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	<title>लखनऊ Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>जीवन रक्षा, सबकी सुरक्षा के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 14:57:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#Yogi Government #No Helmet]]></category>
		<category><![CDATA[No Fuel #Security Resolution #Transport Department Uttar Pradesh #Campaign from 1 to 30 September #District Road Safety Committee]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 02 सितम्बर 2025। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए &#8220;नो हेलमेट, नो फ्यूल&#8221;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, 02 सितम्बर 2025। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए &#8220;नो हेलमेट, नो फ्यूल&#8221; अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता से अपील की है कि &#8220;पहले हेलमेट, बाद में ईंधन&#8221; को जीवन का हिस्सा बनाएं। यह अभियान 1 से 30 सितम्बर तक पूरे प्रदेश में चलेगा और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) के समन्वय से इसे लागू किया जाएगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को दंडित करना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना है। &#8220;ईंधन तभी, जब हेलमेट सिर पर हो&#8221;— यह संदेश हर नागरिक तक पहुँचाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान की सफलता के लिए सहयोग मांगा और इसे जनहितैषी पहल बताया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-5357 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/images-58.jpeg" alt="" width="714" height="430" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/images-58.jpeg 714w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/09/images-58-300x181.jpeg 300w" sizes="(max-width: 714px) 100vw, 714px" /></p>
<p>परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश एवं जिलाधिकारी गोंडा के निर्देश पर जिले में विशेष अभियान की शुरुआत कर दी गई है। आदेश जारी किया गया है कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालक या उसका सहयात्री यदि पेट्रोल पम्प पहुंचेगा, तो उसे किसी भी स्थिति में ईंधन नहीं मिलेगा जिले के सभी पेट्रोल पम्पों पर बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स लगाई जाएंगी, ताकि लोग पहले से ही जागरूक हों। परिवहन विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम समय-समय पर पेट्रोल पम्पों का निरीक्षण करेगी। नियम का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पम्पों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी गोंडा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पेट्रोल पम्प स्वामी इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।</p>
<p>प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि चिंता का विषय रही है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हेलमेट न केवल चालक को गंभीर चोट से बचाता है, बल्कि जीवन रक्षा में भी सबसे अहम भूमिका निभाता है। दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में अधिकांश मौतें सिर में चोट लगने से होती हैं। हेलमेट पहनने से 70% तक मृत्यु दर कम की जा सकती है।यातायात नियमों का पालन करने से न सिर्फ व्यक्ति की, बल्कि पूरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।</p>
<p>इस अभियान में पेट्रोल डीलर एसोसिएशन, परिवहन, पुलिस, राजस्व/जिला प्रशासन, खाद्य एवं रसद विभाग और सूचना विभाग मिलकर काम करेंगे। पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने अभियान को सफल बनाने का आश्वासन दिया है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाएगा। खाद्य एवं रसद विभाग पेट्रोल पम्प स्तर पर आवश्यक समन्वय व निगरानी करेगा।</p>
<p>जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं की सुरक्षा के लिए हमेशा हेलमेट पहनें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। यह केवल एक नियम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जीवन रक्षा का संकल्प है।</p>
<p>&#8220;आपकी सुरक्षा, आपका अधिकार है — हेलमेट पहनिए, जीवन बचाइए।&#8221;</p>
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		<title>पुलिस महानिदेशक ने किया पुस्तक ‘सड़क सुरक्षा विमर्श’ का विमोचन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Apr 2025 03:04:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#uppolice]]></category>
		<category><![CDATA[Director General of Police released the book 'Road Safety Discussion']]></category>
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					<description><![CDATA[<p>यातायात और सड़क सुरक्षा पर आधारित पुस्तक को पुलिस प्रशिक्षण में शामिल किए जाने की संस्तुति लखनऊ, 26</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong><em>यातायात और सड़क सुरक्षा पर आधारित पुस्तक को पुलिस प्रशिक्षण में शामिल किए जाने की संस्तुति</em></strong></p>
<p><strong>लखनऊ, 26 अप्रैल। </strong>उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में आज पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार द्वारा अपर पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस महानिदेशक के स्टाफ ऑफिसरपूर्णेन्दु सिंह द्वारा लिखित पुस्तक <em>‘सड़क सुरक्षा विमर्श’</em> का विधिवत विमोचन किया गया। यह पुस्तक भारत में सड़क सुरक्षा और यातायात की वर्तमान स्थिति पर आधारित है, जिसमें दुर्घटनाओं के कारणों, रोकथाम, और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक, प्रशिक्षण निदेशालय, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) तथा अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात) सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि <em>‘सड़क सुरसा विमर्श’</em> न केवल एक उत्कृष्ट शोधपरक प्रयास है, बल्कि यह पुस्तक पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्धारकों और आमजन के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">पुस्तक विमोचन 📘</p>
<p>पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, श्री प्रशान्त कुमार द्वारा अपर पुलिस अधीक्षक श्री पूर्णेन्दु सिंह की पुस्तक &quot;सड़क सुरक्षा विमर्श&quot; का विमोचन किया गया। पुस्तक में भारत की यातायात एवं सड़क सुरक्षा परिदृश्य पर बहुत व्यापक रूप से वर्णन किया गया है। इसमें न केवल सड़क… <a href="https://t.co/yd2znW3Kor">pic.twitter.com/yd2znW3Kor</a></p>
<p>&mdash; UP POLICE (@Uppolice) <a href="https://twitter.com/Uppolice/status/1915757747733246018?ref_src=twsrc%5Etfw">April 25, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>पूर्णेन्दु सिंह द्वारा लिखित इस पुस्तक में सड़क दुर्घटनाओं को केवल एक आकस्मिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी के रूप में देखा गया है। लेखक ने दुर्घटनाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला है। उनका मानना है कि दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवारों पर जो प्रभाव पड़ता है, वह लंबे समय तक समाज की उत्पादकता और मानसिक संरचना को प्रभावित करता है।</p>
<p>पुस्तक में उल्लेख है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। लेखक ने इस दिशा में कार्य कर रहे विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों, ऑटोमोबाइल कंपनियों की परियोजनाओं और मोटर प्रशिक्षण संस्थानों के कार्यों को पुस्तक में समाहित किया है। इन सभी प्रयासों का विश्लेषण कर यह दर्शाया गया है कि सड़क सुरक्षा सामूहिक प्रयास से ही संभव हो सकती है।</p>
<p>लेखक ने संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया है कि सख्त प्रवर्तन, नागरिक सहभागिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से ही सुधार संभव है।</p>
<p>पुस्तक में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा हेतु किए जा रहे प्रयासों का भी विशेष उल्लेख किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर चल रहे सड़क सुरक्षा सप्ताह, जन-जागरूकता अभियानों, और सड़क इंजीनियरिंग में सुधार जैसे विभिन्न पहलुओं को समाहित कर यह दिखाया गया है कि प्रदेश सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और ठोस कदम उठा रही है।</p>
