता है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक सकता है।</p>
<p>अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां आज की सुनवाई यह तय करेगी कि उत्तर प्रदेश के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा या नहीं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>महाकुंभ 2025: प्रधानमंत्री मोदी का एकता और समरसता का संदेश</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/maha-kumbh-2025-prime-minister-modis-message-of-unity-and-harmony/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Dec 2024 08:46:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Kumbh 2025: Prime Minister Modi's message of unity and harmony]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 29 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम &#8216;मन की बात&#8217; के जरिए रविवार</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/maha-kumbh-2025-prime-minister-modis-message-of-unity-and-harmony/">महाकुंभ 2025: प्रधानमंत्री मोदी का एकता और समरसता का संदेश</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 29 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम &#8216;मन की बात&#8217; के जरिए रविवार को देशवासियों को संबोधित किया। इस बार का कार्यक्रम विशेष रूप से प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 पर केंद्रित था। प्रधानमंत्री ने महाकुंभ की तैयारियों, उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर बात की और देशवासियों से इस महाआयोजन को एकता और समरसता का संदेश लेकर मनाने की अपील की।</p>
<p><strong>महाकुंभ का आयोजन: विविधता में एकता का प्रतीक</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से महाकुंभ का आयोजन शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि संगम तट पर इस समय भव्य तैयारियां चल रही हैं। हाल ही में प्रयागराज दौरे का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कुछ दिन पहले जब मैंने हेलीकॉप्टर से कुंभ की तैयारियों का अवलोकन किया, तो मैं बहुत प्रभावित हुआ। इतना विशाल, इतना सुंदर और इतनी भव्यता देखकर प्रसन्नता हुई। यह आयोजन केवल इसके आकार की वजह से नहीं, बल्कि इसकी विविधता के कारण विश्वभर में अनोखा है। महाकुंभ वास्तव में एकता और समरसता का महोत्सव है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि महाकुंभ में लाखों श्रद्धालु, हजारों परंपराएं, सैकड़ों संप्रदाय और अनेकों अखाड़े शामिल होते हैं। “यहां हर व्यक्ति एक ही उद्देश्य के साथ आता है—आध्यात्मिक शुद्धि और सामाजिक एकता। यहां किसी तरह का भेदभाव नहीं दिखता। कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। यह आयोजन विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण है, जिसे दुनिया में कहीं और नहीं देखा जा सकता।”</p>
<p><strong>महाकुंभ का संदेश: ‘एक हो पूरा देश’</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से महाकुंभ 2025 में भाग लेने और इस आयोजन को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “जब हम महाकुंभ में भाग लें, तो समाज में विभाजन और नफरत की भावना को खत्म करने का संकल्प लेकर लौटें। कुंभ का संदेश है, ‘महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश।’ यह आयोजन न केवल आध्यात्मिकता का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने अपने संदेश को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कहा, “गंगा की अविरल धारा, न बंटे समाज हमारा। गंगा की पवित्रता और प्रवाह हमें यह सिखाते हैं कि समाज में विभाजन नहीं होना चाहिए। कुंभ का यह आयोजन हमारे भीतर इस भावना को और मजबूत करेगा।”</p>
<p><strong>डिजिटल नवाचार से होगा कुंभ 2025 और विशेष</strong></p>
<p>महाकुंभ 2025 की विशेषता इस बार इसका अत्याधुनिक तकनीकी इस्तेमाल भी होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यह आयोजन डिजिटल और तकनीकी दृष्टि से ऐतिहासिक बनने जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई डिजिटल सेवाएं और नवाचार उपलब्ध कराए जाएंगे।</p>
<p><strong>एआई चैटबॉट की सुविधा:</strong></p>
<p>महाकुंभ 2025 में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह चैटबॉट 11 भारतीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके जरिए श्रद्धालु किसी भी प्रकार की मदद या जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, “एआई चैटबॉट से जुड़कर आप कुंभ से संबंधित सभी सवालों के जवाब पा सकते हैं। चाहे वह यात्रा की योजना हो, घाटों का स्थान हो, या अन्य आवश्यक जानकारी हो—यह चैटबॉट हर कदम पर आपकी सहायता करेगा।”</p>
