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	<title>Education Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>“जाति विरासत पर सुप्रीम कोर्ट का नया दृष्टिकोण: मां की जाति भी बनेगी आधार, CJI ने उठाए बड़े सवाल”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Dec 2025 13:15:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA["Supreme Court's new approach on caste inheritance: Mother's caste will also be a basis]]></category>
		<category><![CDATA[Caste certificate]]></category>
		<category><![CDATA[CJI raises important questions."]]></category>
		<category><![CDATA[Mother's caste will also be a basis]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने न केवल जाति</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/supreme-courts-new-approach-on-caste-inheritance-mothers-caste-will-also-be-a-basis-cji-raises-important-questions/">“जाति विरासत पर सुप्रीम कोर्ट का नया दृष्टिकोण: मां की जाति भी बनेगी आधार, CJI ने उठाए बड़े सवाल”</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा दुर्लभ और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने न केवल जाति प्रमाणपत्र जारी करने की पारंपरिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि संविधान के तहत समानता, सामाजिक न्याय और बदलते सामाजिक ढांचे को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की दो-judge बेंच ने पहली बार स्पष्ट रूप से कहा कि <em>बदलते समय में यह विचारणीय है कि जाति प्रमाणपत्र केवल पिता की जाति के आधार पर क्यों जारी किया जाए?</em> अदालत ने इस बात को स्वीकार किया कि परिस्थितियों और सामाजिक वास्तविकताओं के अनुसार, मां की जाति के आधार पर भी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाना संभव और उचित हो सकता है।</p>
<p>यह फैसला पुडुचेरी की एक नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में आया। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि लड़की को उसकी मां की “आदि द्रविड़” जाति के आधार पर अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र जारी किया जाए, ताकि उसका शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्रभावित न हो। इस आदेश को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा बल्कि इस मुद्दे पर गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि <em>कानून का व्यापक प्रश्न अभी खुला है और भविष्य में इस पर विस्तृत विचार होना बाकी है।</em></p>
<h2><strong>मामला क्या था?</strong></h2>
<p>पुडुचेरी निवासी मां ने स्थानीय तहसीलदार को आवेदन देकर अनुरोध किया था कि उसके तीन बच्चों—दो बेटियों और एक बेटे—को उसके जाति प्रमाणपत्र के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाए, क्योंकि वह हिंदू ‘आदि द्रविड़’ समुदाय से आती है, जो अनुसूचित जाति में शामिल है।</p>
<p>दिलचस्प रूप से, उसके पति की जाति अनुसूचित जाति में शामिल नहीं है। लेकिन मां ने यह तर्क दिया कि शादी के बाद से उसका पति उसी के माता-पिता के घर पर रहता है, और बच्चों का पालन-पोषण तथा सामाजिक माहौल उसकी जातीय-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में ही हुआ है। इस आधार पर उसने दावा किया कि बच्चों को SC प्रमाणपत्र मिलना चाहिए।</p>
<p>तहसीलदार ने आवेदन खारिज कर दिया, जिसके बाद यह मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने तहसीलदार को निर्देश दिया कि वह मां की जाति के आधार पर बच्चों को SC प्रमाणपत्र जारी करे, अन्यथा उनकी शिक्षा और भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।</p>
<p>सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन CJI सूर्यकांत की बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।</p>
<h2><strong>सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?</strong></h2>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा—</p>
<p><strong>“समय बदल रहा है। फिर केवल पिता की जाति के आधार पर ही जाति प्रमाणपत्र क्यों जारी किया जाए? माता की जाति के आधार पर भी यह संभव होना चाहिए।”</strong></p>
<p>उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि—</p>
<p><strong>“अगर हम यह सिद्धांत स्वीकार कर लें कि मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाणपत्र जारी हो सकता है, तब यह भी हो सकता है कि अनुसूचित जाति की महिला और उच्च जाति के पुरुष से पैदा हुए बच्चे, चाहे वे उच्च जाति के माहौल में पले-बढ़े हों, वे भी SC प्रमाणपत्र के हकदार हो जाएँ।”</strong></p>
<p>CJI ने इस मुद्दे को अत्यंत जटिल और सामाजिक रूप से संवेदनशील बताते हुए कहा कि <em>कानून के व्यापक प्रश्न</em>—कि बच्चे को जाति माता-पिता में से किससे विरासत में मिलनी चाहिए—पर विस्तृत विचार किए बिना अंतिम निर्णय नहीं दिया जा सकता। इसलिए फिलहाल अदालत ने केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखकर राहत दी है।</p>
<h2><strong>कानून का कौन-सा सवाल बाकी है?</strong></h2>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह मामला सिर्फ एक परिवार या एक लड़की का नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक संरचना और जाति की विरासत से जुड़ा है। अब तक भारतीय कानून और प्रशासकीय प्रथाओं में यह माना गया है कि—</p>
<p><strong>बच्चे की जाति पिता से निर्धारित होती है</strong>, जब तक कि असाधारण परिस्थितियों में कोई अलग आदेश न दिया जाए।</p>
<p>लेकिन देश में तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे, अंतरजातीय विवाहों की बढ़ती संख्या, मातृसत्तात्मक समुदायों की मौजूदगी, और महिलाओं के अधिकारों को लेकर आधुनिक न्यायिक दृष्टिकोण इस नियम को चुनौती दे रहे हैं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यह नियम बदल सकता है।</p>
