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	<title>ज्योतिष Archives - Prabhat Bharat</title>
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		<title>चारधाम यात्रा 2026: आस्था का महासंगम, व्यवस्थाओं की नई परीक्षा और बहस के केंद्र में ‘गैर-सनातनी प्रवेश’ का प्रस्ताव</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/char-dham-yatra-2026-a-grand-confluence-of-faith-a-new-test-of-arrangements-and-the-proposal-for-non-sanatani-entry-at-the-center-of-the-debate/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:58:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Char dham yatra]]></category>
		<category><![CDATA[चार धाम यात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देहरादून, 13 मार्च। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/char-dham-yatra-2026-a-grand-confluence-of-faith-a-new-test-of-arrangements-and-the-proposal-for-non-sanatani-entry-at-the-center-of-the-debate/">चारधाम यात्रा 2026: आस्था का महासंगम, व्यवस्थाओं की नई परीक्षा और बहस के केंद्र में ‘गैर-सनातनी प्रवेश’ का प्रस्ताव</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">देहरादून, 13 मार्च। उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बन जाती है। हिमालय की गोद में स्थित बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम सदियों से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक रहे हैं। देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए इन धामों तक पहुंचते हैं।<br />
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी ने इस पवित्र यात्रा को प्रशासनिक दृष्टि से भी एक बड़ी चुनौती बना दिया है। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्राकृतिक परिस्थितियों से निपटना राज्य सरकार और प्रशासन के लिए कठिन परीक्षा साबित हो रहा है।<br />
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा कई मायनों में विशेष मानी जा रही है। इस बार सरकार ने जहां एक ओर यात्रियों की संख्या पर किसी प्रकार की सीमा न लगाने का निर्णय लिया है, वहीं यात्रा को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू करने की योजना भी तैयार की गई है। इसके साथ ही बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।</p>
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<strong>अक्षय तृतीया से शुरू होगी चारधाम यात्रा</strong><br />
चारधाम यात्रा की शुरुआत परंपरागत रूप से अक्षय तृतीया के पावन पर्व से होती है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही आधिकारिक रूप से यात्रा सत्र का शुभारंभ हो जाएगा।<br />
इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही लाखों श्रद्धालुओं का रुख हिमालयी धामों की ओर हो जाएगा।<br />
चारों धामों के कपाट खुलने की प्रक्रिया अपने आप में अत्यंत धार्मिक महत्व रखती है। वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच मंदिरों के द्वार खोले जाते हैं। इस अवसर पर स्थानीय लोग, साधु-संत और देशभर से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहते हैं।<br />
चारधाम यात्रा सामान्यतः अप्रैल से लेकर नवंबर तक चलती है। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवताओं की पूजा शीतकालीन गद्दी स्थलों पर की जाती है।</p>
<p style="text-align: left;"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-8611 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1.jpg" alt="" width="948" height="533" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1.jpg 948w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69733e509c621-kedarnath-and-badrinath-dham-file-photo-pti-232426794-16x9-1-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 948px) 100vw, 948px" /><br />
<strong>आस्था के साथ बढ़ती भीड़ की चुनौती</strong><br />
पिछले कुछ वर्षों में चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। सड़क संपर्क, हेलीकॉप्टर सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में वृद्धि के कारण अब पहले की तुलना में कहीं अधिक लोग इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं।<br />
वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया था। उस वर्ष चारों धामों में कुल 48.31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इनमें सबसे अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे थे, जहां 17,68,795 लोगों ने बाबा केदार के दर्शन किए।<br />
बद्रीनाथ धाम में 16,60,224, गंगोत्री धाम में 7,58,249 और यमुनोत्री धाम में 6,44,637 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।<br />
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुकी है। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, धार्मिक पर्यटन और रोजगार के अनेक अवसर इस यात्रा से जुड़े हुए हैं।<br />
हालांकि बढ़ती संख्या प्रशासन के लिए कई प्रकार की समस्याएं भी पैदा कर रही है। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक लाखों लोगों की आवाजाही व्यवस्था को प्रभावित कर देती है।</p>
<p style="text-align: left;"><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-8612 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63.jpeg" alt="" width="588" height="330" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63.jpeg 588w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/images-63-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 588px) 100vw, 588px" /><br />
<strong>यातायात जाम और व्यवस्थागत चुनौतियां</strong><br />
चारधाम यात्रा के दौरान सबसे बड़ी समस्या यातायात प्रबंधन की होती है। विशेष रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ मार्ग पर कई बार लंबा जाम लग जाता है।<br />
जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम तक जाने वाला मार्ग कई बार घंटों तक जाम में फंसा रहता है। इससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी इस जाम में घंटों फंसे रहते हैं।<br />
इसी प्रकार केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच वाहनों का अत्यधिक दबाव देखने को मिलता है। यहां पार्किंग और वाहनों के संचालन की सीमित क्षमता के कारण प्रशासन को कई बार वाहनों को रोकना पड़ता है।<br />
पिछले वर्षों में कई ऐसे अवसर आए जब अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन को यात्रा को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगाने पड़े। इससे श्रद्धालुओं में असमंजस और नाराजगी भी देखने को मिली।<br />
कई तीर्थयात्री लंबी दूरी तय करके उत्तराखंड पहुंचते हैं, लेकिन अचानक लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उन्हें बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ता है। इस स्थिति ने प्रशासन के लिए भी कठिन परिस्थिति पैदा कर दी थी।</p>
<p style="text-align: left;"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-8613 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed.jpeg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed.jpeg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-300x169.jpeg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-1024x576.jpeg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/badrinath-kedarnath_3dcc6a60dfe80aaa1e6e1487c4c970ed-768x432.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /><br />
<strong>इस बार संख्या पर नहीं होगी कोई सीमा</strong><br />
इस वर्ष राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं लगाई जाएगी।<br />
सरकार का कहना है कि हर श्रद्धालु को अपने आराध्य के दर्शन करने का अधिकार है और प्रशासन का दायित्व है कि वह यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करे।<br />
गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित न किया जाए।<br />
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना है। इसलिए संख्या पर कोई औपचारिक प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।<br />
हालांकि प्रशासन को यह अधिकार रहेगा कि यदि किसी स्थान पर अत्यधिक भीड़ हो जाए या सुरक्षा की दृष्टि से कोई खतरा पैदा हो जाए तो स्थानीय स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।</p>
<p style="text-align: left;"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-8614 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1.jpg" alt="" width="948" height="533" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1.jpg 948w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1-300x169.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2026/03/69aba7b49f042-char-dham-yatra-07210372-16x9-1-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 948px) 100vw, 948px" /><br />
<strong>रजिस्ट्रेशन व्यवस्था होगी अनिवार्य</strong><br />
हालांकि संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी, लेकिन यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहेगा।<br />
सरकार का मानना है कि रजिस्ट्रेशन के माध्यम से यात्रियों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है और उसी के अनुसार व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।<br />
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे प्रशासन को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस दिन किस धाम में कितने श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं।<br />
इस व्यवस्था से भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।<br />
गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रस्ताव ने छेड़ी बहस<br />
चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच एक और मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया है।<br />
मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि यह निर्णय मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।<br />
उनके अनुसार मंदिरों में दर्शन करने के लिए वही लोग आएं जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। प्रस्ताव के अनुसार यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास के क्षेत्र में लागू किया जा सकता है।<br />
हालांकि समिति ने स्पष्ट किया है कि सिख, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत इन्हें व्यापक हिंदू धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।<br />
यह प्रस्ताव फिलहाल सिफारिश के रूप में सामने आया है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।<br />
धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती<br />
इस प्रस्ताव ने समाज में एक नई बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग इसे मंदिरों की परंपरा और पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं।<br />
उनका कहना है कि मंदिरों की अपनी धार्मिक मर्यादाएं होती हैं और उन मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए।<br />
