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	<title>दिल्ली Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू: देश का पहला राज्य बना, जानिए क्या-क्या हुए बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jan 2025 10:22:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[know what changes have been made]]></category>
		<category><![CDATA[Ucc]]></category>
		<category><![CDATA[Uniform Civil Code]]></category>
		<category><![CDATA[Uniform Civil Code (UCC) implemented in Uttarakhand: It became the first state in the country]]></category>
		<category><![CDATA[कॉमन सिविल कोड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 27 जनवरी। उत्तराखंड राज्य ने 27 जनवरी 2025 को देश में इतिहास रचते हुए समान नागरिक</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/uniform-civil-code-ucc-implemented-in-uttarakhand-it-became-the-first-state-in-the-country-know-what-changes-have-been-made/">उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू: देश का पहला राज्य बना, जानिए क्या-क्या हुए बदलाव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 27 जनवरी। </strong>उत्तराखंड राज्य ने 27 जनवरी 2025 को देश में इतिहास रचते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू कर दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक निर्णय को &#8220;उत्तराखंड से निकली समानता की गंगा&#8221; बताया। इस नई संहिता के लागू होने के बाद विवाह, तलाक, विरासत, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे तमाम सामाजिक और व्यक्तिगत मुद्दों पर एक समान कानून लागू हो गया है। इस नियम के तहत राज्य के नागरिक, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति से हों, एक जैसे अधिकार और कर्तव्यों का पालन करेंगे।</p>
<p>यह निर्णय उत्तराखंड को देश का पहला ऐसा राज्य बनाता है जिसने समान नागरिक संहिता को न केवल लागू किया बल्कि इसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की तैयारी की है। इस ऐतिहासिक कदम ने भारत के संवैधानिक मूल्यों जैसे समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक नई मिसाल कायम की है।</p>
<h3><strong>समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन: ढाई साल की तैयारी</strong></h3>
<p>इस कानून को लागू करने के लिए ढाई साल की मेहनत की गई। 27 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने गहन अध्ययन और मंथन के बाद 2 फरवरी 2024 को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद 8 मार्च 2024 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति से इसे 12 मार्च 2024 को मंजूरी मिली।</p>
<p>इसके बाद राज्य सरकार ने तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों को सुनिश्चित किया। नागरिकों और अधिकारियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया और 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसके साथ ही मॉक ड्रिल और पंजीकरण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।</p>
<h3><strong>यूसीसी लागू होने के बाद मुख्य बदलाव</strong></h3>
<h4><strong>1. विवाह और तलाक के लिए पंजीकरण अनिवार्य</strong></h4>
<p>अब राज्य में शादी का पंजीकरण हर नागरिक के लिए अनिवार्य हो गया है। 26 मार्च 2010 के बाद शादी करने वाले प्रत्येक दंपति को अपनी शादी का पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण के विवाह को वैध नहीं माना जाएगा और ऐसा करने वालों पर अधिकतम ₹25,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।</p>
<h4><strong>2. बेटा और बेटी को संपत्ति में समान अधिकार</strong></h4>
<p>यूसीसी के तहत अब बेटा और बेटी माता-पिता की संपत्ति में समान अधिकार रखेंगे। किसी भी प्रकार का लिंगभेद समाप्त करते हुए, यह सुनिश्चित किया गया है कि परिवार की संपत्ति में बेटे और बेटी दोनों का हक एक समान होगा।</p>
<h4><strong>3. लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य</strong></h4>
<p>समान नागरिक संहिता के अंतर्गत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए माता-पिता की सहमति जरूरी होगी। साथ ही, रजिस्ट्रेशन के बिना 1 महीने से अधिक समय तक साथ रहने पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। इस प्रकार के संबंध से जन्मे बच्चों को वैध संतान माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।</p>
<h4><strong>4. बहुविवाह और हलाला पर रोक</strong></h4>
<p>अब उत्तराखंड में किसी भी धर्म का व्यक्ति बहुविवाह या हलाला जैसी प्रथाओं का पालन नहीं कर सकेगा। यह प्रथा पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है।</p>
<h4><strong>5. विवाह की आयु निर्धारण</strong></h4>
<p>सभी धर्मों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु तय कर दी गई है। लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले और लड़कों की शादी 21 वर्ष से पहले नहीं की जा सकती। नियम का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h4><strong>6. लिव-इन में अधिकार और दायित्व</strong></h4>
<p>लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को संबंध विच्छेद का पंजीकरण भी अनिवार्य होगा। साथ ही, इस दौरान महिला गुजारा भत्ते की मांग कर सकती है।</p>
<h4><strong>7. संपत्ति के अधिकारों में बदलाव</strong></h4>
<p>किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में पत्नी, माता-पिता और बच्चों को समान अधिकार मिलेगा। हालांकि, व्यक्ति अपनी संपत्ति का पहले से वसीयतनामा कर सकता है।</p>
<h3><strong>कैसे लागू हुआ यूसीसी?</strong></h3>
<p>इस कानून को लागू करने के लिए व्यापक स्तर पर सुझाव और विचार-विमर्श किया गया।</p>
<ul>
<li><strong>20 लाख सुझाव</strong> ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से प्राप्त हुए।</li>
<li><strong>2.5 लाख लोगों से सीधा संवाद</strong> कर उनकी राय ली गई।</li>
<li><strong>49 लाख एसएमएस और 29 लाख व्हाट्सएप संदेशों</strong> के जरिए लोगों से सुझाव लिए गए।</li>
</ul>
<p>इसके अलावा, यूसीसी लागू करने से पहले कई देशों की प्रणाली का अध्ययन किया गया। इनमें सऊदी अरब, इंडोनेशिया, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और जापान शामिल थे।</p>
<h3><strong>क्या कहती है सरकार?</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा कि यह फैसला उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। &#8220;यह समानता और न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह हमारे संविधान के मूलभूत अधिकारों को मजबूती प्रदान करेगा।&#8221;</p>
<h3><strong>यूसीसी के खिलाफ और पक्ष में तर्क</strong></h3>
<h4><strong>पक्ष में तर्क:</strong></h4>
<ol>
<li><strong>समानता:</strong> सभी धर्मों के लोगों को एक समान अधिकार मिलेंगे।</li>
<li><strong>महिला सशक्तिकरण:</strong> महिलाओं को तलाक, संपत्ति और अन्य अधिकारों में समानता मिलेगी।</li>
<li><strong>सामाजिक सुधार:</strong> बहुविवाह, हलाला और अन्य कुप्रथाओं पर रोक लगेगी।</li>
<li><strong>कानूनी एकरूपता:</strong> विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आएगी।</li>
</ol>
<h4><strong>विरोध में तर्क:</strong></h4>
<ol>
<li><strong>धार्मिक स्वतंत्रता:</strong> कुछ समूहों का मानना है कि यह उनके धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप है।</li>
<li><strong>संविधान की विविधता:</strong> आलोचकों का कहना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में एक समान कानून लागू करना व्यावहारिक नहीं है।</li>
</ol>
<h3><strong>आगे की राह</strong></h3>
<p>यूसीसी को लागू करने के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य में इसे लेकर क्या प्रतिक्रियाएं आती हैं। सरकार का कहना है कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब इसे सही ढंग से लागू किया जाएगा।</p>
<p>समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। देश के अन्य राज्य अब उत्तराखंड की ओर देख रहे हैं कि इस कानून के क्या परिणाम आते हैं।</p>
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		<item>
		<title> डॉ. दिनेश शर्मा का बयान: मोदी सरकार में संविधान &#8220;सर्वश्रेष्ठ अवस्था&#8221; की ओर अग्रसर</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/statement-of-dr-dinesh-sharma-constitution-is-moving-towards-best-state-under-modi-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Dec 2024 15:23:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Dinesh sharma]]></category>
		<category><![CDATA[Dr dinesh sharma]]></category>
		<category><![CDATA[MYogiAdityanath]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
		<category><![CDATA[Statement of Dr. Dinesh Sharma: Constitution is moving towards "best state" under Modi government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली/लखनऊ, 18 दिसंबर। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने संसद में संविधान</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/statement-of-dr-dinesh-sharma-constitution-is-moving-towards-best-state-under-modi-government/"> डॉ. दिनेश शर्मा का बयान: मोदी सरकार में संविधान &#8220;सर्वश्रेष्ठ अवस्था&#8221; की ओर अग्रसर</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली/लखनऊ, 18 दिसंबर। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने संसद में संविधान पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को भारतीय संविधान की &#8220;सर्वश्रेष्ठ अवस्था&#8221; की ओर अग्रसर करने वाला बताया। उन्होंने भारतीय संविधान को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की महान कृति और सामाजिक परिवर्तन व राष्ट्र निर्माण का शक्तिशाली उपकरण कहा। साथ ही विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी पर तीखे प्रहार किए।</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि &#8220;आज जो लोग संविधान की रक्षा की बात कर रहे हैं, वही लोग अतीत में इसे बार-बार चोट पहुंचाने के दोषी हैं।&#8221; उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह आरक्षण को समाप्त करने की मंशा पहले ही विदेशी मंचों पर जाहिर कर चुकी है। उन्होंने इसे कांग्रेस की &#8220;विदेशी सोच&#8221; का परिणाम बताते हुए कहा कि ऐसे लोग भारत में राष्ट्रवाद का पनपना बर्दाश्त नहीं कर सकते।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;विदेश जाकर देश की बदनामी करना, और विकास की पटरी से उसे उतारने का प्रयास करना कांग्रेस और विपक्ष का एकमात्र उद्देश्य रह गया है। इनके नेता भारत को शक्तिहीन बनाने की मंशा से काम कर रहे हैं।&#8221;</p>
