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	<title>खास खबर Archives - Prabhat Bharat</title>
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	<lastBuildDate>Fri, 13 Mar 2026 14:01:22 +0000</lastBuildDate>
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		<title>चारधाम यात्रा 2026: आस्था का महासंगम, व्यवस्थाओं की नई परीक्षा और बहस के केंद्र में ‘गैर-सनातनी प्रवेश’ का प्रस्ताव</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/char-dham-yatra-2026-a-grand-confluence-of-faith-a-new-test-of-arrangements-and-the-proposal-for-non-sanatani-entry-at-the-center-of-the-debate/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:58:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Char dham yatra]]></category>
		<category><![CDATA[चार धाम यात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देहरादून, 13 मार्च। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/char-dham-yatra-2026-a-grand-confluence-of-faith-a-new-test-of-arrangements-and-the-proposal-for-non-sanatani-entry-at-the-center-of-the-debate/">चारधाम यात्रा 2026: आस्था का महासंगम, व्यवस्थाओं की नई परीक्षा और बहस के केंद्र में ‘गैर-सनातनी प्रवेश’ का प्रस्ताव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">देहरादून, 13 मार्च। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बन जाती है। हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम सदियों से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक रहे हैं। देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए इन धामों तक पहुंचते हैं।<br />
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने इस पवित्र यात्रा को प्रशासनिक दृष्टि से भी एक बड़ी चुनौती बना दिया है। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्राकृतिक परिस्थितियों से निपटना राज्य सरकार और प्रशासन के लिए कठिन परीक्षा साबित हो रहा है।<br />
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा कई मायनों में विशेष मानी जा रही है। इस बार सरकार ने जहां एक ओर यात्रियों की संख्या पर किसी प्रकार की सीमा न लगाने का निर्णय लिया है, वहीं यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू करने की योजना भी तैयार की गई है। इसके साथ ही बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।</p>
<p style="text-align: left;"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-8610 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/2026_1image_11_52_530796415chardhamyatra2026.jpg" alt="" width="1072" height="591" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/2026_1image_11_52_530796415chardhamyatra2026.jpg 1072w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/2026_1image_11_52_530796415chardhamyatra2026-300x165.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/2026_1image_11_52_530796415chardhamyatra2026-1024x565.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/2026_1image_11_52_530796415chardhamyatra2026-768x423.jpg 768w" sizes="(max-width: 1072px) 100vw, 1072px" /><br />
<strong>अक्षय तृतीया से शुरू होगी चारधाम यात्रा</strong><br />
चारधाम यात्रा की शुरुआत परंपरागत रूप से अक्षय तृतीया के पावन पर्व से होती है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही आधिकारिक रूप से यात्रा सत्र का शुभारंभ हो जाएगा।<br />
इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही लाखों श्रद्धालुओं का रुख हिमालयी धामों की ओर हो जाएगा।<br />
चारों धामों के कपाट खुलने की प्रक्रिया अपने आप में अत्यंत धार्मिक महत्व रखती है। वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच मंदिरों के द्वार खोले जाते हैं। इस अवसर पर स्थानीय लोग, साधु-संत और देशभर से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहते हैं।<br />
चारधाम यात्रा सामान्यतः अप्रैल से लेकर नवंबर तक चलती है। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवताओं की पूजा शीतकालीन गद्दी स्थलों पर की जाती है।</p>
<p style="text-align: left;"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-8611 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1.jpg" alt="" width="948" height="533" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1.jpg 948w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 948px) 100vw, 948px" /><br />
<strong>आस्था के साथ बढ़ती भीड़ की चुनौती</strong><br />
पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। सड़क संपर्क, हेलीकॉप्टर सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में वृद्धि के कारण अब पहले की तुलना में कहीं अधिक लोग इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं।<br />
वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उस वर्ष चारों धामों में कुल 48.31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इनमें सबसे अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे थे, जहां 17,68,795 लोगों ने बाबा केदार के दर्शन किए।<br />
बद्रीनाथ धाम में 16,60,224, गंगोत्री धाम में 7,58,249 और यमुनोत्री धाम में 6,44,637 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।<br />
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुकी है। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, धार्मिक पर्यटन और रोजगार के अनेक अवसर इस यात्रा से जुड़े हुए हैं।<br />
हालांकि बढ़ती संख्या प्रशासन के लिए कई प्रकार की समस्याएं भी पैदा कर रही है। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक लाखों लोगों की आवाजाही व्यवस्था को प्रभावित कर देती है।</p>
<p style="text-align: left;"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-8612 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63.jpeg" alt="" width="588" height="330" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63.jpeg 588w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 588px) 100vw, 588px" /><br />
<strong>यातायात जाम और व्यवस्थागत चुनौतियां</strong><br />
चारधाम यात्रा के दौरान सबसे बड़ी समस्या यातायात प्रबंधन की होती है। विशेष रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर कई बार लंबा जाम लग जाता है।<br />
जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम तक जाने वाला मार्ग कई बार घंटों तक जाम में फंसा रहता है। इससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी इस जाम में घंटों फंसे रहते हैं।<br />
इसी प्रकार केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच वाहनों का अत्यधिक दबाव देखने को मिलता है। यहां पार्किंग और वाहनों के संचालन की सीमित क्षमता के कारण प्रशासन को कई बार वाहनों को रोकना पड़ता है।<br />
पिछले वर्षों में कई ऐसे अवसर आए जब अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन को यात्रा को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगाने पड़े। इससे श्रद्धालुओं में असमंजस और नाराजगी भी देखने को मिली।<br />
कई तीर्थयात्री लंबी दूरी तय करके उत्तराखंड पहुंचते हैं, लेकिन अचानक लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उन्हें बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ता है। इस स्थिति ने प्रशासन के लिए भी कठिन परिस्थिति पैदा कर दी थी।</p>
<p style="text-align: left;"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-8613 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed.jpeg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed.jpeg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-300x169.jpeg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-1024x576.jpeg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-768x432.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /><br />
<strong>इस बार संख्या पर नहीं होगी कोई सीमा</strong><br />
इस वर्ष राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।<br />
सरकार का कहना है कि हर श्रद्धालु को अपने आराध्य के दर्शन करने का अधिकार है और प्रशासन का दायित्व है कि वह यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करे।<br />
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित न किया जाए।<br />
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना है। इसलिए संख्या पर कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।<br />
हालांकि प्रशासन को यह अधिकार रहेगा कि यदि किसी स्थान पर अत्यधिक भीड़ हो जाए या सुरक्षा की दृष्टि से कोई खतरा पैदा हो जाए तो स्थानीय स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।</p>
<p style="text-align: left;"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-8614 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1.jpg" alt="" width="948" height="533" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1.jpg 948w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 948px) 100vw, 948px" /><br />
<strong>रजिस्ट्रेशन व्यवस्था होगी अनिवार्य</strong><br />
हालांकि संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी, लेकिन यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।<br />
सरकार का मानना है कि रजिस्ट्रेशन के माध्यम से यात्रियों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है और उसी के अनुसार व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।<br />
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे प्रशासन को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस दिन किस धाम में कितने श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं।<br />
इस व्यवस्था से भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।<br />
गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रस्ताव ने छेड़ी बहस<br />
चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच एक और मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया है।<br />
मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि यह निर्णय मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।<br />
उनके अनुसार मंदिरों में दर्शन करने के लिए वही लोग आएं जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। प्रस्ताव के अनुसार यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास के क्षेत्र में लागू किया जा सकता है।<br />
हालांकि समिति ने स्पष्ट किया है कि सिख, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत इन्हें व्यापक हिंदू धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।<br />
यह प्रस्ताव फिलहाल सिफारिश के रूप में सामने आया है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।<br />
धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती<br />
इस प्रस्ताव ने समाज में एक नई बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग इसे मंदिरों की परंपरा और पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं।<br />
उनका कहना है कि मंदिरों की अपनी धार्मिक मर्यादाएं होती हैं और उन मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए।<br />
दूसरी ओर कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हैं। उनका तर्क है कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है जहां किसी भी व्यक्ति को धार्मिक स्थलों पर जाने से रोका नहीं जाना चाहिए। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के स्तर पर ही लिया जाएगा।<br />
<strong>सुरक्षा व्यवस्था को बनाया गया सर्वोच्च प्राथमिकता</strong><br />
इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत मजबूत बनाने की योजना तैयार की गई है। यात्रा मार्गों और प्रमुख स्थलों पर लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के माध्यम से पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जाएगी।<br />
पुलिस मुख्यालय ने यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष नियंत्रण व्यवस्था भी तैयार की है। इसके तहत गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप की निगरानी में एक विशेष सेल बनाया गया है।<br />
यह सेल यात्रा के दौरान होने वाली गतिविधियों की लगातार निगरानी करेगा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।<br />
<strong>74 पुलिस चौकियां और 106 पार्किंग स्थल</strong><br />
यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार 74 वॉच एंड वार्ड पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी।<br />
इन चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मी यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े कार्यों को संभालेंगे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर 106 पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं। इससे वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और जाम की स्थिति को कम किया जा सकेगा।<br />
<strong>आपदा प्रबंधन की भी विशेष तैयारी</strong><br />
चारधाम यात्रा पहाड़ी क्षेत्रों में होती है जहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। भूस्खलन, अचानक मौसम परिवर्तन और सड़क दुर्घटनाएं यहां आम समस्याएं हैं। इसलिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के लिए भी व्यापक तैयारी की है।<br />
यात्रा मार्गों पर 31 स्थानों पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की तैनाती की जाएगी। ये टीमें किसी भी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकेंगी।<br />
<strong>टूरिस्ट पुलिस असिस्टेंस बूथ बनाए जाएंगे</strong><br />
तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सात जिलों में 51 टूरिस्ट पुलिस असिस्टेंस बूथ स्थापित किए जाएंगे। ये बूथ उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और हरिद्वार जिलों में बनाए जाएंगे।<br />
इन बूथों पर तैनात पुलिसकर्मी यात्रियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ यात्रा से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे।<br />
<strong>भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए जाएंगे होल्डिंग स्थल</strong><br />
चारधाम यात्रा के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जब किसी स्थान पर भीड़ बहुत अधिक हो जाती है और यात्रियों को आगे बढ़ने से रोकना पड़ता है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को असुविधा न हो, इसके लिए आठ जिलों में 104 होल्डिंग स्थल बनाए जा रहे हैं।<br />
इन स्थानों पर यात्रियों के ठहरने, भोजन, शौचालय और विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर यहां रात्रि विश्राम की भी व्यवस्था की जा सकेगी।<br />
<strong>आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है चारधाम यात्रा</strong><br />
चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं है बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन चुकी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आने से राज्य में पर्यटन और व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, स्थानीय दुकानदार, घोड़ा-खच्चर संचालक और गाइड सभी इस यात्रा से जुड़े हुए हैं।<br />
यात्रा के दौरान हजारों लोगों को अस्थायी रोजगार भी मिलता है। यही कारण है कि राज्य सरकार यात्रा को अधिक से अधिक सुचारू बनाने पर विशेष ध्यान देती है।<br />
<strong>आने वाला यात्रा सत्र रहेगा महत्वपूर्ण</strong><br />
इस वर्ष चारधाम यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रही है।<br />
एक ओर जहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं प्रशासन नई तकनीक और व्यवस्थाओं के माध्यम से यात्रा को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रस्ताव ने भी इस यात्रा को धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया है।<br />
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रशासन द्वारा की गई तैयारियां जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और क्या ये व्यवस्थाएं बढ़ती भीड़ के बीच यात्रा को वास्तव में सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बना पाती हैं।<br />
चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं।<br />
ऐसे में यह आवश्यक है कि यात्रा की पवित्रता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा दोनों को समान महत्व दिया जाए, ताकि यह दिव्य परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक उसी गरिमा और भव्यता के साथ जारी रह सके।</p>
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		<item>
		<title>“जाति विरासत पर सुप्रीम कोर्ट का नया दृष्टिकोण: मां की जाति भी बनेगी आधार, CJI ने उठाए बड़े सवाल”</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/supreme-courts-new-approach-on-caste-inheritance-mothers-caste-will-also-be-a-basis-cji-raises-important-questions/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Dec 2025 13:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA["Supreme Court's new approach on caste inheritance: Mother's caste will also be a basis]]></category>
		<category><![CDATA[Caste certificate]]></category>
		<category><![CDATA[CJI raises important questions."]]></category>
		<category><![CDATA[Mother's caste will also be a basis]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.prabhatbharat.com/?p=5388</guid>

					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने न केवल जाति</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/supreme-courts-new-approach-on-caste-inheritance-mothers-caste-will-also-be-a-basis-cji-raises-important-questions/">“जाति विरासत पर सुप्रीम कोर्ट का नया दृष्टिकोण: मां की जाति भी बनेगी आधार, CJI ने उठाए बड़े सवाल”</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने न केवल जाति प्रमाणपत्र जारी करने की पारंपरिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि संविधान के तहत समानता, सामाजिक न्याय और बदलते सामाजिक ढांचे को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की दो-judge बेंच ने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि <em>बदलते समय में यह विचारणीय है कि जाति प्रमाणपत्र केवल पिता की जाति के आधार पर क्यों जारी किया जाए?</em> अदालत ने इस बात को स्वीकार किया कि परिस्थितियों और सामाजिक वास्तविकताओं के अनुसार, मां की जाति के आधार पर भी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाना संभव और उचित हो सकता है।</p>
<p>यह फैसला पुडुचेरी की एक नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में आया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि लड़की को उसकी मां की “आदि द्रविड़” जाति के आधार पर अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र जारी किया जाए, ताकि उसका शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्रभावित न हो। इस आदेश को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा बल्कि इस मुद्दे पर गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि <em>कानून का व्यापक प्रश्न अभी खुला है और भविष्य में इस पर विस्तृत विचार होना बाकी है।</em></p>
<h2><strong>मामला क्या था?</strong></h2>
<p>पुडुचेरी निवासी मां ने स्थानीय तहसीलदार को आवेदन देकर अनुरोध किया था कि उसके तीन बच्चों—दो बेटियों और एक बेटे—को उसके जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाए, क्योंकि वह हिंदू ‘आदि द्रविड़’ समुदाय से आती है, जो अनुसूचित जाति में शामिल है।</p>
<p>दिलचस्प रूप से, उसके पति की जाति अनुसूचित जाति में शामिल नहीं है। लेकिन मां ने यह तर्क दिया कि शादी के बाद से उसका पति उसी के माता-पिता के घर पर रहता है, और बच्चों का पालन-पोषण तथा सामाजिक माहौल उसकी जातीय-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में ही हुआ है। इस आधार पर उसने दावा किया कि बच्चों को SC प्रमाणपत्र मिलना चाहिए।</p>
<p>तहसीलदार ने आवेदन खारिज कर दिया, जिसके बाद यह मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने तहसीलदार को निर्देश दिया कि वह मां की जाति के आधार पर बच्चों को SC प्रमाणपत्र जारी करे, अन्यथा उनकी शिक्षा और भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।</p>
<p>सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन CJI सूर्यकांत की बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।</p>