दूसरी ओर कुछ लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हैं। उनका तर्क है कि भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश है जहां किसी भी व्यक्ति को धार्मिक स्थलों पर जाने से रोका नहीं जाना चाहिए। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के स्तर पर ही लिया जाएगा।<br />
<strong>सुरक्षा व्यवस्था को बनाया गया सर्वोच्च प्राथमिकता</strong><br />
इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत मजबूत बनाने की योजना तैयार की गई है। यात्रा मार्गों और प्रमुख स्थलों पर लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के माध्यम से पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जाएगी।<br />
पुलिस मुख्यालय ने यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष नियंत्रण व्यवस्था भी तैयार की है। इसके तहत गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप की निगरानी में एक विशेष सेल बनाया गया है।<br />
यह सेल यात्रा के दौरान होने वाली गतिविधियों की लगातार निगरानी करेगा और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।<br />
<strong>74 पुलिस चौकियां और 106 पार्किंग स्थल</strong><br />
यात्रा मार्गों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार 74 वॉच एंड वार्ड पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी।<br />
इन चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मी यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े कार्यों को संभालेंगे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर 106 पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं। इससे वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और जाम की स्थिति को कम किया जा सकेगा।<br />
<strong>आपदा प्रबंधन की भी विशेष तैयारी</strong><br />
चारधाम यात्रा पहाड़ी क्षेत्रों में होती है जहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। भूस्खलन, अचानक मौसम परिवर्तन और सड़क दुर्घटनाएं यहां आम समस्याएं हैं। इसलिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के लिए भी व्यापक तैयारी की है।<br />
यात्रा मार्गों पर 31 स्थानों पर राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की तैनाती की जाएगी। ये टीमें किसी भी दुर्घटना या आपदा की स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर सकेंगी।<br />
<strong>टूरिस्ट पुलिस असिस्टेंस बूथ बनाए जाएंगे</strong><br />
तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए सात जिलों में 51 टूरिस्ट पुलिस असिस्टेंस बूथ स्थापित किए जाएंगे। ये बूथ उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और हरिद्वार जिलों में बनाए जाएंगे।<br />
इन बूथों पर तैनात पुलिसकर्मी यात्रियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ यात्रा से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे।<br />
<strong>भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए जाएंगे होल्डिंग स्थल</strong><br />
चारधाम यात्रा के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जब किसी स्थान पर भीड़ बहुत अधिक हो जाती है और यात्रियों को आगे बढ़ने से रोकना पड़ता है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को असुविधा न हो, इसके लिए आठ जिलों में 104 होल्डिंग स्थल बनाए जा रहे हैं।<br />
इन स्थानों पर यात्रियों के ठहरने, भोजन, शौचालय और विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर यहां रात्रि विश्राम की भी व्यवस्था की जा सकेगी।<br />
<strong>आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है चारधाम यात्रा</strong><br />
चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं है बल्कि यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बन चुकी है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आने से राज्य में पर्यटन और व्यापार को बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। होटल उद्योग, परिवहन सेवाएं, स्थानीय दुकानदार, घोड़ा-खच्चर संचालक और गाइड सभी इस यात्रा से जुड़े हुए हैं।<br />
यात्रा के दौरान हजारों लोगों को अस्थायी रोजगार भी मिलता है। यही कारण है कि राज्य सरकार यात्रा को अधिक से अधिक सुचारू बनाने पर विशेष ध्यान देती है।<br />
<strong>आने वाला यात्रा सत्र रहेगा महत्वपूर्ण</strong><br />
इस वर्ष चारधाम यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रही है।<br />
एक ओर जहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं प्रशासन नई तकनीक और व्यवस्थाओं के माध्यम से यात्रा को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रस्ताव ने भी इस यात्रा को धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया है।<br />
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रशासन द्वारा की गई तैयारियां जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और क्या ये व्यवस्थाएं बढ़ती भीड़ के बीच यात्रा को वास्तव में सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बना पाती हैं।<br />
चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं।<br />
ऐसे में यह आवश्यक है कि यात्रा की पवित्रता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा दोनों को समान महत्व दिया जाए, ताकि यह दिव्य परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक उसी गरिमा और भव्यता के साथ जारी रह सके।</p>
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		<title>महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की राम कथा में समाज, संस्कृति और चेतना का गहन विमर्श</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/in-the-ram-katha-discourse-delivered-by-mahamrityunjay-peethadheeshwar-swami-pranava-puri-ji-maharaj-there-is-a-profound-society-culture-and-consciousness/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 04:31:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[राम कथा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>गोंडा (विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक रिपोर्ट)। राम कथा केवल अतीत की कथा नहीं है, बल्कि वह वर्तमान और भविष्य का</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/in-the-ram-katha-discourse-delivered-by-mahamrityunjay-peethadheeshwar-swami-pranava-puri-ji-maharaj-there-is-a-profound-society-culture-and-consciousness/">महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की राम कथा में समाज, संस्कृति और चेतना का गहन विमर्श</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>गोंडा (विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक रिपोर्ट)। </strong>राम कथा केवल अतीत की कथा नहीं है, बल्कि वह वर्तमान और भविष्य का दर्पण है। यही भाव महामृत्युंजय पीठाधीश्वर <strong>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज</strong> द्वारा सुनाई गई राम कथा में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। कथा के दौरान उन्होंने रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से यह बताया कि किस प्रकार इतिहास, धर्म, समाज और सत्ता के बीच एक सतत संघर्ष चलता रहा है और आज भी चल रहा है। यह कथा भक्ति से कहीं आगे बढ़कर <strong>विचार, चेतना और सांस्कृतिक आत्मरक्षा</strong> का आह्वान बन गई।</p>
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<h3><strong>कुबेर का निष्कासन और लंका पर अधिकार: सत्ता की पहली सीढ़ी</strong></h3>
<p>कथा का आरंभ उस प्रसंग से हुआ जब रावण ने <strong>कुबेर को लंका से बाहर कर दिया</strong>। स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि कुबेर केवल धन के देवता नहीं हैं, बल्कि वे <strong>संतुलन, मर्यादा और धर्मपूर्ण समृद्धि</strong> के प्रतीक हैं। जब रावण ने कुबेर को लंका से बाहर किया, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि <strong>धर्म से अलग होकर शक्ति के दुरुपयोग</strong> की शुरुआत थी।</p>
<p>महाराज जी ने गोस्वामी तुलसीदास के संदर्भ में कहा कि लंका कोई साधारण नगर नहीं थी। उसका नाम आते ही उसकी दुर्गमता, वैभव और अभेद्यता का बोध होता है। लंका को इतनी सुदृढ़ बनाया गया था कि वहां तक पहुंचना सामान्य व्यक्ति के लिए असंभव था।</p>
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<h3><strong>पहले कब्ज़ा, फिर मूल्यांकन: रावण की मानसिकता</strong></h3>
<p>राम कथा में महाराज जी ने रावण की मानसिकता पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रावण ने पहले लंका पर <strong>कब्ज़ा किया</strong>, उसके बाद यह विचार किया कि यह स्थान उसके रहने योग्य है या नहीं।</p>
<p>उन्होंने इसे आज की भाषा में समझाते हुए कहा कि सज्जन व्यक्ति किसी स्थान पर रहने से पहले यह देखता है कि वहां—</p>
<ul>
<li>समाज कैसा है</li>
<li>सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं हैं या नहीं</li>
<li>संस्कार और सुरक्षा का वातावरण है या नहीं</li>
</ul>
<p>जबकि दुर्जन व्यक्ति यह देखता है कि वह स्थान कितना दुर्गम है, वहां कानून और समाज की पहुंच कितनी कम है। लंका चारों ओर समुद्र और खाइयों से घिरी हुई थी। महाराज जी ने कहा कि इससे बेहतर स्थान रावण के लिए हो ही नहीं सकता था, क्योंकि वहां कोई आसानी से प्रवेश नहीं कर सकता था।</p>
<h3><strong>लोकेशन का सिद्धांत: प्रबंधन से धर्म तक</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कथा के दौरान प्रबंधन (मैनेजमेंट) के सिद्धांतों को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी संपत्ति की कीमत तीन बातों से तय होती है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है <strong>लोकेशन</strong>।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में खेत लेना और मुंबई में 500 वर्ग फीट का घर लेना—दोनों की कीमत लोकेशन से तय होती है। इसी प्रकार समाज और सत्ता में भी लोकेशन का महत्व है।</p>
<p>रावण ने लंका को अपनी राजधानी इसलिए बनाया क्योंकि वह जानता था कि यह स्थान उसे बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखेगा।</p>
<h3><strong>लंका से आदेश और सनातन धर्म पर प्रहार</strong></h3>
<p>कथा में यह भी बताया गया कि लंका को राजधानी बनाने के बाद रावण ने अपने दलबल सहित राक्षसों को आदेश दिया कि वे जाकर <strong>सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ने</strong> का कार्य करें।</p>
<p>महाराज जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी को अपना तंत्र चलाना है, तो सबसे पहले उसे सनातन धर्म को कमजोर करना होगा, क्योंकि सनातन धर्म व्यक्ति को प्रश्न करने, विवेक रखने और सत्य के साथ खड़े होने की शक्ति देता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को समाप्त करने के लिए—</p>
<ul>
<li>गौशालाओं में आग लगाई गई</li>
<li>संतों और महापुरुषों के आश्रम उजाड़े गए</li>
<li>मंदिरों को तोड़ा गया</li>
<li>तपस्या, साधना और स्त्री शक्ति के प्रतीकों को समाप्त करने का प्रयास किया गया</li>
</ul>