<p>कई याचिकाएं पहले से ही लंबित हैं जिनमें यह चुनौती दी गई है कि पिता की जाति ही क्यों अंतिम मानी जाए। उन पर अलग से सुनवाई होगी।</p>
<h2><strong>इस फैसले की अहमियत</strong></h2>
<p>यह निर्णय <em>व्यक्तिगत मामले</em> के स्तर पर भले ही सीमित प्रतीत हो, लेकिन इसके निहितार्थ अनेक हैं—</p>
<ol>
<li><strong>मां की जाति का कानूनी महत्व बढ़ेगा।</strong></li>
<li><strong>अंतरजातीय विवाहों से पैदा बच्चों के अधिकारों की नई व्याख्या होगी।</strong></li>
<li><strong>सामाजिक न्याय के क्षेत्र में नई बहस शुरू होगी।</strong></li>
<li><strong>सकारात्मक भेदभाव (Reservation) के नियम बदल सकते हैं।</strong></li>
<li><strong>प्रशासनिक ढांचे को नई दिशानिर्देश बनाने होंगे।</strong></li>
</ol>
<p>यह फैसला महिलाओं के अधिकारों के दृष्टिकोण से भी बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक भारतीय सामाजिक संरचना में जातिगत पहचान अक्सर पिता के हाथ में केंद्रित रही है।</p>
<h2><strong>क्यों कहा जा रहा है कि यह बहस छेड़ देगा?</strong></h2>
<p>क्योंकि देश में आरक्षण एक अत्यंत संवेदनशील और अत्यधिक राजनीतिक विषय है। अगर भविष्य में यह मान लिया जाता है कि</p>
<p><strong>“जाति माता से भी मिल सकती है”</strong>,</p>
<p>तो कई नए प्रकार के विवाद और परिस्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:</p>
<ul>
<li>यदि एक SC महिला उच्च जाति में विवाह करती है, तो उसके बच्चे उच्च जाति के माहौल में पले-बढ़े होने के बावजूद SC प्रमाणपत्र पा सकते हैं।</li>
<li>इससे आरक्षण के वास्तविक लाभार्थियों और पात्रता की परिभाषा पर नया विमर्श शुरू होगा।</li>
<li>प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया भी जटिल होगी।</li>
</ul>
<h2><strong>आगे क्या?</strong></h2>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि—</p>
<p><strong>यह फैसला विशेष परिस्थितियों में दिया गया अंतरिम निर्णय है।</strong></p>
<p>साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि—</p>
<p><strong>“कानून का सवाल खुला है।”</strong></p>
<p>इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में इस पर बड़ी बहस और विस्तृत सुनवाई होगी, और संभव है कि जाति विरासत से जुड़ा एक <em>नया सिद्धांत</em> स्थापित हो।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का यह फैसला न केवल एक लड़की की शिक्षा और अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि आधुनिक भारतीय समाज में जातीय पहचान की कानूनी संरचना पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। यह निर्णय बताता है कि सुप्रीम कोर्ट समय के साथ बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को समझता है और संविधान की मूल भावना—समानता, न्याय और गरिमा—को ध्यान में रखते हुए नए रास्ते तलाशने को तैयार है।</p>
<p>यह फैसला आने वाले समय में देश की राजनीति, आरक्षण व्यवस्था, और जाति-संबंधी कानूनों पर गहरा असर डालेगा। अब सबकी निगाहें उन बड़ी याचिकाओं पर होंगी जिनमें पिता से मिलने वाली जाति के सिद्धांत को चुनौती दी गई है।</p>
<p><strong>कहना गलत नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक नई और ऐतिहासिक बहस की शुरुआत कर दी है।</strong></p>
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		<item>
		<title>टॉमसन कॉलेज गोंडा में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, डीएम नेहा शर्मा की सख्त कार्यवाही</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/corruption-exposed-in-thomson-college-gonda-strict-action-by-dm-neha-sharma/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Oct 2024 00:27:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
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		<category><![CDATA[टॉमसन कॉलेज गोंडा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 19 अक्टूबर। जिले के प्रतिष्ठित शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज (टॉमसन) में चल रहे वित्तीय अनियमितता</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/corruption-exposed-in-thomson-college-gonda-strict-action-by-dm-neha-sharma/">टॉमसन कॉलेज गोंडा में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, डीएम नेहा शर्मा की सख्त कार्यवाही</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>गोंडा 19 अक्टूबर। जिले के प्रतिष्ठित शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज (टॉमसन) में चल रहे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों का पर्दाफाश हुआ है। कॉलेज के तत्कालीन प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र के ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं। गोंडा की जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने इन आरोपों की जांच कराई और मिश्र के खिलाफ सख्त कदम उठाए। न सिर्फ उन्हें प्रबंध समिति से विलोपित किया गया बल्कि उनके स्थान पर नए कार्यकारी प्रबंधक की नियुक्ति भी की गई है। इस खबर में हम विस्तृत रूप से बताएंगे कि किस तरह से गंगा प्रसाद मिश्र ने कॉलेज में भ्रष्टाचार का खेल खेला और कैसे डीएम नेहा शर्मा ने इसे उजागर कर कठोर कार्रवाई की।</p>
<p><strong>गंगा प्रसाद मिश्र: पूर्व प्रबंधक की ऊंची पहुंच और दबदबा</strong></p>