<p><strong>गांधी परिवार और आपातकाल का जिक्र</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने गांधी परिवार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि उनके पूर्वजों का इतिहास संविधान की मर्यादा को बार-बार तार-तार करने का रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के परदादा ने सरकारों को गिराने की परंपरा शुरू की, जबकि उनकी दादी ने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान को अपमानित किया। &#8220;आपातकाल ने देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश की। जबरन नसबंदी कराई गई, और संवैधानिक व्यवस्थाओं को नष्ट किया गया।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सामाजिक न्याय के मुद्दों पर भी संविधान का दुरुपयोग किया। &#8220;मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने में कांग्रेस सरकारों ने जानबूझकर देरी की, जबकि पिछड़ों और दलितों को उनके अधिकार भाजपा के शासन में ही मिले,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p><strong>महिला अधिकारों और नारी सशक्तिकरण पर जोर</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने शाहबानो मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने महिला अधिकारों का हनन किया। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को नीति निर्माण में भागीदारी दी है। &#8220;आज उनकी आंखों में नए सपने हैं।&#8221; उन्होंने भारत के संविधान में रानी लक्ष्मीबाई की तस्वीर को नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।</p>
<p><strong>अटल बिहारी वाजपेयी और मोदी सरकार की भूमिका</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को &#8220;संविधान की पवित्रता सुनिश्चित करने वाला नेता&#8221; बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी के समय में क्षेत्रीय भाषाओं को महत्व देने और उन्हें आठवीं अनुसूची में शामिल करने का काम शुरू हुआ। &#8220;संविधान के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए खाली पड़े पदों को भरने का मार्ग प्रशस्त करने में अटल जी का अहम योगदान रहा।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं। &#8220;जीएसटी की नींव अटल जी के समय में रखी गई, जिसे मोदी सरकार ने मूर्त रूप दिया। आज इससे राजस्व में वृद्धि हुई और देश में विकास की नई गाथा लिखी गई।&#8221;</p>
<p><strong>विपक्ष की नीतियों पर हमला और मोदी सरकार की प्रशंसा</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने विपक्ष पर संविधान के प्रति नकारात्मक सोच रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने समय-समय पर संविधान को कमजोर करने का काम किया है। &#8220;कांग्रेस के शासनकाल में कई बार संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं। उनके नेता संविधान की हत्या में शामिल रहे हैं।&#8221;</p>
<p><strong>संविधान की आत्मा: समानता, न्याय और बंधुत्व</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान तभी प्रभावी हो सकता है जब समाज समानता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को आत्मसात करे। &#8220;संविधान समाज की आत्मा है। वर्तमान सरकार ने इन मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।&#8221;</p>
<p><strong>राज्यों के साथ बेहतर तालमेल</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अधिक राजस्व की प्राप्ति हो रही है, जिससे उनके विकास को गति मिली है। &#8220;संविधान का सम्मान करना और उसे बनाए रखना मोदी सरकार की प्राथमिकता है।&#8221;</p>
<p><strong>कांग्रेस की नीतियों की आलोचना</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान का दुरुपयोग करते हुए कई बार देश को नुकसान पहुंचाया। &#8220;आपातकाल के दौरान संविधान में बिना नियम-कायदे के अनुचित संशोधन किए गए। संवैधानिक व्यवस्थाओं को कमजोर किया गया।&#8221; उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संविधान विरोधी नीतियों से भरा पड़ा है।</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में अपने भाषण के दौरान कांग्रेस की बाबा साहेब अंबेडकर विरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया। &#8220;कांग्रेस और विपक्ष के झूठे नैरेटिव को जनता अब माफ नहीं करेगी। विधानसभा चुनावों में पराजय के बाद विपक्ष बौखला गया है और अब वह झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।&#8221;</p>
<p><strong>संविधान और राष्ट्रवाद का आपसी संबंध</strong></p>
<p>डॉ. शर्मा ने संविधान और राष्ट्रवाद के आपसी संबंध पर जोर देते हुए कहा कि &#8220;विदेशी सोच रखने वालों को भारत में राष्ट्रवाद का पनपना रास नहीं आता। वे विदेश जाकर देश की बदनामी करते हैं और विकास को बाधित करने का प्रयास करते हैं।&#8221; उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद को मजबूती मिली है।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संविधान अपने सर्वोत्तम स्वरूप की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को संविधान विरोधी नीतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वर्तमान सरकार संविधान की आत्मा को सजीव रखते हुए समाज के सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित कर रही है। उनका मानना है कि विपक्ष का झूठा प्रचार अब जनता के सामने आ चुका है, और वह इसे स्वीकार नहीं करेगी।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/statement-of-dr-dinesh-sharma-constitution-is-moving-towards-best-state-under-modi-government/"> डॉ. दिनेश शर्मा का बयान: मोदी सरकार में संविधान &#8220;सर्वश्रेष्ठ अवस्था&#8221; की ओर अग्रसर</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<item>
		<title>कांग्रेस का पलटवार: मोदी सरकार पर जॉर्ज सोरोस को आर्थिक मदद देने का आरोप</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/congresss-counter-attack-modi-government-accused-of-giving-financial-help-to-george-soros/</link>
					<comments>https://www.prabhatbharat.com/congresss-counter-attack-modi-government-accused-of-giving-financial-help-to-george-soros/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Dec 2024 17:53:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress's counter-attack: Modi government accused of giving financial help to George Soros]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
		<category><![CDATA[Supriya srinet]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 दिसंबर। कांग्रेस ने भाजपा और मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया है</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/congresss-counter-attack-modi-government-accused-of-giving-financial-help-to-george-soros/">कांग्रेस का पलटवार: मोदी सरकार पर जॉर्ज सोरोस को आर्थिक मदद देने का आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 10 दिसंबर। कांग्रेस ने भाजपा और मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि वे जॉर्ज सोरोस के नाम पर जनता को गुमराह कर रही हैं, जबकि हकीकत में मोदी सरकार खुद सोरोस को आर्थिक मदद दे रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने खुलासा किया कि भारत सरकार ने पिछले आठ वर्षों में संयुक्त राष्ट्र लोकतंत्र कोष (यूएन डेमोक्रेसी फंड) को नौ लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है, जिसका पैसा सीधे सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन तक पहुंचता है।</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार और भाजपा, अडानी को बचाने के लिए सोरोस के नाम पर नाटक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सोरोस के प्रोजेक्ट भारत में पहली बार 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए थे। उस समय ये प्रोजेक्ट छात्रवृत्तियां और फेलोशिप जैसे कार्यों तक सीमित थे। लेकिन 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद, इन प्रोजेक्ट्स का विस्तार हुआ और उन्होंने छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स में निवेश करना शुरू किया।</p>
<p>श्रीनेत ने बताया कि सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड के दो प्रमुख निवेशक सोंग और एस्पाडा हैं, जिन्होंने 90 मिलियन डॉलर छोटे उद्योगों, किसानों और स्टार्टअप्स में लगाए। इनमें से अधिकांश पैसा निओ ग्रोथ और कैपिटल फ्लोट जैसी कंपनियों को गया। उन्होंने कहा कि कैपिटल फ्लोट के संस्थापक गौरव हिंदुजा और शशांक ऋष्यशृंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं और अक्सर उनके साथ मंच साझा करते हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी दावा किया कि शशांक की शादी भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल वीरेन शाह की पोती प्रिया शाह से हुई थी। इस शादी में भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस रिश्ते को और स्पष्ट किया।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, &#8220;अगर जॉर्ज सोरोस भारत विरोधी गतिविधियां कर रहा है, तो मोदी सरकार उसका धंधा भारत में क्यों बंद नहीं कर रही? क्यों यूएन डेमोक्रेसी फंड को पैसे दिए जा रहे हैं, और क्यों सोरोस के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका से मांग नहीं की जा रही?&#8221;</p>
<p><strong>भाजपा पर कांग्रेस का कड़ा प्रहार: &#8220;फेक न्यूज और दोहरे मापदंड की राजनीति&#8221;</strong></p>