<h3><strong>इतिहास से वर्तमान तक: वही मानसिकता, वही षड्यंत्र</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि यह केवल पौराणिक कथा नहीं है। यही मानसिकता इतिहास में मुगल काल से लेकर औपनिवेशिक दौर तक दिखाई देती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चाहे मुगल हों या ईसाई मिशनरी, दोनों ही कालखंडों में मंदिरों, शिक्षा केंद्रों और सनातन परंपराओं पर प्रहार हुआ। उद्देश्य एक ही था—<strong>श्रद्धा को तोड़ना, विचारों पर कब्ज़ा करना</strong>।</p>
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<h3><strong>विचारों पर कब्ज़ा: सबसे खतरनाक हथियार</strong></h3>
<p>कथा का केंद्रीय संदेश यही था कि भूमि पर कब्ज़ा अस्थायी होता है, लेकिन <strong>विचारों पर कब्ज़ा स्थायी गुलामी</strong> पैदा करता है।</p>
<p>महाराज जी ने कहा कि आज यदि बच्चों की शिक्षा, भाषा, संस्कृति और आदर्श बदल दिए जाएं, तो आने वाली पीढ़ी स्वतः अपनी जड़ों से कट जाएगी।</p>
<p>उन्होंने शिक्षा प्रणाली पर चर्चा करते हुए कहा कि एक समय था जब बच्चों से कविता सुनाने को कहा जाता था तो वे भारतीय संस्कृति से जुड़ी बातें सुनाते थे। फिर ऐसा दौर आया जब “Twinkle Twinkle Little Star” ही ज्ञान का प्रतीक बन गया।</p>
<h3><strong>परिवर्तन की आहट: लौटते संस्कार</strong></h3>
<p>हालांकि महाराज जी ने यह भी कहा कि अब धीरे-धीरे परिवर्तन दिखाई दे रहा है। आज जब संत-महात्मा किसी घर में जाते हैं और माता-पिता बच्चों से भजन या मंत्र सुनाने को कहते हैं, तो यह संकेत है कि समाज फिर से अपनी ओर लौट रहा है।</p>
<p>चाहे बच्चा टूटी-फूटी हनुमान चालीसा ही क्यों न सुना पाए, या गायत्री मंत्र ही क्यों न पढ़े—यह बदलाव महत्वपूर्ण है।</p>
<h3><strong>वसुधैव कुटुंबकम् बनाम वैचारिक आक्रमण</strong></h3>
<p>स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो <strong>वसुधैव कुटुंबकम्</strong> की भावना सिखाता है। हम सबको देवालय की तरह देखते हैं, सबके मार्ग का सम्मान करते हैं।</p>
<p>लेकिन इसी उदारता का दुरुपयोग कर सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह था कि राम को नष्ट कर दो, गौशालाओं को समाप्त कर दो, संतों की तपस्या को खत्म कर दो, ताकि आने वाली पीढ़ी यह पहचान ही न सके कि सनातन धर्म क्या था।</p>
<p>कथा के दौरान महाराज जी ने यह भी कहा कि कई बार जो लोग भगवान, कथा और धर्म की बात करते थे, उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर प्रताड़ित किया जाता था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह विषय राजनीतिक जरूर है, लेकिन जनता इसे देख और समझ रही है। जब धर्म की बात करने वालों को अपराधी बना दिया जाता था, तो समाज में अधर्म को बढ़ावा मिलता है। लेकिन अब समय बदल गया है अब अधर्मी मिटाए जा रहे हैं</p>
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<h3><strong>माता-पिता, गुरु और साधु की उपेक्षा</strong></h3>
<p>गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए महाराज जी ने कहा कि जब समाज में माता-पिता की सेवा नहीं होती, गुरु का सम्मान नहीं रहता और साधु-संतों की बातों को अनदेखा किया जाता है, तब निशाचर प्रवृत्ति वाले लोग बढ़ते हैं।</p>
<p>चोरी, लंपटता और छल को चतुराई समझा जाने लगता है। यही अधर्म का प्रसार है।</p>
<h3><strong>राम कथा का निष्कर्ष: चेतना और जागरण</strong></h3>
<p>इस राम कथा का निष्कर्ष किसी के विरुद्ध घृणा नहीं, बल्कि <strong>चेतना, आत्मचिंतन और जागरण</strong> है। स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने स्पष्ट किया कि यह कथा किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा और समाज के आत्मबल को जगाने के लिए है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि विचार सुरक्षित हैं, तो धर्म सुरक्षित है। यदि धर्म सुरक्षित है, तो समाज और राष्ट्र स्वतः सुरक्षित रहेंगे।</p>
<p>महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज की यह राम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक <strong>वैचारिक चेतावनी और सांस्कृतिक घोषणापत्र</strong> बनकर सामने आई। लंका और रावण के प्रतीकों के माध्यम से यह कथा आज के समाज को यह संदेश देती है कि सबसे बड़ी लड़ाई तलवारों से नहीं, बल्कि <strong>विचारों और संस्कारों</strong> से लड़ी जाती है।</p>
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		<title>चैत्र नवरात्रि 2025 की महाअष्टमी: व्रत, पूजा विधि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/maha-ashtami-of-chaitra-navratri-2025-auspicious-time-for-fasting-worship-method-and-kanya-pujan/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 16:42:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Maha Ashtami of Chaitra Navratri 2025: Auspicious time for fasting]]></category>
		<category><![CDATA[worship method and Kanya Pujan]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.prabhatbharat.com/?p=5050</guid>

					<description><![CDATA[<p>नवरात्रि की महिमा और आरंभ भारतीय संस्कृति में नवरात्रि का पर्व विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/maha-ashtami-of-chaitra-navratri-2025-auspicious-time-for-fasting-worship-method-and-kanya-pujan/">चैत्र नवरात्रि 2025 की महाअष्टमी: व्रत, पूजा विधि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नवरात्रि की महिमा और आरंभ</strong></p>
<p>भारतीय संस्कृति में नवरात्रि का पर्व विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह पर्व वर्ष में दो बार आता है—चैत्र और शारदीय नवरात्रि के रूप में। 2025 में चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगी। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। इन दिनों व्रत, उपवास और साधना के माध्यम से भक्तजन देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस कालखंड में मन, वचन और कर्म की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और इच्छित फलों की प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>इस बार केवल आठ दिन की नवरात्रि क्यों</strong><br />
पंचांग गणना के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्रि में द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन पड़ने से नौ दिन की जगह केवल आठ दिन की नवरात्रि होगी। यह एक विशेष ज्योतिषीय संयोग है, जो समय-समय पर बनता है। नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होती है और नवमी तिथि तक देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। लेकिन तिथि समाहार की स्थिति में जब दो तिथियाँ एक ही दिन पड़ती हैं, तो नव दिनों की नवरात्रि आठ दिनों में ही संपन्न हो जाती है। यह स्थिति भक्तों के लिए थोड़ी उलझन भरी जरूर हो सकती है, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से इसका कोई दोष नहीं होता।</p>
<p><strong>महाष्टमी तिथि की पुष्टि और कालावधि</strong><br />
महाअष्टमी, जिसे दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है, नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 4 अप्रैल की रात 8:12 बजे से शुरू होकर 5 अप्रैल की शाम 7:26 बजे तक रहेगी। चूंकि हिन्दू धर्म में किसी भी व्रत या पर्व को ‘उदया तिथि’ यानी सूर्योदय की तिथि के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए 5 अप्रैल को ही अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। यही दिन महाअष्टमी के रूप में मान्य होगा और इसी दिन व्रत, पूजन और कन्या भोज जैसे अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।</p>
<p><strong>महाअष्टमी व्रत का महत्व</strong></p>
<p>महाअष्टमी का दिन देवी महागौरी को समर्पित होता है, जो शांति, करुणा और शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन उपवास रखने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं और उन्हें पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप आदि अर्पित करते हैं। महाअष्टमी का व्रत साधना और तपस्या का प्रतीक होता है, जिसे रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और वह मानसिक और आत्मिक बल प्राप्त करता है। अष्टमी के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-5051 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/04/images-45.jpeg" alt="" width="686" height="386" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/04/images-45.jpeg 686w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/04/images-45-300x169.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 686px) 100vw, 686px" /></p>
<p><strong>कन्या पूजन की परंपरा और उसका अर्थ</strong><br />
महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन नौ छोटी बालिकाओं को देवी के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। उनके चरण धोकर उन्हें भोजन कराना और उपहार देना शुभ माना जाता है। यह परंपरा बताती है कि स्त्री शक्ति का सम्मान करना सनातन धर्म की आधारशिला है। कन्या पूजन के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाता है कि नारी केवल मातृत्व का नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का भी प्रतीक है। बालिकाओं के रूप में देवी के दर्शन कर भक्त स्वयं को धन्य मानते हैं।</p>
<p><strong>कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त</strong><br />
2025 में महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए तीन विशेष मुहूर्त बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:35 से 5:21 बजे तक रहेगा, जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रातः संध्या का समय सुबह 4:58 से 6:07 बजे तक रहेगा, जो पूजा और ध्यान के लिए उपयुक्त है। वहीं, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तक रहेगा, जिसे सबसे शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है। श्रद्धालु इन तीनों में से किसी भी समय कन्या पूजन कर सकते हैं। इन मुहूर्तों में देवी की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>पूजन सामग्री और विधि</strong><br />
महाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा की पूजा के लिए विशेष पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है—जैसे लाल वस्त्र, अक्षत, रोली, मौली, पुष्प, धूप, दीपक, नारियल, फल, मिठाई और पंचमेवा। कन्या पूजन के लिए बालिकाओं को आमंत्रित कर उन्हें आसन पर बिठाना चाहिए, उनके चरण धोने के बाद उन्हें हलवा, पूड़ी और चने का भोजन कराना चाहिए। भोजन के बाद उन्हें लाल चुन्नी, टिकली, कंगन या कोई अन्य उपहार भेंट करना चाहिए। यह संपूर्ण विधि भक्तों में सेवा और भक्ति की भावना को जागृत करती है।</p>
<p><strong>अष्टमी के दिन क्या करें और क्या न करें</strong><br />
महाअष्टमी के दिन संयम और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन मांसाहार, शराब, प्याज-लहसुन से परहेज करना चाहिए। साथ ही मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना अनिवार्य है। कलह, अपशब्द, लोभ और क्रोध से दूर रहना चाहिए। घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि माना जाता है कि इन दिनों देवी मां स्वयं घर-घर भ्रमण करती हैं। अष्टमी के दिन अपने आस-पास के जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान देना भी पुण्यकारी होता है।</p>