<p>गंगा प्रसाद मिश्र न केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, बल्कि उनकी ऊंची पहुंच ने उन्हें कॉलेज में काफी दबदबा दिलाया। वह पावर कॉर्पोरेशन के चर्चित एसडी एपी मिश्र के भाई होने के कारण कॉलेज में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए थे। यह कनेक्शन उनकी ताकत का स्रोत था, जिसकी वजह से उन्होंने जिलाधिकारी और कॉलेज की अध्यक्ष के आदेशों को अनदेखा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता और शिक्षा अधिकार कानून के उल्लंघन के आरोप थे, लेकिन उनकी ऊंची पहुंच के चलते वह किसी भी कार्रवाई से बचते रहे। लेकिन हाल ही में हुए प्रशासनिक जांच के बाद, उनके खिलाफ शिकंजा कसा गया और अब उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार और अनियमितता: वर्षों से चला आ रहा खेल</strong></p>
<p>शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज गोंडा का प्रतिष्ठित संस्थान है, लेकिन अगर आरोप की माने तो प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र के कार्यकाल में कॉलेज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं सामने आईं। वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले उजागर हुए। यह आरोप लगे कि कक्षा सात और आठ के छात्रों से अवैध बसूली की गई। इसके अलावा, कॉलेज की बाउंड्री तोड़कर दुकानों का निर्माण कराया गया, जिसके लिए लोगों से एक-एक लाख रुपये की अवैध मांग की गई और फिर इन दुकानों के किराए के समायोजन के नाम पर मनमानी की गई। इन दुकानों के निर्माण के लिए प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी और सारे कार्य नियमों के विपरीत किए गए। गंगा प्रसाद मिश्र ने कॉलेज की प्रबंध समिति की बैठकें तक अनियमित रूप से की और समिति के सदस्यों की सूचि निबंधक के पास अनुमोदित नहीं कराई। इतना ही नहीं, कॉलेज की वित्तीय स्थिति को नजरअंदाज करते हुए 43 लाख 95 हजार रुपये का अनियमित ऋण भी लिया गया। मंडलीय ऑडिट में पाया गया कि कॉलेज प्रबंधन ने कई आवश्यक अभिलेख भी जमा नहीं किए थे।</p>
<p><strong>शिक्षा अधिकार अधिनियम का उल्लंघन</strong></p>
<p>एक और गंभीर आरोप यह है कि गंगा प्रसाद मिश्र ने शिक्षा अधिकार अधिनियम का उल्लंघन किया। यह अधिनियम छात्रों की शिक्षा के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन प्रबंधक ने इस कानून की धज्जियां उड़ाते हुए कक्षा सात और आठ के छात्रों से 190 रुपये की अवैध बसूली की। बाद में 50 रुपये तो लौटा दिए गए, लेकिन शेष राशि को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।</p>
<p><strong>डीएम नेहा शर्मा की सख्त कार्रवाई</strong></p>
<p>जब गोंडा की जिलाधिकारी नेहा शर्मा को यह जानकारी मिली कि कॉलेज में भ्रष्टाचार हो रहा है, उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व मंडलीय मंत्री और अधिवक्ता विनय शुक्ला ने डीएम से शिकायत की थी, जिसके आधार पर डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) से मामले की जांच कराई। डीआईओएस की जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि हुई।</p>
<p>जांच के आधार पर डीएम ने गंगा प्रसाद मिश्र को प्रबंध समिति से हटाने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। डीएम ने शिक्षा विभाग को भी मामले में कार्रवाई के आदेश दिए। इसके साथ ही, पूर्व प्रबंधक और प्रभारी प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।</p>
<p><strong>कॉलेज प्रबंधन में बदलाव</strong></p>
<p>डीएम ने तुरंत गंगा प्रसाद मिश्र को प्रबंधक पद से हटाकर उनके स्थान पर सूर्य प्रसाद मिश्र को कार्यकारी प्रबंधक नामित किया। इसके अलावा, प्रभारी प्रधानाचार्य राजकरण वर्मा को भी उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह डॉ. अवध शरण मिश्र ने प्रधानाचार्य का पदभार संभाला। यह सारे कदम कॉलेज में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए गए थे।</p>
<p><strong>भविष्य में विधिक कार्रवाई की संभावना</strong></p>
<p>जिलाधिकारी ने संकेत दिए हैं कि आगे की जांच के बाद गंगा प्रसाद मिश्र के खिलाफ और भी कड़ी विधिक कार्रवाई हो सकती है। वित्तीय अनियमितता और शिक्षा अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। यह मामला अब केवल कॉलेज के स्तर पर सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन भी इसे गंभीरता से ले रहा है और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है।</p>
<p>गोंडा के शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज (टॉमसन) में भ्रष्टाचार का मामला काफी गंभीर है। पूर्व प्रबंधक गंगा प्रसाद मिश्र की ऊंची पहुंच और दबदबा के कारण उन्होंने कॉलेज में वित्तीय अनियमितताएं कीं और शिक्षा अधिकार कानून का उल्लंघन किया। जिलाधिकारी नेहा शर्मा की सख्त कार्यवाही से इन मामलों का पर्दाफाश हुआ और अब आगे और भी कड़ी कार्रवाई होने की संभावना है। यह मामला साबित करता है कि भ्रष्टाचार का कोई भी रूप प्रशासनिक ढांचे से नहीं बच सकता, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/corruption-exposed-in-thomson-college-gonda-strict-action-by-dm-neha-sharma/">टॉमसन कॉलेज गोंडा में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, डीएम नेहा शर्मा की सख्त कार्यवाही</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>कभी भी खत्म किये जा सकते हैं मदरसा और मदरसा बोर्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 02:23:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Funding of Madras and the boards running them should be stopped]]></category>
		<category><![CDATA[Funding of madrasas and the boards running them should be stopped- NCPCR]]></category>
		<category><![CDATA[मदरसों की कार्यप्रणाली पर एनसीपीसीआर की चिंता: धार्मिक शिक्षा बनाम औपचारिक शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मदरसों की कार्यप्रणाली पर एनसीपीसीआर की चिंता: धार्मिक शिक्षा बनाम औपचारिक शिक्षा नई दिल्ली: देशभर में मदरसों की</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/funding-of-madrasas-and-the-boards-running-them-should-be-stopped-ncpcr/">कभी भी खत्म किये जा सकते हैं मदरसा और मदरसा बोर्ड</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मदरसों की कार्यप्रणाली पर एनसीपीसीआर की चिंता: धार्मिक शिक्षा बनाम औपचारिक शिक्षा</strong></p>