<p>आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और ‘गोल्डन ऑवर’ की अवधारणा पर भी इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है। दुर्घटना के बाद की प्राथमिक चिकित्सा सहायता, एम्बुलेंस सेवाएं, ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता जैसे विषयों को विस्तार से समझाते हुए लेखक ने यह बताया है कि केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि व्यवस्थागत सुधार भी आवश्यक है।</p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने पुस्तक के विमोचन के दौरान यह अपेक्षा व्यक्त की कि <em>‘सड़क सुरक्षा विमर्श’</em> को पुलिस प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए ताकि अधिक से अधिक पुलिस कर्मी इससे लाभान्वित हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा अब महज कानून व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि यह समाज के नैतिक दायित्व और प्रशासनिक सजगता का परीक्षण भी है।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में<strong> पूर्णेन्दु सिंह</strong> ने कहा कि उन्होंने इस पुस्तक को वर्षों के फील्ड अनुभव, अनुसंधान और संवेदना के साथ तैयार किया है। उनका उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज को एक सुरक्षित परिवेश की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने आशा जताई कि यह पुस्तक नीति निर्धारकों, शिक्षकों, छात्रों और आम नागरिकों के लिए एक जागरूकता का माध्यम बनेगी।</p>
<p>इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी पुस्तक की सराहना की और इसे उत्तर प्रदेश पुलिस के ज्ञान-कोष में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। विमोचन समारोह के माध्यम से यह संदेश गया कि सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि यह जनजागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का साझा क्षेत्र है जिसमें <em>‘सड़क सुरक्षा विमर्श’</em> एक सार्थक प्रयास है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/director-general-of-police-released-the-book-road-safety-discussion/">पुलिस महानिदेशक ने किया पुस्तक ‘सड़क सुरक्षा विमर्श’ का विमोचन</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>हेमवती नंदन बहुगुणा: संघर्ष और संकल्प के प्रतीक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Mar 2025 04:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Bjpup]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Minister Yogi Adityanath paid tribute]]></category>
		<category><![CDATA[Hemvati Nandan Bahuguna: A symbol of struggle and determination]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>योजना भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी ने किया नमन, कहा- लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता के</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/hemvati-nandan-bahuguna-a-symbol-of-struggle-and-determination-chief-minister-yogi-adityanath-paid-tribute/">हेमवती नंदन बहुगुणा: संघर्ष और संकल्प के प्रतीक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>योजना भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी ने किया नमन, कहा- लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता के प्रति उनकी निष्ठा सदैव प्रेरणादायक</strong></p>
<p><em><strong>लखनऊ, 17 मार्च:</strong></em> उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और वरिष्ठ राजनेता हेमवती नंदन बहुगुणा की पुण्यतिथि पर सोमवार को राजधानी लखनऊ के योजना भवन में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहुगुणा जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।</p>
<p>इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का जीवन संघर्ष, संकल्प और लोकसेवा का अनुपम उदाहरण है। एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया, तो एक राजनेता के रूप में उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने हमेशा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुगुणा जी का जीवन यह संदेश देता है कि कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनके समाधान के लिए संकल्पित होकर आगे बढ़ना ही सच्ची सेवा है।</p>
<h3><strong>संघर्षमय जीवन और राजनीतिक यात्रा: जनता के नेता के रूप में पहचान</strong></h3>
<p>हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल 1919 को उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा से ही वे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए थे। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र आंदोलनों से हुई और धीरे-धीरे वे एक लोकप्रिय जननेता बन गए। मुख्यमंत्री योगी ने सभा में उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा कि बहुगुणा जी का सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदारी, मेहनत और जनता के प्रति समर्पण के बल पर समाज में परिवर्तन ला सकता है।</p>
<p>1973 से 1975 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिनका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है। उनकी सरकार के दौरान शिक्षा सुधार, कृषि विकास, सिंचाई योजनाओं और औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बहुगुणा जी की योजनाएं और संकल्प आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं। उनके प्रशासनिक फैसले और दूरदर्शी नीतियां प्रदेश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।</p>
<p>बहुगुणा जी का मानना था कि राजनीति का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ। उन्होंने राजनीति में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। उनके द्वारा किए गए सुधारों की वजह से प्रदेश में सुशासन की एक मजबूत नींव रखी गई। वे हमेशा कहते थे कि शासन में जनता की सहभागिता और प्रशासन में पारदर्शिता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।</p>
<h3><strong>प्रयागराज: बहुगुणा जी की कर्मस्थली और संघर्षस्थली</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभा में कहा कि प्रयागराज न केवल बहुगुणा जी की कर्मभूमि थी, बल्कि यह उनके संघर्षों का भी गवाह रहा है। उन्होंने प्रयागराज में रहते हुए स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक आंदोलनों को मजबूती दी। यही वह स्थान था जहां से उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा को गति दी और आगे चलकर देश के बड़े नेताओं में अपनी पहचान बनाई।</p>
<p>प्रयागराज में उन्होंने शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जिनका लाभ लाखों छात्रों को मिला। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बहुगुणा जी की इस सोच को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रयागराज में उनकी स्मृति में एक बड़ा शोध संस्थान स्थापित करने पर विचार कर रही है।</p>
<p>17 मार्च 1989 को जब उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, तब भी उनके विचार और आदर्श समाज में जीवंत थे। आज भी उनकी स्मृतियां हमें समाज सेवा और जनकल्याण के लिए प्रेरित करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बहुगुणा जी के विचारों के अनुरूप काम कर रही है और उनके दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<h3><strong>लोकतंत्र और सुशासन के प्रति उनकी निष्ठा: प्रेरणादायक व्यक्तित्व</strong></h3>
<p>हेमवती नंदन बहुगुणा का पूरा जीवन लोकतंत्र और सुशासन को समर्पित रहा। वे उन नेताओं में से थे जो सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बहुगुणा जी ने प्रशासनिक पारदर्शिता को महत्व देते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे। उनके कार्यकाल में सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया गया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी की कार्यशैली हमें यह सिखाती है कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और उद्योग जैसे क्षेत्रों में जो योगदान दिया, उसका लाभ आज भी जनता को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी कहा कि बहुगुणा जी की नीतियां और उनके द्वारा लिए गए निर्णय वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं और हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।</p>