<h2><strong>सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?</strong></h2>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा—</p>
<p><strong>“समय बदल रहा है। फिर केवल पिता की जाति के आधार पर ही जाति प्रमाणपत्र क्यों जारी किया जाए? माता की जाति के आधार पर भी यह संभव होना चाहिए।”</strong></p>
<p>उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि—</p>
<p><strong>“अगर हम यह सिद्धांत स्वीकार कर लें कि मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाणपत्र जारी हो सकता है, तब यह भी हो सकता है कि अनुसूचित जाति की महिला और उच्च जाति के पुरुष से पैदा हुए बच्चे, चाहे वे उच्च जाति के माहौल में पले-बढ़े हों, वे भी SC प्रमाणपत्र के हकदार हो जाएँ।”</strong></p>
<p>CJI ने इस मुद्दे को अत्यंत जटिल और सामाजिक रूप से संवेदनशील बताते हुए कहा कि <em>कानून के व्यापक प्रश्न</em>—कि बच्चे को जाति माता-पिता में से किससे विरासत में मिलनी चाहिए—पर विस्तृत विचार किए बिना अंतिम निर्णय नहीं दिया जा सकता। इसलिए फिलहाल अदालत ने केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखकर राहत दी है।</p>
<h2><strong>कानून का कौन-सा सवाल बाकी है?</strong></h2>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला सिर्फ एक परिवार या एक लड़की का नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक संरचना और जाति की विरासत से जुड़ा है। अब तक भारतीय कानून और प्रशासकीय प्रथाओं में यह माना गया है कि—</p>
<p><strong>बच्चे की जाति पिता से निर्धारित होती है</strong>, जब तक कि असाधारण परिस्थितियों में कोई अलग आदेश न दिया जाए।</p>
<p>लेकिन देश में तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे, अंतरजातीय विवाहों की बढ़ती संख्या, मातृसत्तात्मक समुदायों की मौजूदगी, और महिलाओं के अधिकारों को लेकर आधुनिक न्यायिक दृष्टिकोण इस नियम को चुनौती दे रहे हैं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यह नियम बदल सकता है।</p>
<p>कई याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं जिनमें यह चुनौती दी गई है कि पिता की जाति ही क्यों अंतिम मानी जाए। उन पर अलग से सुनवाई होगी।</p>
<h2><strong>इस फैसले की अहमियत</strong></h2>
<p>यह निर्णय <em>व्यक्तिगत मामले</em> के स्तर पर भले ही सीमित प्रतीत हो, लेकिन इसके निहितार्थ अनेक हैं—</p>
<ol>
<li><strong>मां की जाति का कानूनी महत्व बढ़ेगा।</strong></li>
<li><strong>अंतरजातीय विवाहों से पैदा बच्चों के अधिकारों की नई व्याख्या होगी।</strong></li>
<li><strong>सामाजिक न्याय के क्षेत्र में नई बहस शुरू होगी।</strong></li>
<li><strong>सकारात्मक भेदभाव (Reservation) के नियम बदल सकते हैं।</strong></li>
<li><strong>प्रशासनिक ढांचे को नई दिशानिर्देश बनाने होंगे।</strong></li>
</ol>
<p>यह फैसला महिलाओं के अधिकारों के दृष्टिकोण से भी बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक भारतीय सामाजिक संरचना में जातिगत पहचान अक्सर पिता के हाथ में केंद्रित रही है।</p>
<h2><strong>क्यों कहा जा रहा है कि यह बहस छेड़ देगा?</strong></h2>
<p>क्योंकि देश में आरक्षण एक अत्यंत संवेदनशील और अत्यधिक राजनीतिक विषय है। अगर भविष्य में यह मान लिया जाता है कि</p>
<p><strong>“जाति माता से भी मिल सकती है”</strong>,</p>
<p>तो कई नए प्रकार के विवाद और परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:</p>
<ul>
<li>यदि एक SC महिला उच्च जाति में विवाह करती है, तो उसके बच्चे उच्च जाति के माहौल में पले-बढ़े होने के बावजूद SC प्रमाणपत्र पा सकते हैं।</li>
<li>इससे आरक्षण के वास्तविक लाभार्थियों और पात्रता की परिभाषा पर नया विमर्श शुरू होगा।</li>
<li>प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया भी जटिल होगी।</li>
</ul>
<h2><strong>आगे क्या?</strong></h2>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि—</p>
<p><strong>यह फैसला विशेष परिस्थितियों में दिया गया अंतरिम निर्णय है।</strong></p>
<p>साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि—</p>
<p><strong>“कानून का सवाल खुला है।”</strong></p>
<p>इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में इस पर बड़ी बहस और विस्तृत सुनवाई होगी, और संभव है कि जाति विरासत से जुड़ा एक <em>नया सिद्धांत</em> स्थापित हो।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का यह फैसला न केवल एक लड़की की शिक्षा और अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज में जातीय पहचान की कानूनी संरचना पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। यह निर्णय बताता है कि सुप्रीम कोर्ट समय के साथ बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को समझता है और संविधान की मूल भावना—समानता, न्याय और गरिमा—को ध्यान में रखते हुए नए रास्ते तलाशने को तैयार है।</p>
<p>यह फैसला आने वाले समय में देश की राजनीति, आरक्षण व्यवस्था, और जाति-संबंधी कानूनों पर गहरा असर डालेगा। अब सबकी निगाहें उन बड़ी याचिकाओं पर होंगी जिनमें पिता से मिलने वाली जाति के सिद्धांत को चुनौती दी गई है।</p>
<p><strong>कहना गलत नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक नई और ऐतिहासिक बहस की शुरुआत कर दी है।</strong></p>
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		<item>
		<title>चोकसी केस: घोटाले, हनी ट्रैप और प्रत्यर्पण की जटिल गुत्थी</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/choksi-case-a-complex-web-of-scams-honey-traps-and-extradition/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 07:03:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Barbara jabarika]]></category>
		<category><![CDATA[Choksi case: A complex web of scams]]></category>
		<category><![CDATA[honey traps and extradition]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 15 अप्रैल। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ₹13,500 करोड़ रुपये के महाघोटाले में मुख्य आरोपी और</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 15 अप्रैल। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के ₹13,500 करोड़ रुपये के महाघोटाले में मुख्य आरोपी और भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी अंततः कानून के शिकंजे में आ गया है। बेल्जियम पुलिस ने 12 अप्रैल को उसे उस वक्त गिरफ्तार किया, जब वह स्विट्जरलैंड भागने की फिराक में था। भारतीय जांच एजेंसियों ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई के लगातार प्रयासों के बाद यह सफलता हाथ लगी। चोकसी के खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है और भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया तेज़ कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द से जल्द उसे भारत लाकर कानून के हवाले करना चाहते हैं।भारतीय एजेंसियों की निगरानी के बीच चोकसी काफी समय से बेल्जियम में था। जानकारी के अनुसार, वह चिकित्सा उपचार का बहाना बनाकर स्विट्जरलैंड भागने की योजना बना रहा था, जहाँ वह शरण की कोशिश कर सकता था। लेकिन इस योजना को अंजाम देने से पहले ही बेल्जियम पुलिस ने इंटरपोल के इनपुट पर उसे गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी चोकसी के खिलाफ वर्षों से चल रही अंतरराष्ट्रीय अभियान की एक अहम कड़ी है, जिसने इस भगोड़े की गतिविधियों पर लगाम लगाई।</p>
<p><strong>बारबरा जबारिका का प्रवेश: एक रहस्यमयी महिला की भूमिका और हनी ट्रैप का दावा</strong><br />
इस पूरे प्रकरण में जिस नाम ने सबसे अधिक सुर्खियाँ बटोरीं, वह है बारबरा जबारिका। बारबरा हंगरी की नागरिक है, और चोकसी ने उस पर ‘हनी ट्रैप’ का आरोप लगाया है। चोकसी का दावा है कि बारबरा ने योजनाबद्ध तरीके से उससे दोस्ती की, फिर उसे फंसाकर अगवा करने की साजिश रची। उसका कहना है कि अपहरण की रात वह बारबरा के निमंत्रण पर रात्रिभोज के लिए गया था, जहाँ से उसे जबरन ले जाया गया। चोकसी की पत्नी प्रीति ने भी इन दावों की पुष्टि करते हुए कहा कि बारबरा का आचरण संदेहास्पद रहा है और वह उनके पति को फंसा चुकी है।मेहुल चोकसी जनवरी 2018 में भारत से भागकर कैरेबियाई द्वीप एंटीगुआ में जा बसा था, जहाँ उसने नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। मई 2021 में वह अचानक डोमिनिका में पकड़ा गया, जहाँ वह अवैध रूप से प्रवेश करता पाया गया। चोकसी का दावा था कि उसे भारतीय एजेंटों ने अपहरण कर डोमिनिका लाया, ताकि भारत प्रत्यर्पण को आसान बनाया जा सके। उसने स्थानीय अदालत में मुकदमा भी दर्ज कराया और बारबरा को इस पूरे प्रकरण में साजिशकर्ता बताया। हालांकि डोमिनिका ने उसे एंटीगुआ लौटने की अनुमति दे दी थी।</p>
<p><strong>बारबरा का पक्ष: दोस्ती या फरेब?</strong><br />
बारबरा जबारिका ने चोकसी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उसका कहना है कि दोनों की दोस्ती सामान्य थी और उसने कभी किसी साजिश में भाग नहीं लिया। उसने बताया कि मेहुल ने खुद को &#8216;राज&#8217; नाम से परिचित कराया था और वही उसकी ओर आकर्षित था। बारबरा का कहना है कि उसने कभी चोकसी को मिलने के लिए मजबूर नहीं किया, न ही अपहरण के किसी प्रयास का हिस्सा रही। उसने चोकसी के व्यवहार को &#8216;मनगढंत और दोषारोपण&#8217; करार दिया। यह बयान इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना देता है।</p>
<p>बारबरा जबारिका ने अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में खुद को एक प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट एजेंट बताया है, जिसके पास डायरेक्ट सेल्स, रियल एस्टेट और प्रबंधन क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह खुद को एक &#8216;अनुभवी सेल्स नेगोशिएटर&#8217; बताती है। उसका प्रोफेशनल नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय है, जिससे उसे विभिन्न देशों में काम करने का अनुभव है। लेकिन चोकसी द्वारा उस पर लगाए गए आरोपों ने उसकी पृष्ठभूमि पर भी संदेह खड़ा कर दिया है कि क्या वह किसी खुफिया ऑपरेशन का हिस्सा थी या वाकई एक स्वतंत्र प्रोफेशनल?</p>
<p><strong>प्रत्यर्पण की प्रक्रिया: कानूनी चुनौतियाँ और कूटनीतिक संवाद</strong><br />