<p><strong>डिजिटल नेविगेशन:</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने बताया कि डिजिटल नेविगेशन की मदद से श्रद्धालु आसानी से कुंभ के विभिन्न घाटों, मंदिरों और अखाड़ों तक पहुंच सकेंगे। यह तकनीक पार्किंग स्थलों तक पहुंचने और मेला क्षेत्र में भ्रमण करने में भी मदद करेगी।</p>
<p><strong>कैमरों से सुरक्षा और खोया-पाया केंद्र:</strong></p>
<p>पूरे मेला क्षेत्र को एआई संचालित कैमरों से कवर किया जाएगा। अगर कोई श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ जाता है, तो ये कैमरे उनकी खोज में मदद करेंगे। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल खोया-पाया केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जहां वे अपने बिछड़े परिजनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</p>
<p><strong>मोबाइल आधारित सेवाएं:</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं को उनके मोबाइल फोन पर सरकार द्वारा स्वीकृत टूर पैकेज, आवास और होमस्टे की जानकारी भी दी जाएगी। इस सुविधा से कुंभ के दौरान श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा को सुविधाजनक बना सकेंगे।</p>
<p><strong>#एकताकामहाकुंभ: प्रधानमंत्री की अपील</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि महाकुंभ में शामिल होकर इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को आत्मसात करें। उन्होंने कहा, “महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है; यह एक ऐसा अवसर है, जहां हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करते हुए सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दे सकते हैं। जब आप महाकुंभ में जाएं, तो #एकताकामहाकुंभ के साथ अपनी सेल्फी जरूर अपलोड करें। इससे यह संदेश हर घर और हर व्यक्ति तक पहुंचेगा।”</p>
<p><strong>महाकुंभ 2025: एक अनोखा अनुभव</strong></p>
<p>महाकुंभ का आयोजन विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। इसकी भव्यता, विविधता और संदेश इसे अन्य आयोजनों से अलग बनाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “एकता का महाकुंभ” करार दिया।</p>
<p>इस आयोजन में करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत, और विभिन्न परंपराओं के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं। यह आयोजन न केवल भारतीय संस्कृति की गहराई और समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है।</p>
<p>प्रधानमंत्री के संदेश ने महाकुंभ 2025 को न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है, बल्कि इसे सामाजिक और तकनीकी नवाचार के दृष्टिकोण से भी ऐतिहासिक बनाने का वादा किया है। प्रयागराज में इस महाआयोजन के दौरान हर कोई “गंगा की अविरल धारा” के साथ “न बंटे समाज हमारा” के संदेश को आत्मसात करेगा और एकता, समरसता और समर्पण के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनेगा।</p>
<p>महाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं होगा, बल्कि यह एकता, तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक धरोहर का जश्न होगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति और परंपरा की ताकत को उजागर करेगा।</p>
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		<title>पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: राष्ट्र शोक में डूबा, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 07:50:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[Manmohan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-prime-minister-dr-manmohan-singh-passed-away-nation-mourns-seven-days-of-national-mourning-declared/">पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: राष्ट्र शोक में डूबा, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. सिंह के आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन में जो ईमानदारी, सादगी और निष्ठा का परिचय दिया, वह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। वे न केवल एक महान अर्थशास्त्री थे, बल्कि एक ऐसे नेता भी थे, जिन्होंने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए अद्वितीय योगदान दिया।”</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-4544 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1714" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-300x201.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-1024x685.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-768x514.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-1536x1028.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-2048x1371.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;"><strong>डॉ. सिंह का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा</strong></p>