<h3><strong>श्रद्धांजलि सभा में मौजूद रहे गणमान्य लोग</strong></h3>
<p>इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, लालजी प्रसाद निर्मल, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने बहुगुणा जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा का जीवन हमें यह सिखाता है कि निष्ठा, ईमानदारी और समाज सेवा से ही एक सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बहुगुणा जी की स्मृतियों को संजोए रखने और उनके विचारों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।</p>
<p>इस श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से एक बार फिर हेमवती नंदन बहुगुणा के विचारों, सिद्धांतों और कार्यों को जीवंत किया गया। सभा में मौजूद लोगों ने उनके योगदान को याद किया और संकल्प लिया कि उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देंगे।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/hemvati-nandan-bahuguna-a-symbol-of-struggle-and-determination-chief-minister-yogi-adityanath-paid-tribute/">हेमवती नंदन बहुगुणा: संघर्ष और संकल्प के प्रतीक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 31 आईएएस अधिकारियों का तबादला</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/uttar-pradesh-government-made-a-major-administrative-reshuffle-31-ias-officers-transferred/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jan 2025 02:56:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 17 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात बड़े प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा की। इसमें तीन मंडलायुक्तों</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/uttar-pradesh-government-made-a-major-administrative-reshuffle-31-ias-officers-transferred/">उत्तर प्रदेश सरकार ने किया बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 31 आईएएस अधिकारियों का तबादला</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 17 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात बड़े प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा की। इसमें तीन मंडलायुक्तों और 14 जिलों के जिलाधिकारियों समेत कुल 31 आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया। मेरठ, आगरा और अलीगढ़ मंडलों में नए मंडलायुक्त नियुक्त किए गए हैं, जबकि मथुरा, बुलंदशहर, लखनऊ, अलीगढ़, प्रतापगढ़, बिजनौर, कानपुर नगर, बागपत, बांदा, गाजियाबाद, मेरठ, फर्रुखाबाद, बाराबंकी और सुल्तानपुर जिलों के जिलाधिकारी बदल दिए गए हैं।</p>
<p>मेरठ मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. को सचिव नियोजन एवं डीजी अर्थ एवं संख्या के पद पर तैनात किया गया है। आगरा मंडलायुक्त रितु महेश्वरी को चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है। सहारनपुर मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद को मेरठ मंडल का नया प्रभारी बनाया गया है। अलीगढ़ की मंडलायुक्त चैत्रा वी. को युवा कल्याण और प्रांतीय रक्षा दल का महानिदेशक बनाया गया है। मथुरा के जिलाधिकारी शैलेश कुमार सिंह को आगरा का मंडलायुक्त बनाया गया है, जबकि बुलंदशहर के जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह को मथुरा का डीएम नियुक्त किया गया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4733" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082108_Word.jpg" alt="" width="1080" height="1440" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082108_Word.jpg 1080w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082108_Word-225x300.jpg 225w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082108_Word-768x1024.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082108_Word-1024x1365.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-4732" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word.jpg" alt="" width="1076" height="1507" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word.jpg 1076w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word-214x300.jpg 214w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word-731x1024.jpg 731w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word-768x1076.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/Screenshot_20250117_082116_Word-1024x1434.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1076px) 100vw, 1076px" /></p>
<p>यीडा (यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की एसीईओ श्रुति को बुलंदशहर का नया डीएम बनाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की सीईओ संगीता सिंह को अलीगढ़ का मंडलायुक्त बनाया गया है। प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी संजीव रंजन को अलीगढ़ का नया डीएम नियुक्त किया गया है। विशेष सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिव सहाय अवस्थी को प्रतापगढ़ का जिलाधिकारी बनाया गया है। बिजनौर के डीएम अंकित कुमार अग्रवाल को निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण के पद पर भेजा गया है। बागपत के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को कानपुर का डीएम बनाया गया है। यूपीसीडा की एसीईओ अस्मित लाल को बागपत का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।</p>
<p>बांदा के जिलाधिकारी नगेंद्र प्रताप को यीडा का एसीईओ बनाया गया है। निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण जे. रीभा को बांदा का नया डीएम नियुक्त किया गया है। गाजियाबाद के जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह को कृषि विभाग में सचिव के पद पर तैनात किया गया है। मेरठ के डीएम दीपक मीणा को गाजियाबाद भेजा गया है। फर्रुखाबाद के डीएम डॉ. विजय कुमार सिंह को मेरठ का डीएम बनाया गया है। ग्रेटर नोएडा के एसीईओ आशुतोष कुमार द्विवेदी को फर्रुखाबाद का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।</p>
<p>बाराबंकी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को मुख्यमंत्री का विशेष सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी जगह मुख्यमंत्री के सचिव शशांक त्रिपाठी को बाराबंकी का जिलाधिकारी बनाया गया है। सुल्तानपुर की जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना को विशेष सचिव राज्य कर के पद पर स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव कुमार हर्ष को सुल्तानपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव ईशान प्रताप सिंह को नागरिक उड्डयन विभाग में विशेष सचिव और निदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।</p>
<p>सचिव नियोजन नरेंद्र प्रसाद पांडेय को राजस्व परिषद में सदस्य न्यायिक के पद पर तैनात किया गया है। सचिव खेलकूद एवं युवा कल्याण सुहास एलवाई से युवा कल्याण और पीआरडी का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। चिकित्सा विभाग में तैनात अर्चना वर्मा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सीईओ नियुक्त किया गया है। मेरठ की अपर आयुक्त जसजीत कौर को बिजनौर का नया जिलाधिकारी बनाया गया है।</p>
<p>इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के पीछे सरकार की मंशा प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता और गति लाने की बताई जा रही है। नए जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों की नियुक्ति के बाद संबंधित जिलों और मंडलों में विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने की उम्मीद की जा रही है।</p>
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		<title>217 फुल एनकाउंटर और 2799 हाफ एनकाउंटर से अपराधी या तो जेल में नहीं तो प्रदेश से बाहर वरना सीधा यमराज से मुलाकात</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/due-to-217-full-encounters-and-2799-half-encounters-the-criminals-are-either-in-jail-or-out-of-the-state-or-else-they-directly-meet-yamraj/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 31 Dec 2024 17:29:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[#pmoindia]]></category>