भारत सरकार अब बेल्जियम से मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में जुट गई है। प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत ने आवश्यक दस्तावेज और कानूनी साक्ष्य भेजे हैं। लेकिन चोकसी एक तेज़ तर्रार कानूनी टीम से लैस है, जो यह तर्क दे सकती है कि उसे भारत में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। इसके अलावा वह यह भी दावा कर सकता है कि उसे भारत भेजा जाना उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। भारत सरकार ने हालांकि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर तैयारी कर ली है।</p>
<p>मेहुल चोकसी पर कई गंभीर आरोप हैं। PNB घोटाले में उसका नाम नीरव मोदी के साथ जुड़ा हुआ है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग, संपत्ति जब्ती, और अंतरराष्ट्रीय फंड ट्रांसफर जैसे कई मामलों में केस दर्ज कर रखा है। सीबीआई ने उसे मुख्य साजिशकर्ता बताया है जिसने भारतीय बैंकों को चूना लगाया और फिर फरार हो गया। भारत में उसकी सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्तियाँ जब्त हो चुकी हैं। ईडी का कहना है कि वह आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और चोकसी की वापसी इसके लिए एक मिसाल होगी।मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी के बाद भारत में राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। विपक्षी दलों ने सरकार से पूछा कि इतने वर्षों तक उसे क्यों नहीं लाया जा सका। वहीं सरकार समर्थकों ने इस गिरफ्तारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और कूटनीतिक ताकत का परिणाम बताया। सोशल मीडिया पर भी बारबरा और चोकसी के किस्से मज़ाक और व्यंग्य का विषय बने हुए हैं। लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि इस हाई-प्रोफाइल मामला आखिर किस अंजाम तक पहुँचेगा।</p>
<p><strong>क्या कानून का शिकंजा अब और मज़बूत होगा?</strong><br />
मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी से भारत सरकार को एक बड़ी नैतिक और कानूनी जीत जरूर मिली है, लेकिन अंतिम लड़ाई अब भी बाकी है—वह है चोकसी को भारत लाना और अदालत में दोष सिद्ध करना। यह केस सिर्फ एक आर्थिक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति, गुप्त ऑपरेशन, और &#8216;हनी ट्रैप&#8217; जैसी साज़िशों की गहराई भी छुपी है। यदि भारत सफलतापूर्वक उसे प्रत्यर्पित करा लेता है, तो यह न केवल एक अपराधी को सज़ा दिलाने की दिशा में मील का पत्थर होगा, बल्कि आर्थिक अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश भी होगा—&#8221;भागोगे, तो भी बच नहीं पाओगे।&#8221;</p>
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		<title>69,000 सहायक शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/69000-assistant-teacher-recruitment-reservation-scam-case-important-hearing-in-supreme-court-today/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Mar 2025 03:19:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[000 assistant teacher recruitment reservation scam case]]></category>
		<category><![CDATA[000 assistant teacher recruitment reservation scam case: Important hearing in Supreme Court today]]></category>
		<category><![CDATA[69]]></category>
		<category><![CDATA[assistant teacher recruitment reservation scam case: Important hearing in Supreme Court today]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश सरकार के आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर नई दिल्ली, 4 मार्च।</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>उत्तर प्रदेश सरकार के आरक्षण नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नजर</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 4 मार्च। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। यह सुनवाई कोर्ट नंबर 14 में सीरियल नंबर 19 पर सूचीबद्ध है।</p>
<p>आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे वर्ष 2020 से कोर्ट में याची बनकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप है कि उसने आरक्षण नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) के अभ्यर्थियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने 2018 में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर हजारों अभ्यर्थियों ने अदालत का रुख किया। भर्ती में 19,000 से अधिक सीटों पर आरक्षण घोटाले की बात सामने आई, जिसमें OBC और SC अभ्यर्थियों को निर्धारित आरक्षण प्रतिशत से काफी कम सीटें दी गईं।</p>
<p><strong>आरक्षण नियमों का उल्लंघन</strong></p>
<p>1. OBC वर्ग को 27% के बजाय केवल 3.86% आरक्षण दिया गया।</p>
<p>2. SC वर्ग को 21% के स्थान पर केवल 16.2% आरक्षण मिला।</p>
<p>3. भर्ती प्रक्रिया में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का उल्लंघन किया गया।</p>
<p>4. ST वर्ग के आरक्षण को भी सही तरीके से लागू नहीं किया गया।</p>
<p><strong>लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला</strong></p>
<p>इस मामले में लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को बड़ा फैसला सुनाते हुए 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की पूरी चयन सूची को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि आरक्षण प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिससे OBC और SC वर्ग के अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार ने आरक्षण नीति के पालन में लापरवाही बरती और इससे हजारों योग्य अभ्यर्थियों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसकी सुनवाई आज हो रही है।</p>
<p><strong>अभ्यर्थियों की मांग: याची लाभ देकर जल्द करें निस्तारण</strong></p>
<p>आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ (Litigant Benefit) का प्रस्ताव पेश करके मामले का शीघ्र निस्तारण करे।</p>
<p>अभ्यर्थियों का कहना है कि वे चार वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।</p>
<p><strong>क्या होता है याची लाभ?</strong></p>
<p>याची लाभ का मतलब होता है कि कोर्ट में मामला दायर करने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए और उनके पक्ष में फैसला आने पर उन्हें पहले नियुक्ति दी जाए। अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ का प्रस्ताव रखती है, तो इससे हजारों पीड़ित अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>सरकार की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट का रुख</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी और आरक्षण नीति में कोई अनियमितता नहीं हुई। सरकार का यह भी तर्क है कि अगर चयन सूची पूरी तरह रद्द कर दी गई, तो इससे भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी।</p>
<p>हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस मामले को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि अगर सरकार ने आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया है, तो उसे जवाबदेही लेनी होगी।</p>
<p><strong>69,000 शिक्षक भर्ती परीक्षा का इतिहास</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती का यह मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा है।</p>
<p>1. 2018 – उत्तर प्रदेश सरकार ने 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की घोषणा की।</p>
<p>2. 2019 – भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई और परीक्षा आयोजित की गई।</p>
<p>3. 2020 – परिणाम घोषित हुए, जिसके बाद आरक्षण घोटाले का आरोप लगा और मामला कोर्ट में गया।</p>
<p>4. 2021-2023 – हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई चलती रही।</p>
<p>5. 2024 – लखनऊ हाईकोर्ट ने चयन सूची रद्द की और सरकार को दोबारा प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।</p>
<p>6. 4 मार्च 2025 – सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही है।</p>
<p><strong>आरक्षण घोटाले से प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति</strong></p>
<p>आरक्षण घोटाले के शिकार अभ्यर्थियों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। वे पिछले चार वर्षों से नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिल पा रहा। कई अभ्यर्थियों की आयुसीमा समाप्त हो रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।</p>
<p><strong>पीड़ित अभ्यर्थियों की मांगें</strong></p>
<p>1. सरकार सुप्रीम कोर्ट में याची लाभ का प्रस्ताव पेश करे, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति मिल सके।</p>
<p>2. आरक्षण नीति का सही से पालन करते हुए नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।</p>
<p>3. सरकार हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करे और सभी पात्र अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू करे।</p>
<p>4. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएं।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा निर्णायक</strong></p>
<p>69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले का मामला सिर्फ अभ्यर्थियों की नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान के मूल्यों की रक्षा से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले में अन्य सरकारी भर्तियों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा।</p>
<p>अगर कोर्ट ने सरकार को याची लाभ देने का आदेश दिया, तो हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और उन्हें उनका हक मिलेगा। वहीं, अगर सरकार की दलीलें कमजोर साबित होती हैं, तो भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करना पड़ सकता है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक सकता है।</p>
<p>अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां आज की सुनवाई यह तय करेगी कि उत्तर प्रदेश के आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा या नहीं।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/69000-assistant-teacher-recruitment-reservation-scam-case-important-hearing-in-supreme-court-today/">69,000 सहायक शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>भारतीय सेना में निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक एंट्री, ASMI ने उजी और MP5 को पछाड़ा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 17:21:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Army]]></category>