<p><strong>दुर्गा स्तुति और उसका महत्व</strong><br />
महाअष्टमी के दिन &#8220;या देवी सर्वभूतेषु&#8230;&#8221; जैसी स्तुतियों का जाप अत्यंत लाभकारी होता है। यह मंत्र देवी के विविध रूपों का गुणगान करता है और उनके सर्वव्यापक स्वरूप को दर्शाता है:<br />
<strong><em>&#8220;या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।<br />
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।।<br />
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।<br />
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।&#8221;</em></strong><br />
इस स्तुति का निरंतर जाप करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन स्थिर रहता है। यह भक्त और देवी के बीच एक आध्यात्मिक पुल का निर्माण करता है।</p>
<p><strong>अष्टमी का समापन और नवमी की तैयारी</strong><br />
महाअष्टमी के दिन का समापन कन्या पूजन और आरती के साथ होता है। भक्तजन दिनभर उपवास रखकर शाम को मां दुर्गा की विशेष आरती करते हैं और उन्हें भोग अर्पित करते हैं। इसके साथ ही नवमी की तैयारी भी प्रारंभ हो जाती है, जिसे राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। नवमी के दिन भगवान राम के जन्म का उत्सव और दुर्गा नवमी की पूजा एक साथ होती है। इस प्रकार नवरात्रि का यह समापन भक्तों के जीवन में शुभता, शक्ति और समृद्धि की भावना का संचार करता है।</p>
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		<title>त्रिकूटा पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक गुफा: मकर संक्रांति पर खुला माता वैष्णो देवी का पवित्र द्वार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jan 2025 03:40:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जम्मू एंड कश्मीर]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Maa vaishno devi]]></category>
		<category><![CDATA[मां वैष्णो देवी]]></category>
		<category><![CDATA[मां वैष्णो देवी प्राचीन गुफा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कटरा (जम्मू-कश्मीर), 15 जनवरी। रियासी जिले की त्रिकूटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की प्राकृतिक गुफा</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/natural-cave-located-in-trikuta-hills-the-holy-door-of-mata-vaishno-devi-opened-on-makar-sankranti/">त्रिकूटा पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक गुफा: मकर संक्रांति पर खुला माता वैष्णो देवी का पवित्र द्वार</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कटरा (जम्मू-कश्मीर), 15 जनवरी। रियासी जिले की त्रिकूटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर की प्राकृतिक गुफा को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। यह गुफा अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्ता के लिए जानी जाती है। विशेष पूजा-अर्चना के बाद ‘श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अंशुल गर्ग की उपस्थिति में गुफा का द्वार खोला गया।</p>
<p>इस ऐतिहासिक गुफा के खुलने के साथ श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर है। यह गुफा साल के अधिकांश समय बंद रहती है, जिससे इसके दर्शन का अवसर बेहद खास और दुर्लभ बनता है।</p>
<p><strong>प्राकृतिक गुफा के दर्शन: विशेष अवसर पर दुर्लभ सौभाग्य</strong></p>
<p>मंदिर के गर्भगृह के भीतर स्थित यह प्राकृतिक गुफा आमतौर पर सर्दियों के महीनों में ही खुलती है, जब तीर्थयात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है। यह गुफा सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से साल भर में केवल सीमित दिनों के लिए ही खोली जाती है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-4725 size-full" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/images-51-1.jpeg" alt="" width="678" height="452" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/images-51-1.jpeg 678w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2025/01/images-51-1-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 678px) 100vw, 678px" /></p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, गुफा को तब ही खोला जाता है जब श्रद्धालुओं की संख्या 10,000 से कम होती है। यही कारण है कि सर्दियों के दौरान दिसंबर से फरवरी तक इस गुफा के दर्शन संभव हो पाते हैं। कभी-कभी यह अवधि मार्च के प्रारंभ तक भी बढ़ाई जाती है, विशेष रूप से होली से पहले के दिनों में।</p>
<p>गर्ग ने बताया, “श्रद्धालुओं की संख्या कम होने पर गुफा के दर्शन की अनुमति दी जाती है। हमारा उद्देश्य है कि तीर्थयात्री बिना किसी असुविधा के माता रानी के दर्शन कर सकें।&#8221;</p>
<p><strong>मकर संक्रांति पर खुला विशेष द्वार</strong></p>
<p>इस बार मकर संक्रांति उत्सव को ध्यान में रखते हुए गुफा का द्वार खोला गया। सुबह की आरती और पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुए इस आयोजन में श्राइन बोर्ड के अधिकारियों और स्थानीय पुजारियों ने भाग लिया।</p>
<p>श्राइन बोर्ड ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों को नई और पुरानी दोनों गुफाओं से माता के दर्शन का विकल्प दिया गया है। हालांकि, अधिक भीड़ होने की स्थिति में तीर्थयात्रियों को नई गुफा के माध्यम से दर्शन कराए जाएंगे।</p>
<p><strong>गुफा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व</strong></p>
<p>माता वैष्णो देवी मंदिर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का अद्वितीय प्रतीक है। यह गुफा त्रिकूटा पहाड़ियों की गोद में स्थित है और मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने इसी स्थान पर तपस्या की थी।</p>
<p>गुफा के भीतर बहने वाली पवित्र जलधारा ‘चरणगंगा’ का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इसे अपने साथ पवित्र स्मृति के रूप में लेकर जाते हैं।</p>
<p>प्राकृतिक गुफा का रास्ता संकरा और चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद भक्त इसे माता के दिव्य रूप से जुड़ने का विशेष माध्यम मानते हैं। इसके दर्शन करने वाले भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की संख्या और व्यवस्थाएं</strong></p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इस साल अब तक 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालु वैष्णो देवी के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा मंदिर की लोकप्रियता को दर्शाता है।</p>
<p>पिछले वर्ष कुल 94.83 लाख श्रद्धालु माता के दरबार पहुंचे, जो पिछले एक दशक में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। यह मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और आकर्षण को दर्शाता है।</p>
<p>श्राइन बोर्ड ने बताया कि इस बार तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। रास्ते में पानी, चिकित्सा और सुरक्षा सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य है कि हर तीर्थयात्री बिना किसी कठिनाई के माता के दर्शन कर सके।</p>
<p><strong>नई गुफा: आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ सुगम दर्शन</strong></p>
<p>पुरानी गुफा के अलावा मंदिर में नई गुफा भी श्रद्धालुओं के लिए एक विकल्प है। आधुनिक तकनीक और व्यवस्थाओं के साथ विकसित इस मार्ग से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री दर्शन कर सकते हैं।</p>
<p>गर्ग ने बताया, “नई गुफा से श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर पा रहे हैं। यहां पर्याप्त स्थान और आधुनिक सुविधाएं हैं, जिससे दर्शन की प्रक्रिया सुचारू रहती है।”</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि की उम्मीद</strong></p>
<p>श्राइन बोर्ड ने इस साल श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की उम्मीद जताई है। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।</p>
<p>गर्ग ने कहा, “हम तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सतर्क हैं। हमारी कोशिश है कि हर श्रद्धालु को माता वैष्णो देवी के दर्शन का विशेष अनुभव प्राप्त हो।”</p>
<p><strong>मंदिर तक पहुंचने का मार्ग</strong></p>
<p>माता वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए कटरा शहर मुख्य आधार है। यहां से तीर्थयात्री लगभग 12 किलोमीटर की चढ़ाई कर त्रिकूटा पहाड़ियों के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुंचते हैं।</p>
<p>चढ़ाई के दौरान सुविधाजनक रूट, जैसे घोड़े, पालकी और हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। श्रद्धालुओं के लिए इस यात्रा का हर कदम अद्वितीय अनुभव और आस्था का प्रतीक बनता है।</p>
<p><strong>मकर संक्रांति पर माता के दरबार में विशेष उमंग</strong></p>
<p>मकर संक्रांति के अवसर पर माता वैष्णो देवी के दरबार में भक्तों की उमंग देखने लायक है। श्रद्धालुओं ने गुफा के दर्शन कर इसे अपने जीवन का अनमोल क्षण बताया।</p>
<p>श्रद्धालुओं का मानना है कि इस गुफा के दर्शन से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।</p>
<p>माता वैष्णो देवी मंदिर की प्राकृतिक गुफा का खुलना सर्दियों के महीनों में भक्तों के लिए एक अद्वितीय अवसर है। मकर संक्रांति जैसे पावन अवसर पर यह गुफा श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आनंद का माध्यम बनती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए विशेष प्रबंध इस यात्रा को और अधिक सहज और यादगार बनाते हैं।</p>
<p>श्रद्धालु माता रानी की कृपा से आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हुए मंदिर से लौटते हैं, और यह यात्रा उनके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाती है।</p>
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		<item>
		<title>पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: राष्ट्र शोक में डूबा, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/former-prime-minister-dr-manmohan-singh-passed-away-nation-mourns-seven-days-of-national-mourning-declared/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 07:50:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेठी]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[Manmohan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. सिंह के आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का जाना देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन में जो ईमानदारी, सादगी और निष्ठा का परिचय दिया, वह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। वे न केवल एक महान अर्थशास्त्री थे, बल्कि एक ऐसे नेता भी थे, जिन्होंने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए अद्वितीय योगदान दिया।”</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4544 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1714" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-300x201.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-1024x685.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-768x514.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-1536x1028.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274448-2048x1371.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;"><strong>डॉ. सिंह का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा</strong></p>