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		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[the criminals are either in jail or out of the state or else they directly meet Yamraj]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 31 दिसंबर। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/due-to-217-full-encounters-and-2799-half-encounters-the-criminals-are-either-in-jail-or-out-of-the-state-or-else-they-directly-meet-yamraj/">217 फुल एनकाउंटर और 2799 हाफ एनकाउंटर से अपराधी या तो जेल में नहीं तो प्रदेश से बाहर वरना सीधा यमराज से मुलाकात</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 31 दिसंबर। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जो अभियान चलाया है, उसने राज्य में कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। 20 मार्च, 2017 से 31 दिसंबर, 2024 तक के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि योगी आदित्यनाथ सरकार के तहत पुलिस की सक्रियता और प्रतिबद्धता ने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।</p>
<p><strong>अपराधियों के सफाए का रिकॉर्ड</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने 2017 से लेकर अब तक कुल 217 अपराधियों को मुठभेड़ों में मार गिराया है। यह आँकड़ा हर 11 दिन में एक अपराधी को समाप्त करने की दर दर्शाता है। इन मुठभेड़ों में 7,799 अपराधी घायल हुए हैं। पुलिस की कार्रवाई सिर्फ मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 19,955 वांछित अपराधियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया। सख्त गैंगस्टर अधिनियम के तहत 78,977 अपराधियों को जेल की हवा खानी पड़ी, जबकि 924 के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई।</p>
<p>पुलिस ने अपराधियों की संपत्तियों पर भी करारा प्रहार किया। गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुल 14,090.5 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया। इनमें से अधिकतर संपत्तियां माफियाओं और संगठित अपराध से जुड़े लोगों की थीं।</p>
<p><strong>इनामी अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में कई बड़े इनामी अपराधियों का खात्मा किया है। इनमें पाँच-पाँच लाख रुपये के इनामी दो अपराधी, ढाई लाख रुपये के चार, दो लाख रुपये के दो, डेढ़ लाख रुपये के छह, और एक लाख रुपये के 27 अपराधी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 75 हजार रुपये के इनामी कई अन्य अपराधियों को भी मार गिराया गया।</p>
<p><strong>पुलिसकर्मियों की शहादत और घायल होने के मामले</strong></p>
<p>राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने बड़ी कीमत चुकाई है। मुठभेड़ों और अन्य अभियानों के दौरान 17 पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। वहीं, 1,644 अधिकारी घायल हुए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए हर संभव बलिदान दिया।</p>
<p><strong>विशिष्ट मामले और पुलिस की सक्रियता</strong></p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पुलिस का अभियान निरंतर जारी है। हाल ही में, मोहम्मद जाहिद नामक अपराधी, जो आरपीएफ कांस्टेबल जावेद खान और प्रमोद कुमार की हत्या के मामले में वांछित था, को दिलदार नगर में एसटीएफ और गाजीपुर पुलिस के संयुक्त अभियान में मार गिराया गया। जाहिद ट्रेन में शराब तस्करी से जुड़े एक मामले में भी वांछित था।</p>
<p>इसके अलावा, पंजाब पुलिस और पीलीभीत पुलिस ने संयुक्त अभियान में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के तीन आतंकवादियों को मार गिराया। इन आतंकवादियों की पहचान प्रताप सिंह उर्फ जसप्रीत सिंह, वीरेंद्र उर्फ रवि और गुरविंदर सिंह के रूप में हुई। ये आतंकवादी 18 दिसंबर, 2024 को गुरदासपुर में पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमले में शामिल थे। पुलिस ने इनके पास से दो एकेएम-47 राइफल, दो ग्लॉक पिस्तौल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और एक अपंजीकृत मोटरसाइकिल बरामद की।</p>
<p><strong>संगठित अपराध और साइबर अपराध पर प्रहार</strong></p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि 2024 में एटीएस ने 124 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया, जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन और आईएसआईएस से जुड़े लोग शामिल थे। इनमें पाकिस्तान स्थित आईएसआई के तीन सदस्य भी थे।</p>
<p>साइबर अपराधों पर भी एसटीएफ ने शिकंजा कसा। 2024 में 769 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 74 साइबर अपराधी शामिल थे। इन अपराधियों पर डिजिटल फ्रॉड, हैकिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों में शामिल होने का आरोप था।</p>
<p><strong>प्रमुख अभियान और गिरफ्तारियां</strong></p>
<p>पुलिस के विशेष अभियानों में चिनहट, लखनऊ के बैंक डकैती से जुड़े एक आरोपी सोविंद कुमार बिंद और गाजीपुर जिले में सनी दयाल को मुठभेड़ों के दौरान मार गिराया गया। इन अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया कि पुलिस संगठित अपराध के हर स्तर पर काम कर रही है।</p>
<p><strong>पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रभाव</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति का सकारात्मक प्रभाव पूरे राज्य में देखा जा सकता है। अपराध दर में गिरावट, संगठित अपराधियों पर कार्रवाई, और माफियाओं की कमर तोड़ने वाली रणनीतियों ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था के मामले में देश में एक उदाहरण बन सके।</p>
<p>डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा, &#8220;यह अभियान केवल स्पेशल टास्क फोर्स तक सीमित नहीं है। जिलों और कमिश्नरेट पुलिस भी समान रूप से सक्रिय हैं। हर अपराधी को न्याय के कटघरे में लाने का हमारा प्रयास जारी रहेगा।&#8221;</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले सात वर्षों में अपने साहसिक और योजनाबद्ध अभियानों के जरिए अपराध और अपराधियों के खिलाफ एक नई मिसाल कायम की है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य को अपराधमुक्त बनाने के इस मिशन में पुलिस ने ना केवल अपराधियों का सफाया किया बल्कि आम जनता का भरोसा भी जीता। प्रशांत कुमार जैसे नेतृत्वकर्ताओं की अगुवाई में उत्तर प्रदेश पुलिस राज्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।</p>
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		<title>कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में तुष्टीकरण की होड़: डॉ. दिनेश शर्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:56:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Competition of appeasement between Congress and Samajwadi Party: Dr. Dinesh Sharma]]></category>
		<category><![CDATA[Dr dinesh sharma]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने समाजवादी पार्टी (सपा)</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/competition-of-appeasement-between-congress-and-samajwadi-party-dr-dinesh-sharma/">कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में तुष्टीकरण की होड़: डॉ. दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि ये दोनों दल तुष्टीकरण की राजनीति में एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी राजनीति बचाने के लिए समाज को अशांत करने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. शर्मा ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की इस होड़ में सपा और कांग्रेस अल्पसंख्यकों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि भाजपा ने सबको समान अधिकार देकर सभी वर्गों का विश्वास जीता है।</p>