		<category><![CDATA[make in india]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय सेना में निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक एंट्री नई दिल्ली/हैदराबाद 4 दिसंबर। हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/historic-entry-of-private-sector-in-indian-army-asmi-beats-uzi-and-mp5/">भारतीय सेना में निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक एंट्री, ASMI ने उजी और MP5 को पछाड़ा</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भारतीय सेना में निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक एंट्री</strong></p>
<p>नई दिल्ली/हैदराबाद 4 दिसंबर। हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित कंपनी लोकेश मशीन्स लिमिटेड ने भारतीय सेना के लिए एक ऐसा हथियार विकसित किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त उजी और MP5 जैसी सबमशीन गन को मात दी है। यह बंदूक, जिसे ASMI नाम दिया गया है, न केवल स्वदेशी है, बल्कि यह किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा डिजाइन, विकसित और निर्मित पहली हथियार प्रणाली भी है।</p>
<p>कंपनी को भारतीय सेना की उत्तरी कमान से 4.26 करोड़ रुपये मूल्य की 550 ASMI सबमशीन गन (SMG) का ऑर्डर मिला था। इसे कंपनी ने 28 सितंबर, 2024 की समय सीमा से पहले पूरा कर लिया। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि सेना में आमतौर पर आयातित हथियारों या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है।</p>
<p>ASMI, जिसका संस्कृत में अर्थ है &#8220;साहस और गर्व,&#8221; अपने डिजाइन और प्रदर्शन के कारण उजी (इज़राइल वेपन इंडस्ट्रीज) और MP5 (जर्मनी की हेकलर एंड कोच) को पीछे छोड़ने में सफल रही। लोकेश मशीन्स लिमिटेड के निदेशक एम. श्रीनिवास ने बताया, &#8220;ASMI ने सटीकता और विश्वसनीयता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को हराया। यह भारत में हथियार निर्माण के क्षेत्र में एक नया अध्याय है।&#8221;</p>
<figure id="attachment_4340" aria-describedby="caption-attachment-4340" style="width: 1080px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4340" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI.jpg" alt="" width="1080" height="1422" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI.jpg 1080w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI-228x300.jpg 228w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI-778x1024.jpg 778w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI-768x1011.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221432_TOI-1024x1348.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /><figcaption id="caption-attachment-4340" class="wp-caption-text">कर्नल प्रसाद बंसोड़, जो एआरडीई में प्रतिनियुक्ति पर थे, ने सेना से मिली जानकारी के आधार पर एएसएमआई को डिजाइन किया। (फोटो: एडीजी पीआई- भारतीय सेना)</figcaption></figure>
<p><strong>ASMI का डिज़ाइन और निर्माण</strong></p>
<p>ASMI के विकास के पीछे एक लंबी प्रक्रिया है। कंपनी ने पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) और भारतीय सेना से मूल डिजाइन प्राप्त किया। इस डिजाइन को लोकेश मशीन्स ने अपने हैदराबाद प्लांट में और विकसित किया। 2020 में, पहला प्रोटोटाइप केवल तीन महीने में तैयार कर लिया गया।</p>
<p>ARDE द्वारा किए गए कठोर परीक्षणों के बाद इस हथियार को मंजूरी मिली। इन परीक्षणों में ड्रॉप टेस्ट, मौसम परीक्षण, मिट्टी परीक्षण, और 2,400 राउंड का विश्वसनीयता परीक्षण शामिल थे। श्रीनिवास ने बताया, &#8220;हमने इसे केवल छह महीने में विकसित किया, लेकिन लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अधिक समय लगा।&#8221;</p>
<p><strong>ASMI की विशेषताएं</strong></p>
<p>ASMI एक 9&#215;19 मिमी कैलिबर सबमशीन गन है, जिसका वजन 2.4 किलोग्राम से कम है। यह इसे उजी और MP5 की तुलना में 10-15% हल्का बनाता है। इसके अलावा, यह 30% तक सस्ता है, जिसकी कीमत 1 लाख रुपये से भी कम है।</p>
<ul>
<li>यह एयरोस्पेस ग्रेड एल्युमीनियम से बना है और इसमें सिंगल यूनीबॉडी रिसीवर है।</li>
<li>इसमें तीन मोड हैं: सुरक्षा, सिंगल शॉट और ऑटो।</li>
<li>यह 800 राउंड प्रति मिनट की दर से फायर करता है और इसकी मैगजीन क्षमता 32 राउंड है।</li>
<li>यह स्थानीय रूप से निर्मित गोला-बारूद के साथ-साथ NATO मानक गोला-बारूद के लिए भी उपयुक्त है।</li>
<li>फोल्डेबल बट इसे एर्गोनॉमिक रूप से कॉम्पैक्ट और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाती है।</li>
</ul>
<p>श्रीनिवास ने कहा, &#8220;यह न केवल हल्का और मजबूत है, बल्कि भारतीय सेना के परीक्षणों में इसकी सटीकता भी साबित हो चुकी है।&#8221;</p>
<p><strong>आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम</strong></p>
<p>लोकेश मशीन्स ने यह कदम 2015-2019 के बीच उठाया, जब ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी से जूझ रहा था। कंपनी ने ऑटोमोटिव उद्योग पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए रक्षा क्षेत्र में कदम रखा।</p>
<figure id="attachment_4342" aria-describedby="caption-attachment-4342" style="width: 2560px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4342" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1609" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-300x188.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-1024x643.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-768x483.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-1536x965.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_221420_TOI-1-2048x1287.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /><figcaption id="caption-attachment-4342" class="wp-caption-text">एएसएमआई प्रति मिनट 800 राउंड की दर से फायर करता है और इसकी मैगजीन क्षमता 32 राउंड की है (फोटो: एडीजी पीआई &#8211; इंडियन आर्मी)</figcaption></figure>
<p><strong>हथियार निर्माण में लोकेश मशीन्स का भविष्य</strong></p>
<p>ASMI की सफलता के बाद, लोकेश मशीन्स ने छोटे हथियारों के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने स्वदेशी रूप से 7.62&#215;51 मिमी बेल्ट-फेड लाइट मशीन गन (LMG) विकसित की है, जिसकी रेंज 800 मीटर है।</p>
<p>इसके अलावा, कंपनी ने 7.62&#215;51 मिमी बेल्ट-फेड सामान्य प्रयोजन मशीन गन (GPMG) भी डिजाइन की है। इस GPMG की रेंज 1,000 मीटर है, जिसे बैरल की लंबाई बढ़ाकर 1,200 मीटर तक किया जा सकता है। GPMG को सेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा टैंकों, विमानों, जीपों और जहाजों पर उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। श्रीनिवास ने बताया, &#8220;यह GPMG ड्रोन को मार गिराने के लिए भी इस्तेमाल हो सकती है।&#8221;</p>
<p><strong>NSG और असम राइफल्स की पसंद</strong></p>
<p>ASMI ने भारतीय सेना के अलावा, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और असम राइफल्स का भी ध्यान खींचा है। NSG ने पहले ही इसका पायलट परीक्षण किया है, और असम राइफल्स ने इसे अपने शस्त्रागार में शामिल करने के लिए मंजूरी दे दी है।</p>
<p><strong>लोकेश मशीन्स: इंजीनियरिंग का लंबा इतिहास</strong></p>
<p>लोकेश मशीन्स का इतिहास इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार से भरा है। 1996 में, कंपनी ने CNC मशीनों का निर्माण शुरू किया। महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों के लिए इंजन ब्लॉक बनाने से लेकर अब भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार बनाने तक का यह सफर प्रेरणादायक है।</p>
<p>महिंद्रा ने अपनी स्कॉर्पियो लाइन के लॉन्च के समय लोकेश मशीन्स के इंजन ब्लॉक का उपयोग किया। आज, यह कंपनी प्रतिदिन 1,000 से अधिक इंजन ब्लॉक बनाती है।</p>
<p><strong>वैश्विक हथियार बाजार में भारत की पहचान</strong></p>
<p>ASMI की सफलता ने न केवल भारत में आत्मनिर्भरता को बल दिया है, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में भारतीय कंपनियों की उपस्थिति को भी मजबूत किया है। लोकेश मशीन्स अब अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर निर्यात करने की योजना बना रही है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष &#8220;आत्मनिर्भर भारत की उड़ान&#8221;</strong></p>
<p>ASMI की कहानी आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का उदाहरण है। यह भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और स्वदेशी विकास की क्षमता को दर्शाती है। लोकेश मशीन्स की यह उपलब्धि भारतीय सेना के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही यह भारतीय उद्योग के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।</p>
<p>यह कहानी न केवल एक बंदूक की है, बल्कि एक ऐसे साहस और नवाचार की है जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय हथियार निर्माण के मंच पर सम्मानजनक स्थान दिलाया। ASMI ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता हो, तो भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में न केवल खड़ा हो सकता है, बल्कि जीत भी सकता है।</p>
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		<item>
		<title>तहसील परिसर में मारपीट से मचा हड़कंप, पुलिस बनी मूक दर्शक</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/there-was-chaos-due-to-fighting-in-tehsil-premises-police-became-silent-spectators/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 12:46:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>औरैया, 4 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बिधूना तहसील परिसर में आज शर्मनाक घटनाक्रम देखने को</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/there-was-chaos-due-to-fighting-in-tehsil-premises-police-became-silent-spectators/">तहसील परिसर में मारपीट से मचा हड़कंप, पुलिस बनी मूक दर्शक</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>औरैया, 4 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बिधूना तहसील परिसर में आज शर्मनाक घटनाक्रम देखने को मिला, जब जमीनी विवाद के मामले में शांति भंग के आरोप में लाए गए आरोपी आपस में भिड़ गए। इस दौरान तहसील परिसर मानो अखाड़ा बन गया, जहां खुलेआम लात-घूंसे चले और कपड़े फट गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, जो स्थिति को संभालने की कोशिश करती नजर आई लेकिन पूरी तरह से विफल रही।</p>