<p style="text-align: left;">26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब के गाह में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह ने गरीबी और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में अपना बचपन बिताया। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत में बस गया। डॉ. सिंह ने अपनी शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय से प्रारंभ की और बाद में कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में उच्च डिग्री प्राप्त की। उनकी शिक्षा ने उन्हें न केवल एक बेहतरीन अर्थशास्त्री बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-4545 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1732" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-300x203.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1024x693.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-768x520.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1536x1039.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-2048x1386.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;"><strong>एक अर्थशास्त्री के रूप में योगदान</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रोफेसर के रूप में की, लेकिन जल्द ही वे नीति निर्माण में सक्रिय हो गए। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और देश की मौद्रिक नीतियों को मजबूती प्रदान की। 1991 में, जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने वित्त मंत्री नियुक्त किया।</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह ने आर्थिक सुधारों की दिशा में साहसिक कदम उठाए, जिनमें उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण जैसे सुधार शामिल थे। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्थान भी बनाया। उन्होंने विदेशी निवेश को आकर्षित करने, कराधान प्रणाली को सुधारने और देश की आर्थिक नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-4545 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1732" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-300x203.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1024x693.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-768x520.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1536x1039.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-2048x1386.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने इस योगदान को याद करते हुए कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में किए गए आर्थिक सुधारों ने देश को आर्थिक स्थिरता और विकास की ओर अग्रसर किया। उनकी नीति निर्माण की क्षमता और दूरदर्शिता का देश हमेशा ऋणी रहेगा।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>राजनीतिक सफर और प्रधानमंत्री के रूप में योगदान</strong></p>
<p style="text-align: left;">2004 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जीत के बाद, डॉ. मनमोहन सिंह देश के 14वें प्रधानमंत्री बने। वे भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बजाय उनकी विशेषज्ञता और नीतिगत कुशलता को उनकी नियुक्ति का आधार माना गया।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और वैश्विक कूटनीति पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में कई ऐतिहासिक योजनाएं और नीतियां लागू की गईं, जिनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), शिक्षा का अधिकार अधिनियम, और खाद्य सुरक्षा अधिनियम शामिल हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4547" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1663" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-300x195.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-1024x665.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-768x499.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-1536x998.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274446-1-2048x1331.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री के रूप में उनकी विरासत और निजी व्यक्तित्व</p>
<p style="text-align: left;">भारत-अमेरिका परमाणु समझौता</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता था। इस समझौते ने भारत को ऊर्जा संकट से उबरने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण स्थान हासिल करने में मदद की। हालांकि, इस समझौते को लेकर देश के भीतर काफी विवाद हुए, लेकिन डॉ. सिंह ने अपनी दृढ़ता और कूटनीतिक कौशल से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया।</p>