<p>डॉ. शर्मा ने यह बयान उस समय दिया जब उनसे सपा के इस आरोप पर सवाल किया गया कि पुलिस भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा हमेशा नाटक करती है। संभल जिले की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां धारा 144 लागू है, जिसके तहत किसी भी राजनीतिक दल को जाने की अनुमति नहीं है। फिर भी सपा और कांग्रेस वहां जाने का नाटक कर रही हैं ताकि टेलीविजन और अखबारों में उनकी चर्चा हो। उन्होंने कहा, &#8220;संभल में कोई नई घटना नहीं हुई है, और वहां स्थिति शांत है। लेकिन ये दल समाज को अशांत करने का प्रयास कर रहे हैं।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि संभल तो अब संभल चुका है, लेकिन हाल के उपचुनावों में करारी हार के बाद विपक्षी दल खुद संभल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने सपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे उपचुनावों में अपनी हार को पचा नहीं पा रहे हैं और अब झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, &#8220;सपा और कांग्रेस के बीच मतभेद अब छिपे नहीं हैं। सपा अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक को कांग्रेस में जाने से रोकने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस सपा के इसी वोट बैंक पर सेंध लगाने की कोशिश में है। यह तुष्टीकरण की राजनीति का नया रूप है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी उत्तर प्रदेश में एक क्षेत्रीय दल से भी छोटी बनकर रह गई है। उन्होंने कहा, &#8220;कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं बचा है। वह केवल सपा के वोट बैंक को तोड़ने का प्रयास कर रही है।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने भाजपा की नीति की सराहना करते हुए कहा कि भाजपा ने सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं, और यही कारण है कि अल्पसंख्यक अब भाजपा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामपुर और कुंदरकी जैसे क्षेत्रों में, जहां अल्पसंख्यक मतदाता बड़ी संख्या में हैं, लोगों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा, &#8220;यह साफ है कि सपा और कांग्रेस को अल्पसंख्यकों के हितों से कोई मतलब नहीं है। वे सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए झूठे भ्रम फैलाते हैं और दंगे कराते हैं।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने संभल की स्थिति पर सपा और कांग्रेस के बयानों को सरासर झूठा करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और सरकार ने हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया है, जो इस मामले की जांच कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस अपने झूठे आरोपों से माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव भाजपा पर आरोप लगाने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, &#8220;अखिलेश यादव भाजपा से हार गए हैं। यहां तक कि वे कुंदरकी जैसी सीट पर भी हार गए, जहां अल्पसंख्यक मतदाता 65 प्रतिशत हैं। वे कांग्रेस या बसपा पर आरोप नहीं लगाएंगे, क्योंकि इन दलों पर आरोप लगाने से कोई फायदा नहीं है। लेकिन भाजपा पर आरोप लगाकर वे कम से कम चर्चा में बने रह सकते हैं।&#8221;</p>
<p>बांग्लादेश की स्थिति पर बात करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि बांग्लादेश अराजकता के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, &#8220;बांग्लादेश कट्टरपंथियों, तालिबानियों और पाकिस्तानियों के चंगुल में फंस चुका है। वहां इस्कॉन के शांतिप्रिय लोगों और अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों पर एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने कहा, &#8220;ये दल अफगानिस्तान, फिलिस्तीन, बेरूत और लेबनान की बात तो कर सकते हैं, लेकिन बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति पर कुछ नहीं बोलते। इसका कारण यह है कि वहां के अल्पसंख्यक हिंदू उनका वोट बैंक नहीं हैं।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने सपा, बसपा, कांग्रेस और वामपंथी दलों पर आरोप लगाया कि वे अस्तित्व बचाने के लिए झूठे आरोप लगाकर चर्चा में बने रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा, &#8220;ये दल अब मुद्दों की राजनीति नहीं कर रहे हैं। उनकी कोशिश केवल यह है कि किसी भी तरह से मीडिया में उनकी चर्चा होती रहे।&#8221;</p>
<p>डॉ. शर्मा ने अंत में कहा कि जनता अब इन दलों की सच्चाई समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीति सबको साथ लेकर चलने की है, और यही कारण है कि लोग भाजपा में विश्वास जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल अब हाशिए पर जा चुके हैं और जनता ने इन्हें नकार दिया है।</p>
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		<title>संभल हिंसा पर सियासी बयानबाज़ी तेज़: अखिलेश यादव ने लगाया भाजपा पर गंभीर आरोप</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/political-rhetoric-intensifies-on-sambhal-violence-akhilesh-yadav-makes-serious-allegations-against-bjp/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 05:44:51 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Sapa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुए विवाद ने राज्य में राजनीति को</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/political-rhetoric-intensifies-on-sambhal-violence-akhilesh-yadav-makes-serious-allegations-against-bjp/">संभल हिंसा पर सियासी बयानबाज़ी तेज़: अखिलेश यादव ने लगाया भाजपा पर गंभीर आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुए विवाद ने राज्य में राजनीति को गरमा दिया है। 24 नवंबर को हुई इस घटना में फायरिंग और पथराव के कारण पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग घायल हुए, जिनमें से अधिकांश पुलिसकर्मी हैं। इसके बाद इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले किए हैं।</p>
<p><strong>सपा प्रमुख ने साधा भाजपा पर निशाना</strong></p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को भाजपा की &#8220;सुनियोजित रणनीति&#8221; करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से आम जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि <strong>संभल की घटना भाजपा की सोची-समझी साजिश है। जिस दिन से संसद सत्र शुरू हुआ है, समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की है। हालांकि सदन नहीं चल सका, लेकिन हमारी मांग अब भी वही है।</strong></p>
<p>उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां के अधिकारी इस तरह से काम कर रहे हैं जैसे वे सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता हों। अखिलेश ने भाजपा पर देश की सौहार्द्रता और भाईचारे को नष्ट करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया।</p>
<p><strong>&#8220;देश की एकता खतरे में&#8221;</strong></p>
<p>अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जो लोग धार्मिक स्थलों की खुदाई और सर्वेक्षण में लगे हैं, वे देश की एकता और सांस्कृतिक सौहार्द्रता को खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, <strong>जो लोग हर जगह खुदाई करना चाहते हैं, वे एक दिन इस देश के भाईचारे और सौहार्द्रता को खो देंगे।&#8221;</strong></p>
<p><strong>बांग्लादेश मुद्दे पर भी टिप्पणी</strong></p>
<p>बांग्लादेश में हिंदू संतों के अपमान पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि <strong>भारत सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए। अगर वे हमारे संतों का सम्मान नहीं कर सकते, तो यह उनकी कमजोर नीति का परिणाम है।</strong></p>
<p><strong>राम गोपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील</strong></p>
<p>सपा सांसद राम गोपाल यादव ने संभल हिंसा और मस्जिदों के सर्वेक्षण को लेकर उठाए जा रहे कदमों को &#8220;देशभर में अशांति पैदा करने की साजिश&#8221; बताया। उन्होंने कहा कि <strong>इस तरह के सर्वेक्षणों का उद्देश्य केवल साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाना है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे आदेश देने वाले जजों पर कार्रवाई करनी चाहिए।</strong></p>
<p><strong>संभल हिंसा: घटना का विवरण</strong></p>
<p>संभल में 24 नवंबर को मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर विवाद तब बढ़ गया जब सर्वेक्षण टीम ने स्थानीय मस्जिद के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और देखते ही देखते यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया। पथराव और गोलीबारी की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई और लगभग 20 लोग घायल हो गए।</p>
<p>घायलों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>संभल के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने घटना के बाद प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि स्थिति को काबू में कर लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगा दी हैं और सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।</p>