<p>घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपियों को पुलिस शांति भंग के तहत लाकर एसडीएम कार्यालय ले जा रही थी, तभी किसी बात को लेकर उनमें कहासुनी हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि आरोपी एक-दूसरे पर टूट पड़े। इसके बाद पुलिस के सामने ही तहसील परिसर में मारपीट शुरू हो गई।</p>
<p><strong>मारपीट का वीडियो वायरल</strong><br />
यह पूरी घटना वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर ली। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे आरोपी खुलेआम एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं और पुलिस के जवान उन्हें अलग करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>पुलिस की इस लापरवाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना न केवल पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल उठाती है, बल्कि तहसील परिसर जैसे महत्वपूर्ण स्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।</p>
<p><strong>प्रशासन की ओर से बयान</strong><br />
पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों को शांतिपूर्ण तरीके से तहसील लाया गया था, लेकिन उनके बीच अचानक झगड़ा शुरू हो गया। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और स्थिति को काबू में लाने की कोशिश की। हालांकि, इस मामले में दोबारा शांति भंग के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p><strong>जमीनी विवाद और प्रशासन की विफलता पर उठे सवाल</strong></p>
<p>यह पूरा मामला बिधूना तहसील के क्षेत्र का है, जहां जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच पहले से ही तनाव चल रहा था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह विवाद काफी पुराना है, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार झगड़े हो चुके हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति भंग के आरोप में तहसील बुलाया था, लेकिन यहां भी विवाद शांत होने के बजाय और भड़क गया।</p>
<p><strong>तहसील परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल</strong><br />
घटना ने तहसील परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आमतौर पर तहसील परिसर को एक शांत और सुरक्षित जगह माना जाता है, लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया कि यहां भी कानून-व्यवस्था का पालन कराने में प्रशासन विफल हो रहा है।</p>
<p>स्थानीय निवासियों का कहना है कि तहसील परिसर में इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।</p>
<p><strong>पुलिस और प्रशासन की आलोचना</strong><br />
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते विवाद को रोकने में सक्षम होती, तो ऐसी शर्मनाक घटना न होती। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर आरोपियों को आमने-सामने लाया, जिससे झगड़े की नौबत आई।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong><br />
एसडीएम बिधूना ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि तहसील परिसर में इस तरह की घटनाएं अस्वीकार्य हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले की पूरी जांच की जाएगी और दोषी पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>घटना से उठे बड़े सवाल</strong></p>
<p style="padding-left: 40px;">1. क्या पुलिस विवादित पक्षों को तहसील परिसर में लाकर सही कदम उठा रही थी?</p>
<p style="padding-left: 40px;">2. तहसील परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?</p>
<p style="padding-left: 40px;">3. इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही कैसे तय की जाएगी?</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>तहसील परिसर में खुलेआम हुई इस मारपीट की घटना ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जमीनी विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पुलिस और प्रशासन को और अधिक सतर्कता और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो और जनता के आक्रोश के बाद प्रशासन इस मामले को कैसे संभालता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/there-was-chaos-due-to-fighting-in-tehsil-premises-police-became-silent-spectators/">तहसील परिसर में मारपीट से मचा हड़कंप, पुलिस बनी मूक दर्शक</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>स्वर्ण मंदिर में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/deadly-attack-on-akali-dal-president-sukhbir-singh-badal-in-golden-temple/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 04:41:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमृतसर]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[Deadly attack on Akali Dal President Sukhbir Singh Badal in Golden Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Golden temple]]></category>
		<category><![CDATA[Punjab]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमृतसर 4 दिसंबर। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/deadly-attack-on-akali-dal-president-sukhbir-singh-badal-in-golden-temple/">स्वर्ण मंदिर में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमृतसर 4 दिसंबर। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर स्वर्ण मंदिर परिसर में जानलेवा हमला करने की कोशिश ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। घटना उस समय हुई जब वह श्री हरमंदिर साहिब में धार्मिक सजा भुगतने और संगत का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। आरोपी ने अचानक उन पर गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के कारण सुखबीर बादल बाल-बाल बच गए। हमलावर को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान डेरा बाबा नानक निवासी नारायण सिंह चौड़ा के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक संगठन दल खालसा से जुड़ा है। घटना के बाद से स्वर्ण मंदिर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4311 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot.jpg" alt="" width="1723" height="940" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot.jpg 1723w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot-300x164.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot-1024x559.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot-768x419.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241204_100456_InShot-1536x838.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1723px) 100vw, 1723px" /></p>
<p>पंजाब पुलिस ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश थी या किसी बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोली चलने की आवाज से संगत में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। सुखबीर बादल ने इस हमले को उनकी धार्मिक यात्रा बाधित करने का प्रयास बताते हुए कहा कि वह इससे डरने वाले नहीं हैं। शिरोमणि अकाली दल ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक करार दिया और पंजाब सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p><iframe loading="lazy"  id="_ytid_54906"  width="640" height="360"  data-origwidth="640" data-origheight="360" src="https://www.youtube.com/embed/McB35JDWoEA?enablejsapi=1&#038;rel=1&#038;disablekb=0&#038;autoplay=0&#038;cc_load_policy=0&#038;cc_lang_pref=&#038;iv_load_policy=1&#038;loop=0&#038;fs=1&#038;playsinline=0&#038;autohide=2&#038;theme=dark&#038;color=red&#038;controls=1&#038;" class="__youtube_prefs__  epyt-is-override  no-lazyload" title="YouTube player"  allow="fullscreen; accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen data-no-lazy="1" data-skipgform_ajax_framebjll=""></iframe></p>
<p>पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटना की निंदा करते हुए पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, विपक्षी कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों ने भी इसे राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली घटना बताया है। घटना के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, और स्वर्ण मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थल पर सुरक्षा की चूक ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुखबीर सिंह बादल जैसे बड़े नेता पर हमला पंजाब की राजनीति में अस्थिरता का संकेत है और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है। घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/deadly-attack-on-akali-dal-president-sukhbir-singh-badal-in-golden-temple/">स्वर्ण मंदिर में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>संभल हिंसा पर सियासी बयानबाज़ी तेज़: अखिलेश यादव ने लगाया भाजपा पर गंभीर आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 05:44:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[लखीमपुर खीरी]]></category>
		<category><![CDATA[Akhilesh bayan]]></category>
		<category><![CDATA[Akhilesh yadav]]></category>
		<category><![CDATA[Samajwadi party]]></category>
		<category><![CDATA[Sapa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुए विवाद ने राज्य में राजनीति को</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, 3 दिसंबर। उत्तर प्रदेश में मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर हुए विवाद ने राज्य में राजनीति को गरमा दिया है। 24 नवंबर को हुई इस घटना में फायरिंग और पथराव के कारण पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग घायल हुए, जिनमें से अधिकांश पुलिसकर्मी हैं। इसके बाद इलाके में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और सांसद राम गोपाल यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले किए हैं।</p>
<p><strong>सपा प्रमुख ने साधा भाजपा पर निशाना</strong></p>