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<p style="text-align: left;"><strong>सामाजिक और आर्थिक योजनाएं</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह की नीतियों का केंद्र बिंदु हमेशा आम जनता रही। उनके कार्यकाल में सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई। ग्रामीण भारत के विकास के लिए उन्होंने विशेष योजनाएं लागू कीं, जिनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, शिक्षा में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना था।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इन प्रयासों को याद करते हुए कहा, “डॉ. सिंह का समर्पण और उनकी नीतियों का प्रभाव देश के विकास में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने अपनी सादगी और दूरदर्शिता से यह दिखाया कि किस प्रकार ऊंचे पदों पर रहते हुए भी जनता के प्रति समर्पित रहा जा सकता है।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>डॉ. सिंह का निजी व्यक्तित्व</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी सौम्यता, सादगी और बौद्धिकता के लिए जाना जाता था। वे विवादों से दूर रहने वाले नेता थे, जिनका ध्यान हमेशा देश की प्रगति पर केंद्रित रहता था। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस गुण को याद करते हुए कहा, “डॉ. सिंह का जीवन ईमानदारी और सादगी का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा उच्च नैतिक मूल्यों का पालन किया और देश सेवा में अपना सर्वस्व योगदान दिया।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>एक प्रेरणादायक नेता</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह के नेतृत्व का प्रभाव केवल उनके कार्यकाल तक सीमित नहीं था। वे भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत थे। उनकी विनम्रता और उनकी नेतृत्व क्षमता ने यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व केवल पद की शक्ति से नहीं, बल्कि विचारों और नीतियों की प्रभावशीलता से मापा जाता है।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन पर कहा, “उच्च पदों पर रहते हुए भी डॉ. सिंह अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब उनसे कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती थी। उनकी गहराई और सहजता मुझे हमेशा प्रेरित करती थी।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>अंतिम विदाई और देश की संवेदनाएं</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शोक व्यक्त किया गया है। उनके नेतृत्व और योगदान को लेकर दुनिया भर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। देशभर में उनके सम्मान में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह का निधन भारतीय राजनीति में एक युग का अंत है। उनका जीवन, उनकी नीतियां और उनका योगदान हमेशा भारतीय इतिहास में अमर रहेंगे। उनके परिवार, दोस्तों और देश के नागरिकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।”</p>
<p style="text-align: left;">आज, जब देश ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक को खो दिया है, तो यह समय उनके जीवन और उनके कार्यों से सीखने का है। डॉ. सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदारी, सादगी और समर्पण के साथ बड़े से बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-prime-minister-dr-manmohan-singh-passed-away-nation-mourns-seven-days-of-national-mourning-declared/">पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: राष्ट्र शोक में डूबा, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकने के लिए पुरातात्विक खुदाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है भाजपा: अखिलेश यादव</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/bjp-is-promoting-topics-like-archaeological-excavations-to-divert-attention-from-farmers-issues-akhilesh-yadav/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Dec 2024 14:36:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Akhilesh yadav]]></category>
		<category><![CDATA[BJP is promoting topics like archaeological excavations to divert attention from farmers' issues: Akhilesh Yadav]]></category>
		<category><![CDATA[Samajwadi party]]></category>