<p><strong>राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर</strong></p>
<p>इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। सपा, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के बीच बयानबाज़ी जारी है। भाजपा ने सपा पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि सपा ने भाजपा को &#8220;सांप्रदायिक ध्रुवीकरण&#8221; का जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p><strong>भविष्य की राजनीति पर असर</strong></p>
<p>संभल हिंसा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकती है। संसद के आगामी सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, भाजपा इसे &#8220;कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम&#8221; बता रही है।</p>
<p><strong>सामाजिक सौहार्द्रता की परीक्षा</strong></p>
<p>संभल हिंसा और इसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भारत की सामाजिक सौहार्द्रता और धर्मनिरपेक्षता की परीक्षा हैं। यह घटना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दे राजनीति का मुख्य केंद्र बन सकते हैं।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>संभल की घटना ने देशभर में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को फिर से उजागर कर दिया है। जहां सपा और अन्य विपक्षी दल इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे &#8220;कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास&#8221; कह रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन और न्यायपालिका इस मामले को किस तरह से संभालते हैं और यह घटना आगामी चुनावों और सामाजिक सौहार्द्रता पर क्या प्रभाव डालती है।</p>
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		<title>सड़क निर्माण घोटाला: 16 अभियंता निलंबित, मुख्यमंत्री का सख्त संदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 16:38:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Cm office]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 28 नवंबर। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तहत सड़क निर्माण में</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 28 नवंबर। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तहत सड़क निर्माण में बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। चार नई सड़कों की गुणवत्ता जांच में गंभीर खामियां पाए जाने पर राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए एक अधीक्षण अभियंता (एसई), दो अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) और आठ अवर अभियंता (जेई) सहित कुल 16 अभियंताओं को सस्पेंड कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>घोटाले का खुलासा</strong></p>
<p>हरदोई में लोक निर्माण विभाग द्वारा हाल ही में बनाई गई चार सड़कों की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें मिली थीं। विभाग ने इन सड़कों के नमूने लेकर उन्हें लैब में परीक्षण के लिए भेजा। रिपोर्ट में इन सड़कों के निर्माण में कई गंभीर खामियां सामने आईं:</p>
<p><strong>1. तारकोल की मात्रा मानक से कम:</strong> सड़कों पर बिछाई गई सामग्री में तारकोल की कमी पाई गई।</p>
<p><strong>2. गिट्टी और अन्य सामग्री में कमी:</strong> उपयोग किए गए निर्माण सामग्री भी गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर रही थी।</p>
<p><strong>3. निर्माण में लापरवाही:</strong> निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन किया गया।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री का सख्त रुख</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,<strong> &#8220;घटिया निर्माण करने और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।&#8221;</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री के आदेश के बाद लोक निर्माण विभाग ने अन्य जिलों में भी सड़कों की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>जांच के दायरे में अन्य जिले</strong></p>
<p>विभागीय सूत्रों ने बताया कि हरदोई के अलावा नौ अन्य जिलों में भी सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इन जिलों से नमूने लैब में भेजे गए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए गए अभियंताओं और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन जिलों की जांच रिपोर्ट में भी अनियमितताएं उजागर होती हैं, तो यह घोटाला और भी व्यापक हो सकता है।</p>
<p><strong>लोक निर्माण विभाग में हड़कंप</strong></p>
<p>हरदोई में घोटाले का खुलासा होने के बाद लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग के अधिकारी अब अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सतर्क हो गए हैं।</p>
<p>एक अधिकारी ने बताया कि घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभागीय प्रक्रियाओं को और सख्त किया जाएगा।</p>
<p><strong>गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल</strong></p>
<p>हरदोई में हुए इस घोटाले ने लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना दर्शाती है कि निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया में खामियां हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि <em><strong>निगरानी प्रणाली कमजोर है सड़कों के निर्माण के दौरान गुणवत्ता जांच के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली की कमी है। जवाबदेही का अभाव है दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। पारदर्शिता की कमी है निर्माण परियोजनाओं के टेंडरिंग और कार्यान्वयन में पारदर्शिता की आवश्यकता है।</strong></em></p>
<p><strong>जनता की नाराजगी और उम्मीदें</strong></p>
<p>हरदोई की जनता इस घोटाले से नाराज है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गुणवत्ताहीन सड़कों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है।एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा <em><strong>सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद बंधी है कि दोषियों को सजा मिलेगी।</strong></em></p>
<p><strong>भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। हरदोई सड़क घोटाले के खिलाफ की गई यह कार्रवाई इस नीति को प्रतिबिंबित करती है।</p>
<p>सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी परियोजना में लापरवाही या भ्रष्टाचार पाए जाने पर त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>विभाग की चुनौतियां और सुधार की जरूरत</strong></p>
<p>इस घोटाले ने लोक निर्माण विभाग के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विभाग को अपनी प्रक्रियाओं में निम्नलिखित सुधार लाने की आवश्यकता है:</p>
<p><strong>1. सख्त निगरानी और निरीक्षण:</strong></p>
<p>निर्माण परियोजनाओं की नियमित निगरानी और गुणवत्ता निरीक्षण के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की नियुक्ति होनी चाहिए।</p>
<p><strong>2. अभियंताओं की जवाबदेही तय करना:</strong></p>
<p>अभियंताओं और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>3. पारदर्शिता बढ़ाना:</strong></p>
<p>निर्माण कार्यों से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को जनता के लिए पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>4. प्रशिक्षण कार्यक्रम:</strong></p>
<p>अभियंताओं और अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण निर्माण और नई तकनीकों के उपयोग पर नियमित प्रशिक्षण देना चाहिए।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>हरदोई में सड़क निर्माण घोटाला उत्तर प्रदेश में लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त है।</p>
<p>यदि अन्य जिलों में भी जांच के दौरान खामियां पाई जाती हैं, तो यह घोटाला और अधिक व्यापक हो सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि लोक निर्माण विभाग अपने कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे।</p>
<p>इस घटना से सरकार और विभाग को यह सीख लेनी चाहिए कि भविष्य में इस तरह की लापरवाहियों को रोकने के लिए सख्त नियम और प्रक्रियाएं लागू करनी होंगी।</p>
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		<item>
		<title>उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का विरोध: अभियंता संघ छेड़ेगा व्यापक अभियान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 15:53:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