<p>नई दिल्ली: देशभर में मदरसों की कार्यप्रणाली और मुस्लिम बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में उनकी विफलता पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। हाल ही में आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र लिखकर सिफारिश की है कि मदरसों और उन्हें संचालित करने वाले बोर्डों को राज्य द्वारा दिए जाने वाले वित्त पोषण को बंद कर दिया जाए और इन संस्थाओं को भंग करने का निर्णय लिया जाए।</p>
<p>एनसीपीसीआर की रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है &#8216;<strong>आस्था के संरक्षक या अधिकारों के उत्पीड़क</strong>: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसा&#8217;, में मदरसों के संचालन के संबंध में उठाए गए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मदरसा बोर्ड बच्चों के अधिकारों की प्राप्ति में बहुआयामी चुनौतियाँ पेश करते हैं, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव, मुख्यधारा की शिक्षा से बहिष्कृत करना और जवाबदेही का न होना शामिल है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें</strong></p>
<p>आयोग का तर्क है कि मदरसा बोर्डों का गठन या शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) संहिताओं का पालन करने का मतलब यह नहीं है कि मदरसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) के प्रावधानों का पालन कर रहे हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया है कि मदरसों को औपचारिक स्कूलों में नामांकित किया जाना चाहिए। आयोग का मानना है कि &#8220;धार्मिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती, जो कि भारत के संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।&#8221;</p>
<p>इसके अतिरिक्त, एनसीपीसीआर ने सिफारिश की है कि अभिभावकों या माता-पिता की सहमति के बिना मदरसों में नामांकित सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को बाहर निकालकर उन्हें बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूलों में भर्ती कराया जाए। यह सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 28 पर आधारित है, जो नाबालिगों के मामले में माता-पिता या अभिभावकों की सहमति के बिना धार्मिक शिक्षा लागू करने पर रोक लगाता है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा साझा किए गए डेटा से यह स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में मदरसों में 9,446 गैर-मुस्लिम बच्चे नामांकित हैं, इसके बाद राजस्थान में 3,103, छत्तीसगढ़ में 2,159, बिहार में 69 और उत्तराखंड में 42 का स्थान है। कुल मिलाकर, यह संख्या लगभग 14,819 है। ओडिशा के मदरसा बोर्ड ने कहा है कि वहाँ कोई भी गैर-मुस्लिम छात्र नामांकित नहीं है, जबकि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने रिपोर्ट के अनुसार डेटा उपलब्ध नहीं कराया है।</p>
<p><strong>एनसीपीसीआर का दृष्टिकोण</strong></p>
<p>एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि &#8220;धार्मिक संस्थानों को आरटीई अधिनियम से छूट दिए जाने के कारण केवल धार्मिक संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे आरटीई के अनुरूप औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो गए हैं।&#8221; उन्होंने कहा, &#8220;बच्चों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जो कुछ भी किया गया, उसने अंततः गलत व्याख्या के कारण वंचना और भेदभाव की नई परतें पैदा कर दीं।&#8221;</p>
<p>आयोग ने यह भी कहा है कि मदरसे धार्मिक शिक्षा प्रदान करते हुए धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। यह चिंता जताई गई है कि मदरसों में बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा देने से उन्हें औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर रखा जा रहा है, जो कि उनके विकास के लिए आवश्यक है।</p>
<p><strong>सामाजिक प्रभाव</strong></p>
<p>मदरसों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा दी जाने वाली शिक्षा का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा से कट जाते हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति न केवल बच्चों के व्यक्तिगत विकास को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में भी असमानता और भेदभाव को बढ़ावा देती है।</p>
<p><strong>सरकार की जिम्मेदारी</strong></p>
<p>सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करे। एनसीपीसीआर की सिफारिशें इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। सरकार को चाहिए कि वह मदरसों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के लिए ठोस कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा का समान अवसर मिले।</p>
<p>इसके अलावा, यह आवश्यक है कि सरकार मदरसों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दे। मदरसों को सरकारी निगरानी में लाना और उनकी पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बनाना एक आवश्यक कदम होगा।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>हर बच्चे का अधिकार है कि उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। एनसीपीसीआर की रिपोर्ट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। मदरसों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने और सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा का समान अवसर देने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p>समाज को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। सभी समुदायों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को उनकी धार्मिक पहचान से अलग, एक समान शिक्षा प्राप्त हो, ताकि वे भविष्य में एक सशक्त नागरिक बन सकें।</p>