<p style="text-align: left;">26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब के गाह में जन्मे डॉ. मनमोहन सिंह ने गरीबी और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में अपना बचपन बिताया। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत में बस गया। डॉ. सिंह ने अपनी शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय से प्रारंभ की और बाद में कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में उच्च डिग्री प्राप्त की। उनकी शिक्षा ने उन्हें न केवल एक बेहतरीन अर्थशास्त्री बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4545 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1732" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-300x203.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1024x693.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-768x520.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1536x1039.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-2048x1386.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;"><strong>एक अर्थशास्त्री के रूप में योगदान</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रोफेसर के रूप में की, लेकिन जल्द ही वे नीति निर्माण में सक्रिय हो गए। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के रूप में अपनी सेवाएं दीं और देश की मौद्रिक नीतियों को मजबूती प्रदान की। 1991 में, जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था, उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने वित्त मंत्री नियुक्त किया।</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह ने आर्थिक सुधारों की दिशा में साहसिक कदम उठाए, जिनमें उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण जैसे सुधार शामिल थे। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल अपने विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर किया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्थान भी बनाया। उन्होंने विदेशी निवेश को आकर्षित करने, कराधान प्रणाली को सुधारने और देश की आर्थिक नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-4545 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1732" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg 2560w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-300x203.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1024x693.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-768x520.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1536x1039.jpg 1536w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-2048x1386.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने इस योगदान को याद करते हुए कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में किए गए आर्थिक सुधारों ने देश को आर्थिक स्थिरता और विकास की ओर अग्रसर किया। उनकी नीति निर्माण की क्षमता और दूरदर्शिता का देश हमेशा ऋणी रहेगा।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>राजनीतिक सफर और प्रधानमंत्री के रूप में योगदान</strong></p>
<p style="text-align: left;">2004 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जीत के बाद, डॉ. मनमोहन सिंह देश के 14वें प्रधानमंत्री बने। वे भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बजाय उनकी विशेषज्ञता और नीतिगत कुशलता को उनकी नियुक्ति का आधार माना गया।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और वैश्विक कूटनीति पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में कई ऐतिहासिक योजनाएं और नीतियां लागू की गईं, जिनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), शिक्षा का अधिकार अधिनियम, और खाद्य सुरक्षा अधिनियम शामिल हैं।</p>
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<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री के रूप में उनकी विरासत और निजी व्यक्तित्व</p>
<p style="text-align: left;">भारत-अमेरिका परमाणु समझौता</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता था। इस समझौते ने भारत को ऊर्जा संकट से उबरने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण स्थान हासिल करने में मदद की। हालांकि, इस समझौते को लेकर देश के भीतर काफी विवाद हुए, लेकिन डॉ. सिंह ने अपनी दृढ़ता और कूटनीतिक कौशल से इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया।</p>
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<p style="text-align: left;"><strong>सामाजिक और आर्थिक योजनाएं</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह की नीतियों का केंद्र बिंदु हमेशा आम जनता रही। उनके कार्यकाल में सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दी गई। ग्रामीण भारत के विकास के लिए उन्होंने विशेष योजनाएं लागू कीं, जिनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, शिक्षा में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना था।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इन प्रयासों को याद करते हुए कहा, “डॉ. सिंह का समर्पण और उनकी नीतियों का प्रभाव देश के विकास में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने अपनी सादगी और दूरदर्शिता से यह दिखाया कि किस प्रकार ऊंचे पदों पर रहते हुए भी जनता के प्रति समर्पित रहा जा सकता है।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>डॉ. सिंह का निजी व्यक्तित्व</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी सौम्यता, सादगी और बौद्धिकता के लिए जाना जाता था। वे विवादों से दूर रहने वाले नेता थे, जिनका ध्यान हमेशा देश की प्रगति पर केंद्रित रहता था। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस गुण को याद करते हुए कहा, “डॉ. सिंह का जीवन ईमानदारी और सादगी का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा उच्च नैतिक मूल्यों का पालन किया और देश सेवा में अपना सर्वस्व योगदान दिया।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>एक प्रेरणादायक नेता</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. सिंह के नेतृत्व का प्रभाव केवल उनके कार्यकाल तक सीमित नहीं था। वे भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत थे। उनकी विनम्रता और उनकी नेतृत्व क्षमता ने यह साबित किया कि सच्चा नेतृत्व केवल पद की शक्ति से नहीं, बल्कि विचारों और नीतियों की प्रभावशीलता से मापा जाता है।</p>
<p style="text-align: left;">प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन पर कहा, “उच्च पदों पर रहते हुए भी डॉ. सिंह अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब उनसे कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती थी। उनकी गहराई और सहजता मुझे हमेशा प्रेरित करती थी।”</p>
<p style="text-align: left;"><strong>अंतिम विदाई और देश की संवेदनाएं</strong></p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर केवल भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शोक व्यक्त किया गया है। उनके नेतृत्व और योगदान को लेकर दुनिया भर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। देशभर में उनके सम्मान में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।</p>
<p style="text-align: left;">डॉ. मनमोहन सिंह का निधन भारतीय राजनीति में एक युग का अंत है। उनका जीवन, उनकी नीतियां और उनका योगदान हमेशा भारतीय इतिहास में अमर रहेंगे। उनके परिवार, दोस्तों और देश के नागरिकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।”</p>
<p style="text-align: left;">आज, जब देश ने अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक को खो दिया है, तो यह समय उनके जीवन और उनके कार्यों से सीखने का है। डॉ. सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि ईमानदारी, सादगी और समर्पण के साथ बड़े से बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/former-prime-minister-dr-manmohan-singh-passed-away-nation-mourns-seven-days-of-national-mourning-declared/">पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: राष्ट्र शोक में डूबा, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>प्रधानमंत्री से संवाद की मांग: कांग्रेस ने एमएसपी गारंटी कानून पर दबाव बढ़ाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Dec 2024 02:12:04 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभात भारत विशेष]]></category>
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		<category><![CDATA[MSP guarantee law should be passed: Congress demands]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 07 दिसंबर। कांग्रेस ने शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोके जाने पर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/prime-minister-should-communicate-with-farmers-msp-guarantee-law-should-be-passed-congress-demands/">प्रधानमंत्री से संवाद की मांग: कांग्रेस ने एमएसपी गारंटी कानून पर दबाव बढ़ाया</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 07 दिसंबर। कांग्रेस ने शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को रोके जाने पर मोदी सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि वे तुरंत किसानों से बातचीत करें और संसद के इसी सत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी का कानून पारित करें।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, &#8220;किसान दिल्ली बॉर्डर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें दिल्ली आकर अपनी मांगें रखने से रोका जा रहा है। बैरिकेड्स, कीलें और कंटीले तार लगाकर किसानों को रोकना, उनकी आवाज को दबाने का प्रतीक है।&#8221;</p>
<p><strong>मोदी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप</strong></p>
<p>रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला करते हुए कहा, &#8220;नरेंद्र मोदी के पास फिल्म देखने का समय है, लेकिन किसानों से मिलने का नहीं।&#8221; उन्होंने किसानों को रोके जाने को सरकार की असंवेदनशीलता बताया।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि 2021 में तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेते समय मोदी सरकार ने वादा किया था कि एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाएगी। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, &#8220;700 किसानों की शहादत के बाद सरकार का यह रुख उनकी कुर्बानियों का अपमान है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने यह मांग उठाई कि केंद्र सरकार बिना किसी देरी के किसानों को बातचीत के लिए बुलाए और संसद में एमएसपी गारंटी कानून पेश कर उसे पारित करे।</p>