		<category><![CDATA[Upgov]]></category>
		<category><![CDATA[UPPCL]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 28 नवंबर। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के प्रस्ताव ने एक बड़ा विवाद खड़ा</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/opposition-to-privatization-of-power-distribution-corporations-in-uttar-pradesh-engineers-association-will-launch-a-massive-campaign/">उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का विरोध: अभियंता संघ छेड़ेगा व्यापक अभियान</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 28 नवंबर। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के प्रस्ताव ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने वाराणसी और आगरा विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय लिया है। संघ ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) प्रबंधन के तर्कों को खारिज करते हुए इसे जनहित और कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ बताया है।</p>
<p>अभियंता संघ ने आरोप लगाया कि घाटे को निजीकरण का आधार बनाना न केवल भ्रामक है, बल्कि इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं को मुनाफे के लिए निजी हाथों में सौंपना है। संघ का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो हजारों कर्मचारी और अधिकारी प्रभावित होंगे, और इससे उत्तर प्रदेश की बिजली आपूर्ति प्रणाली को भी नुकसान होगा।</p>
<p><strong>संघ का रुख: घाटे का तर्क भ्रामक</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से यूपीपीसीएल के घाटे के तर्क को खारिज किया। संघ ने कहा कि राज्य की विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिए अभियंताओं ने हमेशा प्रबंधन को सहयोग दिया है।</p>
<p>संघ के अनुसार, यूपीपीसीएल ने यह तर्क दिया है कि वाराणसी और आगरा डिस्कॉम घाटे में चल रहे हैं, जिसके कारण इन्हें निजी हाथों में देना आवश्यक है। अभियंता संघ ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि निजीकरण से घाटा कम नहीं होगा बल्कि सेवा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संघ का कहना है कि यदि घाटे को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाई जाए तो सार्वजनिक क्षेत्र के निगम भी लाभदायक हो सकते हैं।</p>
<p><strong>निजीकरण से हजारों नौकरियां खतरे में</strong></p>
<p>संघ का कहना है कि निजीकरण का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। वर्तमान में आगरा डिस्कॉम में 10,411 और वाराणसी डिस्कॉम में 17,189 कर्मचारी कार्यरत हैं। यदि ये निगम निजी हाथों में चले जाते हैं, तो लगभग 27,600 कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4225 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr.webp" alt="" width="1024" height="1024" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr.webp 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-300x300.webp 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-150x150.webp 150w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-768x768.webp 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-24x24.webp 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-48x48.webp 48w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-HsUZqFsuvuMsS6m25cnURr-96x96.webp 96w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>इसके अतिरिक्त, निजीकरण के कारण 1,523 इंजीनियरिंग पद समाप्त हो जाएंगे। इससे सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। संघ के अनुसार <strong>सात मुख्य अभियंता (स्तर-1) के पद समाप्त हो सकते हैं। </strong><strong>33 मुख्य अभियंता (स्तर-2) को पदावनत किया जाएगा। </strong><strong>144 अधीक्षण अभियंता और 507 अधिशासी अभियंता भी प्रभावित होंगे।</strong></p>
<p>संघ का कहना है कि यह न केवल कर्मचारियों की आजीविका पर हमला है, बल्कि विद्युत वितरण प्रणाली की दक्षता को भी खतरे में डालता है।</p>
<p><strong>सेवा शर्तों को लेकर असहमति</strong></p>
<p>संघ ने यूपीपीसीएल द्वारा दी जा रही सेवा शर्तों के बारे में भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि निगम का दावा है कि निजीकरण के बाद कर्मचारियों की नौकरी और अन्य सुविधाएं प्रभावित नहीं होंगी, लेकिन अनुभव बताते हैं कि निजी कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए छंटनी और सेवा शर्तों में कटौती का सहारा लेती हैं।</p>
<p>अभियंता संघ ने यूपीपीसीएल प्रबंधन पर कर्मचारियों को भ्रमित करने का आरोप लगाया और कहा कि निजीकरण के बाद सेवा शर्तों की गारंटी देना असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण के इस कदम से न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा, बल्कि नई भर्तियों के अवसर भी सीमित हो जाएंगे।</p>
<p><strong>विद्युत आपूर्ति पर प्रभाव</strong></p>
<p>अभियंता संघ का कहना है कि निजीकरण का असर सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। उनका तर्क है कि निजी कंपनियां मुनाफे पर केंद्रित होती हैं और उनके लिए उपभोक्ताओं के हित प्राथमिकता में नहीं होते।</p>
<p><strong>संघ ने चेतावनी दी कि निजीकरण के बाद </strong><strong>ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और वितरण की स्थिति खराब हो सकती है, </strong><strong>बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। </strong><strong>निजी कंपनियां केवल लाभप्रद क्षेत्रों पर ध्यान देंगी, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति असमान हो सकती है।</strong></p>
<p><strong>आंदोलन की रणनीति</strong></p>
<p>अभियंता संघ ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वे जनजागरण अभियान शुरू करेंगे ताकि आम जनता को निजीकरण के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा सके। इसके साथ ही, संघ ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने की भी तैयारी की है।</p>
<p>संघ के नेताओं का कहना है कि वे सभी संभव विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हड़ताल और जनप्रतिनिधियों से संपर्क करना शामिल है। उन्होंने कहा, &#8220;यह सिर्फ कर्मचारियों की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के उपभोक्ताओं और विद्युत आपूर्ति की स्थिरता के लिए है।&#8221;</p>
<p><strong>अन्य राज्यों के अनुभव</strong></p>
<p>संघ ने देश के अन्य राज्यों में निजीकरण के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि निजीकरण से न तो सेवा में सुधार हुआ है और न ही उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। उन्होंने दिल्ली और ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बिजली की दरें बढ़ी हैं और सेवा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निजीकरण के परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। संघ का कहना है कि राज्य सरकार को घाटे को कम करने के लिए निजीकरण से बेहतर विकल्प तलाशने चाहिए।</p>
<p><strong>सरकार और प्रबंधन से अपील</strong></p>
<p>संघ ने राज्य सरकार और यूपीपीसीएल प्रबंधन से अपील की है कि वे निजीकरण के इस कदम पर पुनर्विचार करें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूती के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p>संघ ने कहा, &#8220;यदि सरकार और प्रबंधन कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करें, तो घाटा कम किया जा सकता है। निजीकरण इसका समाधान नहीं है</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>वाराणसी और आगरा डिस्कॉम के निजीकरण के खिलाफ अभियंता संघ का विरोध केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े मुद्दे को दर्शाता है। यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र और निजीकरण की बहस का केंद्र बन गया है।</p>
<p>अभियंता संघ के इस अभियान से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण का रास्ता आसान नहीं होगा। संघ की चेतावनी और आंदोलन की तैयारी राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। अब देखना यह है कि सरकार और यूपीपीसीएल प्रबंधन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।</p>