<p>सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना को भाजपा की &#8220;सुनियोजित रणनीति&#8221; करार देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से आम जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि <strong>संभल की घटना भाजपा की सोची-समझी साजिश है। जिस दिन से संसद सत्र शुरू हुआ है, समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की है। हालांकि सदन नहीं चल सका, लेकिन हमारी मांग अब भी वही है।</strong></p>
<p>उन्होंने स्थानीय अधिकारियों पर भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां के अधिकारी इस तरह से काम कर रहे हैं जैसे वे सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता हों। अखिलेश ने भाजपा पर देश की सौहार्द्रता और भाईचारे को नष्ट करने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया।</p>
<p><strong>&#8220;देश की एकता खतरे में&#8221;</strong></p>
<p>अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जो लोग धार्मिक स्थलों की खुदाई और सर्वेक्षण में लगे हैं, वे देश की एकता और सांस्कृतिक सौहार्द्रता को खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, <strong>जो लोग हर जगह खुदाई करना चाहते हैं, वे एक दिन इस देश के भाईचारे और सौहार्द्रता को खो देंगे।&#8221;</strong></p>
<p><strong>बांग्लादेश मुद्दे पर भी टिप्पणी</strong></p>
<p>बांग्लादेश में हिंदू संतों के अपमान पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि <strong>भारत सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना चाहिए। अगर वे हमारे संतों का सम्मान नहीं कर सकते, तो यह उनकी कमजोर नीति का परिणाम है।</strong></p>
<p><strong>राम गोपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील</strong></p>
<p>सपा सांसद राम गोपाल यादव ने संभल हिंसा और मस्जिदों के सर्वेक्षण को लेकर उठाए जा रहे कदमों को &#8220;देशभर में अशांति पैदा करने की साजिश&#8221; बताया। उन्होंने कहा कि <strong>इस तरह के सर्वेक्षणों का उद्देश्य केवल साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाना है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे आदेश देने वाले जजों पर कार्रवाई करनी चाहिए।</strong></p>
<p><strong>संभल हिंसा: घटना का विवरण</strong></p>
<p>संभल में 24 नवंबर को मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर विवाद तब बढ़ गया जब सर्वेक्षण टीम ने स्थानीय मस्जिद के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और देखते ही देखते यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया। पथराव और गोलीबारी की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई और लगभग 20 लोग घायल हो गए।</p>
<p>घायलों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>संभल के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने घटना के बाद प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि स्थिति को काबू में कर लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगा दी हैं और सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।</p>
<p><strong>राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर</strong></p>
<p>इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। सपा, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के बीच बयानबाज़ी जारी है। भाजपा ने सपा पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जबकि सपा ने भाजपा को &#8220;सांप्रदायिक ध्रुवीकरण&#8221; का जिम्मेदार ठहराया।</p>
<p><strong>भविष्य की राजनीति पर असर</strong></p>
<p>संभल हिंसा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकती है। संसद के आगामी सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, भाजपा इसे &#8220;कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम&#8221; बता रही है।</p>
<p><strong>सामाजिक सौहार्द्रता की परीक्षा</strong></p>
<p>संभल हिंसा और इसके बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भारत की सामाजिक सौहार्द्रता और धर्मनिरपेक्षता की परीक्षा हैं। यह घटना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दे राजनीति का मुख्य केंद्र बन सकते हैं।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>संभल की घटना ने देशभर में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को फिर से उजागर कर दिया है। जहां सपा और अन्य विपक्षी दल इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे &#8220;कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास&#8221; कह रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन और न्यायपालिका इस मामले को किस तरह से संभालते हैं और यह घटना आगामी चुनावों और सामाजिक सौहार्द्रता पर क्या प्रभाव डालती है।</p>
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		<title>मेक इन इंडिया: दस साल बाद सपना और वास्तविकता, जयराम रमेश ने आंकड़ों पर व्यक्त की चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Dec 2024 17:05:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/make-in-india-dream-and-reality-after-ten-years-jairam-ramesh-expressed-concern-over-the-figures/">मेक इन इंडिया: दस साल बाद सपना और वास्तविकता, जयराम रमेश ने आंकड़ों पर व्यक्त की चिंता</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता उत्पन्न करते हैं। इन आंकड़ों ने न केवल विकास दर में गिरावट को उजागर किया, बल्कि यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; अभियान का वादा आज भी अधूरा है। जीडीपी विकास दर में भारी गिरावट और विनिर्माण क्षेत्र की धीमी प्रगति ने भारत को उसकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों की पुनर्समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।</p>
<p>विनिर्माण क्षेत्र, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है, जुलाई-सितंबर 2024 तिमाही में केवल 2.2% की दर से बढ़ा। यह 2014 में शुरू किए गए मेक इन इंडिया अभियान के वादों के बिल्कुल विपरीत है, जिसका उद्देश्य भारत को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र और निर्यातक के रूप में स्थापित करना था। निर्यात वृद्धि भी केवल 2.8% तक सिमट गई है, जो इस योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।</p>
<p><strong>विनिर्माण क्षेत्र की गिरावट और रोजगार पर प्रभाव</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में जारी इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के दस साल बाद भी भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर या पिछड़ता हुआ नजर आता है। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान 2011-12 में 18.1% था, जो 2022-23 तक गिरकर 14.3% हो गया। इस गिरावट ने न केवल अर्थव्यवस्था की प्रगति पर असर डाला है, बल्कि रोजगार की स्थिति को भी गंभीर बना दिया है।</p>
<p>2017 में जहां विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की संख्या 51.3 मिलियन थी, 2022-23 तक यह घटकर केवल 35.65 मिलियन रह गई। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मेक इन इंडिया अपने सबसे बड़े वादे—रोजगार सृजन—को पूरा करने में विफल रहा है।</p>
<p><strong>निर्यात के मोर्चे पर निराशा</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मेक इन इंडिया का एक प्रमुख लक्ष्य भारत को एक वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना था। लेकिन 2024 तक की स्थिति इस वादे से बिल्कुल अलग है। वस्त्र जैसे पारंपरिक रोजगार-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात में गिरावट ने भारत को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से पीछे कर दिया है।</p>
<ul>
<li>2013-14 में भारत का वस्त्र निर्यात 15 बिलियन डॉलर था।</li>
<li>2023-24 में यह गिरकर 14.5 बिलियन डॉलर रह गया।</li>
</ul>
<p>इस गिरावट के कारण रोजगार पर और अधिक दबाव पड़ा है, क्योंकि वस्त्र उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार का स्रोत है। वैश्विक व्यापार में भारत का हिस्सा स्थिर बना हुआ है, लेकिन निर्यात का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान घटा है।</p>
<p><strong>चीन से आयात का दबाव</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कर कटौती और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों की घोषणा की गई थी। लेकिन सच्चाई यह है कि चीन से सस्ते आयात ने भारतीय विनिर्माण उद्योग पर गहरा प्रहार किया है।</p>
<ul>
<li>गुजरात के स्टेनलेस स्टील उद्योग का उदाहरण इस समस्या को स्पष्ट करता है।</li>
<li>यहां चीन से आयातित सस्ती वस्तुओं के कारण एक तिहाई एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) बंद हो गए हैं।</li>
</ul>
<p>चीन से आयातित वस्तुओं की गुणवत्ता और कीमत के कारण भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। कई उद्योगों में उत्पादन लागत को कम करने के प्रयासों के बावजूद, चीन के उत्पाद बाजार पर हावी हैं।</p>
<p><strong>विफल नीतियां और निजी निवेश की कमी</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मेक इन इंडिया योजना के तहत निजी निवेश आकर्षित करने में सरकार बुरी तरह विफल रही है। हालांकि कर कटौती और अन्य प्रोत्साहनों की घोषणाएं की गईं, लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आया। बड़े उद्योगों ने मेक इन इंडिया के तहत निवेश करने से परहेज किया, क्योंकि नीति निर्माण में पारदर्शिता की कमी रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने इस योजना की विफलता को &#8220;मेक-बिलीव इन इंडिया&#8221; करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रचार से अधिक कुछ नहीं है। इसके विपरीत, उन्होंने 2005-2015 के दशक को भारत के निर्यात के लिए एक स्वर्णिम युग बताया। उस समय भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा तेजी से बढ़ा, जो मुख्यतः डॉ. मनमोहन सिंह की नीतियों का परिणाम था।</p>
<p><strong>भविष्य की राह: समाधान क्या हो सकते हैं?</strong></p>
<p>भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता और निर्यात वृद्धि को पुनर्जीवित करने के लिए नीतिगत बदलावों की सख्त जरूरत है।</p>
<p><strong>1. स्थानीय उद्योगों को संरक्षण</strong><br />
भारत को चीन से आयातित सस्ती वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए आयात पर शुल्क बढ़ाना और घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रोत्साहन देना जरूरी है।</p>
<p><strong>2. तकनीकी सुधार और निवेश</strong><br />