<p><strong>एमएसपी पर सरकारी दावे बनाम हकीकत: कांग्रेस का खुलासा</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयानों को झूठा करार देते हुए एमएसपी से जुड़े वास्तविक आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि वह किसानों को उनकी फसलों पर एमएसपी दे रही है, लेकिन 2023-24 के रबी फसलों के खरीद आंकड़े इस दावे को खारिज करते हैं।</p>
<p><strong>रबी फसलों की खरीद के आंकड़े (2023-24):</strong></p>
<ul>
<li>गेहूं: कुल उत्पादन का 23.2का१</li>
<li>चना: 0.37%</li>
<li>मसूर: 14.08%</li>
<li>सरसों: 9.19%</li>
<li>जौ और कुसुम: कोई खरीद नहीं हुई</li>
</ul>
<p>रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों को उचित एमएसपी देने के बजाय उत्पादन लागत पर भी कटौती की है। उन्होंने बताया कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा था कि एमएसपी को लागत प्लस 50% के आधार पर तय करना संभव नहीं है क्योंकि इससे बाजार बिगड़ जाएगा। उन्होंने इसे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों की अनदेखी बताया।</p>
<p><strong>राज्यों की मांगों की अनदेखी</strong></p>
<p>सुरजेवाला ने भाजपा शासित राज्यों द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) को भेजी गई रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों ने गेहूं और चने की लागत को लेकर सरकार से एमएसपी बढ़ाने की मांग की थी।</p>
<p>महाराष्ट्र ने बताया कि गेहूं की उत्पादन लागत ₹3,527 प्रति क्विंटल आती है और इसके लिए ₹4,461 प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया जाना चाहिए।</p>
<p>महाराष्ट्र ने चने की लागत ₹5,402 प्रति क्विंटल बताई और ₹7,119 का एमएसपी मांगा।</p>
<p>लेकिन केंद्र सरकार ने इन सभी मांगों को खारिज कर दिया।</p>
<p><strong>सोयाबीन किसानों की दयनीय स्थिति</strong></p>
<p>रणदीप सुरजेवाला ने सोयाबीन उत्पादक किसानों की हालत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में सोयाबीन की लागत ₹3,261 प्रति क्विंटल और एमएसपी ₹4,892 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। बावजूद इसके, बाजार में सोयाबीन ₹4,000 प्रति क्विंटल से कम दाम में बिक रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।</p>
<p><strong>रबी फसलों के एमएसपी में मामूली वृद्धि</strong></p>
<p>सुरजेवाला ने हाल ही में घोषित रबी सीजन 2025-26 के एमएसपी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष फसलों के एमएसपी में केवल 2.4% से 7% की बढ़ोतरी की गई है, जो किसानों की बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव के सामने अपर्याप्त है।</p>
<p><strong>कांग्रेस की चेतावनी और समाधान की मांग</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने किसानों को नजरअंदाज किया, तो कांग्रेस उनके संघर्ष में शामिल होगी।</p>
<p>कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे किसानों के साथ सौहार्दपूर्ण संवाद करें और संसद में एमएसपी गारंटी कानून पारित कर देश के अन्नदाता को न्याय दें।</p>
<p>&#8220;यह सिर्फ किसानों की लड़ाई नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को बचाने की जंग है।&#8221; रणदीप सुरजेवाला ने कहा</p>
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		<title>मणिपुर में अघोषित राष्ट्रपति शासन का आरोप: इंडिया गठबंधन का प्रधानमंत्री मोदी पर हमला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Dec 2024 01:41:39 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Allegation of undeclared President's rule in Manipur: India Alliance attacks Prime Minister Modi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 06 दिसंबर। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मणिपुर में जारी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/allegation-of-undeclared-presidents-rule-in-manipur-india-alliance-attacks-prime-minister-modi/">मणिपुर में अघोषित राष्ट्रपति शासन का आरोप: इंडिया गठबंधन का प्रधानमंत्री मोदी पर हमला</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 06 दिसंबर। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मणिपुर में जारी हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गठबंधन ने दावा किया कि राज्य में अघोषित राष्ट्रपति शासन लागू है और केंद्र सरकार मणिपुर की उपेक्षा कर रही है।</p>
<p>विजय चौक पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष के. मेघचंद्र सिंह और दस विपक्षी दलों के संयोजक क्षेत्रीमयुम शांता ने कहा कि वे जंतर-मंतर पर धरना देना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। नेताओं ने प्रधानमंत्री से मणिपुर का दौरा करने और राज्य में शांति बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।</p>
<p><strong>मणिपुर की अनदेखी का आरोप</strong></p>
<p>इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार पर मणिपुर की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि राज्य में जारी हिंसा और सामाजिक विभाजन के बावजूद प्रधानमंत्री ने न तो अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मुलाकात की है, न ही विपक्षी नेताओं से कोई चर्चा की।</p>
<p>नेताओं ने सवाल उठाया कि पिछले 18 महीनों में केंद्र सरकार ने मणिपुर में स्थिति सुधारने के लिए क्या प्रयास किए हैं। मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष के. मेघचंद्र सिंह ने कहा, &#8220;मणिपुर भारत का हिस्सा है और वहां के लोग भारतीय नागरिक हैं। उनके साथ इस तरह की उपेक्षा क्यों की जा रही है?&#8221;</p>
<p><strong>राहत शिविरों में रह रहे 60 हजार विस्थापित लोग</strong></p>
<p>गठबंधन नेताओं ने खुलासा किया कि मणिपुर में करीब 60 हजार लोग अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राज्य में सामुदायिक विभाजन इतना गहरा हो चुका है कि एक समुदाय के लोगों के लिए दूसरे समुदाय के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में जाना असंभव हो गया है।</p>
<p>क्षेत्रीमयुम शांता ने कहा, &#8220;मणिपुर का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह से टूट चुका है। यह स्थिति राज्य के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई।&#8221; उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विभाजन को पाटने और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>आर्थिक संकट और महंगाई की मार</strong></p>
<p>मणिपुर में हिंसा और राजमार्गों के अवरुद्ध होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इंडिया गठबंधन ने दावा किया कि राज्य में महंगाई अपने चरम पर है।</p>
<p><strong>आवश्यक वस्तुओं की किल्लत</strong></p>
<p>नेताओं ने कहा कि मणिपुर में आवश्यक वस्तुएं जैसे खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य रोजमर्रा की चीजें मुश्किल से उपलब्ध हैं। यदि कुछ उपलब्ध है भी, तो उसकी कीमतें इतनी अधिक हैं कि आम जनता के लिए उन्हें खरीद पाना असंभव हो गया है।</p>
<p>क्षेत्रीमयुम शांता ने कहा, &#8220;देशभर में महंगाई की मार झेल रही जनता की स्थिति मणिपुर में सबसे अधिक दयनीय है। यह केंद्र सरकार की नीतिगत विफलता का नतीजा है।&#8221;</p>
<p><strong>राजमार्गों का अवरोध और जीवन पर असर</strong></p>
<p>राज्य के राजमार्गों पर हो रहे अवरोधों के कारण जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो गई है। मणिपुर के निवासियों का जीवन इन अवरोधों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार को तत्काल राजमार्गों से अवरोध हटाने के उपाय करने चाहिए ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल हो सके।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री से मांग: राज्य का दौरा करें या सर्वदलीय बैठक बुलाएं</strong></p>
<p>इंडिया गठबंधन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मणिपुर की स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री राज्य का दौरा नहीं कर सकते, तो कम से कम दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाएं।</p>
<p><strong>राजनीतिक संवाद की मांग</strong></p>
<p>नेताओं ने कहा कि मणिपुर के लोगों को प्रधानमंत्री से बड़ी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए और राज्य में शांति बहाल करने के उपाय करने चाहिए।</p>
<p><strong>जंतर-मंतर पर धरना देने से रोकने की निंदा</strong></p>
<p>गठबंधन नेताओं ने कहा कि वे मणिपुर में शांति की मांग को लेकर दिल्ली आए हैं, लेकिन जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति नहीं दी गई। के. मेघचंद्र सिंह ने कहा, &#8220;हमारा संघर्ष मणिपुर में शांति और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए है। अनुमति न मिलने के बावजूद हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>केंद्र सरकार के रवैये की निंदा</strong></p>
<p>गठबंधन ने केंद्र सरकार के रवैये को मणिपुर की जनता के प्रति असंवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि राज्य को भारत के अन्य हिस्सों की तरह समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।</p>
<p>क्षेत्रीमयुम शांता ने कहा, &#8220;मणिपुर की समस्याओं को नजरअंदाज करना न केवल राज्य के लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए खतरनाक है।&#8221; उन्होंने जोर देकर कहा कि मणिपुर के लोग भी भारतीय नागरिक हैं और उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>शांति बहाली की अपील</strong></p>
<p>इंडिया गठबंधन ने मणिपुर की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। नेताओं ने कहा कि मणिपुर के लोगों को शांति, सुरक्षा और समानता का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो जाती।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>आखिर कब है गोवर्धन पूजा, पूजा का क्या है महत्व, अभी गोवर्धन पूजा क्यों है जरूरी?</title>
		<link>https://www.prabhatbharat.com/when-is-govardhan-puja-what-is-the-importance-of-the-puja-why-is-govardhan-puja-necessary-now/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Nov 2024 01:41:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कैसे करें गोवर्धन पूजा]]></category>
		<category><![CDATA[गोवर्धन पूजा कब है]]></category>
		<category><![CDATA[गोवर्धन पूजा का महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[भाई दूज कब है]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 2 नवंबर। गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/when-is-govardhan-puja-what-is-the-importance-of-the-puja-why-is-govardhan-puja-necessary-now/">आखिर कब है गोवर्धन पूजा, पूजा का क्या है महत्व, अभी गोवर्धन पूजा क्यों है जरूरी?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 2 नवंबर। गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है जो दिवाली के अगले दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाया जाता है। इस पर्व के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोकुल वासियों की रक्षा का वर्णन किया गया है। गोवर्धन पूजा का उद्देश्य प्रकृति और मानवता के बीच अटूट संबंध को समझना और धरती मां तथा प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना है। आइए इस पर्व के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हैं।</p>