<p>श्रीनेत ने भाजपा के उस आरोप का भी कड़ा जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस विदेशी मीडिया का सहारा लेती है। उन्होंने इसे भाजपा का &#8220;दोहरे मापदंड की राजनीति&#8221; बताते हुए कहा कि जब विदेशी मीडिया मोदी सरकार की तारीफ करता है, तो भाजपा इसे पूरे गर्व के साथ साझा करती है। लेकिन जैसे ही वही मीडिया सरकार की आलोचना करता है, उसे विदेशी साजिश का हिस्सा बताया जाता है।</p>
<p>सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा द्वारा फ्रेंच मीडिया कंपनी मीडियापार्ट का हवाला देने को भी फर्जी करार दिया। उन्होंने कहा कि मीडियापार्ट ने खुद इस बात का खंडन किया है कि उसने जॉर्ज सोरोस को लेकर कोई रिपोर्ट प्रकाशित की थी। श्रीनेत ने पूछा कि अगर मीडियापार्ट भाजपा के लिए इतना विश्वसनीय है, तो राफेल डील को लेकर उसके खुलासे के समय भाजपा ने इसे झूठ क्यों बताया था?</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने ओसीसीआरपी (ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट) को भारत विरोधी बताया, जबकि यही संस्था अडानी के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का खुलासा कर चुकी है। श्रीनेत ने कहा कि भाजपा इन गंभीर आरोपों की जांच करवाने के बजाय अडानी को बचाने में जुटी हुई है।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ फेक न्यूज का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि अडानी पर लगे धोखाधड़ी, हेराफेरी और रिश्वत जैसे गंभीर आरोपों पर मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए है। &#8220;सरकार को अडानी के खिलाफ जांच शुरू करनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय वह अडानी के पक्ष में काम कर रही है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं के पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध सोरोस द्वारा पोषित फंड्स के साथ जुड़े हुए हैं। नरेंद्र मोदी द्वारा ऐसे व्यक्तियों के साथ मंच साझा करना इस बात का प्रमाण है।</p>
<p>श्रीनेत ने कहा, &#8220;यह स्पष्ट है कि भाजपा अडानी को बचाने के लिए सोरोस के नाम पर स्वांग रच रही है। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि सोरोस के पैसे से पोषित कंपनियों और व्यक्तियों से भाजपा का रिश्ता क्या है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने अंत में कहा कि भाजपा को फेक न्यूज और जनहित के मुद्दों को भटकाने की राजनीति छोड़कर देश में पारदर्शिता और ईमानदारी से शासन करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/congresss-counter-attack-modi-government-accused-of-giving-financial-help-to-george-soros/">कांग्रेस का पलटवार: मोदी सरकार पर जॉर्ज सोरोस को आर्थिक मदद देने का आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>प्रियंका गांधी ने वायनाड के लिए केंद्र से राहत की मांग की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 14:01:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Gandhi demands relief from the Center for Wayanad]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Gandhi Vadra]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 4 दिसंबर। कांग्रेस महासचिव और वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज केरल में</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/priyanka-gandhi-demand-relief-from-the-center-for-wayanad/">प्रियंका गांधी ने वायनाड के लिए केंद्र से राहत की मांग की</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 4 दिसंबर। कांग्रेस महासचिव और वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज केरल में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के लिए त्वरित राहत की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उनके साथ कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और केरल के अन्य सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी था। इस बैठक में उन्होंने वायनाड और अन्य प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का विस्तार से वर्णन करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल मदद का अनुरोध किया।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने बैठक के दौरान जोर देकर कहा कि इस त्रासदी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह न केवल केरल के लोगों के लिए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रियंका ने गृह मंत्री से आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए पर्याप्त धनराशि जारी करने की अपील की।</p>
<p><strong>आपदा की विभीषिका और केंद्र की उदासीनता</strong></p>
<p>वायनाड और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन ने कई परिवारों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, और सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रियंका गांधी ने बताया कि इस आपदा के कारण कई परिवार पूरी तरह समाप्त हो गए हैं। कुछ बच्चों ने अपने माता-पिता और पूरे परिवार को खो दिया है।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा, &#8220;इस तरह की त्रासदी के समय में, अगर केंद्र सरकार पीड़ितों की मदद नहीं करती, तो इससे बहुत गलत संदेश जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था, जिससे लोगों में यह उम्मीद जगी थी कि उन्हें केंद्रीय सहायता मिलेगी। लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा</strong></p>
<p>प्रियंका गांधी और प्रतिनिधिमंडल ने न केवल गृह मंत्री अमित शाह, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने वायनाड और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में जारी संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया और केंद्र से त्वरित राहत प्रदान करने का अनुरोध किया।</p>
<p><strong>गृह मंत्री का आश्वासन</strong></p>
<p>गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि गुरुवार शाम तक उन्हें इस मुद्दे पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार स्थिति का गंभीरता से मूल्यांकन करेगी और प्रभावितों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।</p>
<p><strong>प्रियंका गांधी का भावुक संदेश</strong></p>
<p>बैठक के बाद प्रियंका गांधी ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, &#8220;यह समय राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय पीड़ा को समझने का है। इस त्रासदी में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने अपने पूरे परिवार को खो दिया है। ऐसे में अगर वे भारत सरकार से मदद की उम्मीद नहीं कर सकते, तो वे किसकी ओर जाएंगे?&#8221;</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह समय केवल आर्थिक मदद देने का नहीं है, बल्कि पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और उनके जीवन को पुनः स्थापित करने का है। &#8220;यह केवल केरल के लिए नहीं है; यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण स्थापित करने का अवसर है कि जब लोग संकट में हों, तो सरकारें कैसे प्रतिक्रिया दें,&#8221; प्रियंका गांधी ने कहा।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन की सीमाएं और केंद्र की भूमिका</strong></p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने अपनी क्षमता के अनुसार राहत कार्यों को अंजाम दिया है, लेकिन इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए उनके पास संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सहायता के बिना प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण संभव नहीं है।</p>
<p><strong>वायनाड के लोगों की उम्मीदें और निराशा</strong></p>
<p>प्रियंका गांधी ने बताया कि वायनाड और आसपास के क्षेत्रों में लोग केंद्र सरकार की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा, &#8220;लोगों को लगने लगा है कि उनकी पीड़ा को अनदेखा किया जा रहा है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को खराब कर रहा है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी चोट पहुंचा रहा है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>यह स्पष्ट है कि प्रियंका गांधी और कांग्रेस के सांसदों का यह प्रयास केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि वायनाड और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों की आवाज को केंद्र तक पहुंचाने का है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में कितनी जल्दी कदम उठाती है।</p>
<p>वायनाड की त्रासदी ने एक बार फिर इस तथ्य को उजागर किया है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय आवश्यक है। प्रभावित लोगों को न केवल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाने की भी जरूरत है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। यह समय है कि सरकार संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करे ताकि वायनाड के लोग अपने जीवन को फिर से शुरू कर सकें।</p>
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		<title>भारत-चीन संबंधों में नया मोड़: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का लोकसभा में बयान</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/india-china-border-dispute-foreign-minister-dr-s-jaishankars-statement-in-lok-sabha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 06:42:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[India-China border dispute: Foreign Minister Dr. S. Jaishankar's statement in Lok Sabha]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 4 दिसंबर। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने लोकसभा में भारत-चीन सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/india-china-border-dispute-foreign-minister-dr-s-jaishankars-statement-in-lok-sabha/">भारत-चीन संबंधों में नया मोड़: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का लोकसभा में बयान</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 4 दिसंबर। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने लोकसभा में भारत-चीन सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर एक विस्तृत बयान दिया। उन्होंने बताया कि 2020 के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध असामान्य हो गए थे, जब चीन के आक्रामक रवैये से सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भंग हो गई थी। उन्होंने हालिया कूटनीतिक प्रयासों और समझौतों का जिक्र किया, जो संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।</p>