		<category><![CDATA[Sapa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>फिरोजाबाद, 22 दिसंबर। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर किसानों</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bjp-is-promoting-topics-like-archaeological-excavations-to-divert-attention-from-farmers-issues-akhilesh-yadav/">किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकने के लिए पुरातात्विक खुदाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है भाजपा: अखिलेश यादव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>फिरोजाबाद, 22 दिसंबर। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर किसानों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा जानबूझकर जनता का ध्यान भटकाने के लिए पुरातात्विक खुदाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है। यह बयान उस समय आया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने संभल जिले के चंदौसी क्षेत्र में एक प्राचीन बावड़ी का पता लगाया।</p>
<p>जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया ने 400 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली इस ऐतिहासिक बावड़ी की खोज की पुष्टि की। इसमें संगमरमर से सजे फर्श और चार बड़े कक्ष मौजूद हैं। सपा प्रमुख ने इस खोज पर सवाल उठाते हुए कहा कि “इस तरह की गतिविधियां कानून का उल्लंघन करती हैं, क्योंकि पूजा स्थल अधिनियम इस प्रकार की खुदाई पर रोक लगाता है। यह महज ध्यान भटकाने की एक चाल है।”</p>
<p>अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, &#8220;खुदाई से रास्ता नहीं निकलेगा। भाजपा किसानों की समस्याओं से बचने के लिए ऐसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जब देश के किसानों को डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) जैसे आवश्यक उर्वरकों की आवश्यकता थी, तब सरकार विफल रही। किसानों को बीज, उर्वरक, और सिंचाई सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं हो रही हैं।&#8221;</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में बिजली और दवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे कृषि लागत बढ़ रही है और किसानों की मुनाफे की संभावनाएं लगातार घट रही हैं। “अगर कोई किसान फसल उगाने और काटने में सफल भी हो जाए, तो उसे यह नहीं पता होता कि वह अपनी फसल को उचित मूल्य पर कहां बेचे। सरकार केवल जुमलेबाजी कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है,”</p>
<p><strong>किसानों का आंदोलन और एमएसपी की मांग</strong></p>
<p>पंजाब-हरियाणा की सीमा पर खनौरी बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 314वें दिन में प्रवेश कर गया। किसान 13 फरवरी 2024 से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाले कानून समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>किसान नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकारों पर उनके मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) एकता उग्राहां के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, &#8220;यह सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है। किसानों के हक और उनकी मांगों को दरकिनार किया जा रहा है।&#8221;</p>
<p>प्रदर्शन के दौरान हाल ही में तब तनाव बढ़ गया जब किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल खनौरी सीमा पर बेहोश हो गए। वह 20 दिनों से आमरण अनशन पर थे। दल्लेवाल की बिगड़ती सेहत के बावजूद किसानों का आंदोलन जारी है। पंधेर ने सभी नागरिकों से खनौरी और शंभू बॉर्डर पर एकत्र होकर किसानों का समर्थन करने की अपील की।</p>
<p>किसानों की मुख्य मांग है कि सरकार एमएसपी के लिए गारंटी कानून बनाए। इसके अतिरिक्त, वे उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों, सिंचाई के लिए पानी की कमी, और कृषि ऋण माफ करने जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।</p>
<p>किसानों के इस आंदोलन ने केंद्र और राज्य सरकारों पर बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर, सरकार ने अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>जहां एक ओर पुरातात्विक खुदाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं दूसरी ओर देश का किसान बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। अखिलेश यादव ने इन दोनों घटनाओं को जोड़कर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।</p>
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		<item>
		<title>बाबा साहेब पर अपमानजनक टिप्पणी और कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Dec 2024 16:53:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[pawan kheda]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 21 दिसंबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/derogatory-comments-on-baba-saheb-and-nationwide-campaign-by-congress/">बाबा साहेब पर अपमानजनक टिप्पणी और कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 21 दिसंबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। कांग्रेस ने इस टिप्पणी के विरोध में बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने 24 दिसंबर को देशभर के सभी जिला मुख्यालयों में &#8216;बाबा साहेब अंबेडकर सम्मान मार्च&#8217; निकालने और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है। इसके साथ ही 22 और 23 दिसंबर को देश के 150 शहरों में कांग्रेस नेता प्रेस वार्ता आयोजित करेंगे।