<p><strong>गोवर्धन पूजा की तिथि और महत्व</strong></p>
<p>गोवर्धन पूजा हर साल दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है। इस बार, 2024 में यह पर्व 2 नवंबर को मनाया जा रहा है। इसे परेवा के नाम से भी जाना जाता है, खासतौर पर उत्तर भारत में, जहां यह श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा हुआ है। वहीं, गुजरात जैसे पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में गोवर्धन पूजा का दिन गुजराती नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3900 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-32.jpeg" alt="" width="503" height="428" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-32.jpeg 503w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-32-300x255.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 503px) 100vw, 503px" /></p>
<p>गोवर्धन पूजा का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं, जो प्रकृति के प्रतीक के रूप में स्थापित है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाने की घटना एक संदेश देती है कि हमें अपनी सुरक्षा और खुशहाली के लिए प्रकृति पर निर्भर रहना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए।</p>
<p><strong>गोवर्धन पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा</strong></p>
<p>हिंदू पुराणों के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र ने अपने अहंकार में आकर गोकुल में भयंकर वर्षा की थी। गोकुल वासी इस अनियंत्रित बारिश से बेहद परेशान हो गए और उनके आश्रय के लिए कोई उपाय नहीं बचा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी गोकुल वासियों को वर्षा से बचाया। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल गोकुल वासियों को बचाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि प्रकृति की शक्ति, हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3901 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl.webp" alt="" width="1024" height="1024" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl.webp 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-300x300.webp 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-150x150.webp 150w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-768x768.webp 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-24x24.webp 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-48x48.webp 48w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/file-FwXfzfIa0qofgI8ehwC7Oocl-96x96.webp 96w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>यह घटना न केवल श्रीकृष्ण की शक्ति का प्रदर्शन करती है, बल्कि यह बताती है कि मानव जीवन का पृथ्वी और प्रकृति के साथ गहरा संबंध है। गोवर्धन पर्वत की घास और वनस्पतियाँ पशुधन के लिए आहार का मुख्य स्रोत थीं, और श्रीकृष्ण ने इस घटना के माध्यम से हमें प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना सिखाया। यह पर्वत सालों से गोकुलवासियों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाता रहा और इसने एक बार फिर श्रीकृष्ण के प्रयासों से सभी को सुरक्षित किया।</p>
<p><strong>अन्नकूट का महत्व और उत्सव की विधि</strong></p>
<p>गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर गोवर्धन पर्वत को समर्पित किए जाते हैं। &#8216;अन्नकूट&#8217; का अर्थ है &#8216;भोजन का पहाड़,&#8217; जिसमें कई तरह की सब्जियाँ, कढ़ी, चावल, पूड़ी, रोटी, खिचड़ी, बाजरे का हलवा और अन्य पकवान बनाकर पर्वत की पूजा की जाती है। इसे छप्पन भोग का रूप दिया जाता है, जिसमें 56 तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3902 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000.jpg" alt="" width="1280" height="1280" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000.jpg 1280w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-300x300.jpg 300w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-1024x1024.jpg 1024w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-150x150.jpg 150w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-768x768.jpg 768w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-24x24.jpg 24w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-48x48.jpg 48w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241102-WA0000-96x96.jpg 96w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>अन्नकूट में लोग सामूहिक रूप से भोजन बनाते हैं और इसे गोवर्धन पर्वत के प्रतीक के रूप में बनाए गए ढेर पर चढ़ाते हैं। फिर इस भोजन को प्रसाद के रूप में सभी में बांटा जाता है। यह आयोजन सामूहिकता और सहयोग का प्रतीक है, जिसमें हर व्यक्ति अपनी भूमिका निभाता है और एक साथ मिलकर भगवान को अर्पण करता है।</p>
<p><strong>गोवर्धन पूजा के दौरान विशेष पूजा अनुष्ठान</strong></p>
<p>इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ-साथ गाय, बछड़ों और गोबर के प्रतीक स्वरूप पर्वत का निर्माण किया जाता है। घरों के आंगन में गोबर से गोवर्धन का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा की जाती है। इस पर्व में भगवान श्रीकृष्ण के साथ साथ गायों और बैलों का भी पूजा का विधान है। गोबर को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र माना गया है, और इसे घर के आंगन में रखना शुभ माना जाता है। लोग गोबर के पर्वत के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और विभिन्न प्रकार के पकवान अर्पित करते हैं।</p>
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<p><strong>गोवर्धन पूजा का सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संदेश</strong></p>
<p>गोवर्धन पूजा का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करना है। इस पर्व के माध्यम से हमें यह संदेश मिलता है कि मानव और प्रकृति का अटूट संबंध है, और हमें इसका संरक्षण करना चाहिए। गोवर्धन पर्वत के प्रति आभार व्यक्त करने के पीछे यह भाव छिपा है कि हमें अपने आस-पास की प्राकृतिक संपदाओं का ध्यान रखना चाहिए और उनका शोषण नहीं करना चाहिए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3904 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-34.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-34.jpeg 739w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-34-300x168.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p>आधुनिक समय में जब प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, तब यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है। यह पर्व हमारी अगली पीढ़ी को भी सिखाता है कि वे प्राकृतिक संसाधनों का सही ढंग से उपयोग करें और उन्हें संभाल कर रखें। गोवर्धन पूजा के माध्यम से हम यह समझते हैं कि प्रकृति का हमारे जीवन में कितना गहरा और महत्वपूर्ण योगदान है।</p>
<p><strong>गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का महत्व</strong></p>
<p>गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। मथुरा और वृंदावन के निकट स्थित गोवर्धन पर्वत के चारों ओर लोग परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3905 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-35.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-35.jpeg 739w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-35-300x168.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<p>गोवर्धन परिक्रमा में लगभग 21 किलोमीटर का रास्ता तय करना होता है और इसे पैदल, कंधों पर देवताओं की पालकी लेकर या कुछ भक्त इसे लेटकर पूरी करते हैं। इस यात्रा में श्रद्धालु भगवान से आशीर्वाद मांगते हैं और गोवर्धन पर्वत की महिमा का गुणगान करते हैं।</p>
<p><strong>गोवर्धन पूजा के प्रसाद का वितरण</strong></p>
<p>गोवर्धन पूजा के बाद सभी लोगों के बीच प्रसाद का वितरण होता है। यह प्रसाद अन्नकूट के रूप में तैयार किया गया भोजन होता है। इस प्रसाद को वितरित करने का उद्देश्य केवल भक्ति ही नहीं, बल्कि समाज में सहयोग और सामूहिकता की भावना को बढ़ावा देना भी है। सभी लोग मिलकर इस भोजन का आनंद लेते हैं और पर्व की खुशी को आपस में बाँटते हैं।</p>
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<p><strong>गोवर्धन पूजा का आधुनिक परिप्रेक्ष्य</strong></p>
<p>आज के समय में, जब पर्यावरणीय संकट और संसाधनों की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है, गोवर्धन पूजा का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए और उसकी देखभाल करनी चाहिए। गोवर्धन पर्वत का प्रतीक, जो हमें सहनशीलता, सेवा, और सहयोग का संदेश देता है, हमें प्रेरित करता है कि हम प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जिएं और अपने आस-पास की चीजों को संजो कर रखें।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-3907 aligncenter" src="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-37.jpeg" alt="" width="555" height="512" srcset="https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-37.jpeg 555w, https://www.prabhatbharat.com/wp-content/uploads/2024/11/images-37-300x277.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 555px) 100vw, 555px" /></p>
<p>गोवर्धन पूजा का उत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक ऐसा समय भी है जब हम अपने समाज और प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को पहचान सकते हैं। इस पर्व का मुख्य संदेश यही है कि हमें प्रकृति का आदर करना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी इस धरती पर सुखी और समृद्ध जीवन जी सकें।</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/when-is-govardhan-puja-what-is-the-importance-of-the-puja-why-is-govardhan-puja-necessary-now/">आखिर कब है गोवर्धन पूजा, पूजा का क्या है महत्व, अभी गोवर्धन पूजा क्यों है जरूरी?</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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		<title>धनतेरस 2024: धनत्रयोदशी कब है? कब है शुभ मुहूर्त और महत्व जानें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Oct 2024 05:26:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Dhanteras 2024]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख त्योहारों में से एक</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/dhanteras-2024-when-is-dhantrayodashi-know-the-auspicious-time-and-significance/">धनतेरस 2024: धनत्रयोदशी कब है? कब है शुभ मुहूर्त और महत्व जानें</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे भारत और दुनिया भर में बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन का महत्व मुख्य रूप से धन और स्वास्थ्य के देवताओं &#8211; भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा से जुड़ा हुआ है। धनतेरस को दिवाली के पाँच दिवसीय उत्सव का पहला दिन माना जाता है, और यह भाई दूज के साथ समाप्त होता है। इस दिन को शुभ और सौभाग्यशाली मानते हुए, लोग नए सामान, विशेष रूप से सोना, चांदी, आभूषण, और बर्तन खरीदते हैं।</p>