<p><strong>सीमा विवाद की पृष्ठभूमि</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि चीन 1962 के युद्ध और उससे पहले की घटनाओं के चलते अक्साई चिन क्षेत्र में भारत के 38,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर अवैध कब्जा बनाए हुए है। इसके अलावा, 1963 में पाकिस्तान ने 5,180 वर्ग किमी भारतीय भूमि चीन को अवैध रूप से सौंप दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और चीन के बीच कई दशकों से सीमा विवाद सुलझाने के लिए वार्ताएं चल रही हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर आम सहमति नहीं बन पाई है।</p>
<p><strong>2020 के बाद बढ़ा तनाव</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना द्वारा बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती और गश्ती गतिविधियों को बाधित करने से हालात बिगड़े। इसके परिणामस्वरूप जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें 45 वर्षों में पहली बार दोनों पक्षों को गंभीर नुकसान झेलना पड़ा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि भारत ने त्वरित और प्रभावी काउंटर-डिप्लॉयमेंट किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि देश अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने में सक्षम है।</p>
<p><strong>शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयास</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि 1988 से लेकर 2020 तक भारत-चीन के संबंधों में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनका उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना था। इनमें 1993 और 1996 के शांति समझौते, 2005 की राजनीतिक दिशा-निर्देश पर सहमति, और 2013 की सीमा रक्षा सहयोग समझौता शामिल हैं।</p>
<p>2020 के बाद, भारत ने कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई वार्ताओं का आयोजन किया। इनमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और सीनियर हायरस्ट मिलिट्री कमांडर्स (SHMC) की 17 और 21 बैठकें शामिल हैं।</p>
<p><strong>21 अक्टूबर 2024 का ऐतिहासिक समझौता</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने 21 अक्टूबर 2024 को डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में हुए नए समझौते पर जानकारी दी। यह समझौता लंबे समय से इन क्षेत्रों में गश्ती गतिविधियों में आ रही बाधाओं को दूर करने और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों को बहाल करने के लिए किया गया। उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत गश्ती गतिविधियां फिर से शुरू हो चुकी हैं और स्थानीय लोगों को उनके पारंपरिक चरागाह क्षेत्रों तक पहुंच प्रदान की गई है।</p>
<p>इस समझौते के बाद 23 अक्टूबर को कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने इस समझौते का स्वागत करते हुए विदेश मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्मित करने की दिशा में काम करें।</p>
<p><strong>सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा विकास</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत ने पिछले दशक में सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है। सीमा सड़क संगठन (BRO) का बजट तीन गुना बढ़ा है, जिससे सड़क नेटवर्क, पुलों और सुरंगों के निर्माण में तेज़ी आई है। उन्होंने अटल टनल, उमलिंगला पास रोड, और सेला व नेचिपु सुरंगों जैसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उल्लेख किया।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की दिशा</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंधों में सुधार शांति और स्थिरता पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अब, जब पूर्वी लद्दाख में सभी विवादित क्षेत्रों में सफलतापूर्वक सैनिकों का विस्थापन हो चुका है, आगे के चरणों में डी-एस्केलेशन और सीमा प्रबंधन पर चर्चा होगी।</p>
<p><strong>2020 से 2024 तक की प्रगति</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने पिछले चार वर्षों के दौरान हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने 2020 में गलवान से, 2021 में गोगरा और 2022 में हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्रों में सफलतापूर्वक विवाद सुलझाया।</p>
<p><strong>आगे की रणनीति</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने बताया कि नवंबर 2024 में रियो डी जनेरियो में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी चीनी समकक्ष वांग यी के साथ एक बैठक हुई। इसके अलावा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नवंबर 2024 में वियंतियाने में चीनी रक्षा मंत्री डोंग जुन से मुलाकात की। इन बैठकों में विश्वास बहाली और डी-एस्केलेशन पर जोर दिया गया।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि सरकार सीमा विवाद के समाधान और द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद के सभी सदस्य इस जटिल मुद्दे को हल करने में सरकार का समर्थन करेंगे।</p>
<p>यह बयान भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित करता है, जहां दोनों पक्ष शांति और स्थिरता की बहाली के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, यह देखना बाकी है कि भविष्य में इन समझौतों का प्रभाव द्विपक्षीय संबंधों पर कितना सकारात्मक पड़ता है।</p>
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		<item>
		<title>मेक इन इंडिया: दस साल बाद सपना और वास्तविकता, जयराम रमेश ने आंकड़ों पर व्यक्त की चिंता</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/make-in-india-dream-and-reality-after-ten-years-jairam-ramesh-expressed-concern-over-the-figures/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Dec 2024 17:05:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/make-in-india-dream-and-reality-after-ten-years-jairam-ramesh-expressed-concern-over-the-figures/">मेक इन इंडिया: दस साल बाद सपना और वास्तविकता, जयराम रमेश ने आंकड़ों पर व्यक्त की चिंता</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 2 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता उत्पन्न करते हैं। इन आंकड़ों ने न केवल विकास दर में गिरावट को उजागर किया, बल्कि यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; अभियान का वादा आज भी अधूरा है। जीडीपी विकास दर में भारी गिरावट और विनिर्माण क्षेत्र की धीमी प्रगति ने भारत को उसकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों की पुनर्समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है।</p>
<p>विनिर्माण क्षेत्र, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है, जुलाई-सितंबर 2024 तिमाही में केवल 2.2% की दर से बढ़ा। यह 2014 में शुरू किए गए मेक इन इंडिया अभियान के वादों के बिल्कुल विपरीत है, जिसका उद्देश्य भारत को एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र और निर्यातक के रूप में स्थापित करना था। निर्यात वृद्धि भी केवल 2.8% तक सिमट गई है, जो इस योजना की प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।</p>
<p><strong>विनिर्माण क्षेत्र की गिरावट और रोजगार पर प्रभाव</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने हाल ही में जारी इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया के दस साल बाद भी भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर या पिछड़ता हुआ नजर आता है। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान 2011-12 में 18.1% था, जो 2022-23 तक गिरकर 14.3% हो गया। इस गिरावट ने न केवल अर्थव्यवस्था की प्रगति पर असर डाला है, बल्कि रोजगार की स्थिति को भी गंभीर बना दिया है।</p>
<p>2017 में जहां विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की संख्या 51.3 मिलियन थी, 2022-23 तक यह घटकर केवल 35.65 मिलियन रह गई। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मेक इन इंडिया अपने सबसे बड़े वादे—रोजगार सृजन—को पूरा करने में विफल रहा है।</p>
<p><strong>निर्यात के मोर्चे पर निराशा</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मेक इन इंडिया का एक प्रमुख लक्ष्य भारत को एक वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना था। लेकिन 2024 तक की स्थिति इस वादे से बिल्कुल अलग है। वस्त्र जैसे पारंपरिक रोजगार-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात में गिरावट ने भारत को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से पीछे कर दिया है।</p>
<ul>
<li>2013-14 में भारत का वस्त्र निर्यात 15 बिलियन डॉलर था।</li>
<li>2023-24 में यह गिरकर 14.5 बिलियन डॉलर रह गया।</li>
</ul>
<p>इस गिरावट के कारण रोजगार पर और अधिक दबाव पड़ा है, क्योंकि वस्त्र उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार का स्रोत है। वैश्विक व्यापार में भारत का हिस्सा स्थिर बना हुआ है, लेकिन निर्यात का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान घटा है।</p>
<p><strong>चीन से आयात का दबाव</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कर कटौती और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों की घोषणा की गई थी। लेकिन सच्चाई यह है कि चीन से सस्ते आयात ने भारतीय विनिर्माण उद्योग पर गहरा प्रहार किया है।</p>
<ul>
<li>गुजरात के स्टेनलेस स्टील उद्योग का उदाहरण इस समस्या को स्पष्ट करता है।</li>
<li>यहां चीन से आयातित सस्ती वस्तुओं के कारण एक तिहाई एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) बंद हो गए हैं।</li>
</ul>
<p>चीन से आयातित वस्तुओं की गुणवत्ता और कीमत के कारण भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे हैं। कई उद्योगों में उत्पादन लागत को कम करने के प्रयासों के बावजूद, चीन के उत्पाद बाजार पर हावी हैं।</p>