</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के मीडिया और प्रचार विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह 2024 के चुनाव में जनता के फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “400 पार और संविधान बदलने के सपने देखने वाले अब संविधान की रक्षा करने वाले लोगों के कारण कुंठा से ग्रसित हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह की अपमानजनक टिप्पणी उसी हताशा का परिणाम है। अगर यह गलती से होता, तो अब तक माफी मांग ली गई होती, लेकिन भाजपा नेताओं के कुतर्क उनकी वास्तविक मंशा उजागर करते हैं।”</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग को लेकर हमारा आंदोलन जारी रहेगा! हम इन मनुस्मृति के उपासकों के खिलाफ़ डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत की रक्षा के लिए लड़ेंगे!</p>
<p>कांग्रेस आगामी सप्ताह को डॉ. अंबेडकर सम्मान सप्ताह के रूप में मनाएगी।</p>
<p>सभी कांग्रेस सांसद, वरिष्ठ नेता और…</p>
<p>&mdash; K C Venugopal (@kcvenugopalmp) <a href="https://twitter.com/kcvenugopalmp/status/1870407939380678899?ref_src=twsrc%5Etfw">December 21, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>खेड़ा ने कहा कि यह टिप्पणी केवल डॉ. अंबेडकर का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है। “यह सरकार बाबा साहेब द्वारा बनाए गए संविधान के खिलाफ काम कर रही है और उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। अमित शाह का बयान इस प्रवृत्ति का जीता-जागता उदाहरण है,” उन्होंने जोड़ा।</p>
<p><strong>कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन</strong></p>
<p>कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी अभियान की रूपरेखा भी स्पष्ट की गई। खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य मुख्यालयों में पत्रकार वार्ता करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान अमित शाह के बयान की कड़ी निंदा की जाएगी और उनके इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।</p>
<p>24 दिसंबर को आयोजित होने वाले &#8216;बाबा साहेब अंबेडकर सम्मान मार्च&#8217; का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता करेंगे। यह मार्च डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण से शुरू होगा और संबंधित जिला कलेक्टरों को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने के साथ समाप्त होगा। खेड़ा ने बताया, “इस मार्च का उद्देश्य न केवल अमित शाह के बयान का विरोध करना है, बल्कि संविधान की रक्षा और बाबा साहेब के सम्मान को बनाए रखने के लिए जनता को एकजुट करना है।”</p>
<p><strong>ऐतिहासिक संदर्भ और बेलगावी अधिवेशन की 100वीं वर्षगांठ</strong></p>
<p>पवन खेड़ा ने कांग्रेस के इतिहास और मूल्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खरगे तक कांग्रेस ने संघर्ष का मार्ग चुना है। हम अपने उस इतिहास को दोहराते हुए हर संघर्ष को जनता के साथ मिलकर लड़ेंगे।”</p>
<p>खेड़ा ने बेलगावी अधिवेशन की 100वीं वर्षगांठ पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 26 दिसंबर, 1924 को महात्मा गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे, जो स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। “यह कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक दिन है। इसी दिन कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा तय की थी। इस ऐतिहासिक अवसर को मनाने के लिए 26 दिसंबर को बेलगावी में विस्तारित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आयोजित की जाएगी। 27 दिसंबर को बेलगावी में ही एक विशाल रैली होगी, जिसमें पार्टी के शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म एक्शन प्लान पर चर्चा होगी।”</p>
<p><strong>कांग्रेस का संघर्ष और भविष्य की रणनीति</strong></p>
<p>खेड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस कभी भी सत्ताधारी ताकतों के आगे झुकी नहीं है। “हमने हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है। बाबा साहेब के सम्मान की लड़ाई भी हमारे इसी संघर्ष का हिस्सा है। हम हर जिले में जनता के साथ मिलकर भाजपा के संविधान-विरोधी रवैये को उजागर करेंगे,” उन्होंने कहा।</p>
<p>कांग्रेस के इस अभियान को 2024 के चुनावों से पहले पार्टी की जनता के साथ संपर्क बढ़ाने और विपक्षी दलों को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। खेड़ा ने यह भी संकेत दिया कि आगामी बेलगावी बैठक में संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।</p>