<p><strong>धनतेरस 2024: तिथि और समय</strong></p>
<p>धनतेरस या धनत्रयोदशी इस वर्ष 29 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ 29 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से होगा, और यह तिथि 30 अक्टूबर को सुबह 2:45 बजे समाप्त होगी।</p>
<p>इस शुभ दिन पर पूजा का विशेष महत्व होता है, और इसके लिए कुछ निश्चित मुहूर्त तय किए गए हैं। 29 अक्टूबर 2024 को शाम 7:27 बजे से रात 9:16 बजे तक धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त है। प्रदोष काल 6:37 बजे से 9:16 बजे तक रहेगा, जबकि वृषभ काल शाम 7:27 बजे से रात 9:19 बजे तक होगा। इन मुहूर्तों के दौरान की गई पूजा और खरीदी को शुभ और सौभाग्यवर्धक माना जाता है।</p>
<p><strong>धनतेरस का महत्व</strong></p>
<p>धनतेरस का विशेष महत्व इस दिन के साथ जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से है। यह दिन भगवान कुबेर, जो धन के देवता माने जाते हैं, और भगवान धन्वंतरि, जो चिकित्सा के देवता हैं, की पूजा के लिए समर्पित है। धनतेरस का नाम स्वयं ही इस पर्व के उद्देश्य को परिभाषित करता है &#8211; &#8216;धन&#8217; का अर्थ है संपत्ति और &#8216;तेरस&#8217; का अर्थ है तेरहवां दिन। अतः धनतेरस का तात्पर्य धन के लिए समर्पित दिन से है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।</p>
<p>इस दिन लोग अपने घरों में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना के लिए भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। भगवान धन्वंतरि का जन्म भी इसी दिन हुआ था, इसीलिए उन्हें याद करने और पूजा करने से आयु, स्वास्थ्य, और दीर्घ जीवन का आशीर्वाद मिलता है।</p>
<p>धनतेरस के दिन सोना, चांदी, और अन्य कीमती धातुएं खरीदना शुभ माना जाता है। यह परंपरा सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है, और ऐसा विश्वास है कि इससे घर में धन, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। इस दिन लोग बर्तन, गहने और अन्य वस्त्र खरीदते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इससे घर में आर्थिक स्थिरता और सफलता का आगमन होता है।</p>
<p><strong>धनतेरस के अनुष्ठान</strong></p>
<p>धनतेरस के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पूजा की तैयारियां करते हैं। इसके बाद वे अपने घर को पूरी तरह से साफ करते हैं, क्योंकि इसे पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। घर को फूलों, रंगोली, और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके।</p>
<p>इस दिन शुभ मुहूर्त के दौरान सोना, चांदी, बर्तन, और अन्य वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। इसे संपत्ति में वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस पर बाजारों में भीड़ बढ़ जाती है, और लोग अपने प्रियजनों के लिए भी उपहार खरीदते हैं।</p>
<p>धनतेरस के दिन गौधूलि के समय, यम दीपदान का एक विशेष अनुष्ठान किया जाता है। इसमें चार मुख वाला दीया जलाया जाता है और इसे भगवान यमराज को अर्पित किया जाता है। इस अनुष्ठान को &#8216;यम दीपम&#8217; के रूप में जाना जाता है। यह माना जाता है कि इस दीपदान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, और भगवान यम सभी प्रकार की समस्याओं और कष्टों को दूर करते हैं।</p>
<p>यम दीपम के इस अनुष्ठान का महत्व यह है कि इससे घर में शांति और सुरक्षा का वातावरण बना रहता है। मान्यता है कि यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, इस दीपदान से प्रसन्न होते हैं और घर में कष्ट व दुर्भाग्य का नाश होता है।</p>
<p><strong>धनतेरस के माध्यम से समाज में समृद्धि का संदेश</strong></p>
<p>धनतेरस न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन के माध्यम से समाज में समृद्धि और खुशहाली का संदेश फैलता है। लोग अपने परिवारों के साथ यह त्योहार मनाते हैं और संपत्ति में वृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व यह भी सिखाता है कि संपत्ति और सुख दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।</p>
<p>समाज में इस पर्व के दौरान दान-पुण्य का महत्व भी बढ़ता है। लोग गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं और उन्हें धन, वस्त्र, और भोजन प्रदान करते हैं। इससे समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना बढ़ती है।</p>
<p>धनतेरस एक ऐसा पर्व है, जो न केवल घरों में आर्थिक संपन्नता का प्रतीक है, बल्कि समाज में सकारात्मकता और खुशहाली का संचार करता है। लोग इस दिन नए-नए सामान खरीदकर अपने घरों को सजाते हैं और अपने जीवन को खुशहाल बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>धनतेरस एक ऐसा पर्व है जो समाज में आर्थिक और सामाजिक खुशहाली का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि ईश्वर की पूजा के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए। धनतेरस का पर्व संपत्ति और सुख के बीच संतुलन का संदेश देता है, जो हमारे जीवन को खुशहाल और सफल बनाता है।</p>
<p>धनतेरस का दिन समर्पित है भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए, जो हमें यह सिखाता है कि संपत्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का महत्व भी समान रूप से है। यह पर्व हमारे जीवन में सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक बनकर आता है और हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।</p>
<p>आशा है कि इस धनतेरस, लोग अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का अनुभव करेंगे और समाज में भी इस पर्व का महत्व बढ़ेगा।</p>
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		<title>नौ देवियों की कैसे करें पूजा, नवरात्रि पर विशेष</title>
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		<dc:creator><![CDATA[प्रभात भारत]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Oct 2024 05:26:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[How to worship the nine goddesses]]></category>
		<category><![CDATA[special on Navratri]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि पर कैसे करें पूजन]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि स्पेशल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 3 अक्टूबर। नवरात्रि  का पावन त्यौहार आज से शुरू हो गया है, और देश भर में देवी</p>
<p>The post <a href="https://www.prabhatbharat.com/how-to-worship-the-nine-goddesses-special-on-navratri/">नौ देवियों की कैसे करें पूजा, नवरात्रि पर विशेष</a> appeared first on <a href="https://www.prabhatbharat.com">Prabhat Bharat</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 3 अक्टूबर। नवरात्रि  का पावन त्यौहार आज से शुरू हो गया है, और देश भर में देवी दुर्गा के भक्त देवी मंदिरों में उपासना और पूजा कर रहे हैं। आज से नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान श्रद्धालु उपवास रखते हैं, विशेष भोज का आयोजन करते हैं, और देवी की आराधना करते हैं। इस पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो हर दिन एक अलग स्वरूप में प्रकट होती हैं: माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी, और माँ सिद्धिदात्री।</p>
<p>यह त्यौहार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी इसकी विशेष भूमिका है। नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य शक्ति की देवी माँ दुर्गा की उपासना करना है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती हैं। हर दिन देवी दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा होती है, और इस क्रम में भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं।</p>
<p>नवरात्रि साल में चार बार मनाई जाती है, जिनमें से दो मुख्य नवरात्रियाँ होती हैं: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल के महीने में आती है, जबकि शारदीय नवरात्रि सितंबर या अक्टूबर में आती है। इसके अलावा, दो गुप्त नवरात्रियाँ भी होती हैं, जो विशेष रूप से तांत्रिक साधना करने वालों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।</p>
<p>इस पर्व का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। नवरात्रि के दौरान लोग उपवास रखते हैं, जो शुद्धिकरण और आत्म-संयम का प्रतीक होता है। साथ ही, इन दिनों में गरबा और डांडिया जैसे पारंपरिक नृत्यों का आयोजन भी होता है, जो त्यौहार को और भी उल्लासमय बनाते हैं। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों का आह्वान किया जाता है, और विशेष रूप से उनकी शक्ति, करुणा और प्रेम की आराधना की जाती है।</p>
<p>माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का संक्षिप्त विवरण:</p>
<p><strong>1. माँ शैलपुत्री</strong>: नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है, जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और देवी पार्वती का रूप मानी जाती हैं।</p>
<p><strong>2. माँ ब्रह्मचारिणी</strong>: दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो तपस्या की देवी मानी जाती हैं और उनके रूप से भक्तों को संयम और ध्यान का महत्व समझ में आता है।</p>
<p><strong>3. माँ चंद्रघंटा</strong>: तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति का प्रतीक हैं।</p>
<p><strong>4. माँ कुष्मांडा</strong>: चौथे दिन माँ कुष्मांडा की आराधना की जाती है, जो सृष्टि की उत्पत्ति की देवी मानी जाती हैं।</p>
<p><strong>5. माँ स्कंदमाता</strong>: पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान कार्तिकेय की माता मानी जाती हैं।</p>
<p><strong>6. माँ कात्यायनी</strong>: छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है, जो साहस और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।</p>
<p><strong>7. माँ कालरात्रि</strong>: सातवें दिन माँ कालरात्रि की आराधना की जाती है, जो बुरी शक्तियों का नाश करने वाली देवी हैं।</p>
<p><strong>8. माँ महागौरी</strong>: आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है, जो पवित्रता और शांति की देवी हैं।</p>
<p><strong>9. माँ सिद्धिदात्री</strong>: नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो सभी प्रकार की सिद्धियों की देवी मानी जाती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>नवरात्रि के इस शुभ अवसर पर भक्त देवी दुर्गा की आराधना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान और पूजाएँ की जाती हैं, साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। नवरात्रि का यह पर्व हर साल न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष होता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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