<p>यदि हम चाहते हैं कि हमारे देश का भविष्य उज्ज्वल हो, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चे शिक्षा की रोशनी में बढ़ें, न कि केवल धार्मिकता की परछाई में।</p>
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		<title>सेण्टर फॉर सिविल सोसाइटी ने कराया शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Mar 2024 12:03:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
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		<category><![CDATA[Central Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 मार्च 2024, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (सीसीएस) ने नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स एलायंस (एनआईएसए) और स्टोन्स2माइलस्टोन्स</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 मार्च 2024, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी (सीसीएस) ने नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स एलायंस (एनआईएसए) और स्टोन्स2माइलस्टोन्स के सहयोग से चुनिंदा स्कूल शिक्षकों के लिए &#8220;टॉक टैक्टिक्स: इम्पैक्टफुल कम्युनिकेशन इन इंग्लिश&#8221; मास्टरक्लास  अयोजित किया। इस मास्टरक्लास का नेतृत्व अनुभवी मास्टर ट्रेनर रूपा धवन ने किया, जिनके पास शिक्षकों के लिए पेशेवर विकास और नेतृत्व विकास में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है| इस कार्यक्रम का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया था। मास्टरक्लास में 120 से अधिक चयनित शिक्षकों ने भाग लिया, जो सीसीएस द्वारा बोलो इंग्लिश प्रोजेक्ट के सक्रिय भागीदार हैं, जिसका उद्देश्य शिक्षकों और कक्षाओं को सशक्त बनाकर बच्चों में अंग्रेजी भाषा कौशल में सुधार करना है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विभिन्न कक्षा सहभागिता तकनीकों और बच्चों को उनकी संबंधित कक्षाओं में संलग्न करने के माध्यम के रूप में अंग्रेजी का उपयोग करने पर ट्रेनर द्वारा प्रदान किया गया एक व्यापक और व्यावहारिक प्रशिक्षण था। शिक्षक ने गतिविधि-आधारित, मज़ेदार और भागीदारी वाले माहौल में कक्षा में जुड़ाव और अंग्रेजी संचार की मूल बातें सीखीं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2434" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240302_172223_Drive-300x296.jpg" alt="" width="300" height="296" /></p>
<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मधुसूदन सादुला, अध्यक्ष, तेलंगाना मान्यता प्राप्त स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन (टीआरएसएमए) थे, जिन्होंने ऐसे कार्यक्रमों की प्रासंगिकता पर जोर दिया और कहा कि &#8220;किसी को अपनी पसंद से शिक्षक बनना चाहिए, संयोग से नहीं&#8221;। उन्होंने आगे कहा कि &#8220;शिक्षक राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं और उस आवश्यकता को पूरा करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए उनकी क्षमता का निर्माण करना महत्वपूर्ण है&#8221;। वर्तमान चरण में इस कार्यक्रम में देश भर से 9200 से अधिक शिक्षक भाग ले रहे हैं। चल रहे चरण में भाग लेने वाले शिक्षकों में से, शीर्ष 80 शिक्षकों को कार्यक्रम के विभिन्न मॉड्यूल में उनके प्रदर्शन के आधार पर चुना जाएगा, और इंडिया हैबिटेट सेंटर में निर्धारित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में बहुत योग्य पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को उसी आयोजन के दौरान विशेष पुरस्कार भी प्राप्त होंगे।<br />
सभा में श्री राजेश मल्होत्रा, निदेशक-साईनाथ पब्लिक स्कूल, श्री संदीप सचदेवा, निदेशक-सन सी पब्लिक स्कूल, श्री सूर्यांश कुमार, शैक्षणिक समन्वयक-सूर्या मॉडल स्कूल श्री विकास जैन, निदेशक, जेजीएम स्कूल सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया और संबोधित किया। प्रभाकर रेड्डी, सलाहकार-टीआरएसएमए और डॉ. अमित चंद्रा, सीईओ, सीसीएस भी इस कार्यक्रम में मौजुद रह रहे हैं। नितेश आनंद, फेलो, सीसीएस ने कार्यक्रम के अंत में सभी को धन्यवाद ज्ञापन दिया और पहल की प्रासंगिकता और इसके तहत आने वाले कार्यक्रमों के बारे में साझा किया।</p>
<p>एक संयुक्त बयान में, सीसीएस और एनआईएसए ने अपना विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के मास्टरक्लास बजट निजी स्कूलों के शिक्षकों और भारत के भविष्य को आकार देने के अपने प्रतिबद्ध काम में लगातार सीखने और बेहतर बनने की उनकी उत्सुकता का एक शक्तिशाली प्रतिनिधित्व हैं।</p>
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		<title>सरस्वती डेंटल कॉलेज के 6 छात्रों को ओरल कैंसर के शल्यक्रिया में प्रशिक्षित करेगा केएसएसएससीआई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Oct 2023 12:33:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 18 अक्टूबर। आज सरस्वती डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के स्नातकोत्तर छात्रों की ओरो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी की अल्पकालिक निगरानी</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, 18 अक्टूबर। आज सरस्वती डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के स्नातकोत्तर छात्रों की ओरो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी की अल्पकालिक निगरानी की सुविधा के लिए सरस्वती डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसडीसीएंडएच) और कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट (केएसएसएससीआई) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और इसका आदान-प्रदान भी किया गया।<br />