<p>अंततः, कांग्रेस का यह कदम बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान और उनके विचारों की रक्षा के लिए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इससे जहां पार्टी को जनसमर्थन जुटाने में मदद मिल सकती है, वहीं भाजपा को जवाब देने के लिए एक नया राजनीतिक मोर्चा खोलना होगा।</p>
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		<item>
		<title>धर्मेंद्र प्रधान का अंबेडकर पर बयान: सियासत और इतिहास का दुष्प्रचार या असली चिंता?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Dec 2024 14:24:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[#Narendramodi]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmendra Pradhan]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। भारत की राजनीति में दलितों के नेता और संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/dharmendra-pradhans-statement-on-ambedkar-politics-and-history-propaganda-or-real-concern/">धर्मेंद्र प्रधान का अंबेडकर पर बयान: सियासत और इतिहास का दुष्प्रचार या असली चिंता?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। भारत की राजनीति में दलितों के नेता और संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का नाम हमेशा से गरमागरम चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अंबेडकर के प्रति कांग्रेस के रवैये को लेकर तीखा हमला किया और उन्हें &#8216;मगरमच्छ के आंसू&#8217; बहाने वाला बताया। प्रधान ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी, जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक का नेतृत्व शामिल है, ने हमेशा अंबेडकर के प्रति नफरत और अवमानना दिखाई है।</p>
<p>प्रधान का यह बयान उस समय आया जब उन्होंने 2012 में प्रकाशित एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की किताब में एक कार्टून का जिक्र किया। इस कार्टून में नेहरू को अंबेडकर को कोड़े मारते हुए दिखाया गया है। धर्मेंद्र प्रधान ने इस कार्टून को ‘शर्मनाक’ करार दिया और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए दावा किया कि यह गांधी परिवार की मंजूरी से प्रकाशित हुआ था।</p>
<p><strong>कार्टून विवाद: क्या है मामला?</strong></p>
<p>2012 में यूपीए-2 सरकार के दौरान एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताब में प्रकाशित एक कार्टून पर भारी विवाद हुआ था। इस कार्टून में अंबेडकर को एक घोंघे पर बैठा दिखाया गया था और नेहरू उनके पीछे कोड़ा चलाते हुए दिखाई दिए। इस कार्टून का उद्देश्य संविधान निर्माण की धीमी प्रक्रिया को दर्शाना था, लेकिन इसके प्रतीकात्मक अर्थ को कई लोगों ने अपमानजनक माना।</p>
<p>विवाद बढ़ने के बाद, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने माफी मांगी और इस कार्टून को किताब से हटाने का आदेश दिया। प्रधान ने इसी घटना का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और दावा किया कि पार्टी ने कभी अंबेडकर को उचित सम्मान नहीं दिया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">अचानक <a href="https://twitter.com/INCIndia?ref_src=twsrc%5Etfw">@INCIndia</a> के अंदर बाबासाहेब अंबेडकर जी के प्रति सम्मान उमड़ पड़ा है। बाबासाहेब को लेकर कांग्रेस के ये घड़ियाली आंसू सिर्फ दिखावा हैं, इनकी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। </p>
<p>कांग्रेस पार्टी की बाबासाहेब को लेकर नफरत और घृणा जगजाहिर है 👇</p>
<p>&#8211; कांग्रेस के नेतृत्व वाली… <a href="https://t.co/SzrjAlTVLf">pic.twitter.com/SzrjAlTVLf</a></p>
<p>&mdash; Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) <a href="https://twitter.com/dpradhanbjp/status/1869612980914233375?ref_src=twsrc%5Etfw">December 19, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>धर्मेंद्र प्रधान का बयान: सियासी नीयत या इतिहास की व्याख्या?</strong></p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा, &#8220;अचानक से कांग्रेस में बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति सम्मान उमड़ पड़ा है। ये मगरमच्छ के आंसू हैं। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अंबेडकर का अपमान किया है। जिन्होंने खुद को &#8216;भारत रत्न&#8217; दिया, उन्होंने अंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया।&#8221;</p>
<p>प्रधान ने दावा किया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंबेडकर को उचित सम्मान दिया, तो कांग्रेस इसे सहन नहीं कर पाई। उन्होंने कांग्रेस पर अंबेडकर के नाम का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी मजबूरी में उनका नाम लेती है।</p>