<p><strong>विफल नीतियां और निजी निवेश की कमी</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि मेक इन इंडिया योजना के तहत निजी निवेश आकर्षित करने में सरकार बुरी तरह विफल रही है। हालांकि कर कटौती और अन्य प्रोत्साहनों की घोषणाएं की गईं, लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आया। बड़े उद्योगों ने मेक इन इंडिया के तहत निवेश करने से परहेज किया, क्योंकि नीति निर्माण में पारदर्शिता की कमी रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने इस योजना की विफलता को &#8220;मेक-बिलीव इन इंडिया&#8221; करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रचार से अधिक कुछ नहीं है। इसके विपरीत, उन्होंने 2005-2015 के दशक को भारत के निर्यात के लिए एक स्वर्णिम युग बताया। उस समय भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा तेजी से बढ़ा, जो मुख्यतः डॉ. मनमोहन सिंह की नीतियों का परिणाम था।</p>
<p><strong>भविष्य की राह: समाधान क्या हो सकते हैं?</strong></p>
<p>भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता और निर्यात वृद्धि को पुनर्जीवित करने के लिए नीतिगत बदलावों की सख्त जरूरत है।</p>
<p><strong>1. स्थानीय उद्योगों को संरक्षण</strong><br />
भारत को चीन से आयातित सस्ती वस्तुओं पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके लिए आयात पर शुल्क बढ़ाना और घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रोत्साहन देना जरूरी है।</p>
<p><strong>2. तकनीकी सुधार और निवेश</strong><br />
उत्पादन प्रक्रियाओं में तकनीकी सुधार के साथ-साथ अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर जोर देना होगा। इससे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।</p>
<p><strong>3. एमएसएमई का सशक्तिकरण</strong><br />
छोटे और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्हें वित्तीय सहायता, आसान ऋण और वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करनी होगी।</p>
<p><strong>4. विदेशी निवेश को आकर्षित करना</strong><br />
विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए पारदर्शी और स्थिर नीतियों की जरूरत है। साथ ही, निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना होगा।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><strong>5. रोजगार-प्रधान क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना</strong><br />
वस्त्र, चमड़ा, फर्नीचर और अन्य रोजगार-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना होगा। इन क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां बनानी होंगी।</p>
<p>मेक इन इंडिया योजना अपने आरंभ से ही एक महत्वाकांक्षी प्रयास रही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में सरकार असफल रही है। दस साल बाद भी, यह योजना न तो रोजगार सृजन में सफल हो पाई और न ही भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर पाई।</p>
<p>आज भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह इन विफलताओं से सबक ले और अपनी नीतियों को वास्तविकता के अनुरूप बनाए। मेक इन इंडिया को केवल एक प्रचार अभियान से आगे बढ़ाकर ठोस आर्थिक सुधारों का आधार बनाना होगा। यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाए गए, तो भारत के आर्थिक विकास को भारी नुकसान हो सकता है।</p>
<p>मेक इन इंडिया का सपना साकार करने के लिए सरकार को अब जमीनी सच्चाई पर काम करना होगा। तभी यह योजना भारत के विकास का आधार बन सकेगी, अन्यथा यह केवल एक अधूरा वादा बनकर रह जाएगी।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/make-in-india-dream-and-reality-after-ten-years-jairam-ramesh-expressed-concern-over-the-figures/">मेक इन इंडिया: दस साल बाद सपना और वास्तविकता, जयराम रमेश ने आंकड़ों पर व्यक्त की चिंता</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>साक्षी मलिक किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी- बीजेपी नेता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 09:24:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Brij bhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushan Sharan Singh]]></category>
		<category><![CDATA[Gonda]]></category>
		<category><![CDATA[Sakshi Malik sold her integrity in order to sell her book: MLA]]></category>
		<category><![CDATA[साक्षी मलिक किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी- विधायक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच तनाव बढ़ा, विवादों के घेरे में आई पहलवानों की राजनीति, पूर्व</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच तनाव बढ़ा, विवादों के घेरे में आई पहलवानों की राजनीति, पूर्व सांसद बृजभूषण के चुप रहने से मिल रही राहत </strong></p>
<p>नई दिल्ली 23 अक्टूबर। भारत के खेल जगत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब ओलंपियन साक्षी मलिक ने पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता और कुश्ती चैंपियन बबीता फोगट पर गंभीर आरोप लगाए। साक्षी ने कहा कि बबीता ने विरोध को अपने निजी एजेंडे के लिए इस्तेमाल किया और वह खुद को भारतीय कुश्ती संघ (WFI) की अध्यक्ष बनाना चाहती थीं। यह आरोप साक्षी मलिक की हाल ही में रिलीज हुई आत्मकथा विटनेस के संदर्भ में सामने आया है, जिसमें उन्होंने कई विवादास्पद बातें कही हैं।</p>
<p>इस आरोप के जवाब में बबीता फोगट ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि साक्षी मलिक ने किताब बेचने के लिए अपनी ईमानदारी बेच दी है। यह बयान दोनों के बीच पहले से चले आ रहे विवाद को और अधिक गहरा करता है, जिसमें बबीता के परिवार के सदस्यों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।</p>
<p><strong>साक्षी मलिक के आरोप: बबीता पर एजेंडा चलाने का आरोप</strong></p>
<p>विरोध प्रदर्शन के दौरान साक्षी मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि बबीता फोगट ने डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बनने के उद्देश्य से विरोध का समर्थन किया। मलिक ने खुलासा किया कि बबीता ने पहले पहलवानों से संपर्क किया और उन्हें बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन इसका उद्देश्य केवल उनका अपना राजनीतिक फायदा था।</p>
<p>साक्षी ने अपनी आत्मकथा में इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लिखा, &#8220;बबीता फोगट ने डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष पद की लालसा में यह कदम उठाया था। उनका एजेंडा विरोध प्रदर्शन का समर्थन करना नहीं बल्कि खुद को WFI की अध्यक्षता के लिए तैयार करना था।&#8221; साक्षी का यह बयान कई हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर खेल और राजनीति से जुड़े लोगों के बीच।</p>
<p><strong>बबीता फोगट की प्रतिक्रिया: &#8220;किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दी&#8221;</strong></p>
<p>साक्षी मलिक के इस आरोप पर बबीता फोगट ने ट्विटर पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने सीधे तौर पर साक्षी पर निशाना साधते हुए कहा, &#8220;किताब बेचने के चक्कर में ईमान बेच दिया गया है।&#8221; बबीता ने यह भी लिखा कि &#8220;अपने किरदार से चमको, उधार की रोशनी कब तक टिकेगी?&#8221; यह प्रतिक्रिया न केवल साक्षी के आरोपों का खंडन करती है, बल्कि उनके चरित्र पर भी सवाल उठाती है।</p>
<p>बबीता ने यह भी कहा, &#8220;किसी को विधानसभा की सीटें मिलीं, किसी को पद मिले बहन, तुम्हें कुछ नहीं मिला, मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूं।&#8221; उनका यह बयान साक्षी के करियर और उनके संघर्षों की ओर इशारा करता है, लेकिन साथ ही साथ यह भी दिखाता है कि दोनों के बीच दरार कितनी गहरी हो गई है।</p>
<p><strong>महावीर फोगट का बयान: &#8220;साक्षी कांग्रेस की भाषा बोल रही है&#8221;</strong></p>
<p>इस विवाद में बबीता के पिता और प्रसिद्ध कुश्ती कोच महावीर फोगट भी कूद पड़े। महावीर फोगट ने साक्षी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि साक्षी मलिक अब कांग्रेस की भाषा बोल रही हैं। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि साक्षी के आरोपों के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं।</p>
<p>महावीर फोगट ने कहा, &#8220;बबीता ने हमेशा खिलाड़ियों के समझौतों की वकालत की है और उसने भी विरोध का समर्थन किया था।&#8221; उन्होंने दावा किया कि साक्षी का यह बयान कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी और दीपेंद्र हुड्डा के कहने पर दिया गया है। महावीर ने यह भी आरोप लगाया कि साक्षी कांग्रेस के इशारे पर भाजपा और उसके नेताओं को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं।</p>
<p><strong>विनेश फोगट का जवाब: &#8220;हर कहानी के तीन पहलू होते हैं&#8221;</strong></p>
<p>इस बीच, साक्षी मलिक के बयान के बाद विनेश फोगट ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साक्षी का नाम लिए बिना कहा, &#8220;हर कहानी के तीन पहलू होते हैं – आपकी, उनकी और सच्चाई की।&#8221; विनेश का यह बयान दोनों पहलवानों के बीच उभरते विवाद की ओर इशारा करता है, जिसमें कोई स्पष्ट रूप से गलत या सही नहीं दिख रहा है।</p>
<p>विनेश ने यह भी कहा कि अगर साथी एथलीटों के लिए खड़ा होना लालच है, तो वह इस लालच को सकारात्मक रूप में देखती हैं। उन्होंने कहा, &#8220;अगर यह लालच है जो हमें ओलंपिक में देश के लिए पदक लाने के लिए प्रेरित करता है, तो यह लालच हमारी आखिरी सांस तक हमारे साथ रहेगा।&#8221;</p>
<p>विनेश के इस बयान से साफ है कि वह साक्षी के आरोपों को सीधे तौर पर खारिज कर रही हैं, लेकिन साथ ही साथ वह इस विवाद को और अधिक गहराने से बचने का प्रयास भी कर रही हैं।</p>
<p><strong>साक्षी का एशियाई खेलों के ट्रायल पर दावा</strong></p>
<p>विवाद तब और गहरा गया जब साक्षी मलिक ने अपने संस्मरण में दावा किया कि विनेश फोगट और बजरंग पुनिया ने 2023 एशियाई खेलों के लिए ट्रायल से छूट ली थी। साक्षी का कहना था कि यह छूट पहलवानों के आंदोलन को कमजोर कर सकती है, और इससे बृज भूषण के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन को धक्का लगा।</p>
<p>यह आरोप खेल जगत में बड़ा मुद्दा बन गया, क्योंकि ट्रायल से छूट लेना और विरोध प्रदर्शन करना दोनों ही पहलवानों की नैतिकता और उनके खेल करियर के लिए महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इस मुद्दे ने विवाद को और अधिक तीखा कर दिया और कई लोगों के मन में सवाल खड़े किए कि क्या विरोध प्रदर्शन सच में खिलाड़ियों के हित में था या इसके पीछे कोई अन्य मकसद था।</p>