प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में विभिन्न बैचों में केवल 06 छात्रों को संस्थान के हेड एंड नेक विभाग (ओएमएफएस) में पर्यवेक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे कि वो अति विशिष्ट एवं जटिल ओरल कैंसर के मरीजों पर शल्य क्रिया करने में दक्ष होंगे ।<br />
इस प्रकार स्नातकोत्तर छात्रों को विशेष रूप से कैंसर रोगियों में मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के जटिल मामलों में केएसएसएससीआई द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे उन्हें भविष्य में कैंसर रोगियों पर विशिष्ट मैक्सिलोफेशियल सर्जरी की जटिलता से निपटने में मदद मिलेगी। ओरो-मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में विशेषज्ञता वाले एमडीएस छात्रों के लिए डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) के अनुसार यह उनके पाठ्यक्रम का भी हिस्सा है।<br />
इस अवसर पर केएसएसएससीआई के निदेशक प्रोफेसर राधा कृष्ण धीमन, प्रोफेसर के.एन. दुबे, प्रिंसिपल, एसडीसी एंड एच, प्रो. जितेंद्र अरोड़ा, प्रमुख, ओरल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, एसडीसी एंड एच, डॉ. शरद सिंह, संकाय प्रभारी (अनुसंधान), केएसएसएससीआई, डॉ. गौरव सिंह, एचओडी, हेड एंड नेक (ओएमएफएस), केएसएसएससीआई और एमओयू समारोह के दौरान केएसएसएससीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला के साथ संस्थान के अन्य वरिष्ठ व्यक्ति उपस्थित थे।</p>
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		<title>डीएम ने किया अंडर-16 राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारम्भ,टीम अयोध्या के सतीश को मिला मैन आफ द मैच का पुरस्कार।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Feb 2023 12:04:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>यूपीसीए से सम्बद्धता के बाद गोंडा में बढेंगे रोजगार के अवसर- मो. फहीम गोंडा&#8211; जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>यूपीसीए से सम्बद्धता के बाद गोंडा में बढेंगे रोजगार के अवसर- मो. फहीम</p>
<p><strong>गोंडा</strong>&#8211; जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार ने गुरुवार को जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम पर उप्र क्रिकेट एसोसिएशन (सम्बद्ध बीसीसीआई) के निर्देशन में गोंडा क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) द्वारा कराए जा रहे अन्डर-16 राज्य स्तरीय टूर्नामेंट (गोंडा चैंलेंज कप-2023) का शुभारम्भ किया। इस मौके पर अपने सम्बोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि यूपीसीए के निर्देशन में गोंडा की सरजमी पर आज से शुरू होने वाला यह टूर्नामेंट जिले के क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने इस आयोजन में जिला प्रशासन की तरफ से हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी ने मैच की शुरुआत करते हुए बल्लेबाजी की तथा एक ओवर खेलकर नाट आउट रहे। इससे पूर्व डीएम ने स्टेडियम पर विजेता ट्राफी का अनावरण किया। पीएसी के बैण्ड वादकों ने डीएम का स्वागत करते हुए राष्ट्र गान की धुन बजाई। जिलाधिकारी ने सभी खिलाड़ियों को खेल मैदान पर राष्ट्र के गौरव को बढाने के उद्देश्य से सच्ची क्रीड़ा भावना से खेलने, खेल के मैदान अथवा उसके बाहर भी सदैव धूम्रपान का वहिष्कार करने और राष्ट्र की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने का शपथ दिलाया। यूपीसीए के पदाधिकारियों की उपस्थिति में डीएम ने टास उछाला, जिस पर बहराइच के कैप्टन ने पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। इस मौके पर यूपीसीए के उपाध्यक्ष मो. फहीम ने कहा कि यूपीसीए से सम्बद्धता के बाद न केवल गोंडा के वर्तमान क्रिकेट खिलाड़ियों के प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त होगा, अपितु 45 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पुराने क्रिकेट खिलाड़ियों को भी बीसीसीआई से प्रशिक्षण दिलाकर स्कोरर, अम्पायर, क्यूरेटर आदि के रूप में रोजगार का मौका मिल सकेगा।</p>
<p>अयोध्या ने बहराइच को किया परास्त</p>
<p>प्रतियोगिता के पहले दिन बहराइच एवं अयोध्या के मध्य खेला गया, जिसमें बहराइच के कप्तान ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए कार्तिकेय के 29, मार्कण्डेय के 26, नारायण के 19 रनों की मदद से कुल 133 रन जुटाए। अयोध्या की तरफ से सतीश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए मात्र 11 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। रहबर खान को दो, रवि और अभिषेक को एक-एक विकेट प्राप्त हुआ। 134 रन का पीछा करते हुए टीम अयोध्या की शुरुआत अच्छी नहीं रही। उन्होंने अपने पांच विकेट मात्र 44 रनों पर खो दिए थे, लेकिन पुनीत और शत्रुंजय (छठवें) विकेट के लिए शानदार 80 रनां की साझेदारी द्वारा मैच को अपनी तरफ मोड़ दिया। पुनीत के 42 रन पर आउट होने के बाद मात्र एक रन में फैज़ाबाद टीम के तीन विकेट गिर जाने से मैच एक बार फिर रोमांचक हो गया। लेकिन शत्रुंजय ने बहुत ही जिम्मेदारी के साथ नाबाद 42 रन बना कर अपनी टीम को जीत दिला दी। बहराइच की तरफ से आकाश, मयंक, तुषार और कृष्ण ने दो-दो विकेट हासिल किए। शानदार पांच विकेट हासिल करने वाले सतीश को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। फैज़ाबाद टीम के कप्तान विश्वजीत मिश्र ने आगे आने वाले मैच में और अच्छा प्रदर्शन करने का वायदा किया है।</p>
<p>हिन्दी और अंग्रेजी में हो रही कमेंट्री</p>