उत्पादन प्रक्रियाओं में तकनीकी सुधार के साथ-साथ अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर जोर देना होगा। इससे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।</p>
<p><strong>3. एमएसएमई का सशक्तिकरण</strong><br />
छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्हें वित्तीय सहायता, आसान ऋण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करनी होगी।</p>
<p><strong>4. विदेशी निवेश को आकर्षित करना</strong><br />
विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए पारदर्शी और स्थिर नीतियों की जरूरत है। साथ ही, निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना होगा।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><strong>5. रोजगार-प्रधान क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना</strong><br />
वस्त्र, चमड़ा, फर्नीचर और अन्य रोजगार-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना होगा। इन क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां बनानी होंगी।</p>
<p>मेक इन इंडिया योजना अपने आरंभ से ही एक महत्वाकांक्षी प्रयास रही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में सरकार असफल रही है। दस साल बाद भी, यह योजना न तो रोजगार सृजन में सफल हो पाई और न ही भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर पाई।</p>
<p>आज भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह इन विफलताओं से सबक ले और अपनी नीतियों को वास्तविकता के अनुरूप बनाए। मेक इन इंडिया को केवल एक प्रचार अभियान से आगे बढ़ाकर ठोस आर्थिक सुधारों का आधार बनाना होगा। यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाए गए, तो भारत के आर्थिक विकास को भारी नुकसान हो सकता है।</p>
<p>मेक इन इंडिया का सपना साकार करने के लिए सरकार को अब जमीनी सच्चाई पर काम करना होगा। तभी यह योजना भारत के विकास का आधार बन सकेगी, अन्यथा यह केवल एक अधूरा वादा बनकर रह जाएगी।</p>
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		<item>
		<title>मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों को श्रद्धांजलि और पुनर्निर्माण के लिए कांग्रेस की अपील</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Nov 2024 14:31:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Gandhi Vadra]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वायनाड, 30 नवंबर। मुंडक्कई और चूरलमाला में हालिया आपदा ने वायनाड के हर निवासी के दिल पर गहरी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/mundakkai-and-choorlamalla-tragedy-tribute-to-the-victims-and-congress-appeal-for-reconstruction/">मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों को श्रद्धांजलि और पुनर्निर्माण के लिए कांग्रेस की अपील</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>वायनाड, 30 नवंबर। मुंडक्कई और चूरलमाला में हालिया आपदा ने वायनाड के हर निवासी के दिल पर गहरी चोट पहुंचाई है। इस त्रासदी में न जाने कितने परिवार अपने प्रियजनों और आजीविका से वंचित हो गए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भावुक संबोधन में पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और वायनाड की जनता को यह भरोसा दिलाया कि वे हर कदम पर उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और यूडीएफ नेताओं से आग्रह किया कि इस कठिन समय में सरकार पर दबाव डालकर प्रभावितों के लिए सहायता सुनिश्चित की जाए।</p>
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<p><strong>त्रासदी के घाव और राहत कार्य की प्राथमिकता</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने इस आपदा के विनाशकारी प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा, “यह वायनाड के इतिहास का बेहद दर्दनाक अध्याय है। उन लोगों की मदद करना, जिन्होंने अपने घर, परिवार और सपनों को खो दिया है, हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए ठोस और कारगर कदम उठाने चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कांग्रेस और यूडीएफ के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हरसंभव तरीके से जरूरतमंदों की सहायता करें। “हम सरकार नहीं हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें। हम अपनी सीमाओं में रहते हुए भी पीड़ितों की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं,” उन्होंने कहा।</p>
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<p><strong>केरल की एकजुटता: मानवता की मिसाल</strong></p>
<p>इस त्रासदी के बीच, केरल के विभिन्न हिस्सों से आए समर्थन को देखते हुए राहुल गांधी ने कहा, “केरल ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि जब इंसानियत की परीक्षा होती है, तो यहां के लोग हमेशा साथ खड़े होते हैं। यह एकजुटता न केवल वायनाड बल्कि पूरे राज्य को एक नई ऊर्जा देती है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में वायनाड के लोग, पूरे राज्य की मदद से, अपने जीवन को फिर से खड़ा करेंगे। उन्होंने इस भावना को पुनर्निर्माण की प्रक्रिया का आधार बताया।</p>
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<p><strong>वायनाड के लोगों का भरोसा और राहुल गांधी की भूमिका</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने वायनाड के लोगों से अपने भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा, “जब मैंने पांच साल पहले वायनाड के सांसद के रूप में शपथ ली थी, तब से लेकर आज तक आपके विश्वास ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। आज मेरी बहन भी आपकी प्रतिनिधि हैं। यह हमारे लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है।”</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि वायनाड के लोगों का भरोसा केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है। “जब मैं वायनाड के किसी छोटे बच्चे को देखता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि उसके परिवार ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उसे निभाना मेरी प्राथमिकता है,” उन्होंने कहा।</p>
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<p><strong>संविधान की रक्षा: वैचारिक लड़ाई का नया अध्याय</strong></p>
<p>भारतीय संविधान की रक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह समय केवल राहत और पुनर्निर्माण का नहीं, बल्कि एक गहरी वैचारिक लड़ाई का भी है। उन्होंने कहा, “हम ऐसी विचारधारा के खिलाफ लड़ रहे हैं जो देश को बांटने का काम करती है। हमारी विचारधारा इंसानियत, प्रेम और एकता की है, जबकि भाजपा की विचारधारा नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “संविधान में हर नागरिक को समान अधिकार दिया गया है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि कुछ लोगों को विशेष दर्जा मिले। यह न केवल संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि हर भारतीय के साथ अन्याय भी है।”</p>
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<p><strong>वायनाड को अनदेखा करना: केंद्र सरकार की असंवेदनशीलता</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने वायनाड के प्रति केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि आपदा के बावजूद, इस क्षेत्र को केंद्र की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने वायनाड के लोगों को उनके सबसे कठिन समय में अकेला छोड़ दिया है। यह न केवल संवेदनहीनता है, बल्कि उनके संवैधानिक दायित्व का भी उल्लंघन है।” उन्होंने कहा कि वायनाड के लोगों को इस कठिनाई से उबारने के लिए केंद्र सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।</p>
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<p><strong>जनता बनाम सत्ता का संघर्ष</strong></p>
<p>भाजपा की सत्ता और कांग्रेस की वैचारिक लड़ाई पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा के पास पैसा, मीडिया और सरकारी एजेंसियां हैं, जबकि कांग्रेस के पास जनता का समर्थन है। उन्होंने कहा, “भाजपा ने सीबीआई, ईडी और आईटी जैसे संस्थानों को अपने हथियार बना लिया है, लेकिन जनता की भावना हर बार इन ताकतों को हरा देती है।”</p>
<p>उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां भाजपा की विचारधारा को हराने में सफल होंगी। “यह लड़ाई केवल राजनीतिक सत्ता की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और समानता की रक्षा की है। यह लड़ाई भारत के भविष्य को बचाने की है।</p>
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<p><strong>वायनाड का पुनर्निर्माण: सभी की जिम्मेदारी</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने वायनाड के पुनर्निर्माण को एक सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसमें हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा, “यह समय वायनाड को फिर से खड़ा करने का है। हमें इसे केवल पुनर्निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखना चाहिए।”</p>
<p>उन्होंने वायनाड के लोगों से अपील की कि वे धैर्य रखें और अपने सपनों को साकार करने के लिए एकजुट रहें। “हम एक मजबूत और बेहतर वायनाड बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और किसी को पीछे न छोड़ा जाए,” उन्होंने कहा।</p>
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<p><strong>मानवता और एकता की विजय</strong></p>
<p>मुंडक्कई और चूरलमाला की त्रासदी ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत की भावना हर कठिनाई को पार कर सकती है। वायनाड के लोग, राहुल गांधी और कांग्रेस के समर्थन से, इस चुनौतीपूर्ण समय से उबरने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>यह केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि वायनाड के लोगों के साथ राहुल गांधी के गहरे जुड़ाव और उनके अधिकारों और सपनों की रक्षा के लिए उनकी दृढ़ता का प्रमाण था। यह दिखाता है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो हर संकट का समाधान संभव है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/mundakkai-and-choorlamalla-tragedy-tribute-to-the-victims-and-congress-appeal-for-reconstruction/">मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों को श्रद्धांजलि और पुनर्निर्माण के लिए कांग्रेस की अपील</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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