<p><strong>खेल और राजनीति का संगम</strong></p>
<p>यह विवाद न केवल खेल के मैदान पर उभर रहा है बल्कि राजनीति में भी गहरी जड़ें जमा चुका है। साक्षी मलिक और बबीता फोगट दोनों ही भारतीय कुश्ती का अहम हिस्सा रही हैं, लेकिन अब राजनीति में उनके कदम बढ़ने से उनके बीच दरारें साफ नजर आ रही हैं।</p>
<p>साक्षी जहां एक ओलंपियन और महिला पहलवानों की आवाज के रूप में उभरी हैं, वहीं बबीता फोगट भाजपा की नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। यह विवाद यह दिखाता है कि भारतीय खेल जगत में अब राजनीति का भी गहरा प्रभाव है और यह केवल खेल तक सीमित नहीं रह गया है।</p>
<p><strong>आगे की राह</strong></p>
<p>यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का अंत कैसे होता है। क्या साक्षी मलिक और बबीता फोगट के बीच सुलह होगी, या फिर यह विवाद और गहरा जाएगा? क्या यह विवाद भारतीय कुश्ती को और अधिक नुकसान पहुंचाएगा, या फिर इसे एक नए सिरे से खड़ा करने में मदद करेगा?</p>
<p>इन सभी सवालों का जवाब आने वाले समय में मिल सकता है, लेकिन एक बात तो तय है कि इस विवाद ने भारतीय खेल और राजनीति में हलचल मचा दी है। साक्षी मलिक और बबीता फोगट दोनों ही भारत के महान पहलवान हैं, लेकिन अब यह विवाद उनकी छवि को कैसे प्रभावित करेगा, यह समय ही बताएगा।</p>
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		<title>अशिक्षित सांसद क्या हमारे लिए सही कानून बनाने में होते हैं समर्थ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Oct 2024 02:02:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[#Narendramodi]]></category>
		<category><![CDATA[Bharatiya Janata Party (BJP)]]></category>
		<category><![CDATA[Bhartiya Janta party]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[PMO India]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 18 अक्टूबर (विजय प्रताप पांडे)। भारत के राजनीतिक परिदृश्य में जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता एक महत्वपूर्ण</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/are-uneducated-mps-capable-of-making-the-right-laws-for-us/">अशिक्षित सांसद क्या हमारे लिए सही कानून बनाने में होते हैं समर्थ?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 18 अक्टूबर (विजय प्रताप पांडे)। भारत के राजनीतिक परिदृश्य में जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसका व्यापक प्रभाव देश के विकास और शासन व्यवस्था पर पड़ता है। यह विषय कई बार चर्चा का विषय बन चुका है, कि देश के नीति-निर्माताओं के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित होनी चाहिए या नहीं।</p>
<p>भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतंत्र में, जहां हर वर्ग और क्षेत्र से लोग जनप्रतिनिधि के रूप में चुने जाते हैं, उनकी शैक्षिक योग्यता का महत्व और भी बढ़ जाता है। शिक्षित प्रतिनिधि न केवल संसदीय कार्यवाही को समझने में सक्षम होते हैं, बल्कि देश के लिए कानून बनाने और नीतियाँ तैयार करने में भी उनकी समझ बेहतर होती है। एक शिक्षित प्रतिनिधि जटिल प्रशासनिक, आर्थिक, और सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान निकालने में सक्षम होता है।</p>
<p>इसके विपरीत, अशिक्षित या कम शिक्षित प्रतिनिधि अक्सर मुद्दों की जटिलता को ठीक से समझ नहीं पाते, जिससे वे सही निर्णय लेने में असमर्थ हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक तंत्र पर अत्यधिक निर्भरता बढ़ जाती है, जो लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में प्रतिनिधि के निर्णय लेने की स्वायत्तता को कम करता है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-3453 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-48-4.jpeg" alt="" width="738" height="341" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-48-4.jpeg 738w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-48-4-300x139.jpeg 300w" sizes="(max-width: 738px) 100vw, 738px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>अन्य पेशों में शैक्षिक मानदंड:</strong></p>
<p>अगर हम अन्य पेशों की बात करें, तो यह स्पष्ट है कि प्रत्येक पेशे में शैक्षिक योग्यता एक अनिवार्य शर्त है। एक इंजीनियर बनने के लिए व्यक्ति को बीटेक या उससे संबंधित डिग्री प्राप्त करनी होती है। इसी तरह, डॉक्टर बनने के लिए MBBS की डिग्री और वकील बनने के लिए LLB की आवश्यकता होती है। यहां तक कि शिक्षक बनने के लिए भी संबंधित विषयों की पढ़ाई और योग्य परीक्षाएँ उत्तीर्ण करनी होती हैं।</p>
<p>इसके विपरीत, नेता बनने के लिए कोई शैक्षिक मानदंड नहीं है। इस विसंगति के चलते यह प्रश्न उठता है कि अगर एक इंजीनियर, डॉक्टर, या शिक्षक बनने के लिए शैक्षिक योग्यता जरूरी है, तो एक सांसद या विधायक बनने के लिए क्यों नहीं? खासकर जब उनके निर्णय सीधे तौर पर देश की नीतियों और कानूनों पर प्रभाव डालते हैं, जो करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता का इतिहास:</strong></p>
<p>भारत की स्वतंत्रता के बाद से ही शिक्षा का महत्व देश की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेता उच्च शिक्षा प्राप्त थे, जिनका देश की स्वतंत्रता और संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा। लेकिन समय के साथ, राजनीति में आने वाले लोगों की शैक्षिक पृष्ठभूमि में विविधता आ गई है। कुछ नेताओं ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जबकि कुछ ने सीमित शैक्षिक योग्यता के बावजूद राजनीति में अपनी जगह बनाई है।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-3451 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-46-3.jpeg" alt="" width="520" height="411" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-46-3.jpeg 520w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/10/images-46-3-300x237.jpeg 300w" sizes="(max-width: 520px) 100vw, 520px" /></p>
<p><strong>वर्तमान लोकसभा में नेताओं की शैक्षिक योग्यता:</strong></p>
<p>अब जब हम 2024 की लोकसभा की बात करते हैं, तो यह देखना रोचक है कि इस समय सदन में मौजूद सांसदों की शैक्षिक योग्यता कैसी है।</p>
<p><strong>शैक्षिक वितरण:</strong></p>
<p>लोकसभा के सदस्यों की शैक्षिक योग्यता में काफी भिन्नता देखने को मिलती है। कुछ नेता उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, जिनके पास डॉक्टरेट, इंजीनियरिंग, कानून, या व्यवसाय प्रबंधन की डिग्रियाँ हैं। वहीं, कुछ प्रतिनिधि ऐसे भी हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता मात्र स्कूल स्तर की है।</p>
<p><strong>उच्च शिक्षित नेता:</strong> वर्तमान लोकसभा में कई नेता ऐसे हैं जिन्होंने प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। उदाहरण के लिए, कई सांसदों के पास MBA, PhD, या विदेशी विश्वविद्यालयों से स्नातक की डिग्रियाँ हैं। ये नेता जटिल आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर बेहतर दृष्टिकोण रखते हैं, और नीतिगत निर्णयों में गहन विश्लेषण की क्षमता रखते हैं।</p>
<p><strong>माध्यमिक शिक्षा प्राप्त नेता:</strong> कुछ सांसद ऐसे भी हैं जिनकी शैक्षिक योग्यता मात्र 12वीं कक्षा तक है। इन प्रतिनिधियों में से कई अपने क्षेत्रों में लोकप्रिय होते हैं, लेकिन अक्सर जटिल नीति मामलों में उनकी समझ सीमित हो सकती है।</p>
<p><strong>शिक्षा और निर्णय क्षमता का संबंध:</strong></p>
<p>शैक्षिक योग्यता सीधे तौर पर किसी व्यक्ति की निर्णय क्षमता और विश्लेषणात्मक सोच से जुड़ी होती है। उच्च शिक्षित नेता जटिल मुद्दों पर निर्णय लेते समय तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम होते हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते समय अधिक आत्मविश्वास से निर्णय ले सकते हैं। वहीं, कम शिक्षित नेता कभी-कभी भावनात्मक या तात्कालिक जन भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति रखते हैं, जो हमेशा सही नहीं हो सकता।</p>
<p><strong>क्या शिक्षा एकमात्र मापदंड हो सकता है?</strong></p>
<p>हालांकि शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, लेकिन यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि केवल शैक्षिक योग्यता किसी व्यक्ति को सफल नेता नहीं बना सकती। नेतृत्व, निर्णय लेने की क्षमता, जनता के साथ संवाद करने की कुशलता, और सामाजिक मुद्दों की समझ भी एक सफल नेता की पहचान होती है। ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ सीमित शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं ने उत्कृष्ट नेतृत्व दिया है और जनता की भलाई के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।</p>
<p>मसलन, कई क्षेत्रीय नेताओं ने अपने मजबूत नेतृत्व और जनता के बीच गहरे संबंध के आधार पर सफलतापूर्वक शासन किया है। इस प्रकार, शिक्षा के साथ-साथ अन्य गुण भी एक नेता के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन, यह भी सत्य है कि एक शिक्षित प्रतिनिधि उन जटिलताओं को बेहतर समझ सकता है जो आज के बदलते वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में उभर रही हैं।</p>
<p><strong>शिक्षित नेताओं की आवश्यकता क्यों बढ़ रही है?</strong></p>
<p>वर्तमान में, वैश्वीकरण, तकनीकी उन्नति, और जटिल आर्थिक-सामाजिक मुद्दों के बीच, नेताओं का शिक्षित होना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। देश की सुरक्षा, आर्थिकी, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दे बेहद जटिल होते जा रहे हैं। इनका समाधान करने के लिए वैज्ञानिक और तर्कसंगत दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसे एक शिक्षित प्रतिनिधि बेहतर तरीके से समझ सकता है।</p>
<p>उदाहरण के लिए, डेटा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन, और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे अत्यधिक जटिल हैं, और इन पर सही नीतियाँ बनाने के लिए गहन समझ और विश्लेषण की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में एक शिक्षित प्रतिनिधि न केवल समस्या को बेहतर तरीके से समझ सकता है, बल्कि वह ऐसे विशेषज्ञों से भी प्रभावी संवाद कर सकता है जो इन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।</p>