<p><strong>क्या धर्मेंद्र प्रधान का बयान तर्कसंगत है?</strong></p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान में दो मुख्य पहलू उभरकर आते हैं:</p>
<p style="padding-left: 40px;">1. कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल: प्रधान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अंबेडकर के प्रति कभी सम्मान नहीं दिखाया। लेकिन यह तथ्य है कि अंबेडकर को भारतीय संविधान सभा में शामिल करने और कानून मंत्री बनाने में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण थी। पंडित नेहरू और सरदार पटेल ने उन्हें संविधान सभा का चेयरमैन बनाया। क्या यह ‘नफरत’ थी?</p>
<p style="padding-left: 40px;">2. राजनीतिक अवसरवाद: प्रधान के बयान में यह साफ झलकता है कि भाजपा अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल कांग्रेस को घेरने के लिए कर रही है। भाजपा ने 2014 के बाद अंबेडकर की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन क्या यह सही है कि पहले उनकी पार्टी या विचारधारा ने अंबेडकर के प्रति उचित सम्मान दिखाया था? इतिहास में अंबेडकर के संघ परिवार के साथ तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं।</p>
<p><strong>कार्टून का राजनीतिकरण: शिक्षा का गिरता स्तर?</strong></p>
<p>प्रधान ने जिस कार्टून का उल्लेख किया, वह एनसीईआरटी की किताब में शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए शामिल किया गया था। कार्टून बनाने का उद्देश्य संविधान निर्माण की प्रक्रिया और उसकी चुनौतियों को दर्शाना था। हालांकि, प्रतीकात्मकता को लेकर विवाद और राजनीति ने इस कार्टून का अर्थ बदल दिया।</p>
<p>लेकिन यहां यह सवाल उठता है कि क्या धर्मेंद्र प्रधान, जो देश के शिक्षा मंत्री हैं, कार्टून को लेकर केवल कांग्रेस पर हमला करने तक सीमित रह गए हैं? क्या उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि एनसीईआरटी और शिक्षा में सुधार के लिए उनकी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?</p>
<p>प्रधान का यह बयान शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बना देता है।</p>
<p><strong>कांग्रेस का जवाब: ‘झूठी बातें’</strong></p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने इसे ‘झूठ का पुलिंदा’ बताया और कहा कि भाजपा अंबेडकर के नाम पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, &#8220;अंबेडकर को भारतीय संविधान सभा में सम्मान और नेतृत्व कांग्रेस ने दिया। भाजपा के पास आज उनके नाम का कोई ठोस उदाहरण नहीं है। यह बयान केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है।&#8221;</p>
<p><strong>क्या अंबेडकर का नाम केवल सियासी हथियार है?</strong></p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान और कांग्रेस के बीच इस विवाद ने एक बड़े मुद्दे को उजागर किया है—क्या भारतीय राजनीति में अंबेडकर का नाम केवल सियासी हथियार बनकर रह गया है?</p>
<p>भाजपा और कांग्रेस दोनों ने समय-समय पर अंबेडकर की विरासत को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है। कांग्रेस ने संविधान निर्माण में उनकी भूमिका को अपने एजेंडे में रखा, जबकि भाजपा ने दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए अंबेडकर का नाम बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।</p>
<p>लेकिन दोनों ही पार्टियां शायद यह भूल रही हैं कि अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा और क्रांति का प्रतीक हैं। उनका योगदान भारतीय समाज को जाति व्यवस्था और असमानता से बाहर निकालने के लिए था।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>धर्मेंद्र प्रधान का बयान और कार्टून विवाद दिखाता है कि किस तरह राजनीति शिक्षा के क्षेत्र को भी विवादों में घसीट लेती है। बतौर शिक्षा मंत्री प्रधान से उम्मीद थी कि वे शिक्षा की गुणवत्ता, एनसीईआरटी की सामग्री और पाठ्यक्रम सुधार पर ध्यान दें। लेकिन उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए एक पुरानी घटना का सहारा लिया।</p>
<p>यह समय है कि राजनीतिक दल अंबेडकर जैसे महान नेता के नाम का सम्मान करें और उन्हें केवल सियासी हथियार बनाने से बचें। शिक्षा मंत्री को चाहिए कि वे शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करें, न कि शिक्षा को राजनीति का माध्यम बनाएं। भारतीय समाज को अंबेडकर की विचारधारा और उनकी क्रांति की जरूरत है, न कि उनके नाम पर सियासी जंग की।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/dharmendra-pradhans-statement-on-ambedkar-politics-and-history-propaganda-or-real-concern/">धर्मेंद्र प्रधान का अंबेडकर पर बयान: सियासत और इतिहास का दुष्प्रचार या असली चिंता?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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