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		<title>विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संविधान का अनुपालन जरूरी: डॉ. दिनेश शर्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Nov 2024 04:04:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Dr dinesh sharma]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नोएडा/लखनऊ, 27 नवंबर। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने विकसित भारत के</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/compliance-with-the-constitution-is-essential-to-achieve-the-goal-of-a-developed-india-dr-dinesh-sharma/">विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संविधान का अनुपालन जरूरी: डॉ. दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नोएडा/लखनऊ, 27 नवंबर। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने विकसित भारत के निर्माण के लिए संविधान के अनुपालन को अत्यावश्यक बताया। उन्होंने यह विचार गौतमबुद्ध नगर के नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी में आयोजित उत्तरीय क्षेत्र सम्मेलन (अन्वेशन) 2024 में व्यक्त किए। इस सम्मेलन में देश के 45 विश्वविद्यालयों से हजारों की संख्या में आए छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 2015 से हर वर्ष संविधान दिवस मनाने की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि संविधान का निर्माण कार्य स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व ही प्रारंभ हो चुका था और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह कर्तव्यों की भी व्याख्या करता है। इसे समझना और इसका अनुपालन करना हर नागरिक का दायित्व है।</p>
<p><strong>संविधान की भूमिका और बच्चों का शिक्षण</strong></p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि बच्चों को पठन-पाठन के साथ-साथ देश में हो रही गतिविधियों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र तभी संभव है, जब नई पीढ़ी संविधान और उसके महत्व को समझे। उन्होंने इस संदर्भ में शिक्षकों और अभिभावकों को जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;बच्चों में सीखने की आदत डालनी चाहिए। शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और विचारधारा को भी गढ़ती है। एक अच्छा विद्यार्थी वही है, जो सीखने के प्रति भूखा हो और वर्तमान से संतुष्ट रहते हुए भविष्य को संवारने का चिंतन करे।&#8221;</p>
<p><strong>वर्तमान से संतुष्टि सफलता का आधार</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि वर्तमान से संतुष्टि ही जीवन में सफलता और खुशहाली का आधार है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, &#8220;अतीत से सीख लें, वर्तमान को बेहतर बनाएं और भविष्य के लिए चिंतनशील रहें। सफलता और प्रगति का यही मंत्र है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत ने लालटेन युग से आधुनिक युग तक की यात्रा की है। यह हमारे पूर्वजों की मेहनत और त्याग का परिणाम है। &#8220;आज हमारे वैज्ञानिक, इंजीनियर और शोधकर्ता दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव का संकेत है।&#8221;</p>
<p><strong>देश में बदलाव की कहानी</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने देश में हुए बदलावों की चर्चा करते हुए कहा, &#8220;पहले बिजली का आना खबर होती थी, लेकिन अब बिजली का जाना खबर बनती है। यह बदलाव देश के मजबूत नेतृत्व और सटीक योजनाओं का परिणाम है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा, &#8220;जब पूरी दुनिया महामारी से कराह रही थी, तब भारत ने तीन-तीन स्वदेशी वैक्सीन बनाईं। ये वैक्सीन न केवल भारत के लिए बल्कि 120 अन्य देशों के लिए भी जीवनदायिनी साबित हुईं। यहां तक कि अमेरिका जैसी महाशक्ति को भी भारत से सहायता मांगनी पड़ी। यह हमारे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।&#8221;</p>
<p><strong>जनधन खाते और डिजिटल क्रांति</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खाते आम जनता के सुनहरे भविष्य की कुंजी बने हैं। उन्होंने कहा, &#8220;एक समय ऐसा था, जब सरकारी सहायता में 100 रुपये में से केवल 15 रुपये ही लाभार्थी तक पहुंचते थे। लेकिन आज डिजिटल इंडिया और जनधन खातों के माध्यम से सहायता सीधे लोगों के खाते में पहुँच रही है। यह पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार का परिणाम है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने उम्मीदों को हकीकत में बदला है। आज डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल मिल रहा है।</p>
<p><strong>तकनीक और शोध का महत्व</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि जीवन को उत्तम बनाने के लिए तकनीक का उपयोग जरूरी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शोध गंगा पोर्टल की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा, &#8220;यह पोर्टल तकनीकी और शोध के क्षेत्र में नई जानकारियां साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। कोरोना काल ने ऑनलाइन शिक्षा की संभावनाओं को बढ़ावा दिया और डिजिटल लाइब्रेरी ने ज्ञान के प्रवाह को बनाए रखा।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों की मेधा शक्ति का आज दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। पहले जहां भारतीय छात्र विदेशों में शिक्षा के लिए जाते थे, वहीं आज विदेशी छात्र भारत में पढ़ाई करने आ रहे हैं। यह बदलते भारत की ताकत और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती साख का प्रमाण है।</p>
<p><strong>भारतीय संस्कृति और मूल्यों की आवश्यकता</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर जोर देते हुए कहा, &#8220;भारत की पहचान उसकी संस्कृति से होती है, जो परिवार और समाज आधारित है। इसके विपरीत, विदेशी संस्कृति बाजार आधारित है, जहां हर चीज बिकाऊ है। हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों को बचाकर रखना होगा। सम्मान हमेशा व्यक्ति के गुणों का होता है, न कि उसकी स्थिति या संपत्ति का।&#8221;</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश: निवेश और विकास का केंद्र</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा, &#8220;आज उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक निवेश आकर्षित कर रहा है। प्रदेश में सबसे बड़ा डेटा सेंटर और मोबाइल निर्माण का केंद्र स्थापित हुआ है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की प्रगति का उदाहरण है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रदेश में शोध और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। &#8220;उत्तर प्रदेश आज शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित कर रहा है।&#8221;</p>
<p><strong>उच्च शिक्षा में शोध का महत्व</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान वहां किए गए शोध से होती है। उन्होंने कहा, &#8220;गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आज यहां 35,000 से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि देश के प्रतिभावान छात्रों को अपने सपनों को साकार करने का मौका मिल सके।&#8221;</p>
<p><strong>सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति</strong></p>
<p>इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित थे। इनमें वैज्ञानिक और डी.आई.बी.ई.आर. के निदेशक डॉ. देवकांत सिंह, ए.आई.यू. के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल, संयुक्त निदेशक डॉ. अमरेंद्र पाणी, गलगोटिया विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुनील गलगोटिया, विशेष कार्य अधिकारी डॉ. ध्रुव गलगोटिया, कुलपति डॉ. के.एम. बाबू, प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार, और रजिस्ट्रार डॉ. नितिन कुमार कौर शामिल थे।</p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने समापन भाषण में छात्रों को सीखने और नवाचार को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, &#8220;संविधान का अनुपालन, तकनीकी नवाचार, शोध और भारतीय मूल्यों का संरक्षण भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।&#8221;</p>
<p>उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने गुणों से देश का नाम रोशन करें और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाएं। इस सम्मेलन ने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है।</p>
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