<p><strong>न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के पक्ष और विपक्ष:</strong></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>पक्ष में तर्क:</strong></span></p>
<ul>
<li>एक शिक्षित नेता नीतियों और कानूनों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझ सकता है।</li>
<li>वह संसदीय कार्यवाही और कानूनी प्रक्रियाओं को समझने में अधिक सक्षम होता है।</li>
<li>वैश्विक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते समय उसकी विश्वसनीयता और आत्मविश्वास बढ़ता है।</li>
</ul>
<p><span style="color: #993300;"><strong>विपक्ष में तर्क:</strong></span></p>
<ul>
<li>शैक्षिक योग्यता को राजनीति में अनिवार्य बनाने से समाज के कुछ वर्गों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ शिक्षा का स्तर अभी भी निम्न है।</li>
<li>अनुभव और नेतृत्व की क्षमता भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं, और इन्हें केवल शिक्षा के आधार पर मापा नहीं जा सकता।</li>
</ul>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश में, जनप्रतिनिधियों की शैक्षिक योग्यता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे एकमात्र मापदंड बनाना उचित नहीं होगा। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नेता शिक्षित हों, ताकि वे जटिल मुद्दों को समझने और उनका समाधान निकालने में सक्षम हों। साथ ही, जनता के बीच उनकी लोकप्रियता, नेतृत्व की क्षमता, और समस्याओं को समझने की उनकी दृष्टि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए, शिक्षा और नेतृत्व के अन्य गुणों का संतुलन बनाकर ही एक सफल और प्रगतिशील राजनीतिक नेतृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है।</p>
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		<title>हमें ऐसा डिजिटल समाज बनाना है, जहां लाभ सभी को मिले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 02:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[Today]]></category>
		<category><![CDATA[We have to create a digital society where everyone can benefit from technology - Prime Minister Narendra Modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत ने डिजिटल युग को आगे बढ़ाया: वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन में नई ऊँचाइयाँ नई दिल्ली, 16 अक्टूबर।</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>भारत ने डिजिटल युग को आगे बढ़ाया: वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन में नई ऊँचाइयाँ</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 16 अक्टूबर। भारत की राजधानी नई दिल्ली ने अक्टूबर 2024 में दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार शिखर सम्मेलनों में से एक की मेजबानी की। यह सम्मेलन न केवल डिजिटल समावेश और तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम था, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति की दिशा में किए गए प्रयासों की भी एक अहम झलक पेश करता है। यह आयोजन 15 से 24 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 30 से अधिक देशों के प्रमुख नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और दूरसंचार विशेषज्ञ एक साथ आए हैं। इसका उद्देश्य था, वैश्विक स्तर पर डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना, नवाचार और निवेश को प्रोत्साहित करना और डिजिटल समावेश को साकार करना।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्घाटन भाषण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत की डिजिटल प्रगति और दूरसंचार क्षेत्र में देश की उभरती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अपने भाषण में कहा, &#8220;भारत 2025 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है, और इस प्रक्रिया में दूरसंचार क्षेत्र रीढ़ की हड्डी साबित होगा।&#8221; उन्होंने आगे यह भी उल्लेख किया कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जिससे आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक बन चुका है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि भारत के डिजिटल परिवर्तन ने केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके सकारात्मक प्रभाव देखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति के पास सुलभ और किफायती इंटरनेट हो। यह सम्मेलन उन वैश्विक सहयोगों को और मजबूत करेगा जो हमें इस लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>डिजिटल युग का नेतृत्व: 5जी और उससे आगे</strong></p>
<p>सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण 5जी और उससे आगे की तकनीकों पर केंद्रित था। 5जी नेटवर्क की तैनाती पर विशेषज्ञों की गहन चर्चा हुई, जिसमें यह विचार सामने आया कि भारत जल्द ही वैश्विक 5जी नवाचार का एक केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 5जी के तेजी से रोलआउट के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिल सके। उन्होंने कहा, &#8220;5जी के माध्यम से हम न केवल अपनी कनेक्टिविटी में सुधार करेंगे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योगों में भी क्रांति लाएंगे।&#8221;</p>
<p>यह स्पष्ट है कि 5जी नेटवर्क के व्यापक उपयोग से स्मार्ट शहरों का विकास, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) का व्यापक प्रसार, और स्वचालित उद्योगों का उभरना संभव होगा। इस संदर्भ में, मोदी सरकार ने फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के विस्तार और टावरों की संख्या बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की योजनाओं की भी घोषणा की, जिससे पूरे भारत में 5जी कनेक्टिविटी संभव हो सके।</p>
<p><strong>डिजिटल समावेश: ग्रामीण भारत तक इंटरनेट की पहुंच</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है डिजिटल समावेश, खासकर उन दूरदराज के क्षेत्रों में जहां पहले तक इंटरनेट की पहुंच सीमित थी। इस सम्मेलन में विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने इस पर चर्चा की कि किस तरह डिजिटल समावेश को और अधिक बढ़ावा दिया जा सकता है ताकि ग्रामीण और वंचित समुदायों को भी सस्ती और सुलभ इंटरनेट सेवाएँ प्राप्त हो सकें।</p>
<p>भारत सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ योजना ने अब तक 2 लाख से अधिक गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचा दी है। इस योजना के तहत अनेक पहलों को लागू किया गया है, जैसे ‘भारतनेट’, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच को सुनिश्चित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में कहा, &#8220;डिजिटल समावेश का मतलब है कि हर नागरिक को समान अवसर मिले, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से हो। इंटरनेट की शक्ति ने हमें यह अवसर प्रदान किया है कि हम सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक असमानताओं को कम कर सकें।&#8221;</p>
<p><strong>साइबर सुरक्षा की अहमियत</strong></p>
<p>जब डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो साइबर सुरक्षा की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। इस सम्मेलन में साइबर सुरक्षा पर भी गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा के लिए भारत ने कई मजबूत कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, &#8220;हमारे लिए नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।&#8221; भारत की सरकार ने इसके लिए अनेक नियम और नीतियाँ बनाई हैं, जिससे ऑनलाइन खतरों से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।</p>
<p>विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि हर स्तर पर साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसमें उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग, साइबर हमलों से बचाव के लिए जागरूकता अभियानों का आयोजन, और साइबर सुरक्षा अनुसंधान को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p><strong>वैश्विक सहयोग और साझेदारी</strong></p>
<p>सम्मेलन में वैश्विक सहयोग की महत्ता पर भी जोर दिया गया। 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्राप्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में कहा, &#8220;डिजिटल परिवर्तन कोई अकेला राष्ट्र नहीं कर सकता। हमें एक वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें सभी देश एक साथ मिलकर काम करें।&#8221; उन्होंने ज्ञान साझाकरण और संयुक्त अनुसंधान पहलों की जरूरत पर जोर दिया, जिससे दुनिया के सभी हिस्सों में डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार हो सके।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल दृष्टिकोण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल युग को अपनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से सरकार ने देश के हर कोने में डिजिटल सेवाओं को पहुंचाने का काम किया है। वित्तीय लेन-देन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक, सभी क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति आई है। भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही है, जिसने डिजिटल भुगतान को आसान और सुलभ बनाया है।</p>
<p>मोदी ने इस अवसर पर कहा, &#8220;डिजिटल परिवर्तन केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, यह सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। हमने जो कदम उठाए हैं, वे न केवल भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण पेश करते हैं।&#8221;</p>
<p>भारत में डिजिटल युग का उदय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की डिजिटल क्रांति के प्रयासों ने इस वैश्विक दूरसंचार शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बना दिया है। इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत ने दूरसंचार और डिजिटल विकास में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों ने न केवल देश की तकनीकी और आर्थिक क्षमताओं को उभारा है, बल्कि समाज के हर वर्ग को डिजिटल समावेश के माध्यम से सशक्त बनाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।</p>