<p>मैच के दौरान हिन्दी तथा अंग्रेजी में कमेन्ट्री क्रमशः अतीउर्रहमान और शैलेन्द्र मणि ने की। यूपीसीए से आए रोहित यादव और आरिफ रजा ने अम्पायरिंग की जिम्मेदारी का निर्वहन किया। बीसीसीआई के स्कोरर विकास पाण्डेय ने अपनी जिम्मेदारी का सम्यक निर्वहन किया। इस मौके पर यूपी महिला क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन इशरत महमूद, फैजाबाद क्रिकेट एसोसिएशन अयोध्या के सचिव व जोनल प्रमुख उमैर अहमद, एससीपीएम गु्रप के चेयरमैन डा. ओएन पाण्डेय, प्रबंध निदेशक श्रीमती अलका पाण्डेय, आरबी राव मेमोरियल हास्पिटल के चेयरमैन डा. डीके राव, लखीमपुर क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अभिषेक शुक्ला, पूर्व क्रीडाधिकारी अतीकुर्रहमान अंसारी, फिरोज अहमद, राजीव कुमार, मो. अख्तर, विजय कृष्ण पाण्डेय, आफताब आलम, अरशद हुसैन, संजय, जावेद, केके मिश्रा, शहनवाज हुसैन आदि मौजूद रहे। प्रथम दिवस का मैच श्रीराम पब्लिक स्कूल की तरफ से स्पांसर किया गया था। विद्यालय के प्रबंधक रवि रस्तोगी ने मैन आफ द मैच का पुरस्कार प्रदान किया। जीसीए के पदाधिकारियों महेन्द्र सिंह छाबड़ा, प्रदीप मिश्रा, अजिताभ दुबे, विवेक लोहिया, दिनेश मिश्रा, जानकी शरण द्विवेदी आदि ने अतिथियों को बैज लगाकर, बुके भेंटकर तथा उत्तरीय पहनाकर स्वागत किया।</p>
<p>जीसीए के जनसम्पर्क अधिकारी जानकी शरण द्विवेदी ने बताया कि मैच के दूसरे दिन शुक्रवार को अलग-अलग खेल मैदानों पर दो मैच खेले जाएंगे। पहला मैच जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम पर जिला क्रिकेट एसोसिएशन अयोध्या व जिला क्रिकेट एसोसिएशन जालौन के बीच खेला जाएगा, जबकि दूसरा मैच रघुकुल विद्यापीठ सिविल लाइंस के ख्ेल मैदान पर जिला क्रिकेट एसोसिएशन बहराइच व क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ के मध्य खेला जाएगा। यह दोनों मैच पूर्वान्ह 10 बजे से शुरू होंगे।</p>
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		<title>पैसा लेकर मान्यता देने वाले अधिकारी अब जाएंगे जेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Dec 2022 01:14:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
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		<category><![CDATA[बेसिक शिक्षा विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ। स्कूलों में मान्यता देने में खेल पकड़ा गया तो कार्रवाई तय है। अब बेसिक शिक्षा विभाग स्कूल</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div id="divheading" class="headline">
<div id="divheading" class="headline"><b>लखनऊ। </b>स्कूलों में मान्यता देने में खेल पकड़ा गया तो कार्रवाई तय है। अब बेसिक शिक्षा विभाग स्कूल प्रबंधकों से फीडबैक लेगा कि मान्यता देने के बदले उन्होंने रिश्वत तो नहीं दी? यदि फीडबैक में पाया गया कि रिश्वत ली गई है तो संबंधित अधिकारी की विजिलेंस जांच करवाई जाएगी। इस सत्र में लगभग तीन हजार स्कूलों को मान्यता दी गई है।</div>
<div id="textView" class="articles_section_body_textview">
<div id="body" class="story_body">
<p>भ्रष्टाचार को खत्म करने और पारदर्शिता बरतने के लिए पिछले दो साल से मान्यता ऑनलाइन दी जा रही है। इसके बावजूद अधिकारी अपना ढर्रा छोड़ नहीं रहे है। बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता के प्रकरण लटकाने वाले 129 खण्ड शिक्षा अधिकारियों को विभाग पहले ही प्रतिकूल प्रविष्टि दे चुका है। अब मान्यता में भ्रष्टाचार की पकड़ के लिए फीडबैक लिया जा रहा है। इसके तहत मान्यता पाए हुए स्कूलों के प्रबंधकों के पास आईवीआरएस कॉल जाएगी। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मिड डे मील) के तहत आईवीआरएस के माध्यम से रिपोर्ट ली जाती है। यहीं से स्कूलों के प्रबंधकों पास कॉल जाएगी और उनका फीडबैक मान्यता पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। फीडबैक देने वाले प्रबंधक की पहचान गुप्त रखी जाएगी। यदि किसी स्तर पर पैसा लिया गया होगा तो विभाग आय से अधिक सम्पत्ति की विजिलेंस जांच करवाएगा।</p>
</div>
<p><span class="sub_article_head">बेसिक शिक्षा में मान्यता देने में होता है ‘खेल’</span></p>
<div class="sub_article_body">
<p>बेसिक शिक्षा विभाग में मान्यता में बहुत खेल चलता है। पैसे के चलते विभागीय अधिकारी-कर्मचारी फाइल को दबाए रखते हैं और पैसा लेकर मानकों की अनदेखी करते हुए नियमविरुद्ध मान्यता दे देते हैं। पिछले दो वर्षों से मान्यता का पोर्टल ऑनलाइन है। इसे जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के तहत शामिल किया गया था और एक महीने के अंदर मान्यता दी जानी है। इसके बावजूद अधिकारी विभिन्न तरीकों से फाइल को अटकाएं रखते हैं।</p>
</div>
</div>
</div>
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		<title>वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में प्राइवेट व्यक्तियों के सहारे होता है काम सौंप दी जाती है गोपनीय फाइल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Oct 2022 09:02:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[BSA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>गोण्डा 1 अक्टूबर। सरकार चाहे जितने नियम कानून बनाए लेकिन इसे कार्यालय में और धरातल पर लागू करने वाले अधिकारी और बाबू ही हैं और यही अधिकारी और बाबू अपने आर्थिक लाभ को साधने और खुद ना फसने के लिए बाहर के लोगों को कार्यालय में स्थान दे देते हैं और इन्हीं के सहारे सारे लेनदेन और काम निपटाते हैं</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2124" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004-1536x864.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0004.jpg 1599w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>हम बात कर रहे हैं गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय कि यहां पर पटल पर आपको बाबू के अलावा उनके दलाल काम करते हुए मिलेंगे चाहे वह उनका कंप्यूटर चलाना हो या फाइलें बनाना आज प्रभात भारत की टीम ने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय का जायजा लिया जहां पर अरुण शुक्ला नाम के बाबू के स्थान पर सनी सिंह काम करता हुआ मिला, गोंडा के बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा विभाग में आपको बिना किसी योग्यता और कोई परीक्षा पास के ही नौकरी मिल जाती है बस आपकी सिफारिश और जुगाड़ होना चाहिए ।