<p>भारत अब वैश्विक स्तर पर एक डिजिटल पावरहाउस के रूप में उभर रहा है, जहाँ दूरसंचार क्षेत्र में नवाचार, सुरक्षा और समावेश को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की इस उपलब्धि ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के सबसे आगे बढ़ते डिजिटल बाजारों में से एक है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व करेगा।</p>
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		<title>एयर इंडिया के विमान में बम की सूचना, जांच में जुटी एजेंसियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 04:35:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Airindia]]></category>
		<category><![CDATA[Airport]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: आज एअर इंडिया की मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में बम की धमकी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/bomb-report-in-air-india-plane/">एयर इंडिया के विमान में बम की सूचना, जांच में जुटी एजेंसियां</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली: आज एअर इंडिया की मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन में हड़कंप मच गया। विमान को तत्काल प्रभाव से डायवर्ट कर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। इस घटना ने यात्रियों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया, जबकि सुरक्षा एजेंसियां बम की तलाश में जुट गईं। विमान की तलाशी अभी जारी है और सुरक्षा प्रोटोकॉल्स के तहत सघन जांच की जा रही है।</p>
<p><strong>विमान में बम की धमकी: कैसे शुरू हुआ घटनाक्रम</strong></p>
<p>एअर इंडिया की फ्लाइट जो मुंबई से न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भर चुकी थी, उसमें अचानक बम की धमकी की खबर आई। इस तरह की खतरनाक सूचना मिलने के बाद, फ्लाइट को सुरक्षित रूप से नजदीकी हवाई अड्डे पर उतारने के निर्देश दिए गए। पायलट और क्रू सदस्यों ने अत्यधिक सतर्कता दिखाते हुए तुरंत विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर डायवर्ट करने का फैसला किया, ताकि किसी भी संभावित खतरे से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>विमान में बम की खबर मिलने के बाद विमानन प्राधिकरण और एयरलाइन अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए तुरंत आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी। यात्रियों को लेकर उड़ान भर रहे इस विमान के अंदर तनाव का माहौल था। हालांकि, क्रू ने यात्रियों को शांत बनाए रखने की हरसंभव कोशिश की।</p>
<p><strong>दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग</strong></p>
<p>एअर इंडिया की फ्लाइट को बम की धमकी के बाद तुरंत दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर लैंड कराया गया। एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही आवश्यक कदम उठा लिए थे और विमान को एक सुरक्षित इलाके में पार्क किया गया, जहां बिना किसी जोखिम के उसकी पूरी तलाशी की जा सके। तुरंत ही विमान से यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया। यात्रियों को उतारने के बाद, विमान की सघन तलाशी शुरू की गई।</p>
<p>दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने इस आपातकालीन स्थिति के बारे में तुरंत कार्रवाई की। एयरपोर्ट के सुरक्षा दल, बम निरोधक दस्ते, और अन्य जांच एजेंसियां मौके पर मौजूद थीं। फ्लाइट के पायलट और क्रू सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विमान को सुरक्षित रूप से उतारने में पूरी सतर्कता बरती।</p>
<p><strong>यात्रियों का अनुभव: डर और अनिश्चितता</strong></p>
<p>इस दौरान विमान में बैठे यात्रियों के मन में भय और चिंता का माहौल था। कई यात्रियों ने बताया कि फ्लाइट के अंदर अचानक घोषणा की गई कि सुरक्षा कारणों से फ्लाइट को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में बम की धमकी की जानकारी यात्रियों से साझा नहीं की गई थी, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे भी समझ गए थे कि कुछ बड़ा खतरा है।</p>
<p>विमान की लैंडिंग के बाद, यात्रियों को एक-एक कर विमान से बाहर निकाला गया और एयरपोर्ट के एक सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया गया। कुछ यात्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विमान में अचानक किसी तरह की घबराहट नहीं थी, लेकिन जब उन्होंने विमान को दिल्ली की ओर मोड़ते देखा, तब उन्हें शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है।</p>
<p>एक यात्री ने बताया, &#8220;जब हमें बताया गया कि फ्लाइट को सुरक्षा कारणों से डायवर्ट किया जा रहा है, तब हम सब थोड़े चिंतित हो गए थे। लेकिन क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए हमें शांत रखा। जब दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग हुई और हमने सुरक्षाकर्मियों की हलचल देखी, तो हमें यकीन हो गया कि कुछ गंभीर मामला है।&#8221;</p>
<p><strong>सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और जांच</strong></p>
<p>दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर विमान की लैंडिंग के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं। सबसे पहले, बम निरोधक दस्ता और कुत्तों की टीम ने विमान की तलाशी लेना शुरू किया। इसके साथ ही, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को भी मौके पर बुलाया गया।</p>
<p>विमान के सभी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से उतारकर एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया, और उनके सामान की भी जांच की जा रही है। जांच दल विमान के कोने-कोने की बारीकी से तलाशी कर रहा है ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाया जा सके।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के बाद ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विमान में कोई बम या अन्य संदिग्ध वस्तु है या नहीं। शुरुआती जांच में अभी तक किसी बम के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, लेकिन जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।</p>
<p><strong>बम की धमकी कैसे मिली: जांच में जुटी एजेंसियां</strong></p>
<p>इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी है कि बम की धमकी किसने और कैसे दी। एअर इंडिया के अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय कर यह पता लगाया जा रहा है कि क्या यह धमकी किसी आतंकी समूह की साजिश थी या यह किसी शरारती तत्व का कारनामा था।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियां कॉल ट्रेस कर रही हैं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि बम की सूचना किस माध्यम से दी गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि एअर इंडिया के कंट्रोल रूम में एक अज्ञात कॉल आई थी, जिसमें बम की धमकी दी गई थी। इस कॉल के बाद ही विमान को तुरंत डायवर्ट करने का फैसला लिया गया।</p>
<p><strong>विमान की डायवर्टिंग प्रक्रिया: यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता</strong></p>
<p>इस घटना ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया कि विमानों में किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति को गंभीरता से लिया जाता है, और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तत्काल कार्रवाई की जाती है। पायलट और क्रू की सतर्कता और त्वरित निर्णय ने यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
<p>विमान में बैठे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और पायलट के बीच संवाद बेहद महत्वपूर्ण रहा। ATC ने पायलट को निर्देश दिए कि वे विमान को दिल्ली की ओर मोड़ें, जहां सुरक्षा प्रबंध पहले से तैयार किए जा चुके थे।</p>
<p><strong>एअर इंडिया की प्रतिक्रिया और यात्रियों की मदद</strong></p>
<p>इस पूरी घटना के बाद एअर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए कंपनी के पास सख्त प्रोटोकॉल हैं। उन्होंने कहा कि सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा चुकी है और विमान की पूरी तरह से जांच की जा रही है।</p>
<p>एयरलाइन ने यह भी बताया कि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, ताकि उनकी यात्रा में और अधिक देरी न हो। जो यात्री न्यूयॉर्क जा रहे थे, उन्हें जल्द ही दूसरी फ्लाइट में स्थानांतरित किया जाएगा, और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है।</p>
<p><strong>सुरक्षा के मद्देनजर एयरपोर्ट पर तगड़ी सुरक्षा</strong></p>
<p>दिल्ली एयरपोर्ट पर इस घटना के बाद सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। एयरपोर्ट की सभी उड़ानों और यात्रियों की जांच में सख्ती बढ़ा दी गई है, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों ने एअर इंडिया के अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि आगे की सभी उड़ानों में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो और यात्री बिना किसी डर के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।</p>
<p><strong>घटना के बाद सुरक्षा उपायों की समीक्षा</strong></p>
<p>इस घटना के बाद, एअर इंडिया और भारतीय विमानन सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, एयरलाइंस और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।</p>
<p>बम की धमकी की सच्चाई का पता लगाने के लिए साइबर सेल भी सक्रिय है, ताकि यह देखा जा सके कि धमकी देने वाले व्यक्ति या समूह ने इस घटना के पीछे क्या मकसद था।</p>
<p>एअर इंडिया की इस घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है। विमानन क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि होती है, और इस घटना में पायलट, क्रू मेंबर्स, और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं। हालांकि, इस तरह की घटनाएं यात्रियों के बीच भय का माहौल जरूर पैदा करती हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के त्वरित और संगठित प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया कि सभी यात्री सुरक्षित रहें।</p>
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