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-2123 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-169x300.jpg" alt="" width="169" height="300" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-169x300.jpg 169w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-576x1024.jpg 576w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-768x1366.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008-864x1536.jpg 864w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0008.jpg 899w" sizes="(max-width: 169px) 100vw, 169px" /></p>
<p>गोंडा के लेखाकार विभाग में तैनात बाबू अरुण शुक्ला अपने चहेते एक प्राइवेट आदमी से अपना पूरा काम करवा रहे हैं और कंप्यूटर का सारा काम एक बाहरी व्यक्ति सनी सिंह नाम का करता है बस केवल अरुण कुमार शुक्ला मौज काटते हैं आज जब प्रभात भारत की टीम की टीम ने इसका रियलिटी चेक किया तो अरुण शुक्ला के ऑफिस में कंप्यूटर पर बैठा सनी सिंह का नाम का आदमी काम कर रहा था जब प्रभात भारत की टीम ने पूछा उन्होंने साफ कहा कि मैं यहाँ कार्यरत नहीं हूं मैं केवल कंप्यूटर का काम देखता हूं इतने में बाबू अरुण शुक्ला पहुंचे कहा कि मैं अपने काम के लिए नहीं बुलाता हूं कंप्यूटर का काम रहता है इसीलिए बुला लेता हूं कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर और कुछ कामों के लिए बुलाता हूं लेकिन बात तो यह है कि अरुण शुक्ला अपने काम करवाने के लिए बाहरी व्यक्ति को फाइलों के साथ कंप्यूटर का सारा डाटा भी शेयर करते हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोपनीयता की चीजों को ऐसे किसी बाहरी व्यक्ति को सौंपा जा सकता है फिलहाल प्रभात भारत की टीम पहुंचने के बाद बाहरी व्यक्ति सनी सिंह वहां से भागता ही नजर आया</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-2125" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-1024x576.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-768x432.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011-1536x864.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221001-WA0011.jpg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>फिलहाल पूरे मामले पर जब लेखा अधिकारी के पास प्रभात भारत की टीम पहुंची तो उन्होंने तो कैमरे पर कुछ नहीं बोला और यह कहा कि हम चार्ज पर है हम कोई भी बात नहीं बोल सकते और वहां से अपने चेंबर से भाग खड़े हुए अब सवाल इस बात का उठता है कि जब लेखाधिकारी ही अपने कार्यालय में हो रही खामियों के बारे में नहीं बताएंगे तो आखिर इस के बारे में कौन बताएगा और कौन कार्रवाई करेगा यह बड़ा सवाल है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bsa_office_vitt_ewam_lekha/">वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में प्राइवेट व्यक्तियों के सहारे होता है काम सौंप दी जाती है गोपनीय फाइल</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>गोंडा में भ्रष्टाचार की जड़ शिक्षा विभाग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Dec 2021 05:14:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[गोंडा]]></category>
		<category><![CDATA[BSA]]></category>
		<category><![CDATA[Dm gonda]]></category>
		<category><![CDATA[mukhyamantri]]></category>
		<category><![CDATA[uttar pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा 15 दिसम्बर, (संजय शुक्ला)। बड़ी खबर गोंडा के शिक्षा विभाग से है जहाँ अनुदानित विद्यालयों में फर्जी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bhrashtachar-ki-jad/">गोंडा में भ्रष्टाचार की जड़ शिक्षा विभाग</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id=":su" class="Ar Au Ao">
<div id=":sq" class="Am Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" contenteditable="true" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true">
<p>गोंडा 15 दिसम्बर, (संजय शुक्ला)। बड़ी खबर गोंडा के शिक्षा विभाग से है जहाँ अनुदानित विद्यालयों में फर्जी नियुक्ति करने के लिए एक नहीं दो दो फर्जी अखबार ही छाप डाले गए और वो भी 2014 के, विज्ञापन 2014 के अखबार में छपा गया क्योंकि नियुक्ति 2014 से करनी थी।</p>
<div>गोंडा में माध्यमिक शिक्षा विभाग हो या बेसिक शिक्षा विभाग हो दोनों में बड़े पैमाने पर फर्जी नियुक्तियां की गई माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुदानित कई स्कूलों में कई अध्यापकों को उनकी सेवा से बर्खास्त भी कर  दिया गया है तो बेसिक शिक्षा विभाग में एसआईटी जाँच भी चल रही है तो कई अध्यापक है कोर्ट की कृपा से भी नौकरी कर रहे है। एक बार फिर से अनुदानित विद्यालयों में  बैक डेट में नियुक्ति कराने  का प्रयास शुरू हो गया है जिसके लिए बैक डेट में दो अखबारों का विज्ञापन भी लगाया गया है जो फर्जी है जिसकी पुष्टि खुद अखबार प्रकाशित करने वाला संस्थान ही कर रहा है</div>
<div>इस पूरे मामले की शिकायत समाजसेवी जन सूचना अधिकार ऐक्टिविस्ट मनोज पांडेय ने कमिश्नर से कर जाँच  और कार्यवाही की मांग की है।</div>
</div>
</div>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bhrashtachar-ki-jad/">गोंडा में भ्रष्टाचार की जड़ शिक्षा विभाग</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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